Loading...

शुक्रवार, 9 मई 2014

People You Won’t Believe Actually Exist

0

Tall Model From Brazil
No one understands the plight of the tall girl more than Elisany da Cruz Silva, a 17-year-old girl from Brazil who currently stands at six feet, nine inches in height. Elisany is a remarkable girl with a very rare form of gigantism caused by a tumor on her pituitary gland. She has been experiencing great leaps in height growth since her late childhood.
110

3a

4a


28

2 FOOT ROUND OF BOOTILICOUSNESS: THE WORLD’S WIDEST HIPS

It’s no secret that men love curves. Curvy, voluptuous women have no trouble getting attention – especially if those curves are combined with confidence and a healthy amount of sass.


3

4

8


7


6

5

THE DIRTIEST MAN ALIVE

Meet Amoo Hadij, a peculiar 80-year-old man who has not bathed himself once in more than 60 years. Amoo Hadij lives in a small abandoned brick hut in the village of Dezhgah, completely alone, surrounded by garbage, dirt, and animal feces. A bit of a loner, Amoo likes to keep to himself, and rarely has the opportunity to interact with other people. This is probably due to the fact that he smells to high heaven and has the outward appearance of a troll.

dirt6


GOOD PHOTOS GONE WRONG – FUNNY OPTICAL ILLUSIONS!


114
210

new1-Copy
new2
new3-Copy

new4



new5-Copy
new12

new11

new14
GIRL WEARS A CORSET FOR 3 YEARS IN A ROW

wearing-corset-for-three-years-6


wearing-corset-for-three-years-2-1

wearing-corset-for-three-years-8

साभार :http://viralious.com/








 


Read more

3000 किलोमीटर और वह भी एक घंटेगी में दौड़ेगी ट्रेन

0


3000 किलोमीटर और वह भी एक घंटेगी में दौड़ेगी ट्रेन!

लंदन: एक ऐसी रेलगाड़ी जो 3000 किलोमीटर तक की रफ्तार से दौड़ सकती है उससे सफर करना कैसा रहेगा? सुनने में यह दूर की कौड़ी लगती हो पर चीन के एक अनुसंधानकर्ता ने हमारे भविष्य के लिए इसकी योजना तैयार की है।

सिचुआन प्रांत के चेंगदू शहर स्थित दक्षिण पश्चिम जिआओटोंग विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर दर देंग जिगांग ने सबसे पहला मैनेड मेगाथर्मल सुपरकंडक्टिंग मैग्नेटिक लैविटेशन (गैग्लेव) लूप तैयार किया है। प्रति किलोमीटर सैकड़ों किलोमीटर की रफ्तार पकड़ने की क्षमता के कारण मैगलेव ट्रेन एशिया में बड़ी पसंद बन चुका है।

वर्तमान में अत्यधिक वायु प्रतिरोध के कारण इसकी सर्वोच्च गति सीमा 400 किलोमीटर प्रतिघंटा है। जिगांग ने स्पष्ट किया कि यदि गति सीमा 400 किलोमीटर प्रतिघंटा से बढ़ाया जाए तो खींचने वाली ऊर्जा का 83 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा वायु प्रतिरोध के कारण व्यर्थ हो जाएगा।

उन्होंने आगे कहा कि एक निर्वात ट्यूब ट्रेन लाइन में समुद्र की सतह में सामान्य वायुमंडलीय दाब से वायु दाब को 10 गुणा घटा कर भविष्य में सात गुणी गति सीमा बढ़ाई जा सकेगी। दुनिया में सबसे तेज सवारी गाड़ी शंघाई मैगलेव ट्रेन है जो 431 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार तक पहुंच सकती है। (एजेंसी) sabhar :http://zeenews.india.com/

Read more

मंगलवार, 6 मई 2014

भविष्य में महिलाओं से स्पर्म और पुरुषों से अंडाणु तैयार करना संभव हो सकता है

0

cells


कई ऐसे लोग मेडिकल रीजन से औलाद सुख से वंचित रह जाते हैं। उनकी एक ही तमन्ना होती है कि घर के आंगन में कोई किलकारी देने वाला आ जाए। विज्ञान सूनी गोद को हरी करने की राह में नई रिसर्च पर फोकस करता रहा है। इसने मां-बाप बनने की संभावनाओं को बढ़ाया है। अगर जापानी रिसर्चरों की मानें तो भविष्य में महिलाओं से स्पर्म और पुरुषों से अंडाणु तैयार करना संभव हो सकता है। यदि इसमें कामयाबी मिल जाती है तो इनफर्टिलिटी (बांझपन) के इलाज में क्रांतिकारी बदलाव आ सकता है। हालांकि यह प्रयोग कब पूरी तरह से सफल होगा यह कहना अभी कठिन है। लेकिन रिसर्चरों के नए प्रयोग से औलाद की चाह रखने वालों के अंदर एक चाह जरूर जगी है।

जापान की क्योटो यूनिवर्सिटी के कात्सुहिको हयाशी और सीनियर प्रोफेसर मितिनोरी सैतोयू ने चूहे की स्किन सेल्स से प्रीमॉर्डिअल जर्म सेल्स या पीजीसी तैयार की है। पीजीसी पुरुष और महिलाओं के सेक्स सेल्स में कॉमन प्रीकर्सर है। इसके बाद इन सेल्स को स्पर्म और अंडाणु दोनों डिवेलप किया गया। साइंटिस्टों ने इनका इस्तेमाल आईवीएफ के जरिए प्रजनन करने में किया। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तकनीक प्रजनन मेडिसिन के लिए कई संभावनाओं के द्वार खोलेगी। यह प्रजनन करने में असमर्थ महिलाओं की स्किन सेल्स से अंडाणु तैयार कर बच्चे पैदा करने में मददगार होगा। साथ ही पुरुषों या महिलाओं के स्किन सेल्स से स्पर्म और अंडाणु तैयार करना संभव हो सकेगा।चूहे पर सफलतापूर्वक प्रयोग करने के बाद अब जापान के वैज्ञानिक बंदरों पर इसे आजमाने की सोच रहे हैं। इसमें सफलता मिलने के बाद ही मनुष्यों पर प्रयोग किया जाएगा। हालांकि वैज्ञानिक अभी इसके साइड इफेक्ट और अन्य नकारात्मक पहलुओं पर भी काम कर रहे हैं। इसलिए वैज्ञानिक फिलहाल ऐसा कोई दावा नहीं कर रहे हैं कि यह तकनीक मनुष्यों के लिए कब पूरी तरह से सटीक होगी। माना जा रहा है कि इसमें 10 से लेकर 50 साल भी लग सकते हैं। sabhar :http://navbharattimes.indiatimes.com/

Read more

हमशक्ल में हॉट हिरोइनों को देखकर उड़ जाएंगे आपके होश

0



मुंबई. बॉलीवुड के छोटे खान कहे जाने वाले अभिनेता सैफ अली खान की आने वाली फिल्म हमशक्ल में हॉट अभिनेत्रियों का तड़का लगाया गया है. फिल्मों में हीरोइन का बिकनी अवतार तो जैसे आजकल आम बात है. लेकिन एक फिल्म में तीन-तीन हीरोइनों को एक साथ बिकनी पहनते देख आपके होश ही उड़ जाएंगे. जी हां ऐसा होने जा रहा है. साजिद खान की फिल्म 'हमशक्ल' में तीन हसीनाएं साथ बिकनी में दिखाई देंगी. इसके लिए तीनों ने कड़ी मेहनत की है.
सूत्रों ने बताया कि फिल्म में बिपाशा बसु, ऐशा गुप्ता और तमन्ना भाटिया तीनों ने बिकनी पहनी है. यही नहीं खुद को परफेक्ट दिखाने के लिए तीनों ने खूब मेहनत भी की है. ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है जब साजिद ने अपनी फिल्म की किसी हीरोइन को बिकनी पहनाई है, उनकी हर फिल्म में ऐसा एक सीक्वेंस होता है.
फिल्म के निर्माता वासु भगनानी हैं. फिल्म में राम कपूर, सैफ अली खान और रितेश देशमुख मुख्य किरदार में हैं. फिल्म का फ‌र्स्ट लुक लॉन्च हो गया है. तीनों हीरो फिल्म में ट्रिपल अवतार में कॉमेडी करते दिखेंगे.sabhar :http://www.palpalindia.com/

Read more

तीन लोगों के डीएनए से होगा बच्चा

1



यह तकनीक अब तक बंदरों पर टेस्ट की गई थी, इससे मिले नतीजों के आधार पर इस हफ्ते अमेरिक में फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) यह तय करेगा कि इस तरह के परीक्षण मनुष्य पर किए जाने की छूट दी जानी चाहिए या नहीं. इस तकनीक से 'डिजाइनर बच्चे' के जन्म में मदद मिल सकती है. पैदा हुए बच्चे में मां से अनचाहे गुण या जेनेटिक बीमारियां न पहुंचें इसके लिए उन्हें बदला जा सकता है. हालांकि तकनीक के खिलाफ नैतिकता के आधार पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं.
विरोध के स्वर
आलोचकों का मानना है कि इस तकनीक के आ जाने से माता पिता बच्चे की आंख का रंग, कद या बुद्धिमत्ता भी तय करने की कोशिश कर सकते हैं. तकनीक का समर्थन कर रहे वैज्ञानिक इस बात पर जोर दे रहे हैं कि यह जीन मॉडिफिकेशन के बजाय जीन करेक्शन में काम आएगी.
डॉक्टर शूखरात मितालिपोव कहते हैं, "हम उन जीन्स को इस तकनीक से ठीक कर सकते हैं जो किसी कारण परिवर्तित हो गए और जो मानव शरीर के लिए हानिकारक हैं. हम उन्हें ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं, मुझे समझ नहीं आता कि इसका विरोध क्यों होना चाहिए."
पोर्टलैंड की ऑरिगॉन हेल्थ एंड साइंस यूनिवर्सिटी में डॉक्टर मितालिपोव की रिसर्च ने इस मुद्दे पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने साथी रिसर्चरों के साथ मिलकर डीएनए रिप्लेसमेंट तकनीक के जरिए पांच बंदरों के जन्म में मदद की. अब वह यह परीक्षण कुछ ऐसी महिलाओं पर करना चाहते हैं जिनमें दोषपूर्ण जीन्स के कारण बच्चे के स्वास्थ्य को खतरा हो सकता है, जैसे दृष्टिहीनता या किसी अंग का निष्क्रिय होना.
कैसे काम करती है तकनीक
अमेरिका में हर साल पांच हजार में से एक बच्चा माइटोकॉन्ड्रिया में मौजूद दोषपूर्ण डीएनए के कारण इस तरह के रोगों के साथ पैदा होता है. माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए बच्चे में मां से आता है, पिता से नहीं. इस तकनीक के जरिए मां के सेल के वे ही डीएनए बच्चे में डाले जाएंगे जो न्यूक्लियस में होंगे न कि माइटोकॉन्ड्रिया के डीएनए. माइटेकॉन्ड्रियल डीएनए डोनर मां के होंगे.
इसे अंजाम देने के लिए रिसर्चर एक स्वस्थ डोनर महिला के अंडाणु के न्यूक्लियस डीएनए निकालकर मां के न्यूक्लियस डीएनए से बदल देते हैं. प्रजनन पर भ्रूण में मां के न्यूक्लियस डीएनए जाएंगे जो आंखों का रंग और कद जैसी खूबियां निर्धारित करते हैं, लेकिन माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए डोनर मां का होगा.
कई लोग इस बात की भी उम्मीद कर रहे हैं कि इसकी मदद से तीन लोगों के गुणों को मिलाकर बच्चे को पैदा किया जा सकेगा. लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि बात बढ़ा चढ़ा कर प्रस्तुत की जा रही है. उनका मकसद केवल स्वस्थ बच्चे के जन्म में मदद करना है जिसके दोष जन्म से पहले डोनर मां के माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए के जरिए ठीक किए जा सकते हैं.
इस तकनीक से बच्चे के गुणों में हुए परिवर्तन आने वाली नस्लों में आगे बढ़ते जाएंगे. आलोचकों का सवाल यह भी है कि इससे अगर किसी तरह की स्वास्थ्य संबंधी तकलीफें आती हैं तो वे भी वंशानुगत होंगी. जर्मनी और फ्रांस समेत 40 से ज्यादा देशों में मानव जीन में वंशानुगत परिवर्तन करना प्रतिबंधित है.
एसएफ/एएम (एपी) sabhar :http://www.dw.de/

Read more

सोमवार, 5 मई 2014

भोजपूरी मे टीना घई

0









भोजपूरी  मे टीना  घई  का ऐलबम  नथनी  आ गया  है । 

Read more

दुनिया का सबसे अनोखा गांव, जहां के हर घर में है प्लेन

0

दुनिया का सबसे अनोखा गांव, जहां के हर घर में है प्लेन


यह दुनिया की एक ऐसी अनोखी बस्ती है, जहां हर लगभग घर में एक प्लेन जरूर है। यह अमेरिका के नॉर्थ-ईस्ट फ्लोरिडा में स्थित है। इसे स्प्रूस क्रीक के नाम से जाना जाता है और यह डेटॉना बीच से कुछ मील की दूरी पर है। इसे एयर-पार्क या फ्लाई-इन-कम्युनिटी के नाम से भी जाना जाता है।
 
स्प्रूस क्रीक में 1,300 घर हैं और यहां के 700 प्लेन हैं। इस गांव की आबादी करीब 5,000 है। यहां के अधिकांश घरों में निजी प्लेन खड़े हुए दिखाई देते हैं। इस यूनीक गांव में एक निजी एयरफील्ड है। यहां का एक ड्राइव-वे सीधे रनवे से जोड़ता है। रनवे 4 000 फीट लंबा और 150 फीट चौड़ा है।

दुनिया का सबसे अनोखा गांव, जहां के हर घर में है प्लेन

अनोखे गांव स्प्रूसक्रीक में 18 होल वाला गोल्फ कोर्स, कई फ्लाइंग क्लब, निजी एयरक्राफ्ट्स, फ्लाइट ट्रेनिंग और 24 घंटे पेट्रोलिंग करने वाली सिक्युरिटी है। जिन लोगों की जिंदगी एयरप्लेन से जुड़ी है, उनके लिए स्प्रूसक्रीक स्वर्ग जैसी जगह है। 
 
 
अमेरिका के सुप्रसिद्ध एक्टर और पॉयलट जॉन पार्क ट्रैवोल्टा भी यहां कई साल रह चुके हैं। हालांकि, यहां के कई लोगों को शिकायत थी कि जॉन बोइंग 707 से उड़ते थे, जिससे यहां आने और जाने बहुत अधिक शोर होता था। जॉन ने यह बोइंग भाड़े पर ले रखा था। इससे एक दिक्कत और भी होती थी कि 250,000 पाउंड वजनी बोइंग को यहां की छोटी हवाई पट्टी में उतरने में परेशानी होती थी।
दुनिया का सबसे अनोखा गांव, जहां के हर घर में है प्लेन

स्प्रूस क्रीक रेसीडेंशियल एयर-पार्क का कॉन्सेप्ट सेकंड वर्ल्ड वार के बाद का है। यह ऐसा वक्त था, जब अमेरिका को अतिरिक्त एयरफील्ड और पॉयलट्स की जरूरत थी। 1946 के बाद अमेरिकी सरकार ने पूरे देश में 6,000 रेसीडेंशियल एयर-पार्क बनाने की योजना बनाई थी। यह योजना पूरी कभी नहीं हो सकी, लेकिन यह बस्ती उसी योजना के तहत बसाई गई थी। स्प्रूस क्रीक में निवेश होने से यहां फ्लाई कम्युनिटीज का एक बड़ा एक्टिव नेटवर्क तैयार हो गया। अमेरिका के एरिजोना, कोलोरोडा, फ्लोरिडा, टेक्सास और वॉशिंगटन की बड़ी फ्लाई कम्युनिटीज के बीच स्प्रूस क्रीक सबसे विशाल है।
दुनिया का सबसे अनोखा गांव, जहां के हर घर में है प्लेन

गांव के लोगों के घर के गैराज और मैदान में खूबसूरत सेसना, पाइपर, पी-51 मुस्टांग, एल-39 एलब्रैट्रोज, एन इक्लिप्स 500, फ्रैंच फौगा मैजिस्टर खड़े हैं। इस गांव में एक रसियन मिग-15 फाइटर जेट भी है। स्प्रूसक्रीक में विमान के अलावा लैंबोरघिनी, कारवेट्स और पोर्स जी2 जैसे महंगी लग्जरी कारें भी देखने को मिल जाएंगी।

दुनिया का सबसे अनोखा गांव, जहां के हर घर में है प्लेन\

साभार : भास्कर डॉट कॉम 


Read more

कुछ पुरातात्विक खोजे जिन्होंने वैज्ञानिकों को कर रखा है हैरान और परेशान

0


विशव में हर साल बहुत सी पुरातात्विक खोजे की जाती है। इन खोजो से हमे हमारे पिछले समय के बारे में काफी जानकारी मिलती है।  लेकिन कभी कभी कुछ ऐसी खोजे हो जाती है जिसका रहस्य वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पाते है जैसे की सहारा के सुदूर रेगिस्तान में बना पत्थरो का ढांचा , या फिर कुछ ऐसी खोजे होती है जो वैज्ञानिको को हैरान कर के रख देती है जैसे की नवाडा में मिला विशाल इंसानी जबड़ा।  हम आपको आज कुछ ऐसी ही खोजो के बारे में विस्तार से बताएँगे।

1. शुद्ध लोहे से बना करोडो साल पुराना हथोड़ा (Hammer of the purest iron alloy) :-



Hammer of the purest iron alloy



इस धरती पर अब तक हुई  पुरातात्विक खोजो में से इस खोज ने वैज्ञानिको को सबसे ज्यादा हैरान किया है। अमेरिका में सन 1934 में  140 मिलियन साल पुरानी लाइमस्टोन की  चट्टानों में एक लोहे की हथोडी मिली। जब वैज्ञानिको ने इसका प्रयोगशाला मेंअध्यन्न किया तो वो दो कारणों से हैरान  रह गए। पहला की हथौड़े में लगा हुआ लकड़ी का हैंडल अंदर से कोयल बन चूका था, यानी की वो कई मिलियन साल पुरानी थी। दूसरा हैरान करने वाला कारण लोहे की एक दम शुद्ध अवस्था थी।  इतना शुद्ध लोहा  धरती की किसी भी खदान से आज तक  नहीं निकला है। लोहे की शुद्धता का अंदाज़ा इस बात से पता चलता है की 1934 में उसे चट्टान से निकलते  वक़्त खरोच  लगी  थी पर 80 साल बाद आज तक भी उस पर जंग लगने  के कोई लक्षण नहीं है। वैज्ञानिक इस हथौड़े का अनुमानित समय 145 से 60 मिलियन साल पूर्व मानते है यानी की  करोडो साल पूर्व जबकि मानव जाती ने 10000 साल पहले ही इस तरह के औजार बनाना सीखा है।


2.सहारा रेगिस्तान में पत्थरों से बना खगोलीय ढांचा  (Astronomically aligned stones in Sahara desert ) :-

Astronomically aligned stones in Sahara desert



सहारा के सुदूर रेगिस्तान में स्तिथ पत्थरो का यह ढांचा दुनिया के सबसे बड़े रहस्यों में से एक है। 1973 में पुरातत्व शास्त्री पहली बार यहां पहुंचे थे। 1998 में प्रोफेसर फ्रेड वैंडोर्फ की टीम ने पत्थरों के इस स्ट्रक्चर का अध्ययन किया तो पता चला कि ये करीब 6000 साल ईसा पूर्व में बनाया गया है। नाब्टा प्लाया में मिले पत्थर के स्ट्रक्चर पर रिसर्च करने से पता चला है कि ये खगोल शास्त्र और ज्योतिष से संबंधित थे। सवाल ये है कि इतनी सहस्र शताब्दियों पहले उन लोगों ने इतना विकास कैसे कर लिया था। तब वे इसका इस्तेमाल किस तरह करते थे? ये आज भी एक रहस्य बना हुआ है।

3. चीनी मोजैक लाइन्स (Chinese Mosaic lines) :-

Chinese mosaic lines




तस्वीर में दिख रहे ये अजीबो-गरीब लकीरें 40 डिग्री 27'28.56 उत्तर व 93 डिग्री 23'24.42 पूर्व दिशा में देखी गई हैं। इस विचित्र कृति के बारे में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है। चीन के गानसू शेंग के रेगिस्तान में ये लकीरें बनी हुई हैं। अंग्रेजी में इसे चीनी मोजैक लाइन्स कहा जाता है। कुछ आंकड़े बताते हैं कि 2004 में इन लकीरों को खींचा गया था। अहम बात ये है कि ये लकीरें मोगाओ की गुफा के आसपास बनाई गई हैं, जिसे वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा प्राप्त है। दिलचस्प पहलू यह है कि चट्टान के ऊबड़-खाबड़ होने के बाद भी लंबे अरसे से लकीरें बिल्कुल सीधी ही हैं।

4. पत्थर की गुड़िया (Stone Doll) :-
Stone Doll



1889 में ईदाहो के नाम्पा में अचानक वैज्ञानिकों का रूझान बढ़ गया। वजह थी खुदाई के दौरान मिली पत्थर की गुड़िया। इसे मानव हाथों द्वारा बनाया गया है। पत्थर की ये गुड़िया 320 फीट की गहराई में खुदाई के दौरान मिली थी। इसे देख तब अंदाजा लगाया गया कि दुनिया में मानव जाति के अस्तित्व में आने के बाद शायद इस गुड़िया को बनाया गया होगा। हालांकि, पर्दे के पीछे की सच्चाई अभी भी अबूझ रहस्य बनी हुई है।

5. तीन सौ मिलियन साल पुराना लोहे का पेंच (Iron bolt, age 300 million years)





Iron bolt, age 300 million years





1998 में रूसी वैज्ञानिक दक्षिण-पश्चिम मॉस्को से करीब 300 किलोमीटर दूर एक उल्का के अवशेष की जांच कर रहे थे। इस दौरान उन्हें एक पत्थर का टुकड़ा मिला, जिसमें लोहे का पेंच संलग्न था। भूवैज्ञानिकों के मुताबिक, ये पत्थर 300 मिलियन (30 करोड़) साल पुराना है। तब न तो कोई प्रबुद्ध प्रजाति हुआ करती थी और न ही धरती पर डायनासोर हुआ करते थे। पत्थर के बीच लोहे का पेंच साफ दिखाई पड़ता है। इसकी लंबाई एक सेंटीमीटर और व्यास तीन मिलीमीटर है।

6. प्राचीन रॉकेट जहाज - जापान  (Ancient Missile Ship - Japan) :-

Ancient Missile Ship

तस्वीर में आपको रॉकेट नुमा जहाज जैसा कुछ दिख रहा है। ये जापान की एक गुफा में बनी प्राचीन पेंटिंग है। बताया जाता है कि ये पेंटिंग 5, 000 ईसा पूर्व की है। खोजकर्ताओं के जेहन में ये सवाल अभी भी बना हुआ है कि क्या प्राचीनकाल में इस तरह का कोई विमान था। अगर नहीं, तो फिर इसे क्या सोच कर बनाया गया होगा।

7.  खिसकते पत्थर - डेथ वैली, कैलिफोर्निया  (Moving Stones - Death Valley, California) :-




Moving Stones - Death Valley, California






कैलिफोर्निया की डेथ वैली में कुछ पत्थरों का खुद ब खुद खिसकना नासा के लिए भी अबूझ पहेली बनी हुई है। रेसट्रैक प्लाया 2.5 मील उत्तर से दक्षिण और 1.25 मील पूरब से पश्चिम ततक बिल्कुल सपाट है। लेकिन यहां बिखरे पत्थर खुद ब खुद खिसकते रहते हैं। यहां ऐसे 150 से भी अधिक पत्थर हैं। हालांकि, किसी ने उन्हें आंखों से खिसकते नहीं देखा। सर्दियों में ये पत्थर करीब 250 मीटर से ज्यादा दूर तक खिसके मिलते हैं। 1972 में इस रहस्य को सुलझाने के लिए वैज्ञानिकों की एक टीम बनाई गई। टीम ने पत्थरों के एक ग्रुप का नामकरण कर उस पर सात साल अध्ययन किया। केरीन नाम का लगभग 317 किलोग्राम का पत्थर अध्ययन के दौरान जरा भी नहीं हिला। लेकिन जब वैज्ञानिक कुछ साल बाद वहां वापस लौटे, तो उन्होंने केरीन को 1 किलोमीटर दूर पाया। अब वैज्ञानिकों का यह मानना है कि तेज रफ्तार से चलने वाली हवाओं के कारण ऐसा होता है।

8.  पिरामिड द पॉवर - मेक्सिको ( Pyramids the Power - Mexico) :-


Pyramids the Power - Mexico


इस प्राचीन मैक्सिकन शहर की दीवारें अभ्रक (mica) की बड़ी चादरों से बनी हैं। अभ्रक खदान के निकटतम जगह की बात करें, तो वह ब्राजील में है। लेकिन ये खदान शहर से हजारों मील की दूरी पर है। अभ्रक का इस्तेमाल प्रौद्योगिकी व ऊर्जा उत्पादन में किया जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि इन इमारतों को बनाने के लिए बिल्डर ने अभ्रक जैसे खनिज का इस्तेमाल क्यों किया होगा। क्या आर्किटेक्ट शहर में बिजली के लिए स्रोत का दोहन कर रहे थे?


9. विशाल जीवाश्म - आयरलैंड  (Fossil Giants - Ireland) :-




Fossils Giants - Ireland





इस विशाल आइरिश जीवाश्म की लंबाई 12 फीट से ज्यादा है। इसकी खोज आयरलैंड के अंतरिम में खुदाई के दौरान हुई थी। इस तस्वीर को 'द ब्रिटिश स्ट्रैंड मैगजीन ऑफ दिसंबर 1895' से लिया गया है। मैगजीन के मुताबिक, जीवाश्म की लंबाई 12 फीट 2 इंच, सीने की परिधि 6 फीट 6 इंच, बाजुओं की लंबाई 4 फीट 6 इंच है। इसके अलावा दाएं पैर में छह अंगुलियां हैं।

10.  पिरामिड ऑफ अटलांटिस  -  यूकैटन खाड़ी, क्यूबा  (Pyramids of Atlantis - Yucatan Channel, Cuba) 


Pyramids of Atlantis - Yucatan Channel, Cuba


क्यूबा के निकट तथाकथित यूकैटन खाड़ी में वैज्ञानिकों द्वारा मेगालिथ के खंडहर के रहस्य का पता लगाने का सिलसिला जारी है। इस खोज में वे तटीय क्षेत्र का मीलों लंबा सफर तय कर चुके हैं। जिन अमेरिकी पुरातत्वविदों ने इस जगह की खोज की, उन्होंने फौरन एक घोषणा कर कहा कि उन्होंने अटलांटिस ढूंढ निकाला है। अब ये स्कूबा डाइवर्स के लिए पसंदीदा जगहों में से एक है।

11. भीमकाय इंसानी जबड़ा -  नेवाडा, अमेरिका (Giant Human Jaws, Nevada -America ) :-





(Giant Human Jaws, Nevada -America



ऐसा कहा जाता है कि नेवाडा में लाल बाल वाले 12 फीट लंबे इंसान रहा करते थे। ये कहानी अमेरिकियों द्वारा एक गुफा में भीमकाय लोगों की हत्या से जुड़ी है। 1911 में खुदाई के दौरान ये मानव जबड़ा मिला है। तस्वीर में सामान्य व भीमकाय जबड़े को एकसाथ तुलना कर दिखाया गया है। इसके अलावा 1931 में दो मानव कंकाल भी मिले थे, जिनकी लंबाई 8 व 10 फीट थी।


12. एल्युमीनियम कील - रोमानिया (Aluminium Wedge - Romania) :-

Aluminium Wedge - Romania


1974 में त्रानसिलवेनिया की मुर्स नदी में 20, 000 साल पुराने मैस्तदन की हड्डियों के साथ एक अलुमिनिम की कील मिली थी। इस कील पर आक्साइड की एक मिलीमीटर मोटी परत चढ़ी हुई थी। वैज्ञानिकों के मुताबिक, कील 300-400 साल पुरानी है। गौरतलब है कि अलुमिनियम हमेशा अन्य धातुओं के साथ मिश्रित पाया जाता है, लेकिन चार सौ साल पुरानी ये कील विशुद्ध अलुमिनियम की बनी हुई है। वैज्ञानिकों के बीच अबूझ पहेली ये है कि 1808 के पहले तक अलुमिनियम की खोज ही नहीं हुई थी। ऐसे में चार सौ साल पहले विशुद्ध अलुमिनियम कैसे आ सकता है।


3. लोलाडॉफ प्लेट - नेपाल (Plate Loladoffa - Nepal) :-नेपाल में 12, 000 साल पहले पत्थर से बनी थाली का चलन था। हालांकि, इस थाली को देख यूएफओ की झलक दिखाई देती है। तस्वीर में आप देख सकते हैं कि थाली में एलियन नुमा आकृति बनी हुई है।
sabhar :http://www.ajabgjab.com/

Plate Loladoffa - Nepal


Read more

भूत ने पटककर फर्श पर घसीटा,

0

भूत ने पटककर फर्श पर घसीटा, देखें रोंगटे खड़े करने वाली तस्वीरें


प्रेतात्माओं के अस्तित्व को लेकर हमेशा विवाद रहा है, लेकिन इन दिनों एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसमें प्रेतात्मा के डरावने हमले का फुटेज है। यू-ट्यूब पर आए वीडियो को अब तक लाखों लोगों ने देखा है। वीडियो किसी अज्ञात अस्पताल का है और इस व्यक्ति के बारे में भी कुछ नहीं बताया गया। 
वीडियो में एक व्यक्ति बड़े आराम से अस्पताल के सुनसान कॉरिडोर से गुजरते दिखाई दे रहा है। यह देखकर लगता है कि उसे ऐसी किसी घटना की आशंका भी नहीं रही होगी। 
यह व्यक्ति अस्पताल के कॉरिडोर के अगले गेट पर जैसे पहुंचा, तो उसके सामने अचानक एक छाया दिखाई दी और वह फर्श पर गिर गया। प्रेतात्मा उसका पैर पकड़कर फर्श पर कुछ दूर आगे की ओर तक घसीटती नजर आती है। कुछ ही पलों में वह छाया के चंगुल से छूटता है और डरा-सहमा तेजी से वापस भागते हुए नजर आता है। हालांकि, इस घटना के समय, स्थान और पीड़ित व्यक्ति आदि की जानकारी नहीं मिल सकी। इस वाकये की आप यहां तस्वीरें और वीडियो देख सकते हैं।
(फोटो और वीडियो साभार : यू-ट्यूब)





sabhar : bhaskar.com

Read more

रविवार, 4 मई 2014

वर्चुअल रिएलिटी फर्म ऑक्‍लस को खरीदेगा फेसबुक

0



वॉशिंगटन। व्हाट्सऐप को 19 अरब डॉलर में खरीदने के करीब एक माह बाद ही फेसबुक ने अगले अधिग्रहण का ऐलान कर दिया है। इस बार फेसबुक वर्चुअल रियलिटी फर्म ऑक्‍लस को खरीदने जा रही है। सौदा 2 अरब डॉलर में होने वाला है।
ऑक्‍लस कंपनी वर्चुअल रियलिटी गेमिंग बाजार की अग्रणी कंपनी है और हेडसेट किट 'ऑक्‍लर रिफ्ट' बनाती है। इसके लिए फेसबुक 40 करोड़ डॉलर का भुगतान नकद रूप में करेगी और बाकी 1.6 अरब डॉलर के शेयर देगी। फेसबुक के मुताबिक सोशल और कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म पर वर्चुअल रियलिटी बाजार अगला बड़ा बाजार बनने जा रहा है।
फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने कहा, 'मोबाइल आज का प्लेटफॉर्म है और हमें भविष्य के प्लेटफॉर्म के लिए भी तैयार रहना चाहिए। ऑक्‍लस के पास सोशल प्लेटफॉर्म पर सबसे अच्छा प्रदर्शन करने का मौका है। यह कंपनी हमारे काम करने, गेम खेलने और कम्युनिकेशन के तरीकों में बदलाव लाने वाली है।"
फेसबुक द्वारा अधिग्रहण के बाद ऑक्‍लस का मुख्यालय कैलिफोर्निया में ही बना रहेगा। कंपनी ऑक्‍लस रिफ्ट भी बनाती रहेगी। शुरुआत में इसका मुख्य काम गेमिंग पर ही केन्द्रित रहेगा, लेकिन बाद में फेसबुक इसमें कई नए काम जोड़ेगी। फेसबुक का मकसद वर्चुअल रियलिटी को एजुकेशन, स्पोर्ट्स और मेडिकल जैसे नए क्षेत्रों में लाने का है।
-sabhar :http://naidunia.jagran.com/

Read more

 
Design by ThemeShift | Bloggerized by Lasantha - Free Blogger Templates | Best Web Hosting