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बुधवार, 6 अगस्त 2014

स्मार्टफोन से नहीं होता कुछ भी डिलीट

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किसी को भेजा गया कोई ईमेल संदेश, एसएमएस या फिर अंतरंग तस्वीर आपके लिए चिंता का विषय बन सकता है. फोन से इसे हमेशा के लिए डिलीट करने के बाद भी, दरअसल यह फोन में ही छिपा रहता है और आपके दुश्मनों के हाथ लग सकता है.
Symbolbild Liebespaar mit Tablet im Bett
अपने कंप्यूटर पर जब आप किसी चीज को डिलीट कर देते हैं, तो वह रिसाइकिल बिन में जा कर सेव हो जाती है. इसी तरह ईमेल के इनबॉक्स से जब कुछ डिलीट किया जाता है, तो वह भी ट्रैश में सेव हो जाता है. अगर कंप्यूटर या मेल बॉक्स से हमेशा के लिए चीजें हटाना चाहें तो रिसाइकिल बिन और ट्रैश से भी उन्हें हटाना पड़ता है. इसके बाद आप चैन की सांस लेते हैं. पर सच्चाई यह है कि भले ही वह फाइल, फोल्डर या तस्वीर आपको नजर नहीं आ रही हो, लेकिन अब भी कहीं ना कहीं आपके कंप्यूटर में ही पड़ी है. कंप्यूटर एक्सपर्ट सॉफ्टवेयर की मदद से डिलीट की हुई चीजों को दोबारा निकाल सकते हैं. स्मार्टफोन भी बिलकुल इसी तरह काम करते हैं. इसलिए उनमें जमा आपकी सारी निजी जानकारी कभी भी वहां से नहीं हटती.
सेल्फी से सावधान
इसी बात की पुष्टि करने के लिए एंटी वायरस सॉफ्टवेयर की जानीमानी कंपनी अवास्ट ने ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट ईबे से बीस सेकंड हैंड एंड्रॉयड फोन खरीदे. बाजार में उपलब्ध सॉफ्टवेयर की मदद से चेक गणराज्य की इस कंपनी ने सभी फोनों में से डिलीट की हुई चीजें ढूंढ निकाली. अवास्ट के सीईओ क्रिस बेनहम कहते हैं, "हमारे फोन अब कंप्यूटर की जगह लेते जा रहे हैं. लोग फोन पर ही ऑनलाइन बैंकिंग के ऐप डाउनलोड कर लेते हैं और हर वह काम, जो वे पहले कंप्यूटर पर किया करते थे, अब फोन पर कर रहे हैं."
Avast Handy
फैक्ट्री रिस्टोर सेटिंग से भी फायदा नहीं
अवास्ट की मोबाइल शाखा के अध्यक्ष जूड मैककॉलगन ने डॉयचे वेले को बताया कि उन्हें इन बीस फोनों से 40,000 तस्वीरें मिलीं. इनमें करीब एक हजार अश्लील तस्वीरें भी शामिल हैं. मैककॉलगन बताते हैं कि लोग अंतरंग पलों में अपनी तस्वीरें लेते हैं और बाद में उन्हें फोन से मिटा कर संतुष्ट हो जाते हैं, "लेकिन अगर आप किसी को अपना फोन बेच देते हैं, तो वह किसी एक्सपर्ट के पास जा कर आपकी सारी जानकारी निकलवा सकता है."
एंड्रॉयड सॉफ्टवेयर की गड़बड़?
फोन बेचने से पहले लोग अक्सर 'फैक्ट्री रिस्टोर सेटिंग' पर जाते हैं जिसे एक्टिवेट करने से फोन से सब कुछ अपने आप डिलीट हो जाता है और फोन दोबारा वैसा ही हो जाता है, जैसा खरीदते समय था. अवास्ट ने जो फोन खरीदे, वे सब फैक्ट्री रिस्टोर पर थे. गूगल को जब इस बारे में पता चला तो आनन फानन में बयान दे दिया कि इन सभी फोनों में एंड्रॉयड के पुराने सॉफ्टवेयर हैं और पिछले तीन साल में गूगल इस समस्या को हल कर चुका है. लेकिन अवास्ट की मानें तो अधिकतर फोन एंड्रॉयड के ताजा सॉफ्टवेयर पर चल रहे थे.
हालांकि कुछ लोग इसे अवास्ट का पब्लिसिटी स्टंट भी मान रहे हैं, ताकि लोग अपने फोन को सुरक्षित रखने के लिए अवास्ट के सॉफ्टवेयर खरीदने लगें. सच्चाई कुछ भी हो पर जरूरी है कि इंटरनेट के इस दौर में अपनी सुरक्षा खुद की जाए और किसी नुकसान से बचने के लिए अपने फोन को सोच समझ कर इस्तेमाल किया जाए.
रिपोर्ट: रॉब कैमरन/ईशा भाटिया
संपादन: आभा मोंढे
sabhar : dw.de

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