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गुरुवार, 24 जुलाई 2014

घटती आबादी का जवाब रोबोट

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बाल धोने से लेकर पैर दबाने तक, घर का काम से लेकर अंतरिक्ष को मापने तक, जापान में रोबोट अब आम जिंदगी का हिस्सा बनने लगे हैं. अब जल्द ही वहां की बूढ़ी होती जनसंख्या की देखभाल रोबोट करेंगे.
बोलने वाला रोबोट किरोबो
एक नए शोध में जापान के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि नर्सिंग सेक्टर में करीब दो करोड़ लोगों की जरूरत होगी क्योंकि जापान के लोग बूढ़े हो रहे हैं. 2012 में इस सेक्टर में काम कर रहे लोगों की संख्या करीब 1.5 करोड़ थी.
देखभाल और नर्सिंग जैसे कामों को कम लोग पसंद करते हैं क्योंकि यह मेहनत का काम है. अकसर कर्मचारी इस तरह के कामों को छोड़ देते हैं क्योंकि बड़े बूढ़ों को उठाने और उनकी मदद करने में वे खुद बीमार हो जाते हैं. साथ ही जापान में कम बच्चे पैदा हो रहे हैं और बेहतर स्वास्थ्य की वजह से लोगों की उम्र बढ़ रही है. इस संकट को टालने के लिए जापान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक स्कीम तैयार की है जिसमें बड़े बूढ़ों की मदद के लिए रोबोट लगाए जाएंगे.
केयर होम में मदद
नवंबर में 15 कंपनियों के इंजीनियरों और एक्सपर्टों ने 10 नर्सिंग होम में प्रयोग किए. इनके मालिकों से रोबोट में निवेश करने को कहा गया. होकाईडो बुंकयो विश्वविद्यालय के माकोतो वातानाबे ने कहा, "यह बात साफ है कि आने वाले सालों में कर्मचारियों की कमी होगी और यह एक अच्छा जवाब है, खास कर ऐसे वक्त में जब जापान को आर्थिक परेशानियां हो रही हैं."
अस्पताल के लिए

लेकिन वातानाबे कहते हैं कि यह बहुत हैरानी वाली बात नहीं कि रोबोट अब नर्सिंग में भी आ गए हैं क्योंकि जापानी 1970 की दशक में कार बनाने में रोबोट का इस्तेमाल कर चुके हैं, "अब जापान इस सेक्टर में भी रोबोट को लगाने में पहले नंबर पर है." जापान में खास बूढ़े लोगों को ध्यान में रख कर रोबोट बनाए जा रहे हैं.
कम्यूनिकेशंस एंड्रॉयड
मिसाल के तौर पर होस्पी रीमो जिसे इस वक्त बनाया जा रहा है. यह उन लोगों के लिए है जो बिस्तर से हिल नहीं सकते. इनमें और डॉक्टरों के बीच संपर्क में होस्पी रीमो मदद कर सकता है. एंड्रॉयड रोबोट के चेहरे का भाव खुश करने वाला होता है. वह खुद चल फिर सकता है और वह हाई डेफनिशन तस्वीरों के जरिए संपर्क करता है.
पैनासोनिक ने इस बीच एक ऐसे रोबोट का आविष्कार किया है जो लोगों के बाल धोता है. हेडकेयर रोबोट के हाथों में 24 अंगुलियां हैं और वह बिलकुल मनुष्य की तरह बालों को धो सकता है. शैंपू लगाने से पहले रोबोट के दो हाथ मनुष्यों के सर को नापते हैं और तय करते हैं कि सर के कौन से हिस्से में कितना दबाव डालना है.
जापानी डॉक्टरों ने ऐसा सूट भी बनाया है जिससे कमजोर से कमजोर मरीज भी चल फिर सकता है. इस रोबोट को कपड़े की तरह पहना जा सकता है. वैसे तो इस रोबोट सूट का आविष्कार जापान के किसानों के लिए किया गया लेकिन अब बूढ़े और कमजोर लोग भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं. इस सूट में जोड़ों की जगह खास मोटर लगे हैं. पीठ, घुटनों और कंधों पर लगे मोटरों से मरीज को ताकत मिलती है. रोबोट सूट का वजन करीब 25 किलो है जो एक कमजोर मरीज के लिए काफी भारी हो सकता है लेकिन वैज्ञानिक इसका वजन कम करके दो साल में इसे बाजार में लाना चाहते हैं. इस वक्त एक सूट का दाम करीब 7,000 डॉलर है लेकिन वैज्ञानिक इसे कम करके 2,000 डॉलर तक लाना चाहते हैं.
बेबी रोबोट नोबी से वैज्ञानिक बच्चों पर और शोध कर सकेंगे

हर काम के लिए रोबोट
सेहत ही नहीं, बल्कि अंतरिक्ष में भी रोबोट काम आते हैं. अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन आईएसएस में 13 इंच का रोबोट जापानी एस्ट्रोनॉट कोइची वाकाता का साथ देते हैं. फुकुशिमा दाइची परमाणु प्लांट में रोबोट रेडियोधर्मी इलाकों में जाकर वहां की तस्वीरें वैज्ञानिकों को भेजते हैं. जापान में कला में भी रोबोट दिख रहे हैं. जापानी नाटककार ओरीजा हिराता ने आंटोन चेकोव के नाटक "तीन बहनें" में एक रोबोट से एक्टिंग कराई थी. एनईसी कॉर्प ने कहा है कि वह जल्द ही घर में इस्तेमाल किया जाने वाला रोबोट ला रहा है जिसमें कैमरा, माइक और सेंसर होगा और जो लोगों से बात कर सकेगा.
बूढ़े लोगों के लिए शायद आराम हो लेकिन टोकिया के मेइजी गाक्विन विश्वविद्यालय में पढ़ा रहे टॉम गिल कहते हैं कि उन्हें यह बात परेशान करती है कि आदमी की जगह रोबोट बुढ़ापे में उनका ख्याल रखेंगे, "मुझे यह दुखी और अकेला सा कर देता है."
रिपोर्टः जूलियन रायल/एमजी
संपादनः ए जमाल

sabhar :DW.DE

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