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August 17, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

चीनी लोग घर में ही बना रहे हैं लैम्बोर्गिनी कार, हेलिकॉप्टर और पनडुब्बियां

चीनी लोग किसी भी चीज की हूबहू नकल करने में माहिर हैं। चीन के तीन लोगों ने घर पर ही हेलिकॉप्टर और लैम्बोर्गिनी कार बना ली है।  लैम्बोर्गिनी कार स्पीड के दीवाने चीन के दो युवकों ने घर पर ही लैम्बोर्गिनी जैसी महंगी कार बना डाली। वांग यू और ली लिंटाओ ने लग्जरी कार लैम्बोर्गिनी डायबेलो के दो रैप्लिका तैयार कर ली है। यह कार 310 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकती है। दस साल की मेहनत और तकरीबन 5 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद उन दोनों ने ये कारें बनाई हैं।  खास बातें 5 करोड़ रुपए लागत है लैम्बोर्गिनी की रैप्लिका की।
10 साल का समय लगा कार बनने में।
310 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार है कार की।  हेलिकॉप्टर सेंट्रल चीन के ग्रामीण इलाके में तैनात एक नेत्र विशेषज्ञ ने घर पर ही हेलिकॉप्टर बना लिया। जियांग चेंगेन (52) ने 2 साल के अंदर खुद ही हेलिकॉप्टर असेंबल कर लिया। 4.0 लीटर वी-8 इंजन वाला यह हेलिकॉप्टर 4 मीटर लंबा है। हालांकि, अभी तक इस हेलिकॉप्टर ने उड़ान नहीं भरी है, लेकिन जियांग इस हेलिकॉप्टर की ज्यादातर कमियां दूर कर चुके हैं और जल्द ही यह आसमान में होगा।  खास बातें दो साल का समय लगा हेलिकॉप्ट…

लबादा जो कर दे नज़रों से ओझल

सिंगापुर के नानयांग विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का दावा है कि उन्होंने ऐसी युक्ति बना ली है जिसके तले रखी वस्तु अदृश्य हो जाती है| वैसे उन्होंने यह भी इंगित किया है कि अभी इसमें बहुत सुधार करने होंगे, पर जो कुछ किया जा चुका है वह भी विज्ञान की इस क्षेत्र में भारी उपलब्धि है| इंटरनेट में साईट पर दिए गए वीडियो में यह साफ़ दिखता है कि कैसे पानी में डुबोए गए “लबादे” के तले से अचानक सुनहरी मछली निकल आती है| ब्रिटिश अखबार ‘इंडिपेंडेंट’ के अनुसार यह लबादा कांच के पतले पैनलों से बनाया गया है, जो प्रकाश के अपवर्तन की विशेषताओं के कारण वस्तुओं को अदृश्य बना देते हैं| यह युक्ति निश्चित कोण से ही वस्तुओं को अदृश्य बनाती है| अभी तक इससे पहले जो युक्तियाँ बनी हैं उनकी तुलना में यह निश्चित रूप से बेहतर है| वैज्ञानिकों के मत में ऐसी युक्ति का उपयोग सुरक्षा के क्षेत्र में तथा अदृश्य प्रेक्षण के लिए किया जा सकेगा| sabhar :http://hindi.ruvr.ru/

और पढ़ें: http://hindi.ruvr.ru/2013_06_13/115691312/

गजब का स्मार्टफोन, अब अंधेरे में भी देख सकेंगे आप!

न्यूयॉर्क : स्मार्टफोन निर्माता एप्पल अपने आईफोन के साथ इस्तेमाल करने योग्य एक ऐसा उपकरण उपलब्ध कराया है जिसकी मदद से अब फोन के उपयोगकर्ता अंधेरे में भी देख सकेंगे। दरअसल, यह 'फ्लिर वन' नाम के सहायक उपकरण के जरिए मुमकिन हो सका है। फ्लिर वन के वेबसाइट के अनुसार, इस उपकरण की कीमत 21,220 रुपये है। इस उपकरण के जरिए फोन का कैमरा किसी व्यक्ति, पशु या किसी भी अन्य वस्तु की ओर करने से आप उस वस्तु से निकलने वाली उष्मा के जरिए उसे देख सकेंगे। इस उपकरण के जरिए आप अपने स्मार्टफोन की मदद से अंधेरे में अपने दोस्तों को खोजने, अंधेरे में झाड़ियों में छिपे जानवरों को देखने या अंधेरे में इलेक्ट्रिक शॉर्ट सर्किट का पता लगा सकेंगे। इस उपकरण में अपनी बैट्री लगी होती है और इसे आईफोन-5 और 5एस के पीछे लगाया जा सकता है। इतना ही नहीं, आप अंधेरे में खड़ी अपनी कार को भी इसकी मदद से आसानी से ढूंढ पाएंगे। इसके अलावा अग्निशमन अधिकारियों और सेना के जवानों के लिए भी यह उपकरण काफी उपयोगी साबित हो सकता है। एजेंसी 
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खुराक में छुपा सेहत का राज

पृथ्वी पर हर तरह की जिंदगी समय के साथ बूढ़ी होती है और फिर खत्म हो जाती है. लेकिन क्या बुढ़ापे की प्रक्रिया को धीमा और ज्यादा सेहतमंद बनाया जा सकता है. जर्मनी में कई भारतीय वैज्ञानिक इसी पर रिसर्च कर रहे हैं. पुरानी ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरों में अपनों को पहचानने की कोशिश करती रेनाटे क्लोट्स. वो बुढ़ापे में सामने आने वाली दिमागी बीमारी अल्जाइमर से लड़ रही हैं. उनके दिमाग के कोशिशकाएं धीरे धीरे खत्म हो रही हैं. इसका पहला असर उनकी यादाश्त पर पड़ता है. धीरे धीरे पूरा दिमाग खत्म होने लगता है. अल्जाइमर से अब तक न तो कोई मरीज जीत पाया है और न ही मेडिकल साइंस. आम तौर पर बुढ़ापे में कैंसर, कार्डियोवैस्कुलर और न्यूरोडिजेनेरेटिव बीमारियां सामने आती हैं. क्या है बुढ़ापा जर्मनी के कोलोन शहर में माक्स प्लांक इंस्टीट्यूट फॉर बायोलॉजी ऑफ एजिंग में बुढ़ापे से जुड़ी समस्याओं पर रिसर्च हो रही है. आंचल श्रीवास्तव चूहों और फ्रूट फ्लाई कही जाने वाली मक्खियों के जरिेए समझने की कोशिश कर रही हैं कि बुढ़ापा शरीर को कैसे खत्म करता है. फ्रूट फ्लाई ऐसी छोटी मक्खियां हैं जो सड़ते फलों पर मंडराती हैं. ऐसी मक्खियों …

जब दिव्य शक्तियां मिलने लगती हैं तब ऐसे अनुभव होते हैं

साधना या सामान्य स्थिति में होने वाले आध्यात्मिक अनुभवों का जिक्र औरों से करना नैतिक दृष्टि से तो गलत है ही, उससे ज्यादा आध्यात्मिक लिहाज से भी नुकसान देह है। योग और भक्तिमार्ग का अध्ययन और प्रयोग कर रही जर्मन साधिका वंदना प्रभुदासी (मूलनाम एडलिना अल्फ्रेड) का कहना है कि साधना के लिहाज से नैतिकता का मूल्य बहुत ज्यादा नहीं है।

महत्वपूर्ण यह है कि आप साधना के मार्ग पर कैसे चल रह हैं। इसीलिए किसी अनुभवी गुरु या साधक के संगी साथी का परामर्श उपयोगी साबित होता है।

साथ साधना कर रहे व्यक्तियों के अनुभवों का जिक्र करते हुए एडलिना ने शुरुआती दस अनुभव ऐसे बताए हैं जो अध्यात्म मार्ग पर बढ़ने के सूचक भी हो सकते हैं और किसी विकार के लक्षण भी। इन अनुभवों में ध्यान के समय भौहों के बीच पहले काला और फिर नीला रंग दिखाई देना एक सामान्य अनुभव है।

शरीर के निचले हिस्से पर जहां रीढ की हड्डी शुरु होती है, स्पंदन का अनुभव, सिर में शिखास्थान पर चींटियां चलने जैसा लगना, कपाल ऊपर की तरफ खिंचने जैसा लगना आदि भी इसी तरह के अनुभव है।
ऋषिकेश के एक आश्रम में 1980 के आसपास गुरु के सान्निध्य में साधना करती रही एडलिना ने एक अ…

ये है 'अद्भुत बाबा', 25 साल से साधु बन कर रहा था लड़की सप्लाई और तस्करी

उदयपुर. शहर में पिछले 25 साल से साधु बनकर रह रहा एक शख्स मूिर्त तस्कर और लड़कियों का सप्लायर निकला। सुखेर थाना पुलिस और स्पेशल सेल ने गुरुवार को उसे कैलाशपुरी में श्री जैन श्वेतांबर मंदिर स्थित आश्रम से गिरफ्तार कर  लिया। आरोपी के आश्रम से 48 प्राचीन मूर्तियां बरामद की गई हैं। इसके अलावा एक एयरगन, नकली कार्बाइन और लड़कियों के कपड़े व मेकअप की सामग्री भी मिली है। सुखेर एसएचओ हरेन्द्र सिंह ने बताया कि आरोपी बाबा मूलत: इन्द्रगंज, ग्वालियर का रहने वाला है। इसका असली नाम नरेन्द्र (60) पुत्र गुमान मल बच्छावत (जैन) है।

यहां खुद को रत्नम बच्छावत, रत्नसूरी बाबा और अद्भुत बाबा के नाम से भी प्रचारित कर रखा था। मूर्ति चोरी कर विदेशों में तस्करी करवाता था। प्राचीन मूर्तियों के चोरी के मामले में आरोपी नरेन्द्र को आईपीसी की धारा 379,411 और पुरातत्व वस्तु संरक्षण अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया है। आरोपी को 28 अगस्त तक रिमांड पर भेज दिया है। इसके खिलाफ सुखेर, अंबामाता, भूपालपुरा थानों सहित उदयपुर में सात आपराधिक मामले दर्ज हैं। इन्द्रगंज, ग्वालियर में भी यह वांटेड है। मूर्ति चोरी के मामले में दिल्ली में …

योग के इस फायदे पर कभी आपने गौर नहीं किया होगा

स्वामी निरंजनानंद सरस्वती




एक माली के पास एक छोटा-सा जमीन का टुकड़ा है। भूमि बंजर है। वह उसे एक सुंदर बगीचे में तब्दील करना चाहता है। क्या करना होगा? क्या केवल बीज बो कर माली की यह आशा फलीभूत होगी कि एक दिन ये बीज पौधे की शक्ल लेंगे और उन पर फल-फूल लगेंगे?

या फिर उसको पहले भूमि को तैयार करना होगा, मोथे निकालने होंगे, कंकड़-पत्थर निकालने होंगे, भूमि को जोतना होगा और जब भूमि तैयार हो जाए तब बीच बोने होंगे तथा उसकी देखभाल तब तक करनी होगी, जब तक कि उसमें फल-फूल न लगने लग जाए? जब एक माली अपनी पसंद का बगीचा बनाने के लिए इतनी लंबी प्रक्रिया से गुजर सकता है, तो हम बागवानी की इस विचारधारा को अपने जीवन में क्यों नहीं उतार सकते?



यदि आप अपने जीवन रूपी बगीचे के माली बन जाएं तो आपके जीवन की प्रसुप्त क्षमताएं अपने आप जागृत होने लगेंगी। इसलिए कि सारी क्षमताएं हमारे भीतर हैं। उन्हें प्रकट होने के उपयुक्त अवसर की प्रतीक्षा है। हमें अपने आपको यह अवसर प्रदान करना है। हमलोग अपने जीवन में जो भाग-दौड़ करते हैं, उसका प्रयोजन क्या रहता है?

यही न कि हमें समृद्धि मिले, हम अधिक सुरक्षित हों, हम समाज में और नाम कमा सक…

क्या आप जानते हैं आपका शरीर आपकी आत्मा का बच्चा है

बी के एस आयंगर


ज्यादातर लोग यही चाहते हैं कि उनका शरीर उन्हें कोई तकलीफ न दे। अगर उन्हें कोई रोग या कष्ट न हो, तो वे स्वयं को स्वस्थ समझते हैं। वे इस बात से अनजान रहते हैं कि शरीर और मस्तिष्क के बीच का असंतुलन अंततः उन्हें बीमार बना देगा। योग का स्वास्थ्य पर तीन गुना असर होता है। यह लोगों को स्वस्थ रखता है, रोगों को पनपने नहीं देता और बीमार व्यक्तियों को स्वस्थ बनाता है।

लेकिन बीमारियां केवल शारीरिक नहीं होतीं। हर वह चीज, जो आपके आध्यात्मिक जीवन और व्यवहार को अव्यवस्थित करता है, बीमारी है। भले ही वह तत्काल बीमारी न लगे, पर अंततः वह बीमारी के रूप में ही प्रकट होगा। चूंकि ज्यादातर आधुनिक लोगों ने अपने मस्तिष्क को अपने शरीर से अलग मान लिया है, इसलिए उनकी आत्मा उनके सामान्य जीवन से निर्वासित हो गई है। वे भूल जाते हैं कि शरीर, मन और आत्मा, तीनों की तंदुरुस्ती हमारी मांसपेशियों के तंतुओं की तरह आपस में घनिष्ठता से जुड़ी होती हैं। स्वस्थ रहने, तंदुरुस्त रहने और शरीर को लचीला बनाए रखने के लिए किए जाने वाले योगासन योग के केवल बाह्य अभ्यास हैं। बेशक यह योग की वैधानिक शुरुआत है, लेकिन यही अंत नहीं …

असिरगढ़ के किले में हैं अश्वथामा?

sabhar : http://videos.jagran.com/

सीमा पर 45 साल से देश की रक्षा कर रही है हरभजन सिंह की आत्मा

सिक्किम। देश के लिए जान न्यौछावर करने वाले सैनिकों के बारे में तो आपने सुना ही होगा, लेकिन क्या आपने कभी ऎसा भी सुना है कि एक सैनिक मरने के बाद भी पिछले 45 सालों से देश की सीमा पर तैनात है और बकायदा अपने सैनिकों की रक्षा कर रहा है। जी हां, ये बात सच्च है। पंजाब रेजिमेंट के जवान हरभजन सिंह की आत्मा पिछले 45 सालों से देश की सीमा की रक्षा कर रही है। सैनिकों का कहना है की हरभजन सिंह की आत्मा, चीन की तरफ से होने वाले खतरे के बारे में पहले से ही उन्हें बता देती है और यदि भारतीय सैनिकों को चीन के सैनिकों का कोई भी मूवमेंट पसंद नहीं आता है तो उसके बारे में वो चीन के सैनिकों को भी पहले ही बता देते है, ताकि बात ज्यादा नहीं बिगड़े और मिल जुल कर बातचीत से उसका हल निकाल लिया जाए। आप चाहे इस पर यकीं करे या ना करे पर खुद चीनी सैनिक भी इस पर विश्वास करते है इसलिए भारत और चीन के बीच होने वाली हर फ्लैग मीटिंग में हरभजन सिंह के नाम की एक खाली कुर्सी लगाईं जाती है ताकि वो मीटिंग अटेंड कर सके।
हरभजन सिंह का जन्म 30 अगस्त 1946 को, जिला गुजरावाला जो कि वर्तमान में पाकिस्तान में है, हुआ था। हरभजन सिंह 24वीं…

हरियाणा के 'रोबो' की गूगल मेले में धूम

बोल न पाने वाले लकवाग्रस्त मरीज़ों के लिए सस्ता कम्युनिकेशन सिस्टम बनाने वाले हरियाणा के 16 वर्षीय छात्र क्लिक करेंअर्श शाह उर्फ 'रोबो'को चर्चित गूगल साइंस फ़ेयर में फाइनलिस्ट चुना गया है. दुनिया की क़रीब डेढ़ प्रतिशत आबादी पार्किन्सन, एएलएस जैसी बीमारियों से ग्रस्त है जिनमें वे आम लोगों जैसी बातचीत नहीं कर पाते हैं.
पानीपत में बारहवीं के छात्र और रोबोटिक्स के शौकीन अर्श का दावा है कि वे मशीनें काफ़ी बड़ी और महंगी होती हैं. लोगों को सस्ता विकल्प उपलब्ध कराने के लिए उन्होंने ये लोग संवाद के लिए अपनी सांसों के इशारे को समझने वाली डिवाइसों पर निर्भर करते हैं. क्लिक करेंपॉकेट डिवाइस ‘टॉक’बनाया है. उन्होंने बीबीसी हिन्दी को बताया, “टॉक पॉकेट में फिट हो जाती है और इसकी क़ीमत पांच से सात हज़ार के बीच है. आमतौर पर ऐसी दूसरी डिवाइसों के लिए लाखों चुकाने पड़ते हैं.” कैसे काम करता है टॉक? अर्श के अनुसार, ‘टॉक’ एक ब्रेथ सेंसर के साथ जुड़ा होता है, जो मरीज़ के कान पर फिट होता है और उसका सेंसर ठीक नाक के नीचे पहुंचता है. मरीज़ ‘मोर्स कोड’ के आधार पर अपने सांसों की तीव्रता और पैटर्न के ज़रिए …