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सोमवार, 21 अप्रैल 2014

मरने से कुछ समय पहले और बाद का यह वैज्ञानिक रहस्य चौंका देगा

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ऐसे लोगों की मृत्यु कम कष्टकारी हुई


मृत्यु कैसे होगी कष्ट या आराम से


मरने के बाद फिर से जन्म लेना पड़ता है, इस बात में सभी धर्म भले ही यकीन नहीं करते हैं पर जीवन का अस्तित्व मरने के बाद भी रहता है, इस मान्यता को लेकर कोई विवाद नहीं है।

इस पर भी पदार्थवादियों की अलग राय हो सकती है पर किसकी मृत्यु कैसे होगी या कैसे कष्ट या आराम के साथ कोई मरेगा इस बारे में विज्ञान भी गहराई से छानबीन कर रहा है।

ऐसे लोगों की मृत्यु कम कष्टकारी हुई

अर्जेंटीना की यूनिवर्सिटी आफ ब्यूनस आयरस के शोध छात्रों ने मृत्यु के करीब पहुंचे सत्तर व्यक्तियों के अनुभवों, तकलीफों और पिछले जीवन का अध्ययन किया।

पाया कि अंतकाल में उन्हें वही बातें याद आ रही थी, जिन्हें वे कार्यकारी जीवन के दौरान जेहन में बसाए हुए थे। न केवल बसाए हुए थे बल्कि वैसे काम ही कर रहे थे। कुछ व्यक्ति ऐसे भी थे जो पिछले जीवन में जैसे भी रहे हों, आयु के संध्याकाल में अच्छे काम कर जिंदगी को संवराना चाहते थे।

उन्होंने अपने जीवन की दिशाधारा तो बदल ली पर मृत्यु के समय पिछले कर्मों की यादों का दंश उन्हें परेशान करता रहा था। यद्यपि उन्हें बाद के जीवन में कर लिए सुधारों का फायदा भी मिला। उनकी अंतिम विदाई कम कष्टकारी रही।

वह मृत्यु के समय बहुत ही कष्ट उठाते हैं

अंतर्राष्ट्रीय श्रीकृष्णभावनामृत संघ की अर्जेटीना शाखा के स्वामी गोकुलनंदन दासानुदास (पूर्व नाम प्रो. जेन पावेल) के अनुसार इस अध्ययन से निकल कर आया कि सच्चाई और ईमानदारी का जीवन जीते रहे लोगों का आखिरी समय भी अत्यंत सुखद और विश्राम से भरा होता है।

जो लोग द्वेष और स्वार्थ का जीवन जीते हैं, लोभ की भावना फैलाते हैं, वे मृत्यु के समय बहुत ही कष्ट उठाते हैं।

इस तरह मृत्यु के बाद की यात्रा शुरु होती है

अध्ययन के मुताबिक झूठ बोलने, झूठी गवाही देने, भरोसा तोडऩे और शास्त्र व वेदों की बुराई करने वालों की दुर्गति सबसे ज्यादा होती है। उनकी बेहोशी में मृत्यु हो जाती है।

स्वामीजी के अनुसार शोझ अध्ययन में लगे विद्वानों और विद्यार्थियों ने भगवद्गीता का कभी नाम भी नहीं सुना था पर उन्होंने पाया कि उस ग्रंथे में लिखे उपदेश मृत्यु के समय होने वाले अनुभवों से पूरी तरह मेल खाते हैं।

लिखा है कि अंतकाल में� वही भाव चित्त में घनीभूत होता है जो पूरे जीवन मन में छाया हुआ था। और उसी भाव के अनुसार आगे की यात्रा शुरु होती है।

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