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June 22, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

क्रियायें जो आपके मस्तिष्क को दें लाजवाब शक्तियां

दिमाग को बनायें ताकतवर
अगर आपका मस्तिष्‍क यानी दिमाग मजबूत है तो आप बड़ी से बड़ी मुश्किलों को आसानी से सुलझा सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि शरीर के साथ-साथ दिमाग को भी ताकतवर बनायें। कई ऐसी युक्तियां हैं जिनके जरिये आप अपनी याद्दाश्‍त क्षमता को बढ़ा सकते हैं, ये तरीके बहुत ही आसान हैं। तो अभी से अपने दिमाग को मजबूत बनाने वाली क्रियायें शुरू कीजिए।

भविष्‍य के बारे में न सोचें
भविष्‍य की चिंता बहुत अधिक न करें, अपने वर्तमान में ही खुश रहने की कोशिश कीजिए। कई लोग अपने भविष्‍य को लेकर बहुत चिंतित रहते हैं और इस कारण वे अपने वर्तमान को भी दांव पर लगा देते हैं। वर्तमान में खुश रहने की कोशिश कीजिए। क्‍योंकि भविष्‍य को लेकर चिंतित रहने से तनाव होता है और याद्दाश्‍त कमजोर होती संगीत का जादू
संगीत में जादू होता है। संगीत न केवल मनोरंजन के लिए होता है बल्कि दिमाग को शुकून भी देता है, तनाव से राहत दिलाता है। इसलिए जब भी मौका मिले अपना पसंदीदा गीत सुनने की कोशिश कीजिए। आप ऑफिस में भी काम के साथ-साथ अपना पसंदीदा गाना सुन सकते हैं
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समस्‍याओं को हल निकालिये
कठिनाइयां और चुनौतियां व्‍यक्ति के जीवन का अहम हिस…

कंप्यूटर से जुड़ेगा दिमाग का रिश्ता

एक नई तकनीकी की मदद से कंप्यूटर जल्द ही यूजर के दिमाग को समझने लगेंगे. साइंस फिक्शन लगने वाली यह बात फ्लाइट सिमुलेटर में किए गए अपने पहले असली टेस्ट में कामयाब रही है




विमान उड़ाना सिर्फ कंट्रोल पैनल संभालना नहीं होता, लेकिन हाल ही में एक फ्लाइट सिमुलेटर में बैठे पायलट को हाथ का इस्तेमाल किए बिना विमान को अपने रास्ते पर रखने में कामयाबी मिली है. पायलट ने दिमागी गतिविधियों को मापने वाला इलेक्ट्रोड कैप पहन रखा था और पायलट ने दिमागी आंख में जॉय स्टिक की मदद से विमान का उड़ानपथ तय किया. हालांकि इस परीक्षण ने साइंस फिक्शन स्टाइल के दिमागी कंट्रोल को हकीकत बना दिया है लेकिन इस तकनीकी का इस्तेमाल अभी सालों दूर है. और वह भी सिर्फ असमर्थ पायलटों के लिए होगा. यूरोपीय संघ की वित्तीय मदद से हुए ब्रेन फ्लाइट प्रोजेक्ट के पांच दलों को अलग अलग जिम्मेदारी सौंपी गई थी. म्यूनिख के फ्लाइट सिस्टम डायनामिक्स इंस्टीट्यूट के समन्वयक टिम फ्रीके ने बताया, "मैं समझता हूं कि इस तकनीकी को दूसरे इलाकों में इस्तेमाल करना महत्वपूर्ण है और निश्चित तौर पर इसका इस्तेमाल पहले दूसरे इलाकों में ही होगा." लोगों की…

ओलिम्पिक खेलों के साथ रोबोट ओलिम्पिक भी हों : शिंजो आबे

जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने यह प्रस्ताव दिया है कि सन् 2020 में टोकियो में न केवल ग्रीष्म ओलिम्पिक खेल हों, बल्कि रोबोट ओलिम्पिक भी आयोजित किए जाएँ| देश में रोबोटनिर्माण के द्रुत विकास को देखते हुए प्रधानमंत्री ने यह सुझाव दिया है| उनके मत में इस असाधारण आयोजन से इस उद्योग का परिमाण तीन गुना बढ़कर 24 अरब डालर तक पहुँच सकता है| प्रधानमंत्री ने यह बात उस कारखाने की यात्रा के समय कही, जहाँ औद्योगिक रोबोट तथा रोगियों की देखभाल करने वाले रोबोट बनाए जाते हैं| “हम यह चाहते हैं कि रोबोट हमारे देश की अर्थव्यवस्था के विकास का एक मुख्य आधार-स्तंभ बनें,” आबे ने कहा| अभी कुछ समय पहले जापान में एसा रोबोट पेश किया गया है जो इसके रचियताओं के अनुसार मनुष्य की भावनाएं पहचान सकता है|sabhar :http://hindi.ruvr.ru/
और पढ़ें: http://hindi.ruvr.ru/news/2014_06_22/273805450/ s

भारतीय वैदिक गणित और अध्यात्म

क्या भारत में गणित का संबंध जीवन, मृत्यु और निर्वाण के दर्शन से रहा है? बीबीसी के विज्ञान कार्यक्रम के लिए इसी विषय की पड़ताल कर रहे हैं गणित से जुड़े विषयों पर लिखने वाले लेखक एलेक्स बेलौस. भारत के गणितज्ञों को संख्याओं की शुरुआत करने का श्रेय जाता है. सदियों पहले भारत ने दुनिया को संख्याओं का चमत्कारिक तोहफा दिया था.
भारत में हिंदू, बुद्ध और जैन धर्म में संख्याओं और निर्वाण के आपसी संबंध की अलग-अलग व्याख्या की गई है.शून्य का आविष्कार भी भारत में ही हुआ, जिसके आधार पर गणित की सारी बड़ी गणनाएँ होती हैं. लेकिन क्या वाकई गणित की संख्याओं और निर्वाण का आपस में कोई संबंध है? शून्य और ध्यान"यदि आप शून्य के भाव को देखें तो आप देखेंगे कि शून्य का अपना एक महत्व है. बौद्ध धर्म में इसके महत्व का वर्णन किया गया है जो कि बहुत प्रसिद्ध भी है." प्रोफेसर कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यम, आईआईटी मुंबई भारत के प्रतिष्ठित गणितज्ञ और आईआईटी मुंबई के प्रोफेसर एसजी दानी गणित और निर्वाण के संबंध में कहते हैं, ''आमतौर पर बातचीत के दौरान भी हम संख्याओं का प्रयोग करते हैं. 10 से 17 तक की संख्याओं को &…

मैंने मंगल पर बिताए हैं 17 साल', पूर्व अमेरिकी नौसैनिक का अजीबोगरीब दावा

वाशिंगटन। अमेरिका के एक पूर्व नौसैनिक ने बड़ा ही दिलचस्प दावा किया है उनका कहना है कि पोस्टिंग के तहत 17 साल तक वो मंगल ग्रह पर रह चुका है। अपना नाम कैप्टन काय बताने वाले पूर्व नौसैनिक ने कहा कि मंगल ग्रह पर पोस्टिंग के दौरान उन्होंने पांच इंसानी कॉलोनियों की मंगल ग्रह के निवासियों से रक्षा की।  इतना ही नहीं, काय का ये भी दावा है कि इसके बाद उन्होंने तीन साल एक गुप्त ऑपरेशन के लिए अंतरिक्ष बेड़े में बिताए। काय ने बताया कि वो अंतरिक्ष के लिए बनी एक गुप्त नौसेना का हिस्सा था, जिसे अर्थ डिफेंस फोर्स नाम की मल्टीनेशनल ऑर्गेनाइजेशन द्वारा चलाया जा रहा है। ये संस्था अमेरिका, रूस और चीन के सैन्य कर्मियों की भर्ती करती है।  एक निजी चैनल के जरिए जारी बयान में कैप्टन काय ने कहा कि उसे तीन अलग-अलग तरह के स्पेस फाइटर और तीन लड़ाकू विमान चलाने की ट्रेनिंग दी गई है। काय का कहना है कि इसके लिए ट्रेनिंग उसे अंतरिक्ष के अलग-अलग ग्रहों पर दी गई।  काय का एक दावा ये भी है कि 20 साल की इस ड्यूटी के बाद रिटायरमेंट पर उनका विदाई समारोह चंद्रमा पर किया गया। साथ उन्हें पूर्व रक्षा सचिव डोनाल्ड रम्सफेल्ड की तर…

ये है अमेजन का पहला स्मार्टफोन, देता है 3D का मजा

अमेजन फायर स्मार्टफोन
लंबे समय अमेजन स्मार्टफोन पर लगाए जाने वाले कयासों पर विराम लगा चुका है। ई कॉमर्स कंपनी अमेजन ने अपना पहला स्मार्टफोन अमेजन फायर लॉन्च कर दिया है।

कंपनी ने इस स्मार्टफोन को गोरिल्‍ला ग्लास डिस्‍प्ले को रबर के फ्रेम से सुरक्षित किया है। अमेजन डॉट कॉम के चीफ एक्जिक्यूटिव ऑफिसर जेफ बेजोस ने बताया कि ये स्मार्टफोन 3डी टेक्नोलॉजी पर काम करेगा जिसमें स्क्रीन 3D कैपेबल होगी, आप 3D साउंड और 3D वीडियो का मजा उठा सकते हैं। हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर 4.7 इंच डिस्प्ल का कयास एक दम सही रहा, कंपनी ने अमेजन फायर स्मार्टफोन को 4.7 इंच डिस्‍प्ले के साथ पेश किया है जो 720पी रेजल्यूशन पर काम करता है।

प्रोसेसर की बात करें तो एड्रीनो 300 जीपीयू सहित 2.2 गीगाहर्ट्ज क्वालकॉम स्नैपड्रेगन प्रोसेसर और 2जीबी रैम के साथ काम करता है। सॉफ्टवेयर की बात करें तो ये फायर ओएस 3.5 के साथ है।

कैमरा, स्टोरेज और बैटरी फोन का मुख्य कैमरा 13 मेगापिक्सल का है ‌जबकि सेकेंड्री कैमरा 2.1 मेगापिक्सल है। फोन 32जीबी और 64 जीबी इंटरनल स्टोरेज वर्जन में मौजूद है।

बैटरी की बात करें तो कंपनी ने अमेजन फायर में 2,400 एमएए…

2030 तक एलियंस का पता लगा लेगा दुनिया का सबसे बड़ा दूरबीन!

लंदन. एलियंस होते हैं या नहीं, इसका पता लगाने के लिए नासा नई योजना पर काम कर रहा है। वैज्ञानिकों की योजना अंतरिक्ष में अभी तक का सबसे बड़ा दूरबीन लगाने की है, जिससे लाखों मील दूर दूसरे ग्रहों पर जीवन की संभावनाओं का पता लगाया जा सके। खास बात यह है कि यह दूरबीन इतना बड़ा होगा कि इसे धरती से रॉकेट की मदद से नहीं ले जाया जा सकेगा, इसलिए अंतरिक्ष में ही इसे तैयार किया जाएगा। इस काम के लिए नासा जल्द ही अंतरिक्ष में लाखों मील दूर एस्ट्रोनॉट्स की एक टीम भेजना वाला है। यह प्रोजेक्‍ट 2030 तक तैयार हो सकता है। एडवांस्ड टेक्नोलॉजी लार्ज अपर्चर स्पेस टेलिस्कोप (एटीएलएसटी) दुनिया का सबसे शक्तिशाली दूरबीन होगा। ये दूरबीन ग्रहों के वातावरण और 30 प्रकाश वर्ष दूर तक की सौर प्रणाली का विश्लेषण करने में सक्षम होगा। माना जा रहा है कि ये दूरबीन एस्ट्रोनोमर्स के लिए निर्णायक साबित होगा। दुनिया का सबसे बड़ा दूरबीन दूरबीन के जरिए ये पता लगाना आसान होगा कि अंतरिक्ष के अनदेखे क्षेत्रों में अलौकिक जीवन मौजूद है या नहीं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ग्रहों का विश्लेषण करने में सक्षम ये दूरबीन 44 फीट वाले हबल स्…