मंगलवार, 9 मई 2017

सेक्स और हिंदू धर्म, संभोग से समाधि संभव है?



खजुराहो के मन्दिर, अजंता-एलोरा की गुफाएं और कामशास्त्र तथा कामसूत्र के अलावा हिंदू देवी-देवतातों के किस्से कहानियां इस बात का सबूत है कि हिंदू धर्म सेक्स (sex in hindu religion) का विरोधी नहीं है।..तंत्रशास्त्र में सेक्स पर जोर दिया जाता रहा है।  वात्स्यायन के कामसूत्र का आधार भी प्राचीन कामशास्त्र और तंत्रसूत्र है। शास्त्रों अनुसार संभोग भी मोक्ष प्राप्त करने का एक साधन हो सकता है, लेकिन यह बात सिर्फ उन लोगों पर लागू होती है . जो सच में ही मुमुक्षु हैं।चार पुरुषार्थ (char purusharth) : भारतीय परम्परा में जीवन का ध्येय है पुरुषार्थ। पुरुषार्थ चार प्रकार का माना गया है- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। इन चार को दो भागों में विभक्त किया है, पहला- धर्म और... और अर्थ। दूसरा- काम और मोक्ष।

काम का अर्थ है सांसारिक सुख और मोक्ष का अर्थ है सांसारिक सुख-दुःख और बंधनों से मुक्ति। इन दो पुरुषार्थ काम और मोक्ष के साधन हैं अर्थ और धर्म। अर्थ से काम और ..और धर्म से मोक्ष साधा जाता है।

शिव और पार्वती का मिलन (Shiva and Parvati) : कहते हैं कि भगवान शिव के प्रिय शिष्य नन्दी ने सर्वप्रथम कामशास्त्र की रचना की जिसमें एक हजार अध्यायों का समावेश था। अब...अब सोचिए सिर्फ सेक्स पर एक हजार अध्याय! महर्षि वात्स्यायन ने अपनी विश्व विख्यात रचना ‘कामसूत्र’ में इसी शास्त्र का संक्षिप्त रूप प्रस्तुत किया है। इससे पूर्व श्वेतकेतु और महर्षि ब्राभव्य ने इस शास्त्र...  को समझकर इसको अपने तरीके से लिखा था, लेकिन उनके शास्त्र कहीं खो गए।

हिंदू जीवन दर्शन में काम की भूमिका एवं उसके महत्व को सहज भाव से स्वीकारा गया है। उसे न तो गोपनीय रखा गया और न ही वर्जित करार दिया. इतनी महत्वपूर्ण बात जिससे सृष्टि जन्मती और मर जाती है इससे कैसे बचा जा सकता है, इसीलिए धर्म और अर्थ के बाद काम और मोक्ष का महत्व है।

काम शास्त्र ( kamasutra in hindi ) : काम संस्कृत शब्द है जिसकाकाम शास्त्र ( kamasutra in hindi ) : काम संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है आनंद की इच्छा या आकांक्षा। काम को सीधे तौर पर संभोग या सेक्स कहते हैं। हिंदुओं के प्रेम के देवता कामदेव के नाम से इस शब्द की..से इस शब्द की उत्पत्ति मानी गई है। भारतीय कामशास्त्र काम अर्थात संभोग और प्रेम करने की कला का शास्त्र है।

कहते हैं कि नंदी ने भगवान शंकर और पार्वती के ...पवित्र प्रेम के संवादों को सुनकर कामशास्त्र लिखा। नंदी नाम का बैल भगवान शंकर का वाहन माना जाता है। क्या कोई बैल एक हजार अध्यायों का शास्त्र लिख सकता है? हमारे जो तंत्र के जानकार हैं उनका मानना है कि? हमारे जो तंत्र के जानकार हैं उनका मानना है कि सिद्ध आत्मा के लिए शरीर के आकार का महत्व नहीं रह. जाता।

कामशास्त्र के अधिक विस्तृत होने के कारण आचार्य श्वेतकेतु ने इसको संक्षिप्त रूप में लिखा, लेकिन वह ग्रंथ भी काफी बड़ा था अतः महर्षि ब्राभव्य ने ग्रन्थ का पुनः संक्षिप्तिकरण कर उसे एक सौ पचास.अध्यायों में सीमित एवं व्यवस्थित कर दिया।

कामसूत्र ( kamsutra in hindi ) : महर्षि वात्स्यायन ने कामसूत्र की रचना की। इसे विश्व का प्रथम यौन शिक्षा ग्रंथ माना जाता है।। इसे विश्व का प्रथम यौन शिक्षा ग्रंथ माना जाता है। कामसूत्र के रचनाकार का मानना है कि दाम्पत्य उल्लास एवं संतृप्ति के लिए यौन-क्रीड़ा आवश्यक है। वास्तव में. वास्तव में सेक्स ही दाम्पत्य सुख-शांति की आधारशिला है। काम के सम्मोहन के कारण ही स्त्री-पुरुष विवाह सूत्र में बंधने का तय करते हैं। अतः विवाहित जीवन में काम के आनन्द की निरन्तर अनुभूति होते रहना ही.कामसूत्र का उद्देश्य है। जानकार लोग यह सलाह देते हैं कि विवाह पूर्व कामशास्त्र और कामसूत्र को नि:संकोच पढ़ना चाहिए।

संभोग से समाधि ( sambhog se samadhi ki aur in hindi ) : ऐसा माना जाता है कि जब... संभोग की चरम अवस्था होती है उस वक्त विचार खो जाते हैं। इस अमनी दशा में जो आनंद की अनुभूति होती है वह समाधि के चरम आनंद की एक झलक मात्र है। संभोग के अंतिम क्षण में होशपूर्ण रहने से ही पता चलता है कि.कि ध्यान क्या है। निर्विचार हो जाना ही समाधि की ओर रखा गया पहला कदम है।

अत: संभोग की चर्चा से कतराना या उस पर लिखी गई श्रेष्ठ किताबों को न पढ़ना अर्थात एक विषय में अशिक्षित रह जाना है।  कामशास्त्र या कामसूत्र इसलिए लिखा गया था कि लोगों में सेक्स के प्रति फैली भ्रांतियां दूर हों और वे इस शक्ति का अपने जीवन को सत्यम, शिवम और...और सुंदरम बनाने में अच्छे से उपयोग कर सकें।
-अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'
sabhar :http://hindi.webdunia.com

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