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मंगल के रहस्यों का पता लगाने की आशा

मंगल के रहस्यों का पता लगाने की आशा

पृथ्वी वासी बड़े ध्यान से उन फोटोओं का अध्ययन कर रहे हैं जो मंगल ग्रह पर सफलतापूर्वक उतरे अमरीकी

पृथ्वी वासी बड़े ध्यान से उन फोटोओं का अध्ययन कर रहे हैं जो मंगल ग्रह पर सफलतापूर्वक उतरे अमरीकी यान क्युरियोसिटी रोवर द्वारा खींचे गये। इन फोटोओं में सचमुच अपूर्व दिलचस्पी पैदा हुई। इंटरनेट में उनकी व्यापक चर्चा हो रही है। मंगल ग्रह के दृश्यों में पृथ्वी वासियों की इतनी बड़ी दिलचस्पी स्वाभाविक ही है। रूसी विशेषज्ञों का मानना है कि अमरीकी रोवर द्वारा खींचे गये फोटो मंगल ग्रह के कुछ रहस्यों का पता लगाने में सहायक साबित हो सकते हैं।
दरअसल मंगल के एक रहस्य का पता चल चुका है। मंगल से भेजे गये पहले फोटो में विशाल आकार का एक दाग दिखता था। इंटरनेट यूज़रों ने शीघ्र ही अनुमान लगाने शुरू किये कि यह क्या हो सकता है जैसे कि कैमरा लैंस में चमक या भागते हुए मंगल निवासी। क्युरियोसिटी अभियान के विशेषज्ञों ने समझाया कि इस फोटो में धुल का बादल दिखता है जो रोवर की उतराई के समय उठा था। इस प्रकार मंगल पर जीवन की चर्चा करने का वक्त अभी नहीं आया है। लेकिन किसी भी हालत में इस ग्रह को पृथ्वी वासियों की ज़रूरतों के अनुकूल बनाना संभव होगा। यह रूस की अंतरिक्ष नाविकी संबंधी त्सियोल्कोव्स्की अकादमी के कर्मी यूरी कराश की राय है।
यूरी कराश ने कहा – सौर मंडल के सभी ग्रहों में से मंगल अपनी परिस्थितियों की दृष्टि से पृथ्वी से सबसे ज़्यादा मिलता-जुलता है। और मंगल के अध्ययन से इस सवाल का जवाब देने में सहायता मिल सकती है कि पृथ्वी की सभ्यता का विकास कैसे हुआ। इस के अलावा मंगल एक ऐसा ग्रह है जिस का हम उपयोग कर सकते हैं। उसे पृथ्वी का उपनिवेश बनाया जा सकता है। क्युरियोसिटी रोवर अधुनिकतम यंत्रों सं लैस है जिनका उद्देश्य इस सवाल का जवाब देना है कि क्या मंगल ग्रह पर जीवन की उत्पत्ति संभव है और कभी अतीत में वहाँ जीवन था भी या नहीं।
क्युरियोसिटी को मंगल की सतह पर उतारने के लिये एक नयी तकनोलाजी तैयार की गयी जिस के अनुसार रोवर को राकेट इंजनों वाले यान से वायर रोप के ज़रिये ज़मीन पर उतारा गया था। अंतरिक्ष नाविक सेर्गेई झुकोव के मतानुसार भविष्य में मंगल पर लोगों की उतराई के लिये इसी तकनोलाजी का उपयोग किया जा सकता है।
सेर्गेई झुकोव ने कहा – मुझे विश्वास है कि यह रोवर इस उद्देश्य से भी इस्तेमाल किया जा सकता है। उतराई की उसकी तकनोलाजी मानव की उतराई के लिये उपयोगी हो सकती है। याद रहे कि पहले तीन रोवर यानी पाथफाइंडर, स्पिरिट और आपर्ट्युनिटी हवा से भरे बोरों के अंदर रखकर मंगल की सतह पर उतारे गये थे। बेशक अंतरिक्ष नाविकों को इस प्रकार बोरे में डालकर मंगल पर नहीं उतारा जायेगा। लेकिन वर्तमान तकनोलाजी भविष्य में मानव की उतराई के लिये इस्तेमाल की जा सकती है। फिर भी मेरे विचार से जब तक मानव मंगल की धर्ती पर पाँव रखेगा तब तक मंगल पर अनेक नये रोवर भेजने होंगे।
लेकिन अभी तो मंगल की सिर्फ वर्चुअल यात्रा की जा सकती है। रोवर के औपचारिक इंटरनेट ब्लोग में लगभग 9 लाख लोग जमा हो चुके हैं जिनको ऐसी यात्रा करने की इच्छा है। क्युरियोसिटी रोवेर के ट्विटर में (जिसका पता है https://twitter.com/MarsCuriosity) कुछ ही घंटों के बाद इस अभियान के बारे में नये नये समाचार दिये जाते हैं और मंगल के नये नये फोटो और वीडियो जारी किये जाते हैं। रोवर ने कुछ सेल्फ पोर्ट्रिट भी बनाये। इस उद्देश्य से रोवर के ऊपरी भाग में स्थित वनिगेशन कैमरे का उपयोग किया गया। इस प्रकार रोवर अपने फोटो और वीडियो उपकरणों को आज़मा रहा है जो आनेवाले महीनों में मंगल की उसकी यात्रा के समय इस्तेमाल किये जायेंगे। और हो सकता है कि इंटरनेट यूज़र ही मंगल वासियों और उनके नगरों के पहले फोटो देख सकेंगे।
और sabhar: http://hindi.ruvr.ru

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