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गुरुवार, 20 फ़रवरी 2014

जादू - टोना क्या सच में होता है ?

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जादू - टोना क्या सच में होता है ?! अगर नहीं होता तो यह शब्द प्रयोग कैसे हुआ,क्यूँ हुआ ! प्राचीन काल में यह अधिक प्रयुक्त हुआ,आज भी इसके अंश विराजमान हैं।

जादू-टोना और नज़र लग जाने में फर्क है,नज़र तो अपनों की भी लग जाती है  …. परन्तु जादू-टोना एक अलग क्रिया है  . अनेक किताबें इस उद्देश्य से मिलती हैं,कई लोगों का खर्चा पानी इस जादू को करने और उतारने से बंधा होता है  .

पूजा के मन्त्रों का उच्चारण हम निरंतर करते हैं ताकि ऊपरवाले का वरद हस्त रहे  … ठीक उसी प्रकार बुरी चाह को निरंतरता में चाहना,उसके लिए विशेष पूजा करना एक खलल अवश्य उत्पन्न करता है,अनर्थ नहीं कर सकता  .

ऐसा सम्भव होता तो सब अमीर होते,सबके पति,सबकी पत्नियाँ वशीकरण मंत्र के जादू से वश में होते ! न बेरोजगारी होती ! यह सब मानसिक कमजोरी का प्रतीक है - कितनी सिद्धियाँ हासिल करके कोई अमर हुआ है भला !

कभी भी जीवन में एक पक्ष नहीं होता,एकपक्षीये व्यवहार उद्विग्न करता है,एकपक्षीये सामाजिक न्याय बीमार करता है और ऐसी परिस्थिति में व्यक्ति उलजलूल हरकतें करता है - या तो लम्बी ख़ामोशी या तो प्रलाप या फिर सर पटकना  …देखनेवाले घटना की तह में नहीं जाते - आसानी से कह देते हैं कि किसी ने कुछ कर दिया है  .

स्थिति से तंग इंसान वही करने लगता है जो सामनेवाला देखना चाहता है  ! खैर, इसके बावजूद =
जब मासूम ज़िन्दगी अपने हाथों में,
अपनी शक्ल में मुस्कुराती है
तो जीवन के मायने बदल जाते हैं...
बचपन नए सिरे से दौड़ लगाता है!
कहाँ थे कंकड़, पत्थर?
कहाँ थी काई ?
वर्तमान में जीवंत हो जाते हैं॥
नज़रिये का पुनर्आंकलन
मासूम ज़िन्दगी से जुड़ जाते हैं...
जो हिदायतें अभिभावकों ने दी थी
वो अपनी जुबान पर मुखरित हो जाते हैं!
हमने नहीं मान कर क्या खोया
समझने लगते हैं
नज़र, टोने-टोटके पर विश्वास न होकर भी
विश्वास पनपने लगते हैं!
"उस वृक्ष पर डायन रहती है...."
पर ठहाके लगाते हम
अपनी मासूम ज़िन्दगी का हाथ पकड़ लेते हैं
"ज़रूरत क्या है वहाँ जाने की?"
माँ की सीख, पिता का झल्लाना
समय की नाजुकता समय की पाबंदी
सब सही नज़र आने लगते हैं!
पूरी ज़िन्दगी के मायने
पूरी तरह बदल जाते हैं

ये तो हुई मेरी सोच - अब लेते हैं औरों के विचार सम्भावना और घटना के आधार पर =

Anamika Ji मैं नहीं मानती, क्यूंकि कभी विश्वास करने के लिए आत्मा ने गवाही नहीं दी और कहते हैं न की घायल की गति घायल जाने। …तो (भगवान् न करें) जब तक हम ऐसे अनुभवों से न गुजरे हों तब तक ऐसी डरावनी और दन्त-कथाओं पर विश्वास नहीं होता।

Ashish Rai जादू टोना , काला जादू , बचपन में सुनी किम्वदंतियां , कुछ आँखों देखी घटनाएँ , मेरे इस विश्वास को पुष्ट कर गई की ये मानव की अवचेतन में उसकी विफलता के बाद पैदा हुई कुंठा या निराशा को पहली सीढ़ी बना लेती है , अगर मनुष्य अन्धविश्वास को पास भी फटकने देता हो तो . समाज के निचले तबके में अभी भी घटनाएँ सुनने को मिलती है जो केवल अन्धविश्वास और अशिक्षा की परिचायक है .


Vibha Shrivastava महालया के दिन से पूरा दसो दिन दशहरा तक ,माँ ,सब भाई बहन को तलुआ और नाभि में काजल का टीका कर देती थीं .....हर साल …. पूछने पर बताती थीं कि कल से दशई शुरू हो रहा है …. ये जादू टोना से रक्षा करेगा …. दशई में डायन ,जादू टोना करती है और नई डायन बनने का अवसर भी होता है ..... मेरे गांव के दुर्गा जी के मंदिर में मंगलवार और रविवार की रात को {अझौती उझौती} झाड़-फूंक होता है …. भुत-पिचास को भगाने के लिए ….
बिहार के न्यूज -पेपर में रोज एक खबर रहती है कि डायन बता कर ,नंगा कर पुरे गांव में घुमाया गया …. मैला पिलाया गया। …
मेरी सासु जी को जादू टोना पर पूरा विश्वास था। …। वे बताती थीं की डायन होती है जो जादू टोना करती है। …. वो ही बताई थीं कि मेरे ससुराल में एक और ससुर जी के नौकरी के दौरान एक ,दो डायन से उनकी मुलाक़ात हुई है ,जिसका अनुभव वे बताती थीं। …।
उनका ही बताया किस्सा है। …।
उनके पड़ोस में डायन रहती थी जो जादू-टोना करती थी। …डायन का जादू टोना करने तरीका था ,खाने के चीजो का इस्तेमाल करना जो बच्चो को प्रभावित करता था . जब मेरे छोटे वाले देवर ४-६ महीने के रहे होंगे। …. एक दिन वो रोना शुरू किये। …। रोते गए ,रोते गए। …. कोई उपाय काम नहीं कर रहा था। …. रोने के कारण लग रहा था कि अब उनकी साँस टूटी। … आज वे नहीं जिन्दा रह सकेंगे। …. दोपहर से शाम ,शाम से रात हो गई। …. देवर जी चुप होने का नाम ही नहीं ले रहे थे। …. ना कुछ खाना। …. ना कुछ पीना। …। बच्चे की रोने की आवाज सुन आस पास के लोग जुट गए। …. भीड़ में से ही कोई बोला कि हम सब आ गए। …. आपकी पड़ोसन नहीं आई है जो इतनी पास है। …. तब मेरी सासु जी को याद आया कि दो पहर में पड़ोसन के घर से कुछ खाने की चीज आई थी जो आदतन वे खाई थी {वे सबसे पहले खा लेती थी कि जादू का असर बच्चो पर ना हो। …. कही से कुछ भी आता। … ये आदत उनकी अंत तक रही} उस समय देवर जी उनका दूध पी रहे थे। … सासु जी का माथा ठनका। … वे अपने आँगन से ही पड़ोसन को पुकारी और बोली कि आप मेरे घर आइये। …
पड़ोसन :- इतनी रात को मैं आपके घर क्यूँ आऊं । ….
सासू जी :- मेरा बेटा को देखिये ना। …. रोये जा रहा है। …
पड़ोसन :- तो उसमें मैं क्या कर सकती हूँ। …. अब तो मैं सोने जा रही हूँ। ।
सासू जी :- आप कुछ देर के लिए आइये। …
सासू जी बुलाती रही। …. पड़ोसन इनकार कराती रही। ….
सासु जी का धैर्य कमजोर हो चूका था ,टूट गया। …. वे चिल्ला पड़ी। … आज आपके घर से खाने का सामान आया था ,जिसके कारण मेरे बेटे की ये हालत हुई है। …. वो तो नहीं बचेगा। … अगर आप अपना जादू नहीं वापस कराती हैं तो। …. मैं तो बेटा खो दूंगी। …. लेकिन कल आप को भी मैं जिन्दा नहीं रहने दूंगी। …. पुरे समाज के सामने ये बहस हो रही थी। …. उस पड़ोसन को बे मन से आना पडा। …. आते ही वे बोली मेरे सासू जी से कि हाँथ में तेल लगा कर पीठ ससार दो। …। पीठ पर सासू जी का तेल लगा हथेली लगते ही देवर जी एक दम से चुप हो गए और सबके सांस में सांस आई। ....
abhi aur baaki hai ..... milate hain ..... pet pujaa ka sawaal hai ........


Sadhana Vaid जादू टोने में तो मेरा विश्वास नहीं है ! ऐसा कुछ मेरे सामने घटित भी नहीं हुआ जो जादू टोने पर विश्वास करने के लिये मुझे कायल कर सके लेकिन हिप्नोटिज्म पर मेरा विश्वास है और हिप्नोटाइज़होने के बाद अपनी बुद्धि, विवेक, तर्कशक्ति सब कुछ भुला कर हिप्नोटाईज़ करने वाले के इशारों पर चलते हुए मैंने समझदार एवँ वयस्क लोगों को भी देखा है ! शायद यह जादू टोने का ही परिमार्जित रूप हो !


Saras Darbari  रश्मि जी गाँव,कस्बों में आज भी लोग जादू-टोना करते हैं। … और अफ्रीकन 'वूडू' तो बहुत मशहूर है, जहाँ पुतले बनाकर उन्हें टॉर्चर किया जाता है . जिस भी व्यक्ति पर काला जादू करना होता है ,उसकी शक्ल की एक गुड़िया बना दी जाती है और उसे जैसे जैसे टॉर्चर करते हैं - वही पीड़ा वह इंसान महसूस करता है - यह तो जग विदित है ! वैसे हम उस पर विश्वास करते हैं,क्यूंकि हमारी आँखों देखि घटना है . कैसे होता है - ये तो मैं नहीं जानती,क्योंकि मैं स्वयं अवाक रह गई थी देखकर ! कोई तर्क,कोई जवाब नहीं था मेरे पास उसे समझने का - पर ये सच था। क्योंकि मैंने देखा तो मेरा मानना है कि जादू-टोना होता है !


Jyoti Khare जीवन में कब क्या हो जाऐ कहा नहीं जा सकता, जो लोग जादू टोना झाड़ फूंक
को नहीं मानते थे पर जब मुसीबत आयी तो झड़वाते मिले,और जो मानते थे,वे
नहीं मानते मिले-
अम्मा बताती हैं ,दादाजी के पिताजी को रायपुर से मूठ (एक खप्पर पर दिया जलता हुआ आकाश मार्ग से आता है ) भेजी गयी थी मारने के लिए,
कादंबनी के बहुत पुराने अंकों में जादू टोना भूत चुडैल से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी
उपलब्ध है.
बच्चों की नजर उतारना,सूखा रोग में झड़वाना एक तरह का जादू टोना ही है,
आधुनिक सोच वाले इसे किवदंती कथा मानते हैं ,हो सकता है यह सही हो
पर आज भी इसे नाकारा नहीं जा सकता-


Gunjan Shrivastava हाँ मैं जादू टोने को मानती हूँ ...इससे मानसिक रोगों का इलाज होता है .. और सफल भी रहता है .... लेकिन शारीरिक तकलीफ या रोगों इलाज सिर्फ़ दवा ही कर सकती है ...यहाँ जादू टोना बेअसर होगा .


Sangita Puri 'जादूटोना' शब्‍द की उत्‍पत्ति ही जादू से हुई है , भले ही प्राचीनकाल में आम जनता के भरपूर मनोरंजन के ध्‍येय से 'जादू' के नियमों को उनसे छुपाया जाता था .. पर आज स्‍पष्‍ट है कि 'जादू' के सारे खेल हाथ की सफाई और विज्ञान के नियमेां के ही खेल हैं .. पर इसके नियमों को न समझने से लोगों को जादूगर असीम शक्ति के मालिक दिखने लगे जो कोई अनहोनी कर सकते हैं ... इसलिए उससे भय खाना स्‍वाभाविक था ... पर हिप्‍नोटाइज या कुछ अन्‍य तरह की तंत्र शक्तियां नहीं होती हैं .. कोई सिद्धि नहीं हो सकती ..ऐसा कहना भी सटीक नहीं ... क्‍योंकि इस विषय में बहुत सारे लोगों के तरह तरह के अनुभव हैं ... और सबको एक सिरे से खारिज नहीं किया जा सकता ... पर मेरा मानना है कि किसी भी प्रकार की शक्ति का प्रभाव आपपर तब ही पडता है जब आप मन से कमजोर होते हो ... ठीक उसी तरह जैसे किसी भी बीमारी का प्रभाव तब आपपर पडता है जब आप शरीर से अस्‍वस्‍थ होते हैं ... ठीक उसी तरह जैसे किसी भी असामाजिक तत्‍वों का प्रभाव आपपर तब ही पडता है जब आपके ग्रहों का ऋणात्‍मक प्रभाव आरंभ होता है ... इसलिए तन मन को हमेशा मजबूत बनाए रखें और बाकी चीजों को ईश्‍वर पर छोड दें ... ग्रहों का धनात्‍मक प्रभाव शुरू होते ही कोई भी ऋणात्‍मकता आपपर हावी नहीं हो सकती ...


Anulata Raj Nair आज तक कोई जादू हुआ नहीं......कभी किसी और के साथ होते देखा नहीं...तब कैसे मान लूँ?? टोन टोटके करते देखा ज़रूर है मगर उसके परिणाम बेतरतीब थे...याने जो होना था वो हुआ बस टोने को बेवजह ही क्रेडिट मिला......हाँ मगर लगता है कि काश कोई जादू होता कभी मेरे साथ भी


Shikha Varshney कहानियां तो बहुत सुनी हैं। पर खुद कभी देखा नहीं। यहाँ तक कि मुझे तो ये मेजिक खेल/ शो भी नहीं पसंद। हाँ लोगों को टोटके करते जरूर देखा है। पर वो भी कभी अपने गले से नीचे तो उतरे नहीं। हालाँकि आज भी काला जादू जैसी चीजें खुलेआम सुनने में आती हैं और इन्हें झाड़ने, उतारने वालों के बिंदास विज्ञापन भी दिए जाते हैं। पर मैं तब तक किसी भी चीज पर विश्वास नहीं कर सकती जब तक खुद उसकी प्रत्यक्ष गवाह न बन जाऊं।


Kavi Kishor Kumar Khorendra जादू टोना अपने मन की भड़ास निकालने का एक तरिका हैं
जब हम किसी के द्वारा किये जा रहे अत्याचार का विरोध नहीं कर पाते हैं
तो उससे उत्पन्न क्रोध को ,विरोध को , जाहिर करने के लिए
प्रगट रूप से ऐसा व्यवहार करते हैं जो खुद के लिए हानिकारक तो होता हैं
परन्तु उससे अप्रत्यक्ष रूप से अन्याय करने वाले के ह्रदय को भी चोट पहुंचती हैं
या उसके मन को पीड़ा होती हैं /


Vibha Shrivastava जब मैं गर्भवती हुई और जब तक राहुल{मेरा बेटा} छ महीने का नहीं हो गया ,मुझे कोई परेशानी नहीं हुई। …। उन दौरान मैं सोचती ,कि। ……
कैसे
किसी को उलटी होता होगा। ….
खाने की इच्छा नहीं होती होगी। ….
किसी चीज का गंध परेशान करता होगा
उपर्युक्त बाते मेरे साथ होती तो। ….
रईसी जिंदगी गुजराती ना (*_*)
नाज़ नखरे लोग उठाते
डॉ से दिखलाया जाता
अल्ट्रा साउंड होता सी डी बनता
गोल्डन मेमोरी होता ना (*_*)
खैर
ऐसा कुछ नहीं होना था न हुआ
समय गुजरा बिना लेबर पेन का नार्मल डिलीवरी से बेटा भी पैदा हो गया
वो भी ऐसा कि ना जागता और ना रोता
उसे सोये में तेल लगाना ,नहलाना हो जाता था …. कान मल मल कर दूध पिलाना होता था ,क्यूँ कि कान दर्द से मुंह खोल देता था। ....
दिन भी चैन से गुजरता और रात भी सुकून से गुजर जाता

रोता जागता तो घर के कामों से भी मुक्ति मिलती और लोगों से सहानुभूति कि बच्चा से बहुत परेशान है बेचारी ,कुछ रहम किया जाए। …
या
बच्चे को सुलाने के बहाने जच्चा भी सो जाए। ….
सोये को क्या सुलाना
लेकिन। …. लेकिन। …। लेकिन। ….
एक दिन मेरे घर कोई आया और बोल दिया कि। ….
बहुत प्यारा बच्चा है
ये तो सोता ही रहता है
कोई परेशानी नहीं होगी आप लोगो को। ….
राहुल उस समय छ महीने का था। …
उस बात को कुछ घंटे बीते हुआ होगा कि
राहुल जगा और रोना शुरू किया। …. रोता गया। । रोता गया। …
सात दिन -रात रोता रहा। …. पूरा घर परेशान। ….
मेरी सासू जी को जो समझ में आता उपाय कराती रहीं। …।
कभी किसी पंडित को बुला पूजा पाठ
कोई बता देता तो मौला से ताबीज
कोई बता देता तो मजार से भभूत
सरसों मिर्चा से नज़र उतार कर गोयठे के आग पर जला कर उसका धुया
उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़
उपाय होता रहा आखिर सातवें दिन राहुल को नींद और सबको चैन मिला। ….
फिर वही रफ्तार से जिंदगी चलने लगी। ....
लेकिन जिस आदमी का टोक लगा था , उस आदमी पर शक करना , तौबा , सब के लिए पाप गुनाह होता। ….
जब राहुल १० महीने का हुआ फिर बीमार रहने लगा जो करीब १६-१७ साल तक झेलाता रहा। ….
उन दौरान भी ओझा पंडित का चक्कर लगा। …. श्मशान से पका लिट्टी। …. होलिका पर से पका लिट्टी। …. झाड़ -फूंक। ….
मुझे बस यही समझ में आया कि बीमारी बस बिमारी। …
भोजपुरी में एक शब्द है छारियाना। ….


Shikha Gupta ये कोई छुपी हुई बात नहीं कि गाँव में किस प्रकार विधवा या अकेली औरत की ज़मीन हडपने के लिये/ परिवार द्वारा विधवा से छुटकारा पाने के लिये / उसे अनैतिक संबंधों के लिये राज़ी न कर पाने की सूरत में मिली-भगत करके डायन घोषित कर दिया जाता है और फिर गाँव से बाहर धकेल दिया जाता है। तलाक का प्रचलन नहीं था मगर ये बहुत ही पुराना तरीका रहा है पत्नी से छुटकारा पाने का .....चूँकि डायन को जला कर मारने का भी खूब प्रचलन रहा है।
डायन हो या सती .....दोनों का उद्देश्य कमोबेश एक ही होता रहा है ....छुटकारा पाना
लोगों की तकलीफ,अज्ञानता और मुर्खता का फायदा उठाने के तरीके से ज्यादा मैं इसे कुछ और नहीं मानती। कितने ही परिवार जादू-टोने के फेर में पड़ कर घर की सुख-शान्ति खो बैठते हैं .....जो इसका शिकार बनाए जाते हैं उनकी पीड़ा का अंदाज़ा शायद हम लगा भी न पायें।
मेरे ख्याल में इसके प्रति जागरूकता फैलाने और जन-मानस को तर्क-पूर्ण विचार कर तथ्यों को परखने के लिये प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।


Shikha Gupta मैं जब अपने चार माह के बच्चे को लेकर माँ के पास गयी हुई थी ...माँ ने एक पंडित को बुलवाया जिसने बच्चे के कपडे मंगवाए और देखकर ऐलान कर दिया कि बच्चे पर जादू करवाया गया है अगर झाड-फूँक नहीं करवायी तो एक महीने से ज्यादा जीवित नहीं रहेगा .....कायदे से मुझे ड़र जाना चाहिए था मगर इन सब पर विशवास न होने के कारण मैंने कुछ भी करवाने से इनकार कर दिया ...माँ बहुत ही ज्यादा नाराज़ हुई पर अच्छी बात ये थी कि भाई और पापा भी मेरे निर्णय में साथ थे तो मेरा वो प्रवास शान्ति से गुजर गया और ज़ाहिर सी बात है कोई अनहोनी नहीं हुई ....हाँ वो पंडित फिर कभी हमारे घर नहीं आये ...माँ के कई बार बुलाने के बावजूद

Kavi Kishor Kumar Khorendra अभी हाल की ही घटना हैं
१-वह २७ साल की ग्रामीण युवती हैं
२- उसके तीन लडके हो चुके हैं ७ साल ,५ साल ,३ साल के
३-उसके घर में सास ससुर पति और दो जवान देवर हैं
४-गरीब परिवार हैं
५-सिलाई का काम करते हैं दोनों देवर
६-उस युवती के पति को दो चार लोगो ने कह दिया की
"तुम्हारी पत्नी का तुम्हारे भाईयों के साथ अवैध सम्बन्ध हैं "
७-जबकि ऐसा बिलकुल नहीं हैं ,वह युवती काज या बटन के काम में
अपने देवरों का सहयोग करती आई हैं
८-आरोप की भनक पिछले साल की हैं
९-इस साल से उस पर देवी चढ़ ने लगी हैं
१०-वह बहुत गुस्से से भर जाती है गलियाँ देने लगाती हैं ,आदि आदि
सब कहते हैं की किसी ने टोना किया हैं।


Sudha Raje जादू टोना ।।।वैसा है जैसे मानसिक शक्ति से कुछ भी कर दिखाना ।।।जब एक गिलास साफ पानी माँ बच्चे को मंत्र पढ़कर पीने को देती है सोचकर कि वह निरोग होगा ।।तब पूरी मानसिक ताक़त से ऐसा करती है और आम तौर पर काफी संख्या की छोटी छोटी समस्यायें कम होती हैं।।।।बुरा चाहना कोसना और दंड देना भी ऐसा ही है ।।जिसकी मानसिक ताक़त कम होगी वही नुकसान उठायेगा।।।।किंतु जिस तरह से अंधविश्वास फल फूल रहा है सिवा बकवास के कुछ है तो लोगों को उल्लू बनाकर धन ऐंठना


Shivam Misra मैं न तो पूरी तरह से इन पर यकीन करता हूँ न ही पूरी तरह इन के वजूद से इंकार करता हूँ ... बचपन से देखता आया हूँ कि कभी बुरी तरह से सर दर्द से तड़प रहा होता हूँ तो कैसे दवा कारगर नहीं होती और वहीं माँ द्वारा 'नज़र' का उतारा जाना असर कर जाता है | दूसरी ओर जब आस पड़ोस मे किसी बच्चे के बुखार मे होने पर उस के परिवार द्वारा डाक्टर को छोड़ किसी ओझा की शरण मे जाना मुझ पूरी तरह मूर्खता लगती है !


Vandana Gupta मन का वहम है , अगर कुछ करने से कुछ अच्छा हो गया तो मान लिया ऐसे करने से ही हुआ मगर हमेशा वैसा करने पर अच्छा ही हुआ हो सबके साथ शायद ही किसी ने बताया हो ……किसी समय विशेष मे किसी खास परिस्थिति में किसी के साथ होने वाली घटनाओं को किस तरह देखा गया और उनका निवारण किया गया ये जानना जरूरी है मगर हम ये सब नही देखते बस किसी के कुछ करने से हमारा अच्छा या बुरा हो जायेगा ये सोच बैठते हैं और यही सोच हमें विश्वास और अंधविश्वास की ओर प्रेरित करती है और उसे ही जादू टोना मान लिया जाता है जरूरत है तो उस परिस्थिति विशेष के सही आकलन की


Vandana Singh व्यक्तिगत और निजी स्तर पर मैं इसके अनुभव से बिलकुल अनभिज्ञ और अपरिचित हु किन्तु सामाज और समुदाय में प्रचलित ऐसी मान्यताओं को सिरे से नकार भी नहीं पाती हु ।
इस विषय की गंभीरता और रोचकता से शायद ही कोई अछूता हो... सो मैं भी नहीं । जादू शब्द में छुपा हुआ आकर्षण और प्रभाव हर समाज और समुदाय का अभिन्न अंग रहा है और दी ... बहुत से ऐसे लाचार और बेबस... विसंगतियों , मानसिक ,प्राक्रतिक , शारीरिक आपदाओं से त्रस्त लोगों को जादू टोने ने आशा की अनोखी ज्योत से जीवंत रखा हुआ है जो संभवतः सब तरफ से निराश हो चुके होते हैं । सो कहीं न कहीं सकारात्मक प्रभाव भी है जादू टोने का । हाँ , सिर्फ यही जीवन की सफलता और कार्यक्षेत्र का आधार कतई नहीं माना जा सकता ये मेरा प्रबल और दृढ विश्वास है ।


Imran Ansari - Main jaadu tone ko to nahi maanta......par haan buri nazar aur upari asar (aatma ka any sharir me pravesh, jinnat ) ko main apni aankho se dekh chuka hoon......mere bahut hi aatmiy ke sath ye sab ghatit hua .......


Sada ज़ादू-टोना होता है, ऐसा सुना है, कई बार किसी को बुरी नज़र के साये में देख पूरी तरह से इसे नकारा नहीं जा सकता, कुछ लोग छोटी-छोटी बातों पर इसके होने की शंका करते हैं वह जरूर गलत और वहम लगता है, लेकिन जादू-टोना नहीं होता इस बात को मात्र वहम कहकर टाला नहीं जा सकता, मेरा ऐसा मानना है।


राजेंद्र अवस्थी  - दिन है और रात भी है, भगवान हैं तो शैतान भी हैं, सिक्के के दो पहलू होते हैं सदैव....ये प्राकृतिक भी है....अत: ये कहना कि तंत्र मंत्र मात्र कल्पना है..उचित ना होगा...
जितने भी लोग ईश्वरीय सत्ता पर विश्वास करते हैं उनको तंत्र,मंत्र तथा यंत्र पर भी विश्सास करना होगा....
ये और बात है कि, खुले मन से कुछ बातों को स्वीकारना कठिन होता है।


Maheshwari Kaneri नहीं मैं जादू टोना नहीं मानती..जाब जर्रे-जरे में ईश्वर विढ्मान है तो जादू में भी ईश्वर जरूर होगें इस लिएजादू टोने से हमारा बुरा कैसे होसकता है..


Mukesh Kumar Sinha दिमाग कहता है जादू टोना नाम का कुछ नहीं होता, पर दिल कभी कभी इस बात से मना भी नहीं कर पाता
शायद एक आम भारतीय जैसा सोचता हूँ.... लगता है हम 21 वीं सदी मे हैं, पर अंदर सब कुछ वहीं पीछे छिपा बैठा है ......


Neelima Sharrma जादू टोना पर खुद से तो विश्वास नही किया परन्तु ऐसे लोगो से डरती जरुर हूँ जो इन पर विश्वास रखते हैं मेरे ख्याल से जादू और टोन को किसी को मनोवैज्ञानिक रूप से अपने अपने वश में करने के लिय प्रयोग किया जाता होगा और भय वश लोग उसी बात को करने लगते होंगे जिनके निमित्त इन सबको किया होगा इश्वर अवश्य हैं और हरेक करम का फल जरुर मिलता हैं .हाँ माँ को देखा हैं बचपन में नमक से नजर उतारते हुए बच्चो की पर इसे जादू या टोना नही कहा जा सकता न ......


Kailash Sharma बहुत कठिन है कुछ कहना. मन और दिमाग इस पर विश्वास नहीं करता. लेकिन विश्व में अभी भी बहुत से रहस्य हैं जिनका खुलासा होना बाकी हैं, और शायद यह भी उनमें से एक है....


कौशलेन्द्रम कुक्कू ·
मेरे सामने कई दृष्य उभरते हैं जब कोई जादू-टोने की बात करता है। कुछ दृष्य आपके लिये भी ...
1- केवल एक नज़र की बौछार ..जैसे कि कोई बादल फट गया हो, ज़िंदगी ढलान पर है मगर आज तक भीगता जा रहा हूँ । सोचता हूँ ..क्या था उन आँखों में । पता नहीं था आँखों का जादू इतना गहरा होता है । 2- मुझे पता है ...ख़्वाब है यह सब लेकिन तुम्हारे जादू ने जिस सृष्टि की रचना की है उसे कैसे नकार दूँ ? 3- ...ज़रूर उस चुड़ैल ने ही कोई जादू किया होगा तुम पर वरना रखा ही क्या है उसमें ..न शक्ल की न सूरत की ...कुलच्छनी कहीं की । 4- बहू ! जरा सा काजल लगा दे इसके माथे पर मुआ कित्ता ख़ूबसूरत लग रहा है आज । जलने वालों की कमी नहीं है ....कहीं कोई टोटका न कर दे मेरे पोते पर । 5- इत्ते-इत्ते बैद गुनिया सब को दिखाया पर जब से नीबू और मिरच उतारा तब से कुछ ठीक है ..बुख़ार भी कुछ कम हुआ है और अभी तो आराम से सो भी रहा है । 6- हाँ ! मैं मारा इसको ...टोनही थी साब तब्बी तो मारा । पूरा पारा में सबको जादू टोना करती फिरती थी ....। 7- कुछ नहीं सिर्फ़ एक भ्रम । जादू टोना कुछ होता तो सारी दुनिया जादूगरों और टोना-टोटका वालों के कब्ज़े में होती। 8- जब शून्य से ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति हो सकती है तो जादू से कुछ क्यों नहीं उत्पन्न हो सकता ? 9- वास्तव में जादू-टोना सब कुछ सापेक्ष प्रभावी हैं। जो मानता है उसके लिये इसका अस्तित्व है और जो नहीं मानता उसके लिये यह मात्र एक अन्धविश्वास। इसका अर्थ यह हुआ कि जादू-टोने का अस्तित्व यदि कहीं है तो सिर्फ़ और सिर्फ़ हमारे मन में है ।


बेचैन आत्मा - जादू हाथ की सफाई, टोना मन का आशावादी होना है। इस सत्य से इंकार नहीं कर सकता कि बचपन में जब बीमार पड़ता था और माँ झाड़-फूँक करती थीं, नज़र उतारती थीं तो पक्का यकीन हो जाता था कि अब मैं ठीक हो जाऊँगा। डाक्टर की दवाई तन को, माँ की झाड़-फूँक मन को अच्छा करती थी। सबसे बड़ी बात है विश्वास। अब सावधान रहने की बात यह है कि हम जिस पर विश्वास कर रहे हैं वह है कौन ? माँ जैसा भला चाहने वाला या फिर किसी ढोंगी संत जैसा जो भोले विश्वास का इस्तेमाल अपने लाभ के लिए कर रहा है। इस अंधविश्वास का दायरा बच्चों के मन में अपनी माँ तक ही सीमित रहे तभी कल्याण है।


Darshan Kaur Dhanoe मैं जादू -टोने में बिलकुल भी विश्वास नहीं करती थी ..पर जब मेरे साथ एक दुखद वाकिया हुआ तो मुझे महसूस हुआ कि ये सब सत्य है ...बात 1 9 97 कि है ---" मेरा झगड़ा मेरी पड़ोसन से हुआ ...वो मेरे बगल वाले फलैट में रहती थी ..वो मुझे बहुत परेशां करती थी ..आये दिन कुछ न कुछ करती ही रहती थी ..हम सब चुप रहते थे ,एक दिन गुस्से में मैंने उसको पिट दिया ..उसने मेरे खिलाफ झूठी रिपोर्ट कर दी ..खेर, पति कि अच्छी साख होने के कारन कुछ हुआ नहीं ..बात आई गई हो गई ...

4 महीने बाद अचानक वो बात करने लगी ..मैंने भी सोचा कि रोज़ झगड़ा करने से अच्छा है बातचीत कि जाये ..वो हमारे घर आने - जाने लगी,वो मेरी बड़ी बेटी से ज्यादा धुलने मिलने लगी ..रोज़ उसे घर में बुलाती ,मेरे मिस्टर मना करते थे ..पर मैंने ध्यान ही नहीं दिया ...एक महीने के अंदर मेरी बेटी काली पड़ने लगी जबकि उसका रंग बहुत ही साफ था ,उसे बुखार रहने लगा ,उसने खाना -पीना तक छोड़ दिया . हम डॉ के पास लेकर जाते तो कुछ भी नहीं निकलता ..काफी टेस्ट करवाये पर नतीजा कुछ नहीं निकला ..उस समय वो 8 th कि पढाई कर रही थी उम्र 1 5 - 1 6 साल ..
एक दिन हमारी दुकान का कर्मचारी मिश्रा जी ने कहा कि इसको कुछ हुआ है साहेब .....तब तक हम उसको 'बॉम्बे हास्पिटल' (मुम्बई ) एडमिड कर चुके थे पर कोई फायदा नहीं हुआ ..मेरे mr. उसके लिए दुआए मानते थे ..हम 8 दिन हास्पिटल में रहे पर कोई फायदा नहीं .. उसका बुखार कम होता ही नहीं था ..
किसी के कहने पर mr. 'हाजीअली ' कि प्रसिद्धी दरगाह पर गए वह के मोलवी ने उनको एक काला धागा दिया और साबूत गेहू दिए और कहा कि ये बच्ची को चबाकर खाने को कहो जो भी गन्दा खिलाया है वो उलटी कर देगी सब ठीक हो जायेगा ..यह बात सुबह 9 बजे कि है जब mr ने वो गेहूं मुझे हास्पिटल में लाकर दिए ..बेटी बात कर रही थी,मैंने गेहूं उसके हाथ में दिए खाने के लिए , लेकिन अचानक वो गेहूं हाथ में लेकर चीख पड़ी और बेहोश हो गई ...वो कोमा में चली गई थी ..पूरा दिन पूरी रात हम उसे i c u में लेकर बैठे रहे सुबह 7 .3 0 (6 जनवरी 1 9 98) को उसके जीवन कि लीला ख़त्म हो गई ..ख़तम तो वो रात को ही हो गई थी सिर्फ मशीनो ने उसे जिन्दा रखा था ...डॉ कहते है इसे वो बीमारी थी जो लाखो में एक को होती है जिसमे शारीर के 'सेल' मरते है और वापस बनते नहीं पर मुझे यकीं है ये उस बंगालन के जादू का ही असर था जिसने मेरी तंदरुस्त बेटी को निगल लिया ...
कुछ दिनों बाद हमने वो फलेट ही छोड़ दिया ...

* कहते है किसी का दिया हुआ खाने का सामान यदि सुंध लिया जाये तो किसी भी प्रकार के जादू -टोने का असर नहीं होता ..sabhar :http://www.parikalpnaa.com/


1 टिप्पणियाँ :

Unknown ने कहा…

में खुद इंद्रजाल का बेताज बादशाह था एक समय था कि मेरे गाँव मे ओर आस पास बहुत से लोग मेरे पास आते थे लेकिन मेने आज तक आत्मा को ना तो देखा था ना महसूस किया था मेने बहुत बड़े बड़े काम किये थे लेकिन केवल ये चित्त का भृम ही है वास्तव में व्यक्ति को चित्त का भृम होने पर नानात्व प्रकार की वस्तुएं दिखाई पड़ती है मन मे हमारे दिमाग लाखो प्रकार की शक्तियों को लिए बैठा है लेकिन इन शक्तियों में हम सबसे बड़ी शक्ति को भूल जाते है वो सख्ती है आत्म विस्वास जिसको अपने मन और चित पर भरोसा होता है उस पर किसी भी प्रकार की मायावी ताकतों का काबू नही होता

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