Loading...

शनिवार, 7 जून 2014

अरे ये क्या! टीचर बनी नाबालिग स्टूडेंट के बच्चे की मां

0

अपने ही छात्र से संबंध बनाकर बनी मां

अपने ही छात्र से संबंध बनाकर बनी मां


एक स्कूल टीचर ने अपने ही नाबालिग स्टूडेंट के साथ शारीरिक संबंध बनाकर बच्चे को जन्म ‌दिया है।

42 वर्षीय इस महिला के पहले भी दो बच्चे हैं और वह अपने पति को छोड़ चुकी है।

इस पूरे मामले में इंग्लैंड की टीचर हेलेन कार्टराइट को कोर्ट केस का सामना करना पड़ रहा है।

वहां के स्‍थानीय कोर्ट का कहना है कि यह संबंध सरासर गलत है। इसके लिए अदालत ले टीचर को ही जिम्‍मेदार ठहराया है। 

नाबालिग होने की थी जानकारी

मामला ऑस्ट्रेलिया के वूलमर हेमटन शहर का है। वहां पुलिस के समक्ष हेलेन कार्टराइट ने कबूल किया है जब कुछ समय पूर्व स्टू्डेंट के साथ उसने संबंध बनाए तो उसे यह जानकारी थी कि वह नाबालिग है।

डेली मेल के मुताबिक बावजूद इसके उसने शारीरिक संबंध बनाए और बच्चे की मां भी बनी। पता चला है कि दोनों के बीच काफी समय से आपसी संबंध बनाए जाते रहे थे।

इसकी जानकारी स्कूल प्रबंधन सहित अन्य छात्रों को भी थी। मगर यह सच्चाई उस समय सामने आई जब हेलेन बच्चे की मां बनी। 

पांच माह का हो गया बच्चा

15 वर्षीय स्टूडेंट और टीचर हेलेन कार्टराइट का बच्चा अब पांच माह का हो चुका है और पूरी तरह से स्वस्‍थ है।

इस मामले में अदालत ने टीचर का फटकार लगाते हुए 10 वर्ष तक सैक्स ऑफेंडर की लिस्ट में डाल दिया है।

इसके साथ ही पुलिस द्वारा दो सालों तक उसके ऊपर नजर भी रखी जाएगी ताकि इस बात का पता रहे कि कहीं वह भविष्य में भी इस तरह के कृत्यों को अंजाम तो नहीं दे रही है।� sabhar :http://www.amarujala.com/

Read more

चमत्कार! ये औरत अचानक ही बोलने लगी तीन अनजान भाषाएं

0

हुआ था माइग्रेन

हुआ था माइग्रेन


49 साल की जूली माथहियास की कहानी किसी को भी हैरत में डाल देने के लिए काफी है। हम सभी जानते हैं कि एक भाषा सीखने में ही सालों लग जाते हैं।

डेली मेल 
के मुताबिक मिलिए इस महिला से जो पेशे से एक हेयर ड्रेसर है। उसे कई सालों से सिर में भयंकर दर्द की शिकायत रहती थी। जांच में पता चला कि उसे माइग्रेन है।

साल 2011 में उसे माइग्रेन का इतना भयानक अटैक आया कि उसे हॉस्पिटल में एडमिट करना पड़ा। फिर तभी...
अरे ये क्या हो गया?
हॉस्पिटल में माइग्रेन का भयंकर अटैक आने पर जब पहली बार उसने डॉक्टर से बात करना शुरू किया तो वो पता नहीं किस लहेजे में बोलने लगी।

जूली इंग्लैंड के चैथम की रहने वाली थी और बचपन से ही सिर्फ शैव भाषा बोलना जानती थी। 

लेकिन डॉक्टर से बात करने पर वो बोल तो शैव ही रही थी लेकिन बोलने का अंदाज यानी के एक्सेंट किसी विदेशी भाषा जैसा आ रहा था। थोड़ी देर में उसने देखा कि अब वो अपनी भाषा शैव बोल ही नहीं पा रही थी। 

वो तो कुछ ऐसा बोलने लगी कि सुनने वालों को लगता कि वो कभी चाइनीज बोल रही है, कभी इटैलियन और कभी फ्रेंच।

हो गई दुर्लभ बीमारी

इसका इलाल करावाने पर पता चला कि उसे फॉरेन एक्सेंट सिंड्रोम हो गया है। इस बीमारी से दुनिया भर में बस 60 लोग ही पीड़ित पाए गए हैं।

ज्यादातर ये बीमारी होने की वजह कोई जानलेवा स्ट्रोक या फिर भयानक सिरदर्द होता है। जूली के साथ भी ऐसा ही हुआ।

उनकी ऐसी भाषा होने पर कई लोग उन्हें चिढ़ाते हैं। हांलाकि जूली ने अपना पेशा जारी रखा है लेकिन वो ये बताना नहीं भूलती हैं कि उन्हें बहुत जिल्लतों का सामना करना पड़ता है और इसमें उनका कोई दोष नहीं है।� sabhar :
http://www.amarujala.com/



Read more

शुक्रवार, 6 जून 2014

अब बच्चों के होंगे तीन मां बाप

0

तीन लोगों के डीएनए से भ्रूण तैयार करने की रिसर्च को हरी झंडी मिलती नजर आ रही है. ब्रिटेन का कहना है कि इस तकनीक में कोई खतरा नहीं है और जल्द ही ऐसा मुमकिन होगा.

Bildergalerie Mutterliebe

यह तकनीक इस्तेमाल से पहले ही विवादों में घिरी है. कुछ महीनों से अमेरिका भी इस पर विचार कर रहा है. अब ब्रिटेन भी इसमें शामिल हो गया है. एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बात के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं कि इस तकनीक से कोई नुकसान पहुंच सकता है. रिपोर्ट की अध्यक्षता करने वाले डॉक्टर एंडी ग्रीनफील्ड ने बताया कि नतीजे लैब में हुए प्रयोगों और जानवरों पर किए गए टेस्ट के आधार पर तैयार किए गए हैं. उन्होंने कहा, "जब तक एक स्वस्थ शिशु पैदा नहीं हो जाता, तब तक हम 100 फीसदी कुछ नहीं कह सकते."
बच्चे की दो मांएं
इस तरह की तकनीक का मकसद है मां से बच्चे में आनुवंशिक बीमारियों के खतरे को रोकना. खून की जांच से पता लगाया जाएगा कि महिला को किसी तरह की आनुवंशिक बीमारी तो नहीं है. अगर उसके डीएनए में कोई गड़बड़ मिलती है, तो किसी और महिला के डीएनए का इस्तेमाल कर मां के अंडाणु में मिला दिया जाएगा. इसके बाद लैब में ही इसे शुक्राणु के साथ मिला कर फर्टिलाइज किया जाएगा और फिर मां के शरीर में डाल दिया जाएगा. इस तरह से सुनिश्चित किया जा सकेगा कि मां की आनुवंशिक बीमारी भ्रूण तक न पहुंचे.रिसर्च के मकसद से इस तरह की तकनीक के इस्तेमाल की अनुमति पहले से है. अब लंदन के स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि उसे उम्मीद है कि इस साल के अंत तक देश में ऐसे कानून को पारित कर दिया जाएगा जिसकी मदद से अस्पतालों में भी इस तकनीक का इस्तेमाल हुआ करेगा. अगर ऐसा हुआ तो ब्रिटेन दुनिया का पहला ऐसा देश बन जाएगा जहां तीन व्यक्तियों के डीएनए वाले भ्रूण को अनुमति होगी.
डिजाइनर बेबी का खतरा
इस तकनीक के आलोचकों का कहना है कि यह एक अनैतिक और खतरनाक तरीका है. इसके जवाब में डॉक्टर ग्रीनफील्ड ने कहा कि 1970 के दशक में जब आईवीएफ को ले कर चर्चा शुरू हुई थी, तब भी लोगों में सुरक्षा को लेकर इसी तरह के डर थे लेकिन पहले टेस्ट ट्यूब बेबी के बाद से यह बहस धीरे धीरे कम होने लगी. वहीं अमेरिका के सेंटर फॉर जेनेटिक्स एंड सोसाइटी के मेर्सी डेरनोव्स्की का कहना है कि इस तरह की तकनीक डॉक्टरों और दंपतियों को डिजाइनर बेबी बनाने के लिए प्रोत्साहित करेगी.
जानकार बताते हैं कि कानून पारित होने के बाद से ब्रिटेन में हर साल कम से कम एक दर्जन महिलाओं को इसका फायदा मिलेगा, जिनके माइटोकॉन्ड्रिया में गड़बड़ है. इस तरह की गड़बड़ी से भ्रूण में दिल के रोग और मानसिक बीमारियों का खतरा होता है.
आईबी/एजेए (एपी)
sabhar :http://www.dw.de/

Read more

दर्द को समझने वाला रोबोट

0

जापान आधुनिक तकनीक और तरह तरह के रोबोट्स बनाने के लिए मशहूर है. अब जापान एक ऐसा रोबोट बाजार में उतारने के लिए तैयार है जो आपकी भावनाएं भी समझ सकेगा.

Japan Roboter Pepper

घर के काम काज में या फिर रिसर्च के लिए लैब में मदद करने के लिए तो रोबोट का इस्तेमाल हो ही रहा है, लेकिन इन्हें अब तक मशीनों की ही तरह रखा गया है. वक्त के साथ साथ इनकी तकनीक में इतना विकास हो गया है कि वे भावनाएं भी समझने लगे हैं और एक हद तक दिखाने भी लगे हैं.
जापान की मोबाइल फोन कंपनी सॉफ्टबैंक एक ऐसे ही रोबोट के साथ बाजार में उतर रही है. उम्मीद है कि फरवरी से 'पैपर' नाम का यह रोबोट करीब दो हजार डॉलर में खरीदा जा सकेगा. बिक्री पहले जापान में शुरू होगी और उसके बाद विदेशों में.
टोक्यो में 'पैपर' को लॉन्च करते हुए कंपनी के मालिक और जापान के जाने माने अरबपति मासायोशी सन ने कहा कि रोबोट को 'नरमदिल' होना चाहिए ताकि वे लोगों के चेहरे पर 'मुस्कुराहट' ला सकें. 'पैपर' जब गुनगुनाता हुआ स्टेज पर आया और फिर उसने मासायोशी सन से हाथ मिलाया तो स्टीवन स्पीलबर्ग की फिल्म 'एक्स्ट्रा टेरेस्ट्रियल' के किरदार 'ईटी' की याद आ गयी.
पैपर की प्रोग्रामिंग
सन ने बताया कि 'पैपर' को इस तरह से प्रोग्राम किया गया है कि वह लोगों की आवाज सुन कर और उनके हाव भाव को देख कर भावनाओं को समझ लेता है. यानि आपके पास अपना खुद का एक ऐसा रोबोट दोस्त हो सकता है जो जानता है कि आप खुश हैं या फिर उदास. और उदासी को दूर करने का जिम्मा भी रोबोट का ही होगा. उसे कुछ ऐसा करना होगा कि उदास व्यक्ति भी मुस्कुरा दे.
'पैपर' एक ह्यूमनॉयड है यानि एक ऐसा रोबोट जो इंसानों जैसा ही दिखता है. 28 किलोग्राम भारी और 48 इंच ऊंचे सफेद रंग के इस रोबोट के सिर पर बाल तो नहीं हैं, पर बड़ी बड़ी आंखें किसी खूबसूरत गुड़िया जैसी लगती हैं. 'पैपर' के पूरे शरीर में कई तरह के सेंसर लगे हुए हैं. दो टच स्क्रीन सेंसर उसके हाथ में हैं और तीन सर में. इसके अलावा निचले हिस्से में छह लेजर सेंसर और तीन बंपर सेंसर भी हैं. सिर में दो कैमरे और चार माइक्रोफोन हैं. साथ ही छाती पर एक डिस्प्ले पैनल लगा हुआ है.
हाईटेक 'पैपर' हर वक्त वाईफाई से जुड़ा रहता है और आईफोन के 'सिरी' की तरह आवाज पहचानता है. हालांकि कई बार यह ठीक से जवाब नहीं दे पाता. ऐसे में वह कहता है, "मैं ठीक से सुन नहीं पाया, क्या आप अपना सवाल दोहरा सकते हैं?" कोई चीख चिल्ला कर अपनी भड़ास उतार रहा हो तो वह सांत्वना डेते हुए कहता है, "तुम एक नेक इंसान लगते हो." लॉन्च के दौरान 'पैपर' ने 'आई वॉन्ट टु बी लव्ड' गाना गा कर लोगों का दिल जीता.
आईबी/एमजे (एपी) sabhar :http://www.dw.de/


Read more

मैं रेप की पैदाइश हूं', मिस यूएसए 2014 की रेस में शामिल मॉडल ने बताया सच

0

'मैं रेप की पैदाइश हूं', मिस यूएसए 2014 की रेस में शामिल मॉडल ने बताया सच

हैरिसबर्ग। मिस यूएसए 2014 पीजेंट में पेन्सिलवेनिया का प्रतिनिधित्व करने वाली 24 वर्षीय वेलेरी गाटो ने अपनी पैदाइश से जु़ड़े एक ऐसे सच का खुलासा किया है, जिसने सभी को चौंका दिया है। वेलेरी ने कहा है कि वो बलात्कार की पैदाइश है। चाकू की नोंक पर उसकी मां का रेप किया था, जिसके बाद उसका जन्म हुआ। उन्होंने बताया कि एक शख्स ने उसकी मां पर उस वक्त हमला बोला था, जब वो महज 19 साल की थी।  
 
वेलेरी ने अब फैसला लिया है कि वो इस प्लेटफॉर्म के जरिए महिलाओं को यौन उत्पीड़न के बारे में जानकारी देने का काम करेंगी। वेलेरी  कहती हैं कि उन्हें इस बात का विश्वास है कि भगवान ने उन्हें किसी खास मकसद के लिए भेजा है। वो लोगों को ये विश्वास दिलाना चाहती हैं कि दुनिया में सबकुछ संभव है और कभी भी परिस्थितियों के हिसाब से अपनी जिंदगी को निर्धारित नहीं किया जा सकता। 
 
वेलेरी अभी एक वकील के तौर पर यौन उत्पीड़न के खिलाफ लोगों में जागरुकता लाने की कोशिश में लगी हैं। देश में जगह-जगह दौरे कर वो 18 से 30 साल की उम्र की महिलाओं के बातचीत कर रही हैं और उन्हें उत्पीड़न का शिकार होने से बचने के लिए जानकारी दे रही हैं। वेलेरी कहती हैं कि मिस यूएसए का ताज जीतने के बाद उन्हें अपने इस काम के लिए और बढ़ा मंच मिलेगा। 

'मैं रेप की पैदाइश हूं', मिस यूएसए 2014 की रेस में शामिल मॉडल ने बताया सच
अपने बायोग्राफी बेवसाइट पर वेलेरी ने लिखा है कि जब वो छह साल की थीं, तभी से वो मां से अपने पिता के बारे में सवाल करने लगी थीं, जिससे वो कभी मिली ही नहीं थी। आखिरकार उन्हें अपने सवाल का जवाब मिला और वो भी 10 साल की उम्र में। 
 
वेलेरी की मां ने परिवार के लोगों को अपनी प्रेग्नेंसी के बारे में नहीं बताया था। बाद में उसने अपनी दादी से इस बारे में बात की और तय किया कि वो इस बच्चे को पैदा करना चाहती। 
 
वेलेरी कहती हैं कि रेप की पैदाइश होने के चलते उन्हें नहीं पता कि उनका पिता कौन है। वो ये भी नहीं जानती हैं कि अपने पिता से वो कभी मिल पाएंगी या नहीं। वो कहती हैं कि बहुत से लोग सोचते हैं कि ये बहुत खराब परिस्थिति है, लेकिन वो अपनी इस जिंदगी से बहुत खुश हैं। वो अपनी मां के लिए एक रोशनी की तरह हैं। 

'मैं रेप की पैदाइश हूं', मिस यूएसए 2014 की रेस में शामिल मॉडल ने बताया सच


'मैं रेप की पैदाइश हूं', मिस यूएसए 2014 की रेस में शामिल मॉडल ने बताया सच

sabhar : bhaskar.com



Read more

गुरुवार, 5 जून 2014

मिल जाएगा दांतों के दर्द भरे ऑपरेशन से छुटकारा

0



वाशिंगटन। नई जीवनशैली में दांत की शिकायतें आमबात हैं। अक्सर इनके इलाज के लिए रुट कैनाल थेरेपी (आरसीटी) जैसे आपरेशन से गुजरना पड़ता है। जो कुछ हदतक दर्दभरा है। जल्दी ही इस दर्द से छुटकारा मिल सकता है। पहली बार वैज्ञानिकों ने दांत के भागों को फिर से उगाने के लिए प्रकाश का प्रयोग किया है।
इनमें एक भारतीय मूल के वैज्ञानिक भी शामिल हैं। हार्वर्ड में वायिस इंस्टीट्यूट फॉर बायोलॉजिकली इंस्पायर्ड इंजीनियरिंग के फैकल्टी सदस्य डेविड मूने के नेतृत्व इस बारे में एक अध्ययन किया गया। पता चला कि ऊतकों को फिर से उत्पन्न करने के लिए कम शक्ति के लेजर का प्रयोग उपयोगी हो सकता है। ये शरीर के अंदर की स्टेम कोशिकाओं को सक्रिय कर सकते हैं। यह शोध साइंस ट्रांसनेशनल मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
सप्ताहांत में सर्जरी कराने से बढ़ता है मौत का खतरा
सप्ताहांत, दोपहर और फरवरी माह में सर्जरी कराने से मौत का खतरा सर्वाधिक रहता है। जर्मनी में नए अध्ययन में यह दावा किया गया है। यूनिवर्सिटी मेडिसिन बर्लिन के डॉक्टर फेलिक्स कॉर्क और प्रोफेसर क्लाउडिया स्पाइस तथा उनके साथियों ने सर्जरी के बाद अस्पताल की मौत को लेकर एक अध्ययन किया। उन्होंने जांच की कि अलग-अलग समय में अस्पताल में होने वाली सर्जरी और मौतों के बीच क्या संबंध रहता है। sabhar :http://www.jagran.com/

Read more

18 जून को लॉन्च होगा अमेजोन का 3डी स्मार्टफोन

0

Amazon 3D smartphone launch on 18 June 2014
सेन फ्रांसिस्को। ऑनलाइन शॉपिंग पोर्टल अमेजोन भी अब स्मार्टफोन बाजार में दस्तक देने जा रही है। कंपनी इसकी शुरूआत ही 3डी स्मार्टफोन की लॉन्चिंग के साथ करने जा रही है। कंपनी के अनुसार इसें 18 जून को एक कार्यक्रम के दौरान लॉन्च किया जा रहा है।

अमेजोन डॉट कॉम पर इस 3डी स्मार्टफोन पर बनाया गया वीडियो भी पोस्ट किया गया है। अमेजोन 3डी स्मार्टफोन पर बनाए गए इस वीडियो में कई लोगों को दिखाया गया जो इसके फीचर्स और परफोर्मेस देखकर आश्चर्यचकित हो जाते हैं।

खबर है कि 3डी तकनीक वाली डिस्पले स्क्रीन के साथ इस अमेजोन स्मार्टफोन में और भी कई अत्याधुनिक फीचर्स दिए जा रहे हैं जो इसें एप्पल, एलजी और सैमसंग के हाई एंड स्मार्टफोन्स की टक्कर का बनाते हैं।

कयास लगाए जा रहे हैं कि सही मायने इस अमेजोन 3डी स्मार्टफोन की सीधी टक्कर दुनिया के पहले 3डी स्मार्टफोन एलजी ऑप्टिमस 3डी से होगी। एलजी ने अपने इस 3डी स्मार्टफोन को बार्सेलोना में आयोजित मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस के दौरान डिस्पले किया था।

अमेजोन 3डी स्मार्टफोन के संभावित खास फीचर्स-

* 4.7 इंच की 3डी (720 पिक्सल रेजोल्युशन) डिस्पले स्क्रीन।

* क्वॉलकोम स्नैपड्रेगन प्रोसेसर और 2जीबी रैम।

* 12-13 एमपी एचडी कैमरा रीयर और वीजीए कैमरा फ्रंट में।

* 16 जीबी इंटरनल मेमोरी, 128 जीबी मेमोरी कार्ड सपोर्ट।

sabhar :http://www.one.in/

Read more

दुनिया को ऑनलाइन करेंगे 180 गूगल उपग्रह

0




कैलिफोर्निया : आपने कभी सोचा है कि जब आप इंटरनेट सर्फ ग या चैटिंग में व्यस्त होते हैं, तब 4.8 अरब लोग या दुनिया की दो तिहाई आबादी ऑनलाइन नहीं होती। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। गूगल 180 उपग्रह लांच करने की योजना बना रहा है, जिसके तहत हर किसी के पास वेब की सुविधा होगी। वाल स्ट्रीट जर्नल में यह जानकारी दी गई। 

बहुराष्ट्रीय कंपनी गूगल एक अरब डॉलर की लागत इस तकनीक के लिए खर्च कर रहा है, जिसे उपग्रह संचार स्टार्ट अप ओ3बी नेटवर्क के संस्थापक ग्रेग वीलर विकसित करेंगे। छोटे लेकिन उच्च क्षमता वाले उपग्रह पृथ्वी के चारों ओर पारंपरिक उपग्रहों की तुलना में कम ऊंचाई पर परिक्रमा करेंगे। 

गूगल का प्रोजेक्ट लून पूरी पृथ्वी के दूर-दराज वाले क्षेत्रों में भी ब्रांडबैंड सेवा उपलब्ध कराने के लिए उच्च ऊंचाई वाले गुब्बारे बना रहा है। गूगल ने इस सेवा के लिए सौर ऊर्जा वाले ड्रोन बनाने की जिम्मेदारी टाइटन एयरोस्पेस को सौंपी है। (एजेंसी) sabhar :http://zeenews.india.com/

Read more

औरत की पीठ की खाल से बना डाली किताब, जरूर देखें

0

जांच में खुली बात

जांच में खुली बात


जब हारवर्ड युनिवर्सिटी में एक अजीबोगरीब किताब पाई गई, तो जैसे जब हैरान रह गए। उस किताब की शक्ल किसी भी आम बुक से बिल्कुल अलग थी।

‌हफपोस्ट
 में छपी खबर के अनुसार उस किताब का कवर दफ्ती जैसा दिख रहा था लेकिन वो था एकदम मुलायम और गौर से देखने पर कुछ अलग।

उस किताब को जांच के लिए भेजा गया। जांच में पाया गया कि इस बुक का कवर इंसानी खाल का है। ये भी पाया गया कि इस बुक में किसी औरत के पीठ की खाल लगाई गई है।

आत्मा और मृत्यु पर है बुक

जब इस बुक के ऐसा होने का कारण तलाशा गया तो जांचकर्ताओं का पता चला कि बुक आत्मा और मृत्यु के बाद के जीवन पर आधारित है।

वो इंसान के मर जाने के बाद की बात कहती है। इस किताब को 19वीं सदी के फ्रेंच राइटर हूजे ने लिखा था।

ये भी पता चला कि हूजे ने ये किताब लिखकर अपने एक दोस्त डॉ लूडोविक को दे दी थी जिसे उन्होंने पढ़कर किताब के टॉपिक के मुताबिक ही ढाल देने का सोचा।
बहुत पुरानी इस किताब के ऊपर इंसानी खाल होना इस जमाने के लोगों के ‌लिए कुछ अलग है।

लेकिन जांचकर्ताओं का कहना है कि पुराने जमाने में लोग इसी तरह से बुक को संजोकर रखते थे और उस दौरान ऐसा करना कॉमन था।

इस रिपोर्ट को एन्थ्रोपोडर्मिक बिबलियोपेजी, एटलांटिक रिपोर्ट में छापा गया है।
sabhar :http://www.amarujala.com/

Read more

बुधवार, 4 जून 2014

ऐसा उपन्यास जिससे फैल रहा है यौन संक्रमण

0

Fifty Shades of Grey effect leading to rise of STDs in older couples'

अमेरिका में वृद्घ लोगों में असुरक्षित सेक्स संबंध बनाने का क्रेज हो गया है। नजीतन, वृद्घ लोगों में क्लामीडिया, सिफलिस और इसी तरह की अन्य यौन संक्रमित रोग फैल रहे हैं। पिछले दस सालों में यौन संक्रमित रोग और सं‌क्रमण तकरीबन तीन गुना हो गए हैं।डेली न्यूज ऑनलाइन की खबर के मुताबिक, सेक्सुअली ट्रांसमिटिड इंफेक्‍शन (STIs) जैसे क्लामीडिया, सिफलिस और गानरीअ 50 से अधिक उम्र के लोगों में अधिक देखने को मिल रहा है। ऐसे में डॉक्टर्स ने ईएल जेम्स के इरोटिक उपन्यास 'फिफ्टी शेड्स ऑफ ग्रे' को दोषी बताया है।उनके मुताबिक, लोग इस किताब को पढ़कर उसकी नकल करने की कोशिश कर रहे हैं इसी का नतीजा है कि लोगों को यौन संक्रमण फैल रहा है।ब्रिटीश मेडिकल ऐसोसिएशन जनरल प्रैक्टिसनर कमेटी के चेयरमैन डॉ. चार्लोट जोंस के मुताबिक, जब भी सुरक्षित सेक्स की बात आती है तो ऐसा माना जाता है कि युवा सुरक्षित सेक्स नहीं करते। लेकिन 'फिफ्टी शेड्स ऑफ ग्रे'� उपन्यास के कारण बड़ी उम्र के लोग भी कंडोम जैसे कंट्रासेप्‍शन का इस्तेमाल नहीं कर रहे।2012 की सीडीसी रिपोर्ट से अब तक इंग्लैंड में 45 से 65 की उम्र के लोगों में सेक्सुअल ट्रांसमिटिड इंफेक्‍शन तीन गुना हो गया है। जबकि 2011 से 2012 में मात्र 7 फीसदी यौन संक्रमण की वृद्घि हुई थी।आपकी बता दें 'फिफ्टी शेड्स ऑफ ग्रे' उपन्यास बंधक सेक्स और दर्द देकर खुशी पाने जैसे सेक्स प्रयोगों को सपोर्ट करता है। इस नॉवेल की 100 मिलियन से अधिक कॉपी बिक चुकी हैं और इस उपन्यास पर फिल्म भी बनने जा रही है। sabhar :http://www.amarujala.com/

Read more

 
Design by ThemeShift | Bloggerized by Lasantha - Free Blogger Templates | Best Web Hosting