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January 5, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

अमेरिकी किशोर वेटलिफ्टर :उम्र 14 साल लेकिन ताकत उम्र से दोगुनी

शक्तिशाली बनना हर बच्चे का सपना होता है। जैक शेलेनश्लेगर इस सपने के काफी करीब पहुंच चुके हैं। 14 साल के इस बच्चे का चेहरा अभी भी मासूम है, मगर शरीर किसी बॉडी बिल्डर का है। छोटी उम्र में अपने पिता को जिम करते देख इन्हें प्रेरणा मिली। तब से ही जैक ने वर्कआउट शुरू कर दिया। 14 साल की उम्र में यह अमेरिकी किशोर वेटलिफ्टर बन चुका है। वजन उठाने की प्रतिस्पर्धा में जैक अपने आयु वर्ग के कई विश्व रिकॉर्ड तोड़ चुका है। पिछले वर्ष पावरलिफ्टिंग बैंच प्रेस चैंपियनशिप पेनसिल्वेनिया में जैक ने 136 किलोग्राम वजन उठाकर अपनी आयु और वजन के सभी लोगों को काफी पीछे छोड़ दिया। जैक कहता है, पिछले ढाई साल में एक दिन भी नहीं बीता जब उसने ट्रेनिंग नहीं की हो। मुझे अपने पिता से प्रेरणा मिलती है वे सुपर स्ट्रॉन्ग हैं। जैक के ट्रेनर का कहना है यह बच्चा मानसिक रूप से शक्तिाशाली है। यह हार नहीं मानता। जो आंतरिक शक्ति इसमें है वह अधिक उम्र के लोगों में भी नहीं होती। 

sabhar : bhaskar.com

पुनर्जन्म की वैज्ञानिक संभावना

एक न्यूरोसर्जन के पास मौत के अनुभव

डॉ. एबेन अलेक्जेंडर बोस्टन में हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में 25 साल सहित अधिक 15 साल के लिए एक शैक्षिक न्यूरोसर्जन कर दिया गया है. 2008 के नवम्बर में, वह अपने जीवन बदल गया है और उसे वह मानव मस्तिष्क और चेतना के बारे में पता था कि वह सोचा था कि सब कुछ पर पुनर्विचार करने का कारण है कि एक के पास मौत के अनुभव था. एलेक्स Tsakiris के साथ हाल ही में एक साक्षात्कार में, डॉ. एबेन अलेक्जेंडर वह उसे क्या हुआ के लिए किसी भी शारीरिक विवरण के साथ आने में असमर्थ रहा है और मन मस्तिष्क से स्वतंत्र है निष्कर्ष निकाला है कि कैसे बताते हैं. नीचे दिए गए साक्षात्कार के लिए सुनो और पर एक प्रतिलिपि पढ़ें Skeptico.com.

महिला के पास मौत के अनुभव के बाद कैंसर का इलाज


अनीता Moorjani देर चरण के कैंसर के कारण एक कोमा में गिर गई. उसका पति वह (उसके अंगों नीचे बंद थे) जीना 36 घंटे से भी कम था कि डॉक्टरों ने कहा था. सभी जबकि, अनीता, एक के पास मौत के अनुभव हो रहा था उसके शरीर पर लौटने या, तो सबसे उल्लेखनीय चिकित्सा कभी प्रलेखित किया था, उसे अपनी जिंदगी खत्म करने का फैसला नहीं करने का विकल्प …

प्रोफेसर स्वर्णलता तिवारी से मिलकर आपको इस बात यकीन हो जाएगा कि पुनर्जन्म होता है

पुनर्जन्म की बातों पर लोग एक बारगी विश्वास नहीं करते, क्योंकि ऐसी बातें यदा कदा ही होती हैं। लेकिन ऐसा नहीं कि जो इस धरती से गया है वह वापस लौटकर नहीं आता। गीता में भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं ही कहा कि आत्मा अमर है और यह शरीर बदलता रहता है।

लेकिन ऐसा भी नहीं है कि आत्मा को अपने पूर्व जन्म की बातें याद नहीं होती हैं। आत्मा को अपने कई-कई जन्मों की बातें याद रहती हैं। भोपाल के एमवीएम कॉलेज से प्रिंसिपल के पद से रिटायर हुईं प्रोफेसर स्वर्णलता तिवारी से मिलकर आपको इस बात यकीन हो जाएगा कि पुनर्जन्म होता है और आत्मा को कई जन्मों की बातें याद रहती हैं।





इन्होंने अपने पूर्व जन्म के परिवारजनों को पहचान लिया और पिछले जन्म के रिश्तेदारों ने भी इनकी बात को सच माना है। इसलिए पिछले जन्म के रिश्ते भी यह निभा रही हैं।

स्वर्णलता तिवारी का कहना है कि इनका पूर्व जन्म मध्यप्रदेश के कटनी में हुआ था। पिछले जन्म के भाई जब कटनी से मिलने इनके घर भोपाल पहुंचे तो इन्होंने झट से उन्हें पहचान लिया। यह अपने पूर्व जन्म के घर पर गई तो अपने पड़ोसियों को भी बिना किसी दिक्कत के पहचान लिया।

बचपन में यह एक दिन अचानक ही असमिया भ…

कुत्ता जिसने दुनिया को परमाणु युद्ध से बचा लिया

शीतयुद्ध के दौरान सोवियत नेता ख्रुश्चेव और अमरीकी राष्ट्रपति जॉन एफ़ कैनेडी नियमित रूप से पत्राचार कर रहे थे. दोनों देशों के बीच जारी शत्रुता के बीच इन दोनों नेताओं ने उपहारों का लेन-देन भी किया. इन उपहारों में पुशिंका नाम का कुत्ता भी शामिल था, जिसकी माँ लाइका अंतरिक्ष में जाकर जीवित लौटने वाली पहली कुतिया थी. जापान में अमरीका की राजदूत क्लिक करेंकैरोलिन कैनेडी कहती हैं, "मेरी माँ ने मुझे एक मज़ेदार कहानी सुनाई थी." वे करीब पचास साल पहले व्हाइट हाऊस में एक बच्ची के रूप में बड़ी हो रही थीं.
कहां से आया पिल्लाकैरोलिन कैनेडी वियना में आयोजित एक सरकारी भोज के दौरान ख्रुश्चेव के बगल में बैठी थीं. वह ढेर सारी चीज़ों के बारे में लगातार बातें कर रही थीं, उन्होंने कुत्ते स्ट्रेलका के बारे में भी पूछा, जिसे रूस ने अंतरिक्ष में भेजा था. इस बातचीत के दौरान मेरी माँ ने स्ट्रेका के पिल्लों के बारे में पूछा. "पुश्किना काफ़ी आकर्षक और रोयेंदार थी, वास्तव में अपने रूसी नाम के अर्थ की तरह काफी नर्म रोयें वाली थी." कैरोलिन कैनेडी, जॉन एफ़ कैनेडी की बेटी कुछ महीनों बाद मेरे घर एक पिल्…

'ॐ' के प्रणव नाम से जुड़ी शक्तियों, स्वरूप व प्रभाव के गहरे रहस्य

सनातन धर्म और ईश्वर में आस्था रखने वाला हर व्यक्ति देव उपासना के दौरान शास्त्रों, ग्रंथों में या भजन और कीर्तन के दौरान 'ॐ' महामंत्र को कई बार पढ़ता, सुनता या बोलता है। धर्मशास्त्रों में यही 'ॐ' प्रणव नाम से भी पुकारा गया है। असल में इस पवित्र अक्षर व नाम से गहरे अर्थ व दिव्य शक्तियां जुड़ीं हैं, जो अलग-अलग पुराणों और शास्त्रों में कई तरह से उजागर हैं। खासतौर पर शिवपुराण में 'ॐ' के प्रणव नाम से जुड़ी शक्तियों, स्वरूप व प्रभाव के गहरे रहस्य बताए हैं। अगली स्लाइड्स पर क्लिक कर जानिए शिवपुराण के अलावा अन्य धर्मग्रंथों की मान्यता व विज्ञान के नजरिए से 'ॐ' बोलने के शुभ प्रभाव क्या हैं-  
शिवपुराण में प्रणव यानी  'ॐ' के अलग-अलग शाब्दिक अर्थ, शक्ति और भाव बताए गए हैं। इनके मुताबिक-   - प्र यानी प्रपंच, न यानी नहीं और व: यानी तुम लोगों के लिए। सार यही है कि प्रणव मंत्र सांसारिक जीवन में प्रपंच यानी कलह और दु:ख दूर कर जीवन के सबसे अहम लक्ष्य यानी मोक्ष तक पहुंचा देता है। यही वजह है कि ॐ को प्रणव नाम से जाना जाता है।  - दूसरे अर्थों में प्रनव को 'प्र&#…

इंसानी दिमाग़ के रहस्य

आंखों से ज्यादा देख सकता है मस्तिष्क
नए अध्ययन के मुताबिक एक जटिल तस्वीर को देखने के लिए दृष्टि के मुकाबले मस्तिष्क द्वारा प्रकाश के बिन्दुओं का विश्लेषण करने की क्षमता ज्यादा महत्वपूर्ण है।

वर्जिनिया विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि मक्खी के लार्वा की महज 24 फोटोरिसेप्टर वाली आंखें पर्याप्त मात्रा में प्रकाश या फिर तस्वीरों का इनपुट भेजती हैं जिन्हें मस्तिष्क विश्लेषित कर तस्वीरों में बदल देता है।

अनुसंधानकर्ता बेरी कोड्रोन ने कहा, ‘यह दृष्टि के प्रति हमारी समझ को बढ़ाता है। यह बताता है कि देखने के लिए विजुअल इनपुट इतना महत्वपूर्ण नहीं हो सकता है जितना कि उसके पीछे काम करने वाला मस्तिष्क। इस मामले में तो मस्तिष्क बहुत कम मात्रा में मिले विजुअल इनपुट से भी काम चला सकता है।’ इन अनुसंधान के परिणाम ‘नेचर कम्युनिकेशंस’ नामक पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं। (भाषा)
इटली के वैज्ञानिकों ने आखिरकार मस्तिष्क के उन हिस्सों का पता लगाने में कामयाबी हासिल कर ली है। जहाँ से पारलौकिक ज्ञान उत्पन्न होता है। इससे यह बात संभवतः प्रमाणित हो गई है कि मस्तिष्क के कुछ विशेष हिस्सों से ईश्वरीय ज्ञान की…

सौर ऊर्जा चार्जिंग गैजेट्स

इन दिनों गैजेट्स की बढ़ती लोकप्रियता और बढ़ते प्रयोग के कारण इनकी चार्जिंग में भी काफी ऊर्जा की खपत होने लगी है. अगर आप चाहें तो अपने गैजेट्स को चार्ज करने के लिए ग्रीन चार्जिंग यानी वैकल्पिक स्रोतों का प्रयोग कर सकते हैं. इसी काम के लिए कुछ कमाल के गैजेट्स बाजार में मौजूद हैं. ऊर्जा के वैकल्पिक साधनों का प्रयोग करके जहां आप पर्यावरण संरक्षण में योगदान देंगे वहीं आपको कहीं भी और किसी भी समय अपने गैजेट्स को चार्ज कर सकने की स्वतंत्रता मिल जाती है. इस प्रकार के चार्जर आपके पास हों तो आपको बिजली न होने या घर से बाहर होने या यात्रा पर होने पर बैटरी लो हो जाने पर अपने मोबाइल फोन आदि गैजेट्स को चार्ज करने में कभी कोई दिक्कत नहीं आती. सोलर बैग गैजेट्स को चार्ज करने के लिए सौर ऊर्जा का प्रयोग करने के लिए सोलर बैग्स से बढिय़ा और कुछ नहीं हो सकता. इन बैग्स के सामने की ओर एक फ्लैक्सी सोलर पैनल लगा होता है यानी सूर्य की रोशनी में चलते-फिरते समय बिल्ट इन 7.2 वाल्ट की लिथियम आयन बैटरी में सौर ऊर्जा जमा होती रहती है. इसमें अपना अन्य जरूरी सामान रखने के अलावा इसके साथ आने वाले यूएसबी, केबल एवं एडैप्टर्…

भारतीय महिलाएं धूम्रपान करने में अमेरिका के बाद विश्व में दूसरे स्थान पर हैं।

न्यूयार्क : कौन नहीं चाहेगा कि महिलाएं हर क्षेत्र में विकास करें, लेकिन हाल ही में आए एक अध्ययन में भारत की महिलाओं ने जिस क्षेत्र में विकास किया है उसे शायद ही कोई सराहे, और वह है धूम्रपान। एक शोध पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक भारतीय महिलाएं धूम्रपान करने में अमेरिका के बाद विश्व में दूसरे स्थान पर हैं। 

अध्ययन के अनुसार, वैश्विक स्तर पर जहां धूम्रपान करने वाली महिलाओं की संख्या में पिछले तीन दशकों में सात फीसदी का इजाफा हुआ, वहीं भारत में धूम्रपान करने वाली महिलाओं की संख्या में 200 फीसदी से भी अधिक का इजाफा हुआ है। 1980 में भारत में जहां 53 लाख महिलाएं धूम्रपान करती थीं, वहीं 2012 में यह संख्या बढ़कर 1.21 करोड़ हो चुकी है। 

भारत में हालांकि पुरुषों में भी धूम्रपान करने की लत में पिछले तीन दशकों में काफी तेजी से इजाफा हुआ है। भारत में तीन दशक पहले जहां धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों की संख्या 7.45 करोड़ थी, वहीं आज लगभग 11 करोड़ व्यक्ति धूम्रपान की लत के शिकार हैं, जिसमें महिलाएं भी शामिल हैं। अमेरिका हालांकि इस बीच तंबाकू सेवन से छुटकारा पाने वालों में सबसे आगे रहा, बावजू…