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July 27, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

अब बनेगा हवा से पीने का पानी, आ गई मशीन

इजराइल। जल जीवन का दूसरा नाम है। जिसके बिना प्राणी जगत की कल्‍पना भी अधूरी है। पीने का जल जो एक पोषक तत्‍व की भूमिका भी निभाता है, मानव शरीर का 60 से 70 प्रतिशत भाग बनाता है। 

कहते हैं तीसरा विश्व युद्ध पानी के लिए होगा, लेकिन अब घबराने की आवश्यकता नहीं है। एक अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट में छपी खबर के अनुसार हवा से पानी बनाने वाली मशीन बन चुकी है। 

विश्‍व में कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां लोगों को पीने के लिए शुद्ध जल प्राप्‍त नहीं हो पाता है। 

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में तकरीबन 78 करोड़ लोगों को पीने का शुद्ध जल उपलब्‍ध नहीं हो पाता है और हर साल तकरीबन 34 लाख लोग केवल जल की दूषित होने से होने वाली बीमारियों से मर जाते हैं।वाटरजेन' नामक कंपनी ने हाल ही में हवा से जल बनाने की तकनीक को विकसित किया है। जिसमें अधिक नमी वाली हवा के तापमान को कम किया जाता है और इसके फलस्‍वरूप हवा में मौजूद जल के अणु नीचे गिरने लगते हैं और इन्‍हें एकत्रित कर लिया जाता है।

कंपनी के सहायक सीईओ ए कोहावी के अनुसार ''हवा के इस तंत्र में से गुजारने के पर सिस्‍टम हवा में की आर्द्रता को …

अंतरिक्ष में ऑक्‍सिजन बनाएगी ये पत्तियां

अंतरिक्ष यात्रा के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों को ऑक्सिजन की आपूर्ति जल्द ही मानव निर्मित पत्तियों से होगी। दुनिया की पहली कृत्रिम जैविक पत्ती का विकास हो चुका है, जो पानी और कार्बन डाईऑक्साइड का अवशोषण कर ऑक्सिजन पैदा करने में सक्षम है।

इस पत्ती का विकास करने वाले ब्रिटेन के रॉयल कॉलेज ऑफ आर्ट के जूलियन मेलकियोरी ने कहा कि इस खोज से लंबी दूरी की अंतरिक्ष यात्रा में सहूलियत होगी। साथ ही अंतरिक्ष में इंसान के बसने में भी यह मदद कर सकता है, क्योंकि शून्य गुरुत्वाकर्षण में पौधे नहीं उगाए जा सकते। खबरों के अनुसार, लंबी दूरी की अंतरिक्ष यात्रा के दौरान जिंदा रहने के लिए विभिन्न विधियों से ऑक्सिजन पैदा करने के लिए नासा लगातार शोध कर रहा है।

मेलकियोरी की रेशम पत्ती परियोजना का विकास रॉयल कॉलेज ऑफ ऑर्ट्स इनोवेशन डिजाइन इंजिनियरिंग कोर्स और टफ्ट्स यूनिवर्सिटी ऑफ सिल्क लैब से हुआ है। परियोजना के तहत क्लोरोप्लास्ट को रेशम के प्रोटीन में रखा जाता है। पदार्थ को सीधे रेशम के तंतुओं से अलग किया गया है, जिसमें अणुओं के स्थिरीकरण का गजब का गुण है। sabhar :http://navbharattimes.indiatimes.com/

होलोग्राम तकनीकी

होलोग्राम
शायद एक होलोग्राम का पहला और सबसे प्रसिद्ध चित्रण की थी कि
फिल्म 'स्टार वार्स' में राजकुमारी Leia.
आप हमारे अस्तित्व पर एक अलग परिप्रेक्ष्य हासिल करने के लिए एक होलोग्राम की मूल अवधारणा को समझना होगा.यह आप न केवल कैसे ब्रह्मांड कार्यों को समझने में मदद मिलेगी, लेकिन यह कैसे आप के रूप में अच्छी तरह से कार्य करते हैं.प्रतिबिंब और पारेषण: होलोग्राम के दो प्रकार होते हैं. परावर्तन होलोग्राम
परावर्तन होलोग्राम आप क्रेडिट कार्ड पर देखने तरह कर रहे हैं, और वे नकल करने के लिए लगभग असंभव है क्योंकि इन जालसाजियों को रोकने के लिए उपयोग किया जाता है.मैं यहाँ होलोग्राम के इस तरह के बारे में बात करने के लिए नहीं जा रहा हूँ.लेकिन, आप जानते हैं, अभी तो इन प्रतिबिंब होलोग्राम छवियों की कई परतों से बना रहे हैं.यह सिर्फ एक छवि फिल्म पर विभिन्न कोणों पर कई बार एक से अधिक संख्या फिर से रिकॉर्ड आमतौर पर है.एक पारदर्शी प्याज की परतों के बारे में सोचो, और आप विचार मिलता है.आप एक प्रतिबिंब होलोग्राम को देखो, अपनी बाईं आंख को अपनी दाहिनी आंख से एक अलग छवि देखता है.आपका मस्तिष्क छवि बनाता है एक तरह…

एलियंस को लेकर इसके दावे सुनकर चौंक जाएंगे

उसकी कही बात पर यकीन करना बहुत मुश्किल है। डेली मेल के मुताबिक नॉर्थ यॉर्कशायर में रहने वाले सायमन पार्क्स का ये दावा है कि उसने सालों पहले एलियन की थ्रीडी ईमेज यानी के एलियन होलोग्राफिक के साथ सेक्स किया था।

डेली मेल के अनुसार 54 साल के सायमन असलियत में शादीशुदा हैं और तीन बच्चों के पिता भी हैं। वो कहते हैं‌ कि उन्होंने अपनी वर्जिनिटी एलियन होलोग्राफिक के साथ ही लूज की थी।

वो ये भी कहते हैं कि एलियन के तौर पर जिसको वो पसंद करते हैं उसका नाम कैट क्वीन है और उससे हुए बच्चे का नाम जारका है। sabhar :http://www.amarujala.com/

दुनिया के पहले बिजली से चलने वाले विमान

लंदन: विश्व के पहले पूरी तरह से बिजली चालित विमान ने आकाश में सफलतापूर्वक उड़ान भरी। इस विमान को बनाने वाली कंपनी एयरबस ने बताया है कि यह विमान हवाई यात्रा की लागत में एक तिहाई से अधिक तक की कमी ला सकता है।
‘ई फैन’ के नाम वाले प्रयोग के तौर पर उड़ाए गये इस छोटे विमान ने दक्षिण-पश्चिमी फ्रांस में बौर्डिओक्स के निकट एक हवाई-अड्डे से उड़ान भरी और यह हरित, शांतिपूर्ण और सस्ती हवाई यात्रा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
एयरबस द्वारा निर्मित ई फैन की लंबाई 19 फुट से कुछ अधिक है और इससे एक हेयर ड्रायर से थोड़ा ही अधिक शोर होता है। 120 लिथियम आयन बहुलक बैटरी से युक्त इस विमान ने पिछले महीने 10 मिनट से अधिक समय तक उड़ान भरी और बिना रीचार्ज के यह विमान लगभग एक घंटे तक आसमान में उड़ान भर सकता है।
एक वेबसाइट के मुताबिक एयरबस ने बताया है कि ई फैन की एक घंटे की व्यावसायिक उड़ान में केवल 16 अमेरिकी डॉलर की लागत आएगी जबकि इसी आकार के पेट्रोल से चलने वाले विमान पर 55 अमेरिकी डॉलर की लागत आती है। (एजेंसी) sabhar :http://zeenews.india.com/

स्मार्टफ़ोन पहचानेगा कैंसर का रोग

इसराइल में शोधकर्ता एक ऐसा स्मार्टफ़ोन विकसित कर रहे हैं जो शरीर में कैंसर के रोगों की पहचान कर सकेगा.

चार सौ डॉलर (क़रीब 24,000 रुपये) की क़ीमत का यह स्मार्टफ़ोन उपकरण संभावित कैंसर की पहचान और उसका विश्लेषण करने में सक्षम होगा.


स्मार्टफ़ोन से ली गईं तस्वीरें उपयोगकर्ता द्वारा जांची जाती हैं और इसके बाद एक पेशेवर द्वारा पुनरीक्षण के लिए इन्हें अपलोड किया जाता है.

इस उपकरण से हरे रंग का प्रकाश निकलता है, जो कैंसर की कोशिकाओं को अलग रंग में दिखाता है.

इसमें लगा बड़ा लेंस त्वचा पर संभावित कैंसर और रक्त आपूर्ति की जगहों की तस्वीर लेता है.

पेशेवर विश्लेषणकर्ताओं द्वारा इन त्रिआयामी तस्वीरों का विश्लेषण किया जाता है.

मोबाइल ओसीटी के सीईओ एरियल बेरी के अनुसार, ''हम चाहते हैं कि इस उपकरण से दुनिया के किसी भी कोने में स्थित कोई भी व्यक्ति इन तस्वीरों को ले सके और उनका विश्लेषण किया जा सके.''

एरियल बेरी का कहना है कि ''हमारा मकसद है कि लोग अपनी जिंदगी को सुरक्षित रख सकें.''sabhar :http://www.bbc.co.uk/

कुंडलिनी जागरण से जुड़ा यह रहस्य चौंका देगा आपको

बहुत से लोग कहते सुने जाते हैं कि मेरी कुंडलिनी जाग्रत है, या जाग रही है। स्वात्माराम योगी के अनुसार योग साधना में लगे दस में से आठ लोगों को लगता है कि उनकी कुंडलिनी जाग रही है। लेकिन क्या यह सच है? इस विषय में की गई खोज जो यह बताती है कि ज्यादातर दावे खोखले ही हैं। लेकिन वे गलत भी नहीं है।

योगविद्या केंद्र अनुराधापुर (महाराष्ट्र) में शोध प्रयोग और अनुसंधान कर रहे योगी का कहना है कि जिन्हें कुंडलिनी जागरण का अनुभव होता है, वह सही इस मायने में है कि साधना के दौरान सचमुच ऐसा लगता है।

कुछ लोग साधना करने का अभिनय करते या आधे अधूरे मन से इस मार्ग पर चलते हैं। वे भी इस तरह के अनुभवों का दावा करने लगते हैं। लेकिन कई साधकों को अनुभूति होती है, पर वह प्रतीती मायावी ही होती है।

योग के पुराने ग्रंथ हठयोगप्रदीपिका के मार्ग पर चलते रहने का आदेश देते हुए गुरु से उस ग्रंथ के लेखक का ही नाम दिए जाने के बाद 1968 में इसी काम में लग गए योगी का कहना है कि जिसकी भी कुंडलिनी जाग्रत हो जाती है, और जब भी होती है तो वह असाधारण घटना होती है।

एक दायरे में साधना कर रहे योगियों को पता चल जाता है कि किसी की कुंडलिनी ज…

फेसबुक की Internet.org सर्विस जाम्बिया में शुरू, मुफ्त मिलेगा इंटरनेट

न्यूयॉर्क। इंटरनेट को दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाने की मुहिम में फेसबुक एक कदम आगे बढ़ गया है। फेसबुक के Internet.org प्रोजेक्ट को जाम्बिया में लॉन्च कर दिया गया है।  Internet.org सर्विस ऐप के जरिए जाम्बिया की एयरटेल यूजर्स को मुफ्त इंटरनेट सुविधा दी जाएगी। इस सर्विस के जरिए इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को कोई डाटा चार्ज नहीं देना होगा। यह उन इलाकों के लिए फायदेमंद माना जा रहा है, जहां आज भी इंटरनेट उपलब्ध नहीं है।  फेसबुक, दुनियाभर के कई मोबाइल ऑपरेटर्स के साथ मिलकर इस सर्विस को शुरू करने की दिशा में काम कर रहा है।  इसके जरिए एक्युवैदर, गूगल सर्च, विकीपीडिया, जॉब सर्च और हेल्थ इन्फोर्मेशन जैसी सर्विसेज का इस्तेमाल किया जा सकेगा। फेसबुक ऐप व इसकी मैसेंजर सर्विस भी इसमें शामिल है। यह ऐप एंड्राइड फोन्स के अलावा सामान्य मोबाइल्स में भी इंस्टॉल की जा सकेगी, जिनका इस्तेमाल ज्यादातर जाम्बिया निवासी करते हैं।  13 मुफ्त सर्विसेज के अलावा अगर यूजर्स किसी अन्य लिंक पर क्लिक करता है तो उसकी स्क्रीन पर 'डाटा चार्ज' का मैसेज दिखाई देगा। sabhar :http://www.bhaskar.com/

साल में एक बार खुलता है नागचंद्रेश्वर महादेव मंदिर, नागदेव के होते हैं दर्शन!

इंदौर/उज्जैन.हिंदू धर्म में सदियों से नागों की पूजा करने की परंपरा रही है। हिंदू परंपरा में नागों को भगवान का आभूषण भी माना गया है। भारत में नागों के अनेक मंदिर हैं, इन्हीं में से एक मंदिर है उज्जैन स्थित नागचंद्रेश्वर का। इसकी खास बात यह है कि यह मंदिर साल में सिर्फ एक दिन नागपंचमी पर ही दर्शनों के लिए खोला जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन नागदेव स्वयं मंदिर में मौजूद रहते हैं। नागपंचमी 1 अगस्त को है। ऐसे में 31 जुलाई की रात 12 बजे नागचंद्रेश्वर महादेव मंदिर के पट खुलेंगे तथा 1 अगस्त की रात 12 बजे तक दर्शन होंगे। नागचंद्रेश्वर के दर्शन को आने वाले आम श्रद्धालु रात 10.30 बजे तक ही दर्शन की लाइन में लग सकेंगे।
डेढ़ से दो घंटे में दर्शन : नागपंचमी पर ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर में प्राचीन श्री नागचंद्रेश्वर महादेव के सामान्य एवं वीआईपी मार्ग से श्रद्धालु के लिए प्रशासन ऐसी व्यवस्था कर रहा है कि डेढ़ से दो घंटे में दर्शन हो जाएं। वर्ष में एक बार खुलने वाले नागचंद्रेश्वर महादेव मंदिर में दर्शन के लिए इस बार भी प्रशासन को देशभर से करीब दो लाख से अधिक श्रद्धालु के उमडने की संभावना है। प्र…

ट्यूमर से लड़ने में सक्षम नैनो पार्टिकल तैयार

न्यूयॉर्क। प्राण घातक रोग कैंसर से लड़ने के प्रयास में शोधकर्ताओं ने अतिसूक्ष्म कण (नैनोपार्टिकल) तैयार किया है जिसमें कई तरह के एजेंट्स को समाहित किया जा सकता है। ये एजेंट्स शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय और मजबूत कर ट्यूमर पर हमला बोलते हैं। अमेरिका स्थित डर्टमाउथ कॉलेज के प्रोफेसर स्टीव फीरिंग ने कहा, अब तक के सभी शोध से अलग हमने प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करने के लिए नैनोपार्टिकल का इस्तेमाल किया है। नैनोपार्टिकल की सबसे रोमांचक बात यह है कि छोटा होने के बावजूद इसमें कई एजेंट्स को शामिल किया जा सकता है। ट्यूमर प्रतिरक्षा प्रणाली पर हमला कर यह अपनी वृद्धि करता है। कैंसरीकृत कोशिकाओं के टूटने और फैलने पर भी प्रतिरक्षा प्रणाली सामान्य रहती है। यह शोध जर्नल नैनोमेडिसिन और नैनोबायोटेक्नोलॉजी में प्रकाशित हुआ है। sabhar :http://www.jagran.com/

खुशकिस्मत हैं हम कि ज़िंदा हैं, दो साल पहले सोलर फ्लेयर से बची धरती, नासा का खुलासा

वाशिंगटन. राष्ट्रीय वैमानिकी एवं अंतरिक्ष प्रशासन ( नासा) ने एक सनसनीखेज रहस्योद्धाटन करते हुए कहा है कि 23 जुलाई 2012 को सूर्य पर आई एक शक्तिशाली सौर आंधी के दौरान विशाल सोलर फ्लेयर (सौर ऊर्जा की बहुत बड़ी मात्रा) या कोरोनल मास इजेक्शन (सीएमई) की टक्कर से पृथ्वी बच गई. पिछले 150 सालों के दौरान यह सबसे बड़ी सौर आंधी मानी जा रही है. अमेरिका के कोलराडो विश्वविद्यालय के डैनियल बेकर ने कहा, यदि ऐसा हुआ होता, तो हम अबतक टुकड़े चुन रहे होते. उत्क्षेपण (इजेक्शन) इतना शक्तिशाली था कि हम फिर से आदिम युग में पहुंच गए होते. एक अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, एक ऐसी आपदा से बचने में हम भाग्यशाली रहे, जो बिल्कुल हमारे सिर पर थी. सूर्य का रुख पृथ्वी से थोड़ा सा हटने के कारण ही ऐसा संभव हो पाया. अगर ऐसा एक सप्ताह पहले हुआ होता, तो परिणाम कुछ और ही होता. बेकर कहते हैं, पृथ्वी और इसके निवासी इस बात के लिए खुशकिस्मत हैं कि 2012 का उत्क्षेपण एक सप्ताह पहले नहीं हुआ. वैज्ञानिकों ने कहा कि प्रत्यक्ष सीएमई में इतनी ताकत होती है कि वह संचार के तमाम नेटवर्क, जीपीएस और विद्युत ग्रिड खत्म कर सकता है, जिसके कारण चहुं…

जिनके एक इशारे से इंद्र देव बादल लेकर आ जाते

सावन आ चुका है लेकिन आसमान से सूर्य देव आग उगल रहे हैं। प्यासी धरती पानी-पानी चिल्ला रही है लेकिन इन्द्र देव हैं की पानी नहीं बरसाने की कसम खाए बैठे हैं।

ऐसे में उस संत की याद आती है जिनके एक इशारे से इंद्र देव बादल लेकर आ जाते और झमाझम बरसात होने लगती थी।



इस महान संत का वास्तविक नाम 'शिवरत्न पंडित' था। इनका जन्म गोरखपुर के दीपगढ़ गांव में हुआ था। 15 वर्ष की उम्र में ही इन्होंने गृह त्याग कर दिया और काशी में आकर रहने लगे।

यहीं तप साधना द्वारा इन्होंने ऐसी सिद्घियां हासिल कर ली कि इनके एक संकेत मात्र से खिली हुई धूप में भी बरसात होने लगती थी।यह महान संत काशी में कच्चा बाबा के नाम से प्रसिद्घ हुए। कच्चा बाबा के नाम से मिली प्रसिद्घि का कारण यह था कि इन्हें जो भी चावल, दाल, आटा मिलता उसे बिना पकाए कच्चा ही खा जाते थे।

इस महान संत ने 84 साल की उम्र में 1914 ईश्वी में देहत्याग किया। अगर यह संत आज होते तो जिस तरह से पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची है वह हाल नहीं होता।sabhar :http://www.amarujala.com/

तीर्थों में अद्भुत शक्ति आखिर कहां से और कैसे आती है

ज्योतिर्मय

पृथ्वी पर कुछ स्थान ऐसे हैं जो व्यक्ति की ऊर्जा को ऊपर की ओर खींचते हैं। कुछ ऐसे भी हैं जो नीचे की ओर ले जाते है। चेतना को अनायास ही ऊपर ले जाने वाले स्थान तीर्थ कहे जाते हैं। योग को विज्ञान की कसौटी पर कसने वाले विज्ञानियों का मानना है कि पृथ्वी पर कुछ स्थान तो स्वयंसिद्ध हैं।कुछ प्रयोगों और व्यवस्थाओं के जरिए संस्कारित किए जाते हैं। प्रसिद्ध थियोसोफिस्ट बेंजामिन जूइस के अनुसार भारत में इस तरह की जागृत जगहों की भरमार है। हिमालय को इस तरह के स्थानों का ध्रुव प्रदेश बताते हुए उन्होंने दावा किया कि हजार साल बाद मैडम ब्लैवटस्की, लेडबीटर, एनीबिसेंट आदि सिद्ध आत्माओं ने हिमालय के इन सिद्धकेंद्रों की खोज की।

वहां से आध्यात्मिक ऊर्जा की तरंगे भी फैलाई। कोयंबटूर के ईशा योग फाउंडेशन के अऩुसंधान कर्ताओं का कहना है कि पृथ्वी पर उस तरह के नैसर्गिक केंद्रों की भरमार है। अगर आप ऐसे स्वयंसिद्ध केंद्र पर हों तो ऊर्जा अपने आप ऊपर की तरफ जाएगी। और इस केंद्र या स्थान से दूर जाने पर चेतना के उत्थान की विशेषता कम होती जाती है।ईशा फाउंडेशन के अनुसार भूमध्य रेखा के उत्तर और दक्षिण में 33 डिग्री तक …

आत्महत्या के लिए बदनाम है मेट्रो स्टेशन पर है भूतों का साया

भूत कभी भी और कहीं भी हो सकते हैं। चाहे वह विराना हो या भीड़ भार वाला मेट्रो स्टेशन। यहां हम जिस मेट्रो स्टेशन की बात कर रहे हैं वह किसी दूसरे देश का नहीं बल्कि भारत का ही एक मेट्रो स्टेशन है।

इस स्टेशन पर भूतों का ऐसा साया है कि कई लोग ट्रैक पर कूद कर जान दे चुके हैं।




यह मेट्रो स्टेशन कोलकाता में स्थित है। इस स्टेशन का नाम है रवीन्द्र सरोवर। इस मेट्रो स्टेशन के बारे में कहा जाता है कि यहां पर भूतों का साया है। रात 10:30 बजे यहां से आखिर मेट्रो गुजरती है।

उस समय कई मुसाफिर और मेट्रो के ड्राइवरों ने भी इस चीज का अनुभव किया है कि मेट्रो ट्रैक के बीच अचानक कोई धुंधला साया प्रकट होता है और पल में ही गायब हो जाता है।
कोलकाता का यह मेट्रो स्टेशन यहां का सुसाइड प्वांट माना जाता है। कारण यह है कि यहां पर कई लोगों ने ट्रैक पर कूद कर आत्माहत्या की है।

वैसे भूत प्रेतों में विश्वास नहीं करने वाले लोग यह मानते हैं कि यह मेट्रो स्टेशन टॉलीगंज टर्मिनल के बाद पड़ता है जहां अधिकांश मुसाफिर उतर जाते हैं। इसलिए यहां अधिक भीड़ नहीं रहती है। यही कारण हो सकता है कि इस मेट्रो को सुसाइड प्वांट और भूतहा कहा जाता ह…