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December 15, 2013 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

वे न कुछ खाते हैं और न पीते हैं. सात दशकों से केवल हवा पर जीते हैं

. गुजरात में मेहसाणा ज़िले के प्रहलाद जानी एक ऐसा चमत्कार बन गये हैं, जिसने विज्ञान को चौतरफ़ा चक्कर में डाल दिया है. 
भूख-प्यास से पूरी तरह मुक्त अपनी चमत्कारिक जैव ऊर्जा के बारे में प्रहलाद जानी स्वयं कहते हैं कि यह तो दुर्गा माता का वरदान हैः "मैं जब 12 साल का था, तब कुछ साधू मेरे पास आये. कहा, हमारे साथ चलो. लेकिन मैंने मना कर दिया. क़रीब छह महीने बाद देवी जैसी तीन कन्याएं मेरे पास आयीं और मेरी जीभ पर उंगली रखी. तब से ले कर आज तक मुझे न तो प्यास लगती है और न भूख."
उसी समय से प्रहलाद जानी दुर्गा देवी के भक्त हैं. उन के अपने भक्त उन्हें माताजी कहते हैं. लंबी सफ़ेद दाढ़ी वाला पुरुष होते हुए भी वे किसी देवी के समान लाल रंग के कपड़े पहनते और महिलाओं जैसा श्रृंगार करते हैं. 
कई बार जांच-परख
भारत के डॉक्टर 2003 और 2005 में भी प्रहलाद जानी की अच्छी तरह जांच-परख कर चुके हैं. पर, अंत में दातों तले उंगली दबाने के सिवाय कोई विज्ञान सम्मत व्याख्या नहीं दे पाये. इन जाचों के अगुआ रहे अहमदाबाद के न्यूरॉलॉजिस्ट (तंत्रिकारोग विशेषज्ञ) डॉ. सुधीर शाह ने कहाः "उनका कोई शारीरिक ट्रांसफॉर्मेश…

4 साल का बच्चा आईक्यू भौतिक वैज्ञानिक अलबर्ट आईंस्टीन के बराबर

लंदन : ब्रिटेन में चार साल के बच्चे के बारे में कहा जा रहा है कि उसका आईक्यू भौतिक वैज्ञानिक अलबर्ट आईंस्टीन के बराबर है। दक्षिणी यार्कशायर के रहने वाले शेरविन साराबी ने वेश्लर पैमाने पर 160 अंक हासिल करके मनौवैज्ञानिकों को हैरान कर दिया।

समाचार पत्र ‘डेली एक्सप्रेस’ के अनुसार शेरविन के आईक्यू को आईंस्टीन, बिल गेट्स और स्टीफन हॉकिंगस के आईक्यू के बराबर माना गया है। वैसे, आईंस्टीन के आईक्यू की कभी जांच नहीं हुई थी क्योंकि उनके दौर में यह आधुनिक तकनीक नहीं थी। विशेषज्ञों का मानना है कि उनका आईक्यू 160 रहा होगा।

शेरविन ने 10 महीने की उम्र में पहला शब्द बोला था और 20 महीने की उम्र तक बातचीत करने लगा। उसकी मां आमंडा का कहना है कि शेरविन 190 से अधिक पुस्तकें पढ़ चुका है। उसे नयी चीजों के बारे में जानने की उत्सुकता रहती है। (एजेंसी)  sabhar :http://zeenews.india.com

बच्चेदानी के बदले पेट में पल रही थी बच्ची

रांची। रिम्स के लेबर रूम में शुक्रवार को डॉक्टरों को हैरान कर देनेवाली घटना घटी। नौ माह तक जिस बच्ची को मां की बच्चेदानी में होना चाहिए था, वह मां के पेट से निकली। गायनी विभाग के डॉ प्रीती बाला सहाय यूनिट के डॉक्टरों की टीम यह देख भौचक्क रह गयी और सबके मुंह से एक ही शब्द निकले अरे... यह क्या? बच्ची तो पेट में पल रही थी। बच्चेदानी तो एकदम अलग है। सबने इसे कुदरत का करिश्मा कहा और बताया कि यह घटना रेयर है। हालांकि, बच्ची को जन्म देनेवाली मां अनि देवी(30) और उसकी बेटी दोनों स्वस्थ है। बच्ची का वजन भी 2.5 किलोग्राम है। अनि रांची के बेड़ो स्थित खत्री गांवकी रहनेवाली है। डॉ सहाय ने इसकी सूचना रिम्स अधीक्षक डॉ वसुंधरा को दी। ऑपरेशन टीम में डॉ सहाय, डॉ मधुलिका और पीजी छात्रा डॉ अंशु व नीतू और एनेस्थिसिया के डॉ सपन व डॉ सुनीत शामिल थे।ऑपरेशन टीम में शामिल डॉ अर्चना ने बताया कि अनि देवी कल शाम को बेड़ो पीएचसी से गर्भ में पल रहे शिशु के धड़कन कम होने की शिकायत पर भेजा गया। रिम्स में जांच किया गया। अनि के अनुसार वह नौ माह की गर्भवती थी। लेकिन, जांच के क्रम में सबकुछ सही नहीं मिला। अल्ट्रासाउंड जांच…

मरने के 20 मिनट बाद ही उसने ले लिया दूसरा जन्म

कहते हैं कि मरने के बाद आत्मा यमलोक जाती है फिर अपने कर्मों के अनुसार लौट कर पृथ्वी पर लौटती है। लेकिन कुदरत कब कौन सा चमत्कार कर दिखाए कहा नहीं जा सकता।

ऐसी ही एक चमत्कारी घटना उत्तर प्रदेश, मैनपुरी के तिलयानी गांव की है। साल 2010 में सत्यभान सिंह यादव के पुत्र मनोज को एक बिच्छू ने काट लिया। इस समय मनोज महज 8 साल का था।

मनोज को मिनी पीजीआई सैफई में भर्ती कराया गया। इसी दिन तिलियानी के ही राजू की पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर मिनी पीजीआई में भर्ती कराया गया। यह अजब संयोग था कि रात के 10:40 बजे मनोज की मौत हो गई और लगभग 11 बजे राजू की पत्नी ने पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम छोटू रखा गया।

परिवार वालों का कहना है कि छोटू जब ढाई साल का हुआ तो वह मनोज के पिता सत्यभान को पापा कहकर बुलाने लगा। छोटू को अपने पूर्व जन्म के रिश्तेदार और उनसे जुड़ी बातें याद है।

सत्यभान का दावा है कि छोटू ने ऐसी कई बातें बताई हैं जो मनोज या उसके घर वाले ही जानते थे। अब पुनर्जन्म को मानते हुए छोटू को सत्यभान और उसका परिवार मनोज की तरह प्यार करते हैं। छोटू के मां-बाप को इससे कोई ऐतराज नहीं हैं। उनका कहना है कि छोटू को दो…

पैरों से जुड़ा रहा हाथ

दुनिया में आज भी स्वस्थ शरीर को सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं। जाहिर है आज की टेक्नोलॉजी में केवल एक बटन दबाकर आप बहुत कुछ कर सकते हैं लेकिन कोई भी टेक्नोलॉजी मरे को जिंदा नहीं कर सकती। दो हाथ, दो पैर, दिल, शरीर का हर अंग आपके लिए बहुत कीमती है क्योंकि टेक्नोलॉजी यह सब आपको नहीं दे सकती। लेकिन जब हम बात विज्ञान के करिश्मे की कर रहे हैं, इस बायॉलोजी की टेक्नोलॉजी ने बहुत हद तक आज इसे संभव बना दिया है और अब विज्ञान आपको प्राकृतिक हाथ-पैर भी दे सकता है। इस खबर को पढ़कर आप भी समझ जाएंगे, कुदरत का करिश्मा और बात होती है लेकिन आज विज्ञान के करिश्मे भी कम नहीं हैं। कुदरत किसी को जीवन दे सकती है, मौत दे सकती है, मौत से बदतर अपाहिज जिंदगी भी..मतलब जो मिला आपको उसी से संतोष करना पड़ता है। इंसान के पास उसमें अपनी पसंद शामिल करना संभव नहीं है। लेकिन विज्ञान ने हमें इसमें छूट दिलाई है। बायलॉजी का कमाल देखिए कि अब कुदरती अंग भी विज्ञान के करिश्मे से पाए जा सकते हैं।इसी वर्ष नवंबर की बात है। चांगशा(चीन) के जिआओ वेई को लगा कि अब पूरी उम्र उसे अपाहिज बनकर जीना पड़ेगा। फैक्टरी में काम करते हुए दुर्घटना में…

वाकई में भूत-प्रेत होते हैं ?

विभिन्न धर्म ग्रंथों में भी भूत-प्रेतों के बारे में बताया गया है। सवाल यह उठता है कि अगर वाकई में भूत-प्रेत होते हैं तो दिखाई क्यों नहीं देते या फिर कुछ ही लोगों को क्यों दिखाई देते हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार जीवित मनुष्य का शरीर पांच तत्वों से मिलकर बना होता है-पृथ्वी, जल, वायु, आकाश व अग्नि। मानव शरीर में सबसे अधिक मात्रा पृथ्वी तत्व की होती है और यह तत्व ठोस होता है इसलिए मानव शरीर आसानी से दिखाई देता है।  जबकि भूत-प्रेतों का शरीर में वायु तत्व की अधिकता होती है। वायु तत्व को देखना मनुष्य के लिए संभव नहीं है क्योंकि वह गैस रूप में होता है इसलिए इसे केवल आभास किया जा सकता है देखा नहीं जा सकता। यह तभी संभव है जब किसी व्यक्ति के राक्षण गण हो या फिर उसकी कुंडली में किसी प्रकार का दोष हो। मानसिक रूप से कमजोर लोगों को भी भूत-प्रेत दिखाई देते हैं जबकि अन्य लोग इन्हें नहीं देख पाते।धर्म शास्त्रों के अनुसार भूत का अर्थ है बीता हुआ समय। दूसरे अर्थों में मृत्यु के बाद और नए जन्म होने के पहले के बीच में अमिट वासनाओं के कारण मन के स्तर पर फंसे हुए जीवात्मा को ही भूत कहते हैं। जीवात्मा अपने पं…

थ्रीडी प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी से आंख के पर्दे की कोशिकाएं प्रिंट करने में सफलता हासिल की

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कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने थ्रीडी प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी से आंख के पर्दे की कोशिकाएं (रेटिना सेल) प्रिंट करने में सफलता हासिल की है। यह नई खोज दृष्टिहीनता के उपचार में बड़ी क्रांति ला सकती है। वैज्ञानिकों ने इंकजेट प्रिंटर के जरिये चूहों की रेटिना सेल को प्रिंट किया। इस दौरान कोशिकाओं को कोई नुकसान भी नहीं हुआ और वे जीवित भी रहीं।  शोधकर्ता प्रोफेसर कीथ मार्टिन ने बताया कि यह पहली बार है जब सेंट्रल नर्वस सिस्टम से जुड़ी किसी कोशिका को सफलतापूर्वक प्रिंट किया गया है। इससे दृष्टिहीनता के उपचार में मदद मिल सकती है। हमने पाया कि रेटिना की सेल को निकालकर अलग किया जा सकता है। इन कोशिकाओं को अलग-अलग पैटर्न पर प्रिंट भी किया जा सकता है।  प्रिटिंग के दौरान ये कोशिकाएं जीवित रहती हैं। भविष्य में इनका इस्तेमाल खराब कोशिकाओं को बदलने के लिए किया जा सकता है। मार्टिन और उनके सहयोगी वैज्ञानिकों के इस शोध को बायोफैब्रिकेशन जर्नल में प्रकाशित किया गया है। भविष्य में इनकी योजना इस प्रणाली का उपयोग कर पूरी रेटिना तैयार करने की है। sabhar : bhaskar.com

घरेलू नुस्खे :जो आंखों में सालों से लगा चश्मा भी उतर जाए

चश्मा लग जाना आजकल एक सामान्य सी बात है। इस समस्या से जुझ रहे लोग इसे मजबूरी मानकर हमेशा के लिए अपना लेते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि अगर किसी कारण से एक बार चश्मा लग जाए तो वह उतर नहीं सकता। चश्मा लगने का सबसे प्रमुख कारण आंखों की ठीक से देखभाल न करना, पोषक तत्वों की कमी या अनुवांशिक  हो सकते हैं। इनमें से अनुवांशिक कारण को छोड़कर अन्य कारणों से लगा चश्मा सही देखभाल व खानपान का ध्यान रखने के साथ ही देसी नुस्खे अपनाकर उतारा जा सकता है।






बादाम की गिरी, बड़ी सौंफ  व मिश्री तीनों को समान मात्रा में मिला लें। रोज इस मिश्रण को एक चम्मच मात्रा में एक गिलास दूध के साथ रात को सोते समय लें।

- आंखों के हर प्रकार के रोग जैसे पानी गिरना , आंखें आना, आंखों की दुर्बलता, आदि होने पर रात को आठ बादाम भिगोकर सुबह पीस कर पानी में मिलाकर पी जाएं।

 कनपटी पर गाय के  घी की हल्के हाथ से रोजाना कुछ देर मसाज करने पर आंखों की रोशनी बढ़ती है

 एक चने के दाने जितनी फिटकरी को सेंककर सौ ग्राम गुलाबजल में डालें और रोजाना रात को सोते समय इस गुलाबजल की चार-पांच बूंद आंखों में डाले साथ पैर के तलवों पर घी की मालिश करें इससे चश्…