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February 23, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

अजब चमत्‍कार कही दूसरे ग्रह से आई बताने वाली बाबी डाल माडल कही सेक्सी महिला रोबोट

बार्बी डॉल की तरह दिखने वाली लड़की



वह दिखती है बार्बी डॉल की तरह। उसकी आंखें, उसका शरीर, उसकी स्टाइल आपको चौंका देगी कि इतनी बड़ी, असली लड़की दिखने वाली, सांस लेने वाली बार्बी डॉल कब बन गई? लेकिन सच यह है कि यह बच्चों के खेलने वाली बार्बी डॉल गुडि़या की तरह दिखती जरूर है पर है एक जीती-जागती असली लड़की। जी हां, एक शक्ल वाले दो इंसानों को देखकर आप भगवान के करिश्मे की बात करते हैं। पर दुनिया की सबसे मशहूर गुडि़या बार्बी डॉल की तरह दिखने वाली इस लड़की को देखकर आप शायद कह उठें, भगवान तू भी इंसानों का मॉडल चुराने लगा । इससे भी ज्यादा रोमांचक इस लड़की की बातें हैं जो खुद को समय में घूमने वाली आध्यात्मिक गुरु बताती है और यहां आने का मकसद संसार में पनप रही नकारात्मक सोच को खत्म करना बताती है। यूक्रेन की मॉडल वलेरिया लुक्यानोवा को पहली बार देखकर शायद आप चकमा खा जाएं कि आपके सामने कोई आदमकद बार्बी डॉल खड़ी है। वलेरिया लुक्यानोवा हूबहू बार्बी डॉल की तरह दिखती हैं। शारीरिक बनावट, कद काठी, चेहरे के भावों से आपको कहीं भी उनके बार्बी डॉल न होने का शक नहीं होता है। पर आप सोचते हैं कि सांस लेने वाली, …

अब ब्रेनटॉप

प्रीतंभरा प्रकाश
सुनने में भयावह लग सकता है कि आपका हाथ किसी और की इच्छा के हिल-डुल रहा है और उस 'किसी और' को आप देख भी नहीं पा रहे। लेकिन अब यह संभव हो गया है। पिछले दिनों वाशिंगटन यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च में ह्यूमन टु ह्यूमन ब्रेन इंटरफेस को पहली बार दफे सफल पाया गया।

यहां के वैज्ञानिकों ने ऐसा सिस्टम डिवेलप किया है, जिसमें एक व्यक्ति एक खास इंटरफेस का इस्तेमाल करके दूसरे व्यक्ति की सोच को कंट्रोल कर सकता है। यह इंटरफेस इंटरनेट के जरिए दोनों के दिमागों को कनेक्ट करता है। एक और खास बात यह कि इसे डिवेलप करने वाली रिसर्च टीम में एक भारतीय भी शामिल है।

वाशिंगटन यूनिवर्सिटी में प्रफेसर राजेश राव ने इलेक्ट्रिकल ब्रेन रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल करके अपना दिमागी सिग्नल अपने साथी को भेजा। इस सिग्नल की वजह से उनके साथी की कीबोर्ड पर टिकी उंगली में हरकत हुई। राव के असिस्टेंट स्टोको का कहना है कि कंप्यूटरों की तरह ही इंटरनेट दो दिमागों को भी कनेक्ट कर सकता है, और हम दिमाग में बसे ज्ञान को एक इंसान से दूसरे के दिमाग में ट्रांसफर करना चाहते हैं।
इससे पहले ड्यूक यूनिवसिर्टी के रिसर्चरों ने दो चूह…

इंसानों के साथ भी शारीरिक रिश्ते बना सकेंगे रोबॉट, पैदा करेंगे बच्चे!

लंदन
आपने रजनीकांत की रोबॉट फिल्म तो देखी होगी। इसमें रोबॉट बने रजनीकांत का उसके साथी मजाक बनाते हैं कि वह सेक्स नहीं कर सकता, इसलिए वह इंसानों जैसा नहीं है। लेकिन जरा सोचिए क्या हो, अगर रोबॉट भी सेक्स करने लगें और बच्चे पैदा करने लगें। हालांकि इंजीनियर और नोवेलिस्ट जॉर्ज जैरकैडाकिस का मानना है कि अगले 20-30 साल में ऐसा संभव है। जॉर्ज के मुताबिक, भविष्य में रोबॉट न सिर्फ दूसरे रोबॉट के साथ सेक्स कर सकेंगे, बल्कि इंसानों के साथ भी शारीरिक रिश्ते बना सकेंगे।

आर्टिफिशल इंटेलिजेंस इंजीनियर जॉर्ज का मानना है कि ऐसा करने से बेहतर रोबॉट पैदा होंगे। उनके मुताबिक, रोबॉट के इंसानों के साथ संबंध बनाने से हाइब्रिड प्रजाति विकसित होगी। रोबॉट और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के विशेषज्ञों के अनुसार, यह किसी साइंस फिक्शन फिल्म की कहानी नहीं है बल्कि वर्तमान में ही ऐसे रिसर्च और तकनीक उपलब्ध हैं, जिससे ऐसा संभव हो सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों को भी इसके बुरे प्रभाव को लेकर चिंता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर रोबॉट इंसानों से ज्यादा पैदा होने लगे, तो वह समय बुरे सपने से कम नहीं होगा।

बच्चे पैदा नहीं, प्रिंट होंगे…

स्किन सेल्स से बन सकेंगे नए ऑर्गन्स

लंदन 
वैज्ञानिकों ने इंसानी शरीर की त्वचा की कोशिकाओं (स्किन सेल्स) से स्टेम सेल्स तैयार करने से जुड़ी बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इन स्टेम स्टेल्स में एंब्रियो या भ्रूण में तब्दील होने की क्षमता है। एक टॉप साइंटिस्ट ने 'द इंडिपेंडेंट' को रविवार को यह जानकारी दी। इस तकनीक का परीक्षण चूहों पर पूरी तरह से कामयाब रहा है और वैज्ञानिक मानते हैं कि यह इंसानों के लिए भी बिलकुल फिट रहेगा। ऐसे में इंसानों में होने वाली असाध्य बीमारियों मसलन पार्किन्सन, हार्ट डिजीज आदि के बेहतर इलाज की संभावनाएं और मजबूत हो चली हैं। दरअसल, इस तकनीक के जरिए बीमारी से ग्रस्त अंगों को मरीज के स्टेम सेल्स के जरिए दोबारा से तैयार किया जा सकता है। 

जर्म सेल्स भी किए जा सकते हैं तैयार 
हालांकि, स्किन सेल्स से इंसानी भ्रूण तैयार करने की फिलहाल कोई मंशा नहीं है, लेकिन वैज्ञानिकों का मत है कि ऐसा किया जाना सैद्धांतिक तौर पर मुमकिन है। प्रयोग के दौरान चूहों के भ्रूण तैयार करने में कामयाबी मिलना इस बात का संकेत देते हैं कि इन भ्रूण से किसी खास तरह के टिशू (ऊतक) तैयार किए जा सकते हैं, जो अंग विकसित करने की दिशा में अहम स…

तब इंसानों से भी बुद्धिमान बन जाएगा रोबोट

न्यूयार्क: गूगल के एक विशेषज्ञ का दावा है कि अगले 15 सालों में एक ऐसा रोबोट पेश किया जाएगा जो धरती के सबसे बुद्धिमान मानवों से भी ज्यादा तेज दिमाग वाला होगा। यह न केवल बुद्धिमानी से बात करेगा, सवालों का जवाब देगा बल्कि दिल्लगी भी करेगा। गूगल के आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस (एआई) के विशेषज्ञ ने `द ऑब्जवर्र` को बताया कि हम चाहते हैं कि हमारा कंप्यूटर वेब की पूरी दुनिया और हर एक किताब का एक-एक पन्ना पढ़ डाले और उपयोगकर्ताओं से समझदारी से बात करने और उनके हर सवाल का जवाब देने में सक्षम हो।

उन्होंने कहा कि 2029 तक कंप्यूटर मशीन मानवों से ज्यादा समझदार और तेज दिमाग होगी और अपने निर्माण करने वालों को ही मात देगी। इस दिशा में गूगल ने हाल ही में दुनिया की शीर्ष रोबोटिक कंपनियों को खरीद लिया है, जिसमें बोस्टन डायनामिक्स भी शामिल है। (एजेंसी sabhar ;http://zeenews.india.com/

सिर हिलाइए और हो गई पेंमेंट गूगल ग्लास से

भविष्य में लोग सिर्फ़ अपने सिर को हिलाकर ख़रीदी गई किसी चीज़ के लिए भुगतान कर सकेंगे. हालांकि ऐसा करने के लिए आपको गूगल ग्लास पहनना होगा.
इस सुविधा का फ़ायदा ईज़, ग्लासशोल, गूगल ग्लास एक्सप्लोरर जैसे ऐप की मदद से उठाया जा सकता है. अगर आपने गूगल ग्लास पहना है तो इन ऐप की मदद से आप सिर्फ़ दो बार सिर हिलाकर भुगतान कर सकते हैं.
इसके लिए दुकानदार के पास भी ऐसा ही आईओएस या एंड्राएड ऐप होना चाहिए.
फिलहाल इस तरह की सुविधा केवल वर्चुअल मुद्रा 'बिटकॉइन' के साथ उपलब्ध है, लेकिन इसके साथ काफी दिक्कतें हैं. बहुत कम कारोबारी ही वर्चुअल करेंसी को स्वीकार करते हैं.
क्लिक करें पढें: नए साल के पाँच हॉट गैजेट
चुनौतियाँ
 गूगल ग्लास हाल में तोक्यो स्थित करेंसी बदलने वाले बाज़ार माउंट गॉक्स के नाकाम होने के कारण और बिटकॉइन का मूल्य गिरने के कारण इस पर भरोसा घटा है.
हालांकि ईज़ को उम्मीद है कि वो अपने "नॉड टू पे" सिस्टम का विस्तार कर उसमें यूरो और डॉलर जैसी परंपरागत मुद्रा प्रणालियों को शामिल कर लेगा.
गूगल अपने ग्लास में लगातार नए संशोशन कर रहा है और ऐप जोड़ रहा है. क्लिक करें तस्वीर खींचने और वीडि…

फेसबुक से खड़ा कर लिया अपना बिजनेस, लाखों का है टर्नओवर

पटना. उद्यमी वही नहीं होते हैं जो बड़ी पूंजी के साथ कोई बड़ा व्यवसाय करते हैं। छोटी पूंजी के साथ भी छोटा सार्थक काम किया जा सकता है। पटना की महिला उद्यमियों ने यह सिद्ध किया है। पांच-दस हजार की नौकरी की चाहत रखने वाली ये महिलाएं आज अपना उद्यम चला रही है और समाज की महिलाओं को रोजगार प्रदान कर रही हैं। इनके बेहतर काम ने समाज ने इनको खास पहचान दिया है। बिहार महिला उद्योग संघ की ओर से सिन्हा लाइब्रेरी में शुक्रवार से शुरू महिला उद्योग मेला ऐसे ही उद्यमियों से सजा है।  
वसुंधरा वर्मा ऑनर- सुदक्ष, सुदक्ष इंटीरियर डिजाइनिंग, सुदक्ष मेइट्स प्रोडक्ट- होम डेकोर आइटम, डिजाइनर वार्डरोब, कंसल्टेंसी शुरुआत- 2012 पूंजी- 15 हजार रुपए, सालाना टर्नओवर-तीन लाख लड़की और खुद का बिजनेस! घरवालों के आगे ये बड़ा प्रश्न हमेशा घूमता था। पटना से बाहर पढऩे जाने तक नहीं मिला। हमेशा अपनी क्रिएटिविटी निखारना चाहती थी। जैसे-तैसे पटना वीमेंस कॉलेज में फैशन में एक साल का डिप्लोमा किया। बाजार जाकर अपने प्रोडक्ट बेच नहीं सकती थी, घरवालों ने मना कर रखा था। फेसबुक मेरा शॉप बना। यहां अपने प्रोडक्ट के फोटो अपलोड करती। देश और विदे…

ये बच्चा पूर्वाभास से जान जाता है सबकुछ

छठी इंद्रिय का कमालआपने हॉलीवुड फिल्म sixth sense देखी होगी, जिसमें एक बच्चे की छठी इंद्रिय अति विकसित होती है। लेकिन ये कोई फिल्म नहीं है बल्कि एक चार साल के बच्चे की असलियत है।

इस बात की पुष्टि खुद बच्चे के मां-बाप करते हैं। उनका कहना है कि उनका बच्चा sixth sense मूवी के चरित्र 'कोल' जैसा है।
फ्लोरिडा में रहता है ये परिवारफ्लोरिडा के नैपल्स में रहने वाले ग्रेग और हिदर होवेल का कहना है कि उन्होंने ध्यान दिया कि उनका बेटा एलिजाह औरों से काफी अलग है। महज दस महीने की उम्र में उसने पूरे-पूरे वाक्य बोलना शुरू कर दिया था।

जब बच्चे के माता-पिता ने मनोचिकित्सक से संपर्क किया तो उसने बताया कि बच्चे के अंदर कुछ सुपरनैचुरल ताकत है।
क्या कहना है मां का?एलिजाह की मां होवेल का कहना है कि पहले उन्हें लगता था कि उनका बच्चा यूं ही बातें बनाता है लेकिन वो कई बातें होने से पहले ही जान जाता है।

होवेल ने बताया कि एलिजाह को उनके गर्भपात होने का पता पहले ही चल गया था। इतना ही नहीं उसे इस बात का भ पूर्वाभास हो गया था कि वो इसके बाद जुड़वा बच्चों को जन्म देगी।

वो बताती हैं कि जिस समय वो गर्भवती थी उनका …

झील में पक्षी बन जाते हैं पत्थर इंसानी हड्डियों से बना है यह चर्च

लाइफस्टाइल डेस्क. धरती पर जीवन की शुरुआत से ही इंसान यात्राएं कर रहा है। इन यात्राओं की ही बदौलत उसका दुनिया के दूसरे देशों से संपर्क हुआ। उसने अपने यात्रा अनुभवों से लोगों को रोमांचित किया। उन्हें यात्राओं के लिए प्रेरित किया। प्राचीन काल में ये यात्राएं साहित्यक, धार्मिक और वैज्ञानिक खोजों के लिए की गईं और धीरे-धीरे इनका स्वरूप बदलता गया, लेकिन यात्राओं के प्रति लोगों का लगाव हमेशा बरकरार रहा। दैनिक भास्कर डॉट कॉम ट्रैवलिंग के माध्यम से पाठकों को इस रहस्यमयी दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचा रहा है। पाठकों को बेहतरीन ट्रैवलिंग डेस्टिनेशन के बारे में बता रहा है। इसी क्रम में आज हम यात्रा प्रेमियों को दुनिया के ऐसे चर्च के बारे में बता रहे हैं, जो मानव कंकालों से बना है। साथ ही, एक ऐसी झील के सफर पर ले जा रहे हैं, जिसे छूते ही सब कुछ पत्थर बन जाता है। सबसे पहले हड्डियों से बने चर्च के बारे में पढ़िए... क्या है चर्च का नाम सेडलेक ऑस्युअरी कहां है स्थित चेक गणराज्य क्या है ख़ास इस चर्च में 40 हजार लोगों की हड्डियों को कलात्मक रूप से सजा कर रखा गया है। इसे The Church of Bones भी कहा जाता है। क्या…

देश-विदेश में रिसर्च के लिए प्राचीन ग्रंथों का अनमोल खजाना है साधु आश्रम

होशियारपुर। पंजाब की पावन धरा होशियारपुर में उना मार्ग स्थित साधु आश्रम में विश्वेश्वरानंद वैदिक रिसर्च इंस्टिट्यूट को समर्पित इस संस्थान का इतिहास गौरवमय रहा है। वैदिक साहित्य के प्रचार-प्रसार के लिए आज भी यह केंद्र देश में ही नहीं विदेशों में भी रिसर्च के लिए प्रसिद्ध है। साधु आश्रम में स्थित इस केंद्र में अनगिनत प्राचीन ग्रंथ व दक्षिण भारतीय लिपि में लिखे संस्कृति के अनेक ग्रंथ पड़े हैं। देश-विदेश से विद्वान, अध्यापक व खोजकर्ता खोज करने के लिए आते रहते हैं। इस संस्था में चारों वेदों के अंग्रेजी व फ्रैंच भाषा में अनुवाद मौजूद हैं। वेदों से संबधित साहित्य भी यहां रखा हुआ है। ज्ञान का विशाल भंडार है यह केंद्र ब्रिटेन के इनसाइक्लोपीडिया विश्व की प्रमुख भाषाओं की डिक्शनरियां व प्रसिद्ध विद्वानों की आत्मकथा सहित यहां पर करीब डेढ़ लाख पुस्तकें मिल जाती है। पंडित जवाहर लाल नेहरु व महात्मा गांधी की आत्मकथा का अंग्रेजी व हिंदी अनुवाद यहां मौजूद है। धर्मसूत्र, ब्राह्मण व आर्य साहित्य यहां उपलब्ध है। उल्लेखनीय है कि पुणे के भंडारा रिसर्च इंस्टीट्यूट के बाद बीबीआरआई भारत का दूसरा ऐसा संस्थान है,…

आखिर शिव जी को ही क्यों जल चढ़ाते हैं भक्त?

भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए भक्त जल और बेलपत्र से शिव जी का अभिषेक करते हैं। इसके पीछे एक बड़ा कारण है जिसका उल्लेख पुराणों में किया गया है।

शिव पुराण में उल्लेख मिलता है कि सागर मंथन के समय जब हालाहल नाम का विष निकलने लग तब विष के प्रभाव से सभी देवता एवं जीव-जंतु व्याकुल होने लगे। ऐसे समय में भगवान शिव ने विष को अपनी अंजुली में लेकर पी लिया।

विष के प्रभाव से स्वयं को बचाने के लिए शिव जी ने इसे अपनी कंठ में रख लिया इससे शिव जी का कंठ नीला पड़ गया और शिव जी नीलकंठ कहलाने लगे।

लेकिन विष के प्रभाव से शिव जी का मस्तिष्क गर्म हो गया। ऐसे समय में देवताओं ने शिव जी के मस्तिष्क पर जल उड़लेना शुरू किया जिससे मस्तिष्क की गर्मी कम हुई।

बेल के पत्तों की तासीर भी ठंढ़ी होती है इसलिए शिव जी को बेलपत्र भी चढ़ाया गया। इसी समय से शिव जी की पूजा जल और बेलपत्र से शुरू हो गयी।

बेलपत्र और जल से शिव जी का मस्तिष्क शीतल रहता और उन्हें शांति मिलती है। इसलिए बेलपत्र और जल से पूजा करने वाले पर शिव जी प्रसन्न होते हैं। sabhar :http://www.amarujala.com/

पूनम की फेसबुक वॉल न्यूड फिल्म से ज्यादा बोल्ड

पूनम की फेसबुक वॉल न्यूड फिल्म से ज्यादा बोल्ड हैं।फेसबुक और ट्वीटर उन्हें चर्चा भी देते रहे हैं।
जब-जब पूनम पांडेय चर्चाओं से बाहर होती हैं उनकी कोई तस्वीर आ धमकती है।तस्वीर आते ही पूनम चर्चाओं में आ जाती हैं।पूनम पांडेय के लिए फेसबुक अपने एक्सपोजर का एक ठिकाना बन गया है।अपने फेसबुक और ट्वीटर एकाउंट को पूनम अपने लिए प्रोफशनली बहुत इस्तेमाल करती हैं।पूनम पांडेय अपनी फिल्म नशा का प्रमोशन भी इसी अंदाज में करती रही हैं।फेसबुक और ट्वीटर उन्हें चर्चा भी देते रहे हैं।

तस्वीर आते ही पूनम चर्चाओं में आ जाती हैं।


जबजब-जब पूनम पांडेय चर्चाओं से बाहर होती हैं उनकी कोई तस्वीर आ धमकती है।जजब-जब पूनम पांडेय चर्चाओं से बाहर होती हैं उनकी कोई तस्वीर आ धमकती है।ब पूनम पांडेय चर्चाओं से बाहर होती हैं उनकी कोई तस्वीर आ धमकती है।














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टीनएज गर्ल से 6 घंटे में 30 मर्दों ने किया बलात्कार!

photo :www.shrinews.com

बर्मिंगम : एक टीनएज गर्ल से कम से कम 30 एशियाई मर्दों ने बलात्कार किया। रिपोर्ट के मुताबिक बलात्कार करने वालों में एक पिता और स्कूली छात्र उसका बेटा भी शामिल था। यह सब करीब छह घंटे तक चला और महत्वपूर्ण बात यह है कि सब लड़की को बड़ी करने के नाम पर किया गया। ब्रिटेन के एक अखबार में इस बारे में रिपोर्ट प्रकाशित हुई है। 

मुस्लिम समाज में काम कर रहीं ब्रिटेन की कार्यकर्ता शाइस्ता गोहिर ने दावा किया है कि ऐसा बहुत सारी लड़कियों के साथ हो चुका है। गोहिर का दावा है कि एशियाई समाज की कुछ खास नस्लों में लड़कियों के साथ दुर्दांत सेक्स क्राइम हो रहे हैं, जिन्हें पुलिस अधिकारी जानबूझ कर नजर अंदाज कर देते हैं। इन अपराधों को समुदायों के नेता, स्कूल और परिवार तक नजर अंदाज कर रहे हैं।

अपनी रिपोर्ट में गोहिर ने ब्रिटेन के बर्मिंगम का एक केस स्टडी पेश किया है। इस केस में एक टीनएज गर्ल के साथ 6 घंटे तक 20 से 30 पुरुषों ने बलात्कार किया। बर्मिंगम की सिटी काउंसिल को सौंपी गई रिपोर्ट 35 पीड़ितों के साथ की गई बातचीत पर आधारित है। इस रिपोर्ट में सेक्स क्राइम करने वाले मर्दों का भी साक्षात…

देखिए, ‌कैसे दर्शकों को घर बैठे उत्तेजित करेगी ये लड़की

डैनिश सुपर मॉडल हेलेना क्रिस्टेंसेन इस महीने वीएस मैग्जीन के कवर पेज पर दिखाई दी थी साथ ही इस मैग्जीन की वे गेस्ट एडिटर भी बनी थी। फोटोः डेली मेल





अब जल्द ही हेलेना दर्शकों को घर बैठे उत्तेजित करती नजर आएंगी।
अब जल्द ही हेलेना दर्शकों को घर बैठे उत्तेजित करती नजर आएंगी।


45 वर्षीय हेलेना एक शॉर्ट फिल्म में मादक अंदाज में लोगों को उकसाएंगी।हेलेना कहती हैं कि इस शॉर्ट फिल्म को बयां करने के लिए उनके पास शब्द नहीं हैं लेकिन फिर भी लोग उन्हें देखते ही एक्साइटेड हो जाएंगे।




इस फिल्म में हेलेना ने काफी उल्टे-सीधे पोज दिए हैं जो लोगों की इच्छाओं को जाग्रत करेंगे।


हेलेना ने इस शॉर्ट फिल्म का एक वीडियो भी जारी किया है। जिसमें वे किसी कॉल गर्ल से कम नहीं लग रही
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45 वर्षीय हे45 वर्षीय हेइस फिल्म में हेलेना ने काफी उल्टे-सीधे पोज दिए हैं जो

 लोगों की इच्छाओं को जाग्रत करेंगे।लेना एक शॉर्ट फिल्म में मादक अंदाज में लोगों को उकसाएंगी।

लेना एक शॉर्ट फिल्म में मादक अंदाज में लोगों को उकसाएंगी।


दुनिया का सबसे खतरनाक पेड़ मौत का छोटा सेब

यह मैंचीनील नाम का पेड़ है और इसे दुनिया के सबसे जहरीले वृक्ष के तौर पर गिनीज ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है। मैंचीनील इतना जहरीला है कि इसके पास भी जाना मना है। सबसे खतरनाक माने जाने वाले पेड़ पर या उसके आसपास चेतावनी वाले बोर्ड और तख्तियां नजर आती हैं। बेहतर है कि लोग यह पढ़कर इससे दूरी बनाकर रखते हैं। इसके सेब जैसे दिखने वाले फल को यदि किसी ने खाया, तो यह उसे मौत की नींद जल्द सुला सकता है।  इस विषैले पेड़ का नाम कैसे पड़ा मैंचीनील : विज्ञान में आधिकारिक रूप से इसे Hippomane mancinella कहा जाता है। मैंचीनील (Manchineel) शब्द स्पेनिश के  Manzanilla से बना है। Manzanilla का अर्थ 'little apple' होता है। कोलंबस ने मैंचीनील के फल को बताया था मौत का छोटा सेब :
माना जाता है कि क्रिस्टोफर कोलंबस ने मैंचीनील के सेब जैसे फल को 'manzanilla de l muerte' (मौत का छोटा सेब) का नाम दिया था। वैज्ञानिक चख चुके हैं इसका स्वाद : एक रेडियोलॉजिस्ट निकोला एच स्ट्रिकलैंड ने ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित लेख में मैंचीनील के बारे में बताया है। उन्होंने इसके फल का स्वाद भी चखा था। स…