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April 6, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मध्ययुग में प्रताड़ना के खौफनाक तरीके, देखें तस्वीरें

मध्ययुग को कभी अच्छा नहीं माना गया। यूं कह लें कि बर्बरता का दूसरा नाम था 'मध्ययुग'। शरीर के अंगों पर जानलेवा प्रहार करने से लेकर उसे छिन्न-भिन्न करने का आदेश देना उन दिनों आम बात हुआ करती थी। किसी ने गलती से भी अगर जुर्म कर दिया और जुर्माना देने में असमर्थ साबित होता, तो उसे खौफनाक अंजाम से गुजरना पड़ता था। व्यक्ति की जीभ-होठ काट दिए जाते थे। प्रताड़ना की ये तो इंतिहा है पीड़ित को बेरहमी से मौत के घाट उतारा जाता था। इस युग के अधिकांश लोग गरीबी व बीमारी के चपेट में थे। उन पर जमींदारों का जोर चलता था। इसके अलावा वे जमींदारों के गुलाम हुआ करते थे। आइए, नजर डालते हैं मध्ययुग में प्रताड़ना के 10 खौफनाक तरीकों पर, जिसे पढ़कर आपकी भी रूह कांप उठेगी।  धारदार पोल घुसेड़ देते 15वीं सदी में व्लाद तृतीय वालाशिया का राजकुमार था। व्लाद को ड्रैकुला नाम से भी जाना जाता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि वह बेहद निर्दयी था। अपराध सिद्ध होने पर वह धारदार पोल को पीड़ित की शरीर के आर-पार करने का हुक्म सुनाता था। पोल की मोटाई इतनी होती थी कि उसे देख किसी भी इंसान की रूह कांप उठे। जिस शख्स को ये सजा मिलती थी, …

वजन घटाने से लेकर जवां त्वचा तक, जानें तरबूज के 7 बड़े फायदे

गर्मियों में फायदों से भरा है खरबूज
प्यास बुझाने से लेकर पोषण तक, गर्मियों के फल तरबूज के फायदे ढेर सारे हैं।

इसमें मौजूद 92 प्रतिशत पानी न सिर्फ इस मौसम में आपको डीहाइड्रेशन से बचाता है बल्कि इसमें ऐसे कई पोषक तत्व हैं जो आपके लिए सेहत से जुड़े कई फायदों का सबब है। वजन घटाने में फायदेमंद तरबूज में मौजूद सिट्रयूलाइन नामक तत्व शरीर से फैट्स कम करने में मददगार है। यह फैट्स बनाने वाली कोशिकाओं की सक्रियता कम करता है। इसके अलावा, इसमें पानी अधिक है जो डाइटिंग के दौरान बेहतरीन विकल्प है। दिल और हड्डियों के रोग में फायदेमंद तरबूज में मौजूद लाइकोपीन दिल और हड्डियों, दोनों की सेहत के लिए फायदेमंद है। यह शरीर में रक्त संचार ठीक करता है जिससे दिल से जुड़े रोगों का रिस्क कम होता है।

इसके अलावा, तरबूज में अच्छी मात्रा में पोटेशियम है जो हड्डियों को मजबूत बनाता है।
जवां त्वचा के लिएतरबूज में भरपूर मात्रा में पानी, फ्लेवनॉयड्स, कैरीटोनॉयड्स आदि तत्व होते हैं जो त्वचा के कसाव को बरकरार रखने और लंबे समय तक एजिंग के निशानों को दूर रखने में मददगार हैं। किडनी के लिए फायदेमंद तरबीज युरीन के फ्लो को ठीक रख…

कम खाओ, लंबी उम्र जियो

न्यूयॉर्क: बंदर की लंबी उम्र का राज यह है कि वे कम कैलोरी का खाना खाते हैं। जो लोग जी भरकर खाते हैं उनके मुकाबले बंदर ज्यादा समय तक जिंदा रहते हैं। यह बात एक अनुसंधान में सामने आई है। विभिन्न प्रजातियों में जीवित रहने पर किए गए अध्ययन में यह पता लगाया कि इसमें खुराक पर बंदिश का क्या प्रभाव पड़ता है।

विस्कोन्सिन नेशनल प्रीमेट रिसर्च सेंटर मेडिसन में 1989 से किए जा रहे अध्ययन में 38 मैकाकुएस को जो भी खाना चाहते थे, दोगुना खाने दिया गया और 38 बंदरों को 30 प्रतिशत कम कैलोरी दी गई। इसी प्रकार का अध्ययन 2009 में किया गया जिसमें बंदरों को कैलोरी प्रतिबंधित खुराक दी गई जिससे उम्र संबंधी कारणों से उनकी मौत का खतरा कम पाया गया।

अध्ययन का नेतृत्व करने वाले विस्कोन्सिन विश्वविद्यालय में जैवरसायनज्ञ रोजाल्यन एंडर्सन ने कहा, हमने इस अवधारणा की जांच की कि क्या कैलोरी पर प्रतिबंध उम्र की प्रक्रिया को कम करता है? और मैं समझता हूं कि हमने यह दिखाया कि यह होता है। (एजेंसी) sabhar ;http://zeenews.india.com/

मॉडल पत्‍नी का कोमोत्तेजक फोटो शूट देख पति ने दी मौत की सुपारी ..

एक मॉडल और दो बेटियों की मां का दावा है कि उसका करोड़पति पति उसके काम करने को लेकर नाराज था. यही नहीं वह अपनी पत्‍नी के कामोत्तेजक फोटो शूट से इतना जल गया था कि उसने एक शूटर को 80,000 अमेरिकी डॉलर यानी कि करीब 48 लाख रुपये की सुपारी देकर उसे मरवाने की साजिश तक रच डाली.
खबर के मुताबिक अमेरिका में रहने वाली 32 साल की मोनिका ने अपनी उम्र से बड़े बिजनेस टाइकून डीनो गुगलिएलमेली से शादी करने के लिए साल 2003 में अपने मॉडलिंग करियर को अलविदा कह दिया. लेकिन दो बेटियों के हो जाने के बाद वह काम पर वापस जाना चाहती थी. उसने साल 2010 के आखिर में फिर से अपना एक्टिंग और मॉडलिंग करियर शुरू करने के बारे में सोचा. लेकिन पति ने इसकी मंजूरी नहीं दी.



जांच से जुड़े एक करीबी सूत्र के मुताबिक जब डीनो को पता चला कि मोनिका ने एक अंडरवियर शूट करवाया है तो वह गुस्‍से से आग बबूला हो गया. उनके रिश्‍ते में दरार आ गई और वे दोनों बेटियों की कस्‍टडी पाने के लिए आपस में झगड़ने लगे. इस बीच, मोनिका को यह पता लग गया था कि उसके पति ने अपने एक दोस्‍त को उसकी हत्‍या की सुपारी दी है.

हत्‍या की कोशिश के आरोप में 52 वर्षीय डीनो …

आपसे बात करेगी कार

अब जमाना है सुपर स्मार्ट कार का. ऐसी कार, जो आपकी बात सुन ले और समझ ले कि उसे कहां जाना है. कब रुकना है.
जर्मनी की कार्ल्सरूहे यूनिवर्सिटी ने इस तरह की कार तैयार कर ली है. जाहिर सी बात है कि यह इंटरनेट से जुड़ी है और इशारों पर चल सकती है. कार के कैमरे आस पास की चीजें देख सकते हैं और कंप्यूटर खुद स्टीयरिंग घुमाने लगता है. सेंसर इतने कड़े हैं कि अगर पास से ट्रक गुजर रहा हो, तो कार का सेंसर इसे पकड़ लेता है. कार रुक जाती है, या रास्ता बदल लेती है.
कार विकसित करने वाले कार्ल्सरूहे यूनिवर्सिटी के क्रिस्टोफ श्टिलर कहते हैं कि इससे हादसे कम होंगे, "भविष्य की गाड़ी में 100 मेगाबाइट जितना डाटा प्रॉसेस करना होगा. इस वक्त तो यह इतना ज्यादा डाटा है, कि हम इसके बारे में सोच भी नहीं सकते. लेकिन कंप्यूटर तकनीक तेजी से बेहतर हो रही है और जल्द ही आप डाटा प्रॉसेस करके गाड़ी को कमांड दे सकेंगे."
कार बदलेगी तो सड़क पर चलने वाले ट्रैफिक का बर्ताव भी बदल जाएगा. सॉफ्टवेयर कंपनियां इस ताक में हैं कि कब नई गाड़ी बाजार में आए और वे कैसे नए सॉफ्टवेयर तैयार कर लें. इंटरनेट पर भविष्य की ट्रैफिक व्यवस्था की…

लैब में बनेंगे असली हीरे

अंग्रेजी की एक कहावत है कि हीरा लड़कियों का सबसे अच्छा दोस्त होता है. हीरे के गहनों से सजना संवरना तो ठीक है लेकिन ऑपरेशन थिएटर से लेकर कई और जगहों पर भी हीरा बहुत काम आता है. अब मनचाहे हीरे लैब में भी बनाए जा रहे हैं.



हीरों में सिर्फ आंखों को चौंधियाने वाली चमक ही नहीं होती बल्कि बेहद कठोर होने के उसके गुण के कारण विज्ञान और उद्योग जगत में इनकी खासी मांग है. प्रकृति में हीरों का भंडार सीमित है और मांग को पूरा करने में एक नई तकनीक से मदद मिल सकती है. दरअसल प्रकृति में पाए जाने वाले हीरे बहुत ऊंचे तापमान और दबाव वाली स्थिति में अरबों साल में जाकर बनते हैं. जर्मनी के फ्राउनहोफर इंस्टीट्यूट ने ऐसी तकनीक विकसित की है जिससे वैज्ञानिक बहुत कम समय में हीरे बना पा रहे हैं. इससे मनचाहे आकार, आकृति, रंग और विद्युतीय या ताप की चालकता वाले हीरे बनाना संभव हो गया है. हीरे के बड़े टुकड़े बनाने हों या उसकी पतली सी परत, इस तकनीक से यह सब संभव है. सीवीडी, यानि केमिकल वेपर डिपोजिशन नाम की इस प्रक्रिया से बहुत कम समय में हीरे तैयार किए जा सकते हैं. हीरे के वेफर के आकार की एक पतली परत बनाने में सिर्फ 100 घंट…

अब सूरज की रोशनी से ही तैयार हो जाएंगे सोलर सेल

सोलर सेल सूरज से ऊर्जा ग्रहण करते हैं लेकिन क्या हो अगर सूरज के प्रकाश से ही इन सोलर सेल्स को तैयार किया जा सके। शोधकर्ताओं ने एक ऐसी प्रणाली विकसित कर ली है जिसके जरिये सूरज खुद ब खुद सौर ऊर्जा सामग्री का उत्पादन करेगा। पारंपरिक सिलिकन सेल की तुलना में कम लागत वाले, पहले से ज्यादा पतले इन सेल्स का इस्तेमाल बहुत जल्द ऊर्जा उत्पादन के लिए इमारतों के अंदर कोटिंग के रूप में किया जा सकेगा। ओरेगन स्टेट यूनिवर्सिटी के केमिकल इंजीनियरों की इस खोज से बहुत ही जल्द सौर ऊर्जा की लागत को कम किया जा सकेगा। इस तकनीक से उत्पादन प्रक्रिया में तेजी भी लाई जा सकेगी और सौर उपकरणों व उन्हें चार्ज करने वाली ऊर्जा दोनों के लिए ही सूरज को साधन बनाया जा सकेगा। यूनिवर्सिटी में केमिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर चिह हुंग चांग ने कहा कि यह प्रणाली पर्यावरण के अनुकूल है। इसके जरिये कुछ ही मिनटों में सौर ऊर्जा सामग्री तैयार की जा सकती है जबकि दूसरे प्रक्रियाओं में इसे तैयार करने में 30 मिनट से दो घंटे का समय लगता है। उत्पादन प्रक्रिया में तेजी आने से लागत में कमी आएगी।' इस प्रक्रिया में कॉपर इंडियम डिसेलेनाइड से…

पहला सोलर विमान बिना ईंधन भरेगा उड़ान

बर्न. स्विट्जरलैंड के दो दिग्गज पायलटों आंद्रे वुर्सबर्ग और बेट्रेंड पैकर्ड ने अपनी टीम के साथ मिलकर दुनिया के एकमात्र ऐसे सोलर प्लेन का निर्माण किया है जो दिन और रात दोनों समय बिना किसी फ्यूल सपोर्ट के उड़ सकेगा। स्विट्जरलैंड के रक्षामंत्री यूली म्यूरर ने बुधवार को एक समारोह में इस सोलर प्लेन (इम्पल्स-2) का अनावरण किया गया। अगले कुछ महीनों में फ्लाइट टेस्टिंग भी शुरू हो जाएगी। इससे पहले भी यह टीम छोटी-छोटी चार यात्राओं पर जा चुकी है।  भारत से गुजरेगा विमान विश्व भ्रमण मिशन- 2015 की शुरुआत फारस की खाड़ी के रेगिस्तान से होकर भारत, म्यांमार, चीन की विश्व प्रसिद्ध दीवार और अमेरिका, दक्षिणी यूरोप और उतरी अफ्रीका से गुजरेगा जो वापस फारस की खाड़ी में आकर समाप्त हो जाएगा। विमान के रुकने का स्थान अभी तय नहीं हुआ है। यात्रा से देते हैं संदेश स्वीट्जरलैंड के दोनों पायलट पूरी दुनिया को सौर ऊर्जा के उपयोग का संदेश देते हैं। ऊर्जा के इस विकल्प का पुरजोर समर्थन करने वाले ये पायलट अपने आविष्कार और एडवेंचर उड़ानों से इसे और मजबूती के साथ लोगों के समक्ष रखते हैं। युवाओं पर इनका खास जोर रहता है। 

पायलटों …

पता चल गया, शरीर में आत्मा आखिर कहां रहती है

तो मृत्यु जैसा अनुभव होता है
मृत्यु को बहुत करीब से महसूस करने वाले लोगों के अनुभव सुनकर विज्ञान फिलहाल इस नतीजे पर पहुंचा है कि आत्मा या जीवन का केंद्र मस्तिष्क के उस स्थान पर है रहता है जहां योग की भाषा में सहस्रार चक्र है।

यह चक्र सिर में उस जगह बताया जाता है, जहां लोग चोटी या शिखा रखते हैं। इस अध्ययन के मुताबिक तंत्रिका प्रणाली से जब आत्मा का आभास कराने वाला क्वांटम पदार्थ कम होने लगता है तो मृत्यु जैसा अनुभव होता है।

दूसरे जन्म के लिए ब्रह्मांड में लीन हो जाती है शास्त्रीय मान्यता के अऩुसार भी आत्मा मूलतः मस्तिष्क में निवास करती है। मृत्यु के बाद यहां से निकलकर दूसरे जन्म के लिए ब्रह्मांड में लीन हो जाती है, जैसे भीड़ में खो गई हो।

एरिजोना विश्वविद्यालय में एनेस्थिसियोलॉजी और मनोविज्ञान विभाग के प्रोफेसर एमरेटस और वहीं रिसर्च विभाग निदेशक डॉ. स्टुवर्ट हेमेराफ के मुताबिक आत्मा के केंद्र का यह निष्कर्ष उस क्वांटम सिद्धांत की भी पुष्टि करता है, जो ब्रिटिश मनोविज्ञानी सर रोजर पेनरोस ने निरूपित किया है।

कोशिकाओं के अंदर बने ढांचों में आत्मा माना जाता है कि मस्तिष्क में क्वांटम कंप्यूटर…

यूरी गगारिन ने कहा था : 'उड़नतश्तरियाँ सचमुच होती हैं'

12  अप्रैल 1961 को सोवियत संघ के नागरिक, सोवियत वायुसेना में मेजर यूरी गगारिन ने मानव इतिहास में 12  अप्रैल 1961 को सोवियत संघ के नागरिक, सोवियत वायुसेना में मेजर यूरी गगारिन ने मानव इतिहास में पहली बार 'वस्तोक-1' नामक अन्तरिक्ष यान में सवार होकर पृथ्वी की निकटतम परिधि  पर अंतरिक्ष की यात्रा की थी। आज ऐसा लगता है मानो हम यूरी गगारिन की उस पहली उड़ान के बारे में सब कुछ जानते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। एक विषय ऐसा है, जिसकी औपचारिक सूचना साधनों ने अक्सर उपेक्षा की है। यह विषय है —  उड़नतश्तरियाँ। जबकि यूरी गगारिन ने अपने संस्मरणों में लिखा है — 'उड़नतश्तरियाँ  एक वास्तविकता हैं। अगर आप मुझे इज़ाजत देंगे तो मैं उनके बारे में और भी बहुत-कुछ बता सकता हूँ।' यह वाक्य सचमुच आश्चर्यजनक है क्योंकि तब, आज से चालीस-पचास साल पहले, सोवियत संघ में उड़नतश्तरियों के बारे में अंतरिक्ष यात्रियों और पत्रकारों को कुछ भी कहने या बताने की छूट नहीं थी। लेकिन इसके बावजूद उड़नतश्तरियों के साथ विभिन्न अंतरिक्ष-यात्रियों की मुलाक़ातों के बारे में बहुत-सी सामग्री इकट्ठी हो गई है। इनमें से कुछ बातें अब हम आप…

शनि के चांद पर पानी होने की संभावना

सौरमंडल के दूसरे सबसे बड़े ग्रह शनि के एक चंद्रमा इन्सेलादस की सतह के नीचे पानी का 'सागर' होने के पर्याप्त सबूत मिले है. इस नए खोज ने ब्रह्मांड में पृथ्वी के बाहर जीवन होने की संभावना को बढ़ा दिया है जब से अंतरिक्ष में जेट विमानों ने इसके दक्षिणी ध्रुव से बर्फीली चीज़ों को टूट कर गिरते देखा है तब से वैज्ञानिक उत्साहित है.
साइंस पत्रिका ने इसकी विस्तृत रिपोर्ट छापी है.नासा के अंतरिक्ष यान कासिनी की मदद से शोधकर्ता पानी के अत्यंत सूक्षम गुरुत्वाकर्षण संकेत का भी पता लगाएंगें. प्रोफ़ेसर लुसियानो लेस ने बीबीसी न्यूज़ से कहा, "हमने जो मापा है उसके हिसाब से यह उत्तरी अमेरिका के सुपीरियर झील के आकार के एक बड़े जलाशय के अस्तित्व में होने की संभावना है. " यह इटली के गार्डा झील से 245 गुना बड़ा हो सकता है. अनुकूल परिस्थितियाँ कासिनी से मिले आकड़ों के मुताबिक़ इन्सेलादस के बर्फिले सतह के 40 किमी नीचे तरल पदार्थ है. प्रोफ़ेसर लेस और उनकी टीम के निष्कर्षों के मुताबिक़ 500 किमी चौड़ा यह चंद्रमा सूक्षमजीवों के जीवन के अस्तित्व के लिहाज़ से पृथ्वी के बाद सबसे उपयुक्त जगह होगी. कासिन…

गरीबी ने बना दिया वैज्ञानिक

रायपुर.  मशरूम की खेती के लिए 69 साल की नानी को सवा लाख रुपए का उपकरण चाहिए था। घर की माली हालत खराब थी।  एनआईटी पास मैकेनिकल इंजीनियर धीरज साहू ने जब नानी (अगास बाई) की परेशानी देखी तो महंगे उपकरण की सस्ती तकनीक वाला वर्जन बनाने की जिद ठान ली। जज्बा काम आया। कुछ दिनों की मेहनत से वैसा ही उपकरण ‘इनाकुलेशन चैंबर’ मात्र 1200 रुपए में तैयार हो गया। इसकी मदद से नानी ने मशरूम उत्पादन शुरू किया। अब आर्थिक स्थिति सुधरने लगी है। सपना साकार हुआ  धीरज के माता-पिता नानी के साथ कांकेर जिले के सिंगारभाट में रहते हैं। नानी ने मशरूम उगाने का प्रशिक्षण कृषि विज्ञान केंद्र से लिया। अगास बाई चाहती थीं कि मशरूम बीज उत्पादन से जुड़ें, लेकिन महंगी मशीन रोड़ा बन रही थी। जब नाती ने इनाकुलेशन चैंबर बना दिया तो सपना हकीकत बन गया। दो महीने में 17 हजार कमाए   मशरूम बीज उत्पादन में तीन हजार रुपए खर्च निकालने के बाद भी दो महीने में 17 हजार रुपए का शुद्ध मुनाफा हुआ है। अब तो दामाद यानी धीरज के पिता घनश्याम साहू भी सिलाई का काम छोड़कर मशरूम बीज तैयार करने में जुट गए हैं।
ऐसे बनाई मशीन धीरज के अनुसार बीज उत्पादन में ले…

खुशखबरी: वैज्ञानिकों ने ढूंढा एड्स का इलाज

लंदन।। वैज्ञानिकों की एक इंटरनैशनल टीम ने एड्स का इलाज खोजने का दावा किया है। इस टीम ने एक ऐसा जिनेटिक तरीका खोजा है जिसके इस्तेमाल से शरीर खुद ब खुद एचआईवी वायरस से मुक्ति पा लेगा। इस टीम को ऑस्ट्रेलिया और कनाडा की सरकारों का समर्थन है। 

वैज्ञानिकों ने चूहों पर ये एक्सपेरिमेंट किए थे। इसके तहत वे चूहों के इम्यून सिस्टम या प्रतिरोधक क्षमता को इस हद तक बढ़ाने में कामयाब हुए कि सिस्टम ने वायरस को नाकाम कर दिया और उसे शरीर से निकाल फेंका। इस प्रयोग के केंद्र में SOCS-3 नाम का जीन था। जब शरीर में एचआईवी जैसा गंभीर इन्फेक्शन होता है तो यह जीन बहुत ज्यादा सक्रिय हो जाता है और आश्चर्यजनक तौर पर खुद इम्यून सिस्टम को बंद कर देता है। इस वजह से वायरस बिना रोकटोक फलता फूलता है। 

जब वैज्ञानिकों ने आईएल-7 नाम के एक हॉर्मोन का लेवल बढ़ाया तो SOCS-3 जीन ने काम करना बंद कर दिया और चूहे ने धीरे-धीरे एचआईवी वायरस को शरीर से बाहर कर दिया। गौरतलब है कि एड्स वायरस की सबसे बड़ी खूबी है कि यह हमारे इम्यून सिस्टम को नाकाम कर देता है। चूहे पर हुए ताजा प्रयोग के बाद वैज्ञानिकों के दिल में नए किस्म के इलाज की उम्म…

सेक्स की इच्छा होने पर पारदर्शी हो जाएगी ड्रेस

नई टेक्नॉलजी का यह अद्भुत नमूना है। अब बात स्मार्ट वॉच से आगे बढ़ गई है। एक ऐसी ड्रेस आ गई है जो यह समझ जाएगी कि आपकी सेक्स की इच्छा हो रही है और अपने आप पारदर्शी हो जाएगी। इस ड्रेस को बनाया है स्टूडियो रूसेगार्दे ने। चीन और नीदरलैंड्स की यह कंपनी फैशन, आर्ट और आर्किटेक्चर के क्षेत्र में काम करती है। इस ड्रेस को इंटिमसी 2.0 नाम के एक फैशन प्रॉजेक्ट के तहत तैयार किया गया है। इस प्रॉजेक्ट में अंतरंगता और तकनीक के बीच संबंध पर काम किया जा रहा है।

पारदर्शी होने वाली इस ड्रेस के फिलहाल दो मॉडल उतारे गए हैं, इंटिमेसी वाइट और इंटिमेसी ब्लैक। इसे ऐसे मटिरियल से बनाया गया है जो कुछ खास परिस्थितियों में पारदर्शी हो जाता है। इंटिमेसी 2.0 धड़कनों के बढ़ने के हिसाब से पारदर्शी होती जाती है। मटिरियल में इलेक्ट्रॉनिक वायरिंग होती है और एलईडी लगे होते हैं। जब पहनने वाला व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के करीब जाता है और उसकी धड़कनें बढ़ती हैं तो पारदर्शिता बढ़नी शुरू हो जाती है।

कंपनी की वेबसाइट पर लिखा है ये गाउन किसी समारोह में जाने के लिए सबसे उपयुक्त हैं। और तो और, इसके अडवांस वर्जन पर भी काम शुरू हो गया…

मंगल ग्रह पर जीवन ढूंढ़ने गए क्यूरियोसिटी के कैमरे में कैद हुई रहस्यमयी रोशनी

ब्रह्मांड के रहस्यों से पर्दा उठाने की कोशिशें, एक नई रोशनी मिलने से एक बार फिर चमक उठी हैं. मंगल पर तैनात नासा के रोवर क्यूरियोसिटी में लगे दो कैमरों ने मंगल की सतह से उठती रहस्यमयी रोशनी की तस्वीरें ली हैं. हालांकि नासा ने अभी तक इन तस्वीरों के बारे में कुछ कहा नहीं है. लेकिन कई सारी अटकलें लगनी शुरू हो गई हैं.
'यूएफओ साइटिंग्स डेली' नाम से वेबसाइट चलाने वाले स्कॉट सी वेरिंग ने 6 अप्रैल को ये तस्वीरें पोस्ट की थी. इन तस्वीरों में रोशनी सतह से ऊपर की ओर उठती हुई दिख रही है, जो नीचे से फैली हुई है. वेरिंग का कहना है कि यह इस बात का संकेत है कि वहां इंटेलिजेंट लाइफ मौजूद है जो हमारी तरह ही लाइट का इस्तेमाल करती है. वेरिंग ने अपनी वेबसाइट पर लिखा, 'यह सूर्य की रोशनी नहीं है, ना ही तस्वीर खींचने की कोई कारीगरी'

इस बीच क्यूरियोसिटी रोवर अपने लक्ष्य स्थान 'द किम्बरले' पहुंच गया है. क्यूरियोसिटी यहां चट्टानों के नमूनों की जांच करेगा ताकि मंगल ग्रह के बरसों पुराने वातावरण के बारे में जानकारी जुटाई जा सके. इस जांच का मकसद यह पता लगाना है कि लाल ग्रह पर कभी जीवन था या …

खुलासा! टीवी शो में फिक्स होती हैं दर्शकों की तालियां और हंसी

मुंबई। घर पर बैठकर टीवी पर शोज देखते समय आपको जरूर ऐसा लगता होगा कि काश हम भी टीवी पर दिखाई दें, भले ही दर्शक के तौर पर। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जो दर्शक शो में हंसते हैं, तालियां बजाते हैं और सवाल पूछते हैं, उनमें से बहुत सारे पैसे देकर शो में बुलाए जाते हैं। चौंकिए मत! ये सच है। उन्हें ये सब करने के लिए पैसे दिए जाते हैं। वे पेड ऑडियंस के तौर पर काम करते हैं। जी हां हमारे सहयोगी अखबार मिड डे की खबर के मुताबिक ये दर्शक पेड होते हैं। इन्हें पैसों के साथ-साथ 12 घंटे की शिफ्ट के हिसाब से खाना-पीना भी दिया जाता है। टीवी शो में शामिल होने वाला एक दर्शक औसतन 12 घंटे के 1500 रुपए से ज्यादा नहीं कमा पाता। ऐसा नहीं है कि कोई भी दर्शक के तौर पर शो में शामिल होकर कमाई कर सकता है। दर्शकों को उनके लुक और पर्सनेलिटी के हिसाब से उन्हें काम मिलता है। कास्टिंग एजेंट के तौर पर पिछले 25 साल से इस इंडस्ट्री में काम कर रहे पप्पू लेखराज बताते हैं, 'इंडस्ट्री में काम करने के लिए ये एक अच्छा ऑपशन है। इसे करियर की तरह लिया जाता है। अधिकतर रियलिटी शोज को दर्शकों की जरूरत होती है। कुछ लोगों को डेली बेस…

गंगनचुंबी इमारतें बनाएंगे रोबोट

वाशिंगटन। हारवर्ड में भारतीय मूल के वैज्ञानिक ने स्वेच्छा से काम करने वाले रोबोट की एक पूरी सेना तैयार कर ली है। ये रोबोट आपसी समायोजन से बिना किसी मानवीय निगरानी के गगनचुंबी इमारतों से लेकर पिरामिड तक बना सकते हैं। अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि इन्हें ठोस ढांचों को खड़ा करने में सक्षम ये रोबोट सामूहिक बुद्धिमत्ता और समायोजन से कार्य करते हैं। इन्हें किसी निगरानी और दिशा-निर्देश देने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। इस प्रणाली को किसी निगरानी और कैमरे से निगरानी की जरूरत नहीं पड़ती है। उनकी सहूलियत के लिए किसी खास किस्म के वातावरण बनाने की भी आवश्यकता नहीं पड़ती है। हारवर्ड यूनिवर्सिर्टी के वैानिकों ने ये टर्म्स प्रणाली बनाई है। इसके जरिए रोबोट जटिल और तीन आयामों वाले ढांचों को बिना किसी केंद्रीय कमान या निर्देशित नियमों के बाखूबी बना सकते हैं। टर्म्स प्रणाली की मदद से ऊंची इमारतें, महल, पिरामिड फोम ब्रिक से बनाए जा सकते हैं। इस प्रणाली के जरिए इमारत की सामग्री के जरिए खुद ब खुद ऐसी सीढि़यां बनाई जाती हैं। जिससे गुजरकर ये रोबोट ऊंचे स्थानों तक पहुंचते हैं और उस पर जरूरत के हिसाब से ईंटें ज…