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August 9, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

एलियंस ने परमाणु युद्ध से हमें बचाया

वाशिंगटन। अमेरिका के एक पूर्व अंतरिक्ष यात्री ने दावा किया है कि अमेरिका और रूस के बीच परमाणु युद्ध रोकने और शांति स्थापित करने के लिए एलियन पृथ्वी पर आए थे। डॉ. एडगर मिचेल नामक यह सज्जन चांद पर पहुंचने वाले छठे व्यक्ति थे। वह 1971 में "अपोलो 14" मिशन से वहां गए थे। 84 वर्षीय मिचेल के अनुसार 16 जुलाई 1945 को न्यू मेक्सिको राज्य के वाइट सैंड्स में परमाणु परीक्षण के दौरान वहां यूएफओ (अज्ञात अंतरिक्ष यान) दिखाई दी थीं। उनके अनुसार एलियन हमारे परमाणु परीक्षणों के स्थानों में गहरी रुचि रखते थे और उन्होंने उस समय दोनों महाशक्तियों- रूस और अमेरिका के बीच परमाणु युद्ध के खतरे को समाप्त किया था। वह कहते हैं कि उस समय वहां मौजूद अमेरिकी सेना के कर्मचारियों के दर्ज बयान उनके दावों को सच्चा साबित करते हैं। इससे पहले भी मिचेल एलियंस से जुड़े कई रोचक बयान दे चुके हैं। उनके अनुसार हमारी तकनीक उनके जैसी विकसित नहीं है, लेकिन यदि वह उग्र होते तो पृथ्वी पर मानवजाति का नामोनिशान ही नहीं बचता। इसके अलावा, वह पहले यह भी अंदाजा लगा चुके हैं कि शायद एलियन देखने में बहुत-कुछ फिल्मी ईटी की तरह दिखते है…

उड़ने वाला रोबोट

जर्मनी में वैज्ञानिकों ने ऐसा मशीनी परिंदा बनाया है जो हूबहू पक्षियों की तरह उड़ान भरता है. बहुत ही हल्के इस रोबोट को स्मार्टबर्ड का नाम दिया गया है.

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हल्दी और एंटीबायोटिक्स का मिश्रण कई गुना उपयोगी

भारत के हैदराबाद विश्वविद्यालय और रूस के नोवोसिबिर्स्क राजकीय विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक एक अंतर्राष्ट्रीय परियोजना के अंतर्गत ऐसी दवाइयां तैयार करने के काम में जुटे हुए हैं जिनके लिए हल्दी सहित अन्य पारंपरिक भारतीय मसालों का उपयोग किया जा सकता है। नोवोसिबिर्स्क राजकीय विश्वविद्यालय द्वारा जारी की गई एक सूचना के अनुसार, "प्रोफेसर अश्विनी नानिया के नेतृत्व में हैदराबाद विश्वविद्यालय के भारतीय वैज्ञानिक इस निष्कर्ष पर पहुँचे हैं कि अगर हल्दी और एंटीबायोटिक्स को मिलाकर क्रिस्टल बनाए जाएं और आगे इन क्रिस्टलों को पीसकर दवाइयां बनाई जाएं तो ऐसी दवाइयों का असर कई गुना बढ़ जाएगा।" इस परियोजना में शामिल रूसी वैज्ञानिकों का नेतृत्व नोवोसिबिर्स्क राजकीय विश्वविद्यालय के ठोस रसायनिक विज्ञान विभाग की प्रमुख और इस विश्वविद्यालय की एक वरिष्ठ शोधकर्ता, प्रोफेसर ऐलेना बोल्दरेवा कर रही हैं। sabhar http://hindi.sputniknews.com/
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टेलीफोन और मोबाइल के बिना कहीं भी किसी से बात करने की कला

क्या आप अपनी बातों को बिना मोबाईल, टेलीफोन या दूसरे भौतिक क्रियाओं और साधनों के दूसरों तक पहुंचा सकते हैं। एक बारगी आप कहेंगे ऐसा संभव नहीं है, लेकिन यह संभव है। आप बिना किसी साधन के दूसरों तक अपनी बात पहुंचा सकते हैं।

यह संभव है दूरानुभूति से, एफडब्ल्यूएच मायर्स ने इस इस बात का उल्लेख किया है इसे टेलीपैथी भी कहते हैं। इसमें ज्ञानवाहन के ज्ञात माध्यमों से स्वतंत्र एक मस्तिष्क से दूसरे मस्तिष्क में किसी प्रकार का भाव या विचार पहुंचता है। आधुनिक मनोवैज्ञानिक दूसरे व्यक्ति की मानसिक क्रियाओं के बारे में अतींद्रिय ज्ञान को ही दूरानुभूति की संज्ञा देते हैं।

परामनोविज्ञान में एक और बातों का प्रयोग होता है। वह है स्पष्ट दृष्टि। इसका प्रयोग देखने वाले से दूर या परोक्ष में घटित होने वाली घटनाओं या दृश्यों को देखने की शक्ति के लिए किया जाता है, जब देखने वाला और दृश्य के बीच कोई भौतिक या ऐंद्रिक संबंध नहीं स्थापित हो पाता। वस्तुओं या वस्तुनिष्ठ घटनाओं की अतींद्रिय अनुभूति होती है यह प्रत्यक्ष टेलीपैथी कहलाती है।

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टेलीपैथी के जरिए किसी को किसी व्यक्ति को कोई काम करने …

टाइप करने का झंझट खत्म, जो बोलोगे वो फटाफट टाइप कर देगा ये एप

नई दिल्ली। माइक्रोसॉफ्ट ने स्मार्टफोन यूजर्स के लिए नया और शानदार एप माइक्रोसॉफ्ट ट्रांसलेटर लॉन्च किया है। फिलहाल इस एप को एंड्रॉयड और आईओएस दोनों के लिए उपलब्ध कराया गया है। यह एप स्मार्टफोन के साथ-साथ स्मार्टवॉच (एप्पल वॉच) पर भी काम करता है। इसके अलावा यह भाषा ट्रांसलेशन का काम भी करता है। इस मामले में यह एप गूगल ट्रांसलेट एप पर भारी पड़ता नजर आ रहा है। 50 भाषाओं को करता है सपोर्ट माइक्रोसॉफ्ट का यह एप 50 तरह की भाषाओं को सपोर्ट करता है। इसके अलावा इस एप में वॉयस को सुनकर टेक्स्ट टाइप करने का फीचर भी दिया गया है। यानी यूजर्स जो बालेंगे वह यह एप चंद सेकेंड में ही टाइप कर देगा। गूगल ट्रांसलेट पर भारी भाषा ट्रांसलेशन के मामले ये माइक्रोसॉफ्ट ट्रांसलेटर एप गूगल ट्रांसलेट पर भारी पड़ सकता है। क्योंकि गूगल ट्रांसलेट सिर्फ 27 भाषाओं को सपोर्ट करता है, जबकि यह एप 50 भाषाओं को सपोर्ट करता है। पॉपुलर हुआ माइक्रोसॉफ्ट ट्रांसलेटर को अब तक हजारों लोग लाइक कर चुके हैं। यूजर्स द्वारा इएप को गूगल प्ले स्टोर पर 4.5 रेटिंग दी गई है। इस एप का कुल साइज 5.3 एमबी है तथा इसका मौजूदा वर्जन 0.9.5.009 है। इस…

नासा की खींची हुई फोटो में दिखा एलियन का अंतरिक्ष यान

वाशिंगटन। एलियन वास्तव में है या नहीं अभी तक यह रहस्य ही है, लेकिन नासा के एक अंतरिक्ष यान द्वारा साल 1960 में ली गई एक तस्वीर में एलियन का यान दिखने की बात कही जा रही है। नासा के इस अंतरिक्ष या न द्वारा ली गई�तस्वीर�में एक अस्पष्ट वस्तु दिखाई गई है जिसे एक वैज्ञानिक ने एलियन का यान होना बताया है। प्रोजेक्ट मर्करी के दौरान भेजी गई थी तस्वीर- यह तस्वीर प्रोजेक्ट मर्करी के दौरान भेजी गई थी। स्कॉट सी-वेरिंग का कहना है कि नासा के अंतरिक्ष यान द्वारा 1960 में ली गई इस तस्वीर में दिख रही एक अस्पष्ट वस्तु एलियन का अंतरिक्षयान हो सकती है। वेरिंग का कहना है कि शुरू आत से ही अंतरिक्ष एलियन के प्रेक्षक मनुष्यों के मिशन पूरी निगाह रख रहे हैं। अंतरिक्ष यान मर्करी-रेडस्टोन वन ए द्वारा 19 दिसंबर, 1960 में ली गई इस तस्वीर में तस्वीर में उन्होंने यह विसंगति देखी थी। ब्लॉग के जरिए दी जानकारी- वेरिंग ने अपने ब्लॉग पर लिखा है कि मर्करी मिशन की कुछ तस्वीरों में उन्होंने एक तस्तरीनुमा वस्तु पाई है। यह मिशन मर्करी था जो दिसंबर 1960 में शुरू हुआ था। उनका कहना है कि हो सकता है मानव इतिहास के इस ऎतिहासिक पल को …

बाइक जो चलती है पानी से, 1 लीटर में 500 किमी.

पेट्रोल और डीजल के लगातार बढ़ते दामों से हर व्यक्ति परेशान है। काश! कुछ ऐसा हो कि पानी से ही सब वाहन चलने लगे। तो खुश हो जाइये क्योंकि ऐसा हो चुका है, ब्राजील के साओ पोलो में रहने वाले एक व्यक्ति ने यह कारनामा कर दिखाया है। साओ पोलो में रहने वाले रिकार्डो एजवेडोइस नाम के व्यक्ति ने एक ऐसी बाइक का निर्माण किया है जो एक लीटर पानी में 500 किमी. तक की दूरी तय कर सकती है। इसका एक वीडियो भी यूट्यूब पर अपलोड किया गया है। रिकार्डो ने अपनी इस बाइक का नाम टी पॉवर एच2ओ रखा है। इस बाइक में एक बैटरी लगी है। पानी डालने पर इस बैटरी के जरिए हाइड्रोजन बनती है। इसी हाइड्रोजन से बाइक चलती है। बाइक के इंजन में इस हाइड्रोजन को ईधन के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। रिकार्डो अपनी बाइक की टेस्टिंग के लिए तैयार हैं। -sabhar :http://www.jagran.com/

फ़ोन हाथ में लेते ही हैक करने वाला शख़्स

रोज इवेलेथबीबीसी फ़्यूचर 20 जून 2015 यदि आप सेथ व्हाल के हाथ में अपना मोबाइल दें, तो वो क्षण भर में अपकी तस्वीरें, फ़ोटो, पासवर्ड चोरी कर लेते हैं. लेकिन ये कैसे संभव है? सेथ व्हाल उन लोगों में से हैं जिनके शरीर में चिप लगा हुआ. व्हाल अमरीकी नेवी के पूर्व अधिकारी हैं. लेकिन अब वे एपीए वायरलेस कंपनी के साथ इंजीनियर हैं और उनका काम बायो-हैंकिंग है. व्हाल की बात आगे बढ़ाने से पहले एक सवाल. क्या आपको पिछले दिनों आई फ़िल्म पीके याद है? इसमें एलियन का रोल कर रहे आमिर किसी लड़की का हाथ पकड़कर उसके मन की सारी बातें, भाषा-बोली, दिमाग में मौजूद हर बात जान लेते हैं ! ये भी कुछ ऐसा ही है. व्हाल अब साइबर सिक्योरिटी पर काम कर रहे हैं. वो अपने साथी रॉड सोटो के साथ दिखाते हैं कि केवल टच करते ही वे फ़ोन को हैक कर सकते हैं. ये दोनों अपने चिप का इस्तेमाल किसी आपराधिक काम के लिए नहीं, बल्कि जागरूकता फैलाने के लिए कर रहे हैं. उनका मक़सद ये बताया है कि किस तरह से आने वाले दिनों में हमारे फोन और कंप्यूटर की जानकारी आसानी से हैक होगी और हमें इसका एहसास तक नहीं होगा. हैकमियामी में प्रदर्शन इसकी शुरुआत हुई जब …

दिमाग़ का बैक-अप और अमर होने की चाह..

साइमन पार्किनस्वतंत्र पत्रकार 5 फरवरी 2015 इंसान सदियों से गुफ़ाओं की दीवारों पर चित्र उकेरकर अपनी यादों को विस्मृत होने से बचाने की कोशिश कर रहा है. पिछले काफ़ी समय से मौखिक इतिहास, डायरी, पत्र, आत्मकथा, फ़ोटोग्राफ़ी, फ़िल्म और कविता इस कोशिश में इंसान के हथियार रहे हैं. आज हम अपनी यादें बचाए रखने के लिए इंटरनेट के पेचीदा सर्वर पर - फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम, जीमेल चैट, यू-ट्यूब पर भी भरोसा कर रहे हैं. ये इंसान की अमर बने रहने की चाह ही हो सकती है कि इटर्नी डॉट मी नाम की वेबसाइट तो मौत के बाद लोगों की यादों को सहेज कर ऑनलाइन रखने की पेशकश करती है. लेकिन आपको किस तरह से याद किया जाना चाहिए? अब तो ये भी संभव है कि हमारी आने वाली पुश्तों के लिए हमारे दिमाग को संरक्षित करके रखा जा सके. मतलब ये कि यदि आपके ब्रेन को हार्ड ड्राइव पर सेव करना संभव हो, तो क्या आप ऐसा करना चाहेंगे? दादी ने सहेजना बंद किया अपनी मृत्यु से कुछ महीने पहले, मेरी दादी ने एक फ़ैसला किया. उन्होंने 1950 के दशक से परिवार के सदस्यों के फ़ोटो, दादा को लिखे प्रेम पत्र और कई और चीज़ों को संभालकर रखा था. पर मृत्यु से कुछ महीने पह…

आइंस्टीन की गुरुत्वीय तरंगों का पता लगाने की नई तकनीक

न्यूयॉर्क। वैज्ञानिकों ने ऐसी नई तकनीक ईजाद की है जिसके जरिए गुरुत्वीय तरंगों का पता लगाना संभव होगा। गुरुत्वीय तरंगें ऐसी अदृश्य तरंगें हैं, जिनका जिक्र अल्बर्ट आइंस्टीन ने अपने सापेक्षता के सिद्धांत में किया था। न्यूयॉर्क में अमेरिकन म्यूजियम ऑफ नैचुरल हिस्ट्री के भौतिकविद् बैरी मैक करनन ने कहा, ‘गुरुत्वीय तरंगें त्वरित द्रव्यों से निकलती हैं।’ इन गुरुत्वीय तरंगों को सीधे तौर पर पहचानने का कोई माध्यम नहीं है। मैक करनन और उनके सहयोगियों का कहना है कि गुरुत्वीय तरंगों का पदार्थ पर उससे ज्यादा प्रभाव पड़ता है, जितना पहले माना जाता था। शोधकर्ताओं का कहना है कि ऐसे तारे जो अपने करीब से गुजरने वाली गुरुत्वीय तरंगों के समान आवृत्ति पर कंपन करते हैं वे इन हलचलों से बड़ी मात्रा में ऊर्जा ग्रहण कर सकते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि चुनौती इस बात का पता लगाने की है कि चिह्नित किए गए तारे की चमक गुरुत्वीय तरंगों के कारण है या इसका कोई अन्य कारण है। क्या है उम्मीद उन्होंने कहा, ‘जब ब्लैक होल्स करीब आएंगे तो उनके द्वारा उत्पन्न होने वाली गुरुत्वीय तरंगों की आवृत्ति बढ़ेगी। ऐसे में हम छोटे तारों के …