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August 31, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

ज्ञान तथा अज्ञान - कुछ भी रहस्य नहीं !

अमानित्वमदम्भित्वमहिंस क्षान्तिरार्जवम्।  आचार्योपासनं शौचं स्थैर्यमात्मविनिग्रहः।। इन्द्रियार्थेषु वैराग्यमनहंकार एव च।  जन्ममृत्यु ज्र्व्याधिदुःखदोषानुदर्शनम्।। असक्तिरनभिष्वङ्गः पुत्रदारगृहादिषु।  नित्यं च समचित्तत्वमिष्टानिष्टोपपत्तिषु।। मयि चानन्ययोगेन भक्तिरव्यभिचारिणी।  विविक्तदेशसेवित्वमरतिर्जनसंसदि।। अध्यात्मज्ञाननित्यत्वम्  तत्त्वज्ञानार्थदर्शनम्।  एतज्ज्ञानमिति प्रोक्तमज्ञानं यादतोन्यथा।।

विनम्रता , दम्भहीनता , अहिंसा , सहिष्णुता , सरलता , प्रामाणिक गुरु के पास जाना , पवित्रता , स्थिरता , आत्मसंयम , इंद्रियतृप्ति के विषयों का परित्याग , अहंकार का अभाव , जन्म , मृत्यु वृद्धावस्था तथा रोग के दोषों की अनुभूति , वैराग्य , संतान , स्त्री , घर , तथा अन्य वस्तुओं की ममता से मुक्ति , अच्छी तथा बुरी घटनाओं के प्रति समभाव , मेरे (भगवान  श्रीकृष्ण ) प्रति निरंतर अनन्य भक्ति , एकांत स्थान में रहने की इच्छा , जन समूह से विलगाव , आत्म - साक्षात्कार की महत्ता को स्वीकारना , तथा परम सत्य की दार्शनिक खोज - इन सब को मैं ज्ञान घोषित करता हूँ और इनके अतिरिक्त जो भी है , वह सब अज्ञान है। 
Humility, pridel…

अवचेतन मन की शक्ति

फोटो : गूगल


आप का मस्तिष्क  एक है लेकिन इसके दो स्पष्ट भाग है ,चेतन मन और अवचेतन मन इसे जागृत और सुसुप्त मन भी कहा जा सकता है ।  आप को याद रखना चाहिए चेतन और अवचेतन दो मस्तिष्क  नहीं है । वे तो एक ही मस्तिष्क में होने वाली गतिविधियों  के दो क्षेत्र  है ,आपका चेतन मन तार्किक  मस्तिष्क है , जो विकल्प चुनता है । उदाहरण के लिए , आप अपनी पुस्तक , अपना घर , अपना जीवन साथी  चुनते है । आप सारे निर्णय चेतन मन से करते है । दूसरी तरफ आप के सचेतन सुझाव के बिना ही आप का ह्रदय अपने आप काम करता है और पाचन , रक्त संचार , साँस लेने की प्रक्रिया अपने आप चलती है । ये सारे काम आपका अवचेतन मन करता है । आप अपने अवचेतन मन पर जो भी छाप छोड़ते  है या जिसमे भी प्रबल विश्वास करते है , आप का अवचेतन मन उसे स्वीकार कर  लेता  है । यह आप के चेतन मन की तरह तर्क नहीं करता है  या बहस नहीं करता है । आप का अवचेतन मन उस मिट्टी  की तरह है , जो किसी भी तरह के बीज को स्वीकार कर लेता है , चाहे अच्छा हो या बुरा । आप के विचार सक्रिय है । वे बीज है ।  नकारात्मक विचार या  विध्वंसात्मक विचार  आप के अवचेतन मन में नकारात्मक रूप से क…

47–ए न्‍यू मॉडल ऑफ दि यूनिवर्स—(ओशो की प्रिय पुस्‍तकें)

पी. डी. ऑस्पेन्सकी एक रशियन गणितज्ञ और रहस्‍यवादी था। उसे रहस्‍यदर्शी तो नहीं कहा जा सकता, लेकिन रहस्‍य का खोजी जरूर था। विज्ञान अध्‍यात्‍म, गुह्म विद्या, इन सबमें उसकी एक साथ गहरी पैठ थी। इस अद्भुत प्रतिभाशाली लेखक ने पूरी जिंदगी अस्‍तित्‍व की पहेली को समझने-बुझने में लगायी। उसने विश्वंभर में भ्रमण किया, वह भारत भी आया, कई योगियों और महात्‍माओं से मिला। और अंत मैं गुरजिएफ का शिष्‍य बन गया। गुरजिएफ के साथ उसे जो अनुभव हुए उनके आधार पर उसने कई किताबें लिखी। ऑस्पेन्सकी को बचपन से ही अदृश्‍य पुकारता था; उसकी झलकें आती थी। एक तरफ वह फ़िज़िक्स का अध्‍यन करता और दूसरी तरफ उसे ‘’अनंतता’’ दिखाई देता। ओशो ने ऑस्‍पेन्‍सकी की पाँच किताबों को अपनी मनपसंद किताबों में शामिल किया है। ‘’टर्शियम ऑर्गेनम’’, ‘’इस सर्च ऑफ दि मिरेकुलस’’, ‘’ एक न्‍यू मॉडल ऑफ यूनिवर्स’’, ‘’दी फोर्थ वे’’, और ‘’दि फ़्यूचर साइकॉलॉजी ऑफ मैन’’। वे स्‍पष्‍ट रूप से कहते थे, ऑस्पेन्सकी की किताबें मुझे बहुत पसंद है। इस किताब के भी 542 पृष्‍ठ है, और बारह प्रकरण है। यह एक अच्‍छा खाता रत्‍नाकर हे। विचारों के रत्‍न ही रत्‍न भरे पड़े है।…

300 से ज्यादा खोज कर चुका ये संस्थान, शहर को दे रहा नई पहचान

जमशेदपुर. लौहनगरी जमशेदपुर की पहचान साइंस सिटी के रूप में भी बन चुकी है। कई ऐसी वस्तुएं हैं, जिनका उपयोग हम घर या बाहर कर रहे हैं, वह कैसे बना? कहां अनुसंधान हुआ है? शायद नहीं पता है। कई चीजें शहर में बनी हैं। इसे बनाने में एनएमएल का योदान रहा है। शहर को नई पहचान देने और देश को विज्ञान के क्षेत्र में अग्रणी बनाने में राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (एनएमएल) का अहम योगदान रहा है। साठ वर्षों के सफर में एनएमएल 300 खोज कर चुका है। विज्ञान के क्षेत्र में यहां के वैज्ञानिकों की उपलब्धियों को शब्दों में समेटना कठिन है। दैनिक भास्कर एनएमएल की नई खोज व कुछ ऐसे अनुसंधान को सामने लाने का प्रयास कर रहा है, जिसका उपयोग आप करते हैं, लेकिन नहीं जानते कि इसका इन्वेंशन शहर में हुआ है। आज राष्ट्रीय विज्ञान दिवस है। इस साल का थीम है क्रफोस्टरिंग साइंस्टिफिक टेंपर (वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना)। प्रस्तुत है भास्कर की विशेष रिपोर्ट। क्यों मनाया जाता है विज्ञान दिवस 28 फरवरी 1928 को सर सीवी रमन ने प्रकाश की गति पर खोज की थी। इस खोज के लिए उन्हें 1930 मेें नोबेल पुरस्कार दिया गया था। इसके बाद से देश ने विज्ञान…