शुक्रवार, 10 अप्रैल 2020

एक तस्वीर ने बदली जिंदगी / 4 साल पहले सड़क पर भीख मांगने वाली रीता आज हैं सेलिब्रिटी, इंस्टाग्राम पर हैं एक लाख से अधिक फॉलोवर

2016 में लुकबान के एक फेस्टिवल में शामिल होने पहुंचे फोटोग्राफर टोफर क्वींटो रीता की खूबसूरती से प्रभावित हुए
टोफर ने तस्वीर खींचकर सोशल मीडिया पर डाली, तस्वीर वायरल हुई जिसने रीता की जिंदगी बदल दी​​​​​​
दैनिक भास्करApr 09, 2020, 10:16 AM IST
मनीला. इंसान की तकदीर बदलने के लिए एक तस्वीर ही काफी है। 13 की रीता गैवियोला इसकी उदाहरण हैं। 4 साल पहले रीता फिलीपींस की सड़कों पर भीख मांगती नजर आती थीं लेकिन आज फैशन मॉडल और ऑनलाइन सेलेब्रिटी हैं। इंस्टाग्राम पर एक लाख से अधिक फॉलोवर हैं। कहानी 2016 में शुरू हुई जब फिलीपींस के लुकबान शहर में फोटोग्राफर टोफर क्वींटो पहुंचे। टोफर रीता की नेचुरल ब्यूटी से प्रभावित हुए और तस्वीर ली। उन्होंने तस्वीर को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, यह वायरल हो गई और रीता की जिंदगी बदल गई। रीता के 5 भाई-बहन हैं। मां घरों में काम करती हैं और पिता कबाड़ इकट्‌ठा करते हैं।

मॉडलिंग के साथ एक्टिंग में भी बनाया करियर
4 साल पहले जब फोटोग्राफर टोफर क्वींटो ने रीता तस्वीर को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया तो उसे कई ब्यूटी क्वींन ने पसंद किया और आर्थिक रूप से मदद भी की। तस्वीर वायरल हुई तो कई फैशन ब्रांड ने रीता को मॉडलिंग असानमेंट ऑफर किए। कुछ समय बाद रीता टीवी शोज में भी नजर आईं। रीता बेडजाओ नाम की अल्पसंख्यक समुदाय हैं इसलिए सोशल मीडिया यूजर ने उनका नाम बेडजाओ गर्ल रखा। रियल्टी शो बिग ब्रदर में काम किया
मिस वर्ल्ड फिलीपींस 2015, मिस इंटरनेशनल फिलीपींस 2014 और मिस अर्थ 2015 ने सोशल मीडिया पर रीता के फिगर और नेचुरल ब्यूटी की तारीफ की। रीता जब चर्चा में आईं तो उन्हें रियल्टी शो बिग ब्रदर ऑफर किया गया। इस शो ने उन्हें नई ऊंचाइयां दीं और परिवार को आर्थिकतौर पर मजबूत बनाया।
अमेरिकी फैन ने गिफ्ट किया नया घर
2018 में रीता ने यूट्यूब पर एक वीडियो अपलोड किया था। जिसमें उन्होंने अपने नए घर की जानकारी दी थी। इस घर को बनवाने में उनके अमेरिकी फैन ग्रेस ने आर्थिक मदद की थी। रीता इन दिनों सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरों से चर्चा में बनी रहती हैं। फिलहाल उनकी प्राथमिकता पढ़ाई पूरी करना है। sahar : bhaskar.com





सोमवार, 6 अप्रैल 2020

कोरोनावायरस / महामारी से लड़ने में रोबोट्स की मदद लेगा भारत, यह संक्रमितों तक खाना-दवा पहुंचाएंगे, टेम्परेचर और सैंपल लेने का काम भी करेंगे

दैनिक भास्कर

Apr 06, 2020, 02:05 PM IST
नई दिल्ली.. कोरोना से लड़ने के लिए चीन समेत दुनियाभर के कई देश रोबोट्स की मदद ले रहे हैं। यह न सिर्फ हॉस्पिटल्स को सैनेटाइज का काम कर रहे हैं बल्कि पीड़ितों तक खाना और दवा भी पहुंचा रहे हैं। भारत में कोरोना के अबतक 4 हजार से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं और 130 लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसे में भारत भी कोरोना को हराने में इन रोबोट्स की मदद लेने की तैयारी कर रहा है, ताकि जल्द से जल्द इस महामारी पर काबू पाया जा सके।
दुनियाभर के हेल्थ वर्कर, शोधकर्ता और सरकारें इस महामारी पर काबू पाने की कोशिश में लगी हैं। कोरोना अबतक 200 से ज्यादा देशों को अपनी चपेट में ले चुका है। अबतक 12 लाख से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं और 69 हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन संक्रमण से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग रखने की सलाह दे चुका है। इंसानों के लिए घरों तक जरूरी सामान पहुंचाना और हाई रिस्क एरिया में पीड़ितों का इलाज करना एक बड़ी चुनौती बन गई है, ऐसे में यह रोबोट्स संक्रमितों का बेहतर तरीके से ट्रीटमेंट करने में काफी मददगार साबित हो रहे हैं।
महामारी को रोकने के लिए चीन के वुहान शहर में होंगशैन स्पोर्ट्स सेंटर में 14 फील्ड हॉस्पिटल स्टॉफ के साथ 14 रोबोट तैनात किए गए। इन रोबोट्स को बीजिंग की रोबोटिक्स कंपनी क्लाउडमाइंड ने बनाया है। यह न सिर्फ साफ-सफाई करते हैं बल्कि पीड़ितों तक दवाईयां पहुंचाते हैं और उनके शरीर का तापमान भी चेक करते हैं।
क्लाउमाइंड कंपनी का रोबोट जो कोरोना से लड़ने में चीन की मदद कर रहा है
क्लाउमाइंड कंपनी का रोबोट जो कोरोना से लड़ने में चीन की मदद कर रहा है
देश के कई हिस्सो में चल रही टेस्टिंग, स्टार्टअप कंपनियां बना रही रोबोट
  • भारत में भी कोरोना से लड़ने के लिए रोबोट्स की मदद लेने की तैयारी चल रही है। जयपुर के सरकारी हॉस्पिटल सवाई मान सिंह में भी ह्यूमनोइड रोबोट को लेकर ट्रायल चल रहा है, जिसमें यह देखा जा रहा है कि यहां एडमिट कोरोना संक्रमितों तक दवाई और खाना पहुंचाने के लिए इन रोबोट्स का इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं। आधिकारियों का कहना है कि इससे हॉस्पिटल स्टाफ को संक्रमित होने से बचाया जा सकेगा।
  • इसके अलावा केरल की स्टार्टअप कंपनी एसिमोव रोबोटिक्स ने तीन पहियों वाला रोबोट तैयार किया है। कंपनी का कहना है कि यह रोबोट आइसोलेशन वार्ड में संक्रमितों के सहायक की तरह काम करेंगे। यह पीड़ितों तक खाना और दवाईयां पहुंचाएंगे जो अबतक नर्स और डॉक्टर कर रहे हैं थे, जिससे उनके संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • हालांकि, इंसानों की जगह रोबोट्स की मदद लेना लोगों को नौकरी के प्रति असुरक्षित महसूस करवा सकता है लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि रोबोट के इस्तेमाल से न सिर्फ मेडिकल स्टॉफ को थोड़ा आराम मिलेगा बल्कि उनके संक्रमित होने के खतरे को भी कम किया जा सकेगा।
  • साइंस रोबोटिक्स जर्नल में पब्लिश हु्ए एक लेख के मुताबिक, रोबोट्स न सिर्फ जगहों को संक्रमण रहित करने का काम कर रहे हैं, बल्कि पब्लिक एरिया में जाकर लोगों का टेम्परेचर चेक करने का भी काम कर रहे हैं। इसके अलावा क्वारैंटाइन व्यक्ति को अकेलापन महसूस ने हो इसके लिए उन्हें सोशल सपोर्ट भी दे रहे हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह टेस्टिंग के लिए लोगों के नाक और गले का सैंपल भी कलेक्ट काम भी कर रहे हैं।

शुक्रवार, 3 अप्रैल 2020

क्या है क्लोरोक्विन जिसमें कोरोना वायरस का इलाज खोजा जा रहा है?

फ्रांस और चीन में शुरूआती अध्ययनों में कोविड-19 के खिलाफ इन दवाओं से काफी उम्मीद बंधी है, जिसकी वजह से अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने इसी हफ्ते इन्हें भगवान की तरफ से एक तोहफा बताया.
क्या एक दशक पुरानी सस्ती दवाओं की जोड़ी नई कोरोना वायरस महामारी का इलाज हो सकती है? दुनिया भर के देशों के शोधकर्ता हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन (ऐछसीक्यू) और क्लोरोक्विन (सीक्यू) तक पहुंच बढ़ा रहे हैं. ये दोनों सम्बंधित कंपाउंड हैं और क्विनीन के सिंथेटिक रूप हैं. क्विनीन सिनकोना पेड़ों से आने वाला एक पदार्थ है जिसका सैकड़ों सालों से मलेरिया के इलाज के लिए इस्तेमाल होता आया है.

ऐछसीक्यू दोनों में से कम जहरीला है और इसका इस्तेमाल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवा के रूप में गठिया और ल्यूपस के इलाज के लिए भी किया जाता है.

फ्रांस और चीन में शुरूआती अध्ययनों में कोविड-19 के खिलाफ इन दवाओं से काफी उम्मीद बंधी है, जिसकी वजह से अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने इसी हफ्ते इन्हें भगवान की तरफ से एक तोहफा बताया. हालांकि विशेषज्ञ तब तक सावधानी बरतने को कह रहे हैं जब तक ट्रायल में इनकी प्रभावकारिता की पुष्टि नहीं हो जाती.

चीन ने सीक्यू का इस्तेमाल फरवरी में एक ट्रायल के दौरान 134 मरीजों पर किया था और अधिकारियों का कहना है कि वो बीमारी की तीव्रता कम करने में प्रभावकारी सिद्ध हुई थी. लेकिन इन नतीजों को अभी छापा नहीं गया है. चीन में सांस के विशेषज्ञ जौंग नानशान ने पिछले सप्ताह एक प्रेस वार्ता में कहा था कि इस ट्रायल के डाटा को व्यापक रूप से सार्वजनिक किया जाएगा. नानशान महामारी की रोकथाम के तरीकों पर काम करने के लिए गठित एक सरकारी टास्क फोर्स का नेतृत्व कर रहे हैं.
फ्रांस में शोधकर्ताओं की एक टीम ने पिछले सप्ताह बताया कि उन्होंने कोविड-19 के 36 मरीजों का अध्ययन किया और पाया कि एक समूह को देने के बाद उस समूह में वायरल लोड भारी मात्रा में गिर गया. इस टीम का नेतृत्व मार्सेल स्थित आईऐछयू-मेडितेरानी इन्फेक्शन के दिदिएर राऊल कर रहे हैं. टीम ने पाया कि परिणाम विशेष रूप से साफ तब थे जब इसका इस्तेमाल एजिथ्रोमाइसिन के साथ किया गया. एजिथ्रोमाइसिन एक आम एंटीबायोटिक है जिसका इस्तेमाल दूसरे दर्जे के बैक्टीरियल संक्रमण का अंत करने के लिए किया जाता है.

यह भी साबित हो चुका है कि ऐछसीक्यू और सीक्यू एसएआरएस-सीओवी-2 वायरस के खिलाफ लैब में कारगर साबित हुए थे और पिछले सप्ताह सेल डिस्कवरी में छपे एक लेख में चीन की एक टीम ने एक संभावित कार्य विधि भी बताई.
Marburg Virus (picture alliance/dpa/CDC)
रिवरसाइड में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में सेल बायोलॉजी के प्रोफेसर करीन ल रोक ने समझाया कि ऐछसीक्यू और सीक्यू दोनों मिलकर वायर की सेल में घुसने की क्षमता पर असर डालने की कोशिश करते हैं और उन्हें बढ़ने से भी रोकते हैं. लेकिन उन्होंने यह भी कहा, "मैं अभी भी बड़े क्लीनिकल ट्रायल के परिणामों के छपने का इन्तजार कर रही हूं जिनमें ऐछसीक्यू की प्रभावकारिता साबित की गई हो."

अमेरिका के राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान के संक्रामक बीमारियों के विभाग के मुखिया एंथोनी फॉसी का कहना है, "उम्मीद का मतलब सबूत नहीं होता है और जो छोटे अध्ययन अभी तक किये गए हैं उनसे सिर्फ "ऐनिकडोटल" सबूत निकला है."

इसके अलावा चीन में 30 मरीजों पर हुए एक छोटे अध्ययन ने दिखाया कि ऐछसीक्यू सामान्य देख-रेख से कुछ भी बेहतर नहीं था.वैज्ञानिकों का कहना है कि पक्के तौर पर जानने का एकमात्र तरीका है रैंडमाइज्ड क्लीनिकल ट्रायल करना.

सीके/एए (एएफपी)
sabhar : dw.de

शुक्रवार, 24 जनवरी 2020

नेशनल बिजनेस रजिस्टर बनेगा, जिले के हर छोटे-बड़े व्यापार की इसमें डिटेल होगी

नई दिल्ली. एनआरसी और एनपीआर को लेकर देशभर में जारी विरोध के बीच सरकार एक और रजिस्टर बनाने जा रही है। यह नेशनल बिजनेस रजिस्टर होगा। इसमें हर जिले के सभी छोटे-बड़े बिजनेस की जानकारी होगी। वर्तमान में जारी सातवीं आर्थिक जनगणना के आधार पर इस रजिस्टर के लिए जानकारी जुटाई जाएगी। इस रजिस्टर में माल, सेवा के उत्पादन/वितरण में लगी सभी बिजनेस इकाइयों और संस्थानों की जिलेवार जानकारी होगी। इसको जीएसटी नेटवर्क, कर्मचारी राज्य बीमा निगम, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन और कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय से मिलने वाले आंकड़ों से नियमित आधार पर अपडेट किया जाएगा। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इस रजिस्टर में जुटाए गए डिजिटल डेटा से नेशनल अकाउंट्स की गुणवत्ता में सुधार आएगा। 


ये जानकारियां रहेंगी रजिस्टर में:


बिजनेस एंटरप्राइजेज का नाम

उसकी लोकेशन

गतिविधियां

स्वामित्व का प्रकार

कर्मचारियों की संख्या

पैन/टैन


sabhar : bhaskar.com

शनिवार, 18 जनवरी 2020

कैसी होंगी भविष्य की दवाएं

रिसर्चर फिलहाल जिस तरह की दवाओं पर काम कर रहे हैं वे आज की गोलियों जैसी बिल्कुल नहीं दिखेंगी. कोशिकाओं में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले एक अणु की इसमें सबसे अहम भूमिका होगी.
Deutschland Wissenschaft Biotechnologie RNA Einfacher Strang (imago/Science Photo Library)

शरीर की कोशिकाओं के प्लाज्मा में पाए जाने वाले "मैसेंजर आरएनए" को रिसर्चर बहुत सारी संभावनाओं से भरा मानते हैं. यह कोशिकाओं को ऐसा मॉलिक्यूलर ब्लूप्रिंट देता है, जिस पर चल कर कोशिकाएं किसी भी तरह का प्रोटीन बना सकती हैं. फिर यही प्रोटीन शरीर के भीतर होने वाली सभी गतिविधियों पर असर डालते हैं. अब इस अणु के इसी गुण का इस्तेमाल कर वैज्ञानिक नए जमाने की दवाएं और टीके बनाने की कोशिश कर रहे हैं. इन दवाओं से फेफड़ों के कैंसर से लेकर प्रोस्टेट कैंसर तक का प्रभावी रूप से इलाज किया जा सकेगा.
इस जादुई अणु की संभावनाओं को समझ चुका वैज्ञानिक समुदाय इसे दवाओं के रूप में विकसित करवाने के लिए पूरे विश्व की ओर देख रहा है. जर्मनी के ट्यूबिंगन में वैज्ञानिक मेसेंजर आरएनए की खूबियों को समझने में लगे हैं और इसे एक ऐसा अणु बता रहे हैं जो शरीर को खुद अपना इलाज करने की क्षमता दे सकता है. यहां काम करने वाली जीवविज्ञानी, मारियोला फोटिन म्लेचेक बताती हैं, "मेसेंजर आरएनए कमाल का अणु है. आप कह सकते हैं कि इसे कुदरत ने बनाया ही इसलिए है कि ये इलाज में मदद दे सके. और ये भी जरूरी नहीं कि ये प्रोटीन इंसान की ही कोशिकाओं से बनें. ये बैक्टीरिया और वायरस से भी बन सकते हैं."
अगर इस संदेशवाहक आरएनए के साथ बैक्टीरिया या वायरस के प्रोटीन को शरीर में भेजा जाए तो शरीर का प्रतिरोधी तंत्र ऐसे प्रोटीन की पहचान करना सीख जाता है और उसके लिए प्रतिक्रिया देता है. नए तरह के इलाज में किसी कृत्रिम चीज को शरीर में नहीं डाला जाएगा, बल्कि प्राकृतिक रूप से संदेशवाहक आरएनए में कुछ ऐसे अंश मिलाए जा रहे हैं, जिससे उसकी गुणवत्ता बढ़ाई जा सके.
रिसर्चर इन बायोमॉलिक्यूल्स की मदद से कैंसर के खिलाफ प्रतिरोधी क्षमता तक हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं. उनका मानना है कि इससे कई तरह के संक्रमण वाली बीमारियों के खिलाफ टीके विकसित किए जा सकते हैं. बायोकेमिस्ट्री के विशेषज्ञ फ्लोरियान फॉन डेय मुएलबे बताते हैं, "आरएनए के इस्तेमाल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यहां हम एक ऐसी तकनीक विकसित कर रहे हैं, जिसमें हर बार एक ही तरीके का इस्तेमाल होगा. चाहे कैंसर हो या फिर कोई और बीमारी, टीका बनाने का तरीका हमेशा एक जैसा ही होगा. फर्क सिर्फ इतना होगा कि हम प्रक्रिया को शुरू करने के लिए मैसेंजर आरएनए को जानकारी अलग अलग तरह की देंगे." 
2014 में इस रिसर्च कॉन्सेप्ट को यूरोपीय संघ ने अपने पहले 'इनोवेशन इंड्यूसमेंट प्राइज' से सम्मानित किया. यह पुरस्कार ऐसी रिसर्चरों को दिया जाता है जो पूरी दुनिया के सामने खड़ी समस्याओं के नए हल खोजने में जुटे हैं. इसकी संभावनाएं अपार हैं लेकिन बड़ा सवाल ये है कि इसे उत्पाद यानि दवाइयों और टीकों में कैसे बदला जाए. इस पर जर्मन फार्मा कंपनी क्योर वैक के सीईओ, इंगमार होएर कहते हैं, "फिलहाल हम प्रोस्टेट कैंसर के मरीजों पर टेस्ट कर रहे हैं. शुरुआती नतीजे अच्छे हैं. अगर शोध के नतीजे ऐसे ही रहे, तो इसका मतलब होगा कि हम इस तकनीक पर आधारित पहली दवा को बाजार में उतारने के अपने लक्ष्य के बहुत करीब हैं."
भविष्य में ऐसी दवाओं और टीकों पर भी काम शुरू हो सकता है, जिन्हें रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज की जरूरत ना हो. खास कर फेफड़ों के कैंसर के इलाज में यह तरीका मील का पत्थर साबित हो सकता है. sabhar DW.de

एक तस्वीर ने बदली जिंदगी / 4 साल पहले सड़क पर भीख मांगने वाली रीता आज हैं सेलिब्रिटी, इंस्टाग्राम पर हैं एक लाख से अधिक फॉलोवर

2016 में लुकबान के एक फेस्टिवल में शामिल होने पहुंचे फोटोग्राफर टोफर क्वींटो रीता की खूबसूरती से प्रभावित हुए टोफर ने तस्वीर खींचकर सोशल म...