सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

May 25, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

चीनी व्यक्ति ने बनाया स्कूटर वाला सूटकेस

बीजिंग। पहिए वाले सूटकेस में सामान तो आप भी ले गए होंगे, लेकिन अगर आपसे कहा जाए कि सूटकेस पर आप सफर भी कर सकते हैं। जी हां, चीन के एक व्यक्ति ने ऐसा सूटकेस वाला स्कूटर तैयार किया है, जिसे चलाकर वो अपनी मंजिल तक जा सकता है। ही लियांगसाई चीन के हनान क्षेत्र में रहते हैं। उन्होंने चांगशा ट्रेन स्टेशन के पास अपने इस अनोखे सूटकेस का प्रदर्शन किया। इस स्कूटर का वजन 7 किलोग्राम है और यह दो लोगों को लेकर चल सकता है। इससे 20 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से 50-60 किमी तक की दूरी तय की जा सकती है। इसमें जीपीएस सिस्टम और अलार्म भी लगा है। ही पेशे से किसान हैं और उन्हें इस स्कूटर को बनाने में दस साल का समय लगा। इसे एक इलेक्ट्रिक स्कूटर के जरिए बनाया गया है, जिसे एक सूटकेस में फिट किया गया है। ही एक प्रतिष्ठित खोजकर्ता हैं। उन्हें 1999 में इस क्षेत्र में पुरस्कार भी मिल चुका है। कई और खास सूटकेस कई साल पहले माजदा ने एक सूटकेस कार का निर्माण किया था। इसे सबसे पहले 1991 में डिजाइन किया गया था। हाल ही में मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के पांच छात्रों ने एक इको फ्रेंडली सूटकेस कार बनाने में सफलता हासिल की। इस …

यह अलमारी बिना ढूढे निकाल देगी कपड़े

त्रिभुवन शर्मा

अब आपको अपने कपड़े ढूंढने के लिए ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एक ऐसी अलमारी बन चुकी है, जो एक क्लिक करने से आपके हाथ में पसंद वाले कपड़े पकड़ा देगी। जी हां, यह कोई कल्पना नहीं है बल्कि हकीकत है। इसमें आप अपने कपड़ों को आराम से रख सकते हैं और इसे स्मार्टफोन और टैबलेट के जरिए हैंडल कर सकते है। इस अलमारी के अंदर नॉर्मल अलमारी से ज्यादा जगह होगी और ज्यादा कपड़े रखे जा सकते हैं। इस अलमारी के अंदर एक ऑटोमैटिक रेल मशीन लगी होती है, जिस पर ज्यादा कपड़े टांगे जा सकते हैं। इसे इटली के डिजाइनर अमांडा ने तैयार किया है।


(फिल्म 'क्लूलेस' की तस्वीर, जिसमें पहली बार इस तरह के ऑटोमैटिक सिस्टम को दिखाया गया था)


यह कॉन्सेप्ट सबसे पहले 1995 में आई एक हॉलिवुड फिल्म 'क्लूलेस' से लिया गया है, जिसमें कपड़े खोजने के लिए कंप्यूटर सिस्टम जुड़ा होता है। असल में कपड़े रखने से पहले कपड़ों की टैबलेट और स्मार्टफोन के जरिए फोटो खिंची जाती है। अलमारी में लगी ऑटोमैटिक रेल मशीन में एक सेंसर लगा होता है, जिसका कनेक्शन स्मार्टफोन से होता है।

जब ओनर अपने स्मार्टफोन या टैबलेट के जरिए एक…

गूगल सिक्योरिटी फर्म ड्रॉपकैम को खरीदने वाली है

इंजन सर्च कंपनी गूगल अब आपके घरों की सुरक्षा करने की कवायद कर रही है। जागरण ने यह खबर दी। गूगल सिक्योरिटी फर्म ड्रॉपकैम को खरीदने वाली है। इंटरनेट से जुड़े सीसीटीवी कैमरे बेचने वाली ये हाईटेक कंपनी खरीदकर गूगल पहले से खरीदी गई सॉफ्टवेयर कंपनी नेस्ट के साथ एक विशेष प्रकार का एप्लीकेशन तैयार करेगा जो घर की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरा प्रणाली को क्रांतिकारी बना देगा। ड्रॉपकैम कंपनी फिलहाल अपनी सीसीटीवी प्रणाली 150 डॉलर (करीब 8500 रुपये) में बेचती है। ड्रापकैम एक क्लाउड आधारित वाईफाई एचडी वीडियो निगरानी सेवा है। इसमें अत्यधिक गुणवत्ता वाले मुफ्त सजीव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिग हासिल होती है। इसमें दोनों तरफ से बातचीत और हरेक कोने में कैमरे को घुमाकर देखना भी संभव होता है। अब गूगल की नेस्ट कंपनी के तैयार किए ऐप की मदद से इस सेवा को और बेहतर बना देगी। इस खास ऐप से यूजर जूम, लाइव फीड और रिकॉर्डिग भी देख सकेगा। दोनों तरफ से बेहतर तरीके से लगातार आवाज कटे बगैर बात हो सकेगी। नाइट विजन मोड भी सेट हो सकेगा। इस कैमरे को आसानी से स्मार्ट फोन और ई-मेल से भी जोड़ा जा सकेगा। ताकि आप कहीं से भी और कभी भी…

ब्रेन पर लगी चोट तो बन गया जीनियस

सुबोध वर्मा (टीएनएन), नई दिल्ली
हादसा अगर हासिल में बदल जाए तो इससे अच्छा क्या होगा! कभी-कभी कुदरत के करिश्मे से ऐसा मुमकिन होता है, जैसा कि एक अमेरिकी शख्स के साथ हुआ। साइंटिस्ट भी हैरान हैं और यह पता लगाने की कोशिश में जुटे हैं कि कैसे इस व्यक्ति के दिमाग में लगी चोट ने उसे मैथेमेटिक्स का जीनियस बना दिया। उन्हें इस दिशा में कुछ कामयाबी भी मिली है।

इस दिलचस्प घटना पर 'लाइव साइंस' में एक रिपोर्ट छपी है। साइंटिस्ट्स ने कहा है कि इसके पीछे वजह यह लगती है कि चोट के बाद हेड के क्राउन के पिछले हिस्से में एक खास एरिया, जिसे पराइटल कॉर्टेक्स कहते हैं, ज्यादा एक्टिव हो गया।

आखिर क्या हुआ था शख्स के साथ: दरअसल, जैसन पैडगेट उस वक्त तक टैकोमा (वॉशिंगटन) का एक साधारण-सा फर्नीचर सेल्समैन था जब तक उसके साथ हादसा पेश नहीं आया था। सन् 2002 की बात है जब एक दिन एक बार के बाहर जैसन पर दो लोगों ने गंभीर रूप से हमला किया। घटना में जैसन के दिमाग पर गहरी चोट लगी, वहीं उसकी किडनी भी जख्मी हो गई। चोटों से उबरने के बाद भी उसे आघात के बाद होने वाले स्ट्रेस डिसऑर्डर ने घेर लिया।
आमतौर पर यह एक मनोवैज्ञानिक क…

क्या सोचते हैं पीडोफील

बाल यौन शोषण एक क्रूर अपराध है और ये प्रवृत्ति लगातार बढ़ती जा रही है. लेकिन अभी तक ये साफ नहीं हो सका है कि बच्चों का यौन शोषण करने वालों के दिमाग में गड़बड़ी होती कहां हैं.



जर्मनी के कील यूनिवर्सिटी क्लीनिक की एक टीम एमआरआई जांच से पता लगा रही है कि पीडोफिल क्यों बच्चों के प्रति आकर्षित होते हैं. भले ही फ्रांस, कनाडा, स्कैंडेनेवियाई देशों में इस मुद्दे पर शोध हो रहा हो लेकिन पीडोफिल के दिमाग के बारे में बहुत कम शोध हुए हैं. मनोवैज्ञानिक योर्ग पोनसेटी बताते हैं, "एमआरआई से मस्तिष्क की सक्रियता और संरचना का अच्छे से पता चल सकता है. अच्छी बात ये है कि खोपड़ी खोले बिना ही हम दिमाग के बारे में सटीकता से बता सकते हैं कि कौन सा हिस्सा सक्रिय है और कौन सा नहीं. फिलहाल हम एक मिलीमीटर के हिस्से तक को देख सकते हैं."
एमआरआई के कारण पीडोफिल लोगों के बारे में कई तरह की जानकारियां इकट्ठी हुई हैं. और पता लग गया है कि उनके दिमाग में कुछ अलग होता है, "पीडोफिल के दिमाग में कई तरह की न्यूरोसाइकोलॉजिकल असामान्यताएं देखी जाती हैं. उनका बुद्धिमत्ता औसत से आठ फीसदी कम होती है. यह भी रोचक है …

पिछले जन्मों के पाप इस जन्म में रोग बनते हैं

ज्योतिर्मय

रोग शरीर में हों या मन में इनके बीज अचेतन मन की परतों में छुपे होते हैं। आयुर्वेद को व्यवस्थित रूप देने वाले महर्षि चरक के अनुसार पिछले जन्मों के पाप इस जन्म में रोग बन कर सताते हैं।

आयुर्वेद की इस मान्यता को को विज्ञान अभी तक यूं ही मानता था। पर अब इस बात को जांचा परखा और सही पाया जाने लगा है। आयुर्विज्ञान के पिछले सौ साल के अनुभव बताने लगे हैं कि रोग की जड़ें अचेतन मन में छुपी हुई है।

अचेतन मन क्या है? सामान्य उत्तर है कि और कुछ नहीं बस हमारा बीता हुआ कल। उस कल की अनुभूतियों में कटुता, संताप. पछतावा या कोई कसक है, तो वह रोग-शोक के रूप में प्रकट होती है।

आध्यात्मिक चिकित्सकों का कहना है कि बीते हुए कल की सीमाएँ वर्तमान से लेकर बचपन तक ही सिमटी नहीं हैं। इसके दायरे में हमारे पूर्वजन्म की अनुभूतियाँ भी आ जाती हैं। �

इस सिद्धान्त को कई आधुनिक मनोचिकित्सकों ने स्वीकारा है। अमेरिका में फ्लोरिडा क्षेत्र के मियामी शहर में मनोचिकित्सा कर रहे डॉ. ब्रायन वीज़ की कहना है कि जटिल रोगों को उपचार करते समय रोग के लक्षणों पर गौर करने से ज्यादा रोगी की ज्ञात अज्ञात स्मृतियों को भी जांचना चाहिए।

अ…

अभिनेत्रियां, जो बचपन में हुई यौन शोषण का शिकार

बहुत ही सेलिब्रिटीज का हुआ रेप
हाल ही में 'बिग बॉस 4' की प्रतिभागी रह चुकी पामेला एंडरसन ने इस राज से पर्दा उठाया कि उनका बचनन में गैंगरेप और यौन शोषण हुआ था। सिर्फ पामेला अकेली ऐसी सेलिब्रिटी नहीं है।

बल्कि बॉलीवुड और हॉलीवुड में कई ऐसी सेलिब्रिटीज और अभिनेत्रियां है जो बचपन में कभी ना कभी या तो यौन शोषण का शिकार हुईं हैं या फिर उनका रेप हुआ है।

टाइम्स ऑनलाइन ने ऐसे सेलिब्रिटीज की एक सूची बनाई है। जानिए, कौन हैं वे सेलिब्रिटीज।
पामेला एंडरसन कनाडियन-अमेरिकन एक्ट्रेस और 'बिग बॉस 4' की प्रतिभागी रह चुकी पामेला एंडरसन ने हाल ही में बताया कि जब वे मात्र 6 साल की थी तो उनका यौन शोषण होता था। इतना ही नहीं, 12 साल की उम्र में उनका बलात्कार हुआ था और टीनेज में ही उनका गैंगरेप हुआ था।
मैडोना क्वीन ऑफ पॉप’ के नाम से मशहूर अंतरराष्ट्रीय पॉप सिंगर मैडोना ने बताया कि जब वह सिंगर बनने के लिए संघर्ष कर रही थीं तो एक अजनबी ने उनके साथ रेप किया था। उस समय वह 19 साल की थीं। मैडोना ने बताया कि एक बिल्डिंग की छत पर मुझे घसीटकर ले जाया गया। वह मेरे पीछे चाकू लगाया हुआ था और बंदूक दिखाकर रे…

2018 तक ऑफिस में होंगे रोबोट ही रोबोट

विश्व की कुछ नामचीन कंपनियों ने अपने यहां रोबोट से ऑफिस जॉब करवानी शुरू कर दी है. ब्रिटेन के एक विशेषज्ञ के मुताबिक रोबोट 2018 तक सभी तरह की ऑफिस जॉब करना शुरू कर देगा. रोबोट ऑफिस जॉब से संबंधी कार्य कहीं अधिक निपुणता और त्वरित गति से कर सकता है. साथ ही रोबोट से ऑफिस जॉब करवाना कहीं अधिक सस्ता भी पड़ेगा. घरेलू कार्यों और सेना व अर्धसैनिक बल लंबे अरसे से रोबोट की सेवाएं ले रहे हैं. कई देशों में बम निष्क्रिय करने का कार्य रोबोट कर रहे हैं. आईबीएम ने सुपरकंप्यूटर ‘वाटसन’ से कस्टमर सर्विस कॉल का जवाब देना शुरू कर दिया है.



ब्रिटेन की आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस कंपनी ‘सीलाटोन’ के सीईओ एंड्रू एंड्रसन ने दावा किया है कि आने वाले पांच साल में रोबोट सभी तरह के ऑफिस कार्य करना शुरू कर देगा.आने वाले समय में निर्णय लेने वाले रोबोट में कहीं तेजी से सुधार होगा. इसके चलते विपणन, शिक्षा और आईटी क्षेत्र की नौकरियों में रोबोट का इस्तेमाल होने लगेगा





निर्णय लेने वाला रोबोट क्लर्क की भूमिका बखूबी निभा लेगा



मसलन इंश्योरेंस कंपनी में दो बार दावे की पहचान इंसान से कहीं अधिक अच्छी तरह रोबोट कर लेगा.sabhar :
http:/…

7 साल में बनकर तैयार हुआ था गेट्स का आलीशान घर Xanadu 2.0, देखें नजारे

इसी साल मार्च में जारी फोर्ब्स पत्रिका की ग्लोबल बिलेनियर की सूची में अमेरिकी उद्योगपति बिल गेट्स को एक बार फिर पहला स्थान मिला है। पत्रिका के अनुसार इस साल गेट्स की कुल संपत्ति 76 अरब डॉलर है, जबकि साल 2013 में ये आंकड़ा 67 अरब डॉलर था। गेट्स चार साल बाद दोबारा दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों की लिस्ट में टॉप पर हैं। दौलतमंदों के घर से लेकर उनकी लाइफस्टाइल तक सभी में विलासिता का लुक देखने को मिलता है। अमीरों के घर उनके लग्जरी रिसोर्स में से एक होते हैं। वैसे तो दुनिया भर में गेट्स के कई घर हैं, लेकिन वाशिंगटन का उनका अल्ट्रा लग्जरी घर उन्हें सबसे ज्यादा पसंद है। करीब 66,000 वर्गफीट में बने इस घर में एक से बढ़कर एक लेटेस्ट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है। इसके चलते इसे Xanadu 2.0 निक नेम से भी जाना जाता है। कुछ ऐसा है घर- गेट्स के इस घर की कीमत करीब 150 मिलियन डॉलर है। गेट्स का घर किसी शहर से कम नहीं है। इस घर में 7 लग्जरी बेडरूम, 24 बाथरूम, 6 किचन, 6 फायरप्लेस, 3 गैरेज 11500 वर्गफीट में परिवार के लिए प्राइवेट क्वार्टर और 2100 वर्गफीट में लाइब्रेरी बनी हुई है। 84 सीढ़ियों के साथ गेट…

बाड़मेर में प्यास बुझाते वॉटर एटीएम कार्ड

आभा शर्मा रविवार, 25 मई 2014 बाड़मेर से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
पानी हर ओर पर पीने को नहीं!
पानी ही पानी हर तरफ़, पीने को एक बूंद नहीं। सुनने में भले यह अजीब लगे, पर साल 2006 में राजस्थान के बाड़मेर में आई भयंकर बाढ़ के बावजूद कवास गांव की कुछ यही कहानी थी। अतिवृष्टि ने इस रेगिस्तानी इलाक़े के गर्भ को जलप्लावित तो कर दिया था, पर खारा होने की वजह से लोग अभी भी प्यास बुझाने को तरस ही रहे थे।

अब यहां के लोग न केवल मीठा पानी पी रहे हैं बल्कि समझदार भी हो गए हैं। अब उनके पास “वॉटर एटीएम कार्ड” जो है।

यह छोटा सा गांव राजस्थान का पहला गांव है, जहां इस साल फरवरी से वॉटर एटीएम के ज़रिए लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। एक सामुदायिक आरओ प्लांट से खारे पानी को पीने योग्य बनाया जाता है और लोगों को इस कार्ड से मीठा पानी आसानी से मिल जाता है।

कवास के बाद भीमदा, सवाऊ पदम सिंह, आकदड़ा और बायतू भोपजी के लोगों को भी वॉटर एटीएम की सुविधा मिल रही है। इन सभी गांवों में पानी में फ्लोरोसिस की मात्रा बहुत अधिक है और आकदड़ा के कुओं का पानी तो है, जैसे खारा ज़हर। आने वाले दिनों में ज़िले के संतरा, कानोड़…