सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

आध्यात्म की तलाश में आईं भारत ...और बन गईं 'आइटम गर्ल'

B'day: आध्यात्म की तलाश में आईं भारत ...और बन गईं 'आइटम गर्ल'


मुंबईः बॉलीवुड एक्ट्रेस, मॉडल और बिजली गर्ल के नाम से मशहूर याना गुप्ता आज अपना 35वां जन्मदिन मना रही हैं। अपने हॉट अवतार और कई कॉन्ट्रोवर्सी के चलते वो हमेशा ही सुर्खियों में रहती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 16 साल की उम्र में बतौर मॉडलिंग की थी। उन्होंने मॉडलिंग के लिए अपना घर छोड़ दिया था और जापान चली गई थीं।
 
याना का झुकाव शुरू से ही आध्यात्म की तरफ था इसी तलाश में वो भारत आ गईं। उन्होंने मेडिटेशन के लिए पुणे में ओशो आश्रम ज्वॉइन कर लिया। यहां पर उनकी मुलाकात सत्यकाम गुप्ता से हुई। दोनों में नजदीकियां बढ़ीं और 2001 में शादी रचा ली। हालांकि, शादी के महज 4 साल बाद 2005 में दोनों का तलाक हो गया। तलाक के बाद याना ने भारत में ही मॉडलिंग शुरू कर दी। उन्होंने कई बड़े ब्रान्ड्स के ऐड किए जिसमें लैक्मे भी शामिल रहा।
 
2003 में याना को बॉलीवुड में पहली बार काम करने का मौका मिला। उन्होंने फिल्म 'दम' में 'बाबूजी जरा धीरे चलो...' का आइटम नंबर किया, जो काफी पॉपुलर हुआ। इस गाने की सफलता ने उनके लिए बॉलीवुड का रास्ता खोल दिया। इसके बाद उन्होंने हिंदी के साथ साउथ फिल्मों में भी ढेर सारे आइटम नंबर किए। साल 2009 में याना ने 'How To Love Your Body And Get The Body You Love' नाम की किताब भी लिखी।
 
याना की कॉन्ट्रोवर्सी
 
मुंबई के एक चैरिटी इवेंट में याना गुप्ता अपनी ब्लैक ड्रेस के अंदर अंतःवस्त्र पहनना भूल गईं और उनके फोटो भी खींच लिए गए। चैरिटी इवेंट में पहनी गई याना की यह ड्रेस बहुत छोटी थी। इस घटना के बाद बॉलीवुड में चर्चा चल पड़ी कि याना ने यह काम इसलिए किया ‍ताकि उनकी चर्चा हो और उन्हें कुछ फिल्में मिले। इस घटना के बाद उन्हें 'नो पैंटी' गर्ल कहा जाने लगा। अपने बोल्ड अवतार के लिए याना हमेशा ही सुर्खियों में रहती हैं।

B'day: आध्यात्म की तलाश में आईं भारत ...और बन गईं 'आइटम गर्ल'

B'day: आध्यात्म की तलाश में आईं भारत ...और बन गईं 'आइटम गर्ल'

B'day: आध्यात्म की तलाश में आईं भारत ...और बन गईं 'आइटम गर्ल'


साभार : भस्करडॉटकॉम 


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मर्दों की सभी प्रकार की कमजोरी दूर कर सकता है एक चमत्‍कारी पौधा

जयपुर। हिंदुस्‍तान का थार रेगिस्‍तान सिर्फ अपने उजड़ेपन और सूनेपन के लिए ही पूरी दुनिया में नहीं जाना जाता है, बल्कि यहां की रेतों में कई ऐसे रहस्‍यमयी पौधे उगते हैं, जिनके उपयोग से कई खतरनाक बीमारियों को जड़ से खत्‍म किया जा सकता है। एक ऐसा ही पौधा है छुईमई। राजस्‍थान के कुछ हिस्‍सों में छुईमुई को अलाय नाम से जाना जाता है। आज हम बात करेंगे इसी चमत्‍कारी पौधे की। कई स्‍टडी में यह साबित हो चुका है कि छुईमुई के बीजों से खोई हुए मर्दाना ताकत फिर से पाई जा सकती है। इसकी जड़ों से लेकर बीज तक का उपयोग सभी प्रकार की बीमारियों को दूर करने में किया जाता है।


पांच ग्राम अलाय के बीजों का पाउडर भैंस के दूध में डालकर पीने से शारीरिक कमजोरियों से छुटकारा तो पाया ही जा सकता है, साथ सेक्‍सुअल पावर भी पाया जा सकता है। कमजोर मर्द यदि इसकी जड़ों और बीजों का चूर्ण लें तो वीर्य की कमी की शिकायत में काफी हद तक फायदा होता है। छुईमुई एक प्रकार का पौधा है, जिसकी पत्तियां मानव स्पर्श पाने पर अपनेआप सिकुड़ कर बंद हो जातीं हैं। कुछ देर बाद अपने आप ही खुल भी जातीं हैं| इसे अंग्रेजी में मिमोसा प्यूडिका कहते हैं| छु…

पोर्न स्टार्स की दुनिया

पोर्न इंडस्ट्री और पोर्न स्टार्स के बारे में लोगों को कई मिथ हैं। लेकिन एक ऑनलाइन वेबसाइट ने पोर्न इंडस्ट्री पर एक रिपोर्ट तैयार की है।औसत रूप से पुरुष पोर्न स्टार की सालाना कमाई तकरीबन 30 लाख 75 हजार रूपए होती है जबकि महिला पोर्न स्टार की कमाई 50 लाख है।

इसके अलावा महिला पोर्न स्टार की कमाई के और भी माध्यम हैं। सोशल मीडिया पर इनकी उपस्थिति तो है ही इसके अलावा ये इवेंट्स में भी जाती हैं और स्ट्रिप क्लब्स में भी जहां एक रात में इनकी कमाई 2 लाख या इससे ज्यादा हो जाती है। 

उदाहरण के तौर पर पोर्न स्टार जेन्ना जैमसन नाईट क्लब्स में प्रति रात 2 लाख रूपए तक ‌कमा लेती थी जबकि स्ट्रिप क्लब्स से पोर्न स्टार हूस्टन 20 लाख रुपए हर हफ्ते कमा लिया करती थी।

द रिचेस्ट ऑनलाइन के 2013 के आंकड़ों के मुताबिक, औसतन हर सेकंड में इंटरनेट पर 28,258 लोग पोर्नोग्राफी देखते हैं। इंटरनेट से जो मैटर डाउनलोड किए जाते हैं उनमें से 35 % पोर्न होता है। यही वजह है पोर्नोग्राफी के बिज़नेस की लोकप्रियता की।

इस इंडस्ट्री में प्रोडक्ट आसानी से बनते हैं और ये आसानी से उपलब्ध है। आपको जानकर हैरानी होगी कि सिर्फ यूएस में हर 34 वे…

जादू - टोना क्या सच में होता है ?

जादू - टोना क्या सच में होता है ?! अगर नहीं होता तो यह शब्द प्रयोग कैसे हुआ,क्यूँ हुआ ! प्राचीन काल में यह अधिक प्रयुक्त हुआ,आज भी इसके अंश विराजमान हैं।

जादू-टोना और नज़र लग जाने में फर्क है,नज़र तो अपनों की भी लग जाती है  …. परन्तु जादू-टोना एक अलग क्रिया है  . अनेक किताबें इस उद्देश्य से मिलती हैं,कई लोगों का खर्चा पानी इस जादू को करने और उतारने से बंधा होता है  .

पूजा के मन्त्रों का उच्चारण हम निरंतर करते हैं ताकि ऊपरवाले का वरद हस्त रहे  … ठीक उसी प्रकार बुरी चाह को निरंतरता में चाहना,उसके लिए विशेष पूजा करना एक खलल अवश्य उत्पन्न करता है,अनर्थ नहीं कर सकता  .

ऐसा सम्भव होता तो सब अमीर होते,सबके पति,सबकी पत्नियाँ वशीकरण मंत्र के जादू से वश में होते ! न बेरोजगारी होती ! यह सब मानसिक कमजोरी का प्रतीक है - कितनी सिद्धियाँ हासिल करके कोई अमर हुआ है भला !

कभी भी जीवन में एक पक्ष नहीं होता,एकपक्षीये व्यवहार उद्विग्न करता है,एकपक्षीये सामाजिक न्याय बीमार करता है और ऐसी परिस्थिति में व्यक्ति उलजलूल हरकतें करता है - या तो लम्बी ख़ामोशी या तो प्रलाप या फिर सर पटकना  …देखनेवाले घटना की तह …