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मंगलवार, 24 जून 2014

क्रियायें जो आपके मस्तिष्क को दें लाजवाब शक्तियां

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दिमाग को बनायें ताकतवर
अगर आपका मस्तिष्‍क यानी दिमाग मजबूत है तो आप बड़ी से बड़ी मुश्किलों को आसानी से सुलझा सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि शरीर के साथ-साथ दिमाग को भी ताकतवर बनायें। कई ऐसी युक्तियां हैं जिनके जरिये आप अपनी याद्दाश्‍त क्षमता को बढ़ा सकते हैं, ये तरीके बहुत ही आसान हैं। तो अभी से अपने दिमाग को मजबूत बनाने वाली क्रियायें शुरू कीजिए।

भविष्‍य के बारे में न सोचें
भविष्‍य की चिंता बहुत अधिक न करें, अपने वर्तमान में ही खुश रहने की कोशिश कीजिए। कई लोग अपने भविष्‍य को लेकर बहुत चिंतित रहते हैं और इस कारण वे अपने वर्तमान को भी दांव पर लगा देते हैं। वर्तमान में खुश रहने की कोशिश कीजिए। क्‍योंकि भविष्‍य को लेकर चिंतित रहने से तनाव होता है और याद्दाश्‍त कमजोर होती
संगीत का जादू
संगीत में जादू होता है। संगीत न केवल मनोरंजन के लिए होता है बल्कि दिमाग को शुकून भी देता है, तनाव से राहत दिलाता है। इसलिए जब भी मौका मिले अपना पसंदीदा गीत सुनने की कोशिश कीजिए। आप ऑफिस में भी काम के साथ-साथ अपना पसंदीदा गाना सुन सकते हैं
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समस्‍याओं को हल निकालिये
कठिनाइयां और चुनौतियां व्‍यक्ति के जीवन का अहम हिस्‍सा हैं, इन्‍हें देखकर घबराना नहीं चाहिए बल्कि ठंडे दिमाग से सोच-समझकर इनका हल निकालने की कोशिश करनी चाहिए। इससे आपके सोचने और समझने की क्षमता का पता भी चलेगा।
पहेलियों को सुलझायें
सोचने और समझने की क्षमता बढ़ाने के लिए जरूरी है दिमागी कसरत कीजिए। इसके लिए तर्कशक्ति वाले सवालों को हल कीजिए, पहेलियों को सुल‍झाइये, सुडोकू में दिमाग लगाइए। फिर देखिये कैसे आपकी तर्कशक्ति बढ़ती है।
भरपूर नींद भी जरूरी
भरपूर नींद लेने से न केवल बीमारियों से बचाव होता है बल्कि दिमाग भी मजबूत होता है। अगर आप नियमित रूप से 7 से 9 घंटे की सामान्‍य नींद लेते हैं तो तनाव से बचते हैं साथ ही पूरे दिन ऊर्जावान भी बने रहते हैं। भरपूर नींद आपके दिमाग के लिए बहुत जरूरी है

खानपान पर ध्‍यान दीजिए
दिमाग को स्‍वस्‍थ बनाने के लिए जरूरी है पौष्टिक आहार का सेवन कीजिए। सुबह-सुबह बादाम खाने से याद्दाश्‍त बढ़ती है। झींगा मछली भी याद्दाश्‍त बढ़ाता है। गाजर और पालक खाने से भी याद्दाश्‍त बढ़ती
लिस्‍ट जरूर बनायें
चीजों की लिस्‍ट बनाकर रखने से भी याद्दाश्‍त मजबूत होती है। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के प्रोफेसर और कैम्ब्रिज हेल्थ अलाइंस के जेरिएट्रिक्स विभाग के प्रमुख डॉ. अन्ने फैबिनी के अनुसार, “अधिकांश लोग उम्र बढ़ने के साथ थोड़ा ज्यादा भूलने लगते हैं, लेकिन सबसे आसान उपाय ये है कि आप कामों को लिखकर, उनके स्लिप बनाकर रखें, जिससे उन्हें याद रखने में आपको आसानी हो।

पढ़ने की आदत डालें
दिमाग को मजबूत बनाने के लिए जरूरी है पढ़ने की आदत डालिये। किसी चीज को बार-बार पढ़ने से वो आसानी से याद हो जाती है और पढ़ने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपका ज्ञान भी बढ़ता है। image source - getty
ध्‍यान लगायें
मेडिटेशन करने से याद्दाश्‍त बढ़ती है। मेडिटेशन बौद्धिक कार्यों को प्रभावशाली तरीके से करने में मदद करता है। अपने मस्तिष्क को आराम करने का समय दीजिएये। इसके बाद महत्वपूर्ण बातों को याद करने का प्रयास करें।
एक्‍सरसाइज कीजिए
नियमित व्‍यायाम करने से न केवल शरीर मजबूत होता है बल्कि यह दिमाग के लिए भी फायदेमंद है। नियमित रूप से शारीरिक गतिविधियां करने से दिमाग स्‍वस्‍थ रहता है
आदतें बुरी होती हैं, स्वभाव नहीं
हम सभी चाहते हैं कि अपने जीवन में सफलता प्राप्त करें, लेकिन कभी-कभी अपनी ही कुछ आदतों की वजह से हमारा खुद का अक्स हमसे दूर चला जाता है और हम अपनी ख्वाहिशों से दूर होते जाते हैं। दरसल हमारे स्वभाव और आदतों से मिलकर हमारे व्यक्तित्व का वह महत्वपूर्ण हिस्सा तैयार होता है, जिससे हम अपना सांसारिक जीवन चलाते हैं। तो आप जीवन में कुछ भी बनें लेकिन सबसे पहले एक बेहतर इंसान बनें। और इसके लिए आपको खुद को कुछ बुरी आदतों से दूर करना होगा। कैसे.... ? चलिये जानें...
क्यों ज़रूरी है बदलाव
आदत के मामले में अत्यधिक सजगता रखनी चाहिए, क्योंकि आपका शरीर आदतों से संचालित होता है और ये इतनी हावी हो जाती हैं कि शरीर और मन पूरी तरह इनका मजबूर हो जाता है। बुरी आदतें प्राकृतिक जीवन-शैली से विपरीत दिशा में खींचती हैं। उदाहरण के तौर पर हमें सुबह जल्दी उठना चाहिये लेकिन आदत कहती है, देर से उठो। ऐसी कितनी ही आदतें हैं जो हमें सहज जीवनशैली से दूर ले जाती हैं और हमारे समाजिक जीवन को प्रभावित करती हैं। इसलिए बुरी अदतें जितनी जल्दी बदल दी जाएं उतना ही बेहतर होता
दूसरों से अपनी तुलना करना छोड़ें
खुद की दूसरों से तुलना करने पर आप खुद ही अपने अंदर के उत्साह को कम करते हैं। ध्यान रखें कि हर इंसान में अपनी कुछ खासियत होती है। किसी और से खुद की तुलना करने पर आप अपनी ऊर्जा और समय दोनों ही नष्ट करते हैं।
खुद को उत्साहित न करने की आदत
आगे बढ़ने के लिए उत्साहवर्धन बेहत जरूरी होता हैं। दूसरे लोग आपको उत्साहित करें तो अच्छी बात है लेकिन आपको खुद अपने आपको भी उत्साहित करना होगा। खुद को नाकात्मक सोच में डुबाने की आदत से दूर रखें।
आराम न करने की आदत
अक्सर लोग आगे बढ़ने की हसरत में नींद के साथ समझौता करने लगते हैं। लेकिन ऐसा करना न सिर्फ उनको शरीरिक रूप से बल्कि मानसिक रूप से भी कमजोर बनाता है। तो इस बुरी आदत को भी बाहर का रास्ता जल्द दिखाएं।
-नए विचारों की कमी
आज के दौर में नयापन आपकी खासयत होती है। आपके काम में जब तक नयापन रहेगा लोग आपको चाहेंगे भी और सराहेंगे भी। जहां आप के काम में पुरानापन आने लगा तो समझिए आपका मुश्कित वक्त शुरू हो सकता है। इसलिए हमेशा कुछ ना कुछ नया सोचते और करते रहें।
जीवन में लक्ष्य न बनाने की आदत
बिनी लक्ष्य के जीवन बिना स्टेयरिंग की कार की तरह होती है। ऐसी गाड़ी चलती तो है पर उसकी कोई दिशा नहीं होती। तो अगर आपने अपनी जिंदगी में कुछ करने, कुछ पाने की चाहत नहीं रखी है तो इस आदत को दूर करें और अपने लिए लक्ष्य निर्धारित करें और पूरी तैयारी के साथ उस दिशा में आगे बढ़ें
-दूसरों को जीतने की कोशिश करने की आदत
वे लोग जो आपका अपमान करते हैं या आपको नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं उनको सबक सिखाने की चाह रखने और उस दिशा में काम कर खुद को परेशान करने की आदत छोड़ें। ऐसे लोगों को अपने जीवन में महत्व देने के बजाय उन चीजों पर ध्यान देना चाहिए जो आपको सफलता और खुशी देती हों
खुद पर कम और दूसरों पर ज्यादा ध्यान देने की आदत
कई बार आप दूसरों की सफलता से प्रभावित होते हैं और उन्हें ही सब कुछ मानने लगते हैं। आपको लगने लगता है कि आप वैसा कुछ कर ही नहीं सकते जैसा उन्होंने कर दिखाया। लेकिन यह सोचना छोड़कर अपने काम पर ध्यान देने से आपको ज्यादा फायदा होगा। आगे बढ़ते हुए दूसरों की सफलता से डरकर कभी भी आपको फायदा नहीं हो सकता। दूसरों पर फोकस रखने की आदत को जितनी जल्दी बदलेंगे उतना ही आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।
मुश्किलों से घबराने की आदत
एक बात हमेशा याद रखें कि आपका काम और जिंदगी हमेशा आपके अनुसार नहीं चलती। उसमें मुश्किलें और अप्रत्याशित घटनाएं होती ही रहती हैं, जिन पर कई बार आपका बस नहीं चलता। लेकिन इन घटनाओं को आपके जीवन को प्रभावित न होने दें। इन मुश्किलों और प्रतिकूलताओं के बीच सामंजस्य की आदत डालें।
सवालों के जवाब
जीवन में आये बदलाव या आपके आचरण से जुड़ी चीजों के बारे में आसपास के लोगों के कई प्रकार के सवाल होते है। यहीं नहीं हर विषय पर टीका-टिप्पणी करना वह अपना अधिकार मानते हैं। चाहे वह परिवार का सदस्‍य हो, चाहे आपका दोस्‍त या कोई अजनबी, हर चीज पर उसकी अपनी एक राय होती है। इससे उन्‍हें कोई फर्क नहीं पड़ता कि इस तरह के व्‍यवहार से आपको कैसा लग सकता है। कई चीजों के बारे में जवाब देने पर आपको बाध्य महसूस हो सकता है। लेकिन कुछ चीजें वास्‍तव में ऐसी होती है जिनसे किसी को कुछ लेना देना नहीं होता, लेकिन फिर भी वह आपसे उसके बारे में पूछते है। यहां पर ऐसी ही कुछ बातों के बारे में बताया गया है जिनका आप किसी को भी स्‍पष्‍टीकरण नहीं देना चाहते।
जीवन की स्थिति के लिए स्‍पष्‍टीकरण न देना
आप आपने प्रेमी या प्रेमिका के साथ रह रहें है या नहीं, या फिर आप अपने माता पिता के साथ क्‍यों नहीं रहना चा‍हते। इस बारे में आप किसी को भी समझाने की जरूरत नहीं समझते हैं। क्‍योंकि आप समझते हैं कि आप अपने जीवन की स्थिति से पूरी तरह अवगत हैं, इस स्थिति में रहने का आपका स्‍वयं का फैसला है। इससे किसी को भी कोई मतलब नहीं होना चाहिए।
-जीवन की प्राथमिकताओं के लिए स्पष्टीकरण न देना
चीजों के बारे में आपके अपने विचार हैं जो आपको और आपके प्रियजनों को सही मायने में आरामदायक और खुश महसूस करवाते होगें और यह आपकी मुख्‍य प्राथमिकता है। इस प्रकार हर व्‍यक्ति के अपने विशिष्ट विचार, विभिन्न मूल्य, सपने और आकांक्षाएं है। अपनी इन मुख्‍य प्राथमिकताओं के बारे में आप किसी कोई भी स्‍पष्‍टीकरण नहीं देना चाहते हैं
माफी न मांगने पर पछतावे का अभाव
अगर आप अपनी किसी चीज को गलत नहीं मानते और मानते हैं कि इसके लिए दूसरा जिम्‍मेदार है तो आप उनकी माफी के लिए ज्‍यादा परवाह नहीं करते और अपने कार्यों के लिए आपको पछतावा नहीं होता हैं। कुछ लोग जल्‍दी से घावों को भरने के लिए माफी मॉग लेते हैं लेकिन आप कभी भी मॉफी नहीं मांगते अगर आप किसी बात को लेकर सच में खेद नहीं है।
अकेले समय की आवश्यकता
जब आप योजना या अन्‍य दायित्‍वों को रद्द करते हैं, क्‍योंकि आपको एक अच्छी किताब का आनंद लेने के लिए अकेले कुछ समय की जरूरत है। हालांकि अकेले समय बिताना, पूरी तरह से सामान्‍य, प्राकृतिक और आवश्‍यक अभ्‍यास है। आप विश्वास से अपने अकेले समय को इंजॉय करें क्‍योंकि आपको किसी को भी इसके लिए स्‍पष्‍टीकरण देने की जरूरत नहीं है।
-निजी मान्यताओं पर सहमति
अपनी निजी मान्‍याताओं को यदि कोई पूरी भावना के साथ बताता है तो इसका मतलब यह नहीं है कि कुछ भी करने की स्‍वीकृति में आपको सिर का इशारा देना हैं। आप उसके विचारों से सहमत नहीं है या अन्‍य व्‍यक्ति के विचार अनुचित है तो खुद के विचारों और भावनाओं को दबाने और सहमत होने का नाटक करने की जरूरत नहीं है। 
किसी भी बात में हां कहना जरूरी नहीं है
अगर हां कहने के लिए कोई बाध्यकारी कारण नहीं है तो आपको न कहने का पूरा अधिकार है। वास्तव में, दुनिया में सबसे सफल लोगों को न कहने की कला में महारत हासिल है। अन्य लोगों की दया को स्वीकार करें और इसके लिए उनके आभारी भी रहें, लेकिन कुछ भी अस्वीकार करने के लिए डरे नहीं। विनम्रता से दूर अपने मूल लक्ष्यों और प्राथमिकताओं पर ध्‍यान दें। यहीं आगे बढ़ने के लिए सहीं है।

शारीरिक उपस्थिति के लिए स्पष्टीकरण न देना
आपको अपनी शारीरिक उपस्थिति के लिए किसी को भी स्‍पष्‍टीकरण देने की जरूरत नहीं है। आप पतले, मोटे, लंबे, छोटे, सुंदर, सादे या जो कुछ भी हो सकते हैं, लेकिन आप कैसे दिखते हैं और इसके लिए क्या करते हैं यह किसी को भी समझाने की जरूरत नहीं है। आपके हावभाव अपना खुद का मामला है और इसके लिए केवल खुद को बाध्य कर सकते हैं। शारीरिक उपस्थिति से स्वयं के मूल्य को निर्धारित नहीं किया जाना चाहिए
धार्मिक या राजनीतिक विचारों के लिए स्पष्टीकरण न देना
आप एक डेमोक्रेट, रिपब्लिकन, कैथोलिक, प्रोटेस्टेंट या मुसलमान हैं, यह आपकी खुद की निजी पसंद है। आप किसी को भी आप क्या कर रहे हैं, क्यों कर रहे हैं, क्या आप मानते हैं, किस पर विश्वास नहीं करते, के लिए एक स्पष्टीकरण देने की जरूरत नहीं है। आप जो कर रहे हैं उसके लिए अगर आप को स्वीकार नहीं कर सकता हैं, तो यह आपकी अपने निजी हठधर्मिता नहीं है। 
अभी तक सिंगल होने का स्‍पष्‍टीकरण न देना
आप अभी तक अकेले क्‍यों है, इसका किसी से कोई लेना देना नहीं होना चाहिए। एकल होना कोई व्‍यक्तितव विकार नहीं है। एक रिश्‍ते में रहना या नहीं इस बारे में आप बिल्‍कुल स्‍वतंत्र हैं। इसके अलावा, सिंगल रहना उन सामाजिक लेबल की तरह है जिसपर सच में किसी को ध्‍यान नहीं देना चाहिए।
शादी के बारे में आपका निर्णय
आप शादी करना चाहते हैं या अविवाहित रहना, या फिर बच्‍चे चाहते हैं या नहीं, यह आपका खुद का निजी फैसला है। मां का शादी या पोते के लिए दबाव डालना गलत हो सकता है क्‍योंकि यह हर किसी का व्‍यक्तिगत फैसला होता है और हर किसी के लिए उपयुक्त नहीं है। मां के निर्णय का सम्‍मान करना चाहिए लेकिन स्‍वयं पर बोझ लेकर नहीं।
ऐसे बढ़ायें अपनी याद्दाश्‍त
सीखना तो उम्र भर चलता रहता है। लगातार सीखते रहने और उसका लाभ उठाने की यह प्रवृत्ति ही तो इनसान को बाकी जीवों से अलग करती है। इनसान की बुद्धि और विवेक ही उसे बाकियों से बेहतर बनाती है। इसलिए अपने हुनर को लगातार मांझते रहना बहुत जरूरी है। यहां हम कुछ ऐसे प्‍वाइंट्स बता रहे हैं, जो आपको अपनी याद्दाश्‍त को मजबूत बनाने में मदद करेंगे।
-चीजों को जोड़ना सीखिये
आप जो चीजें, बातें नयी सीख रहे हैं, उन्‍हें पुरानी बातों से जोड़ना सीखें। उदाहरण के लिए यदि आपको यमुना की लंबाई (1376 किलोमीटर) के बारे मे पता चला है, तो आप उसे ताजमहल से जोड़ सकते हैं। इससे आपको दोनों के बारे में जरूरी चीजें याद रहेंगी।
-दोहरायें
जब आप किसी चीज को मन ही मन दोहराते हैं, तो आपके लिए उसे याद रखना आसान हो जाता है। या तो आप चीज को अपने मन में दोहराते रहें। आप चाहें तो उन बातों को लगातार कागज पर लिखकर भी याद कर सकते हैं। इससे आपको उन शब्‍दों को याद रखने में आसानी होगी।
-तरीके आजमायें
यदि आप‍ किसी घटनाक्रम को याद करने का प्रयास कर रहे हैं, तो कुछ तरकीब भी आजमा सकते हैं। मान लीजिये आपको अंग्रेजी में नवग्रहों के नाम याद करने हैं, तो आप `My Very Educated Mother Just Showed Us Nine Planets’, का तरीका आजमा सकते हैं। इसमें हर शब्‍द के पहले अक्षर से ग्रह का आता है
-कार्ड पर लिख लें
जब आप महत्‍वपूर्ण ऐतिहासिक तारीख, फॉर्म्‍यूले आदि को याद करना हो, तो आप इसके लिए फ्लैश कार्ड पर उन्‍हें लिख सकते हैं। और जब भी आपको जरूरत महसूस हो, आप उन कार्डस को देख सकते हैं।
-गाएं और याद्दाश्‍त बढ़ायें
अपनी लयबद्धता के कारण संगीत आसानी से आपके दिमाग में समा जाता है। अपने पसंदीदा गाने की धुन पर उन चीजों को सेट कर लीजिये, जिन्‍हें आप याद करना चाहते हैं। इससे आप तथ्‍यों को लंबे समय तक याद रख पाएंगे।
जो पढ़े उसे महसूस करें
आप जो भी पढ़ें मस्तिष्‍क में उसकी एक तस्‍वीर बनाने की कोशिश कीजिये। इससे आप चीजों को अधिक लंबे समय तक याद रख पाएंगे। जब आप पढ़ रहे हों, तो साथ-साथ उन शब्‍दों के बारे में सोचना शुरू कर दें। सोचें कि वह चीज कैसी दिखती होगी, उसकी सुगंध कैसी होगी अथवा उसका स्‍वाद कैसा हो सगता है।
-उदाहरण दें
जब आप किसी चीज को असल जिंदगी के उदाहरणों से जोड़कर देखते हैं, तो मस्तिष्‍क के लिए उन चीजों को दोहराना आसान हो जाता है। हमारा मस्तिष्‍क उन तथ्‍यों को आसानी से याद रख पाता है। कहा जाता है कि मानव जीवन भर अपने मस्तिष्‍क का बामुश्‍किल पांच से सात फीसदी ही इस्‍तेमाल कर पाता है। बाकी हिस्‍सा अनछुआ ही रह जाता है। लेकिन, अपनी याद्दाश्‍त को सुधारने के लिए आपको मस्तिष्‍क का व्‍यायाम जरूर करना चाहिये।
बाइपोलर डिसऑर्डर पर नियंत्रण
बाइपोलर डिसऑर्डर को नियंत्रित करने के लिए तनाव का स्‍तर कम होना चाहिए। इसके साथ ही मरीज को भरपूर नींद के साथ ही नशीले पदार्थो के सेवन से दूर और अपने आत्‍मविश्‍वास को मजबूत रखना चाहिए। साथ ही ऐसे रोगियों की दवा, मनोवैज्ञानिक इलाज और पारिवारिक काउंसलिंग आदि महत्वपूर्ण बातों का ध्‍यान रखना चाहिए।
-तनाव का प्रबंधन
बाइपोलर डिसऑर्डर का प्रमुख कारण तनाव है इसलिए तनाव कम से कम लें। तनाव के स्‍तर को कम करने के लिए सबसे पहले आपको यह जानना जरूरी है कि तनाव का क्‍या कारण है। कारण जानने के बाद तनाव से छुटकारा पाने की कोशिश करें। सा‍थ ही आपको अपनी भावनात्मक एवं शारीरिक प्रतिक्रिया पर भी गौर करना चाहिए। यह समझकर समस्या को नजरअंदाज न करें कि यह खुद ठीक हो जाएगी। ऐसा करने से स्थिति बिगड़ सकती है।
नशीले पदार्थों के सेवन से बचें
बाइपोलर डिसऑर्डर की समस्‍या उनमें भी पाई जाती है जो नशीले पदार्थो का सेवन डिप्रेशन से छुटकारा पाने या दिमाग को शांत रखने के लिए करते हैं। नशीले पदार्थों से दूर रहें क्‍योंकि सिगरेट या शराब के सेवन से तनाव घटने की बजाय बढ़ता है और तनाव बाइपोलर डिसऑर्डर को बढाता है।
-नींद की समस्‍या
बाइपोलर डिसऑर्डर में लोगों को नींद की समस्‍या होना आम है। डिप्रेशन के कारण या तो वे बिल्‍कुल नहीं सो पाते या बहुत ज्‍यादा सोते हैं। ऐसे लोग बहुत अधिक थकान भी महसूस करते हैं। हालांकि कुछ घंटे ठीक से सोने के बाद वे खुद को फ्रेश महसूस करते हैं। इसलिए निर्धारित समय पर सोना जरूरी है और यह भी सुनिश्चित करें कि आपकी नींद में खलल न पड़े।
-खान-पान में सुधार
असंतुलित भोजन दिनचर्या आपके तनाव को बढ़ाती है। तनाव के ज्‍यादा बढ़ने से बाइपोलर डिसऑर्डर की समस्‍या बनती है। इसलिए स्‍वस्‍थ खान-पान को अपनी आहार दिनचर्या में शामिल करें। फास्‍ट फूड और हमेशा कुछ चबाते रहने की आदत से छुटकारा पाने की कोशिश करें।
-कसरत है जरूरी
बाइपोलर डिसऑर्डर की समस्‍या से छुटकारा पाने के लिए नियमित व्‍यायाम बेहतर उपाय है। व्‍यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। अपनी सुविधानुसार आप कोई भी व्‍यायाम कर सकते हैं। व्‍यायाम करने से शरीर में इंडॉर्फिन रिलीज होता है, जिससे आप बेहतर महसूस करते हैं।
-योजनाबद्व तरीके से कार्य करें
किसी भी कार्य को पूरा करने में असमर्थ महसूस करना बाइपोलर डिसऑर्डर का लक्षण है। ऐसे व्यक्ति अपनी पूरी ऊर्जा काम में नहीं लगा पाते और न ही एक समय में एक से ज्यादा काम कर पाते है। इसलिए जरूरी है कि अपने दिनभर के कार्यो की योजना बनाएं। इससे आप उस कार्य के लिए पूरी रूप रेखा तैयार कर पाएंगे और जरूरी तैयारी भी कर पाएंगे।
तनाव की चर्चा
बाइपोलर डिसऑर्डर में कई बार तनाव इतना बढ़ जाता है कि व्‍यक्ति अपना मानसिक संतुलन खो बैठता है। इसलिए तनाव के ज्‍यादा बढ़ने से पहले ही इसके कारणों की चर्चा अपने विश्‍वास पात्र व्यक्ति से करें। विश्‍वास योग्य व्यक्तियों में कोई भी हो सकता है जैसे आपकी पत्नी या पति, मित्र-हितैषी या कोई निकटतम संबंधी।
नकारात्मक पहलुओं के बारे में न सोचें
बाइपोलर डिसऑर्डर में तनाव उस समय और बढ़ जाता है जब व्‍यक्ति घटित घटनाओं के बारे में सोचता है। यदि आपके साथ कुछ ऐसा हुआ है, जिसे सोचकर आप तनाव में आ जाते हैं तो बेहतर होगा कि आप जिंदगी के नकारात्मक पहलुओं से खुद को दूर रखें और उनके बारे में न सोचें।
-वॉकिंग
तनाव दूर करने का सबसे आसान और प्रभावी उपाय है सुबह के वक्‍त टहलना। सुबह के समय टहलने से आप न केवल प्रकृति की सुंदरता का आनंद लेते हैं बल्कि रोजमर्रा के तनाव से भी आपको राहत मिलती है। पक्षियों की चहक सुनने और सूरज को निकलते हुए देखने से आप अपने अन्‍दर बदलाव महसूस करते हैं।
-योग
योग के माध्‍यम से भी आप तनाव से दूर रह सकते हैं। योग करना मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है। ऐसे भी योग हैं जिनका कुछ मिनटों का अभ्‍यास आपको तनाव से तुरंत राहत देता है।
ध्यान या मेडिटेशन
योग की तरह ध्‍यान से भी आप तनाव मुक्‍त महसूस करते हैं। मेडिटेशन एक अच्‍छी क्रिया है और नियमित तौर पर किया गया मेडिटेशन आपको सेहतमंद भी रखता है। ध्‍यान के परिणाम सामने आने में कुछ समय लग सकता है।
गहरी सांस लेना
तनाव को धीमी गति से सांस लेने से जोड़ा गया है। गहरी और धीमी गति से लिया गया सांस तनाव दूर करने में मदद कर सकता है। इसके लिए 3 से 4 सेकंड पर गहरी सांस लें और उसी समय इसे धीरे-धीरे छोड़ें।
थोड़ी सी मस्‍ती
अपनी नियमित गतिविधियों में से कुछ ऐसी गतिविधियों का चुनाव करें, जिनमें आपको अन्‍य के मुकाबले अच्‍छा म‍हसूस होता है। अपनी हॉबी को दोहराएं, किसी क्लब में शामिल हो या फिर आप कोई खेल भी खेल सकते हैं। साथ ही यदि आपको बागवानी, टहलना, टीवी देखना, संगीत सुनना, समाचार पत्र पढ़ना या लेखन आदि पसंद है तो इनमें से कुछ करके आप तरोताजा महसूस कर सकते हैं।
-sabhar :
http://www.onlymyhealth.com/

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