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सोमवार, 8 सितंबर 2014

अब खुद ही रिपेयर हो जाएंगे डैमेज दांत

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अब खुद ही रिपेयर हो जाएंगे डैमेज दांत

लंदन। ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक ईजाद की है, जिससे दांत की सड़न के बाद ड्रिलिंग और फीलिंग जैसे झमेलों से छुटकारा मिल सकता है। हर साल दुनियाभर में करीब 2.3 बिलियन लोगों को दांतों की समस्या से जूझना पड़ता है। 
 
ब्रिटिश रिसर्चरों ने एक ऐसी तकनीक का आविष्कार किया है, जिससे सड़े हुए कैविटी वाले दांत अब खुद-बखुद रिपेयर हो जाएंगे। यह शोध लंदन के किंग्स कॉलेज में किया गया, जहां इस नेचरल रिपेयर के लिए इलेक्ट्रिकल करंट का इस्तेमाल किया गया।
 
इस ट्रीटमेंट की खोज करने वाले वैज्ञानिकों की मानें तो यह अनोखा ट्रीटमेंट तीन वर्षों के भीतर आम लोगों तक पहुंच जाएगा। इस ट्रीटमेंट को दो हिस्सों में बांटा गया है। पहले स्टेप में दांत के बाहरी लेवल इनामेल पर मौजूद सडऩ को हटाया जाता है। दूसरे स्टेप में डैमेज दांत के भीतरी हिस्से में हल्के से इलेक्ट्रिक करंट की मदद से मिनरल डाल दिया जाता है। 
 
दर्द से मिलेगा छुटकारा
 
यह मौजूदा प्रॉसेस की तरह तकलीफदेह नहीं है, जिसमें कैविटी भरने से पहले दांत के ऊपर इंजेक्शन लगाया जाता और फिर क्लीनिंग प्रॉसेस में भी दर्द से जूझना पड़ता है। नई डिवाइस में न्यूनतम करंट जैसी सुविधा है। ड्रिल करने की जरूरत नहीं पड़ती है। दांतों के अंदर कैल्शियम और फॉस्फेट मिनरल डाल दिया जाता है, जो नैचुरल तरीके से दांत को रिपेयर करने में मदद करता है। sabhar :http://www.bhaskar.com/

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