मंगलवार, 20 अगस्त 2013

इस तस्वीर खींचने के बाद फोटोग्राफर ने किया था सुसाइड

TOP PICTURES: इस तस्वीर खींचने के बाद फोटोग्राफर ने किया था सुसाइड


एक तस्वीर हजार शब्दों को बयां करती है, लेकिन कुछ तस्वीरें ऐसी भी होती हैं, जो देखने वाले को झकझोर कर रख देती हैं। आज वर्ल्ड फोटोग्राफी डे है। 
 
फोटोग्राफरों द्वारा बीते समय में दुनिया के विभिन्न विषयों पर कुछ ऐसी तस्वीरें ली गई हैं, जिन्होंने वैश्विक स्तर पर भूख, त्रासदियों और ऐतिहासिक पलों को दुनिया के सामने व्यक्त किया है।
 
 
प्रस्तुत है कुछ ऐसी तस्वीरें, जिन्होंने दुनिया के हर शख़्स को चौंका दिया और कई गंभीर पहलुओं पर दुनियाभर के देशों का ध्यान आकर्षित किया।
 
 
तस्वीर में: इस तस्वीर को अवॉर्ड मिलने के बाद भी इसके फोटोग्राफर केविन कार्टर ने आत्महत्या कर ली। अफ्रीका में कुपोषण के शिकार बच्चे के मरने का इंतजार करता एक गिद्ध। इस तस्वीर ने पश्चिमी देशों के कान खड़े कर दिए थे। यह तस्वीर बहस का मुद्दा भी बन गई थी। 
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लॉरेंस बेटलर यह तस्वीर 7 अगस्त 1930 को इंडियाना के मैरियन में खींची थी। ब्लैक युवकों थॉमस शिप और अब्राम स्मिथ को सरेराह फांसी पर चढ़ा दिया था।  दोनों पर अपनी स्थानीय श्वेत लड़की के बलात्कार का आरोप लगाया गया था, जो बाद में झूठ साबित हुआ। तकरीबन दस हजार लोगों की भीड़ ने इन दोनों को सरेआम फांसी पर चढ़ा दिया था। लड़की के अंकल ने किसी तरह तीसरे युवक की जान बचाई थी। इस तस्वीर की हजारों प्रतियां बेची गई थीं।
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बौद्ध भिक्षु का आत्मदाह (1963)
 
इस तस्वीर ने उस दौरान पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया था। यह बौद्ध भिक्षु दक्षिणी वियतनाम में अमेरिकी युद्ध का विरोध कर रहा था। भिक्षु ने खुद को आग लगा ली, लेकिन तकलीफ के इन क्षणों में वह न चिल्लाया और न जरा भी हिला। उसकी चुपचाप मौत हो गई। 
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यह तस्वीर 1999 की है, जब डॉक्टर्स ने स्पाइना बिफिडा का सफल ऑपरेशन किया था। यह एक तरह का डिसऑर्डर होता है, जिसमें बच्चे का स्पाइनल कॉर्ड पूरी तरह से नहीं बना होता है या फिर वह किसी का काम का नहीं होता। बच्चे ने पैदा होते ही डॉक्टर्स की अंगुलियों को थाम लिया। 

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इराक युद्ध (2003)
 
एक इराकी कैदी अपने चार साल के बेटे को दुलारता हुआ। उसका बेटा पिता के ढके हुए चेहरे और हाथों में लगी हथकड़ियों को देख डर जाता है। कैदी सैनिकों से अपील करता है कि उसकी हथकड़ी खोल दी जाए ताकि वह बच्चे को प्यार कर सके। अंतत: सैनिक कैदी के आग्रह को मान लेते हैं। 
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भोपाल गैस कांड (1984)
 
भोपाल गैस कांड दुनिया के सबसे बड़े औद्योगिक आपदाओं में से एक है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में हुई इस त्रासदी में 25 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए थे। यह तस्वीर उस वक्त की है, जब एक बच्चे को दफनाया जा रहा था। गैस के कारण बच्चे की आंखें भी बाहर निकल आई थीं। 
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अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना के हैरी हार्डिंग हाई स्कूल में डोरोथी काउंट सबसे पहली ब्लैक स्टूडेंट थी। स्कूल के पहले ही दिन उसके साथ अभद्र व्यवहार हुआ। मां-बाप ने उसकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पहले ही दिन से उसे स्कूल ने निकाल लिया। यह 1957 की घटना है। तस्वीर में देखा जा सकता है कि कैसे उसके साथी स्टूडेंट उसका मजाक उड़ा रहे हैं।

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जंग के कई पहलू भी होते हैं। कई बार बेशुमार गलतियां हो जाती हैं, जिसका खामियाजा आने वाली कई पीढ़ियों को भुगतना पड़ता है। 1972 में दक्षिण वियतनाम में छिड़े युद्ध के दौरान वियतनामी प्लेन ने गलती से नेपाम बम अपने सैनिकों और नागरिकों पर ही गिरा दिया। इलाके में भगदड़ मची गई। नेपाम बम का इस्तेमाल वियतनाम-अमेरिकी युद्ध के दौरान किया जाता था। 
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कोलंबिया के आर्मिरो में 1985 में फूटे ज्वालामुखी 25 हजार लोगों की मौत हो गई थी। ज्वालामुखी से निकलने वाला मलबा और कीचड़ शहर के निचले इलाकों और आसपास के करीब दस भागों में भर गया था। ऑमयरा सांजेच सिर्फ 13 साल की थी, जब वह इसी तरह की कीचड़ में फंस गई थी। अपना घर बर्बाद होने के बाद वह तीन दिनों तक कीचड़-पानी में फंसी रही। उस दौरान फ्रेंक फॉर्नियर ने उसे कैमरे में कैद किया। इस तस्वीर ने 1985 में वर्ल्ड प्रेस फोटो ऑफ द ईयर का पुरस्कार जीता था। कुछ दिनों बाद ही ऑमयारा की मौत हो गई।
sabhar : bhaskar.com







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