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साल में एक बार खुलता है नागचंद्रेश्वर महादेव मंदिर, नागदेव के होते हैं दर्शन!

साल में एक बार खुलता है नागचंद्रेश्वर महादेव मंदिर, नागदेव के होते हैं दर्शन!

इंदौर/उज्जैन.हिंदू धर्म में सदियों से नागों की पूजा करने की परंपरा रही है। हिंदू परंपरा में नागों को भगवान का आभूषण भी माना गया है। भारत में नागों के अनेक मंदिर हैं, इन्हीं में से एक मंदिर है उज्जैन स्थित नागचंद्रेश्वर का। इसकी खास बात यह है कि यह मंदिर साल में सिर्फ एक दिन नागपंचमी पर ही दर्शनों के लिए खोला जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन नागदेव स्वयं मंदिर में मौजूद रहते हैं। नागपंचमी 1 अगस्त को है। ऐसे में 31 जुलाई की रात 12 बजे नागचंद्रेश्वर महादेव मंदिर के पट खुलेंगे तथा 1 अगस्त की रात 12 बजे तक दर्शन होंगे। नागचंद्रेश्वर के दर्शन को आने वाले आम श्रद्धालु रात 10.30 बजे तक ही दर्शन की लाइन में लग सकेंगे।

डेढ़ से दो घंटे में दर्शन : नागपंचमी पर ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर में प्राचीन श्री नागचंद्रेश्वर महादेव के सामान्य एवं वीआईपी मार्ग से श्रद्धालु के लिए प्रशासन ऐसी व्यवस्था कर रहा है कि डेढ़ से दो घंटे में दर्शन हो जाएं। वर्ष में एक बार खुलने वाले नागचंद्रेश्वर महादेव मंदिर में दर्शन के लिए इस बार भी प्रशासन को देशभर से करीब दो लाख से अधिक श्रद्धालु के उमडने की संभावना है। प्रशासक जयंत जोशी ने बताया कि इस बार ऐसी व्यवस्था की जा रही है कि आम एवं वीआईपी दोनों ही प्रकार के दर्शनार्थियों को डेढ़ घंटे से दो घंटे में दर्शन कराया जा सके।

रात 12 बजे खुलेंगे पट : नागपंचमी महापर्व पर विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर के शिखर पर स्थित प्राचीन श्री नागचंद्रेश्वर महादेव के गुरुवार-शुक्रवार की मध्य रात 12.00 बजे पट खुलेंगे और परंपरा अनुसार पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े के महंत भगवान नागचंद्रेश्वर महादेव का प्रथम पूजन करेंगे। पूजन के बाद मंदिर के पट आम श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए जाएंगे।

नाग आसन पर शिव-पार्वती के दर्शन : नागचंद्रेश्वर मंदिर में श्रद्धालु 11वीं शताब्दी की अद्भुत प्रतिमा के दर्शन करेंगे। इसमें फन फैलाए नाग के आसन पर शिव-पार्वती बैठे हैं। महानिर्वाणी अखाड़े के प्रतिनिधि महंत रामेश्वर दास महाराज ने बताया नागपंचमी पर इस प्रतिमा के दर्शन के बाद श्रद्धालु नागचंद्रेश्वर महादेव के दर्शन करेंगे। कहते हैं यह प्रतिमा नेपाल से यहां लाई गई थी। उज्जैन के अलावा दुनिया में कहीं भी ऐसी प्रतिमा नहीं है। ऐसी मान्यता है कि नागपंचमी के दिन खुद नागदेव मंदिर में मौजूद रहते हैं।

मनमोहक प्रतिमा है नागचंद्रेश्वर की : उज्जैन स्थित ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर के सबसे ऊपरी तल पर बने इस मंदिर के दर्शन करने लाखों लोग यहां नागपंचमी के दिन पहुंचते हैं। नागचंद्रेश्वर के दर्शनों के लिए एक दिन पहले ही यहां श्रद्धालुओं को लंबी कतारें लग जाती हैं। मंदिर में प्रवेश करते ही दाईं ओर भगवान नागचंद्रेश्वर की मनमोहक प्रतिमा के दर्शन होते हैं। शेषनाग के आसन पर विराजित शिव-पार्वती की सुंदर प्रतिमा के दर्शन कर श्रद्धालु स्वयं को धन्य मानते हैं। यह प्रतिमा मराठाकालीन कला का उत्कृष्ट नमूना है। यह प्रतिमा शिव-शक्ति का साकार रूप है।

गतवर्ष 2.5 लाख भक्तों ने किए थे दर्शन : भगवान श्री नागचंद्रेश्वर महादेव के दर्शन के लिए देशभर से ढाई लाख से अधिक श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। 24 घंटे निरंतर दर्शन के बाद रात 12.30 बजे फिर एक वर्ष के लिए मंदिर के पट बंद कर दिए गए थे जो गुरुवार रात 12 बजे खुलेंगे। गेट बंद करने के पूर्व त्रिकाल पूजा के क्रम में रात 8 बजे महाकाल मंदिर की ओर से परंपरागत पूजन की जाती है।
साल में एक बार खुलता है नागचंद्रेश्वर महादेव मंदिर, नागदेव के होते हैं दर्शन!

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