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मिलिए दुनिया के सबसे गरीब प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति से

काठमांडू। आपको जानकार आश्चर्य होगा कि नेपाल के प्रधानमंत्री सुशील कोईराला के पास खुद संपत्ति के नाम पर महज तीन मोबाइल हैं। इस हिसाब से वह दुनिया के सबसे गरीब प्रधानमंत्री भी माने जा सकते हैं। कोईराला द्वारा संपत्ति का ब्यौरा पेश करने के बाद इसका खुलासा हुआ। कोईराला ने सोमवार को अपनी संपत्ति का ब्यौरा प्रधानमंत्री कार्यालय और काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स (OPMCM) में पेश किया है, जिसमें महज तीन मोबाइल फोन होने की जानकारी दी गई है।
नहीं हैं बैंक अकाउंट
जानकारी के मुताबिक, कोईराला के पास न तो कोई घर है और न गाड़ी। उनके पास सोने-चांदी के आभूषण भी नहीं हैं। अविवाहित कोईराला का अपना कोई बैंक अकांउट भी नहीं है। इसी साल मार्च में जब संपत्ति का ब्यौरा पेश किया था, उसमें उन्होंने बताया था कि एक चेक पेमेंट के लिए उन्हें मिला था, जिसके लिए उन्होंने खाता खोला था, लेकिन यह तय नहीं है कि अब वह अकाउंट चालू है या बंद, क्योंकि इसके बाद उन्होंने कोई लेनदेन नहीं किया। कोईराला के पास एक घड़ी और एक सोने की अंगूठी भी है, लेकिन अंगूठी सोने से बनी है या किसी और धातु से, इसकी जानकारी भी उन्हें नहीं है। सीधे बने नेपाल के…

कामेच्छा बढ़ाने का काम करता है मेथीदाना

भारतीय और अन्य एशियाई देशों में अपनी यौन क्रियाओं को बढ़ाने की इच्छा रखने वाले लोगों को पश्चिम के उत्पादों की तरफ देखने की जरूरत नहीं है, क्योंकि घर-घर में मिलने वाली मेथी भी इसमें सक्षम है। ब्रिसबेन स्थित एकीकृत नैदानिक और आणविक चिकित्सा केंद्र के अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि भारत में सबसे अधिक मात्रा में पाई जाने वाली मेथी पुरुषों की कामेच्छाओं को काफी अच्छे स्तर तक बढ़ाने में सक्षम है।  अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार मेथी के बीज में पाया जाने वाला सैपोनीन पुरुषों में पाए जाने वाले टेस्टोस्टेरॉन हॉरमोन में उत्तेजना पैदा करता है। गौरतलब है कि भारत में कढ़ी और सब्जियों में इस्तेमाल की जाने वाली मेथी मुख्य तौर पर राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा और पंजाब में उगाई जाती है। sabhar :http://hindi.webdunia.com/

यौन मुद्रा काम ऊर्जा का ऊर्ध्वगमन

काम ऊर्जा अनंत है , महावीर ने इसे अनंत वीर्य कहा है । अनंत वीर्य से अर्थ जैविक वीर्य से नहीं है -सीमेन से नहीं है । अनन्तवीर्य से अर्थ उस काम ऊर्जा से है , जो निरंतर मन से शरीर तक उतरती है - पर जो मन से नहीं   आती है । वह आती है आत्मा से मन तक , और मन से शरीर तक । ये  सीढ़ियाँ है । उसके बिना वह उत्तर नहीं सकती । अगर बीच में से मन टूट जाए , तो आत्मा और शरीर  के बीच सारे सम्बन्ध टूट जाएंगे ।   जिस शक्ति  को योग और तंत्र ने  काम ऊर्जा कहा है , वह जीव शास्त्रीय काम ऊर्जा नहीं है । वह काम ऊर्जा ऊपर की तरफ पुनः गति कर सकती है ।  किसी ब्यक्ति में भी ये काम ऊर्जा  ऊपर की तरफ गति कर जाए , तो  जिंदगी उतनी ही सरल , इन्नोसेंट और निर्दोष  हो जायेगी , जितनी  छोटे बच्चे की होती है । यह  यौन ऊर्जा नीचे की तरफ सहज आती है ।यह प्रकृति की   तरफ से आती है ।  अगर किसी मनुष्य को इस ऊर्जा ऊपर की तरफ  ले जाना है , तो  सहज नहीं होगा , यह संकल्प से होगा । 
जो लोग भी ऊपर की तरफ जाना चाहते है , उन्हें  दूसरी बात समझ लेनी चाहिए की संकल्प और संघर्ष मार्ग होगा । ऊपर जाया जा  सकता है , और ऊपर जाने के अपूर्व आनंद है ।…

सेक्स रैकेट में गिरफ्तार एक और हीरोइन

पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश करेगी कि इस रैकेट को भी वही लोग तो नहीं चला रहे थे, जिसमें पिछले हफ्ते हैदराबाद से अभिनेत्री श्वेता बसु रंगे हाथ पकड़ी गई थी.आगे देखिए दिव्या श्री की कुछ और हॉट तस्वींरें...












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सेक्स रैकेट में पकड़ी गई अभिनेत्री श्वेता करेगी बड़ा खुलासा!

नई दिल्ली: हैदराबाद के हाई प्रोफाइल सेक्स रैकेट में पकड़ी गई बॉलीवुड अभिनेत्री श्वेता बसु प्रसाद अपने ग्राहकों के नामों का खुलासा कर सकती हैं। बता दें कि हैदराबाद पुलिस ने पिछले सप्ताह श्वेता को हैदराबाद के बंजारा हिल्स स्थित एक पंच सितारा होटल में आपत्तिजनक अवस्था में पकड़ा था। रिपोर्टों के मुताबिक श्वेता के ग्राहकों में मुंबई सहित देश के अन्य बड़े शहरों के दिग्गज कारोबारी शामिल हैं और इन उद्योगपतियों ने अभिनेत्री के साथ रात गुजारने के लिए सेक्स रैकेट संचालक को एक लाख रुपए का भुगतान किया था।गौरतलब है कि हैदराबाद पुलिस ने बंजारा हिल्स के एक पांच सितारा होटल में छापा मारा था। इस छापे में 23 वर्षीया श्वेता आपत्तिजनक अवस्था में पकड़ी गईं। रिपोर्टों की मानें तो श्वेता अपने ग्राहकों के नाम सार्वजनिक करने के लिए तैयार हैं।  रिपोर्टों के मुताबिक आर्थिक तंगी की वजह से 'मकड़ी' फिल्म के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाली यह अभिनेत्री जिस्मफरोशी के धंधे में उतरी।





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अब खुद ही रिपेयर हो जाएंगे डैमेज दांत

लंदन। ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक ईजाद की है, जिससे दांत की सड़न के बाद ड्रिलिंग और फीलिंग जैसे झमेलों से छुटकारा मिल सकता है। हर साल दुनियाभर में करीब 2.3 बिलियन लोगों को दांतों की समस्या से जूझना पड़ता है।  ब्रिटिश रिसर्चरों ने एक ऐसी तकनीक का आविष्कार किया है, जिससे सड़े हुए कैविटी वाले दांत अब खुद-बखुद रिपेयर हो जाएंगे। यह शोध लंदन के किंग्स कॉलेज में किया गया, जहां इस नेचरल रिपेयर के लिए इलेक्ट्रिकल करंट का इस्तेमाल किया गया। इस ट्रीटमेंट की खोज करने वाले वैज्ञानिकों की मानें तो यह अनोखा ट्रीटमेंट तीन वर्षों के भीतर आम लोगों तक पहुंच जाएगा। इस ट्रीटमेंट को दो हिस्सों में बांटा गया है। पहले स्टेप में दांत के बाहरी लेवल इनामेल पर मौजूद सडऩ को हटाया जाता है। दूसरे स्टेप में डैमेज दांत के भीतरी हिस्से में हल्के से इलेक्ट्रिक करंट की मदद से मिनरल डाल दिया जाता है।  दर्द से मिलेगा छुटकारा यह मौजूदा प्रॉसेस की तरह तकलीफदेह नहीं है, जिसमें कैविटी भरने से पहले दांत के ऊपर इंजेक्शन लगाया जाता और फिर क्लीनिंग प्रॉसेस में भी दर्द से जूझना पड़ता है। नई डिवाइस में न्यूनतम करंट जैसी सु…

ज्ञान तथा अज्ञान - कुछ भी रहस्य नहीं !

अमानित्वमदम्भित्वमहिंस क्षान्तिरार्जवम्।  आचार्योपासनं शौचं स्थैर्यमात्मविनिग्रहः।। इन्द्रियार्थेषु वैराग्यमनहंकार एव च।  जन्ममृत्यु ज्र्व्याधिदुःखदोषानुदर्शनम्।। असक्तिरनभिष्वङ्गः पुत्रदारगृहादिषु।  नित्यं च समचित्तत्वमिष्टानिष्टोपपत्तिषु।। मयि चानन्ययोगेन भक्तिरव्यभिचारिणी।  विविक्तदेशसेवित्वमरतिर्जनसंसदि।। अध्यात्मज्ञाननित्यत्वम्  तत्त्वज्ञानार्थदर्शनम्।  एतज्ज्ञानमिति प्रोक्तमज्ञानं यादतोन्यथा।।

विनम्रता , दम्भहीनता , अहिंसा , सहिष्णुता , सरलता , प्रामाणिक गुरु के पास जाना , पवित्रता , स्थिरता , आत्मसंयम , इंद्रियतृप्ति के विषयों का परित्याग , अहंकार का अभाव , जन्म , मृत्यु वृद्धावस्था तथा रोग के दोषों की अनुभूति , वैराग्य , संतान , स्त्री , घर , तथा अन्य वस्तुओं की ममता से मुक्ति , अच्छी तथा बुरी घटनाओं के प्रति समभाव , मेरे (भगवान  श्रीकृष्ण ) प्रति निरंतर अनन्य भक्ति , एकांत स्थान में रहने की इच्छा , जन समूह से विलगाव , आत्म - साक्षात्कार की महत्ता को स्वीकारना , तथा परम सत्य की दार्शनिक खोज - इन सब को मैं ज्ञान घोषित करता हूँ और इनके अतिरिक्त जो भी है , वह सब अज्ञान है। 
Humility, pridel…

अवचेतन मन की शक्ति

फोटो : गूगल


आप का मस्तिष्क  एक है लेकिन इसके दो स्पष्ट भाग है ,चेतन मन और अवचेतन मन इसे जागृत और सुसुप्त मन भी कहा जा सकता है ।  आप को याद रखना चाहिए चेतन और अवचेतन दो मस्तिष्क  नहीं है । वे तो एक ही मस्तिष्क में होने वाली गतिविधियों  के दो क्षेत्र  है ,आपका चेतन मन तार्किक  मस्तिष्क है , जो विकल्प चुनता है । उदाहरण के लिए , आप अपनी पुस्तक , अपना घर , अपना जीवन साथी  चुनते है । आप सारे निर्णय चेतन मन से करते है । दूसरी तरफ आप के सचेतन सुझाव के बिना ही आप का ह्रदय अपने आप काम करता है और पाचन , रक्त संचार , साँस लेने की प्रक्रिया अपने आप चलती है । ये सारे काम आपका अवचेतन मन करता है । आप अपने अवचेतन मन पर जो भी छाप छोड़ते  है या जिसमे भी प्रबल विश्वास करते है , आप का अवचेतन मन उसे स्वीकार कर  लेता  है । यह आप के चेतन मन की तरह तर्क नहीं करता है  या बहस नहीं करता है । आप का अवचेतन मन उस मिट्टी  की तरह है , जो किसी भी तरह के बीज को स्वीकार कर लेता है , चाहे अच्छा हो या बुरा । आप के विचार सक्रिय है । वे बीज है ।  नकारात्मक विचार या  विध्वंसात्मक विचार  आप के अवचेतन मन में नकारात्मक रूप से क…

47–ए न्‍यू मॉडल ऑफ दि यूनिवर्स—(ओशो की प्रिय पुस्‍तकें)

पी. डी. ऑस्पेन्सकी एक रशियन गणितज्ञ और रहस्‍यवादी था। उसे रहस्‍यदर्शी तो नहीं कहा जा सकता, लेकिन रहस्‍य का खोजी जरूर था। विज्ञान अध्‍यात्‍म, गुह्म विद्या, इन सबमें उसकी एक साथ गहरी पैठ थी। इस अद्भुत प्रतिभाशाली लेखक ने पूरी जिंदगी अस्‍तित्‍व की पहेली को समझने-बुझने में लगायी। उसने विश्वंभर में भ्रमण किया, वह भारत भी आया, कई योगियों और महात्‍माओं से मिला। और अंत मैं गुरजिएफ का शिष्‍य बन गया। गुरजिएफ के साथ उसे जो अनुभव हुए उनके आधार पर उसने कई किताबें लिखी। ऑस्पेन्सकी को बचपन से ही अदृश्‍य पुकारता था; उसकी झलकें आती थी। एक तरफ वह फ़िज़िक्स का अध्‍यन करता और दूसरी तरफ उसे ‘’अनंतता’’ दिखाई देता। ओशो ने ऑस्‍पेन्‍सकी की पाँच किताबों को अपनी मनपसंद किताबों में शामिल किया है। ‘’टर्शियम ऑर्गेनम’’, ‘’इस सर्च ऑफ दि मिरेकुलस’’, ‘’ एक न्‍यू मॉडल ऑफ यूनिवर्स’’, ‘’दी फोर्थ वे’’, और ‘’दि फ़्यूचर साइकॉलॉजी ऑफ मैन’’। वे स्‍पष्‍ट रूप से कहते थे, ऑस्पेन्सकी की किताबें मुझे बहुत पसंद है। इस किताब के भी 542 पृष्‍ठ है, और बारह प्रकरण है। यह एक अच्‍छा खाता रत्‍नाकर हे। विचारों के रत्‍न ही रत्‍न भरे पड़े है।…

300 से ज्यादा खोज कर चुका ये संस्थान, शहर को दे रहा नई पहचान

जमशेदपुर. लौहनगरी जमशेदपुर की पहचान साइंस सिटी के रूप में भी बन चुकी है। कई ऐसी वस्तुएं हैं, जिनका उपयोग हम घर या बाहर कर रहे हैं, वह कैसे बना? कहां अनुसंधान हुआ है? शायद नहीं पता है। कई चीजें शहर में बनी हैं। इसे बनाने में एनएमएल का योदान रहा है। शहर को नई पहचान देने और देश को विज्ञान के क्षेत्र में अग्रणी बनाने में राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (एनएमएल) का अहम योगदान रहा है। साठ वर्षों के सफर में एनएमएल 300 खोज कर चुका है। विज्ञान के क्षेत्र में यहां के वैज्ञानिकों की उपलब्धियों को शब्दों में समेटना कठिन है। दैनिक भास्कर एनएमएल की नई खोज व कुछ ऐसे अनुसंधान को सामने लाने का प्रयास कर रहा है, जिसका उपयोग आप करते हैं, लेकिन नहीं जानते कि इसका इन्वेंशन शहर में हुआ है। आज राष्ट्रीय विज्ञान दिवस है। इस साल का थीम है क्रफोस्टरिंग साइंस्टिफिक टेंपर (वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना)। प्रस्तुत है भास्कर की विशेष रिपोर्ट। क्यों मनाया जाता है विज्ञान दिवस 28 फरवरी 1928 को सर सीवी रमन ने प्रकाश की गति पर खोज की थी। इस खोज के लिए उन्हें 1930 मेें नोबेल पुरस्कार दिया गया था। इसके बाद से देश ने विज्ञान…

टमाटर घटाता है प्रोस्टेट कैंसर का ख़तरा

टेन में हुए इस अध्ययन के मुताबिक़ नियमित तौर पर टमाटर खाने वाले पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर होने का ख़तरा 20 फ़ीसदी कम हो जाता है. दुनिया भर के पुरुषों में होने वाले कैंसरों में प्रोस्टेट कैंसर दूसरे नंबर पर है.
कैंसर विशेषज्ञ खाने में फल और सब्जी की भरपूर मात्रा के साथ संतुलित आहार लेने की सलाह देते हैं.ब्रिटेन में हर साल इसके 35,000 नए मामले आते हैं और 10,000 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है. विशेषज्ञ रेड और प्रोसेस्ड मीट के साथ ही साथ चर्बी और नमक की कम मात्रा लेने की भी सलाह देते हैं. ब्रिस्टल विश्वविद्यालय के अध्ययनकर्ता दल ने 50 से 69 साल की उम्र के बीस हज़ार ब्रितानी पुरुषों पर शोध किया और पाया कि नियमित तौर पर टमाटर खाने वालों में प्रोस्टेट कैंसर होने का जोखिम 18 फ़ीसदी कम हो जाता है. भरपूर मात्रा में फल और सब्जी फल और सब्जी भरपूर मात्रा में खाने वालों में भी कैंसर का जोखिम कम सब्जी और फल खाने वालों की तुलना में 24 फ़ीसदी कम पाया गया. टमाटर के अंदर कैंसर प्रतिरोधी गुण की वजह लाइकोपेन को माना जाता है. लाइकोपेन एक एंटीऑक्सीडेंट है जो डीएनए और कोशिका को क्षति पहुंचाने से रोक सकत…

चीन का सबसे अमीर गांव, जहां हर आदमी कमाता है 80 लाख रुपए सालाना

जियांगयिन। आलीशान बंगला, महंगी कार, अच्छी शिक्षा, हर तरह की सुख-सुविधाएं और वो भी मुफ्त में। ये एक सपना हो सकता है, लेकिन चीन के हुआझी गांव में रहने वाले लोगों के लिए ये कोई सपना नहीं, बल्कि हकीकत है। ये गांव चीन के जियांगयिन शहर के पास है और इसे पूरे देश में सबसे अमीर कृषि गांव कहा जाता है। इस गांव में रहने वाले सभी 2000 रजिस्टर्ड लोगों की सालाना आमदनी एक लाख यूरो (करीब 80 लाख रुपए) है। हुआझी गांव आज एक सफल समाजवादी गांव का मॉडल पेश कर रहा है। हालांकि, शुरुआती दौर में गांव की तस्वीर ऐसी नहीं थी। 1961 में स्थापना के बाद यहां कृषि की हालत बहुत खराब थी, लेकिन गांव की कम्युनिस्ट पार्टी कमिटी के पूर्व अध्यक्ष रहे वू रेनवाओ ने इस गांव की सूरत ही बदल दी।  वू ने कैसे बदली गांव की सूरत वू ने औद्योगिक विकास की योजना के लिए पहले गांव का निरीक्षण किया और फिर एक मल्टी सेक्टर इंडस्ट्री कंपनी बनाई। उन्होंने सामूहिक खेती की प्रणाली का नियम बनाया। इसके साथ ही, 1990 में कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराया। गांव के लोगों को कंपनी में शेयरधारक बनाया गया। मुफ्त में मिलती हैं सुविधाएं गांव की स्टील, सिल्…

अब टाईप करने की भी ज़रूरत नहीं हिंदी में बोलना काफी

जो काम बोल कर हो जाए उसके लिए टाईप करने की जहमत क्यों उठाना. और वैसे भी बढ़ती तकनीकी के साथ जो न हो कम है. पहले टच स्क्रीन का आविष्कार और अब टाईप तो क्या टच करने की भी ज़रूरत नहीं. जी हां, गूगल पर सर्च करने के लिए अब आपको टाइप करने की जरूरत नहीं, क्योंकि यह काम अब आप बोलकर ही कर सकते हैं वो भी हिंदी में. गूगल कंपनी ने एंड्रॉयड ओएस पर हिंदी में वॉइस सर्च की सर्विस देना शुरू किया है. यानि इस सर्विस के तहत आप गूगल पर हिंदी में बोलकर सर्च कर सकते हैं. गौरलब है कि गूगल ने अपनी इस सर्विस के बारे में दो महीने पहले ही बता दिया था. तब कंपनी ने कहा था कि गूगल वॉइस सर्च अब भारतीय उच्चारण को भी समझेगा. इसके तहत हिंदी में बोलकर सर्च करने का फीचर आपकी भाषा समझ लेगा. लेकिन बोलकर सर्च करने और टाइप करके सर्च करने के रिजल्ट्स में अंतर दिख सकता है. एंड्रॉयड ओएस वाले डिवाइस पर हिंदी में सर्च करने के लिए आपको सेटिंग में बदलाव होगा. सबसे पहले अपने एंड्रॉयड फोन की सेटिंग्स में जाइए. फिर अकाउंट्स में गूगल खोलें. फिर इसके सर्च में जाइए. इसके बाद फिर वॉइस खोलिए. इसमें लैंग्वेज में हिंदी (भारत) चुनकर सेव कर दीजिए. …

भविष्य में होंगे मस्तिष्क प्रत्यारोपण

बेहद गोपनीय अमेरिकी सैन्य शोधकर्ताओं का कहना है कि अगले कुछ महीनों में वे मस्तिष्क प्रत्यारोपण के विकास से जुड़ी नई प्रगति के बारे में जानकारी पेश करने वाले हैं. मस्तिष्क प्रत्यारोपण की मदद से याददाश्त बहाल की जा सकेगी. अमेरिका की डिफेंस एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी (डीएआरपीए) प्रबुद्ध स्मृति उत्तेजक को बनाने की योजना के कार्यक्रम का नेतृत्व कर रही है. यह इंसानी दिमाग को बेहतर तरीके से समझने के लिए बनाई गई योजना का हिस्सा है. इस योजना में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने दस करोड़ अमेरिकी डॉलर की सहायता दी है. विज्ञान ने पहले ऐसा काम नहीं किया है. और इस पर नैतिक सवाल भी उठ रहे हैं कि जख्मी सैनिक की याददाश्त को बहाल करने और बूढ़े होते मस्तिष्क के प्रबंधन के नाम पर क्या इंसानी दिमाग के साथ छेड़छाड़ जायज है. कुछ लोगों का कहना है कि जिन लोगों को इससे लाभ पहुंचेगा उनमें पचास लाख अमेरिकी हैं जो अल्जाइमर बीमारी से पीड़ित हैं और करीब तीन लाख अमेरिकी फौजी हैं जिनमें महिलाएं और पुरुष शामिल हैं. ये वो सैनिक हैं जो इराक और अफगानिस्तान में युद्ध के दौरान घायल हुए और उनके मस्तिष्क में चोटें आ…

10 उभरती तकनीकें जो बदल देंगी जीने का अंदाज

।। ब्रह्मानंद मिश्र ।। नयी दिल्ली

सदियों से इंसान नये अविष्कारों के जरिये भावी पीढ़ी के जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास करता रहा है. मौजूदा दौर में भी कई ऐसी नयी टेक्नोलॉजी पर शोधकार्य जारी है, जो कुछ वर्षो बाद जीने के अंदाज को बदल सकती हैं. इन्हीं में से 10 उभरती तकनीकों के बारे में बता रहा आज का नॉलेज.. तकनीकी विकास की अवधारणा, मानव विकास की सतत कड़ी है. शायद इसी वजह से तेजी से बदलते आधुनिक युग में भी तकनीक ही विकास की सबसे बड़ी कारक साबित हो रही हैं. इस क्षेत्र में आनेवाली छोटी-बड़ी चुनौतियां ही नयी तकनीक के खोज में लगे वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए प्रेरणास्नेत हैं. आज के दौर में नैनो टेक्नोलॉजी से लेकर बायोटेक्नोलॉजी तक, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी से लेकर कॉग्निटिव साइंस की विशिष्टताओं तक ने इंसानी संवेदनशीलता के स्तर को और भी ऊंचा कर दिया है. दूसरी तरफ देखें तो प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और बदलते वैश्विक पर्यावरण ने मानव जाति को भविष्य के बारे में नये सिरे से सोचने के लिए मजबूर कर दिया है. आज बढ़ती जनसंख्या की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना, मानव जीवन को तरह-तरह की भयानक बीमारियों से मु…