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सालों बाद खोपड़ी के संस्कार के बाद लड़की की आत्मा को मिली मुक्ति!

वाराणसी. एक ऐसी कहानी जिसका राज मृत लड़की की खोपड़ी से जुड़ा था। बड़े-बड़े तंत्र साधक मृत इंसानों की खोपड़ियों को रखकर आत्माओं का आह्वान करते थे। एक ऐसी ही लड़की की सच्ची दास्तां जिसने एक तांत्रिक के चक्कर में आकर आत्महत्या कर ली थी। कोलकाता की इस लड़की का रहस्य बनारस के शमशान घाट पर मिली खोपड़ी के बाद खुला। महेश बाबू (बदला हुआ नाम) 1950 के आस-पास पुनर्जन्म और मृत आत्माओं की सच्चाई पर तांत्रिकों के साथ रिसर्च में जुटे थे। उन्होंने देखा कि ऐसे तांत्रिक हैं जो मनुष्य की मृत खोपड़ी को रखकर क्रिया द्वारा आत्मा को बुला लेते हैं।  कोलकाता की मृत लड़की की खोपड़ी कैसे पहुंची काशी  तांत्रिक की साधना को कोई झुठला नहीं सकता। इसी को लेकर महेश बाबू अपने शोष कार्य में लगे थे। कई सालों तक महेश और साधक महेंद्र बाबू (बदला हुआ नाम) अलग-अलग खोपड़ियों की आत्माओं से संपर्क साधते रहे। इन दिन शमशान घाट पर विचरण के दौरान दोनों लोगों को एक खोपड़ी मिली। इसके बाद बंद कमरे में रात को साधना शुरू हुई। एक लड़की की रोने की आवाज आने लगी, तभी सामने एक परछाई दिखती प्रतीत हुई। 

आगे जानिए सुमन की आत्मा को कैसे मिली मुक्ति
महेंद्र बाबू ने…