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शुक्रवार, 22 अगस्त 2014

जब दिव्य शक्तियां मिलने लगती हैं तब ऐसे अनुभव होते हैं

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तब शरीर में होते हैं ऐसे अनुभव

साधना या सामान्य स्थिति में होने वाले आध्यात्मिक अनुभवों का जिक्र औरों से करना नैतिक दृष्टि से तो गलत है ही, उससे ज्यादा आध्यात्मिक लिहाज से भी नुकसान देह है। योग और भक्तिमार्ग का अध्ययन और प्रयोग कर रही जर्मन साधिका वंदना प्रभुदासी (मूलनाम एडलिना अल्फ्रेड) का कहना है कि साधना के लिहाज से नैतिकता का मूल्य बहुत ज्यादा नहीं है।

महत्वपूर्ण यह है कि आप साधना के मार्ग पर कैसे चल रह हैं। इसीलिए किसी अनुभवी गुरु या साधक के संगी साथी का परामर्श उपयोगी साबित होता है।

साथ साधना कर रहे व्यक्तियों के अनुभवों का जिक्र करते हुए एडलिना ने शुरुआती दस अनुभव ऐसे बताए हैं जो अध्यात्म मार्ग पर बढ़ने के सूचक भी हो सकते हैं और किसी विकार के लक्षण भी। इन अनुभवों में ध्यान के समय भौहों के बीच पहले काला और फिर नीला रंग दिखाई देना एक सामान्य अनुभव है।

शरीर के निचले हिस्से पर जहां रीढ की हड्डी शुरु होती है, स्पंदन का अनुभव, सिर में शिखास्थान पर चींटियां चलने जैसा लगना, कपाल ऊपर की तरफ खिंचने जैसा लगना आदि भी इसी तरह के अनुभव है।
ऋषिकेश के एक आश्रम में 1980 के आसपास गुरु के सान्निध्य में साधना करती रही एडलिना ने एक अनुभव का जिक्र किया। गुरु एक साधारण संन्यासी थे। उनके पास साधक स्तर के लोग ही आते थे। एडलिना या वंदना प्रभुदासी उनकी कुटिया से करीब तीन किलोमीटर दूर पर ठहरी हुई थी। साधना के दौरान अनुभव हुआ कि मेरुदंड के पास आथार केंद्र में भंवर की गति से कोई शक्ति हिलोरें ले रही है।

कोई तीन सप्ताह तक ध्यान के समय ऐसा अनुभव होता रहा। एडलिना को लगा कि यह साधना में सफल होते जाने का लक्षण है। और साधकों, सिद्घों और योगग्रंथों में भी ऐसा पढ़ा था। गुरु से इस अनुभव का जिक्र किया तो उन्होंने कुछ सेकंडों तक आंखो में झांका और कहा कि यह वात विकार है बेटी। औषधि उपचार से ठीक हो जाएगा। एडलिना को इससे थोड़ी निराशा तो हुई पर गुरु ने जो कहा था, वह सही पाया।

वाकई में उपचार के बाद एडलिना की शिकायत दूर हो गई। नए साधको का सावझान करते हुए एडलिना का कहना है किसी भी अनुभूति पर पुस्तकों के आधार पर या अपने आप निर्णय लेने से बचना चाहिए। बेहतर है कि गुरु के बताए साधन को किया जाते रहे। अच्छे बुरे जो भी अनुभव हों उन्हें किसी अनुभवी साधक या गुरु को ही बताएं। उनसे मदद लें। यह सुविधा नहीं मिल रही हो तो चुपचाप योग भक्ति का अभ्यास करते रहें। sabhar :http://www.amarujala.com/


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