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शनिवार, 26 अप्रैल 2014

टी-शर्ट पर ही प्रिंट होंगे सेलफोन

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smartphone printed on t-shirt study monash university


मेलबर्न: कुछ दिनों में ऐसा हो सकता है कि आपको मोबाइल पॉकेट में रखने की जरूरत ही न पड़े। आपके टी-शर्ट पर ही रिंगटोन बजे और आप टी-शर्ट पर प्रिंट किए गए मोबाइल से बात कर सकें। जी हां, वैज्ञानिक सेल फोन को बेहद पतला, फ्लेक्सिबल और कारगर बनाने पर काम कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया के मोनॉश यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसे ही सेलफोन बनाने की तैयारी शुरू कर दी है, जिसे टी-शर्ट पर प्रिंट किया जा सके।

स्पासर टेक्नॉलजी की मदद
इस मोबाइल फोन को बेहद पतला बनाने में स्पासर टेक्नॉलजी की मदद ली जाएगी। मोनॉश के वैज्ञानिकों ने काबर्न से बनने वाले दुनिया के पहले स्पासर (सर्फेश प्लासमोन एम्पलिफिकेशन बाइ स्टिमुलेटेड इमिशन ऑफ रेडिएशन) को बनाने में सफलता हासिल कर ली है। इस प्रोजेक्ट के प्रमुख वैज्ञानिक चनाका रुपासिंघे ने कहा कि कार्बन बेस्ड स्पासर टेक्नॉलजी काफी कारगर साबित होगी। यह न सिर्फ सस्ती होगी, बल्कि बेहतर नतीजे भी देगी और इको फ्रैंडली भी होगी। अभी स्पासर टेक्नॉलजी में सोने और चांदी के नैनोपार्टिकल का इस्तेमाल होता है। एसिएस नैनो मैगजीन में इस संबंध में रिसर्च पेपर प्रकाशित किया गया है।

यह है स्पासर टेक्नॉलजी
स्पॉसर एक नैनोस्केल लेसर या नैनोलेसर है। इसके फ्री इलेक्ट्रॉन के वाइब्रेशन से लाइट बीम निकलती है। यह ट्रडिशनल लेसर के इलेक्ट्रो मैग्नेटिक वेब इमिशन की तरह जगह नहीं खाती है। इस प्रोजेक्ट में लगे वैज्ञानिकों को पहली बार पता चला कि कार्बन और ग्रैफाइट के नैनोट्यूब एक-दूसरे से प्रकाश के सहारे ऊर्जा का आदान-प्रदान कर सकते हैं। वैज्ञानिकों ने बताया कि कार्बन नैनोट्यूब में ऑप्टिकल इंटरेक्शन काफी तेज था और यह टेक्नॉलजी कंप्यूटर चिप बनाने में इस्तेमाल की जा सकती है।
sabhar :http://hindi.economictimes.indiatimes.com/

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