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शनिवार, 26 अप्रैल 2014

टी-शर्ट पर ही प्रिंट होंगे सेलफोन

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smartphone printed on t-shirt study monash university


मेलबर्न: कुछ दिनों में ऐसा हो सकता है कि आपको मोबाइल पॉकेट में रखने की जरूरत ही न पड़े। आपके टी-शर्ट पर ही रिंगटोन बजे और आप टी-शर्ट पर प्रिंट किए गए मोबाइल से बात कर सकें। जी हां, वैज्ञानिक सेल फोन को बेहद पतला, फ्लेक्सिबल और कारगर बनाने पर काम कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया के मोनॉश यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसे ही सेलफोन बनाने की तैयारी शुरू कर दी है, जिसे टी-शर्ट पर प्रिंट किया जा सके।

स्पासर टेक्नॉलजी की मदद
इस मोबाइल फोन को बेहद पतला बनाने में स्पासर टेक्नॉलजी की मदद ली जाएगी। मोनॉश के वैज्ञानिकों ने काबर्न से बनने वाले दुनिया के पहले स्पासर (सर्फेश प्लासमोन एम्पलिफिकेशन बाइ स्टिमुलेटेड इमिशन ऑफ रेडिएशन) को बनाने में सफलता हासिल कर ली है। इस प्रोजेक्ट के प्रमुख वैज्ञानिक चनाका रुपासिंघे ने कहा कि कार्बन बेस्ड स्पासर टेक्नॉलजी काफी कारगर साबित होगी। यह न सिर्फ सस्ती होगी, बल्कि बेहतर नतीजे भी देगी और इको फ्रैंडली भी होगी। अभी स्पासर टेक्नॉलजी में सोने और चांदी के नैनोपार्टिकल का इस्तेमाल होता है। एसिएस नैनो मैगजीन में इस संबंध में रिसर्च पेपर प्रकाशित किया गया है।

यह है स्पासर टेक्नॉलजी
स्पॉसर एक नैनोस्केल लेसर या नैनोलेसर है। इसके फ्री इलेक्ट्रॉन के वाइब्रेशन से लाइट बीम निकलती है। यह ट्रडिशनल लेसर के इलेक्ट्रो मैग्नेटिक वेब इमिशन की तरह जगह नहीं खाती है। इस प्रोजेक्ट में लगे वैज्ञानिकों को पहली बार पता चला कि कार्बन और ग्रैफाइट के नैनोट्यूब एक-दूसरे से प्रकाश के सहारे ऊर्जा का आदान-प्रदान कर सकते हैं। वैज्ञानिकों ने बताया कि कार्बन नैनोट्यूब में ऑप्टिकल इंटरेक्शन काफी तेज था और यह टेक्नॉलजी कंप्यूटर चिप बनाने में इस्तेमाल की जा सकती है।
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3डी प्रिंटिग टेक्नॉलजी के जरिए सिर्फ 24 घंटे में 10 घरों का समूह तैयार कर दिया।

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3d-printed-house


पेइचिंग
3डी प्रिंटर की मदद से बहुत कुछ किया जा सकता है। इसका हालिया कमाल है एक दिन में घर तैयार करना, वह भी एक नहीं पूरे 10 घर। चीन की एक कंपनी ने 3डी प्रिंटिग टेक्नॉलजी के जरिए सिर्फ 24 घंटे में 10 घरों का समूह तैयार कर दिया। इन घरों को बनाने में रिसाइकल मटिरियल का इस्तेमाल किया गया है। शंघाई के क्विंगपू जिले में तैयार हुई यह इमारत 200 वर्गमीटर के इलाके में फैली है।

इन इमारतों को तैयार करने के लिए 500 फुट लंबा, 33 फुट चौड़ा और 20 फुट बड़ा 3डी प्रिंटर तैयार किया गया। इस प्रिंटर का इस्तेमाल कर घरों के कंपोनेंट तैयार किए गए। इस टेक्नॉलजी से बने एक घर की कीमत लगभग 4800 डॉलर यानी 2.8 लाख रुपये है।

इन इमारतों को चीन के शंघाई विनशुन डेकोरेशन डिजाइन इंजीनियरिंग कंपनी ने तैयार किया है। इमारतों के कंपोनेंट बनाने के लिए एक स्पेशल इंक का इस्तेमाल किया गया है। इस इंक को वेस्ट मटीरियल से तैयार किया गया है। कंपनी की सीईओ मा येह के अनुसार इस तरह की इमारत इकोफ्रेंडली और कॉस्ट इफेक्टिव भी है। यह कंपनी चीन में 100 से ज्यादा रिसाइकलिंग फैक्ट्री खोलने की तैयारी में है। sabhar :http://navbharattimes.indiatimes.com/

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मजाक-मजाक में पॉर्न स्टार को छत से नीचे फेंका, टूट गया पैर, देखें तस्वीरें

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मजाक-मजाक में पॉर्न स्टार को छत से नीचे फेंका, टूट गया पैर, देखें तस्वीरें

इंटरनेशनल डेस्क। डैन बिलजेरियन फोटो शेयरिंग साइट इंस्टाग्राम के सबसे बड़े प्लेब्वॉय सेलिब्रिटी हैं। डैन पेशे से पोकर प्लेयर हैं। उन्हें शायद ही इस गेम में कोई हरा पाए। डैन ने गैम्बलिंग के जरिए ही 100 मिलियन डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में 6 अरब, 6 करोड़ 40 लाख रुपए की संपत्ति बनाई है। उसने पोकर के कई टूर्नामेंट्स अपने नाम किए हैं। 2009 में वर्ल्ड सीरीज ऑफ पोकर में डैन बुलंदियों पर था। डैन ऑनलाइन पोकर रूम 'विक्टरी पोकर' का सह-संस्थापक भी है।
 
क्या है मामला?
 
डैन को पार्टी करने में बड़ा मजा आता है। अरबपति व बेहद चर्चित हस्ती होने के कारण कई हसीन व कमसिन लड़कियां उसके इर्द-गिर्द मौजूद रहती हैं। यही वजह है कि डैन इंस्टाग्राम का सबसे सेक्सी सेलिब्रिटी माना जाता है। हालांकि, बीते बुधवार पार्टी के दौरान डैन ने मजाक-मस्ती में कुछ ऐसा कर डाला कि 18 वर्षीय पॉर्न स्टार जैनिस ग्रिफित का एक पैर टूट गया। बाद में जब डैन ने अपने किए पर माफी नहीं मांगी, तो इस पॉर्न स्टार ने उस पर मुकदमा ठोक दिया। 
 
फ्लैशबैक
 
हॉलीवुड मैनसन में एक लाउड पार्टी चल रही थी। पार्टी डैन ने दी थी। उस दिन जैनिस (नग्न अवस्था) भी वहां मौजूद थी। दोनों की ये पहली मुलाकात थी। जैनिस को देख डैन के मन में शानदार फोटो शूट करने की सूझी। उसने जैनिस को उठा लिया। इस दौरान जैनिस चिल्लाई, लेकिन डैन ने मजाक-मजाक में उसे छत से नीचे फेंक दिया। हालांकि, डैन ने उसे स्वीमिंग पूल में फेंका था, लेकिन अंतिम पलों में डर से जैनिस ने उसकी टी-शर्ट पकड़ ली थी। इस कारण गिरते वक्त उसका एक पैर पूल के किनारे से टकरा गया।
 
वीडियो में चिल्लाहट साफ
 
पार्टी में मौजूद लोगों ने इसका वीडियो बना लिया था। वीडियो में जैनिस के चिल्लाने की आवाज साफ सुनाई दे रही है। जैनिस का कहना है, "मुझे पैर टूटने का जितना दुख है, उससे कहीं ज्यादा इस बात का गुस्सा है कि डैन ने मुझसे इस गलती के लिए माफी तक नहीं मांगी।" उस हादसे को याद करते हुए जैनिस कहती है, "मुझे हैरानी है कि मेरा वजन सिर्फ 40 किलो है, इसके बाद भी पूल तक पहुंच नहीं पाई।" पैर टूटने से दुखी जेनिस ने शुक्रवार को ट्वीट कर लिखा, "मैं अपने काम पर वापस लौटना चाहती हूं...बस यही सबसे बड़ी चिंता है।" जैनिस ने आगे लिखा, "क्या कोई टूटे पैर वाली लड़की बुक करना चाहता है?"
 
हादसे से चिंतित पॉर्न स्टार
 
जैनिस हादसे के बाद से काफी चिंतित है। दो हफ्ते तक अब वह टूटे पैर के साथ ही रहेगी। उसे इसके लिए इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। जैनिस के मुताबिक, एक्स रेटेड साइट किंक डॉट कॉम के लिए उसे फोटो शूट करवाना था। जैनिस डैन से बेहद गुस्सा है, क्योंकि उसे अपने किए पर जरा भी अफसोस नहीं है। डैन ने जैनिस के आरोप पर रीट्वीट किया, "डैन बिलजेरियन की एक नग्न लड़की ने लगभग हत्या कर दी थी। उसने उसे छत से खींचने की कोशिश की थी...हाहाहा...वह हल्क जैसी है।"  
मजाक-मजाक में पॉर्न स्टार को छत से नीचे फेंका, टूट गया पैर, देखें तस्वीरें

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शुक्रवार, 25 अप्रैल 2014

गांधी वनिता आश्रम में छह बिस्तरों पर सुलाई जाती थीं 24 लड़कियां, CCTV से रखी जाती थी नजर

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छह बिस्तरों पर सुलाई जाती थीं 24 लड़कियां, CCTV से रखी जाती थी नजर
गांधी वनिता आश्रम। बेसहारा लड़कियों का घर। हर महीने लाखों का बजट। मगर अंदर कैदखाने से भी बुरे हाल। प्राइवेसी पर भी हमला। सिविल जज राणा कंवरदीप कौर वीरवार शाम यहां आईं। ताला खुलवाया तो अंदर 24 लड़कियां एक ही कमरे में बंद थीं। जज से लिपटकर कई रोने लगीं। छह बिस्तरों पर 24 लड़कियां सुलाई जाती हैं। ऊपर से कैमरे लगा दिए। लड़कियां बोलीं हम तो कमरे में कपड़े चेंज भी नहीं कर सकतीं।
जालंधर।  कपूरथला चौक के पास गांधी वनिता आश्रम में बेहद खराब हालात में रह रहीं लड़कियों ने सिविल जज को अपना दर्द सुनाया। एक कमरे में 24 लड़कियां रह रहीं थीं। उनके कमरे में वार्डन ने सीसीटीवी कैमरे लगा रखे थे। गुरुवार शाम चेकिंग के लिए जिला कानूनी सेवाएं अथॉरिटी की सचिव व सिविल जज (सीनियर डिवीजन) राणा कंवरदीप कौर को लड़कियों ने बताया कि कैमरे की वजह से उन्हें कपड़े बदलने में भी परेशानी हो गई है। जब लड़कियों ने वार्डन से सीसीटीवी कैमरे की शिकायत की तो वार्डन ने उन्हें डांट दिया। जज कंवरदीप कौर के साथ एडवोकेट हरलीन कौर और नवजोत कौर सिद्धू भी साथ थीं।
लड़कियों ने जज से बताया कि वे नरक जैसी जिंदगी जी रही हैं। सुबह चार बजे उन्हें उठा दिया जाता है और देर शाम कमरे में बंद कर दिया जाता है। लाइट बंद होने के बाद भी उन्हें बाहर आने की इजाजत नहीं। सुबह खाने में सिर्फ एक परांठा मिलता है। दो टाइम खाने में एक बार में तीन रोटियां और थोड़ी सी सब्जी। रोटियां खाने को दिल नहीं करता। जब कुछ कहती हैं तो गलत तरीके से बोला जाता है।
आश्रम में लड़कियों के खेलने का सामान और साइकिलें कमरे में बंद थे। गांधी वनिता आश्रम सीनियर सेकेंडरी स्कूल भी परिसर में ही है। ऐसा ही हाल चिल्ड्रन होम (शॉर्ट स्टे होम) में था। इसमें 20 लड़कियां थी। इसके अलावा चिल्ड्रन होम फॉर गर्ल्स में बेसहारा 52 लड़कियां थीं। वे यहां शिक्षा ले रही हैं। उन्होंने भी कई आरोप लगाए।
रिपोर्ट बनाकर भेजी जाएगी : जज
सिविल जज (सीनियर डिवीजन) राणा कंवरदीप कौर ने बताया कि वह बस्ती गुजां स्थित प्रोटेक्टिव होम गईं थीं। लड़कियों की परेशानी देखी तो लगा कि ऐसा ही गांधी वनिता आश्रम में तो नहीं हो रहा है। इसलिए वह रूटीन चेकिंग के लिए वालंटियर हरलीन और नवजोत के साथ गई थीं। यहां बच्चियों ने तरह-तरह के आरोप लगाए हैं। सभी विभागों को रिपोर्ट बनाकर भेजी जाएगी।
तीन गर्भवती लड़कियां बोलीं- खाना बनवाते हैं, नहीं मिल रहीं मेडिकल सुविधाएं
तीन लड़कियां गर्भवती थीं। उन्होंने बताया कि उनसे खाना बनवाया जाता है। एक लड़की ने तो कैल्शियम की कमी की शिकायत थी, लेकिन उसकी डाक्टरी जांच नहीं करवाई गई। एक बच्ची ने बताया कि गार्ड अंकल ने उसे थप्पड़ मारा था, जिससे उसे सुनने में परेशानी आ रही है, लेकिन उसका इलाज नहीं करवाया गया।
हमें नहीं पता था कैमरे लगाना गलत है : वार्डन
आश्रम की वार्डन पूनम और जसविंदर कौर का कहना है कि बच्चियां झूठ बोल रही हैं। पूनम ने माना कि मार्च महीने में सुरक्षा के लिए कैमरे लगाए गए थे, लेकिन किसी भी बच्ची ने कोई शिकायत नहीं की थी। पता नहीं था कि यह गलत है। अगर गलत है तो कैमरे हटवा कर सुबह परिसर में लगवा दिए जाएंगे।
मजिस्ट्रेट जांच होगी : डीसी
डिप्टी कमिश्नर वरुण रूजम ने कहा कि मामले की मजिस्ट्रेट जांच करवाई जाएगी। पूरे मामले की तह तक जाएंगे। दो दिन में जांच रिपोर्ट देनी होगी। गांधी वनिता आश्रम में कुप्रबंधन के लिए जो भी दोषी होगा उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
छह बिस्तरों पर सुलाई जाती थीं 24 लड़कियां, CCTV से रखी जाती थी नजर


छह बिस्तरों पर सुलाई जाती थीं 24 लड़कियां, CCTV से रखी जाती थी नजर

छह बिस्तरों पर सुलाई जाती थीं 24 लड़कियां, CCTV से रखी जाती थी नजर

सीसीटीवी कैमरे के जरिए यहां से होती थी निगरानी।

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गुजरात में मिला समुद्र मंथन का पर्वत, यहीं किया था शिव ने विषपान

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गुजरात में मिला समुद्र मंथन का पर्वत, यहीं किया था शिव ने विषपान

सूरत। दक्षिण गुजरात के समुद्र में समुद्रमंथन वाला पवर्त मिला है। वैज्ञानिक परीक्षण के आधार पर इसकी पुष्टि भी की जा रही है। पिंजरत गांव के समुद्र में मिला पर्वत बिहार के भागलपुर में विराजित मूल मांधार शिखर जैसा ही है। गुजरात-बिहार का पर्वत एक जैसा ही है। दोनों ही पर्वत में घ्ग्रेनाइट– की बहुलता है। 
 
सामान्यत: समुद्र की गोद में मिलने वाले पर्वत ऐसे नहीं होते। सूरत के आॉर्कियोलॉजिस्ट मितुल त्रिवेदी ने कॉर्बन टेस्ट के परीक्षण के बाद यह निष्कर्ष निकाला है। उन्होंने दावा किया है कि यह समुद्रमंथन वाला ही पर्वत है। इसके समर्थन में अब प्रमाण भी मिलने लगे हैं।  ओशनोलॉजी ने अपनी वेबसाइट पर इस तथ्य की आधिकारिक रूप से पुष्टि भी की है।
गुजरात में मिला समुद्र मंथन का पर्वत, यहीं किया था शिव ने विषपान

द्वारकानगरी की खोज, मिला मांधार शिखर:
 
सूरत के ओलपाड से लगे पिंजरत गांव के समुद्र में 1988 में प्राचीन द्वारकानगरी के अवशेष मिले थे। डॉ. एस.आर.राव इस साइट पर शोधकार्य कर रहे थे। सूरत के मितुल त्रिवेदी भी उनके साथ थे। विशेष कैघ्सूल में डॉ. राव के साथ मितुल त्रिवेदी भी समुद्र के अंदर 800 मीटर की गहराई तक गए थे। तब समुद्र के गर्भ में एक पर्वत मिला था। इस पर्वत पर घिसाव के निशान नजर आए। ओशनोलॉजी डिपार्टमेंट ने पर्वत के बाबत गहन अध्ययन शुरू किया। पहले माना गया कि घिसाव के निशान जलतरंगों के  हो सकते हैं। विशेष कॉर्बन टेस्ट किए जाने के बाद पता चला कि यह पर्वत मांधार पर्वत है। पौराणिक काल में समुद्रमंथन के लिए इस्तेमाल हुआ पर्वत है। दो वर्ष पहले यह जानकारी सामने आई, किन्तु प्रमाण अब मिल रहे हैं।

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अब आगे क्या:
पिंजरत के पास खोजकार्य फिलहाल बंद है। दूसरे शब्दों में सभी शोधकार्य लटके हुए हैं। सरकार ने इजाजत दी तो इन पर पुनघ् काम शुरू हो सकेगा।
 
वीडियो-आर्टिकल में भी पुष्टि:
ओशनोलॉजी डिपार्टमेंट ने वेबसाइट पर लगभग 50 मिनट का एक वीडियो जारी किया है। इसमें पिंजरत गांव के समुद्र से दक्षिण में 125 किलोमीटर दूर 800 की गहराई में समुद्रमंथन के पर्वत मिलने की बात भी कही है। वीडियो में द्वारकानगरी के अवशेष की भी जानकारी है। इसके अलावा वेबसाइट पर एशियन्ट द्वारका के आलेख में ओशनोलॉजी डिपार्टमेंट द्वारा भी इस तथ्य की पुष्टि की गई है।

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ऐसे हुई तस्दीक, ये टेस्ट भी:
 
ऑर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट ने सबसे पहले अलग-अलग टेस्ट किए। इनसे साफ हुआ कि पर्वत पर नजर आ रहे निशान जलतरंगों के कारण नहीं पड़े हैं। तत्पश्चात, एब्स्यूलूट मैथड,रिलेटिव मैथड, रिटन मॉर्कर्स, एईज इक्वीवेलन्ट स्ट्रेटग्राफिक मॉर्कर्स एवं  स्ट्रेटीग्राफिक रिलेशनशिघ्स मैथड तथा लिटरेचर व रेफरन्सिस का भी सहारा लिया गया।


गुजरात में मिला समुद्र मंथन का पर्वत, यहीं किया था शिव ने विषपान

विभाग ने कर दी है पुष्टि :
 
आर्कियोलॉजिस्ट मितुल त्रिवेदी के बताए अनुसार यू-ट्यूब पर ओशनोलॉजिस्ट विभाग ने 50 मिनट का एक वीडियो अपलोड किया है। इसमें विभाग ने पिंजरत के पास 125 किमी दूर समुद्र में 800 फुट नीचे द्वारका नगरी के अवशेषों के साथ मन्दराचल पर्वत की भी खोज की है। ओशनोलॉजिस्ट वेबसाइट पर आर्टिकल में विभाग द्वारा इस बात की पुष्टि कर दी गई है।

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पुराण कथाओं के अनुसार :
 
द्वारका नगरी के पास ही देवताओं और राक्षसों ने अमृत की प्राप्ति के लिए समुद्र मंथन किया था। इस मंथन के लिए मन्दराचल पर्वत का उपयोग किया था। समुद्र मंथन के दौरान विष भी निकला था, जिसे महादेव शिव ने ग्रहण कर लिया था। 

गुजरात में मिला समुद्र मंथन का पर्वत, यहीं किया था शिव ने विषपान

मितुल त्रिवेदी 42 भाषएं और 9 लिपि जानते हैं:
 
आर्कियोलॉजिस्ट मितुल त्रिवेदी 42 भाषाएं और 8 लिपियों के जानकार हैं। वे नासा, आर्कियोलॉजिस्ट विभाग और इसरो से भी जुड़े हुए हैं। हडप्पा-मोहेंजोदडो की भाषा का उन्हीं ने अनुवाद किया था।

गुजरात में मिला समुद्र मंथन का पर्वत, यहीं किया था शिव ने विषपान


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विमान नहीं, ये है गुजरात की सबसे महंगी हाई-टेक बस, देखें तस्वीरें..

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विमान नहीं, ये है गुजरात की सबसे महंगी हाई-टेक बस, देखें तस्वीरें...

राजकोट। हरेक सीट पर 18 इंच की टच स्क्रीन के साथ डीटीएच कनेक्शन, रेफ्रीजरेटर, माइक्रोवेव, कॉफी वेंडिंग मशीन, टॉयलेट, मनोरंजन के लिए 50 फिल्में और 5000 गीतों का मजा, वाई-फाई व अन्य सुविधाएं..जैसी अद्भुत सुविधाओं से लैस यह नजारा किसी विमान का नहीं, बल्कि गुजरात की सबसे महंगी बस का है। 
 
बस में मिलने वाली सुविधाएं किसी एयरलाइंस से कम नहीं। यहां यात्रियों के आरामदायक सफर के लिए मनोरंजन से लेकर हरेक बात का ध्यान रखा गया है। बस में एयर हॉस्टेस भी यात्रियों की सेवा में हाजिर रहती है।  
 
यह बस राजकोट की निजी ट्रैवल कंपनी की है, जो राजकोट से अहमदाबाद तक चलती है। कंपनी इसके अलावा अन्य कई लग्जुरियस बसें भी चलाती है। ट्रैवल कंपनी के मालिक द्वारा बताए अनुसार इस बस की कीमत 2 करोड़ रुपए से ऊपर है।
विमान नहीं, ये है गुजरात की सबसे महंगी हाई-टेक बस, देखें तस्वीरें...

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जब रातों रात रात भूतों ने बना दिया भगवान श्री कृष्ण का मंदिर

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यह चौंकाने वाली कहानी वृंदावन की है

यह चौंकाने वाली कहानी वृंदावन की है


भूतों को भगवान से डर लगता है यह तो आपने कई बार सुना होगा लेकिन क्या कभी सुना है कि भूत खुद आकर भगवान के लिए मंदिर बनाने लग जाएं। लेकिन यह चौंकाने वाली कहानी वृंदावन की है।

मंदिर जिसे भूतों ने बनाया

वृंदावन की पवित्र भूमि जिसे भगवान श्री कृष्ण की लीलास्थली के रुप में जाना जाता है। इस भूमि में एक प्राचीन मंदिर है जिसका नाम गोविद देव जी मंदिर है। इस मंदिर के विषय में मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण भूतों ने करवाया है।

भूतों ने एक रात में ही कई मंजिला मंदिर का निर्माण कर दिया। लेकिन मंदिर पूरा होने से पहले ही भूतों को मंदिर निर्माण का काम छोड़कर भागना पड़ा।

इसलिए मंदिर का काम छोड़कर भाग गए भूत

इसलिए मंदिर का काम छोड़कर भाग गए भूत

इसके विषय में यह कहा जाता है कि सुबह होने वाली थी। और भूत मंदिर का निर्माण करने में लगे थे। तभी किसी ने चक्की लगाना शुरु कर दिया। चक्की की आवाज सुनकर भूत मंदिर का काम छोड़कर भाग गए। कहते हैं कि मुगलों के समय में इस मंदिर की रोशनी आगरा तक दिखती थी।

वृंदावन से जयपुर पहुंच गए गोविंद जी, यह है प्राचीन मूर्ति

इस मंदिर के विषय में कहा जाता है कि इस मंदिर में स्थापित प्राचीन मूर्ति अब इस मंदिर में नहीं है। मंदिर के पुजारी मू्र्ति की रक्षा के लिए इसे जयपुर लेकर चले गए। आज वह प्राचीन मूर्ति जयपुर के गोविंद देव जी मंदिर में विराजमान है।  sabhar :http://www.amarujala.com/

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इन तकनीकों से बदल जाएगा जीने का ढंग

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इस साल के इंजीनियरिंग के जेम्स डाइसन अवार्ड के विजेता को 29,20,000 रुपए की राशि मिलेगी। यह ब्रितानी प्रोजेक्ट है बायोवूल। यह ऊन उद्योग के अवशेषों को ऐसे पदार्थ के रूप में बदल देगा जिसे प्लास्टिव के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा


इस साल के इंजीनियdyson award shortlisted 20 technologies

इस साल छांटी गई 20 प्रविष्टियों में से दूसरी जर्मन है। ज़ारियस हवा से बिजली उत्पन्न करता है जिससे दूसरे उपकरणों को चार्ज किया जा सकता है।


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ऑस्ट्रिया का सोनो कुछ चुनिंदा आवाज़ों को बंद कर सकता है जिससे वह खिड़की के बाहर न जा सकें। इन आवाज़ों को वाई-फ़ाई से चुन सकता है

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ओल्टू फलों और सब्ज़ियों को रखने के लिए ज़्यादा जगह देता है। यह स्पेनी अविष्कार ऊर्जा के लिए फ़्रिज के पीछे पैदा होने वाली गर्मी का इस्तेमाल करता है। इसके चार अलग-अलग खानों को ठंडा, गरम, गीला या सूखा रखा जा सकता है।

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इस अमरीकी अविष्कार में साइकिल के पहियों में एलईडी चक्के लगाकर सवार को दुर्घटना से बचाने का इंतज़ाम है। इसे ऊर्जा एक बैटरी से मिलती है।



इस अमरीकी अविष्कार में dyson award shortlisted 20 technologies

कॉम्ब एक चालकरहित डंपर ट्रक है। ऑस्ट्रिया के इस प्रोजेक्ट में जीपीएस लोकेशन तककनीक के ज़रिए वाहन को चलाने का प्रस्ताव है।

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स्टैक एक दुबला प्रिंटर है। यह कागज़ों के चट्टे पर रखा जाता है और उसमें से काग़ज़ लेकर प्रिंट देता रहता है। इसमें काग़ज़ को अंदर डालने की ज़रूरत नहीं रहती। इसे बनाने वाली स्विस टीम का कहना है कि छोटे घरों के लिए यह आदर्श रहेगा।

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यह उपकरण अपने आप टांके लगाने के लिए तैयार किया गया है ताकि मेडिकल कर्मचारी कुछ और काम कर सकें। इसे बनाने वाली कनाडाई टीम इसे पेट की सर्जरी के बाद उसे सिलने के लिए इसे तैयार किया है ताकि यह काम जल्दी हो सके




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टीमओ को इसलिए डिज़ाइन किया गया है कि ताकि अगर किसी को लाइफ़जैकेट के सहारे खींचा जाए तो उसका मुंह पानी से बाहर रहे। इसे बनाने वाली ब्रितानी टीम ने लहरों के थपेड़ों से बचाने के लिए गर्दन के चारों ओर एक सहारा भी दिया है।
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कोर्टेक्स एक थ्रीडी-प्रिंटिड सांचा है। इसे प्लास्टर से बनने वाले मूल सांचों से होने वाली बदबू और खुजली जैसे दिक्कतों को दूर करने के लिए बनाया गया है। न्यूज़ीलैंड के इसके आविष्कारक कहते हैं कि अवशेषों को कम करने के लिए इसे रिसाइकल्ड प्लास्टिक से बनाया गया है।

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रिन्यूवेबल वेव पावर जेनरेटर पहले ही जेम्स डाइसन प्रतियोगिता में ब्रिटेन का चक्र जीत चुका है। इसमें हल्के से जुड़े पिस्टनों को ज्वारीय पानी से ऊर्जा हासिल करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह उन उपकरणों से आगे है जो तभी ठीक से काम कर पाते हैं जब पानी एक दिशा में चलता है।


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आइरिश आविष्करकों की टीम ने सेंसर युक्त जबड़ा मेमोरी बनाया है। यह खिलाड़ी को ज़्यादा चोट लगने पर मेडिकल कर्मचारियों को सूचित कर देता है।

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अमरीका में तैयार टाइटन आर्म ऊपरी हिस्से पर लगने वाला उपकरण है जो पहनने वाले की ताकत बढ़ाने का वादा करता है। इसे बनाने वालों का कहना है कि इसे घायल लोगों की कोशिका निर्माण के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है

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ई-हेल्थ रास्पबेरी पाइ और अरड्यूनो कंप्यूटरों के इस्तेमाल से रक्तचाप, रक्त में ऑक्सीजन और दूसरे बायोमैट्रिक आंकड़ों को मापने का एक किफ़ायती तरीका है। इसके स्पेनिश आविष्कारकों का कहना है कि इसका इस्तेमाल घर पर ही स्वास्थ्य जांच के लिए किया जा सकता है।

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अवारिंग को सुनने में कमज़ोर लोगों के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस जापानी अविष्कार में लाइटों के ज़रिए यह बताया जाता है कि कौन बात कर रहा है और कितनी ज़ोर से बोल रहा है।

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हैंडी के टुकड़ों को थ्रीडी प्रिंटर की मदद से फिर बनाया जा सकता है। इसके जापानी आविष्कारकों का कहना है कि इससे इस प्रोस्थेटिक हाथ की देखरेख किफ़ायती हो सकती है।

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ग्लूको एक स्मार्टफ़ोन से एक ख़ास घड़ी को जोड़कर मधुमेह के स्तर की जांच करता है। इसे बनाने वाली फ्रांसीसी टीम का कहना है कि अगर मधुमेह का स्तर बहुत कम या ज़्यादा हो जाता है तो इसकी जानकारी नामित व्यक्ति को दी जा सकती है।

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हाइड्रोस लाइफ़ जैकेट निर्माण के लिए नया नज़रिया पेश करता है। इसे बनाने वाली आयरिश टीम का कहना है कि यह आरामदेह है और पारंपरिक डिज़ाइन के मुकाबले ठंड से बेहतर बचाव करता है।




ऑस्ट्रेलिया की टीम ने बच्चों के लिए रोम नाम के ऑक्सीजन सिलिंडर का अविष्कार किया है। इसमें एक नाक पर लगाने वाला मास्क भी होता है। इसे बनाने वालों का कहना है कि गंभीर दमे के अटैक के वक्त मौजूदा सिलिंडरों के मुकाबले इसे लाना-ले जाना आसान है।
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ऑस्ट्रेलिया की टीम ने बच्चों के लिए रोम नाम के ऑक्सीजन सिलिंडर का अविष्कार किया है। इसमें एक नाक पर लगाने वाला मास्क भी होता है। इसे बनाने वालों का कहना है कि गंभीर दमे के अटैक के वक्त मौजूदा सिलिंडरों के मुकाबले इसे लाना-ले जाना आसान है।

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लेनिफी एक स्ट्रेचर है जो तीन टुकड़ों में बंट जाता है। इसे बनाने वाली अमरीकी टीम का कहना है कि इससे स्वास्थ्यकर्मियों को मरीज़ को एक हिस्से से दूसरे हिस्से में खिसकाने में मदद मिलती है। पारंपरिक रूप से उठाकर रखने से मरीज़ को और नुक्सान पहुंच सकता है। प्रतियोगिता के परिणाम 7 नवंबर को घोषित होंगे।

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कोर्टेक्स एक थ्रीडी-प्रिंटिड सांचा है। इसे प्लास्टर से बनने वाले मूल सांचों से होने वाली बदबू और खुजली जैसे दिक्कतों को दूर करने के लिए बनाया गया है। न्यूज़ीलैंड के इसके आविष्कारक कहते हैं कि अवशेषों को कम करने के लिए इसे रिसाइकल्ड प्लास्टिक से बनाया गया है।

स्टैक एक दुबला प्रिंटर है। यह कागज़ों के चट्टे पर रखा जाता है और उसमें से






 काग़ज़ लेकर प्रिंट देता रहता है। इसमें काग़ज़ को अंदर डालने की ज़रूरत नहीं रहती। इसे बनाने वाली स्विस टीम का कहना है कि छोटे घरों के लिए यह आदर्श रहेगा।




साइकिल के पहियों में एलईडी चक्के लगाकर सवार को दुर्घटना से बचाने का इंतज़ाम है। इसे ऊर्जा एक बैटरी से मिलती है।









रिंग के जेम्स डाइसन अवार्ड के विजेता को 29,20,000 रुपए की राशि मिलेगी। यह ब्रितानी प्रोजेक्ट है बायोवूल। यह ऊन उद्योग के अवशेषों को ऐसे पदार्थ के रूप में बदल देगा जिसे प्लास्टिव के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा

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गुरुवार, 24 अप्रैल 2014

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति का कबूलनामा: एलियन्स की पसंदीदा जगह है पृथ्वी

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कहने को तो ये धरती इंसानों की है लेकिन इस इंसानी दुनिया में समय-समय पर ऐसे लोगों का विचरण या आगमन होता रहता है जिनका इस लौकिक दुनिया से कोई वास्ता नहीं है. भूत-प्रेत, आत्माओं से जुड़े किस्से और कहानियां हम अकसर सुनते आए हैं और जहां तक उम्मीद है आगे भी इसी तरह सुनते रहेंगे लेकिन दूसरे ग्रह के प्राणियों, एलियन का जिक्र जब कभी भी उठता है, उस पर विश्वास से ज्यादा संदेह करने वालों की तादात बढ़ती जाती है लेकिन जब अमेरिका जैसी महाशक्ति के राष्ट्रपति ही इस बात को कबूल कर लें कि अगर धरती पर एलियन का आवागमन होता है तो इस बात से उन्हें कोई आश्चर्य नहीं होगा क्योंकि शायद कहीं ना कहीं उन्हें भी इस बात का यकीन है कि मंगलवासियों का धरती पर विचरण होना एक सामान्य सी घटना है.

Bill Clinton With Alien


हम बात कर रहे हैं अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की जिन्होंने हाल ही में हुए एक टॉक शो में यह कबूल किया कि जैसे ही उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति का पदभार संभाला तभी उन्होंने अपने साथियों को एरिया 51 का जिसे नेवादा टेस्ट एंड ट्रेनिंग रेंज भी कहा जाता है, का सर्वेक्षण करने को कहा ताकि वह जान सकें कि सैन्य कार्यवाहियों में काम आने वाले इस स्थान पर एलियन तो नहीं हैं.


अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन का कहना है कि हम एक ऐसे युग में रहते हैं जिस समय ब्रह्मांड का विस्तार निरंतर होता जा रहा है, ऐसे में मंगल और धरती की दूरी ज्यादा नहीं रह गई है. अब अगर एलियन अपना ग्रह छोड़कर धरती पर आते हैं तो इसमें हैरत की कोई बात नहीं है.

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