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सॉफ्टवेयर बनाएंगे कपड़े

वह समय दूर नहीं जब दर्जी अपनी सुई, इंचटेप और कैंची जैसे औजार उठाकर कूड़ेदान में फेंक देंगे. फैशन की दुनिया में तेजी से कदम बढ़ा रही नई तकनीकों से अब कपड़ों की डिजाइनिंग भी डिजिटल तरीके से हो रही है.

Kleid wird am Computer entworfen

दुकान से कपड़े खरीदते समय उसे पहन कर देखना तो आम है लेकिन कपड़े सिले जाने से भी पहले उसकी डिजाइन, कट और शरीर पर फिट होने का अंदाज देखना एक अलग बात है. अब ऐसे सॉफ्टवेयर आ गए हैं जिनकी मदद से आप अपने कंप्यूटर स्क्रीन पर किसी कपड़े की सिलाई से पहले ही उन्हें डिजिटल मॉडलों पर देख सकेंगे. कई फैशन डिजाइनर कपड़े इन्हीं सिमुलेशन सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर डिजिटल तरीके से बना रहे हैं. जर्मनी के डार्मश्टाट में स्थित फ्राउनहोफर इंस्टीट्यूट के कंप्यूटर ग्राफिक रिसर्च सेंटर के योर्न कोलहामर बताते हैं, "ये (कपड़े) अपने आप में एक जटिल सामान होते हैं. स्टील या किसी दूसरे ठोस पदार्थ से काफी अलग. कोई कपड़ा किस तरह के रेशों से बनाया गया है या उसमें कितना लचीलापन है, जिसके कारण हिलाए या खींचे जाने पर वह अलग अंदाज में गिरता है."
रेशों से कपड़े तक
फ्राउनहोफर इंस्टीट्यूट के नए सॉफ्टवेयर के आते ही उसे फैशन की कई बड़ी कंपनियों ने हाथों हाथ ले लिया है. वे इसका इस्तेमाल कर ड्रेस की सिलाई के भी पहले से शुरू करते हैं. जिस कपड़े का इस्तेमाल ड्रेस बनाने में होना है उसके रेशों को एक कंप्यूटर पर दिखने वाले एक आभासी मॉडल पर परखा जाता है. माउस के इस्तेमाल से कपड़े को हिला डुला कर देखा जा सकता है कि इससे बने कपड़े पहने जाने पर कैसे लगेंगे.
Textile Simulation

सिर्फ कपड़े की किस्म ही नहीं, उसके कई रंग भी आजमाए जा सकते हैं. यहां तक की कपड़े की बुनाई में इस्तेमाल होने वाले अनगिनत रेशों में से केवल कुछ रेशों को चुन कर उन्हें अलग रंग देना भी संभव है. डिजाइनर इस तरह बने कपड़ों को तुरंत स्क्रीन पर देखकर अपनी ड्रेस के लिए सही कपड़े का चुनाव फटाफट कर सकते हैं.
करता है दर्जी का काम
बिल्कुल किसी दर्जी की सिलाई मशीन की ही तरह स्क्रीन पर कर्सर घुमा कर देखा जा सकता है कि सिले हुए कपड़े कैसे दिखेंगे. कंप्यूटर प्रोग्राम की मदद से कपड़े के किसी डिजाइन में कटे हुए टुकड़ों को साथ लगा कर पूरी ड्रेस की परिकल्पना की जा सकती है. कोलहामर बताते हैं, "3-डी, रियल टाइम सिमुलेशन के लिए यह एक बहुत महत्वपूर्ण कदम है. जब आप सिमुलेटर में सिलाई करके देख पाते हैं कि असल में हिलता डुलता वह कपड़ा कैसा दिखेगा."
इसका इस्तेमाल फैशन जगत में तो क्रांति ला ही रहा है लेकिन भविष्य में उद्योग जगत को इस तकनीक से काफी फायदा हो सकता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि आगे चल कर इससे कार्बन, ग्लास या प्लास्टिक के रेशों के साथ बुनाई की जा सकेगी. कोलहामर का मानना है कि खास तरह की इंजीनियरिंग से तैयार की गए इन सामानों का इस्तेमाल कार या पानी के जहाज से लेकर हवाईजहाज तक बनाने में हो सकेगा.
रिपोर्टः फाबियान श्मिट/आरआर
संपादनः आभा मोंढे
साभार :http://www.dw.de/


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