गुरुवार, 17 जुलाई 2014

मस्तिष्क चिप लगाई, लकवाग्रस्त हाथ में हुई हलचल


नई दिल्ली। आए दिन तकनीक के ऐसे कारनामे सामने आते हैं, जिन्हें देखकर हर कोई वाह-वाह कर उठता है। अमेरिका के ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी वेक्सनर मेडिकल सेंटर और धर्मार्थ ट्रस्ट बैटेले मेमोरियल इंस्टीट्यूट के संयुक्त प्रयासों से शोधकर्ताओं ने चार सालों से लकवाग्रस्त व्यक्ति के हाथों में हलचल पैदा कर दी, वह भी उसके मस्तिष्क के पूर्ण नियंत्रण के साथ।
23 वर्षीय इयान बर्कहार्ट का शरीर चार साल पहले लकवाग्रस्त हो गया था। इसके बाद से ही वह अपने हाथों का इस्तेमाल करने में अक्षम हो गया था। शोधकर्ताओं ने एक बेहद छोटे चिप न्यूरोब्रिज को इयान के मस्तिष्क में लगाकर इस कारनामे को अंजाम दिया। यह न्यूरोब्रिज प्रभावित क्षेत्र को पार करते हुए मस्तिष्क के संकेतों को सीधे इयान की मांसपेशियों तक पहुंचा देता है। न्यूरोब्रिज को तैयार करने में वैज्ञानिकों को दस साल का वक्त लगा। इयान के हाथ को इस इलाज के लिए तैयार करने में भी लंबा वक्त लगा और फिर तीन घंटे के ऑपरेशन के जरिए चिप को उसके दिमाग में लगा दिया गया। इयान ने कहा, 'यह एक स्वप्निल सा अनुभव है। मैं यह स्वीकार कर चुका था कि अब मैं कभी अपने हाथ का इस्तेमाल नहीं कर सकूंगा।'
तकनीक का भविष्य :
संभव है कि आने वाली सदी में मनुष्य मस्तिष्क में चिप लगाकर अपनी मेमोरी कैपेसिटी ब़़ढा सके। कहीं ज्यादा तेजी से गणनाएं कर सके। ऐसे चिप या साधन मनुष्य को स्मार्ट रोबोट या कंप्यूटर से कहीं ज्यादा स्मार्ट बना देंगे। तमाम चिप्स की मदद से हमारा अपना शरीर सीधे इंटरनेट, संचार के साधनों या मशीनों से जुड़़कर उनसे व्यवहार करने और कमांड के आदान--प्रदान में सक्षम हो सकेगा।
भविष्य के रोबोटिक अंग
बायोनिक आंख :
एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के माध्यम से जन्म से अंधा व्यक्ति भी देखने में सक्षम हो पायेगा।
हड्डी उगाने की तकनीक :
यूसीबी--1 नामक प्रोटीन के जरिए अब नई हड्डी के ब़़ढाव को अपने तरीके से नियंत्रित कर सकते हैं।
पोर्टेबल पेंट्रियाट :
ये किसी व्यक्ति के ब्लड शुगर और इंसुलिन को शरीर की जरूरतों के हिसाब से एडजस्ट करने में सक्षम होगा।
इलेक्ट्रॉनिक जीभ :
इसकी मदद से ये पता चल सकेगा कि जो खाद्य पदार्थ है, उसका स्वाद कैसा होगा और इसमें कौन से तत्व, विटामिन, वसा और प्रोटीन की मात्रा कितनी है।
नए कृत्रिम अंग :
नैनो और बायोटेक्नोलॉजी के विकास के साथ कोशिकीय और कृत्रिम अंग विकसित किए जा सकेंगे, जो हमारे शरीर के संवेदी प्रणाली के साथ असरदार ढंग से जु़़डकर काम करेंगे। sabhar :http://www.jagran.com/

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