Loading...

बुधवार, 23 अप्रैल 2014

और इस तरह वह फकीर शिरडी का साई बाबा कहलाने लगा

0

जब पहली बार शिरडी में आए बाबा


जब पहली बार शिरडी में आए बाबा

कहा जाता है कि सन् 1854 ई. में पहली बार बाबा शिरडी में दिखाई दिए। उस समय बाबा की उम्र लगभग सोलह वर्ष की थी। शिरडी के लोगों ने बाबा को सर्वप्रथम एक नीम के वृक्ष के नीचे समाधि में लीन देखा।

इतनी कम उम्र में सर्दी-गर्मी, भूख-प्यास की जरा भी चिंता किए बगैर उस बालयोगी को अति कठिन तपस्या करते देखकर लोगों को बड़ा आश्चर्य हुआ।

जब अचानक शिरडी से चले गए साईं बाबा

सदा नीम के पेड़ के नीच बैठा रहने वाला इस बालयोगी के व्यक्तित्व की ओर लोग सहज ही आकर्षित हो जाते थे। त्याग और वैराग्य की साक्षात् मूर्ति ने धीरे-धीरे गांव वालों का मनमोह लिया।

कुछ समय शिरडी में रहकर वह तरुण योगी एक दिन किसी से कुछ कहे बिना अचानक वहां से चला गया।

इस घटना के बाद कहलाने लगे वह साईं बाबा

कुछ वर्ष बाद चांद पाटिल की बारात के साथ वह योगी पुनः शिरडी पहुंचा। खंडोबा मंदिर के पुजारी म्हालसापति ने उस फकीर को जब ‘आओ सांई’ कहकर स्वागत किया, तब से उनका नाम ‘सांईबाबा’ पड़ गया।

उसके बाद बाबा बारात के साथ वापस नहीं लौटे और सदा-सदा के लिए शिरडी के होकर रह गए।

साई बाबा का जन्म कहां और कब

वे कौन थे? उनका जन्म कहां हुआ था? उनके माता-पिता का नाम क्या था? ये सारे प्रश्न अनुत्तरित ही है। बाबा ने अपना परिचय कभी नहीं दिया। उनके मानवता प्रेम, त्याग, दयालुता और चमत्कारों की प्रसिद्घि चारों ओर फैल गई और वे कहलाने लगे ‘शिरडी के सांईबाबा’। sabhar :http://www.amarujala.com/

0 टिप्पणियाँ :

एक टिप्पणी भेजें

 
Design by ThemeShift | Bloggerized by Lasantha - Free Blogger Templates | Best Web Hosting