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शनिवार, 8 मार्च 2014

मोबाइल से शरीर में पहुंचा 11000 वोल्ट का करंट

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मोबाइल ब्लास्ट से चेहरा और शरीर जला


मोबाइल ब्लास्ट से चेहरा और शरीर जला


आपको यह जानकर आश्चर्य जरूर होगा कि बिजली के तार के नजदीक मोबाइल फोन से बात करने पर एक युवक के शरीर में 11 हजार वोल्ट का करंट पहुंच गया। इससे उसके शरीर के अंदर इतना बड़ा ब्लास्ट होगा।

ब्लास्ट की वजह से मरीज का चेहरा, आंख और शरीर के कई महत्वपूर्ण अंग बुरी तरीके से जल गए। मरीज का इलाज करने वाले डॉक्टर भी इस घटना से आश्चर्य में हैं।

मरीज की अभी तक 11 सर्जरी की जा चुकी है और करीब आधा दर्जन सर्जरी और होनी है। मरीज को मध्य प्रदेश के ग्वालियर से दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

करंट कान से होते हुए शरीर में पहुंचा

करंट कान से होते हुए शरीर में पहुंचा

एक अगस्त-2013 को 23 वर्षीय एमबीए ग्रैजुएट युवक छत पर मोबाइल फोन से बात करने गया, छत के पास से 11 हजार वोल्ट बिजली का तार गुजर रहा था। तार में करंट था।

डॉक्टरों का कहना है कि मोबाइल से मैगनेटिक फिल्ड और बिजली की तार से इलेक्ट्रिक फिल्ड निकला। इसकी वजह से करंट युवक के कान से होते हुए शरीर में प्रवेश किया और ब्लास्ट हुआ।

ब्लास्ट के बाद युवक अचेत होकर 45 मिनट तक पड़ा रहा। इसके बाद उसे होश आया। उस दिन उसे ग्वालियर के ही एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। दो दिन बाद तीन अगस्त-2013 को मरीज को सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती कराया गया। 

ग्वालियर का रहने वाला, दिल्ली में हो रहा है ईलाज

ब्लास्ट के बाद गंभीर अवस्था में 23 वर्षीय युवक रवि (परिवर्तित नाम) को तीन अगस्त-2013 को ग्वालियर से सर गंगा राम अस्पताल लाया गया।

डॉक्टरों की टीम ने मरीज को देखा इसके बाद उसे प्लास्टिक और रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी विभाग रेफर कर दिया गया। मरीज की दाहिनी आंख पूरी तरह से खराब हो चुकी थी। कॉर्निया तक जल चुका था। चेहरा बुरी तरह से जल चुका था।

कान, जांघ और निजी अंगों के अलावा कई अन्य प्रभावित थे। चेहरे की हड्डी तक जल चुकी थी। ऐसे में चिकित्सकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती मरीज के घाव में फैल रहे संक्रमण को रोकना था।

10 सर्जरी के बाद हो रहा है सुधार

प्लास्टिक और रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी विभाग के एसोसिएट कंसलटेंट डॉ. स्वरूप सिंह गंभीर ने बताया कि अभी तक मरीज की 10 सर्जरी की जा चुकी है और 11वीं सर्जरी की तैयारी की जा रही है।

मरीज की कई दिक्कतों को दूर कर दिया गया है। वह अब सुन सकता है और चेहरे की भी रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी की जा चुकी है। भौं (आई ब्रो) सहित कुछ अन्य रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी भी की जानी है। डॉ. स्वरूप का कहना था कि ऐसा केस उन्होंने अपने चिकित्सीय जीवन में नहीं देखा, लेकिन मरीज में हो रहे सुधार से वे काफी खुश हैं।

sabhar :http://www.delhincr.amarujala.com/



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