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शुक्रवार, 7 फ़रवरी 2014

2013विज्ञान की दुनिया की तस्वीर

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1-जर्मनी के लिपिज में स्थित मैक्स प्लांक इंस्टीट्यूट फॉर इवोल्यूशनरी एंथ्रोपॉलॉजी के शोधकर्ताओं ने चार लाख साल पुराने इंसान की जांघ की हड्डियों में डीएनए का पता लगाया. यह हड्डी स्पेन में हड्डियों का गड्ढ़ा के नाम से मशहूर जगह से लाई गई थी. यहां से कम से कम 28 लोगों के अवशेष मिले हैं.

2-वैज्ञानिकों के मुताबिक फ़रवरी में रूस के आसमान में एक बहुत बड़ा क्षुद्रग्रह जलकर नष्ट हो गया. इस क्षुद्रग्रह ने दो बार पूरी दुनिया का चक्कर लगाया. एक हज़ार से अधिक लोग उस समय घायल हो गए जब 17 मीटर लंबा-चौड़ा और दस हज़ार टन भारी टुकड़ा चेल्याविंस्क के ऊपर जल गया.


3-चेल्याविंस्क इलाक़े के चेबराकुल की एक झील से इस क्षुद्रग्रह का एक बड़ा टुकड़ा बरामद किया गया.चेबराकुल की झील से जिस टुकड़े को स्थानीय अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने निकाला था, उसे चेल्याविंस्क के स्थानीय संग्रहालय में प्रदर्शित किया गया.

4-यूरोप के सैटेलाइट प्लांक सर्वेयर ने आसमान में सबसे 'पुराना प्रकाश' दिखाने वाला एक मानचित्र पेश किया. इसके पैटर्न के आधार पर ब्रह्मांड की उत्पत्ति के 'बिग बैंग' सिद्धांत की पुष्टि हुई.


5-लंदन में क्रॉसरेल के लिए हो रही खुदाई के दौरान अचानक कुछ शव मिले. इनके 14वीं शताब्दी में पूरे यूरोप में महामारी की वजह से मरे लोगों का शव माना जा रहा है. माना जाता था कि लंदन के बाहरी इलाक़े में एक क़ब्रगाह बनाई गई थी लेकिन वह जगह वास्तव में कहाँ है, यह एक रहस्य था.

6-विज्ञान पत्रिका 'साइंस' में प्रकाशित एक अध्ययन से कुछ चौंकाने वाली बातें सामने आईं. जापान में एक शोधकर्ता ने एमआरआई स्कैन का इस्तेमाल कर लोगों के सपनों को पढ़ने का दावा किया.कुछ स्वयंसेवक जब स्कैनर में सोते थे तो एक टीम उन पर नज़र रखती थी और बाद में उन्हें सवालों की एक सूची देती थी. इसके बाद शोधकर्ताओं ने वैसी तस्वीरों की कल्पना की, जिन्हें इन लोगों ने सोते समय देखा. उनकी भविष्यवाणी क़रीब 60 फ़ीसदी तक सही थी.


7-बीबीसी न्यूज़ ने मई में पहली बार यह ख़बर दी कि थ्री डी प्रिंटर से तैयार दुनिया की पहली बंदूक से अमरीका में सफलतापूर्वक फ़ायर किया गया है. टेक्सस के ऑस्टिन के फ़ायरिंग रेंज में एक विवादित समूह ने यह फ़ायरिंग की. बाद में अमरीकी सरकार ने इस बंदूक का ब्लूप्रिंट इंटरनेट से हटाने की अपील की.

8-आईबीएम के शोधकर्ताओं ने कॉपर (तांबे) की एक सतह पर एक अणु को लुढ़काकर दुनिया की सबसे छोटी फ़िल्म बनाई.

9-खगोलशास्त्रियों ने किसी ग्रह की परिक्रमा कर रहे उपग्रह के रंग का निर्धारण पहली बार किया. दुनिया इसे एचडी 189733बी के नाम से जानती है. यह गहरे नीले रंग का है, वातावरण में सिलिकेट की बारिश की वजह से ऐसा शायद हुआ हो, जिससे नीला प्रकाश निकलता है.

10-लंदन में अगस्त में हुए एक संवाददाता सम्मेलन में लैब में बना दुनिया का पहला बर्गर चखा गया. इसके लिए वैज्ञानिकों ने नीदरलैंड के एक संस्थान से एक गाय की कोशिका निकालकर उसे मांसपेशियों की एक पट्टी के रूप में विकसित किया था.

11-प्रोफ़ेसर पीटर हिग्स को स्कॉटहोम में आयोजित एक कार्यक्रम में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार दिया गया. एडिनबरा विश्वविद्यालय के इस अवकाशप्राप्त प्रोफ़ेसर ने इस पुरस्कार को फ़्रांस्वा इंगलर्ट के साथ हिग्स बोसॉन के सिद्धांत पर किए काम के लिए साझा किया.

12-मार्च में वैज्ञानिकों ने बताया कि अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का अंतरिक्ष यान वॉयज़र-1 अगस्त 2012 में हमारे सूर्य के बाहरी हिस्से हेलियोस्फ़ियर से बाहर चला गया है. सितंबर में वैज्ञानिकों ने इसके पिछले साल तारों के क्षेत्र में चल जाने की पुष्टि की. बहुत से वैज्ञानिकों का मानना है कि 1977 में छोड़ा गया वॉयज़र-1 तारों की दुनिया में पहुँचने वाला दुनिया का पहला मानवनिर्मित उपग्रह है.


13-चीन ने जेड रैबिट नाम के अपने पहले रोबोटिक रोवर को चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक उतार दिया. पिछले 40 साल में यह इस तरह की पहली सफलता है.
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मार्च में वैज्ञानिकों ने बताया कि अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का अंतरिक्ष यान वॉयज़र-1 अगस्त 2012 में हमारे सूर्य के बाहरी हिस्से हेलियोस्फ़ियर से बाहर चला गया है. सितंबर में वैज्ञानिकों ने इसके पिछले साल तारों के क्षेत्र में चल जाने की पुष्टि की. बहुत से वैज्ञानिकों का मानना है कि 1977 में छोड़ा गया वॉयज़र-1 तारों की दुनिया में पहुँचने वाला दुनिया का पहला मानवनिर्मित उपग्रह है.




मार्च में वैज्ञानिकों ने बताया मार्च में वैज्ञानिकों ने बताया कि अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का अंतरिक्ष यान वॉयज़र-1 अगस्त 2012 में हमारे सूर्य के बाहरी हिस्से हेलियोस्फ़ियर से बाहर चला गया है. सितंबर में वैज्ञानिकों ने इसके पिछले साल तारों के क्षेत्र में चल जाने की पुष्टि की. बहुत से वैज्ञानिकों का मानना है कि 1977 में छोड़ा गया वॉयज़र-1 तारों की दुनिया में पहुँचने वाला दुनिया का पहला मानवनिर्मित उपग्रह है.कि अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का अंतरिक्ष यान वॉयज़र-1 अगस्त 2012 में हमारे सूर्य के बाहरी हिस्से हेलियोस्फ़ियर से बाहर चला गया है. सितंबर में वैज्ञानिकों ने इसके पिछले साल तारों के क्षेत्र में चल जाने की पुष्टि की. बहुत से वैज्ञानिकों का मानना है कि 1977 में छोड़ा गया वॉयज़र-1 तारों की दुनिया में पहुँचने वाला दुनिया का पहला मानवनिर्मित उपग्रह है.



चेल्याविंस्क इलाक़े केयूरोप के सैटेलाइट प्लांक सर्वेयर ने आसमान में सबसे 'पुराना प्रकाश' दिखाने वाला एक मानचित्र पेश किया. इसके पैटर्न के आधार पर ब्रह्मांड की उत्पत्ति के 'बिग बैंग' सिद्धांत की पुष्टि हुई. चेबराकुल की एक झील से इस क्षुद्रग्रह का एक बड़ा टुकड़ा बरामद किया गया.

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श्रीदेवी की बेटी जाह्नवी कपूर कितनी बड़ी हो गई है

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देखिए कितनी हॉट हो गई है श्रीदेवी की बेटी जाह्नवी, बॉलीवुड में करेगी एंट्री


टाईम कैसे बीत जाता है पता ही नहीं चलता. अब श्रीदेवी की बेटी को ही देखिए...जाह्नवी कपूर कितनी बड़ी हो गई है. जी हां, अभी तक जाह्नवी की बॉलीवुड में एंट्री तक नहीं हुर्इ, फिर भी आज वह किसी बॉलीवुड एक्ट्रेस से कम नहीं है. हाल ही में जाह्नवी ने अपनी फोटो ट्विटर पर डाली है. जिसमें वह काफी हॉट दिखाई दे रही है. इन फोटोज में वह खूब मस्ती करती नजर आ रही है.वैसे जहां तक श्रीदेवी की बात है तो वो अब तक यही कहती आई हैं कि उनकी बेटी बॉलीवुड में कदम नहीं रखेगी.








टाईम कैसे बीत जाता है पता ही नहीं च






लता. अब श्रीदेवी की बेटी को ही देखिए...जाह्नवी कपूर 


















श्री चाहती हैं कि जाह्नवी पहले अपनी पढ़ाई पूरी करें, लेकिन अगर सूत्रों की मानें तो उन्हें अभी से बॉलीवुड फिल्मों के ऑफर मिलना शुरू हो गए हैं. ऐसे में उम्मीद तो यही की जा रही है कि वो जल्दी ही बड़े पर्दे पर दिखाई देंगी.
sabhar :http://www.samaylive.com/

श्री चाहती हैं कि 
जाह्नवी पहले अपनी पढ़ाई पूरी करें, लेकिन अगर सूत्रों की मानें तो उन्हें अभी से बॉलीवुड फिल्मों के ऑफर मिलना शुरू हो गए हैं. ऐसे में उम्मीद तो यही की जा रही है कि वो जल्दी ही बड़े पर्दे पर दिखाई देंगी.

कितनी बड़ी हो गई है. जी हां, अभी तक जाह्नवी की बॉलीवुड में एंट्री तक नहीं हुर्इ, फिर भी आज वह किसी बॉलीवुड एक्ट्रेस से कम नहीं है. हाल ही में जाह्नवी ने अपनी फोटो ट्विटर पर डाली है. जिसमें वह काफी हॉट दिखाई दे रही है. इन फोटोज में वह खूब मस्ती करती नजर आ रही है.वैसे जहां तक श्रीदेवी की बात है तो वो अब तक यही कहती आई हैं कि उनकी बेटी बॉलीवुड में कदम नहीं रखेगी.

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महिंद्रा ने अपनी एक ऐसी कार लॉन्च की है एक बार फुल चार्ज कर देने के बाद करीब 200 किमी तक जाती है

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1 घंटे चार्ज करके चलेगी 200 किमी, 8 सेकेंड में पकड़ लेगी 100 की स्पीड


महिंद्रा ने अपनी एक ऐसी कार लॉन्च की है जो स्पोर्ट्स के दीवानों के लिए बहुत खास है। महिंद्रा एंड महिंद्रा ने ऑटो एक्सपो में 6 फरवरी को अपनी स्पोर्ट्स कॉन्सेप्ट कार ‘होलो’ लॉन्च की है। यह कार सिर्फ 8 सेकंड के अंदर ही 100 किमी प्रति घंटे की स्पीड पकड़ लेती है। इस कार की अधिकतम स्पीड 160 किमी प्रति घंटे की है। यह कार अगले तीन सालों के अंदर बाजार में लॉन्च हो जाएगी।
यह कार एक इलेक्ट्रिक स्पोर्ट्स कार है जो एक बार फुल चार्ज कर देने के बाद करीब 200 किमी तक जाती है। यह कार सिर्फ 1 घंटे में फुल चार्ज हो जाती है लेकिन अगर इसे 15 मिनट तक ही चार्ज किया जाए तो सिर्फ 25 किमी ही जाएगी। फिलहाल कंपनी की तरफ से इसकी कीमत के बारे में कुछ नहीं कहा गया है। कीमत जानने के लिए हमें इस कार के बाजार में आने का इंतजार करना होगा।
महिंद्रा रेवा इलेक्ट्रिक विहिकल के CEO चेतन मैनी ने कहा कि यह कार एडवांस टेक्नोलॉजी के साथ पूरी तरह से भारत में ही डिजाइन की गई है। कंपनी ने अपनी एक दूसरी इलेक्ट्रिक कार E2O भी लॉन्च की है जो एक इलेक्ट्रिक कार है। यह कार भी स्मार्ट टेक्नोलॉजी के साथ लॉन्च हुई है।
1 घंटे चार्ज करके चलेगी 200 किमी, 8 सेकेंड में पकड़ लेगी 100 की स्पीड
1 घंटे चार्ज करके चलेगी 200 किमी, 8 सेकेंड में पकड़ लेगी 100 की स्पीड

sabhar : bhaskar.com



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उस्ताद बड़े ग़ुलाम अली ख़ां)-भारत के महान गायक व संगीतज्ञ

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Bade Gulam Khan towers over other musicians

उस्ताद बड़े ग़ुलाम अली ख़ां हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के पटियाला घराने के गायक थे।उनकी गणना भारत के महानतम गायकों व संगीतज्ञों में की जाती है। बड़े गुलाम अली खां के मुँह से एक बार ''राधेश्याम बोल'' भजन सुनकर 'महात्मा गाँधी' बहुत प्रभावित हुए थे।  
Suchitra Singh5 Feb 2014



sabhar :http://www.niticentral.com/

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जहां बाप, बेटे और मां सभी हैं बलात्कारी

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केवल फैमिली नहीं ये है रेपिस्ट फैमिली

आपने ज्वाइंट फैमिली, न्यूक्लियर फैमिली के बारे में सुना होगा लेकिन ये कोई ज्वाइंट या न्यूक्लियर फैमिली नहीं बल्कि रेपिस्ट फैमिली है।जिसमें बाप से लेकर बेटे तक, सभी बलात्कारी हैं। बाप ने 30 साल में करीब दर्जन भर से ज्यादा औरतों को अपना शिकार बनाया है। खुद तो वो इस अपराध में लिप्त था ही उसने अपने बेटों को भी इसमें शामिल कर लिया। इतना ही नहीं इस घर की औरत जो इन बच्चों की मां है, पूरा सहयोग करती थी।

मां भी कम नहीं

इस परिवार की औरत को पिछले दिनों सजा सुनाई गई है। उस पर एक महिला को धमकी भरी फोन काल्‍ करने का आरोप है। ये वो ही महिला है जिसके साथ उसके पति ने बलात्कार किया था।

51 वर्षीय डेबोराह बेबिक ने पीड़िता को देर रात फोन किया और उससे कहा कि अगर उसने पुलिस के सामने उसके पति की पहचान की तो वो उसे मार डालेगी। लेकिन पीड़िता ने हिम्मत दिखाई, जिसकी वजह से डेबोराह को भी हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया है।

स्टोक ऑन ट्रेंट क्राउन कोर्ट में सुनवाई के दौरान पता चला कि इस दौरान इस महिला ने अपने पति के पास आठ लड़कियां पहुंचाई। जिनके साथ वो रेप कर सके।

जेल में है पति

मिलान फिलहाल जेल में है। पिछले साल सितंबर में उसे जेल भेज दिया गया। गुनाह कुबूल करते हुए उसने कहा कि वो 22 लड़कियों के साथ रेप कर चुका है। चार के साथ उसने बलात्कार की कोशिश की। पिछले 30 सालों से वो लगातार औरतों को अपने वहशीपन का शिकार बना रहा है। sabhar :http://www.amarujala.com/

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कृत्रिम हाथ असली अंग जैसा अहसास

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यह पहली बार हुआ है जब किसी विकलांग को नकली हाथ में संवेदना का एहसास हुआ है"
प्रोफ़ेसर सिल्वेस्त्रो मिकेरा
इटली में डेनमार्क के एक व्यक्ति को सर्जरी के बाद ऐसा हाथ लगाया गया है जो उसकी बाजू के ऊपरी हिस्से की नसों से जुड़ा है.
प्रयोगशाला में हुए परीक्षण में उन्हें आंख पर पट्टी बांधकर चीजें थमाई गईं और इस हाथ की मदद से वह इन चीजों के आकार और कड़ेपन को जानने में सफल रहे.डेनिस आबो ने एक दशक पहले आतिशबाज़ी में अपना हाथ गंवा दिया था. उन्होंने इस बायोनिक हाथ को 'अद्भुत' बताया है.
इस बारे में साइंस ट्रांसलेशनल मेडिसिन ने विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है.
एक अंतरराष्ट्रीय दल ने इस शोध परियोजना में हिस्सा लिया था, जिसमें इटली, स्विटरज़रलैंड और जर्मनी के रोबोटिक्स विशेषज्ञ शामिल थे.

परियोजना

"इकोल पॉलीटेक्नीक फ़ेडेरेल डी लुसाने और स्कूओला सुपीरिओर सेंट अन्ना, पीसा के प्रोफ़ेसर सिल्वेस्त्रो मिकेरा ने कहा, "यह पहली बार हुआ है जब किसी विकलांग को नकली हाथ में संवेदना का अहसास हुआ है."स बायोनिक हाथ में न केवल एडवांस वैज्ञानिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है बल्कि ऐसे इलेक्ट्रॉनिक्स और सॉफ्टवेयर लगाए गए हैं जो मस्तिष्क को संदेश भेजते हैं.
मिकेरा और उनकी टीम ने इस कृत्रिम हाथ में ऐसे संवेदक लगाए जो किसी चीज को छूने पर उसके बारे में सूचना देते हैं.
कम्प्यूटर एल्गोरिदम के इस्तेमाल से वैज्ञानिकों ने इलेक्ट्रिकल संकेतों को एक ऐसी उत्तेजना में बदला जिसे संवेदी तंत्रिकाएं समझ सकें.
रोम में ऑपरेशन के दौरान मरीज़ के बाजू के ऊपरी हिस्से की तंत्रिकाओं में चार इलेक्ट्रोड जोड़े गए. ये इलेक्ट्रोड कृत्रिम हाथ की उंगलियों के संवेदकों से जुड़े थे जो छूने और दवाब के फीडबैक को सीधे मस्तिष्क को भेजते हैं.

प्रयोगशाला

कृत्रिम हाथ
36 साल के आबो ने एक महीने प्रयोगशाला में बिताए. प्रयोगशाला में पहले तो इस बात की जाँच की गई कि इलेक्ट्रोड काम कर रहे हैं या नहीं. फिर यह देखा गया कि ये बायोनिक हाथ से पूरी तरह जुड़े हैं या नहीं.
उन्होंने कहा, "मज़ेदार बात यह है कि इसके सहारे मैं मुझे बिना देखे ही छूने से चीज़ों का अहसास हो जाता है. मैं अंधेरे में भी इसका इस्तेमाल कर सकता हूं."
यह बायोनिक हाथ अभी शुरुआती चरण में है और सुरक्षा कारणों से आबो का एक और ऑपरेशन करना पड़ा ताकि संवेदकों को हटाया जा सके.
बायोनिक हाथ को विकसित करने वाली टीम अब इस प्रयास में जुटी है कि इसे छोटा कैसे बनाया जाए ताकि इसे घर में इस्तेमाल किया जा सके.
वैज्ञानिकों का कहना है कि इस हाथ के व्यावसायिक इस्तेमाल में एक दशक तक का समय लग सकता है. उनका कहना है कि इससे भविष्य में कृत्रिम अंगों का रास्ता साफ़ होगा जो वस्तुओं और तापमान का पता बता सकेंगे.

बहरहाल आबो को उनका पुराना कृत्रिम हाथ मिल गया है और वह भविष्य में इसे बायोनिक हाथ से बदलने को तैयार हैं. sabhar :http://www.bbc.co.uk/

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बिना चाबी लगाए हो जाती है स्टार्ट :एक्सिडेंट से पहले हेलमेट करता है अलर्ट

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एक्सिडेंट से पहले हेलमेट करता है अलर्ट, बिना चाबी लगाए हो जाती है स्टार्ट

यूं तो ऑटो एक्सपो 2014 में बहुत सारी बाइक्स लॉन्च हुईं लेकिन 137.8cc की UM कंपनी की RENEGADE DUTY बाइक बहुत खास है। इस बाइक में ब्लाइंड स्पॉट मिरर है जो एक खास तरह की टेक्नोलॉजी है। इसमें एक सेंसर होता है जो आपको एक्सिडेंट से पहले अलर्ट कर देता है। हालांकि इस बाइक की कीमत कितनी होगी और यह मार्केट में कब तक आ जाएगी इसका कोई खुलासा नहीं किया गया है।
सेंसर की बात करें तो इसका हेलमेट इसे और भी खास बनाता है। हेलमेट किसी भी होने वाले एक्सिडेंट की सूचना उससे थोड़ी देर पहले ही दे देगा। जैसे ही कोई रुकावट आपकी बाइक के बहुत नजदीक होगी तो हेलमेट से आपको इसकी सूचना तो मिलेगी ही साथ ही फ्रंट मिरर के किनारे पर लगी लाइट भी जलेगी। इसके साथ मिलने वाली मास्टर चाबी भी इसके फीचर्स को बढ़ा देती है जिसे लगाए बिना ही गाड़ी को सेंसर की मदद से अनलॉक किया जा सकता है। यह ऐसी बाइक है जो बहुत सारे फीचर्स लेकर आई है।
एक्सिडेंट से पहले हेलमेट करता है अलर्ट, बिना चाबी लगाए हो जाती है स्टार्ट

इस गाड़ी के साथ जो हेलमेट मिलता है उसमें स्पीकर और सेंसर लगे होते हैं जो यह अलर्ट मैसेज देने का काम करते हैं। जैसे ही कोई दूसरी गाड़ी इस बाइक के नजदीक आती है तो सेंसर उसे अलर्ट कर देता कि एक्सिडेंट होने वाला है। हेलमेट में लगे स्पीकर की मदद से यह सूचना ड्राइवर को दे दी जाती है और ड्राइवर स्थिति को संभाल लेता है। इतना ही नहीं, इस हेलमेट में दाईं और बाईं तरफ लाइट्स लगी होती हैं जो गाड़ी के इंडिकेटर के साथ कम्यूनिकेट करती हैं। अगर आप दायां इंडिकेटर ऑन करते हैं तो हेलमेंट में दाईं साइड की लाइट भी जलने लगती है। ठीक ऐसा ही बांए इंडिकेटर के साथ भी होता है।
एक्सिडेंट से पहले हेलमेट करता है अलर्ट, बिना चाबी लगाए हो जाती है स्टार्ट

इसके हेलमेट में स्पीकर के साथ-साथ ब्लूटूथ कनेक्टिविटी की सुविधा भी है जिससे आप अपना फोन इसके साथ कनेक्ट कर सकते हैं। इन स्पीकर्स के जरिए आप गाने सुन सकते हैं और फोन भी रिसीव कर सकते हैं। इसमें एक डिलिवरी सिस्टम ट्रेलर है जो एक तरह की ट्रॉली है। इस ट्रॉली को फोल्ड किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर इसे खोलकर इसमें 50 किलो तक सामान भी रखा जा सकता है। इस ट्रॉली में टायर लगा रहता है जिसकी मदद से इसे आराम से खोलकर ट्रॉली का रूप दिया जा सकता है। यह ट्रॉली बड़े आराम से इसके बैकसाइड में एडजस्ट हो जाती है। 
एक्सिडेंट से पहले हेलमेट करता है अलर्ट, बिना चाबी लगाए हो जाती है स्टार्ट

इस गाड़ी का बैकबोर्ड आप अपने हिसाब से मोडिफाई कर सकते हैं। बाइक की सीट एडजस्टेबल हैं और साथ ही आरामदायक भी हैं। इतना ही नहीं, इसके साथ एक मास्टर चाबी मिलती है जो सीधे गाड़ी के साथ कम्यूनिकेट करती है। इसे गाड़ी में लगाए बिना ही आप गाड़ी को लॉक या अनलॉक कर सकते हैं। आपकी जेब से ही यह चाबी गाड़ी के साथ कम्यूनिकेट कर लेती है। यह बाइक 137.8cc की है। इसमें 4 स्ट्रोक 1-सिलेंडर इंजन है जो 10.97hp की पावर देता है। अगर बात करें इसकी लंबाई-चौड़ाई की तो इसकी लंबाई 1975mm है और इसकी ऊंचाई 1280mm है। इस बाइक का व्हीलबेस 1350mm का है। इसका फ्रंट ब्रेक ‘डिस्क ब्रेक’ है जबकि पिछला ब्रेक ‘ड्रम ब्रेक’ है। यह 5-स्पीड क्लच गियर बाइक है।

एक्सिडेंट से पहले हेलमेट करता है अलर्ट, बिना चाबी लगाए हो जाती है स्टार्ट

इसका टायर एंटी फ्लैट सीलैंट (Anti Flat Sealant) टायर है जिसमें कील या कांच भी घुस जाए तो कोई फर्क नहीं पड़ता है। मतबल अब गाड़ी पंचर हो जाने की वजह से आपकी गाड़ी का बैलेंस नहीं बिगड़ेगा। आप इस टायर का एक काम गाड़ी को बैलैंस करने का भी समझ सकते हैं।

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नशीली दवा खिलाकर साथ कई बार हुआ था रेप :अमेरिकी रियलटी स्टार फराह अब्राहम

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फराह का दर्द आया सामने: नशीली दवा खिलाकर साथ कई बार हुआ था रेप


अमेरिकी रियलटी स्टार फराह अब्राहम ने सेक्स टेप आने के एक साल बाद दावा किया है कि नशीली दवा खिलाकर उसके साथ कई बार रेप किया गया था। 22 वर्षीय फराह ने इन टच मैगजीन को इंटरव्यू में बताया कि वह कैसे गलत लोगों के बीच में फंस गई थीं। उन्होंने कहा कि यह वह समय था जब वे एडल्ट सेमिनारों में शामिल होती थीं। उस समय वह स्ट्रिप क्लब के प्रमोशन के लिए काम कर रहीं थीं।

रियलटी स्टार ने बताया कि नशीला पदार्थ खिलाकर अंधेरे में उनके साथ कई बार दुष्कर्म किया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि बचपन में भी वह यौनशोषण का शिकार हो चुकी हैं। फराह ने बताया कि यौनशोषण की घटनाएं उनके अंदर हमेशा हीन भावना भरती रहीं। ऐसा लगता था कि वह कभी भी बहुत आकर्षक नहीं हो पाएंगी। इसलिए वह हमेशा इस कमी को दूर करने की कोशिश करती रहीं।
मानसिक रूप से भी कई समस्याओं के चलते वह पिछले एक साल से पुनर्वास केंद्र की मदद ले रहीं हैं। उन्होंने बताया कि उनके सामने अभी कई समस्याएं हैं, लेकिन अब वह बदलाव लाने के लिए कमर कस चुकी हैं।
फराह अब्राहम (31 मार्च 1999) सिर्फ टीवी रियलटी स्टार ही नहीं, बल्कि लेखक, संगीतकर और मॉडल भी हैं। एमटीवी में सीरीज 16 एंड प्रेग्नेंट एंड टीन मॉम की पहली टीन मॉम बनी थीं। फराह ने स्कूल के दिनों के ब्वायफ्रेंड डेरेक अंडरवुड के साथ शादी की थी। वह जब 6 माह की प्रेग्नेंट थीं, तभी 8 अप्रैल 2013 को एक कार दुर्घटना में डेरेक की मौत हो गई। फराह ने यह भी बताया था कि उन्होंने जेम्स डीन के साथ एक एडल्ट फिल्म में काम किया था। उन्होंने बताया कि बेटी का पालन करने में उन्हें बहुत संघर्ष करना पड़ा है।

फराह का दर्द आया सामने: नशीली दवा खिलाकर साथ कई बार हुआ था रेप

फराह का दर्द आया सामने: नशीली दवा खिलाकर साथ कई बार हुआ था रेप


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गुरुवार, 6 फ़रवरी 2014

जवाब दो क्यों कहा 'मेरे साथ सेक्स करो

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इस मामले ने पकड़ा तूल

इस मामले ने पकड़ा तूल

शर्लिन चोपड़ा लगातार विवादों में हैं। कभी फिल्‍म के पिक्स लीक होने के आरोप में तो कभी अपने निर्देशक के साथ झगड़े को लेकर। पिछले दिनों शर्लिन चोपड़ा ने कामसूत्र 3डी फिल्म के निर्देशक रुपेश पॉल पर आरोप लगाया था कि रुपेश ने कहा था कि मेरे साथ सेक्स करो।

अब यह मामला तूल पकड़ने लगा है। इस फिल्‍म के निर्देशक ने शर्लिन पर मानहानि का नोटिस भेज दिया है। अभी शर्लिन की ओर से इस बारे में कोई जवाब नहीं आया है। इस मामले की सुनवाई अब 5 मार्च को होगी।


निर्देशक के खिलाफ एफआईआर

निर्देशक के खिलाफ एफआईआर



इसके पहले शर्लिन चोपड़ा ने इस फिल्म के निर्देशक रुपेश पॉल के खिलाफ एफआईआर लिखवायी थी। शर्लिन ने मुंबई के एक पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराकर आरोप लगाया था कि रुपेश ने फिल्म में उनके अभिनय मेहनताने में से 7 लाख रुपए नहीं दिए हैं।

शर्लिन ने यह आरोप भी लगाया था कि जब उसने रुपेश के साथ सेक्स करने से मना कर दिया तो फिल्म निर्देशक ने उन्हें अनप्रोफेशनल कह कर उसे फिल्म कामासूत्र 3डी से निकालने की बात कही। 

प्रमोशन से हुईं बाहर

कामसूत्र 3डी का मुख्य आकर्षण शर्लिन चोपड़ा हैं। बावजूद इसके वह इस फिल्म के प्रमोशन से बाहर कर दी गईं। अब शर्लिन इस फिल्म से पूरी तरह से दूर हो चुकी हैँ। इस फिल्म को भूल अब वह इन दिनों अपनी नई फिल्म बैडगर्ल की तैयारियों में लग गईं हैं। इस फिल्म को बनाने के दौरान शर्लिन और रूपेश पॉल के बीच कई बार संबंधों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। sabhar :http://www.amarujala.com/

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अदृश्य` पदार्थ चलाएगा आपका कंप्यूटर

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अदृश्य` पदार्थ चलाएगा आपका कंप्यूटर


न्यूयार्क : कंप्यूटर की तकनीक वाले इस युग में चीजें नित सूक्ष्म से सूक्ष्मतर होती जा रही हैं, तथा वैज्ञानिकों के अनुसार आने वाला समय तथाकथित अतिसूक्ष्म `मेटामटीरियल्स` का होगा। किसी पदार्थ को अदृश्य करने के लिए प्रकाश तरंगों की प्रकृति को परिवर्तित कर देने वाले ये मेटामटीरियल्स कंप्यूटर के कार्य भी कर सकते हैं।

अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार, मेटामटीरियल्स आने वाली प्रकाश की तरंगों के आकार को इस तरह परिवर्तित कर सकते हैं, जिनका प्रभाव कंप्यूटर द्वारा किए जाने वाले गणना के समान ही होता है।

अमेरिका के पेंसिलवेनिया विश्वविद्यालय में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के प्रवक्ता नाडेर एंगटा ने बताया, "जैसे ही प्रकाश इस पदार्थ से होकर बाहर आता है, प्रकाश की तरंगों का आकार इस तरह का हो जाता है कि वह गणितीय परिणाम देने वाला हो जाता है।"

शोधकर्ताओं का कहना है कि यह प्रौद्योगिकी चित्रों के साथ कंप्यूटर पर काम करने जैसी प्रक्रियाओं को गति प्रदान कर सकता है। यह शोधपत्र `साइंस` नामक शोध पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

एंगटा ने बताया कि यह प्रौद्योगिकी जटिल गणनाओं में भी सहायक हो सकता है। भविष्य में मेटमटीरियल्स का उपयोग एक से अधिक गणितीय अवकलनों के लिए किया जा सकता है।

अध्ययन में कहा गया है कि कंप्यूटर या मोबाइल में चित्रों को दिखाने के लिए इस्तेमाल होने वाले तरल अणुओं की तकनीकी पर ही मेटामटीरियल्स की कार्य पद्धति आधारित है। (एजेंसी) sabhar : http://zeenews.india.com/

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न टूटने वाला शीशा बनेगा

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अब बनेगा न टूटने वाला शीशा

टोरंटो| क्या आप अपने घर में शीशे से बने सजावटी सामान रखने से डरते हैं क्योंकि आपके शैतान बच्चे इन्हें ज्यादा दिन नहीं टिकने देते? तो अब ऐसा ज्यादा दिनों तक नहीं होगा। भविष्य में नेक्स्ट जेन ग्लास (अगली पीढ़ी का शीशा) बनने जा रहा है जो मुड़ जाएगा लेकिन गिरने पर टूटेगा नहीं।

मैक्गिल यूनिवर्सिटी, कनाडा के इंजीनियरों ने एक तकनीक विकसित की है जो ऐसा शीश्रा बनाती है जो आसानी से मुड़ सकता है और गिरने पर थोड़ा ही खराब होता है। शीशे की मजबूती बढ़ाने की प्रेरणा सीप जैसी प्राकृतिक ढांचों से मिली।

मैक्गिल के मैकेनिकल इंजीनिरिंग विभाग के प्रोफेसर फ्रेंकोइस बाथ्रेलत ने बताया, "घोंघे के गोले लगभग 95 प्रतिशत चाक से बने होते हैं जो इसके शुद्ध रूप में बहुत नाजुक होते हैं।" लेकिन सीप का अंदरूनी भाग सूक्ष्म पट्टियों से बना होता है जो लेगो इमारत ब्लॉक के छोटे रूप की तरह होता है और बहुत मजबूत माना जाता है।

शोधकर्ताओं ने शीशे की स्लाइडों में 3-डी सूक्ष्म दरारों (माइक्रो-कै्रक्स) का तंत्र उत्कीर्ण करने के लिए लेजर का प्रयोग किया। इसके परिणाम चौंकाने वाले थे। शोधकर्ता, गैर उत्कीर्ण स्लाइडों के अपेक्षा, शीशे की स्लाइडों की मजबूती को 200 गुना ज्यादा बढ़ाने में सक्षम थे। सूक्ष्म-दरारों के तंत्र को उत्कीर्ण करने से वे इसे फैलाने और बड़ा करने में दरारों को रोकने में सक्षम थे।

बाथ्रेलत के अनुसार, इससे किसी भी आकार के शाशे की शीट को बढ़ाना आसान होगा। उन्होंने बताया, "हमें पता है कि अब सूक्ष्म-दरारों के पैटर्न का प्रयोग करके हम शीशे या अन्य सामग्रियों को मजबूत कर सकते हैं।"

नेचर कम्युनिकेशन में प्रकशित अध्ययन में कहा गया कि भविष्य में शोधकर्ताओं की मिट्टी के बर्तनों और पॉलिमर्स पर काम करने की योजना है। sabhar :
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बुधवार, 5 फ़रवरी 2014

विदेशी लड़कियों को रेप से बचाने के लिए मजदूर ने दिखाई आम आदमी की ताकत

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विदेशी लड़कियों को रेप से बचाने के लिए अकेले लड़ गया मजदूर

जोधपुर. खुद को गाइड बताकर दो युवक फ्रांसीसी युवतियों को मंडोर की छतरियां दिखाने के बहाने सुनसान इलाके में ले गए। वे युवतियों से दुष्कर्म का प्रयास करने लगे लेकिन वहां काम कर रहे मजदूर पुखराज राजपूत को कहानी समझ में आ गई। उसने दोनों बदमाशों को पत्थर फेंक-फेंक कर पहले भगाया। फिर फोन पर अपने साथियों को सूचना दी। इस बीच दोनों बदमाश सिटी बस में जा छिपे। साथियों ने मंडोर उद्यान के बाहर सिटी बस से दोनों को दबोच लिया। फिर अन्य लोग भी आ जुटे और बदमाशों को पुलिस के हवाले कर दिया। मंडोर थाना पुलिस ने दोनों के खिलाफ दुष्कर्म के प्रयास का मामला दर्ज किया है।

पुलिस के अनुसार दो फ्रांसीसी युवतियां मंडोर उद्यान घूमने आई थीं। वहां बिहार निवासी मुबारक (22) पुत्र शम्मालुदीन व जोधपुर के जीशान खिलजी (21) पुत्र बरकतुल्लाह ने युवतियों से बातचीत कर खुद को गाइड बताया। उन्हें मंडोर की प्राचीन छतरियों का महत्व बताया। युवतियां झांसे में आ गईं।

पुखराज राजपूत, मजदूर ने दिखाई आम आदमी की ताकत

जो पत्थर तोड़कर आजीविका चलाते हैं। उन्हीं पत्थरों को हथियार बनाया और दो विदेशी युवतियों को दुष्कर्म से और शहर को बदनामी से बचा लिया।

युवतियां चिल्लाते हुए भाग रही थीं। पीछे दो युवक थे। एक ठोकर खाकर गिर पड़ी।  मैंने संभाला। वो अंग्रेजी में कुछ बोल रही थीं। मुझे समझ में नहीं आया, लेकिन इतना पता चल गया कि वे मुसीबत में हैं। सोचने का वक्त नहीं था। मैंने पत्थर उठा लिए। बदमाशों पर फेंककर उन्हें भगा दिया। बाद में साथियों को फोन कर दोनों को पकड़ा और पुलिस के हवाले कर दिया।

द पावर ऑफ ए कॉमन मैन, विदेशी लड़कियों के लिए मजदूर अकेले ही लड़ गया
सतीशचंद्र शर्मा, कंडक्टर
जिन्होंने 3 जनवरी 2013 को वोल्वो में यात्रा कर रही महिला से छेड़छाड़ कर रहे बदमाश को पुलिस के हवाले करके ही दम लिया। 
वोल्वो में यात्रा कर रही महिला ने जब बताया कि एक युवक उसे परेशान कर रहा है तो मैंने तय कर लिया था कि उसे सबक सिखाना ही है। उसने रास्ते में भागने की कोशिश भी की लेकिन मैंने उसे अपने पास जबरन बिठाए रखा। जोधपुर पहुंचते ही उसे पुलिस के हवाले कर दिया। 

द पावर ऑफ ए कॉमन मैन, विदेशी लड़कियों के लिए मजदूर अकेले ही लड़ गया

लक्ष्मण चौधरी, टैंकर ड्राइवर
जब 29 अक्टूबर 2011 को पेट्रोल से भरा जलता टैंकर आबादी क्षेत्र से दूर ले गए थे। जान पर खेलकर कई जिंदगियां बचाई।
टैंकर में 12 हजार लीटर पेट्रोल भरा हुआ था। सोचने का वक्त लेने का मतलब था कई जिंदगियों को खतरे में डाल देता। ड्राइविंग सीट संभालने का फैसला किया। मेरी कोशिश थी कि किसी की जान नहीं जाए। ईश्वर ने मेरी कोशिश कामयाब की। मुझे यही सिखाया भी गया था। sabhar : bhsakar.com



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13 साल के बच्चे ने पोर्न देखने के बाद आठ साल की बहन से किया रेप

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13 साल के बच्चे ने पोर्न देखने के बाद आठ साल की बहन से किया रेप
ब्लैकबर्न। ब्रिटिश काउंटी लैंकशायर के ब्लैकबर्न में एक 13 साल के बच्चे ने पोर्न कंटेंट देखकर अपनी आठ साल की बच्ची का रेप कर डाला। बच्चे ने कंप्यूटर गेमिंग कंसोल एक्स-बॉक्स पर पोर्न वीडियो देखने के बाद बहन से रेप किया। 
 
आरोपी किशोर ने पुलिस को बताया कि उसने गेमिंग कंसोल के जरिए अश्लील कंटेंट देखा और बाद में उसे दोहराने का फैसला किया। किशोर के मुताबिक उसने अपनी छोटी बहन को इसलिए निशाना बनाया क्योंकि वह बहुत छोटी थी और वह जल्द ये सब भूल जाती। 
 
कल ब्लैकबर्न मजिस्ट्रेट कोर्ट में किशोर ने अपनी बहन के साथ रेप किए जाने को स्वीकार किया। कानूनी कारणों से आरोपी किशोर की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है और उसे रिश्तेदारों के पास भेज दिया गया है। 
 
रेप क्राइसिस चैरिटी की फियोना एलविन्स के मुताबिक बच्चों द्वारा पोर्नोग्राफी देखना एक गंभीर समस्या और चिंता का विषय बनता जा रहा है। उन्होंने कहा, "किशोर के इस कदम से बच्ची की लाइफ डिस्टर्ब हो जाएगी। उसे सामान्य होने में काफी लंबा समय लग सकता है। किसी और के साथ कभी ऐसा न हो।"
 
एक्स बॉक्स कंसोल बनाने वाली कंपनी माइक्रोसॉफ्ट की ओर से इस घटना पर दुख जताया गया है। कंपनी के मुताबिक, उनके सभी डिवाइसों में पैरेंटियल सिक्युरिटी सिस्टम होता है, जिसके इस्तेमाल से बच्चों के ऑनलाइन कंटेंट से दूर रखा जा सकता है। कंपनी ने दुनियाभर के अभिभावकों से अपील कि है कि वे गेमिंग कंसोल के सिक्युरिटी ऑप्शन का इस्तेमाल करें और अपने बच्चों तक ऐसा कंटेंट न पहुंचने दें।  
 
गौरतलब है कि पिछले साल नवंबर में एक 12 साल के बच्चे ने पोर्न कंटेंट देखने के बाद 10 साल की बहन के साथ रेप किया था। घटना का खुलासा होने के बाद बच्चे को तीन साल के लिए पुनर्सुधार कार्यक्रम में हिस्सा लेने का आदेश दिया गया था। हालांकि इस दौरान उसे माता-पिता के साथ घर पर ही रहने की अनुमति मिल गई थी।   sabhar : bhaskar.com

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पुनर्जन्म लेकर लौटा, कहा फाइनेंस कंपनी के लोगों ने उसकी हत्या करवा दी थी

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एक बारगी इस बात को सुनकर आप हैरान हो सकते हैं कि मरकर भी आत्मा को चैन न मिला। बेचैन आत्मा ने फिर से दूसरा जन्म लिया ताकि वह अपने हत्यारों के खिलाफ गवाही दे सके।

घटना पंजाब के फिरोजपुर जिले के अवोहर क्षेत्र का है। देवेन्द्र पाल बताते हैं कि यहां नौ साल पहले संतोष नामक एक युवक की हत्या हुई थी। हत्यारे निश्चिंत थे कि उनके गुनाह का भेद नहीं खुलेगा लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था।

संतोष ने राजस्थान के हनुमानगढ़ में दूसर जन्म लिया। माता-पिता ने इसका नाम अवतार रखा। अवतार जब सात साल का हुआ तो इसने अपने पूर्वजन्म के बारे में बताना शुरु किया।

अवतार के पिता सच्चाई जानने के लिए इसे अवोहर लेकर आए। यहां अवतार ने अपने पूर्व जन्म के घर और परिवार के सदस्यों को पहचान लिया। घर में संतोष की तस्वीर को देखकर इसने बताया कि यह तो मैं हूं।

परिवार के सदस्यों ने अवतार की असलियत जानने के लिए कुछ परीक्षाएं भी ली जिसमें अवतार सफल रहा। जब अवतार ने अपने मौत की बात बताई तो सभी हैरान रह गए। इसने कहा कि पैसों की लेन देन को लेकर फाइनेंस कंपनी के लोगों ने उसकी हत्या करवा दी थी। इसके बाद इसकी लाश को रेलवे की पटरी पर फेंक दिया गया था।

फाइनेंस कंपनी के खिलाफ कोर्ट में संतोष की हत्या का केस भी चल रहा था। और हत्या का तरीका वही माना जा रहा था जैसा अवतार ने बताया। अवतार ने फाइनेंस कंपनी के संचालकों के खिलाफ गवाही देने की बात भी कही। sabhar :http://www.amarujala.com

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जहां पैदा होते ही वेश्या बन जाती है लड़की

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चकाचौंध रातों की काली असलियत


चकाचौंध रातों की काली असलियत

भले ही देह-व्यापार को ले‌कर कानून हों लेकिन देश के कई हिस्सों में ये आज भी लाखों लड़कियों का भाग्य है।

वेश्यालय आए कहां से? इस बारे में कई तरह के विचार हैं, जिनमें से ज्यादातर लोगों का यही कहना है कि पहले के समय में इन जगहों पर केवल नाच-गाना ही हुआ करता था। जिसे कला की दृष्टि से देखा जाता था पर समय बीता और कला की जगह इस अभिशाप ने ली।

देश के कई हिस्सों में आज भी कई लड़कियां इस अभिशाप को भुगतने के लिए मजबूर हैं। उन्हीं इलाकों में से एक है कोलकाता का सोनागाछी।

सोनागाछी, मतलब सोने का पेड़।

सोनागाछी, एशिया का सबसे बड़ा रेड-लाइट एरिया

सोनागाछी, एशिया का सबसे बड़ा रेड-लाइट एरिया

सोनागाछी स्लम भारत ही नहीं, एशिया का सबसे बड़ा रेड-लाइट एरिया है। यहां कई गैंग हैं जो इस देह-व्यापार के धंधे को संचालित करते हैं।

इस स्लम में 18 साल से कम उम्र की करीब 12 हजार लड़कियां सेक्स व्यापार में शामिल हैं। फोटोग्राफर सौविद दत्ता हाल ही में यहां गए और उन्होंने वहां की कुछ बेहद चुनिंदा दृश्यों को अपने कैमरे में कैद किया है।

इन तस्वीरों को उन्होंने श्रेणीबद्घ किया है और The Price of a Child नाम दिया है।

फिल्म भी बन चुकी है

फिल्म भी बन चुकी है

यूं तो वेश्यालयों और वेश्याओं पर कई तरह की फिल्में बन चुकी हैं लेकिन आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि कोलकाता के इस रेडलाइट एरिया को विषय बनाकर एक फिल्म भी बनी है। Born Into Brothels नाम की इस फिल्म को ऑस्कर सम्मान भी मिल चुका है। 

दिल भर जाएगा आपका


दिल भर जाएगा आपका

इसे बदनसीबी कहना गलत होगा, क्योंकि ये उससे कहीं आगे है। जिस उम्र में हमारी मां हमें दुनिया की रीति-रिवाज, लाज-शरम सिखाती हैं वहीं यहां कि बच्चियां खुद को बेचना सीखती हैं।

12 से 17 साल की उम्र में ये लड़कियां मर्दों के साथ सोना सीख जाती हैं। उन्हें खुश करना सीख जाती हैं, जिसके बदले उन्हें दो डॉलर यानि 124 रुपए मिलते हैं। इन रूपयों के बदले यहां की औरतें तश्तरी का खाना बनकर मर्दों की टेबल पर बिछ जाती हैं।

नहीं आ सकता कोई बाहरी

नहीं आ सकता कोई बाहरी

इस स्लम में किसी बाहरी व्यक्ति का आना मना है। यहां तक की पत्रकारों और फोटोग्राफरों को भी ये लोग भीतर नहीं आने देते।

दत्ता के अनुसार, ये सब गरीबी, भ्रष्टाचार और अनैतिकता का परिणाम है। यहां की ज्यादातर बच्चियां स्कूल छोड़कर आई हैं और अब देह बेचने का पाठ पढ़ रही हैं।
(daily mail) sabhar :http://www.amarujala.com


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एक अमेरिकी का दावा, येति ढूंढ निकाला इस जीव की तस्वीर जारी की है

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एक अमेरिकी का दावा, हजारों सालों से रहस्य बना येति ढूंढ निकाला

टेक्सास. एक शख्स ने एक अद्भुत जीव को खोज निकाला है। रिक डेयर नाम के इस व्यक्ति का दावा है कि ये दुनिया का अजीब और सबसे बड़े पैरों वाला प्राणी है, जिसे येति के नाम से जाना जाता है। रिक ने बालों वाले इस जीव की तस्वीर जारी की है।
 
उसका दावा है कि 6 सितंबर 2012 को उसने इसके बड़े पंजे को अपने कैमरे में कैद किया है। रिक ने इसका डीएनए टेस्ट कराने की भी बात कही है। रिक ने इस तस्वीर और दावे का गवाह करीब 100 लोगों को बनाया है। अब वह अमेरिका के यात्रा पर जाने की योजना बना रहा है।
 
कौन है येति
 
येति, बिग फुट और ससक्चैच नाम से जाना जाने वाला यह एममैन जीव आज तक दुनिया के लिए हजारों सालों से रहस्यमय बना हुआ है। नेशनल जियोग्राफी से लेकर डिस्कवरी तक इस पर खोज कर चुके हैं। बावजूद इसके यह रहस्य कोई सुलझा नहीं पाया। माना जाता है कि यह हमेशा घने जंगलों और पहाड़ों में रहता है। जितने लोगों ने भी इसे देखा है वह इसे सामान्य आदमी से लंबा, पूरे शरीर बालों से भरा हुआ, ताकतवर और अजीब सी गंध लिए, बड़े पैर और चीखने वाला बताते हैं। 

एक अमेरिकी का दावा, हजारों सालों से रहस्य बना येति ढूंढ निकाला

रिक ने बताया कि एक साल पहले सुअर का गोश्त पाने की लालच में इस अजीब प्राणी की मौत हो चुकी है। नेशनल जियोग्राफिक की रिपोर्ट कहती है कि बर्फ में रखा शरीर कुछ समय बाद पिघलने लगता है। शरीर एक रबर की तरह ही व्यवहार करने लगता है। इस वक्त रिक का मानना है कि उसका बिग फुट वास्तविक है

एक अमेरिकी का दावा, हजारों सालों से रहस्य बना येति ढूंढ निकाला


क्या है दावा
 
रिक का दावा है कि उसने इस बड़े पैरों वाले जीव की तस्वीर उतारी है। उसने बताया है कि ये दुनिया का सबसे बड़ा जीव है। रिक अब इसके शरीर का 3 डी ऑप्टिकल स्कैन कराने की सोच रहे हैं 
एक अमेरिकी का दावा, हजारों सालों से रहस्य बना येति ढूंढ निकाला
इस शख्स का दावा है कि वीडियो फुटेज से ली गई इस तस्वीर में जो दानेदार उभार सामने आ रहा है वही बिगफुट है

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बिल गेट्स की कुर्सी पर बैठेंगे इंजीनियर सत्या नडेला जानिए नौ ख़ास बातें

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कंपनी के संस्थापक और पूर्व चेयरमैन बिल गेट्स ने कहा कि ‘माइक्रोसॉफ्ट को चलाने के लिए उनसे बेहतर कोई नहीं हो सकता.’
माइक्रोसॉफ्ट के नेतृत्व परिवर्तन के इस चक्र में पूर्व सीइओ स्टीव बामर की जगह नडेला ने ली तो, कंपनी के चेयरमैन के तौर पर बिल गेट्स की जगह जॉन थॉम्पसन ले रहे हैं
तकनीकी जगत में ऊंची प्रतिस्पर्धा के बाद भी माइक्रोसॉफ्ट एक अहम कंपनी बनी हुई है. हालांकि कंपनी के सामने चुनौतियां भी बहुत है और इन सभी चुनौतियों से पार पाने के लिए माइक्रोसॉफ्ट ने भरोसा दिखाया है सत्या नडेला पर.
तो कौन हैं सत्या नडेला? आइए जानते हैं उनके बारे में कुछ ख़ास बातें –

1. हाईपर-एजुकेटेड

46 वर्षीय सत्या नडेला का जन्म भारत के हैदराबाद में हुआ और वहीं उनकी प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा हुई. बेगमपेट के हैदराबाद पब्लिक स्कूल में पढ़ाई के बाद नडेला ने मनिपाल यूनिवर्सिटी से सूचना और प्रौद्योगिकी इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. अमरीका जाने के बाद उन्होंने विस्कॉन्सिन यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ साइंस और शिकागो यूनिवर्सिटी से एमबीए की पढ़ाई पूरी की.

2. क्लाउड गुरु

सत्या नडेला को ‘क्लाउड गुरु’ भी कहा जाता है. क्लाउड उस सेवा को कहते हैं जो इंटरनेट पर पूरी तरह से चलती है और उससे संबंधित सेवाएं या कंप्यूटर फाइल इंटरनेट के ज़रिए दुनिया के किसी भी कोने से देखे या प्रयोग किए जा सकते हैं.
माइक्रोसॉफ्ट में काम करते हुए सत्या ने एमएस ऑफ़िस को क्लाउड पर लाने में अहम भूमिका निभाई. माइक्रोसॉफ्ट का कहना है कि ऑफिस 365 उसके सबसे सफल उत्पादों में से एक है. माइक्रोसॉफ्ट की अपनी क्लाउड सेवा ‘अज़ूर’ को भी स्थापित करने में नडेला का महत्वपूर्ण योगदान है.

3. माइक्रोसॉफ्ट में 22 साल

नडेला 1992 में माइक्रोसॉफ्ट से जुड़े और तब से अब तक उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट में कई उत्पादों का नेतृत्व किया.
इनमें से कुछ कंपनी के लिए बेहद लाभकारी साबित हुए, जैसे विंडो सर्वर, डेवलपर्स टूल, अज़ूर और कुछ जो बाज़ार में बहुत अच्छा नहीं कर पाए जैसे ‘बिंग’.

4. माइक्रोसॉफ्ट से पहले सन

क़रीब 22 साल पूर्व माइक्रोसॉफ्ट से जुड़ने से पहले नडेला सन माइक्रोसिस्टम में काम करते थे जिस पर अब ओरेकल का स्वामित्व है.

5. माइक्रोसॉफ्ट के तीसरे सीईओ

सत्या नडेला टेक्नॉलॉजी दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट के 38 वर्षों के इतिहास में तीसरे मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी सीईओ हैं. उनसे पहले ये पद केवल स्टीव बामर और कंपनी के संस्थापक बिल गेट्स के पास था.

6. क्रिकेट की दीवानगी

सत्या नडेला को क्रिकेट पसंद हैं. सत्या के अनुसार जब वो बड़े हो रहे थे तो यह खेल ही उनका जुनून था, वो अपनी स्कूल की क्रिकेट टीम में भी थे.
नडेला कहते हैं कि उन्होंने क्रिकेट से ही टीम भावना और टीम का नेतृत्व करना सीखा.

7. सीखने की भूख

सत्या का कहना है कि जो लोग उन्हें क़रीब से जानते हैं, वो मानते हैं कि मैं नई चीज़ें सीखने का भूखा हूं.
वो कहते हैं, “मैं जितनी किताब पढ़ पाता हूं, उससे अधिक ख़रीदता हूं. जितने ऑनलाइन कोर्स कर पाता हूं, उससे कही अधिक के लिए बुकिंग कर लेता हूं. मेरा विश्वास है कि अगर हम नई चीज़े नहीं सीखेंगे तो हम नया काम भी नहीं कर पाएंगे.”

8. ‘बेटर-हाफ़’

जिस साल नडेला माइक्रोसॉफ्ट से जुड़े उसी साल उन्होंने अपने बचपन की दोस्त अनुपमा से शादी की. अनुपमा और सत्या, दोनों के पिता दोस्त हैं और भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी थे.
सत्या और अनुपमा नडेला के तीन बच्चे हैं जिनमें से दो ‘विशेष ज़रूरतमंद’ हैं. उनका परिवार वॉशिंगटन के बेलेव्यू में रहता है.

9. पगार

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सीईओ के तौर पर सत्या नडेला को 12 लाख डॉलर की सालाना बेस सैलरी दी जाएगी, जो कि उनसे पहले के सीइओ स्टीव बामर की सैलरी से 70 प्रतिशत ज़्यादा है.
हालांकि बोनस और अन्य मुनाफ़े मिलाकर पहले साल उन्हें क़रीब एक करोड़ 80 लाख डॉलर की सैलरी मिल सकती है. sabhar :http://www.bbc.co.uk/
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मंगलवार, 4 फ़रवरी 2014

प्यार की कशिश खींच लाई भारत

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प्यार की कशिश खींच लाई भारत, बेटी की उम्र के लड़के से की अमेरिकी ने शादी

कैलिफोर्निया/हरियाणा। कैलिफोर्निया की एक पार्टी गर्ल अपनी बिंदास लाइफस्टाइल छोड़ भारत के छोटे-से गांव में एक आम जिंदगी जी रही है। इस नई जिंदगी से वह बेहद खुश भी हैं। दरअसल, नाइट क्लब पार्टियों की शौकीन 41 वर्षीय एड्रियाना को सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर मुकेश नाम के शख्स से प्यार हुआ।

वह उम्र में एड्रियाना से 15 साल छोटा है और हरियाणा के एक गांव में रहता है। मुकेश के लिए एड्रियाना ने न सिर्फ अपनी बिंदास लाइफस्टाइल को बाय-बाय कह दिया, बल्कि उन्होंने उससे शादी रचाकर भारत की पारंपरिक गृहिणी की ज़िम्मेदारी भी संभाल ली।

अपने प्यार के लिए एड्रियाना ने अपनी 25 साल की बेटी लूसी कोर्टेज को भी छोड़ दिया। एड्रियाना कहती हैं कि वो मुकेश के साथ बेहद खुश हैं।

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उन्होंने जब मुकेश से शादी करने का फैसला लिया, तो उनके परिवारवाले को गहरा झटका लगा था। एड्रियाना ने बताया कि कुछ लोगों ने कहा कि ये सब एक ऑनलाइन फर्जीवाड़ा है। मुकेश नाम का शख्स असल में है ही नहीं। एड्रियाना कहती हैं कि इन सब बातों से वो बहुत परेशान थीं और आखिरकार जब उन्होंने इंदिरा गांधी एयरपोर्ट पर मुकेश को देखा तो उन्होंने राहत की सांस ली। 
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एड्रियाना का अब नया घर हरियाणा के पानीपत के एक गांव पोप्रन में है, जो शहर से 30 मिनट की दूरी पर स्थित है। जब उन्होंने यहां पहली बार कदम रखा तो यहां की संस्कृति उनके लिए चौंकाने वाली थी। महिलाएं यहां जिस तरह के कपड़े पहनती हैं, वो पहनना उनके लिए बेहद कठिन था। पहली बार एड्रियाना को कठिनाई का एहसास हुआ, लेकिन जल्द ही ये भी महसूस हुआ कि खुश रहने के लिए आकर्षक टायलेट और पावर शावर ही जरूरी नहीं हैं

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शादी के बाद ही एड्रियाना ने अपनी पसंददीदा हाई हिल छोड़कर सैंडिल, साड़ी को अपना लिया और वो एक पारंपरिक बहू के रूप में आ गईं। एड्रियाना बताती है कि गांव में विदेशी मुश्किल से ही देखने को मिलते हैं और वो जब भी बाहर जाती हैं, उन्हें देखने के लिए लोगों की भीड़ लग जाती है। 
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देखते ही देखते एड्रियाना इन चीज़ों की आदी हो गईं। इस तरह के वाकये उन्हें एक सेलिब्रिटी होने का एहसास कराते थे, लेकिन अब लोगों ने उन्हें अपने समाज का हिस्सा मान लिया है। 

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मुकेश टूटी-फूटी अंग्रेज़ी में बात करते हैं, लेकिन अब अपनी पत्नी से वो अंग्रेजी सीख रहे हैं। मुकेश का कहना है कि एड्रियाना एक अच्छी पत्नी हैं। वो घर के सारे काम करती हैं। एड्रियाना को अपना सच्चा प्यार बताते हुए मुकेश कहते हैं कि वो उनसे शादी करके बहुत खुश हैं। 

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अब इस जोड़े की अगली तैयारी अपना परिवार बढ़ाने की है, लेकिन एड्रियाना ने अमेरिका लौटने का विचार छोड़ा नहीं है। एड्रियाना कहती हैं कि अगर यहां अमेरिका की तरह खाना और सुविधाएं हो जाएं तो ये बेहतर होगा। वैसे, वो अपने परिवार के साथ अमेरिका लौट जाना चाहती हैं। हालांकि, एड्रियाना को भारत के लोग बहुत प्यारे हैं और ये उनके लिए दूसरे घर की तरह है। 

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एड्रियाना की बेटी लूसी कोर्टेज़।
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भारत आने से पहले एड्रियाना।


प्यार की कशिश खींच लाई भारत, बेटी की उम्र के लड़के से की अमेरिकी ने शादी


कैलिफोर्निया के नाइट क्लब में एड्रियाना।

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