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March 2, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

आखिर उस पुरुष के प्यार में क्यों पागल है नागिन

यह घटना किसी बॉलीवुड फिल्म की तरह है जिसे पढ़कर आप सोचने पर मजबूर हो सकते हैं कि, क्या कोई किसी से इतना प्यार कर सकता है। प्यार भी कैसा तो एक नागिन का इंसान से, जो आमतौर पर एक दूसरे के जानी दुश्मन माने जाते हैं।

यह प्रेम कहानी मथुरा जिले के अगरयाला गांव की है। यह हर साल नागपंचमी के दिन एक नागिन लक्ष्मण नाम के व्यक्ति से आकर लिपट जाती है। लगभग तीन दिनों तक लक्ष्मण के साथ रहने के बाद यह नागिन कहीं चली जाती है।

नागिन कहां से आती है, कहां चली जाती है और लक्ष्मण नाम के व्यक्ति से क्यों लिपट जाती है यह रहस्य बना हुआ है। लोग इसे पूर्वजन्म की प्रेम कहानी मानते हैं। यह प्रेम कहानी लगभग ग्यारह साल पहले नागपंचमी के दिन लोगों की नजरों में आयी।

लक्ष्मण के परिवार वालों का कहना है कि जब यह सात महीने का था तब नागिन आकर लक्ष्मण के सीने पर बैठ गयी लेकिन काटी नहीं। उस समय तक किसी को नागिन के प्रेम का अंदाजा नहीं था।

जब लक्ष्मण की शादी गंगा नाम की लड़की से हो गयी तब से नागिन ने लक्ष्मण को काटना शुरु कर दिया। लेकिन हर बार लक्ष्मण को बचा लिया जाता। परिवार वालों ने जब इस घटना को जानने के लिए ढाक बजवाया तो पता च…

मोबाइल से शरीर में पहुंचा 11000 वोल्ट का करंट

मोबाइल ब्लास्ट से चेहरा और शरीर जला
आपको यह जानकर आश्चर्य जरूर होगा कि बिजली के तार के नजदीक मोबाइल फोन से बात करने पर एक युवक के शरीर में 11 हजार वोल्ट का करंट पहुंच गया। इससे उसके शरीर के अंदर इतना बड़ा ब्लास्ट होगा।

ब्लास्ट की वजह से मरीज का चेहरा, आंख और शरीर के कई महत्वपूर्ण अंग बुरी तरीके से जल गए। मरीज का इलाज करने वाले डॉक्टर भी इस घटना से आश्चर्य में हैं।

मरीज की अभी तक 11 सर्जरी की जा चुकी है और करीब आधा दर्जन सर्जरी और होनी है। मरीज को मध्य प्रदेश के ग्वालियर से दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

करंट कान से होते हुए शरीर में पहुंचा एक अगस्त-2013 को 23 वर्षीय एमबीए ग्रैजुएट युवक छत पर मोबाइल फोन से बात करने गया, छत के पास से 11 हजार वोल्ट बिजली का तार गुजर रहा था। तार में करंट था।

डॉक्टरों का कहना है कि मोबाइल से मैगनेटिक फिल्ड और बिजली की तार से इलेक्ट्रिक फिल्ड निकला। इसकी वजह से करंट युवक के कान से होते हुए शरीर में प्रवेश किया और ब्लास्ट हुआ।

ब्लास्ट के बाद युवक अचेत होकर 45 मिनट तक पड़ा रहा। इसके बाद उसे होश आया। उस दिन उसे ग्वालियर के ही एक अस्पताल में…

उफ! क्या थीं ये फिल्में जो दुनिया भर में तहलका मचा बैन हो गईं

आखिर क्यों बैन हुई ये फिल्में
दुनिया भर में कई ऐसी फिल्में बनी जो अपनी विषय वस्तु और कथानक को लेकर आलोचनाओं में रहीं। इन्होंने दुनिया भर में विवाद पैदा कर दिया।

इनमें से कईयों को बैन कर दिया गया तो कुछ एक के निर्माता को अपनी जान तक से हाथ धोना पड़ा। ऐसी ही फिल्मों और इनसे जुड़ी पूरी जानकारियां हम आपको दे रहे हैं। 

निर्माता की ही जान ले गई 'सालो/द 120 डेज ऑफ सोडम' इटली की ये फिल्म 1975 में आई और मोस्ट कंट्रोवर्सल फिल्मों की सरताज बन गई। फिल्म में बच्चों के एक ग्रुप का अपहरण कर लिया जाता है जो नाजी के हाथों की कठपुतलियां बन जाते हैं।

बच्चों के साथ रेप, मर्डर के अलावा कई वीभत्स टार्चर दिखाए गए। जिसमें ऐनल रेप जैसी कई गंदी हरकतें भी शामिल थीं। फिल्म आस्ट्रेलिया में 1993 तक बेन रही इसके बाद 1998 में इसको फिर से बेन कर दिया गया।

यही नहीं फिल्म बनाने वाले पॉयर पाओलो पासोलोनी के पास तो अपनी फिल्म की सफाई देने का भी वक्त नहीं बचा क्योंकि फिल्म रिलीज के बाद ही उनकी बेहद निर्ममतापूर्ण हत्या भी कर दी गई।

लॉस्ट हाउस ऑन द लेफ्ट: शूटिंग में घबरा गई हीरोइन ही 1972 में आई ये फिल्म सेक्सअुल टार्च…

एक अकेली औरत

सुरुचि शर्मा की उम्र 28 साल है, वह मुंबई में एक अच्छे पद पर कार्यरत हैं और उनकी अभी तक शादी नहीं हुई है. वह कहती हैं कि पुरुष हो या महिला, अगर आपको अच्छी शिक्षा मिली हो और थोड़ी चतुराई का इस्तेमाल करें तो भारत में मौकों की कमी नहीं है और आपको एक बढ़िया वेतन वाली नौकरी मिलने की संभावना रहती है. लेकिन अगर आप महिला हैं तो इन हालात में भी ये ज़रूरी है कि 20 की उम्र पार करने के कुछ साल के अंदर आपकी शादी हो जानी चाहिए.
भारत में इस आयु वर्ग की हर अविवाहित महिला को इस तरह के सवालों और बातचीत का सामना लगभग हर वक़्त करना पड़ता है.अगर 30 साल के क़रीब पहुंचते-पहुंचते भी आपकी शादी नहीं हुई है, तो लोग आपसे सहानुभूति जताते हैं, सवाल करते हैं, आपसे पूछा जाता है कि क्या आपको कोई मिला नहीं और आपको एक नाक़ामयाब इंसान समझा जाता है. क्लिक करें मैं एक शहरी मध्यम वर्ग परिवार से हूं. मेरा बचपन वडोदरा में बीता, कॉलेज की पढ़ाई वडोदरा और दिल्ली में हुई और अब मुंबई में एक बड़ी कंपनी में डिजीटल कम्युनिकेशन विभाग की प्रमुख हूं. मेरी ज़िंदगी उन बहुत सी युवतियों की तरह है जो काम के लिए घर से दूर रहती हैं. अकेले रहना ए…

अब लैब में भी उगाए जा सकेंगे कान और नाक

लंदन के ग्रेट अरमंड स्ट्रीट अस्पताल के डॉक्टरों ने इंसान के शरीर की वसा (फैट) से स्टेम सेल निकालकर उससे चेहरा विकसित करने की योजना बनाई है। डॉक्टरों की एक टीम ने प्रयोगशाला में कार्टिलेज यानी नरम हड्डी विकसित कर ली है। माना जा रहा है कि इसका उपयोग कान और नाक बनाने में किया जा सकता है।  नैनोमेडिसिन नाम की विज्ञान पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन में डॉक्टरों ने कहा है कि यह तकनीक इलाज के क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र में अभी और काम करने की जरूरत है। डॉक्टर इसके जरिए माइक्रोटिया जैसी समस्या का इलाज करना चाहते हैं, जिसमें इंसान के कान का बाहरी हिस्सा ठीक से विकसित नहीं हो पाता है।  अभी माइक्रोटिया के इलाज के लिए बच्चों की पसलियों से कार्टिलेज लेकर डॉक्टर कोमलता से उससे कान बनाते हैं और उसे बच्चे में प्रत्यारोपित करते हैं। इसके लिए कई तरह के ऑपरेशन की जरूरत होती है, जो सीने पर घाव के स्थायी निशान छोड़ जाते हैं। वहीं पसलियों से निकाले गए कार्टिलेज की कभी भरपाई भी नहीं हो पाती है।  इस नई तकनीक का प्रयोग नाक जैसे अंगों के लिए टिश्यू तैयार कर…

एलियन के रहस्‍य से अब उठेगा पर्दा!

इंसान का पाला तमाम रहस्यों से पड़ता है, लेकिन एलियन एक ऐसा रहस्य है, जिसकी गुत्थी सुलझाने के लिए इंसान पिछले 64 सालों से माथापच्ची कर रहा है. फिर भी उड़नतश्तरी से आने वाला वो मेहमान कभी हकीकत लगता है तो कभी हौवा. इस हौवे को तोड़ने के लिए अमेरिका के वैज्ञानिकों और खगोलशास्त्रियों ने सबसे बड़ी खोज शुरू कर दी है.रूस के एक एयर ट्राफिक कंट्रोलर ने दावा किया है कि उसने एलियन को देखा है. उसने रडार की स्क्रीन पर तेजी से घूमता हुआ यूएफओ देखा और उससे संपर्क साधने की कोशिश की. उड़नतश्तरी से आने वाले मेहमानों की तमाम कहानियों से लोग वाकिफ हो चुके हैं. कैसे एलियन चुपके से इस धरती पर आते हैं और कैसे वो कुछ जगहों पर अपनी निशानी छोड़ जाते हैं. दुनिया का कोई ऐसा मुल्क नहीं जहां एलियन्स के वजूद को लेकर चर्चा गर्म नहीं है. नासा के कंट्रोल रूम से लेकर जापान की संसद तक औऱ इंगलैंड के खुफिया विभाग से लेकर रोमानिया की सरकार तक. हर तरफ दूसरे ग्रहों से आने वाले प्राणियों की हकीकत को लेकर उठ रहे हैं सवाल. क्या सचमुच पृथ्वी से परे भी है जिंदगी की सुगबुगाहट? क्या सचमुच वो छिप-छिप कर आते हैं हमारी धरती पर, हमारी …

जानिए ओशो की फिलास्फी, जो ले जाती है "संभोग से समाधि की ओर!"

भोपाल। ओशो यानी दुनिया वालों को सेक्स से जुड़ी भ्रांतियों से उबारने वाले एक संत! ओशो एक ऐसे आध्यात्मिक गुरु, जिन्होंने जीवन को आनंद से जीने के गुर सिखाए!

11 दिसंबर 1931 में मध्यप्रदेश के रायसेन जिले के कुचवाड़ा गांव के एक साधारण से कपड़ा व्यापारी के घर में जन्में एक बालक की चेतना ने उसे लोगों के बीच लोकप्रिय बनाया। अपने 11 भाई-बहनों में से ओशो से सबसे बड़े थे। उनको लोग कई नामों से जानते है बचपन में उनका नाम चंद्रमोहन जैन फिर रजनीश जैन, आचार्य श्री और गुरु ओशो शामिल है।

दुनिया को मेडिटेशन, योग, सेक्स, जीवन की सार्थकता और जीवन का रहस्य समझाने वाले ओशो का निधन 19 जनवरी 1990 को (58 वर्ष) पुणे महाराष्ट्र में हुआ था।

साहित्य से मिली लोकप्रियता : ओशो ने स्कूली शिक्षा के बाद जबलपुर से बीए फिलोस्पी एवं रायपुर से एमए किया। बीए ओशो साहित्य की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि ओशो की आत्मकथा नामक पुस्तक के पहले संस्करण की दस हजार प्रतियां इटली में केवल एक महीने में ही बिक गई। कई राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय भाषाओं में ओशो की किताबें आज भी काफी प्रचलित है। इसी तरह स्पेनिश भाषा…

एक मुल्क ऐसा, जहां हर औरत के पास है एक पुरुष गुलाम

यहां है लेडीज रूल का दबदबा
महिलाओं के सशक्तिकरण और उन्हें पुरुषों के बराबर ला खड़ा करने से जुडे कई अभियान चलते रहते हैं, लेकिन इसी दुनिया का एक मुल्क ऐसा है, जहां सिर्फ महिलाओं की चलती है।

लेडीज रूल का जोर कुछ इस कदर है कि पुरुषों को उनका हर हुक्म मानना होता है। जानकर हैरानी हो सकती है, लेकिन इस खबर में पूरा दम है।

आज जब महिलाओं के खिलाफ सारी दुनिया में अपराध बढ़ते जा रहे हैं, ऐसे में आपको जानकर आश्चर्य होगा कि एक ऐसा देश है, जहां महिलाएं सबसे ऊपर हैं और पुरुष उनके लिए गुलाम से बढ़कर कुछ भी नहीं। पुरुषों की स्थिति जानवरों जैसी? अदर वर्ल्ड किंगडम। जी हां, यही नाम है उस छोटे से देश का जहां महिलाएं राज करती हैं और पुरुष गुलामी। यहां रानी पैट्रिसिया-1 का एकमुश्त राज है।

चेक रिपब्लिक से 1996 में अलग होकर बने इस देश को अन्य राष्ट्रों ने देश का दर्जा नहीं दिया है, लेकिन इनकी खुद की करेंसी, पासपोर्ट, झंडा और पुलिस दल है।

इस देश में बाहर से आने वाले पुरुषों को रानी के लिए सौफा या कुर्सी बनना पड़ता है। इतना ही नहीं, उन्हें मारा-पीटा भी जाता है। पुरुषों को यहां पालतू जानवर के समान समझा जाता है।

नाग…

इंसानों जैसे रोबोट, गाना-बजाना, हंसना-रोना और पढ़ना भी आता है इन्हें!

अभी तक मशीनी कामकाज करने वाले रोबोटों के बारे में ही सुना जाता था लेकिन अब ऐसा रोबोट भी आ गया है जो न केवल चलेगा, बातें करेगा, गाना गाएगा, किताब और समाचार पत्र पढ़ेगा, मौसम का हाल बताएगा, इंटरनेट शॉपिंग करेगा बल्कि इंसानों की भावनाओं को भी पढ़ सकेगा. ये है चार्ल्स या चार्ली जो दुनिया का सर्वाधिक आधुनिक रोबोट है और जिसे इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टैक्नोलोजी के पूर्व छात्र और ऑस्ट्रेलिया के ला त्रोब यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर राजीव खोसला ने तैयार किया है. चार्ली ऊपर बतायी गयी सारी विशेषताओं से लैस है. मात्र 20 सेंटीमीटर का चार्ली ‘पार्टनर पर्सनल रोबोट’ है जिसे ऐसे बच्चों और बुजुर्गों की मदद के लिए डिजाइन किया गया है जो डिमेंशिया, ऑटिज्म, सेरेबर्ल पाल्सी, दिमाग में चोट और ऐसी अन्य बीमारियों के शिकार हैं. दिल्ली में ऑस्ट्रेलियाई उच्चायोग द्वारा आयोजित एक समारोह में खोसला ने इस रोबोट का प्रदर्शन करते हुए बताया, ‘‘डिमेंशिया से पीड़ित बच्चे अक्सर बाथरूम में हाथ धोना भूल जाते हैं. यह रोबोट लगातार बच्चे पर नजर रखेगा और उसे याद दिलाएगा कि उसने हाथ नहीं धोए हैं और उसे हाथ धोने की जरूरत है.’6.5 किलोग्रा…

बूढ़ी दिखना चाहती है जवान दिखने वाली दादी

सैंतालीस वर्षीय एन बोल्टन का सबसे बड़ा दु:ख यह है कि वे 47 वर्ष की हो चुकी हैं लेकिन अपनी उम्र से आधी की दिखती हैं। वे अपने चेहरे को बूढ़ा दिखाने के लिए कॉस्मेटिक सर्जरी भी कराना चाहती हैं। उनकी अपनी उम्र से कम दिखने की हालत के चलते उनके दोस्तों और बॉयफ्रेंड्‍स ने उन्हें छोड़ दिया है। उनका कहना है कि कभी-कभी तो लोग गलती से उन्हें उनके बेटे की गर्लफ्रेंड समझ लेते हैं। 

ब्रिटेन में लाखों लोग खुद को जवान दिखने के लिए करोड़ों खर्च करते हैं लेकिन एक नानी एन बोल्टन का कहना है कि वे कॉस्मेटिक सर्जरी करा कर अपनी उम्र को अधिक बड़ा दिखाना चाहती हैं। चार बच्चों की मां एन को लोग समझ लेते हैं कि उनकी उम्र तीस से तीस वर्ष के बीच में है। पर वे इस स्थिति को सुखद नहीं वरन् अपने लिए अभिशाप समझती हैं। 

उनका कहना है कि उनके कम उम्र दिखने के बाद एक विवाह टूट गया है और दो लम्बे समय से चले आ रहे रिश्ते खत्म हो गए क्योंकि उनसे हमेशा ही कम उम्र के युवा बातचीत करने में दिलचस्पी दिखाते हैं। 

उनके ईष्यालु साथियों ने उन्हें छोड़ दिया क्योंकि बोल्टन के साथ होने पर वे लोगों को अधिक उम्र के दिखते हैं। उनका सबसे बड़ा लड…

हर तरफ मातम, उठकर बैठा मुर्दा बोला मै जिंदा हूं

जब मुर्दा अचानक बोल पड़ाकहते हैं शरीर से एक बार आत्मा निकल जाए तो वापस उस शरीर में लौटकर नहीं आती। आत्मा के शरीर छोड़ते ही यह माना लिया जाता है कि व्यक्ति अब जिंदा नहीं है।

लोग मुर्दे को जलाने या दफनाने की तैयारी में लग जाते हैं। लेकिन कई बार कुदरत ऐसे चमत्कार भी कर देती है कि आंखों पर यकीन नहीं होता। ऐसे ही चमत्कारों में शामिल है मुर्दे का अचानक बोल पड़ना या अचानक मुर्दे की सांस चलने लगना।
हो रही थी अंतिम संस्कार की तैयारी उठकर बैठ गया वह यह घटना अमरीका के मिसीसिपी का है। 78 वर्षीय विलियम्स को लेक्जिंगटन में उनके घर में ही नब्ज़ नहीं चलने पर मृत घोषित किया गया।

होम्स काउंटी के शव जांच विशेषज्ञ डेक्सटर हावर्ड ने बताया कि उन्होंने सामान्य तरीके से ही विलियम्स की जांच की थी। उन्हें विलियम्स जीवित होने का कोई संकेत नहीं मिला।

वॉल्टर विलियम्स नामक शख्स के शव को जब अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। विलियम्स को पॉर्टर ऐंड संस फ्यूनरल होम ले जाया गया। जब उनके शरीर पर लेप लगाने की तैयारी हो रही थी ठीक उसी वक्त उनके शरीर में हरकत होने लगी।

विलियम्स उठकर बैठ गए। यह अब कब तक जीवित रहेंग और इनके मृत…

नहीं खाया अन्न का एक भी दाना

सिरसा. गाय को राष्ट्रीय प्राणी घोषित करवाने व अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण की मांग को लेकर एक साधु ने 11 साल से अन्न का एक दाना भी ग्रहण नहीं किया। साधु का प्रण है कि जब तक सरकार उसकी दोनों मांगों को पूरा नहीं करती वह अन्न ग्रहण नहीं करेगा। इसी मांग को लेकर हिसार जिले के टोक्स गांव के दादा केसराराम धाम में रहने वाले सुभाष मुनि ने सोमवार को सिरसा में धरना दिया। उन्होंने गाय को राष्ट्रीय प्राणी घोषित करने की मांग का लेकर डीसी को ज्ञापन भी दिया। मुनि का कहना है कि देश में गाय की हालत बहुत बुरी है। बुचडख़ानों में गो वध हो रहा है। गाय भूखी प्यासी व बेसहारा भटक रही है। गाय को हिंदू धर्म में तो इसको माता का दर्जा दिया गया है। केवल हरी सब्जी खा रहे हैं... 65 वर्षीय सुभाष मुनि ने बताया कि वे पिछले 11 साल से अन्न ग्रहण नहीं कर रहे हैं। वे केवल हरी सब्जी पर सेंधा नमक मिलाकर खाते हैं। उनका प्रण है कि जब तक दोनों प्रमुख मांगों में से उनकी एक भी मांग पूरी हो गई तो वे अन्न ग्रहण नहीं करेंगे। सुभाष मुनि भारत भ्रमण कर चुके हैं। उन्होंने जगह जगह जाकर यह मांग जोर शोर से उठाई है। वे अब तक 38 बार धरन…

जीती-जागती बार्बी डॉल, आज तक नहीं खाया खाना, तब पाया ऐसा फिगर

कीव। ये कोई बार्बी डॉल नहीं, बल्कि जीती-जागती एक लड़की है। वैसे कोई भी इसकी फोटो देखकर यही सोचता है कि ये कोई बार्बी डॉल है। ये लड़की अपने जीरो फिगर के कारण इन दिनों सनसनी बनी हुई है। हू-ब-हू बार्बी डॉल जैसी दिखने वाली यह लड़की यूक्रेन की वालेरिया लूक्यानोवा है, जिसे देखने वाला हर शख्स एक बार तो दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हो जाता है। 23 वर्षीय ल्यूकानोवा की खूबसूरत का रहस्य दुनिया के सामने आ चुका है।  आज तक नहीं खाया खााना बेहद खूबसूरत बॉडी और बार्बी डॉल जैसे फिगर वाली ल्यूकानोवा का कहना है कि उसने अभी तक खाना नहीं खाया। वह हवा, पानी और रोशनी पर जिंदा है। ल्यूकानोवा कहती है कि वह आध्यात्मिक गुरु है जो हर समय यात्रा करती है। उनका कहना है वह दुनिया में बढ़ रही नकारात्मकता को कम करने के लिए ही आईं है। 

















sabhar : bhaskar.com

देखिए अमेरिकी फोटोग्राफर की नजर से कैसे जिंदगी जीते हैं भारत के साधु-संत

आधुनिकता की ओर तेज़ी से भागते समाज के लिए इस बात का अंदाजा लगाना मुश्किल है कि आखिर कोई इंसान साधुत्व की ओर क्यों चला जाता है। सभी सांसारिक मोह छोड़कर इंसान समाज से बाहर जिंदगी क्यों जीने लगता है। ऐसे ही सवालों का जवाब तलाशने के लिए न्यूयॉर्क के ब्रूकलिन नगर के फोटोग्राफर ज्वॉय एल पुट्स ने दुनिया के तमाम देशों का दौरा किया और उन्होंने ऐसे साधु-संतों से मुलाकात की, जिन्होंने अपनी जिंदगी आध्यात्मिक मुक्ति की तलाश में लगा दी।  भिक्षुओं और आध्यात्मवादियों की तलाश में निकले ज्वॉय ने  उत्तरी इथियोपिया से यात्रा की शुरुआत की। इस दौरान तमाम देशों की यात्रा करते हुए वो हाल ही में भारत पहुंचे, जहां वाराणसी में उन्होंने साधु-संतों और आध्यात्मवादियों से मुलाकात की। पूरी दुनिया में धर्म को लेकर साधु-संतों की अपनी अलग राय है, लेकिन भारत में हिंदू धर्म में विश्वास करने वाले साधु-संत को उनके आत्मत्याग के लिए जाना जाता है। साधु-संत अकेले एक हाथ पर तपस्या कर महीनों और बरसों बिता देते हैं। फोटोग्राफर ज्वॉय ने वाराणसी में ऐसे ही कुछ साधु-संतों से ना सिर्फ मुलाकात की, बल्कि साधना के दौरान की उनकी तरह-तरह…