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मंगलवार, 6 मई 2014

भविष्य में महिलाओं से स्पर्म और पुरुषों से अंडाणु तैयार करना संभव हो सकता है

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कई ऐसे लोग मेडिकल रीजन से औलाद सुख से वंचित रह जाते हैं। उनकी एक ही तमन्ना होती है कि घर के आंगन में कोई किलकारी देने वाला आ जाए। विज्ञान सूनी गोद को हरी करने की राह में नई रिसर्च पर फोकस करता रहा है। इसने मां-बाप बनने की संभावनाओं को बढ़ाया है। अगर जापानी रिसर्चरों की मानें तो भविष्य में महिलाओं से स्पर्म और पुरुषों से अंडाणु तैयार करना संभव हो सकता है। यदि इसमें कामयाबी मिल जाती है तो इनफर्टिलिटी (बांझपन) के इलाज में क्रांतिकारी बदलाव आ सकता है। हालांकि यह प्रयोग कब पूरी तरह से सफल होगा यह कहना अभी कठिन है। लेकिन रिसर्चरों के नए प्रयोग से औलाद की चाह रखने वालों के अंदर एक चाह जरूर जगी है।

जापान की क्योटो यूनिवर्सिटी के कात्सुहिको हयाशी और सीनियर प्रोफेसर मितिनोरी सैतोयू ने चूहे की स्किन सेल्स से प्रीमॉर्डिअल जर्म सेल्स या पीजीसी तैयार की है। पीजीसी पुरुष और महिलाओं के सेक्स सेल्स में कॉमन प्रीकर्सर है। इसके बाद इन सेल्स को स्पर्म और अंडाणु दोनों डिवेलप किया गया। साइंटिस्टों ने इनका इस्तेमाल आईवीएफ के जरिए प्रजनन करने में किया। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तकनीक प्रजनन मेडिसिन के लिए कई संभावनाओं के द्वार खोलेगी। यह प्रजनन करने में असमर्थ महिलाओं की स्किन सेल्स से अंडाणु तैयार कर बच्चे पैदा करने में मददगार होगा। साथ ही पुरुषों या महिलाओं के स्किन सेल्स से स्पर्म और अंडाणु तैयार करना संभव हो सकेगा।चूहे पर सफलतापूर्वक प्रयोग करने के बाद अब जापान के वैज्ञानिक बंदरों पर इसे आजमाने की सोच रहे हैं। इसमें सफलता मिलने के बाद ही मनुष्यों पर प्रयोग किया जाएगा। हालांकि वैज्ञानिक अभी इसके साइड इफेक्ट और अन्य नकारात्मक पहलुओं पर भी काम कर रहे हैं। इसलिए वैज्ञानिक फिलहाल ऐसा कोई दावा नहीं कर रहे हैं कि यह तकनीक मनुष्यों के लिए कब पूरी तरह से सटीक होगी। माना जा रहा है कि इसमें 10 से लेकर 50 साल भी लग सकते हैं। sabhar :http://navbharattimes.indiatimes.com/

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