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योग के बाद अब ध्यान में डूबते अमेरिकी

बाहरी दुनिया शोर गुल से भरी है और भीतर मन की उथल पुथल है. ऐसे में क्या ध्यान शांति दे पाएगा? योग के बाद अब ध्यान अमेरिका को अपनी आगोश में ले रहा है. शाम के पांच बजते ही 31 साल की जूलिया लायंस अपना काम काज समेटती हैं. न्यू यॉर्क से सटे शहर मैनहटन में रहने वाली जूलिया सीधे ध्यान केंद्र की ओर बढ़ती हैं. वहां वह आधे घंटे गहरे ध्यान में डूबने की कोशिश करेंगी. जूलिया इनवेस्टमेंट बैंकर हैं. अप्रैल 2016 में अचानक उन्होंने ध्यान शुरू किया. ध्यान केंद्र के सोफे में बैठकर वह कहती हैं, "मैं शांति का एक लम्हा चाहती हूं. इस शहर में आप हमेशा भाग रहे होते हैं और यहां कोई भी ऐसा कोना नहीं जहां शांति हो." योग भले ही दुनिया भर में मशहूर हो चुका हो, लेकिन ध्यान अभी भी चुनिंदा लोगों तक ही सीमित है. पश्चिम में अब तक ध्यान को आध्यात्मिकता की ओर् झुके हुए लोगों से जोड़कर देखा जाता रहा है. लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. अमेरिका के कई अस्पतालों में गंभीर बीमारियों के इलाज में ध्यान की मदद ली जा रही है. स्कूलों में टेलिविजन के जरिये ध्यान सिखाया जा रहा है. स्मार्टफोन तक सिमट चुकी जिंदगी का ही नतीजा है क…

समाधि का पहला अनुभव कैसा होता है?

होगा तो ही जानोगे। कहा जा सके, ऐसा नहीं है। कुछ-कुछ इशारे किये जा सकते हैं। जैसे अंधेरे में अचानक दीया जल जाये, ऐसा होता है। या जैसे बीमार मरता हो और अचानक कोई दवा लग जाये...मरते-मरते कोई दवा लग जाये; और जीवन की लहर, जीवन की पुलक फिर फैल जाये--ऐसा होता है। जैसे कोई मुर्दा जिंदा हो जाये--ऐसा होता है समाधि का पहला अनुभव।

अमृत का अनुभव है। परम संगीत का अनुभव है। पर होगा तो ही होगा। और होगा तो ही तुम समझ पाओगे; मेरे कहने से समझ में न आ सकेगा। प्रेम में जैसा होता है। अब कोई किसी को कैसे समझाये? जिसने प्रेम न किया हो, जिसने प्रेम जाना न हो, उसके सामने तुम कितना लाख सिर पटको, कितनी व्याख्या करो--सुन लेगा सब, मगर फिर भी पूछेगा कि मेरी कुछ समझ में नहीं आया, कुछ और थोड़ी व्याख्या करिए।

ऐसा ही जैसे अंधे को तुम प्रकाश समझाओ, या बहरे को नाद समझाओ--नहीं समझ में आ सकेगा। जिसके नासापुट खराब हो गये हैं, जिसे गंध नहीं आती, उसे गंध का कोई अनुभव कैसे बताओगे? अनुभव कभी भी शब्दों में बांधे नहीं जा सकते, लेकिन कुछ इशारे किये जा सकते हैं।

गीत प्राणों में जगे, पर भावना में बह गए!
एक थी मन की कसक,
जो साधनाओं में ढल…

भविष्य में ऐसी होगी हमारी दुनिया |

dusare ke man ki baat kaise jaane

सेक्स से एलर्जी

शर्म और अज्ञान
भारत में हर साल लाखों शादियां होती हैं और शादी के बाद कई महिलाओं और कुछ पुरुषों की तबियत खराब रहने लगती है. शर्म के चलते और जानकारी के अभाव में ज्यादातर मामलों में गलत इलाज होता है. झाड़ फूंक का भी सहारा लिया जाता है. विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसे ही मामले दुनिया भर में होते हैं, और कई के लिए एलर्जी जिम्मेदार होती है.


क्या है स्पर्म एलर्जी
बॉन मेडिकल कॉलेज के डेर्माटोलॉजिस्ट और एलर्जी विशेषज्ञ जां पियर अला के मुताबिक, "हर बार सेक्स के बाद कुछ महिलाओं की तबियत खराब हो जाती है. उनके जननांगों में सूजन हो जाती है या खुजली होने लगती है." 35 फीसदी मामलों में इसके लिए शुक्राणुओं से होने वाली एलर्जी जिम्मेदार होती है.

एलर्जी के लक्षण
ज्यादातर महिलाओं में स्पर्म एलर्जी के लक्षण और भी गंभीर होते हैं. सेक्स के बाद उनके पूरे शरीर में सिलसिलेवार तरीके से रिएक्शन होने लगता है. बार बार टॉयलेट जाना, कमजोरी महसूस करना और बदन में खुजली जैसी समस्याएं सामने आती हैं. ज्यादा एलर्जिक रिक्शन होने पर तो सांस लेने में मुश्किल भी होने लगती है.

प्राणघातक लक्षण
एलर्जी विशेषज्ञ जां पियर अला के …

सौंफ में हैं इतने सारे गुण, यकीनन होंगे आप उनसे अनजान; जानें!

सौंफ : भारत में सदियों से किसी भी रोग को ठीक करने के लिए आयुर्वेद का सहारा लिया जाता रहा है। प्राचीनकाल के वैद्य बड़ी से बड़ी बीमारी को आयुर्वेदिक तरीके से जड़ी-बूटियों से ठीक कर देते थे। आज भी आयुर्वेदिक तरीकों का प्रयोग भारत में किया जाता है। अब तो भारतीय आयुर्वेद पद्धति को विदेशों में भी अपनाया जाने लगा है।हमारे घर में कुछ ऐसी आयुर्वेदिक चीजें उपलब्ध होती हैं, जिनके गुण के बारे में कम ही लोग जानते हैं। इनमें से एक बहुत गुणकारी वस्तु है सौंफ। अक्सर जब आप कहीं खाना खाने बाहर जाते हैं तो वहां आपको सौंफ देखने को मिलती ही है। जब आप खाना खाकर बिल चुकाने जाते हैं तो वहीं पास में सौंफ और मिश्री रखी होती है

पाचन क्रिया ठीक करने में सहायक है सौंफ: दरअसल सौंफ बहुत पहले से ही पाचन क्रिया को ठीक करने में इस्तेमाल की जाती रही है। ठीक इसी तरह सौंफ के अन्य बहुत से फायदें हैं, जिनसे ज्यादातर लोग अनजान हैं। आज हम आपको सौंफ के कुछ ऐसे ही फायदों के बारे में रूबरू करवाने वाले हैं। इसलिए इस्तेमाल की जाती है सौंफ: *- खाना खाने के बाद हर दिन आधा चम्मच सौंफ खाने से पेट सम्बन्धी सभी बीमारियां दूर हो जाती है…

ऐसा भी होता है! इस महिला को याद है जन्म के बाद की हर बात

नई दिल्ली : हमें अपने जीवन और आसपास हुई कुछ अहम घटनाओं के अलावा शायद ही कोई बीती बात याद रहती है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड की रबेका शैरॉक (27) के पास अद्भुत स्मरणशक्ति है. उनके मुताबिक, 12 दिन की उम्र से लेकर अब तक की हर दिन की बात याद है. यहां तक कि उन्होंने किस दिन क्या पहना था और उस दिन का मौसम कैसा था तक बता देती हैं.रबेका बताती हैं कि उनके जन्म के 12वें दिन उनके माता-पिता ने उन्हें ड्राइविंग सीट पर रखा था और उनकी तस्वीर ली थी. रबेका को अपना पहला जन्मदिन भी याद है. उन्होंने बताया कि वह जन्मदिन पर रोने लगी थीं, क्योंकि उनकी ड्रेस उन्हें असहज लग रही थी.डेली मेल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रबेका के पास हाइली सुपीरियर ऑटोबायॉग्रफिकल मेमोरी (एचएसएएम) है. ऐसी स्मरणशक्ति वाले लोगों के पास असाधारण यादें संजोकर रखने की क्षमता होती है. बताया जा रहा है कि दुनियाभर में सिर्फ 80 लोगों के पास ऐसी स्मरणशक्ति है. रबेका को हैरी पॉटर बुक का एक-एक शब्द याद है. उनकी अपने जीवन से जुड़ी सबसे पहली बात जो याद है वह उनका जन्म है. उन्हें याद कि उनके पहले जन्मदिन पर उन्हें क्या गिफ्ट मिला था. उन्होंने …

आध्यात्मिक काम विज्ञान

यद्यपि भारतीय धर्मग्रन्थों में ब्रह्मचर्य पालन की बड़ी महिमा बरवान की गयी है। परंतु आध्यात्म द्वारा नियन्त्रित जीवन में कामेच्छा की उचित भूमिका को अस्वीकार नहीं किया गया है। उसकी उचित मांग स्वीकार की गयी है किंतु उसे आवश्यकता से अधिक महत्व देने से इंकार किया गया है। जब व्यक्ति आध्यात्मिक परिपक्वता प्राप्त कर लेता है तब यौन-आकर्षण स्व्यं ही विलीन हो जाता है; उसका निग्रह करने के लिए मनुष्य को प्रयत्न नहीं करना पड़ता, वह पके फल की भाँति झड जाता है। इन विषयों में मनुष्य को अब और रूचि नहीं रह जाती। समस्या केवल तभी होती है जब मनुष्य चाहे सकारात्मक चाहे नकारात्मक रूप में कामेच्छा में तल्लीन या उससे ग्रस्त होता है।) दोनों ही परिस्थितियों में मनुष्य यौन चिंतन करता है व ऊर्जा का उपव्यय करता रहता है।      इस संदर्भ में श्री अरविन्द कहते हैं कि जब हम यौन ऊर्जा के सरंक्षण की या ब्रह्मचर्य की बात करते हैं तब प्रश्न यह नहीं होता कि कामवृत्ति बुरी है या अच्छी, पाप है या पुण्य। यह तो प्रकृति की एक देन है। प्रत्येक मानव शरीर में कुछ द्रव्य होते हैं, ज्यों-ज्यों शरीर का विकास होता है वे संचित होते जाते ह…

सेक्स और हिंदू धर्म, संभोग से समाधि संभव है?

खजुराहो के मन्दिर, अजंता-एलोरा की गुफाएं और कामशास्त्र तथा कामसूत्र के अलावा हिंदू देवी-देवतातों के किस्से कहानियां इस बात का सबूत है कि हिंदू धर्म सेक्स (sex in hindu religion) का विरोधी नहीं है।..तंत्रशास्त्र में सेक्स पर जोर दिया जाता रहा है।  वात्स्यायन के कामसूत्र का आधार भी प्राचीन कामशास्त्र और तंत्रसूत्र है। शास्त्रों अनुसार संभोग भी मोक्ष प्राप्त करने का एक साधन हो सकता है, लेकिन यह बात सिर्फ उन लोगों पर लागू होती है . जो सच में ही मुमुक्षु हैं।चार पुरुषार्थ (char purusharth) : भारतीय परम्परा में जीवन का ध्येय है पुरुषार्थ। पुरुषार्थ चार प्रकार का माना गया है- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। इन चार को दो भागों में विभक्त किया है, पहला- धर्म और... और अर्थ। दूसरा- काम और मोक्ष।

काम का अर्थ है सांसारिक सुख और मोक्ष का अर्थ है सांसारिक सुख-दुःख और बंधनों से मुक्ति। इन दो पुरुषार्थ काम और मोक्ष के साधन हैं अर्थ और धर्म। अर्थ से काम और ..और धर्म से मोक्ष साधा जाता है।

शिव और पार्वती का मिलन (Shiva and Parvati) : कहते हैं कि भगवान शिव के प्रिय शिष्य नन्दी ने सर्वप्रथम कामशास्त्र की रचना की …

यह हैं खुशहाल शादीशुदा जिंदगी के 6 मंत्र

कई बार सबकुछ होते हुए भी शादीशुदा जिंदगी टूटने के कगार पर पहुंच जाती है। पति-पत्नी चाहते तो यही हैं कि वे साथ रहें लेकिन एक बार जब चीजें बिगड़ना शुरू होती हैं तो बिगड़ती ही चली जाती हैं।

असलियत यह है कि शादीशुदा जिंदगी को संभालकर रखना थोड़ा मुश्किल जरूर है लेकिन अगर समझदारी से काम लिया जाए तो हर समस्या को दूर किया जा सकता है। यह वो 6 मंत्र हैं, जिनकी मदद से आप अपने वैवाहिक जीवन को टूटने से बचा सकते हैं।

- माना कि वह आपके पति हैं लेकिन हर समय उन्हें काबू करने की कोशिश न करें। उन्हें उनका स्पेस जरूर दें। इससे आपका रिश्ता मजबूत होगा।

- अगर आपको लगता है कि प्यार ही सबकुछ है तो आपको बता दें कि आप गलत हैं। प्यार का मतलब एक-दूसरे को इज्जत देना है। अगर आप एक-दूसरे को इज्जत देते हैं और सार्वजनिक जगहों पर भी एक-दूसरे की इज्जत का ख्याल रखते हैं तो इससे अच्छा कुछ नहीं। ये बातें आपके रिश्ते को मजबूत करेंगी।हर रिश्ते में कुछ समझौते करने पड़ते हैं। अगर आपको भी इस रिश्ते को बचाने के लिए कुछ समझौते करने पड़ें तो इसमें कोई बुराई नहीं है। आमतौर पर समझौता करने को कमजोरी से जोड़कर देखा जाता है लेकिन ऐसा नहीं…

वापसी कर रहा है Nokia 3310, इसी महीने होगा रीलॉन्च


नोकिया अपने बेहद पॉप्युलर रहे मोबाइल फोन Nokia 3310 को रीलॉन्च करने जा रहा है। अपनी मजबूती और लंबी बैटरी लाइफ के लिए पहचाने जाने वाले इस फोन ने मोबाइल फोन्स के नए युग की शुरुआत की थी। इससे पहले के मोबाइल फोन साइज में बहुत बड़े होते थे। आज भी लोग सबसे 'भरोसेमंद' फोन के तौर पर इसकी मिसाल देते हैं।

Nokia 3310 को आज से 17 साल पहले 2000 में लॉन्च किया गया था। कंपनी इसे इसलिए लॉन्च कर रही है ताकि लोग इसे अपने सेकंडरी फोन के तौर पर इस्तेमाल कर सकें। यानी जिन लोगों के पास पहले ही स्मार्टफोन है, वे इसे भरोसेमंद बैटरी वाले डिवाइस के तौर पर इस्तेमाल कर सकें।


गैजट्स के बारे में जानकारियां लीक करने वाले इवान ब्लास का कहना है कि 3310 के नए वर्जन को 59 यूरो यानी करीब 4000 रुपये में लॉन्च किया जाएगा। इवान का कहना है कि इसी महीने स्पेन के बार्सिलोना में होने जा रहे टेक इवेंट मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस (MWC2017) में इससे पर्दा उठाया जाएगा। sabhar :http://navbharattimes.indiatimes.com

खुशखबरी : अब पेड़ पर फलेंगी बिजलियां!

वाशिंगटन : पैसे भले पेड़ पर न फलें, लेकिन जल्द ही पेड़ पर बिजली फलेगी क्योंकि अब वैज्ञानिकों ने एकबायोमेट्रिक पेड़ विकसित किया है जिसमें उसके कृत्रिम पत्तियों से हवा गुजरने से बिजली पैदा होगी। अमेरिका की आइओवा स्टेट युनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने यह तकनीक विकसित की है। इससे लोग बिना किसी बड़े पवन टर्बाइन के बिजली के अपने घरेलू उपकरण चला सकेंगे। वैज्ञानिकों ने जो उपकरण बनाया है जो किसी प्रोपेलर या कॉटनवुड के पेड़ की शाखाओं और पत्तियों से मिलता जुलता है और जब तेज हवा में उसकी कृत्रिम पत्तियां उड़ती हैं तो बिजली पैदा होती है। इस उपकरण के डिजाइन का नेतृत्व करने वाले माइक मैकक्लोस्की ने कहा कि यह पवन टरबाइन की जगह नहीं लेगा, लेकिन इससे तेज हवा को बिजली में बदलने वाली छोटी मशीनों का एक बाजार बन सकता है। sabhar :http://zeenews.india.com

कुछ ऐसा होगा पृथ्वी का सर्वाधिक शक्तिशाली कंप्यूटर

लंदन : वैज्ञानिकों ने उन्नत श्रेणी के कम्प्यूटर ‘क्वांटम कम्प्यूर्ट्स के निर्माण का पहला ब्लूप्रिंट जारी किया है। इसे पृथ्वी का सर्वाधिक शक्तिशाली कम्प्यूटर माना जा रहा है जो उद्योग, विज्ञान, चिकित्सा और वाणिज्य के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। लंदन की यूनिवर्सिटी ऑफ ससेक्स और गूगल के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किए गए इस खाके में एक एैसी शक्तिशाली मशीन के निर्माण के लिए वास्तविक औद्योगिक ब्लूप्रिंट दिखाया गया है जो कि अब तक निर्मित किसी भी कम्प्यूटर के मुकाबले अनेकों समस्याओं को कम समय में अधिक सटीकता से हल कर सकता है। क्वांटम कम्प्यूर्ट्स, अंतरिक्ष के अभी तक अनछुये पहलुओं तक पहुंचने और उनके रहस्यों से पर्दा उठाने में भी सहायता कर सकते हैं। इसके साथ ही यह उन समस्याओं को आसानी से हल कर सकेगा जिन्हें हल करने में साधारण कम्प्यूटर को लाखों वर्ष लग सकते हैं। इस प्रारूप में एक नई तकनीक को शमिल किया है जिसमें वास्तविक क्वांटम बिट्स (छोटे टुकडे) को प्रत्येक कम्प्यूटिंग माड्यूल के बीच संचारित किया जाता है। इससे पहले वैज्ञानिकों का प्रस्ताव था कि प्रत्येक कम्प्यूटर माड्यूल को फाइबर ऑप…