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शनिवार, 8 अगस्त 2015

मानव - मस्तिष्क

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संकल्प शक्ति- सुपर चेतन मन -विज्ञान

मानव - मस्तिष्क इतनी विलक्षणताओं का केंद्र है जिसके आगे वर्तमान में अविष्कृत हुए समस्त मानवकृत उपकरण एवं यंत्रों का एकत्रीकरण भी हल्का पड़ेगा. अभी तक मस्तिष्क के 1/10 भाग की ही जानकारी मिल सकी है, 9 /10 भाग अभी तक शरीर शास्त्रियों और वैज्ञानिकों के लिए चुनौती बना हुआ है. मस्तिष्क के इस 9/10 भाग में असीमित क्षमताएं भरी पड़ी हैं. मस्तिष्क में अगणित चुम्बकीय केंद्र हैं जो विविध-विधि रिसीवरों और ट्रांसफ़ॉर्मरों का कार्य सम्पादित करती हैं. मानव मस्तिष्क में असीमित रहस्यात्मक असीम शक्ति हैं जिसके विषय में हमें हलकी-फुलकी सतहीय सत्तर की जानकारी हैं. योग साधना का एक उदेश्य इस चेतना विद्युत -शक्ति का अभिवर्धन करना भी है. इसे मनोबल, प्राणशक्ति और आत्मबल भी कहते हैं. संकल्प शक्ति और इच्छा शक्ति के रूप में इसके चमत्कार देखे जा सके हैं. मनोविज्ञान के समूचे खजाने में दो चीजें भरी हैं सूत्र [ Formula ] और तकनीक [Technique ] . सूत्रों में स्थिति का विवेचन होने के साथ तकनीकों के संकेत भी हैं.तकनीकों द्वारा स्थिति को ठीक करने के प्रयास किये जातें हैं. संकल्प शक्ति संकल्प शक्ति मस्तिष्क के वे हाई momentum वाले विचार हैं जिनकी गति अत्यंत तीब्र और प्रभाव अति गहन होतें हैं और अत्यंत शक्तिशाली होने के कारण उनके परिणाम भी शीघ्रः प्राप्त होतें है. मन के तीन भाग या परतें भावना, विचारणा और व्यवहार मानवीय व्यक्तितिव के तीन पक्ष हैं उनके अनुसार मन को भी तीन परतों में विभक्त किया जा सकता है : भौतिक जानकारी संग्रह करने वाले चेतन - मस्तिष्क [Conscious- Mind ] और ऑटोनोमस नर्वस सिस्टम को प्रभावित करने वाले अचेतन - मस्तिष्क [Sub- Conscious - Mind] अभी अभी विज्ञान की परिधि में आयें हैं. पर अब अतीन्द्रिय - मस्तिष्क [Super-Conscious -Mind] का अस्तित्व भी स्वीकारा जाता हैं . हुना [Huna] हुना [Huna] का अर्थ हवाई द्वीप [ Phillippines ] में गुप्त या सीक्रेट है. शरीर , मन और आत्मा के एकीकरण पर आधारित हुना -तकनीक लगभग 2000 वर्ष पुरानी परामानोविज्ञानिक रहस्यवादी स्कूल हैं. इस गूढ़ और गुप्त तकनीक के प्रयोग से एक साधारण मनुष्य अपनी संकल्प शक्ति द्वारा अपने अन्तराल में प्रसुप्त पड़ी क्षमताओं को जगा कर और विशाल ब्रह्माण्ड में उपस्थित शक्तिशाली चेतन तत्त्वों को खीचकर अपने में धरण कर अपने आत्मबल को इतना जागृत कर सकता हैं की वह अपने व्यक्तिगत और सामाजिक परिस्थितिओं में मनचाहा परिवर्तन ला सके . हुना के अनुसार मन की तीन परतें Llower –Self [Unconsious- Mind]----- यह Rib-Cage में स्थित है.Middle -Self [Consious -Mind] ------यह भ्रूमध्य में पीनल ग्लैंड में स्थित है.Higher –Self [Super-Consious-Mind] -------यह सर से लगभग 5 फीट की उच्चाई पर स्थित है.  Lower –Self : यह हमारा अचेतन मन है.समस्त अनुभवों और भावनाओं का केंद्र है. Middle -Self द्वारा इसे निर्देश और आदेश देकर कार्य करवाया जा सकता है. समस्त जटिल गिल्ट , कोम्प्लेक्सेस , तरह - तरह की आदतें, आस्थाएं, सदेव Lower -Self में संचित रहतें हैं. Lower -Self स्वयं कोई भी तार्किक या बुद्धि पूर्ण निर्णय लेने में पूर्ण रूप से असमर्थ है. Middle -Self : यह हमारा चेतन मन है जिससे हम सोच-विचार करते हैं और निर्णय लेते हैं. यह हमारे बुद्धि के स्तर को दर्शाता है. Higher- Self : मानव मस्तिष्क का वह भानुमती का पिटारा है जिसमें अद्भुत और आश्चर्य जनक क्षमताएं भरी पड़ी हैं, , जिन्हें अगर जीवंत-जागृत कर लिया जाए तो मनुष्य दीन -हीन स्थिति में न रह कर अनंत क्षमताओं को अर्जित कर सकता है. Higher-Self में किसी भी समस्या या परिस्थिति का समाधान करने की असाधारण क्षमता है. यह तभी संभव हो पाता है जब हम उससे मदद मांगें. Higher - Self कभी भी मानव के साधारण क्रिया-कलापों में दखलांदाजी नहीं करा है जब तक विशेष रूप से उससे मदद न मांगी जाये. हुना द्वीप वासी किसी देवी-देवता की जगह अपने कार्यों या प्रयोजनों की सिद्धि के लिए अपने Higher – Self पर पूर्ण रूप से आश्रित होतें हैं और उसीसे से ही प्रार्थना करते हैं.  Aka - Chord यह अदृश्य चमकीली - चाँदी की ओप्टिकल फाइबर के समान कॉर्ड या वायर है जो Lower -Self को Higher - Self से और Middle - Self को Lower -Self से जोडती है, . Higher -Self और Middle -Self प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए नहीं होते हैं. प्राण प्राण ही वह तत्व हैं जिसके माध्यम से Higher –Self हमरे अभीष्ट लक्ष्य की पूर्ति करता है. प्राण तत्व की अधिकता गहरी साँस द्वारा संभव है. चेतन मस्तिष्क या Middle-Self द्वारा प्राण तत्व वायु द्वारा ग्रहण किया जाता है. फिर इस प्राणतत्व को Lower-Self अत्यंत उच्च विद्युत –वोल्टेज़ में परिवर्तित कर देता है पुनः इस हाई – वोल्टेज़ का प्रयोग हमारा Higher- Self अभीष्ट की लक्ष्य प्राप्ति के लिए करता है. संकल्प ध्यान की Technique 1. सुख आसन या सुविधजनक जनक स्थिति में बैठ जायें. अपनी आंखें बंद करे, धीमें और गहरी 10 सांसें लें और प्रत्येक साँस के साथ प्राण शक्ति को अपने अन्दर जाता महसूस करे.2. अब ग्रहण किये प्राण शक्ति को अपने सोलर प्लेक्सस [Rib Cage] में एक चमकीली हाई वोल्टेज सिल्वर गेंद के रूप में Visualize करें.3. अब उस गेंद से अत्यंत तीब्र सिल्वर सफ़ेद प्रकाश निकलता देखें जिसे एक सक्रीय ज्वालामुखी से लावा निकलता है , या जैसे दिवाली के अवसर पर जलाये जाने वाले आतिशबाजी आनार से तीब्र गामी प्रकाश निकलता है.4. सफ़ेद प्रकाश को अपने सिर से 5 फीट की ऊंचाई तक जाता देखें .5. अब इस सफ़ेद प्रकाश को सर की ऊपर एक चमकीले सिल्वर रंग के विशाल गोले का रूप धरते देखें .6. इस गोले में अपनी लक्ष्य की विस्तृत और इच्क्षित पूर्ति देखे. आप का लक्ष्य एकदम सपष्ट और निश्चित होना चाहिए.7. अपने इच्क्षित लक्ष्य की अत्यंत बारीक़ और विस्तृत पूर्ति देखें.8. उस सफ़ेद गोले में अपने लक्ष्य को पूरा हुआ देखें और विश्वाश करे की आप का वह कार्य पूर्ण रूपेण , सफलता पूर्वक सम्पादित हो चूका है.9. मन में संकल्प करे की आपका वह इच्क्षित कार्य पूरा हो चूका है.10. प्रक्रिया के अंत में अपने Higher-Self को अपने संकल्प की पूर्ति के लिए धन्यवाद कहें.11. प्रतिदिन यह प्रक्रिया करें , जब तक आप का वह इच्क्षित कार्य पूर्ण नहीं हो जाता है.12. अपने Higher - Self पर विश्वाश करे जो आप के अन्दर ईश्वर के D.N.A. का प्रतिनिधितित्व करता है. वह आपको कभी धोखा नहीं देगा. अतीन्द्रिय विज्ञान और गूढ़ -विज्ञान में ऐसी संभावनाएं हैं जो मानवीय कष्टों को मिटा कर , किसी भी मानव की वर्तमान क्षमता में अधिक वृद्धि कर उसे अधिक सुखी और सफल बना सके. इसके लिए हमें अपना मस्तिष्क खुला रखना चाहिए. बिना अंध-विश्वास और अविश्वासी बने तथ्यों का अन्वेषण करना चाहिए. उपेक्षित और लुप्त प्रायः आत्म-विज्ञान को यदि अन्वेषण और प्रयोगों का क्षेत्र मान कर उसके लिए भौतिक-विज्ञानियों जैसी तत्परता बरती जाय तो अगले दिनों ऐसे अनेक उपयोगी रहस्य उद्घाटित हो सकते हैं , जो भौतिक अविष्कारों से भी अधिक उपयोगी सिद्ध होंगें.
द्वारा गीता झा

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कुण्डलिनी - दी सर्पेंट पॉवर

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ब्रह्माण्ड में दो प्रकार की शक्तियां कार्य करती हैं, एक फिजिकल जो पदार्थों में गतिशीलता और हलचल पैदा करती हैं दूसरी मेटाफिजिकल जो चेतना के रूप में प्राण धारीओं में इच्छाओं और अनुभूतियों का संचार करती हैं.

अक्सर हम लोग केवल प्रत्यक्ष शक्तियों का प्रमाण आधुनिक उपकरणों के माध्यम से प्राप्त कर लेतें हैं और सजहता से उनकी सत्ता भी स्वीकार कर लेते हैं. इसमें हीटलाइटमग्नेटिकइलेक्ट्रिसिटीसाउंड और मकैनिकलइनर्जी आती हैं.

मानव शरीर एक जीता-जागता बिजलीघर हैं

ऊर्जा के सहारे यंत्र चलते हैं, मानव शरीर भी एक प्रकार का यंत्र हैं इसके संचालन  में जिस ऊर्जा का प्रयोग होता हैं उसे जीव -विद्युत कहा जाता हैं.

ऋण या negative तथा धन या positive धाराओं के मिलाने से बिजली उत्पन्न होती हैं और उससे यंत्र चलते हैं.

                                    
मेरुदंड या spinal chord शरीर की आधारशिला हैं. मेरुदंड के अन्दर पोले भाग में विद्युत प्रवाह के लिए अनेक नाड़ियाँ  हैं जिनमें इडा, पिंगला और सुषुम्ना  मुख्य हैं.इडा बाई नासिका से सम्बंधित negative  या चन्द्र नाड़ी हैं और पिंगला दाहिनी नासिका से सम्बंधित positive या सूर्य नाड़ी हैं.
  
जीव-विद्युत और मानस शक्ति विभिन्न नाड़ीओं द्वारा संचरण करती हैं. इनकी संख्या  72,000 हैं लेकिन इनमे से प्रमुख इडापिंगला औरसुषुम्ना  हैं.  इडा और पिंगला के मिलने से सुषुम्ना की सृष्टि होती हैं और जीव-विद्युत का उत्पादन होता हैं.

शरीर गत महत्वपूर्ण गतिविधियाँ मेरुदंड से निकल कर सर्वत्र फ़ैलाने वाले स्नायु मंडल [nervous system] से संचालित हैं और उनका संचालन  सुषुम्ना नाड़ी करती हिं जिसे वैज्ञानिक वेगस नर्व भी मानतें हैं जो एकautonomus nervous system हैं जिसका सीधा सम्बन्ध अचेतन मन से हैं.
अतःकुण्डलिनी जागरण अचेतन मन का ही जागरण हैं.

मानव शरीर भी एक बिजलीघर हैं. शरीर में इफ्रेंट और ओफरेंट नर्वस का जाल फैला हुआ हैं जो बिजली की तारों के सामान विद्युत के संचरण और प्रसारण में सहयोग करती हैं.

इसी विद्युत शक्ति के आधार पर शारीरक क्रिया-कलाप यथा पाचन-तंत्र, रक्ताभिशरण, निद्रा,जागरण और विजातीय पदार्थों का विसर्जन , मानसिक और बौद्धिक क्रियाकलाप सम्पादित होते हैं.

मानवीय शरीर में यह जीव- विद्युत दो स्थिति में रहती हैं

सक्रिय विद्युत --- शरीर में उपस्थित जीव-विद्युत का केवल 10 % ही प्रयोग सामान्य मानसिक एवं शारीरिक क्रियाकलापों के सञ्चालन हेतु किया जाता हैं, इसे सक्रिय विद्युत कहतें हैं.

निष्क्रिय विद्युत---जीव-विद्युत का 90 % भाग कुण्डलिनी शक्ति के रूप में रीढ़ के निचले सिरे में सुप्त अवस्था में विधमान रहती हैं, इसे निष्क्रिय विद्युत कहतें हैं.  
          
कई लोग आशंका करते हैं यदि शरीर में विद्युत का संचरण होता हैं तो हमें कर्रेंट क्यों नहीं लगता हैं. इसका उत्तर हैं की शरीर की विद्युत का हम एक नगण्य अंश [10 %] ही सामान्य रूप से व्यवहार में लातें हैं शेष अधिकांश भाग [90 %] शरीर के कुछ विशिष्ट चक्रोंग्रंथियों और endocrine glandsमें स्टोर रहती हैं.

कुण्डलिनी क्या हैं ?

कुण्डलिनी सुप्त जीव-विद्युत उर्जा हैं जो spinal -column के मूल में निवास करती हैं. यह विश्व-जननी और सृष्टि - संचालिनी शक्ति हैं.

यह ईश्वर प्रदत मौलिक शक्ति हैं. प्रसुप्त स्थिति में यह अविज्ञात बनी रहती हैं और spinal -chord के निचले सिरे में प्रसुप्त सर्पनी के रूप में निवास करती  हैं. कुण्डलिनी सर्पेंट पॉवर, जीवनी-शक्ति, फायर ऑफ़ लाइफ के नाम से भी जानी जाती हैं.  

चक्र

सुषुम्ना  मार्ग पर 6 ऐसे प्रमुख केंद्र हैं जिनमे असीमित प्राणशक्ति और अतीन्द्रिय क्षमता का आपर वैभव प्रसुप्त स्थिति में पड़ा रहता हैं. इन्हें चक्र या प्लेक्सेस कहते हैं. इन केन्द्रों में नर्वस  अधिक मात्रा में उलझे रहते हैं . इन्हीं चक्रों के माध्यम से ब्रह्मांडीय ऊर्जा और जीव-ऊर्जा का आदान -प्रदान चलता रहता हैं.


सुषुम्ना  में भूमध्य से लेकर रीढ़ के आधार पर 6 चक्र अवस्थित हैं. भूमध्य में आज्ञाचक्र, कंठ में विशुद्धि [सर्विकलरीजन ], वक्ष   में अनाहत डोर्सलरीजन ], नाभि के ऊपर मणिपुर [लम्बर रीजन], नाभि के नीचे स्वाधिष्ठान[सेक्रेल रीजन] और रीढ़ के अंतिम सिरे पर मूलाधार [कक्सिजियल रीजनचक्र स्थित  हैं. सुषुम्ना के शीर्ष पर सहस्त्रार  इसे चक्रों की गिनती मेंनहीं रखा जाता  हैं. ] हैं, यह सिर के सर्वोच्च शीर्षभाग में स्थित हैं. यह  चेतना का सर्वोच्च शिखर हैं. प्राण शक्ति सहस्त्रार से मूलाधार की और आते समय घटती हैं. इन चक्रों या कुण्डलों से होकर विद्युत शक्ति के प्रवाहित होने के कारण इसे कुंडलिनी शक्ति भी कहा जाता हैं. कुण्डलिनी जागरण यात्रा मूलाधार से आरंभ हो कर सहस्त्रद्वार में जा कर समाप्त होती हैं.

शक्ति के स्टोर हाउस - चक्र -शरीर के अत्यंत संवेदनशील भागों में स्थिति रहते हैं. इनका जागरण विशिष्ठ  साधनों द्वारा संभव हैं. कुंडलिनी योग इन्हीं शक्तिओं को जागृत कर उन्हें नियंत्रित कर व्यक्ति विशेष को  अनंत शक्ति का स्वामी बना देती हैं.

कुण्डलिनी जागरण के विभिन्न चरण

नाड़ी  शुद्धि       
चक्र  शुद्धि/जागरण
इडा-पिंगला  शुद्धि/ संतुलन
सुषुम्ना जागरण या कुण्डलिनी का सुषुम्ना नाड़ी में प्रवेश एवं ऊर्ध्गमन .

कुण्डलिनि जागरण की विभिन्न विधियाँ

योग, ध्यान, प्राणायाम , मंत्रोचार , आसन एवं मुद्रा ,शक्तिपात, जन्म से पूर्वजन्म -संस्कार द्वारा , भक्ति पूर्ण  - शरणागति, तपस्या, तंत्र मार्ग इत्यादि .

कुण्डलिनी जागरण के लाभ

कुंडलिनी जागरण की प्रक्रिया में सुप्त जीव- शक्ति का आरोहन किया जाता हैं. उर्ध्व दिशा में गति करने से जैसे जैसे चक्रों का भेदन होता हैं , अज्ञान के आवरण हटाने लग जातें हैं. दिव्यता बड़ने लग जाती हैं.


शरीर पर इसका प्रभाव बलिष्ठता , निरोगिता, स्फूर्ति, क्रियाशीलता, उत्साह और तत्परता के रूप में दिखाई देता हैं , मानसिक  प्रभाव में तीव्र बुद्धि , समरण शक्ति, दूरदर्शिता, कल्पना, कुशलता और निर्णय लेने की क्षमता के रूप में दिखती  हैं. भावना क्षेत्र  में श्रद्धा, निष्ठा, आस्था, करुणा , अपनेपन का भाव, संवेदना इत्यादि  के रूप में दिखती  हैं.


हम कह सकतें हैं की कुंडलिनी -जागरण उच्य- स्तरीय उत्कृष्टता की दिशा में मानवीय चेतना को ले जाती हैं. इससे अनेक शक्तिओं, सिद्धियों और क्षमताओं का जागरण होता हैं और अंत  में आत्मा- सत्ता परमात्मा -सत्ता से जुड़ जाती हैं.

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इन कारणों से छोटी होती है जिंदगी

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टीवी
ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स एंड मेडिसिन में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार टीवी का हर एक घंटा आपके जीवन से 22 मिनट कम कर रहा है. यानि अगर आप औसतन हर रोज छह घंटे टीवी देखते हैं, तो आपके जीवन से पांच साल कम हो सकते हैं.

सेक्स
ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में छपी एक रिपोर्ट बताती है कि जो पुरुष महीने में कम से कम एक बार भी सेक्स नहीं करते, उनके मरने का खतरा उन पुरुषों की तुलना में दोगुना होता है जो हफ्ते में एक बार सेक्स करते हैं.

नींद
सोना शरीर के लिए जरूरी है लेकिन बहुत ज्यादा सोने से आपकी उम्र कम हो सकती है. आठ घंटे से ज्यादा बिस्तर पर पड़े रहने से फायदा कम और नुकसान ज्यादा होता है. इसलिए नियमित रूप से सोएं, लेकिन आठ घंटे से ज्यादा नहीं.
बैठे रहना
क्या आपको दफ्तर में कई घंटे बैठना पड़ता है? जामा इंटरनल मेडिसिन की रिसर्च बताती है कि दिन में ग्यारह घंटे बैठने से मौत का खतरा 40 फीसदी बढ़ जाता है. इसलिए काम के बीच में ब्रेक लें और हो सके तो कुछ देर खड़े रह कर काम करें.

अकेलापन
इंसान के लिए किसी का साथ, किसी से बातचीत करना जरूरी है. कुछ लोग तनाव से दूर रहने के लिए अकेले रहना पसंद करते हैं. लेकिन दरअसल वे खुद को दुनिया की खुशियों से वंचित कर रहे हैं. अवसाद उम्र कम होने की एक बड़ी वजह है.
बेरोजगारी
15 देशों में 40 साल तक दो करोड़ लोगों पर चले एक शोध के अनुसार बेरोजगार लोगों के अचानक मौत का खतरा नौकरीपेशा लोगों की तुलना में 63 फीसदी ज्यादा होता है.

कसरत
शरीर के लिए कसरत बेहद जरूरी है लेकिन सिर्फ शौक के चलते जरूरत से ज्यादा कसरत करना नुकसानदेह है. बेहतर होगा अगर डॉक्टर या फिजिकल ट्रेनर की राय के मुताबिक कसरत की जाए.
लंबी छुट्टी
यह सही है कि आपको काम से छुट्टी की जरूरत है ताकि शरीर को आराम मिल सके. लेकिन बहुत ज्यादा आराम नुकसानदेह हो सकता है. काम के बाद अचानक लंबे वक्त तक आराम इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देता है.

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शुक्रवार, 7 अगस्त 2015

दुनिया में पहली बार जापान में रोबोट्स की शादी

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दुनिया में पहली बार कोई रोबोट जोड़ा शादी के बंधन में बंध गया है। यह शादी जापान की राजधानी तोक्यो में हुई। रोबोट दूल्हे का नाम फ्रायोस और दुल्हन का नाम युक्रिन था। दोनों ने पारंपरिक परिधान पहन रखे थे।
यह आयोजन मावा डेंकी नामक कंपनी ने करवाया था। इलेक्ट्रॉनिक एक्सेसरीज बनाने वाली इस कंपनी ने फ्रायोस को डिजाइन किया है। युक्रिन की शक्ल काफी कुछ जापान की पॉप स्टार युकी काशीवागी से मिलती है लेकिन कार्यक्रम में उसे रोबोरिन के नाम से ही संबोधित किया गया। जानकारों के अनुसार, ऐसा कॉपीराइट की कानूनी अड़चनों से बचने के लिए किया गया।
शादी के कार्ड
शादी में शामिल हुए लोगों के अनुसार, इस कार्यक्रम के लिए शादी के कार्ड भी छपवाए गए थे। इसमें एक दिल में दोनों रोबोट की फोटो एक साथ छापी गई थी।
तोक्यो में हुए इस फंक्शन में दूल्हे फ्रायोस और दुल्हन युक्र...

परंपरागत पहनावे
तोक्यो में हुए इस फंक्शन में दूल्हे फ्रायोस और दुल्हन युक्रिन ने पारंपरिक परिधान पहन रखे थे। फंक्शन में कुल 100 अलग-अलग तरह के रोबोट्स दोनों ओर से शामिल हुए थे। इनमें से ज्यादातर को परंपरागत परिधान पहनाए गए थे। इनमें साफ्टबैंक का प्रसिद्ध रोबोट पेपर भी था। शादी पेपर ने ही करवाई।
रोबोट जोड़े के कई दोस्त भी फंक्शन में पहुंचे

केक काटा, किस किया
शादी की रस्मों के बाद फ्रायोस और युक्रिन ने केक काटा और फिर एक-दूसरे को किस भी किया। हालांकि यह नहीं पता है कि यह केक असली था या नकली। शादी के बाद ऑटोमेटेड ऑक्रेस्ट्रा ने दोनों के फर्स्ट डांस के लिए गाना भी बजाया।
फ्रायोस और युक्रिन ने केक काटा और एक-दूसरे को किस भी किया
 
इसके अलावा एक छोटा रोबोट पाल्मी भी था जो माइक पर कार्यक्रम का संचालन कर रहा था। दुल्हन युक्रिन के साथ एक ब्राइड्समेड भी थी।

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रीढ़ की हड्डी में होता है छोटा दिमाग

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वॉशिंगटन

अमेरिकी शोधकर्ताओं ने मनुष्यों की रीढ़ की हड्डी में एक छोटे मस्तिष्क का पता लगाया है। यह हमें भीड़ के बीच से गुजरते वक्त या सर्दियों में बर्फीली सतह से गुजरते वक्त संतुलन बनाने में मदद करती है और फिसलने या गिरने से बचाती है। इस तरह के कार्य अचेतन अवस्था में होते हैं।

हमारी रीढ़ की हड्डी में मौजूद तंत्रिका कोशिकाओं के समूह संवेदी सूचनाओं को इकट्ठा कर मांसपेशियों के आवश्यक समायोजन में मदद करते हैं। कैलिफोर्निया स्थित एक स्वतंत्र वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान 'साल्क' के जीवविज्ञानी मार्टिन गोल्डिंग के मुताबिक 'हमारे खड़े होने या चलने के दौरान पैर के तलवों के संवेदी अंग इस छोटे दिमाग को दबाव और गति से जुड़ी सूचनाएं भेजते हैं।'

गोल्डिंग ने कहा, 'इस अध्ययन के जरिए हमें हमारे शरीर में मौजूद 'ब्लैक बॉक्स' के बारे में पता चला। हमें आज तक नहीं पता था कि ये संकेत किस तरह से हमारी रीढ़ की हड्डी में इनकोड और संचालित होते हैं।'

प्रत्येक मिलिसेकंड पर सूचनाओं की विभिन्न धाराएं मस्तिष्क में प्रवाहित होती रहती हैं, इसमें शोधकर्ताओं द्वारा खोजे गए संकेतक भी शामिल हैं। अपने अध्ययन में साल्क वैज्ञानिकों ने इस संवेदी मोटर नियंत्रण प्रणाली के विवरण से पर्दा हटाया है। अत्याधुनिक छवि प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से इन्होंने तंत्रिका फाइबर का पता लगाया है, जो पैर में लगे संवेदकों की मदद से रीढ़ की हड्डी तक संकेतों को ले जाते हैं।

इन्होंने पता लगाया है कि ये संवेदक फाइबर आरओआरआई न्यूरॉन्स नाम के तंत्रिकाओं के अन्य समूहों के साथ रीढ़ की हड्डी में मौजूद होते हैं। इसके बदले आरओआरआई न्यूरॉन मस्तिष्क के मोटर क्षेत्र में मौजूद न्यूरॉन से जुड़े होते हैं, जो मस्तिष्क और पैरों के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध हो सकते हैं।

गोल्डिंग की टीम ने जब साल्क में आनुवांशिक रूप से परिवर्धित चूहे की रीढ़ की हड्डी में आरओआरआई न्यूरॉन को निष्क्रिय कर दिया तो पाया कि इसके बाद चूहे गति के बारे में कम संवेदनशील हो गए।

गोल्डिंग की प्रयोगशाला के लिए शोध करने वाले शोधकर्ता स्टीव बॉरेन ने कहा, 'हमें लगता है कि ये न्यूरॉन सभी सूचनाओं को एकत्र कर पैर को चलने के लिए निर्देश देते हैं।'

यह शोध तंत्रिकीय विषय और चाल के नियंत्रण की निहित प्रक्रियाओं व आस-पास के परिवेश का पता लगाने के लिए शरीर के संवेदकों पर विस्तृत विचार पेश करती है। यह शोध 'सेल' पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।

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क्या थम सकती है हमारी उम्र?

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लंदन
हमेशा जवान बने रहने की ख्वाहिश आखिर किसे नहीं होती! लेकिन चेहरे की झुर्रियां और ढीली होती हमारी मांसपेशियां इस ख्वाहिश पर जबर्दस्त आघात सी लगती हैं। लेकिन हो सकता है, कि आने वाले कुछ समय में ये तमन्ना हकीकत में तब्दील हो जाए।

उम्र को रोक कर रखने वाली एक नई दवा पांच साल के भीतर आ सकती है । ये कहना है उन वैज्ञानिकों का जिन्होंने एक ऐसे एन्जाइम का पता लगाया है, जो हमारी उम्र संबंधी परेशानियों को बढ़ाने और मसल्स को कमजोर करने के लिए जिम्मेदार होता है।

बर्मिंघम यूनिवर्सिटी के इन शोधकर्ताओं के अनुसार यदि इस एन्जाइम के प्रभाव को एक समय के बाद रोक दिया जाए, तो उम्र पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ना बंद हो जाएगा। इस एन्जाइम का नाम '11 बीटा-एचएसडी 1' है। यह शरीर की मसल्स को समय के साथ-साथ ढीला और कमजोर करने का काम करता है। हाल ही में किए गए शोध में इसी एन्जाइम की भूमिका को पूरी तरह से समझा गया है।

शोध में पाया गया कि '11 बीटा-एचएसडी 1' एन्जाइम का उत्सर्जन 20 से 40 साल की महिलाओं की तुलना में 60 साल से ऊपर की महिलाओं में 2.72 गुना ज्यादा हो जाता है। जैसे-जैसे एन्जाइम शरीर में बढ़ता है, वैसे-वैसे शरीर ढीला पड़ने लगता है, प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है और बॉडी कमजोर होती जाती है। हालांकि शोध में पुरुषों के भीतर इस एन्जाइम में कोई बदलाव नहीं देखा गया। इसके कारणों का फिलहाल पता नहीं चल सका है।

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