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July 13, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

दिल के अंदर ही बन जाएगा पेसमेकर

अपने ही शरीर में खुद का पेसमेकर तैयार करने की कल्पना जल्द ही हक़ीक़त में बदल सकती है. वैज्ञानिकों ने सुअरों में इसके कामयाब प्रयोग किए हैं. वैज्ञानिकों ने हृदय की कोशिकाओं में एक जीन डालकर उन्हें पेसमेकर कोशिका में बदल दिया.
क्लिक करेंलॉस एंजेलिस के सिडार्स-सिनाई हार्ट इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों के अनुसार 'जैविक पेसमेकर एक बीमारी का प्रभावी ढंग इलाज करने में' कामयाब रहा है. ब्रिटिश हार्ट फ़ाउंडेशन के अनुसार क्लिक करेंसाइंस ट्रांसलेशनल मेडिसिन में प्रकाशित शोध को प्रयोग में आने में 'अभी बहुत समय लगेगा.' शोधकर्ताओं ने ऐसे सुअरों में एक जीन को डाला जिन्हें हृदयगति धीमी रहने की बीमारी थी. इस जीन थैरेपी ने करोड़ों की संख्या में मौजूद दिल की मांसपेशियों में से कुछ को बहुत दुर्लभ उन विशेष कोशिकाओं में बदल दिया जो दिल की धड़कन को एक समान रखती हैं. पारंपरिक पेसमेकर (जैविक पेसमेकर कोशिकाओं की तस्वीर) शोध दल का नेतृत्व करने वाले डॉक्टर एडुआर्डो मार्बन ने कहा, "पहली बार हम एक जैविक पेसमेकर तैयार करने में कामयाब हुए हैं जिसमें कम से कम बाहरी दखल दिया गया है. इससे यह भी पता चला …

सावधान! नहीं तो आपको भी हो सकता है ब्रेन स्ट्रोक

शरीर में रक्त प्रवाह में किसी तरह की बाधा आपको भारी नुकसान पहुंचा सकती है। आपकी जान भी जा सकती है। खासकर उस स्थिति में जब मस्तिष्क में रक्त की आपूर्ति बाधित होती हो। इसे हम ब्रेन स्ट्रोक भी कहते हैं। ब्रेन स्ट्रोक किसी बाधा के कारण इश्चेमिया (रक्त संचार में कमी) या फिर हेमरेज (रक्तस्त्राव) के कारण होता है। हलांकि एक आम इंसान को ब्रेन स्ट्रोक के बारे में पता नहीं होता। इसके क्या प्रभाव होते हैं, इसके होने पर तुरन्त क्या करना चाहिए, क्या इसका इलाज संभव है आदि बातों से वह पूरी तरह से अंजान रहता है। वैसे एक आम इंसान के सामने सबसे जरूरी सवाल तो यही होता है कि ब्रेन स्ट्रोक के सामान्य लक्षण क्या हैं? तनाव, मधुमेह, धूम्रपान, मोटापा, उच्च कोलेस्ट्रॉल स्तर और हृदय रोग ब्रेन स्ट्रोक के लिए प्रमुख खतरे हो सकते हैं। अगर आप भी इस तरह के खतरों से पीड़ित हैं तो हो जाइए सावधान! ब्रेन स्ट्रोक के सामान्य लक्षण 1. बांह में कमजोरी : स्ट्रोक के मरीज को एक या दोनों बांहों में सुन्न होने या कमजोरी का एहसास हो तो जरूर डॉक्टर को दिखाना चाहिए। याद रहे सुन्न होने की स्थिति में मरीज का हाथ उपर नहीं उठता। 2. चेहरे क…

स्टीफन हॉकिंग ने लांच किया सुपर कंप्यूटर

लंदन। प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग ने सुपर कंप्यूटर लांच किया है। हॉंिकंग का मानना है कि एसजीआइ कंपनी द्वारा निर्मित कॉसमॉस सुपरकंप्यूटर अपनी तरह का पहला कंप्यूटर है जो संभावनाओं के नए द्वार खोल सकेगा। यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज के सेंटर फॉर मैथेमेटिकल साइंसेज में न्यूमेरिकल कॉस्मोलॉजी कार्यशाला में सुपरकंप्यूटर के लांच के मौके पर हॉकिंग ने कहा कि हमने हाल ही में पार्टिकल फिजिक्स और कॉस्मोलॉजी [ब्रह्मांड विज्ञान] के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। कॉस्मोलॉजी अब एक वास्तविक विज्ञान है। इसलिए हमें वास्तविक ब्रह्मांड तक पहुंच और उसके बारे में अनुसंधान करने के लिए कॉस्मॉस की जरूरत है। कार्यशाला का आयोजन इनटेल की मदद से किया गया था। इसमें कंप्यूटेशनल कॉस्मोलॉजी से जुड़े प्रमुख लोगों ने हिस्सा लिया। हॉंिकंग ने कहा, 'मुझे उम्मीद है कि जल्द ही ऐसी परिकल्पना मिल जाएगी जिससे सैद्धांतिक तौर पर ब्रह्मांड में होने वाली प्रत्येक घटना की भविष्यवाणी की जा सकेगी।' कॉस्मॉस संघ का वर्तमान शोध कार्यक्रम ब्रह्मांड की उत्पत्तिऔर संरचना को लेकर समझ बढ़ाने से संबंधित है। sabhar :http://ww…

शोधकर्ताओं ने ढूंढा स्टीफन हाकिंग की बीमारी का इलाज

लंदन। शोधकर्ताओं ने ब्रिटेन के मशहूर भौतिक शास्त्री स्टीफन हॉकिंग की तंत्रिका तंत्र संबंधी बीमारी मोटर न्यूरोन का उपचार खोज निकालने की उम्मीद जताई है। नई तकनीक का अगले साल तक चिकित्सकीय परीक्षण किया जा सकता है। शेफील्ड इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसलेशनल न्यूरोसाइंस के मुताबिक, इस तकनीक से मोटर न्यूरोन बीमारी के उपचार का मार्ग प्रशस्त होगा। इसकी मदद से ऐसे लोगों की पहचान की जा सकेगी, जिसके परिवार में तंत्रिका तंत्र संबंधी बीमारी रही हो। इससे जीन संबंधी गड़बड़ी को पहले ही सुधारा जा सकेगा। जीन थेरेपी के प्रोफेसर मिमोन अजोज के मुताबिक, मोटर न्यूरोन बीमारी का कोई इलाज नहीं है। इससे पीड़ित व्यक्ति के जिंदा बचने की संभावना बहुत कम होती है। व्यक्ति अपनी मांसपेशियों पर नियंत्रण खो बैठता है। इसके कुछ मामले अनुवांशिक होते हैं जिनमें एसओडी1 जीन की गड़बड़ी पाई जाती है। हम इस जीन की गड़बड़ी को सही करने के प्रयास कर रहे हैं। ताकि बीमारी के लक्षण उभरने से पहले ही जीन का उपचार किया जा सके। प्रोफेसर अजोज ने कहा, मौजूदा समय में रिलुजोल नाम की दवा से मरीज के जीवनकाल को तीन से छह महीने के लिए बढ़ाया जा सकता है। लेकिन …

मस्तिष्क चिप लगाई, लकवाग्रस्त हाथ में हुई हलचल

नई दिल्ली। आए दिन तकनीक के ऐसे कारनामे सामने आते हैं, जिन्हें देखकर हर कोई वाह-वाह कर उठता है। अमेरिका के ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी वेक्सनर मेडिकल सेंटर और धर्मार्थ ट्रस्ट बैटेले मेमोरियल इंस्टीट्यूट के संयुक्त प्रयासों से शोधकर्ताओं ने चार सालों से लकवाग्रस्त व्यक्ति के हाथों में हलचल पैदा कर दी, वह भी उसके मस्तिष्क के पूर्ण नियंत्रण के साथ। 23 वर्षीय इयान बर्कहार्ट का शरीर चार साल पहले लकवाग्रस्त हो गया था। इसके बाद से ही वह अपने हाथों का इस्तेमाल करने में अक्षम हो गया था। शोधकर्ताओं ने एक बेहद छोटे चिप न्यूरोब्रिज को इयान के मस्तिष्क में लगाकर इस कारनामे को अंजाम दिया। यह न्यूरोब्रिज प्रभावित क्षेत्र को पार करते हुए मस्तिष्क के संकेतों को सीधे इयान की मांसपेशियों तक पहुंचा देता है। न्यूरोब्रिज को तैयार करने में वैज्ञानिकों को दस साल का वक्त लगा। इयान के हाथ को इस इलाज के लिए तैयार करने में भी लंबा वक्त लगा और फिर तीन घंटे के ऑपरेशन के जरिए चिप को उसके दिमाग में लगा दिया गया। इयान ने कहा, 'यह एक स्वप्निल सा अनुभव है। मैं यह स्वीकार कर चुका था कि अब मैं कभी अपने हाथ का इस्तेमाल नह…

पूर्वजन्म का बदला लेने के लिए स्त्री बनकर लिया दूसरा जन्म

यह कहानी उस स्त्री की है जो पूर्वजन्म में एक गाय थी। इस गाय का मालिक कसाई था। एक दिन यह गाय अपना बंधन तोड़कर भाग चली। कसाई गाय का पीछा करता दौर रहा था।

रास्ते में एक व्यक्ति ने उसे पकड़ लिया और गाय को कसाई के हवाले कर दिया। समय बीता और गाय ने दूसरा जन्म लिया।गाय एक स्त्री बनी और कसाई उसका पति। गाय को पकड़ने वाले का भी पुनर्जन्म हुआ और वह कसाई बना। इस कसाई का नाम था सदन।

सदन कसाई होने पर भी पूर्वजन्म के कर्मों के कारण ईश्वर में बड़ी आस्था रखता था। एक बार यह तीर्थयात्रा पर निकला।रास्ते में इसने एक घर में आश्रय मांगा। उस घर में सिर्फ पति-पत्नी रहते थे। सदन ने देखकर वह स्त्री मोहित हो गई। रात में जब उसका पति सो गया तब वह सदन के पास आई और प्रेम की प्रार्थना करने लगी।

लेकिन सदन ने उसकी बात नहीं मानी। स्त्री को लगा कि सदन उसके पति के भय से उसके प्रेम को स्वीकार नहीं कर रहा है। स्त्री घर के अंदर गई और तेज हथियार से अपने पति की हत्या कर दी।इसके बाद वह स्त्री वापस सदन के पास आई और बोली तुम्हें मेरे पति से डरने की जरूरत नहीं है मैंने उसका वध कर दिया है। इसके बाद भी सदन ने उस स्त्री के प्रेम को अस्व…

इस जीवन के ज्ञान और अनुभव के साथ होता है दूसरा जन्म

अगर आप यह सोचते हैं कि इस जीवन में जो कुछ किया वह इसी जन्म तक आपके साथ रहेगा, ऐसा नहीं है। आप इस जन्म में जो भी ज्ञान और अनुभव प्राप्त करते हैं वह अगले जन्म में भी आपके साथ होता है और इसका लाभ आपको अगले जन्म में भी मिलता है। इसलिए इस जन्म में ही कर लें दूसरे जीवन को कामयाब बनाने की तैयारी।भगवान श्री कृष्ण ने गीता में इस तथ्य को स्पष्ट किया है कि जब मनुष्य एक शरीर का त्याग करने लगता है तब शरीर द्वारा अर्जित ज्ञान और अनुभव सिमट कर आत्मा के केन्द्र में स्थित हो जाते हैं।

इसके बाद जब आत्मा दूसरे शरीर में प्रवेश करती है तब उन ज्ञान और अनुभव को उस नए शरीर में भी पहुंचा देती है। इसलिए श्री कृष्ण कहते हैं- लभते पौर्वदेहिकम्।

श्री कृष्ण ने खुद बचपन में मिट्टी खाकर इस बात को प्रमाणित किया है क्योंकि इससे पूर्व श्री कृष्ण ने वराह अवतार लिया था। वराह मिट्टी कुरेदता है और खाता है। कहते हैं श्री कृष्ण के मिट्टी खाने की घटना के बाद से ही छोटे बच्चों में मिट्टी खाने लगे।अपने सुना या देखा होगा कि कुछ बालक ऐसे होते हैं जो अल्पायु में ही अपने ज्ञान और कार्यकलाप से बड़े-बड़े कारनामे करने लगते हैं। दरअसल यह…

सेब और कामुकता का रिश्ता

पुरानी कहावत है कि रोज एक सेब खाइए और डॉक्टर को दूर रखिए. ताजा शोध से पता चला है कि सेब इससे भी अधिक काम करता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि रोजाना सेब खाने से महिलाओं का यौनजीवन बेहतर होता है. ऐसे सबूत हैं कि फल या सब्जी से मिलने वाले एस्ट्रोजन, पोलीफेनोल्स और एंटीऑक्सिडेंट्स के नियमित सेवन और महिलाओं के यौन स्वास्थ्य के बीच गहरा संबंध है. लेकिन रोजाना सेब खाने और महिलाओं के यौनजीवन के संबंधों पर पहले कोई शोध नहीं हुआ था. अमेरिका की नेशनल सेंटर ऑफ बायोटेक्नॉलॉजी इंफॉर्मेशन के अनुसार शोधकर्ताओं ने रोजाना सेब खाने और महिलाओं की यौन सक्रियता के बीच संबंधों पर शोध किया है. इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने 731 यौन सक्रिय इताल्वी महिलाओं का विश्लेषण किया. ये महिलाएं 18 से 43 वर्ष के बीच की थीं और उनका यौन विकार का कोई इतिहास नहीं था. शोध में अवसाद की शिकार और दवा का इस्तेमाल कर रही महिलाओं को शामिल नहीं किया गया. शोध के नतीजे आर्काइव्स ऑफ गाइनोकॉलोजी एंड आब्सटेट्रिक्स में छपे हैं. इस शोध के लिए महिलाओं को दो अलग अलग ग्रुप में बांटा गया. एक ग्रुप में वे महिलाएं थीं जो प्रतिदिन नियमित रूप से …

शिकागो में शून्य पर बोलने वाले नरेंद्र को जब एक वेश्या के सामने झुकना पड़ा

नई दिल्ली. देश के युवाओं को आजाद भारत का सपना दिखाने वाले महापुरुष विवेकानन्द का 4 जुलाई 1902 को निधन हुआ था। विवेकानंद के जीवन से जुड़ी तमाम कहानियां आज भी देशभर के कई विद्यालयों में पढ़ाई जाती हैं। 12 जनवरी, 1863 को एक मध्यवर्गीय परिवार में जन्म लेने वाले विवेकानंद का पूरा जीवन देश सेवा और भारतीय संस्कृति के प्रसार में समर्पित था। वेदांत के विख्यात और एक प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु विवेकानंद ने वर्ष1893 में शिकागो में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व कर पूरी दुनिया में भारत का डंका बजा दिया था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक वेश्या ने नरेंद्र नाथ दत्त को उनके संन्यासी होने का अर्थ समझाया था। जानिए, पूरी दुनिया को अपनी तरफ आकर्षित करने वाले विवेकानंद के जीवन से जुड़ी कुछ खास बातों के बारे में।विवेकानंद का लोकप्रिय भाषण- 
1 सितंबर 1893 शिकागो (अमेरिका)
अमेरिका के बहनों और भाइयों
आपके इस स्नेहपूर्ण और जोरदार स्वागत से मेरा हृदय अपार हर्ष से भर गया है। मैं आपको दुनिया की सबसे प्राचीन संत परंपरा की तरफ से धन्यवाद देता हूं। मैं आपको सभी धर्मों की जननी की त…

उदयपुर में पहली बार दिखा सूरजमुखी सांप, वन अधिकारी भी हुए हैरान

(मधुबन स्थित गर्ल्स हॉस्टल परिसर में मिला सूरजमुखी सांप)
उदयपुर. शहर के मधुबन स्थित जनजाति बालिका छात्रावास परिसर में रविवार रात दुर्लभ एल्बाइनो सांप मिला। यह सूरजमुखी है, जो पूरा सफेद है। वन्यजीव विशेषज्ञों का दावा है कि राजस्थान में इसे पहली बार देखा गया है। ऐसे में इसे देखे जाने का रिकॉर्ड उदयपुर के नाम रहेगा। बीती शाम हॉस्टल परिसर में सांप दिखने की सूचना मिली थी। इस पर स्नेक कैचर पदम सिंह राठौड़ पहुंचे। राठौड़ ने बताया कि सांप को देखा तो काफी अचंभा हुआ, क्योंकि यह एक बच्चा था जो शहर और जिले में अब तक मिले सांपों में से सबसे अलग था। इसकी आंखें लाल थीं और आकार में भी बहुत छोटा था। राठौड़ ने वन्यजीव विशेषज्ञ और एसीएफ डाॅ. सतीश शर्मा को फोन पर इसकी जानकारी दी। सुबह डॉ. शर्मा ने बताया कि यह एल्बाइनो सांप है, जो कॉमन ट्रिक्रेट्स (वैज्ञानिक नाम : एलीफास हेलेना) है और यह कोलूब्रिडी फैमिली का है। सांप को बड़ी रोड के पास वन क्षेत्र में सुरक्षित छोड़ा गया है। वन अधिकारियों ने बताया कि एल्बाइनो सफेद रंग का होता है, जिसकी आंखें लाल होती हैं। आंखों में पिग्मेंटेशन नहीं होने से इन्हें रोशनी में ड…

वो अपनी दुनिया में इंसानों को आने नहीं देते, जानिए उन स्थानों के बारे में जहां इंसानों को जाने की मनाही है

इस दुनिया में बहुत सी ऐसी जगह हैं, जहां इंसानों के जाने की मनाही है. ऐसा माना जाता है कि यहां मृत लोगों की आत्माओं का वास है, इसलिए यहां जीवित मनुष्यों के आने से उनकी शांति में खलल पैदा हो सकता है. जाहिर तौर पर अपनी दुनिया में किसी और का दखल उन्हें बर्दाश्त नहीं होता और वे हर संभव कोशिश कर उन घुसपैठियों को भगाने की जुगत में जुट जाते हैं. आज हम आपको कुछ ऐसे ही स्थानों का पता बता रहे हैं, जहां इंसानों का जाना निषेध है या फिर किसी ना किसी भय के कारण स्वयं मनुष्य ने ही वहां जाना प्रतिबंधित किया हुआ है.
क्राइस्ट ऑफ द एबीज, इटली: 17 मीटर गहराई में 22 अगस्त,1954 को क्राइस्ट की विशालकाय पीतल की मूर्ति को पानी के अंदर रखा गया है. इस तरह की कई मूर्तियां अलग-अलग स्थानों पर मौजूद हैं लेकिन यहां आने-जाने वाला कोई नहीं है. कोलमैंस्कॉप, नामिब रेगिस्तान: दक्षिणी नामीबिया के नामिब रेगिस्तान में स्थित है घोस्ट टाउन या भूतहा शहर. बहुत पहले की बात है इस रेगिस्तान में बहुत भयंकर रेतीला तूफान आया था. इस तूफान से बचने के लिए डिलिवरी ब्वॉय जॉन कोलमैन अपनी बैलगाड़ी को वहीं छोड़कर भाग गया था. तूफान शांत होने के बा…

इस एक शरीर में दो लोग रहते हैं, पढ़िए उस बहन की कहानी जिसका अस्तित्व मर कर भी नहीं मिटा

अकसर लोग जब अपने बारे में किसी को बताते हैं तो वो अपने जन्म की तारीख, शादी की तारीख या फिर अपने जीवन से जुड़ी ऐसी ही कुछ बातों को सामने रखते हैं. लेकिन क्या आपने कभी कहीं पढ़ा है कि एक शख़्स अपने परिचय में शरीर के अंगों का भी विवरण दे रहा हो? जैसे; ‘मेरे दो हाथ, एक आंख और दो कान है’. ये सरासर बेवकूफी है लेकिन कोई है जिसे ऐसा भी करने की जरूरत पड़ती है. वो दुनिया से अलग है और अपने परिचय में उसे यह कहना पड़ता है कि ‘मेरे दो नहीं बल्कि चार पैर है’.

ये हैं मायरटल कॉर्बिन
मायरटल कॉर्बिन का जन्म यूनाइटेड स्टेट के टेनेसी में हुआ. उसके जन्म ने हर किसी को हैरान कर दिया. बेहद मासूम व प्यारी मायरटल बाकी लोगों की तुलना में केवल एक अंतर लेकर इस दुनिया में आई थी और वो है उसके चार पैर. जी हां, मायरटल के दो नहीं बल्कि चार पैर हैं, दो सामान्य उसी स्थान पर और बाकी दो टांगें उनके ठीक बीचोबीच एक अलग अंग से जुड़ी है जो मायरटल की कमर के बीच से आती हैं.


डॉक्टरों की मानें तो मायरटल के साथ जुड़े दो अलग पांव कमजोर हैं और मायरटल पूर्ण रूप से उनपर काबू भी नहीं पा सकती. ये पैर उनके दूसरे पैरों के मुकाबले में छोटे व नाजुक है…

5000 सालों से खुद जल देवता करते आ रहे हैं इस शिवलिंग का अभिषेक

मोसाद (गुजरात)। भोलेनाथ की आराधाना के पावन महीने सावन की शुरुआत हो चुकी है। इसके साथ ही पूरे राज्य में हर-हर महादेव की गूंज सुनाई देनी शुरू हो गई है। इसी मौके पर आज हम आपको गुजरात के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे बहुत कम ही लोग जानते हैं।
यह मंदिर नर्मदा जिला, देडियापाडा तालुका के कोकम गांव में स्थित है। इस मंदिर को जलेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है। माना जाता है कि यह शिवलिंग 5000 साल पुराना है।
मोसाद शहर से लगभग 14 किमी की दूरी पर स्थित महादेव का यह मंदिर पूर्वा नदी के तट पर है। यह नदी पूर्व दिशा की ओर बहती है, इसीलिए इसे पूर्वा नदी के नाम से पहचाना जाता है। 
यहां महादेव के मंदिर के अलावा हनुमानजी का भी एक मंदिर है। आमतौर पर हनुमानजी का मंदिर दक्षिणमुखी होता है, लेकिन यहां मंदिर पूर्वमुखी है। सूर्योदय के समय सूर्य की किरणों सीधे इस मंदिर में स्थापित हनुमानजी की प्रतिमा पर पड़ती है। हनुमानजी के इसी मंदिर के ठीक पीछे जमीन से 3 फुट नीचे एक शिवलिंग है। इसी शिवलिंग को जलेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है।  इसके बारे में एक दंतकथा यह भी है कि वनवास के दरमियान पा…

क्या यौन संक्रमण से होता है प्रॉस्टेट कैंसर?

वैज्ञानिकों का कहना है कि हो सकता है कि प्रॉस्टेट कैंसर एक यौन संचारित रोग (एसटीडी) हो, जो संभोग के समय संक्रमण की वजह से होता हो. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसे साबित करने के लिए अभी और प्रमाण की ज़रूरत है.
कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने इंसानी ब्रिटेन की संस्था कैंसर रिसर्च यूके का कहना है कि हालांकि कुछ कैंसर संक्रमण की वजह से होते हैं. लेकिन इस सूची में प्रॉस्टेट कैंसर को जोड़ना अभी जल्दबाज़ी होगी. क्लिक करेंप्रॉस्टेट कोशिकाओं का प्रयोगशाला में परीक्षण किया. यौन संक्रमण इस दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि ट्रीकोमोनियासिस नाम के एक यौन संक्रमण ने क्लिक करेंकैंसर बढ़ाने में भूमिका निभाई. "इस अध्ययन में एक संभव तरीके से यह पता चलता है कि परजीवी ट्रिकोमोनस वाजिनालिस प्रॉस्टैट कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को बढ़ावा दे सकता है और इसे तेज़ी से विकसित कर सकता है" निकोला स्मिथ, कैंसर रिसर्च यूके प्रोसिडिंग ऑफ़ द नेशनल एकेडमी ऑफ़ साइंस (पीएनएस) नाम की विज्ञान पत्रिका का कहना है कि इसे साबित करने के लिए अभी और शोध किए जाने की ज़रूरत है. माना जाता है कि दुनियाभर में 27.5 कर…

आम ही आम, अब नहीं गुठली का काम

बिहार के लोगों के लिए एक अच्छी खबर है. अब तक तो यहां के लोग गुठली वाला आम ही खाया करते थे लेकिन अब बगैर गुठली वाले आम का भी मजा लेंगे. बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने महाराष्ट्र में विकसित सिन्धु प्रभेद का पौध लगा कर सफल प्रयोग किया है. तीन वर्षे के पौध में पहला फलन लगा आम इसके सफलता का द्योतक है. विश्व में पहली बार कोंकण विद्यापीठ संस्थान, महाराष्ट्र ने बगैर गुठली के आम को विकसित किया है. उस प्रभेद को विश्वविद्यालय के अखिल भारतीय समन्वित फल परियोजना प्रक्षेत्र में लगाया गया है. पौध से इस बार बेहतर फलन प्राप्त हुए हैं. इससे इतना स्पष्ट हो गया है कि अब आने वाले समय में बिहार की धरती पर भी इसका उत्पादन किया जा सकता है. बीएयू के उद्यान विभाग (फल) के विभागाध्यक्ष डॉ. वी.बी. पटेल कहते हैं सघन बागवानी के लिए भी यह उपयुक्त प्रभेद है.इसे आम्रपाली की तरह किचन गार्डन में भी लगाया जा सकता है. तीसरे वर्ष से फलन प्रारंभ हो जाता है. यह जुलाई के मध्य तक पकता है और इसमें गुठली नहीं के बराबर होती है.



फल लाल रंग का, कम रेशायुक्त होता है. प्रत्येक वर्ष फल देने वाला होता है. फल गुच्छे में आते हैं. गुदा गहरे…