शनिवार, 15 फ़रवरी 2014

मनुष्यों और पशुओं के बीच संकरण: एक भावी ख़तरा

मनुष्यों और पशुओं के बीच संकरण: एक भावी ख़तरा

कई देशों के वैज्ञानिक मनुष्यों और जानवरों के विचित्र संकर तैयार कर रहे हैं, इस प्रकार से तैयार किये गए संकर समाज पर कहर बरपा सकते हैं| पिछले दस वर्षों के दौरान जेनेटिक इंजीनियरिंग में हुई प्रगति ने वैज्ञानिकों और आम आदमी को स्तब्ध कर छोड़ा है|

छात्रों के लिये भी नए जीवन रूपों का सृजन आज घर बैठे करना संभव है| अफ़सोस यह है कि क़ानून वैज्ञानिकों के साथ तालमेल रखने में पिछड़ जाता है|
जीवन के यह नए रूप वैसे तो गैरकानूनी नहीं हैं, लेकिन उनसे समाज के लिये खतरा हो सकता है| इन नए रूपों की नस्ल पैदा होने की स्थिति में क्या होगा विषय पर आज कोई कुछ नहीं बता सकता है, लेकिन इसके बावजूद भी सारी दुनिया के वैज्ञानिक दुनिया के लिये अपनी नई रचनाएँ प्रस्तुत करने की जल्दी में लगे हुए हैं; ऐसी रचनाएँ जिनकी कल्पना करना भी कुछ समय पहले तक असंभव था|
वैज्ञानिकों द्वारा कृत्रिम मानव गुणसूत्र से बनाए गए चूहे इसका एक उदाहरण हैं| इस रचना को एक बड़ी सफलता माना जा रहा है, क्योंकि आशा की जा रही है कि इनसे कई बीमारियों के इलाज के लिये नए रूपों को जन्म दिया जा सकेगा| Lifenews.com के अनुसार विस्कॉन्सिन विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक चूहों के दिमाग में मानव भ्रूण की कोशिकाओं की रोपाई में बड़ी सफलता हासिल कर चुके हैं| इन कोशिकाओं का विकास होने पर चूहों की बुद्धिक्षमता में विकास नज़र आया है| यह चूहे भूलभुलैया में भी रास्ता ढूंढ सकते हैं और पहले की तुलना में अधिक जल्दी संकेतों को सीख सकते हैं|
यहाँ यह प्रश्न उठता है: मानव ऊतकों के जानवरों में प्रत्यारोपण से लाभ ज़्यादा हैं या हानि? अभी ही यह स्पष्ट हो चुका है कि पशुओं में मानव अंगों का विकास अब कोई विज्ञान-कथा नहीं बल्कि शुद्ध वास्तविकता है| जापान के वैज्ञानिक मानव अंगों के विकास के लिये सुअरों का उपयोग कर रहे हैं; इस प्रक्रिया में लगभग एक साल लगता है| Infowars.com के अनुसार इस अभ्यास का मुख्य लक्ष्य चिकित्सा प्रयोजनों के लिये मानव अंगों की संख्या में वृद्धि करना है| लेकिन जापान की सरकार के उद्देश्य बिलकुल अलग हैं; वर्तमान में वह भ्रूण से सम्बंधित अनुसंधान को संभव बनाने के लिये नियम बना रही है|
Thetruthwins.com का कहना है कि जिन सूअरों के भीतर मानव अंगों का विकास किया जाता है, वह सूअर शत प्रतिशत सूअर नहीं रह जाते हैं| वैसे ही सुअरों में विकसित अंग शत प्रतिशत मानव अंग नहीं होते हैं| इस प्रकार के अंगों के प्राप्तकर्ताओं को संकरित अंगों के आरोपण की सहमति देनी होगी|
संकरित रूपों की रचना मानवजाति के लिये ख़तरा हो सकती है| ऐसे संकरों पर नियंत्रण खोने से होने वाले परिणामों की भविष्यवाणी में असमर्थता भी एक बहुत बड़ा ख़तरा है|
सबसे अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि अधिकतर देशों में इस प्रकार के नए रूपों के निर्माण पर प्रतिबन्ध नहीं हैं| इस प्रकार से बनाए गए जीव के कारण किसी दूसरे प्राणी को पहुँचने वाली हानि के लिये किसी भी प्रकार की सज़ा के प्राविधान भी नहीं हैं|
दुनिया में ऐसी धारणा भी प्रबल है कि मानव अंगों के विकास के लिये जानवरों का इस्तेमाल प्रकृति की संरचना को नष्ट करने का एक और तरीका है| वर्ष 2011 में डेलीमेल में ब्रिटेन के उन वैज्ञानिकों के बारे में खबर छपी थी, जिन्होंने मनुष्यों और पशुओं के संकरण से 150 से अधिक भ्रूण तैयार किये थे| उस समय इस खबर ने किसी को विचलित नहीं किया था|
पत्रिका स्लेट ने ऐसे दूसरे अनुसंधानों के बारे में लिखा था| मनुष्य का दूध देने वाली बकरी और वैज्ञानिकों द्वारा जानवरों के लिये मानव प्रतिरक्षा तंत्र विकसित करने की ख़बरें कुछ ऐसी ख़बरें थीं| यह मात्र वह परियोजनाएं हैं जिनके बारे में हमें पता है| संभव है कि ऐसी और परियोजनाएं भी हैं, जिनके बारे में हमें कुछ पता नहीं है| मानुष और पशु का संकरण संभव है| इस प्रकार के संकरण से होने वाले लाभ और उससे संभावित खतरों के बारे में व्यापक पैमाने पर बहस जारी रहनी चाहिए| sabhar :http://hindi.ruvr.ru/

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