सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

February 9, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कुछ मठ, मंदिर, चर्च और संत क्यों सदियों से रहस्य बने हैं

विज्ञान के युग में भी विश्व के विभिन्न धर्मों के लोगों का मंदिर, चर्च, मठ और संतों में  आस्था-विश्वास बरकार है। ये रहस्य और अलौकिक शक्तियों से संपन्न माने जा रहे हैं।विभिन्न धर्मों में कुछ बड़े संतों संतों की मौत के बाद लोग उनके शरीर की पूजा कर रहे हैं। वे इन धार्मिक स्थलों और संतों के चमत्कार के अनुभव का भी दावा करते हैं। यह थाइलैंड के कोह सामुई द्वीप में स्थित यह वात खुनारम नाम का बौद्ध मंदिर है। श्राइन के अंदर स्थित मंदिर में एक बौद्ध संन्यासी लुआंग पारे डैइंग का ममीफाइड शव रखा है। 1973 में उनकी मौत के बाद से यह बॉडी रखी हुई है। इसे बहुत सुरक्षित ढंग से रखा गया है। बौद्ध संन्यासी की इच्छा थी कि मृत्यु के बाद उनके शरीर को सुरक्षित रखा जाए। इससे जीवन, मृत्यु और बुद्ध के मध्यम मार्ग की शिक्षा दी जा सके। वह अपने जीवन में ध्यान साधना के लिए विख्यात थे। शरीर की आंखों को ढंकने के लिए एक चश्मा भी लगाया गया है। खास बात यह हैं कि उनका शरीर बहुत हद तक सुरक्षित है फिर भी एक गिरगिट उनके शरीर के अंगों पर घूमता रहता है। उसके अंडे बॉडी में दिखते हैं। बॉडी अब पहले जैसी स्थिति में नहीं है, फिर काफी…

परग्रही सभ्यताओं के साथ संपर्क 20 साल के बाद

अमरीका में परग्रही सभ्यता अनुसंधान एजेंसी के एक वैज्ञानिक सेट शोस्ताक ने कहा है कि परग्रही सभ्यताओं के प्रतिनिधि वर्ष 2040 में पृथ्वी के निवासियों के साथ संपर्क स्थापित करेंगे। अमरीका के वैज्ञानिक ने बताया है कि हर पांचवें सितारे के चारों ओर कम से कम एक ऐसा ग्रह घूमता है जिस पर जीवन के लिए उपयुक्त वातावरण मौजूद हो सकता है। इसका मतलब यह है कि आकाशगंगा में हमारी पृथ्वी जैसे अरबों ग्रह मौजूद हो सकते हैं। वैज्ञानिक के मुताबिक, अगर इन में से एक भी ग्रह पर हमारी पृथ्वी जैसा जीवन मौजूद है और वहां भी विकास का स्तर हम जैसा ही है तो उस ग्रह के निवासी धरती से रेडियो संकेत प्राप्त कर सकते हैं और इन संकेतों का जवाब भी दे सकते हैं।
sabhar ; http://hindi.ruvr.ru/

मनुष्यों और पशुओं के बीच संकरण: एक भावी ख़तरा

कई देशों के वैज्ञानिक मनुष्यों और जानवरों के विचित्र संकर तैयार कर रहे हैं, इस प्रकार से तैयार किये गए संकर समाज पर कहर बरपा सकते हैं| पिछले दस वर्षों के दौरान जेनेटिक इंजीनियरिंग में हुई प्रगति ने वैज्ञानिकों और आम आदमी को स्तब्ध कर छोड़ा है| छात्रों के लिये भी नए जीवन रूपों का सृजन आज घर बैठे करना संभव है| अफ़सोस यह है कि क़ानून वैज्ञानिकों के साथ तालमेल रखने में पिछड़ जाता है| जीवन के यह नए रूप वैसे तो गैरकानूनी नहीं हैं, लेकिन उनसे समाज के लिये खतरा हो सकता है| इन नए रूपों की नस्ल पैदा होने की स्थिति में क्या होगा विषय पर आज कोई कुछ नहीं बता सकता है, लेकिन इसके बावजूद भी सारी दुनिया के वैज्ञानिक दुनिया के लिये अपनी नई रचनाएँ प्रस्तुत करने की जल्दी में लगे हुए हैं; ऐसी रचनाएँ जिनकी कल्पना करना भी कुछ समय पहले तक असंभव था| वैज्ञानिकों द्वारा कृत्रिम मानव गुणसूत्र से बनाए गए चूहे इसका एक उदाहरण हैं| इस रचना को एक बड़ी सफलता माना जा रहा है, क्योंकि आशा की जा रही है कि इनसे कई बीमारियों के इलाज के लिये नए रूपों को जन्म दिया जा सकेगा| Lifenews.com के अनुसार विस्कॉन्सिन विश्वविद्यालय के वैज्…

आपकी आत्मा का रंग कैसा है

यह दुनिया रंग-बिरंगी या कहें कि सतरंगी है। सतरंगी अर्थात सात रंगों वाली। लेकिन आत्मा का कोई रंग पता नहीं चला है।

ध्यान, धारणा, समाधि और पूजापाठ से लेकर मृत्यु के बाद वापस शरीर में लौटे लोगों तक आत्मा और परलोक के अनुभव बताते हैं पर उसका रंग कोई नहीं बताता।

अध्यात्म विज्ञान की दिशा में शोध प्रयोग कर रहे कुछ अनुसंधान करने वालों ने इस दिशा में काम शुरु किया है। इस तरह के प्रयोगों में लगे पांडीचेरी के प्रो. के सुंदरम ने कहा है कि आत्मा का भी रंग होता है।

रंगों का विश्लेषण करते हुए प्रो. सुंदरम का कहना है कि मूलत: पांच तरह के रंग ही होते हैं, जैसे काला, सफेद, लाल, नीला और पीला। इनमें भी काला और सफेद कोई रंग नहीं है। रंगों की अनुपस्थिति काला रंग बनता है और सभी रंगों की उपस्थिति सफेद रंग का आभास कराता है।

इस तरह तीन ही रंग प्रमुख हो जाते हैं- लाल, पीला और नीला। अध्ययन और प्रयोगों को आगे बढ़ाते हुए प्रो, सुंदरम और उनके सहयोगियों ने शरीर में मौजूद सात चक्रों का रंग रुप भी खंगाला। चक्रों पर किए प्रयोग के बाद उन्होंने कहा है कि आत्मा का रंग या तो नीला होता है अथवा आसमानी।

नीले रंग को वे थोड़ा निरस्त भ…

ह्यूमन लंग्स लैब में

वैज्ञानिकों ने पहली बार लैब में ह्यूमन लंग्स बनाने में सफलता हासिल की है। मानव शरीर के अंगों के तैयार करने की दिशा में यह एक उत्साहजनक कदम है। हालांकि, इसे इंसान के शरीर में प्रत्यारोपित करने में कई साल का वक्त लगेगा। अनुमान है कि इसमें 12 साल तक का वक्त और लग सकता है। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने मेडिकल के क्षेत्र में यह बड़ी कामयाबी हासिल की है।
यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास मेडिकल ब्रांच की जोआन निकोलस ने कहा कि यह अभी तक एक साइंस फिक्शन रहा है, लेकिन वे इसे वैज्ञानिक तथ्य बनाने की ओर आगे बढ़ रहें हैं। यदि लंग्स काम करने लगें, तो यह बड़ी उपलब्धि होगी। इससे लंग्स ट्रांसप्लांट का इंतजार कर रहे 1,600 अमेरिकियों को बहुत मदद मिलेगी। लैब में तैयार किया गया नया मानव अंग फेफड़ा भी है। इससे पहले श्वांस नली और लीवर तैयार किए जा चुके हैं। लैब में ह्यमून लंग्स ऐसे तैयार: डॉक्टर निकोलस ने बताया कि दो बच्चे जो कार एक्सीडेंट में मारे गए थे। उनके लंग्स भी क्षतिग्रस्त हो गए थे, लेकिन इनमें कुछ स्वस्थ ट्श्यिू भी थे। इनका उपयोग ट्रांसप्लांट किया जाना था। उन्होंने बताया कि लंग्स से सारी सेल्स अलग की और उसके ढांचे क…

ईरान की राष्ट्रीय महिला फुटबॉल टीम में महिलाओं के रूप में अब तक चार पुरुष खिलाड़ी खेल रहे थे

ईरान में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां की राष्ट्रीय महिला फुटबॉल टीम में महिलाओं के रूप में अब तक चार पुरुष खिलाड़ी खेल रहे थे। मामले के खुलासे के बाद अब इन चारों खिलाड़ियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इतना ही नहीं, टीम में वापसी के लिए इनसे एक शर्त भी रखी गई है। शर्त के मुताबिक, अगर ये अपना लिंग परिवर्तन करवाते हैं, तभी इन्हें टीम में वापस जगह मिलेगी।  वहीं, सभी महिला खिलाड़ियों को अब क्लब में शामिल होने से पहले लिंग परीक्षण करवाना होगा। अब खेल के मैदान में आकस्मिक जांच कभी भी की जा रही है। इसका नतीजा ये हुआ है कि सात खिलाड़ियों ने अपना अनुबंध रद्द करा दिया है।  प्रतिबंध लगाए गए कुछ खिलाड़ियों में ऐसे हैं, जिनमें कुछ यौन गड़बड़ियां हैं। वहीं, कुछ खिलाड़ियों में महिलाओं और पुरुष दोनों के लक्षण हैं। 


ईरानी फुटबॉल फेडरेशन की मेडिकल टीम के प्रमुख अहमद हश्मियां ने बताया कि अगर ये खिलाड़ी सर्जरी के जरिए अपनी परेशानी खत्म कर लेते हैं या जरूरत के मुताबिक, मेडिकल मदद ले लेते हैं, तो वो फिर से उन्हें महिला फुटबॉल टीम में जगह मिल जाएगी। 

ईरान में समलैंगिकता और शादी से पहले सेक्स पर…

टीना घई एक बेहतरीन कलाकार

पंजाब मे जन्मी टीना घई एक बेहतरीन अदाकारा है इन्होने हिन्दी , पंजाबी , भोजपुरी , राजस्थानी , तेलुगू , तुलु , कन्नड़ , हरयाणवी , बंगाली और अंग्रेजी जैसी भाषाओं में गाया है विभिन्न प्रिंट और टीवी विज्ञापनों में चित्रित किया गया है . इसके अलावा  दुनिया भर में लगभग 400 शो में लाइव प्रदर्शन करने के बाद का गौरव प्राप्त है |. हिन्दी गाने के कई एल्बम यू  ट्यूब  पे उपलब्ध  है  जल्दी ही इनकी कई  फिल्मे  और एल्बम आने वाली है  इतनी बड़ी कलाकार होने के बाद भी  ये फ़ेसबुक  पे अपने  फैन्स  के बीच सहज  संबाद स्थापित  करती है  |,नीचे कुछ फोटोग्राफ्स  उनकी टीना घई डाट काम वेब  से ली गयी है |





























































(डॉ. सोनल मानसिंह)-प्रतिष्ठित भारतीय शास्त्रीय नर्तक

(((जिंदगी के सफर में महिलाओं को कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.....

....नृत्यांगना सोनल मानसिंह, जिन्होंने जिंदगी में बहुत मुश्किल फैसले लिए और मुश्किल दौर से दो.चार भी हुईं। 

....नृत्यांगना सोनल मानसिंह ऐसी शख्सियत हैं जिन्होंने नृत्य के लिए घर छोड़ा सफलता कदम चूमने लगी तभी सड़क हादसे से की वजह से कदम थम गए। लेकिन डॉक्टरों की कड़ी मेहनत अपनी जबरदस्त हिम्मत और आत्मविश्वास की वजह से वह जल्द ही मंच पर थिरकती नजर आईं।
.....शादी के बाद सोनल ने नृत्य के ख़ातिर अपना घर छोड़ा और ख़ानाबदोश की ज़िंदगी अपनाई।
......सोनल के अनुसार पुरुषों की दुनिया में एक महिला और वह भी एक डाँसर का जीना कोई आसान बात नहीं हैं। आप जिसके शिकंजे से बचे। उसी व्यक्ति ने आपको नज़रअंदाज़ करना शुरु कर दिया। मगर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी पहचान बनार्इ।



डॉ. सोनल मानसिंह पद्म विभूषण, एक मशहूर और प्रतिष्ठित भारतीय शास्त्रीय नर्तक, गुरु, कोरियोग्राफर और एक प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता, शोधकर्ता और प्रेरक वक्ता है ।



नृत्यांगना सोनल मानसिंह ऐसी शख्सियत हैं जिन्होंने नृत्य के लिए घर छोड़ा, सफलता कदम चूमने लगी, तभी सड़क…

एक गोभी के एक पौधे में एक साथ 12 फूल निकल आए

महराजगंज (उप्र) : इसे कुदरत का करिश्मा कहें या रासायनिक खादों का बुरा प्रभाव कि एक गोभी के एक पौधे में एक साथ 12 फूल निकल आए, जिसे देखकर लोग चकित हैं। 

क्षेत्र के बावन बुजुर्ग बल्ला स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय के शिक्षक आरके विश्वकर्मा ने अपने घर के पास क्यारी में फूलगोभी की नर्सरी लगाई थी, जिसमें यह अनोखा फूल खिला देख स्कूल के छात्र व अध्यापक चकित रह गए। एक ही तने में एक साथ 12 फूल खिलने की खबर जैसे ही फैली, देखने वालों का तांता लग गया। चर्चा रही कि गोभी के एक पौधे में 12 फूल आना कुदरत का करिश्मा है। (एजेंसी) sabhar :http://zeenews.india.com/

मुक्ति और ईश्वर की भक्ति

मुक्ति पाने के लिए खुद को अज्ञानी और बुद्घिहीन क्यों कहते हैं भक्त
ऋषि-मुनियों, संत-महात्माओं तथा भक्तों ने भगवान से अपने अवगुणों को अनदेखा कर शरण में लेने की प्रार्थना की है। संत कवि सूरदास प्रभु मेरे अवगुण चित न धरोपंक्तियों में विनयशीलता का परिचय देते हुए शरणागत करने की प्रार्थना करते हैं, तो तुलसीदास प्रभु राम से पूछते हैं, काहे को हरि मोहि बिसारो।

संत पुरंदरदास खुद को दुर्गुणों का दास बताते हुए ईश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर कहते हैं- कूट-कूटकर मुझमें भरे हुए हैं दुर्गुण, नहीं किया पर तुमने मेरा छिद्रान्वेषण।गुरु नानकदेव जी मात्र भगवान श्रीराम को विपत्ति का साथी बताते हुए कहते हैं- संग सखा सभि तज गए, कोई न निबाहियो साथ, कहु नानक इह विपत्ति में, टेक एक रघुनाथ।
रवींद्रनाथ ठाकुर गीतांजलि में प्रार्थना करते हैं, भगवान अपनी चरण-धूलि के तल में मेरे शरीर को नत कर दो। मेरे समस्त अहंकार को अपने दिव्य नैनों के जल में डुबो दो। मैं चाहता हूं चरम शांति, अपने प्राणों में तुम्हारी परम कांति। तुम मेरे हृदय कमल दल में वास कर जाओ।

महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला निखिल वाणी में प्रभु से याचना करते…

दर्द से कामुकता का रिश्ता

हाथों को बांधकर शरीर को पूरे नियंत्रण में ले आना और फिर जो चाहे करना, मारना कभी चांटों से, कभी चाबुक से, कभी चमड़े की बेल्ट से, यहां तक की पॉलिथीन से मुंह को ऐसे दबाना कि सांस ना आए, लेकिन पम्मी को, ये सब कामोत्तेजक लगता है. पम्मी के मुताबिक संभोग के दौरान उत्तेजित करने जैसे अनुभव से ये कहीं आगे है, क्योंकि ये दर्द के लेन-देन और ताकत की अभिव्यक्ति का अनोखा खेल है जो कामुकता को एक नए मुकाम तक ले जाता है.
दिल्ली की एक निजी कंपनी में काम कर रहीं, 28 वर्षीय पम्मी कहती हैं, “हम अधीन रहना पसंद करते हैं, इस तरह के बर्ताव से हमें दर्द नहीं होता, बल्कि हम आनंद लेते हैं और हमारे पार्टनर को हर वक्त ज़िम्मेदारी से सोचना होता है कि कहीं हद पार ना हो जाए और मुझे चोट ना लगे.”इस जीवनशैली में एक शख्स ‘डॉमिनेन्ट’ यानि प्रधान है और दूसरा ‘सबमिसिव’ यानि अधीन है. पहले का हक है अपना ज़ोर आज़माना और दूसरे की ज़िम्मेदारी है उस शक्ति प्रदर्शन को बर्दाश्त करना. इस जीवनशैली के बारे में जानकारी बढ़ाने के लिए पम्मी 'द किंकी कलेक्टिव' नाम की संस्था से जुड़ीं है. ये संस्था भारत के विभिन्न हिस्सों में जाकर …

टोपी से तैयार कीजिए धुन

शास्त्रीय संगीत की शिक्षा के दौरान मैं ख़ाली पन्ने को घूरती रहती और उम्मीद करती कि कोई शॉर्टकट हो जिससे मैं "सोच" कर संगीत को पेज पर उतार सकूँ. अब मैं कंप्यूटर पर संगीत तैयार करती हूं और पिक्सल्स के ऊपर पेंसिल घुमाती रहती हूं.
तो प्लीमथ विश्वविद्यालय में एक लैपटॉप को घूरते हुए मैं एक ऐसी तकनीक की जांच करने जा रही हूं जो मेरे संगीत के सपने को हक़ीक़त बनाने का वादा करता है.लेकिन मैं हमेशी ही सोचती थी कि एक दिन मैं सीधे अपने दिमाग से अपने संगीतमय विचारों को रिकॉर्ड कर पाउंगी. यह परियोजना प्रोफ़ेसर एडुआर्डो मिरांडा के दिमाग़ की उपज है. वह एक संगीतकार हैं जिनकी जीविका का साधन संगीत न्यूरोटेक्नॉलॉजी है. दिमाग से कंप्यूटर में एक ब्रेन कैप के माध्यम से उनका उपकरण दिमाग में चल रहे विचारों को पढ़ता है और उन्हें संगीत में बदल देता है. उनकी योजना चार लोगों के दिमाग से विचार लेकर उन्हें एक साथ पिरोने की है. इसी के आधार पर उनकी नवीनतम संगीत रचना तैयार होगी - जिसका नाम, एक्टिवेटिंग मेमोरी है. इस संगीत रचना को इसी हफ़्ते के अंत में प्लीमथ में होने वाले साल 2014 पेनिसुला आर्ट्स कंटप्रेरी म्य…

'कामसूत्र' का विवादास्पद शूटिंग का वीडियो

शर्लिन चोपड़ा की नई फिल्‍म कामसूत्र कितनी बोल्ड है इस बात का अंदाजा इस वीडियो से लगता है। 

रुपेश पॉल निर्देशित फिल्‍म कामसूत्र 3डी फिल्म इसी साल मई में रिलीज होने जा रही है। 

यह फिल्म अपने विषय और प्रजेंटेशन दोनों में ही बोल्ड है। फिल्‍म के दो ट्रेलर आ चुके हैं। ट्रेलर से इस बात की झलक मिल चुकी है कि यह फिल्‍म कैसी होगी। 



लेकिन हम आपको इस फिल्‍म की मेकिंग दिखा रहे हैं। मेकिंग देखकर आप चौंक जाएंगे। इस मेकिंग में शर्लिन चोपड़ा बिल्कुल बोल्ड अंदाज में दिख रही हैं। साथ ही बेडरूम दृश्यों को फिल्‍माना भी दिखाया गया है। 

यह फिल्‍म अपनी रिलीज के पहले ही विवादों में है। इस फिल्‍म से जुड़ी पिक्स लीक करने के आरोप में फिल्‍म के निर्देशक रूपेश पॉल शर्लिन को बाहर का रास्ता दिखा चुके हैं। 
saabhar : amarujala.com
देखिए कामसूत्र की मेकिंग 

http://www.youtube.com/watch?feature=player_embedded&v=heVknCvJqyc#t=19

मिल गया असली भूत माही गिल को

अभिनेत्री माही गिल को असली का भूत मिल गया। यह मामला एक फिल्‍म की शूटिंग का है। 

कई बार अच्छे कलाकार फिल्‍म के पात्र में इतनी गहराई से उतर जाते हैं कि उन्हें हर वक्त उस पात्र में ही खोए रहने का भ्रम बना रहता है। 

लगता है कि कुछ ऐसा ही अभिनेत्री माही गिल के साथ हुआ। माही गिल इन दिनों एक भुतही फिल्‍म की शूटिंग कर रही हैं। 

'गैंग्स ऑफ घोस्ट' नाम वाली इस फिल्‍म की इन दिनों आऊटडोर शूटिंग हो रही है। फिल्‍म का निर्देशन सतीश कौशिक कर रहे हैं। 

हुआ यूं कि एक रात माही गिल को एहसास हुआ कि उन्हें प्रेत की कोई छाया दिखाई दी। फिर क्या वह जोर-जोर से चीख उठीं। 

रात के सन्नाटे में माही की इस चीख से हड़कंप मच गया। लोग वहां पहुंचे तो पता चला कि माही को वहां कोई भूत दिख गया। 

इसके पहले कुछ ऐसा ही किस्सा बिपाशा बसु के साथ ऊटी में हो चुका है। वह उस समय 'आत्मा' फिल्म की शूटिंग कर रहीं ‌थीं। sabhar:http://www.amarujala.com/

सत्यवादी को मृत्यु भी नहीं डराती

जाबालि मुनि ने भगवान श्रीराम से एक बार प्रश्न किया, राष्ट्र किस तत्व पर आधारित है?

प्रभु श्रीराम ने कहा, तस्मांत सत्यात्मकं राज्यं सत्ये लोकः प्रतिष्ठितः। अर्थात राष्ट्र सत्य पर आश्रित रहता है। सत्य में ही संसार प्रतिष्ठित है। हे मुनि, जिस राष्ट्र की नींव सत्य और संयम पर आश्रित है, उसका शासक व प्रजा हमेशा सुखी रहते हैं। असत्य-कपट का सहारा लेने वाले कभी संतुष्ट व सुखी नहीं रह सकते।

भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को सत्य का स्वरूप समझाते हुए कहा था, सत्य सनातन धर्म है, सत्य सनातन ब्रह्म है। चारों वेदों का सार रहस्य सत्य है।

ऋग्वेद में कहा गया है कि सत्कर्मशील व्यक्ति को सत्य की नौका पार लगाती है। दुष्कर्मी, संयमहीन व छल-कपट करने वाले व्यक्ति की नौका मझधार में डूबकर उसके जीवन को निरर्थक कर देती है।

टॉलस्टाय ने लिखा है, जिसने सत्य का संकल्प ले लिया और सदाचार का मार्ग अपना लिया, वही हर प्रकार के भय, कष्टों से मुक्त रहकर ईश्वर व मनुष्यों का प्रिय बन सकता है। सत्यवादी को मृत्यु भी नहीं डराती।

महर्षि चरक ने आचार रसायन में कहा है, सत्यवादी, क्रोध रहित, मन, कर्म व वचन से अहिंसक तथा विनय के पालन से मानव श…

श्रद्धा से मनुष्य को प्रेम, रस और आनंद मिलता है

सभी धर्मशास्त्रों में श्रद्धा का महत्व प्रतिपादित किया गया है। कहा गया है कि श्रद्धा-निष्ठा के साथ किया गया प्रत्येक सत्कर्म फलदायक होता है। इसलिए कहा गया है कि श्रद्धां देवा यजमाना वायुगोपा उपासते। श्रद्धां हृदस्य याकूत्या श्रद्धया विन्दते वसु। अर्थात देवता, संतजन, विद्वान, यजमान, दानशील, बलिदानी सब श्रद्धा से कर्म की उपासना करते हैं, इसलिए सुरक्षित रहते हैं।

श्रद्धा को सुमतिदायिनी, कामायनी, कात्यायनी बताकर उसकी उपासना की गई है। वैदिक ऋचा में कहा गया है, हे परमप्रिये श्रद्धे, तेरी कृपा से मैं ऐसा व्यवहार करूं, जिससे संसार का उपकार हो सके। हे सुमतिदायिनी श्रद्धे, मैं जो कुछ आहुति, दान व बलिदान करूं, उसे उपयोगी और सर्वहितकारिणी बना।

हे कामायनी श्रद्धे, मेरी अनासक्त कामना है कि मेरे कृत्यों से दान और बलिदान की प्रेरणा उदित होती रहे। हृदय से जब श्रद्धा की उपासना होती है, तब अनंत ऐश्वर्य अनायास ही प्राप्त होने लगते हैं।

ऋग्वेद में कहा गया है, श्रद्धया अग्निः समिध्यते। यानी श्रद्धा से ऐसी अग्नि प्रदीप्त होती है, जो मनुष्य को प्रेम, रस, आनंद और अमृत प्रदान कर उसका लोक-परलोक सफल बनाती है। श्रद्…

कृष्ण ने ऐसा काम किया कि राधा और गोपियां कृष्ण से दूर-दूर रहने लगी

भगवान श्री कृष्ण और राधा का प्रेम अनोखा है। दोनों एक दूसरे के हृदय में रहते हैं। लेकिन एक बार श्री कृष्ण ने ऐसा काम किया कि राधा और गोपियां कृष्ण से दूर-दूर रहने लगी। राधा ने कृष्ण से यह भी कहा कि मत छूना मुझे।

इस घटना के बाद कृष्ण ने जो किया उसकी निशानी आज भी गोवर्धन पर्वत की तलहटी में कृष्ण कुंड के रुप में मौजूद है। इस कुंड के निर्माण का कारण राधा कृष्ण यह संवाद माना जाता है जब राधा ने कृष्ण को अपना स्पर्श करने से मना कर दिया था।

इसकी वजह यह थी कि, भगवान श्री कृष्ण ने कंश के भेजे हुए असुर अरिष्टासुर का वध कर दिया था। अरिष्टासुर बैल के रुप में व्रजवासियों को कष्ट देने आया था। बैल की हत्या करने के कारण राधा और गोपियां कृष्ण को गौ का हत्यारा मान रही थी।

कृष्ण ने राधा को खूब समझाने का प्रयास किया कि उसने बैल की नहीं बल्कि असुर का वध किया है। कृष्ण के समझाने के बाद भी जब राधा नहीं मानी तो श्री कृष्ण ने अपनी ऐड़ी जमीन पर पटकी और वहां जल की धारा बहने लगी।

इस जलधारा से एक कुंड बन गया। श्री कृष्ण ने तीर्थों से कहा कि आप सभी यहां आइए। कृष्ण के आदेश से सभी तीर्थ राधा कृष्ण के सामने उपस्थिति हो गए।…

कृष्णन आज देश इन्हें हीरो कहता है

नई दिल्ली. क्या कोई ऐश्वर्य भरी जिंदगी छोड़ सड़क की धूल छानने की चाहत रखना चाहेगा? क्या कोई अपने सपनों को रौंदना चाहेगा? अधिकांश जवाब 'ना' ही मिलेगा। मगर, ऐसा हुआ है। नारायण कृष्णन। जी हां, आज के समय का बड़ा चेहरा। ये वही शख्सियत हैं, जिन्होंने ऐश्वर्य भरी जिंदगी छोड़कर कांटों भरी राह को गले लगाया है। 2002 में हुए एक वाकये ने मदुरई (तमिलनाडु) निवासी कृष्णन की जिंदगी हमेशा के लिए बदल कर रख दी। आज देश इन्हें हीरो कहता है 2003 में कृष्णन ने 'अक्षय' नाम से मुनाफा न कमाने वाले ट्रस्ट की शुरुआत की। अब उनके जीवन का एक ही मकसद है, गरीब भूखे पेट न सोए। कृष्णन के मेहमानों की लिस्ट में गरीब, बेसहारा और बेघर लोग शामिल हैं। 34 वर्षीय कृष्णन अब तक मदुरई के एक करोड़ से भी ज्यादा लोगों को सुबह का नाश्ता, दोपहर का भोजन और रात का खाना खिला चुके हैं। वह नि:स्वार्थ भाव से जनसेवा में लगे हुए हैं। पूरे देश को उनपर गर्व है। लेकिन उनकी यही जनसेवा अब मुद्दा बन चुकी है। मुद्दा, गरीबी-अमीरी के बीच के खाई का। मुद्दा, देश में लगातार बढ़ रहे रईसों और उसी अनुपात में बढ़ती गरीबी का। क्योंकि भारत को अ…