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July 20, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

जब आपका कपड़ा हर सेकेंड बदलेगा अपना रंग

वाशिंगटन : कल्पना कीजिए कि रंग बदलने वाले आपके कपड़े आपको गिरगिट की तरह रंग बदलने जैसा बना दें तो आपको कैसा लगेगा। बुडापेस्ट के एक कपड़ा डिजायनर ने एक ऐसा कपड़ा बनाने का दावा किया है जो सेकेंडों में रंग बदल सकता है। ज्यूडिट एस्टर कारपैटी की अध्यक्षता वाली इस परियोजना के तहत, कपड़े में आवाज और सेंसर लगाया गया है।
‘गिजमोडो’ ने खबर दी कि इस परियोजना में 12 वोल्ट आपूर्ति के साथ एक आर्डूइनो और चार इंडस्ट्रीयल 24 वोल्ट डीसी बिजली आपूर्ति नियंत्रित करने वाले 20 कस्टम पिंट्रिड सर्किट बोर्ड शामिल हैं जो निक्रोम तार वाले दो टेक्सटाइल वूवन को गर्म करे। कारपैटी ने कहा, मेरा इरादा यह खोजने का था कि मैं डिजिटल मीडिया की दुनिया को वस्त्र कला में कैसे लेकर आउं।
(एजेंसी) sabhar :http://zeenews.india.com/

जेनेटिक मैपिंग से इलाज

वैज्ञानिकों ने इंसानी डीएनए में ऐसे 100 जगह ढूंढ निकाले हैं जिनके कारण व्यक्ति में शिजोफ्रेनिया जैसी बीमारी पैदा हो सकती है. इससे बीमारी के कारणों से पर्दा उठा.इस तरह की जेनेटिक मैपिंग से नए इलाज की संभावनाएं पैदा होती हैं. हालांकि उनमें भी अभी कई साल लग जाएंगे. लेकिन नए नतीजों से ठोस आनुवंशिक सबूत मिले हैं जो इस थ्योरी को पक्का करते हैं कि प्रतिरोधक प्रणाली और इस बीमारी के बीच कैसा जुड़ाव है.
शिजोफ्रेनिककी जेनेटिक मैपिंग में दुनिया भर से 100 वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया. इस सबसे बड़े शोध से पहले वैज्ञानिकों को सिर्फ कुछ हिस्से पता थे, जो जेनेटिक कारणों की ओर इशारा करते थे. जेनेटिक मैपिंग से मदद की उम्मीद शोध में डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों के आनुवंशिक कोड देखे गए और इनमें से 37,000 को ये बीमारी होने की आशंका थी. शोधकर्ताओं ने डीएनए में 180 मार्कर ढूंढ निकाले, जिनमें से 83 ताजा शोध में पता लगे हैं. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि और मार्कर पता चल सकते हैं. शोध के सह लेखक स्टीव मैककैरल हार्वर्ड और एमआईटी में जेनेटिक संस्थान के निदेशक हैं, "यह आनुवंशिक पर्दाफाश है, शिजोफ्रेनिया एक तरह का रह…

ALIENS के अस्तित्व को लेकर वैज्ञानिक कर रहे माथापच्ची

एलियन यानी ऐसे जीव जो पृथ्वी के बाहर किसी दूसरे ग्रह पर रहते हों। पर एलियन होते भी हैं या नहीं, यह एक बड़ा सवाल है। एलियंस की मौजूदगी पर दशकों से रिसर्च होती रही हैं, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि एलियंस हैं भी या नहीं। यदि हैं तो वे कहां रहते हैं? वे तकनीकी रूप से कितने सक्षम हैं? ऐसे सवालों के जवाब पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों के लिए चुनौती है। किसी दूसरे ग्रह पर जीवन की तलाश पिछले छह दशकों से तो बेहद तेज हो गई है। इस बारे में कई ठोस सबूत तो मिले हैं, लेकिन अब तक कुछ स्पष्ट नहीं हो पाया है। 
कई जगह है मौजूदगी की उम्मीद
केवल मंगल ग्रह ही ऐसा नहीं है, जहां एक्स्ट्राटेरेस्ट्रियल लाइफ (यानी दूसरे ग्रह पर जीवन) की संभावना हो। हमारे सौरमंडल में कई ऐसे स्थल हैं, जो रहने योग्य हो सकते हैं। इनमें जूपिटर और शनि के बर्फीले चंद्रमा, यूरोपा आदि शामिल हैं, जहां पर जीवन का समर्थन करने में सक्षम सर्फेस ओशियन्स मौजूद हो सकते हैं। वैसे वैज्ञानिकों के अनुसार हमारे सौरमंडल में शनि ग्रह का चंद्रमा टाइटन और सोलर सिस्टम से बाहर का ग्रह ‘ग्लीज 581जी’ में जीवन होने की सबसे अधिक संभावना है। ये दोनों…

सड़कों पर तेज दौड़ने वाली यह है भविष्य की ट्राम, देखिए तस्वीरें

इंटरनेशनल डेस्क। रूस का ये नया ट्राम किसी साइंस फिक्शन मूवी से कम नहीं है। इस अति आकर्षक ट्राम को रूसी कंपनी यूवीजेड ने डिजाइन किया है। एलेक्सी मास्लोव Alexei Maslov इसके डिजाइनर हैं। इसे रशिया वन या आर1 नाम दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यूवीजेड ने इस खूबसूरत ट्राम को अगले 20-50 साल को ध्यान में रख कर डिजाइन किया है।  एडवांस तकनीक और कम्पोजिट मैटीरियल के इस्तेमाल के चलते आर 1 के हर पैनल बड़ी आसानी से बदला जा सकेगा। वहीं, ट्राम की नुकीली नाक ड्राइवर को बेहतर व्यू देगी, जिससे पदयात्रियों से भिड़ने की संभावना न के बराबर रहेगी। बैटमोबाइल (कॉमिक सुपरहीरो बैटमैन द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला कार) सरीखा दिखने वाला ये ट्राम जितना एडवांस्ड बाहर से दिखता है, उतना ही हाईटेक अंदर से भी है। वाई-फाई, जीपीएस और कमाल की एलईडी लाइटिंग इसके इंटीरियर को ​चार-चांद लगाती हैं। एलईडी लाइटिंग की खासियत है कि ये मौसम के हिसाब से रोशनी देती है। ये भी खास
डायनैमिक एलईडी लाइटिंग के अलावा एयर कंडीशन, एंटी बैक्टीरियल हैंड रेलिंग के अलावा मोबाइल चार्ज करने के लिए यूएसबी 3.0 पोर्ट सरीखी सुविधा भी है। वैसे, …

भगवान श्रीकृष्ण ने क्यों कहा है कि 'हर वस्तु में होता है आश्चर्य'

स्वामी सुखबोधानंद 'भारतीय दर्शन कहता है कि सफलता ही सब कुछ नहीं है बल्कि व्यक्ति को संतुष्टि भी चाहिए। सफलता के बावजूद जीवन में असफलता का एहसास बना रहेगा क्योंकि जीवन में संतुष्टि से ही आनंद आता है।' हम जो भी करते हैं वह क्रिया होना चाहिए, उसमें किसी काम को करने की इच्छा झलकनी चाहिए। अगर हम कोई काम प्रतिक्रिया स्वरूप करते हैं तो जीवन को नरक बना लेते हैं। छोटा सा उदाहरण देखिए, हम गुड इवनिंग क्यों कहते हैं? इसलिए कि आते-जाते हम मिलते हैं तो एकदूसरे का अभिवादन करते हैं। तो क्या यह औपचारिक है? शायद नहीं, क्योंकि इसका मतलब होता है। मतलब है कि यह शाम सुंदर है और अगर सुंदर नहीं है तो हम इसे सुंदर बना सकते हैं। लेकिन अगर हम शब्दों के बारे में सोचते नहीं हैं और उन्हें बस यंत्रवत उच्चारते जाते हैं तो जीवन में आश्चर्य और आनंद नहीं रहता। हम बस गुड इवनिंग, गुड मार्निंग कहते हैं लेकिन हमारा आशय सुबह-शाम को सुंदर बनाने का नहीं होता। तब हम सुबह-शाम को महसूस नहीं कर रहे हैं। हम प्रतिक्रिया स्वरूप गुड मार्निंग कह रहे हैं लेकिन गुड मार्निंग का अर्थ हमें पता नहीं है। इस तरह के यंत्रवत जीवन में हम…

बलात्कारी को जलाने वाली ब्रा

भारत के कुछ युवा इंजीनियरों ने मिलकर ऐसी इलेक्ट्रिक ब्रा तैयार की है जो बलात्कार जैसी घटनाओं में सुरक्षा कवच की तरह काम करेगी. ब्रा को सोसाइटी हार्नेसिंग एक्विप्मेंट 'शी' नाम दिया गया है. दिसंबर 2012 में दिल्ली में एक छात्रा के साथ हुए बलात्कार कांड ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींचा. महिलाओं, छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं समेत हजारों लोगों ने सड़कों पर प्रदर्शन किया. इस हादसे के बाद ही बलात्कार के मामलों में कानूनों को सख्त किया गया. लेकिन इस तरह की घटनाएं थमी नहीं हैं. इस पूरे दौर ने 22 साल की इंजीनियरिंग की छात्रा मनीषा मोहन को भी प्रभावित किया जिन्होंने इलेक्ट्रिक ब्रा तैयार करने का फैसला किया. मनीषा और उनके दो साथियों ने इस बारे में सर्वे किया और इलेक्ट्रिक शॉक देने वाली शी ब्रा तैयार करने से पहले कई और मॉडल बनाने कोशिश की. उन्होंने डॉयचे वेले को बताया कि उनके इस काम के लिए उन्हें अंतर्राष्ट्रीय प्रोत्साहन मिल रहा है. जला सकती है 'शी' ब्रा में दबाव के खिलाफ सेंसर लगे हैं. ये इलेक्ट्रिक सर्किट से जुड़े हुए हैं जो 3,800 किलो वॉट तक का इलेक्ट्रिक शॉक दे…

घटती आबादी का जवाब रोबोट

बाल धोने से लेकर पैर दबाने तक, घर का काम से लेकर अंतरिक्ष को मापने तक, जापान में रोबोट अब आम जिंदगी का हिस्सा बनने लगे हैं. अब जल्द ही वहां की बूढ़ी होती जनसंख्या की देखभाल रोबोट करेंगे. एक नए शोध में जापान के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि नर्सिंग सेक्टर में करीब दो करोड़ लोगों की जरूरत होगी क्योंकि जापान के लोग बूढ़े हो रहे हैं. 2012 में इस सेक्टर में काम कर रहे लोगों की संख्या करीब 1.5 करोड़ थी.
देखभाल और नर्सिंग जैसे कामों को कम लोग पसंद करते हैं क्योंकि यह मेहनत का काम है. अकसर कर्मचारी इस तरह के कामों को छोड़ देते हैं क्योंकि बड़े बूढ़ों को उठाने और उनकी मदद करने में वे खुद बीमार हो जाते हैं. साथ ही जापान में कम बच्चे पैदा हो रहे हैं और बेहतर स्वास्थ्य की वजह से लोगों की उम्र बढ़ रही है. इस संकट को टालने के लिए जापान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक स्कीम तैयार की है जिसमें बड़े बूढ़ों की मदद के लिए रोबोट लगाए जाएंगे.
केयर होम में मदद
नवंबर में 15 कंपनियों के इंजीनियरों और एक्सपर्टों ने 10 नर्सिंग होम में प्रयोग किए. इनके मालिकों से रोबोट में निवेश करने को कहा गया. होकाईडो बुंकयो विश…

योगी के साथ योग जारी रहेगा

अच्छे खेल के साथ योग ने भी विश्व कप जीतने में जर्मन टीम की मदद की. टीम हर दिन समुद्र के किनारे योगाभ्यास करती थी. योगी के नाम से मशहूर कोच योआखिम लोएव की टीम आगे भी ऐसा करती रहेगी. "मैं इस वक्त किसी ऐसे काम के बारे में नहीं सोच सकता जो मेरे अभी के काम से अच्छा हो." लोएव टीम को 2016 के यूरोकप के लिए भी ट्रेन करेंगे और टीम और खिलाड़ियों पर काम करते रहेंगे. लोएव ने पिछले साल ही जर्मन फुटबॉल संघ डीएफबी के साथ अपना करार 2016 तक बढ़ाया था. लेकिन मीडिया में इस तरह की अफवाहें उड़ रही थीं कि लोएव टीम को छोड़ना चाहते हैं. लेकिन कोच ने खुद इन अफवाहों को गलत बताया, "मैंने तो इसके बारे में एक पल भी नहीं सोचा. मैं तो सिर्फ वही कर रहा हूं जिसको लेकर विश्व कप से पहले बात हुई थी, कि हम मैच के बाद टूर्नामेंट का विश्लेषण करेंगे." वर्ल्ड कप विजेता टीम का सफर बर्लिन के मशहूर ब्रांडेनबुर्ग गेट पर आकर थमा. विशाल मंच पर कोच समेत पूरी टीम आई. खिलाड़ियों ने एक एक ट्रॉफी उठाई और मुग्ध दर्शकों के साथ झूमने लगे.
लोएव कहते हैं कि विश्व कप के दौरान कई चीजें बदल जाती हैं और इसके बाद उन्हें थोड़ा वक्त…

एचआईवी के इलाज में एक नया कदम

वैज्ञानिकों ने एचआईवी संक्रमण के इलाज में एक ''रोमांचक'' कदम बढ़ाने की बात कही है. एचआईवी वायरस, संक्रमित व्यक्ति के डीएनए का हिस्सा बनकर दशकों तक निष्क्रिय रह सकता है जिससे बीमारी का इलाज नामुमकिन हो जाता है.
नया शोध क्या कहता है आगे पढ़ेंलेकिन अब वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि वायरस को फिर से सक्रिय किया जा सकता है. ये अध्ययन एड्स 2014 कॉन्फ़्रेंस में पेश किया गया. छह संक्रमित व्यक्तियों पर किए गए शुरुआती अध्ययन में पाया गया है कि कीमोथेरेपी में दवा की कम मात्रा इस्तेमाल करने से वायरस को सक्रिय किया जा सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि ये एक आशाजनक शुरुआत है लेकिन सिर्फ़ दवा से ही एचआईवी का इलाज मुमकिन नहीं होगा. एंटी-वायरल दवाओं से एचआईवी वायरस, रक्त प्रवाह में उस स्तर तक पहुंच सकता है जहां इसकी जांच नहीं हो पाती. इसका मतलब ये है कि एचआईवी पॉज़िटिव लोग लगभग सामान्य जीवनकाल जी सकते हैं. लेकिन इसमें एक मुश्किल होती है. एचआईवी वायरस अपना डीएनए हमारे डीएनए में मिला सकता है जहां ये प्रतिरक्षी तंत्र और दवाओं की पहुंच से बाहर हो जाता है. इस प्रक्रिया को एचआईवी रिज़र्वायर क…

इस सत्य तक जाना हो, तो निर्वस्त्र जाना होगा

यह मजे की बात है। जिस दिन तुमने जो-जो जाना है, यदि उसे बिल्कुल विस्मरण कर दोगे, उस दिन तुम्हें आत्म स्मरण आएगा कि गुरु देता है ध्यान। इसका अर्थ है कि गुरु छीन लेता है ज्ञान। और जहां तुम्हें ऐसा गुरु मिले, जो तुमसे ज्ञान छीनता हो, वहां हिम्मत करके रुक जाना।

क्योंकि वहां से भागने का मन होगा। सोचेंगे, यहां हम तो कुछ लेने आए थे, उल्टा और गंवाने लगे। आदमी लेने के लिए घूम रहा है। कहीं से कुछ मिल जाए तो थोड़ा और अपनी संपत्ति बढ़ा ले। अपनी तिजोरी में थोड़ी जानकारी और रख लें, थोड़ा और पंडित हो जाएं।एक जर्मन खोजी रमण के पास आया और उसने कहा कि मैं आपके चरणों में आया हूं कुछ सीखने। आप मुझे सिखाएं। रमण ने कहा, तुम गलत जगह आ गए। अगर सीखना है, तो कहीं और जाओ। अगर भूलना है, तो हम राजी हैं। रमण के वचन हैं--‘इफ यू हैव कम टू लर्न देन यू हैव कम टु दि रांग परसन।

इफ यू आर रेडी टु अनलर्न देन आई एक रेडी टू हेल्प यू।’ वह जो तुमने जाना है, उसी के कारण तुम्हें अपना पता नहीं चल पा रहा है। तुम्हारे और तुम्हारे जानने के बीच में तुम्हारी जानकारी की दीवार खड़ी हो गई है।अगर तुम्हें स्वयं को जानना है तो और सब जानने के व…

विज्ञान ईश्वर के अस्तित्व से इन्कार नहीं कर सकता

photo : gogale


संसार की प्रत्येक वस्तु का कोई न कोई निर्माता होता है तभी वह बनती है। इतने बड़े विश्व का भी कोई न कोई निर्माता होना चाहिए। सृष्टि की विभिन्न वस्तुओं में से प्रत्येक में अपने-अपने नियम क्रम पाये जाते हैं। उन्हीं के आधार पर उनकी गतिविधियां संचालित होती हैं। यह नियम न होते तो सर्वत्र अस्त-व्यस्तता और अव्यवस्था दृष्टिगोचर होती। इन नियमों का निर्धारणकर्ता कोई न कोई होना चाहिए। जो भी शक्ति इस निर्माण एवं नियन्त्रण के लिए उत्तरदायी है वही ईश्वर है। वस्तुओं का उगना, बढ़ना जीर्ण होना, मरना और फिर उनका नवीन रूप धारण करना, यह परिवर्तन क्रम भी बड़ा विचित्र किन्तु विवेकपूर्ण है। इस प्रगति चक्र को घुमाने वाली कोई शक्ति होनी चाहिए। यह जड़ता का स्वसंचालित नियम नहीं हो सकता।

विज्ञान इस निष्कर्ष पर पहुंच गया है कि संसार का मूल तत्व एक है। एक ही ऊर्जा अपनी विभिन्न चिनगारियों के रूप में, विभिन्न दिशाओं में, विभिन्न रंग-रूप में उछल-कूद कर रही है। यहां आतिशबाजी का तमाशा हो रहा है। कुशल शिल्पी बारूद को कई उपकरणों के साथ बनाकर कई प्रकार के बारूदी खिलौने बना देते हैं, उनमें से कोई आवाज करता है…