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शुक्रवार, 6 दिसंबर 2013

पांच सुदूर ग्रहों के वायुमंडल में पानी की मौजूदगी के संकेत

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ग्रहों के वायुमंडल में पानी की मौजूदगी के संकेत ,नासा के नासा के वैज्ञानिकों ने पांच सुदूर ग्रहों के वायुमंडल में पानी की मौजूदगी के संकेत मिलने का दावा किया है।मिलने का दावा किया है नासा ने कहा कि हालांकि वातावरण में पानी की मौजूदगी का सौरमंडल से परे कुछ सुदूर ग्रहों पर पहले ही पता लगाया जा चुका है, लेकिन यह ऐसा पहला अध्ययन है जिसमें विविध ग्रहों पर पाए गए संकेतों का पूरी तरह मापन और आपस में तुलना की गई है। जिन पांच ग्रहों पर पानी के संकेत मिले हैं उनमें डब्ल्यूएएसपी-17बी, एचडी209458बी, डब्ल्यूएएसपी-12बी, डब्ल्यूएएसपी-19बी और एक्सओ-1बी शामिल हैं। यह अध्ययन हब्बल दूरबीन की मदद से किया गया है।मंगलवार को प्रकाशित हुए एस्ट्रोफिजिकल जर्नल पेपर के प्रमुख लेखक मेंडेल ने बताया कि इस काम से विभिन्न ग्रहों के वातावरण में उपस्थित पानी की मात्र की तुलना के रास्ते खुल गए हैं। उदाहरण के तौर पर गर्म और ठंडे ग्रहों की तुलना की जा सकती है। नासा ने बताया कि पांचों ग्रह गर्म हैं। शुरू में इनके धुंध से भरा हुआ प्रतीत होने पर वैज्ञानिक हैरान हो गए थे। इनमें से डब्ल्यूएएसपी-17बी ग्रह अतिरेक से भरे धुंध वाला है। लेकिन पानी के सबसे प्रबल संकेत वाला ग्रह एचडी209458बी है। वैज्ञानिक का कहना है कि हमारे सौरमंडल में बृहस्पति ग्रह जैसे बड़े, गर्म और अपने तारे के करीब भ्रमण करने वाले ग्रहों पर पानी मिलने के संकेत ज्यादा मिले हैं।नासा की रिपोर्ट में बताया गया है कि पानी की मौजूदगी के जो संकेत मिले हैं, उनमें भिन्नता है। मैरीलैंड के ग्रीनबेल्ट में स्थित नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर के ग्रह वैज्ञानिक एवी मेंडेल ने कहा कि हम इस बात को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं कि हमने विविध ग्रहों पर पानी के संकेत देखे हैं। sabhar : jagaran.com

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बच्चों की जान बचाने के लिए खुद को अपहर्ताओं के हवाले कर दिया

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गुवाहाटी, [कंचन]। असम के शिवसागर जिले के नाजिरा स्थित केंद्रीय विद्यालय की आठवीं कक्षा की छात्रा गुंजन शर्मा ने 10 बच्चों की जान बचाने के लिए खुद को अपहर्ताओं के हवाले कर दिया। बाद में मौका देखते ही वह अपहर्ता के चंगुल से भाग निकली। असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने 12 वर्षीय गुंजन की बहादुरी की प्रशंसा करते हुए पुरस्कार के लिए उसके नाम की सिफारिश राष्ट्रपति के पास भेजने की घोषणा की है।
सिमलगुड़ी बाजार में बुधवार दोपहर एक युवक पिस्तौल लेकर फिल्मी अंदाज में 11 स्कूली बच्चों से भरी वैन में घुसा और उन्हें अगवा कर लिया। हथियार का डर दिखाकर युवक वैन को नगालैंड की ओर लेकर चल दिया। बहादुर गुंजन ने बताया कि वैन में केजी से दूसरी कक्षा तक के बच्चे थे, जो पिस्तौल देख काफी डर गए थे। इस बीच वैन एक नाले में फंस गई तो अपहर्ता कक्षा दो की छात्रा अनन्या बरगोहाई समेत दो अन्य छात्राओं को अपने साथ ले जाने लगा। उसने अपहर्ता से सभी बच्चों को छोड़ खुद को साथ ले जाने का आग्रह किया, जिसे युवक ने मान लिया। वह उसे पैदल ही नगालैंड के जंगल की ओर लेकर चल दिया। इस दौरान सीआरपीएफ, असम राइफल्स के जवान और नगालैंड पुलिस रात भर उसकी तलाश करती रही। बहादुर गुंजन ने बताया कि ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर चलने के बाद युवक ने एक बांस के झुरमुट में रात बिताने को कहा। सुबह मौका पाकर वह जंगल से भाग निकली। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने उसे सिमलगुड़ी लाकर परिवार को सौंप दिया। sabhar : jagaran.com

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गुरुवार, 5 दिसंबर 2013

ग्लास, सेल्फ़ ड्राइविंग कार के बाद रोबोट विकसित करेगा गूगल

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मेका एम-1 रोबोटिक सिस्टम


गूगल ने पिछले छह महीने में सात रोबोट बनाने वाली कंपनियों का अधिग्रहण किया है और नए उत्पाद विकसित करने के लिए कर्मचारियों की भर्ती भी शुरू कर दी है.मेका के एम-वन रोबोट्स की तकनीक गूगल ने अधिगृहीत की है.गूगल के एक प्रवक्ता ने बताया है कि एंड्रॉएड ऑपरेटिंग सिस्टम निर्माण के प्रमुख रह चुके एंडी रुबिन गूगल के नए प्रयास का नेतृत्व कर रहे हैं.

'न्यूयार्क टाइम्स' अख़बार की एक रिपोर्ट के अनुसार गूगल फ़िलहाल जिन रोबोट्स पर काम कर रहा है, उन्हें वो अभी बेचना नहीं चाहता.हालांकि गूगल ने अभी तक ये नहीं बताया है कि वो किस तरह के रोबोट विकसित करेगा.अख़बार का कहना है कि गूगल सेल्फ़-ड्राइविंग कार में इस्तेमाल होने वाले रोबोट्स पर काम कर रहा है, ताकि सामानों की होम डिलीवरी में मदद मिल सके.
न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक़ हाल ही में गूगल ने सैन फ्रांसिस्को और सैन जोस मेंक्लिक करें           'शॉपिंग एक्सप्रेस' के नाम से किराने का सामान घर पहुंचाने वाली सेवा शुरू की है.यह भविष्य में अमेज़न की 'प्राइम एअर' प्रोजेक्टस को चुनौती दे सकता है जो ड्रोन के माध्यम से उपभोक्ताओं को सामान पहुंचाने की संभावनाओं पर विचार कर रही है.
हालांकि गूगल खुद अपनी परियोजना के बारे में जब तक नहीं बताता, तब तक इस परियोजना की सटीक जानकारी मिलना मुश्किल है.
एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के रोबोटिक लैब विभाग के निदेशक प्रोफ़ेसर सेतु विजयकुमार कहते हैं, "यह साफ़ है कि पर्सनल रोबोट और इससे जुड़ी अन्य तकनीकों के बाज़ार में उतरने के दिन बहुत करीब हैं."
उन्होंने कहा, "अब तक रोबोट बनाने संबंधी तकनीक की दिशा में गति और सेंसिंग सिस्टम में काफ़ी तरक्की हुई है. अब मुख्यधारा की गूगल जैसी कंपनियां चुनौती के लिए तैयार हैं. इससे ताक़तवर सॉफ्टवेयर के एकीकरण, मानकीकरण और माड्युलर डिज़ाइन बनाने में तेज़ी आएगी." sabhar : http://www.bbc.co.uk

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हनुमानजी का जन्म के सुबूत

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PHOTOS: यहां हुआ था हनुमानजी का जन्म...ये रहे पुख्ता सुबूत!
गुजरात स्थित डांग जिला रामायण काल में दंडकारण्य प्रदेश के रूप में पहचाना जाता था। डांग जिले के आदिवासियों की हमेशा से यह मानता रही कि भगवान राम वनवास के दरमियान पंचवटी की ओर जाते समय डांग प्रदेश से गुजरे थे। डांग जिले के सुबिर के पास भगवान राम और लक्ष्मण को शबरी माता ने बेर खिलाए थे। आज यह स्थल शबरी धाम नाम से जाना जाता है।
 
शबरी धाम से लगभग 7 किमी की दूरी पर पूर्णा नदी पर स्थित पंपा सरोवर है। यहीं मातंग ऋषि का आश्रम था। डांग जिले के आदिवासियों की सबसे प्रबल मानता यह भी है कि डांग जिले के अंजनी पर्वत में स्थित अंजनी गुफा में ही हनुमानजी का भी जन्म हुआ था।कहा जाता है कि अंजनी माता ने अंजनी पर्वत पर ही कठोर तपस्या की थी और इसी तपस्या के फलस्वरूप उन्हें पुत्र रत्न यानि की हनुमान जी की प्राप्ति हुई थी। माता अंजनी ने अंजनी गुफा में ही हनुमानजी को जन्म दिया था।अंजनी गुफा से लगे हुए अंजनी कुंड में बाल हनुमान स्नान किया करते थे और इसी पर्वत पर खड़े होकर उन्होंने सूर्य को फल समझ लिया था, जिसके बाद उन्हें मुंह में रख लिया था। इसी भूमि पर ही उन्होंने शनिदेव को अपने वश में किया था।यहां रहने वाले लभगग सभी लोगों के नाम रामायण के पात्रों पर हैं जैसे कि राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघन, सीता, जानकी, लक्षु, रघु, रघुनाथ आदि।डांग जिले का हरेक व्यक्ति हनुमानजी का भक्त है। अंजनी पर्वत की तलहटी में ही अंजनकुंड गांव बसा हुआ है।
PHOTOS: यहां हुआ था हनुमानजी का जन्म...ये रहे पुख्ता सुबूत!
अंजनी पर्वत के बारे में यह भी कहा जाता है कि वनवास के दरमियान राम भगवान पंचवटी की ओर जाने के लिए यहां से दानवों का संहार कर ऋषि-मुनियों का उद्धार करने के लिए ही गुजरे थे
अंजनी पर्वत आज भी अनेक प्रकार की दुर्लभ वनस्पतियों और जड़ी-बूटियों से अटा पड़ा है। यहां रहने वाले अनेक लोग अपने आपको शबरी माता की वंशज भी मानते हैं।
PHOTOS: यहां हुआ था हनुमानजी का जन्म...ये रहे पुख्ता सुबूत!


PHOTOS: यहां हुआ था हनुमानजी का जन्म...ये रहे पुख्ता सुबूत!


PHOTOS: यहां हुआ था हनुमानजी का जन्म...ये रहे पुख्ता सुबूत!

sabhar : bhaskar.com

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बुधवार, 4 दिसंबर 2013

पेड़ :जिसको छूने मात्र से ही आपकी सारी थकान गायब हो जाए

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PICS: हजारों साल पुराने चमत्कारी पेड़ के बारे में जान, रह जाएंगे हैरान!

अभी तक आपने कई पेड़ पौधों के बारे में सुना होगा। उनकी चमत्कारिक शक्तियों के बारे में भी जानते होंगे। पर क्या किसी ऐसे पेड़ के बारे में भी सुना है जिसको छूने मात्र से ही आपकी सारी थकान गायब हो जाए। आपकी मांगी हुई सारी मन्नतें भी पूरी हो जाए जी हां बाराबंकी जिले में एक ऐसा ही पेड़ है जो कई सालों से श्रद्धा और आस्था का केंद्र बिंदु बना हुआ है। उसका नाम है परिजात। आइए पहले हम आपको परिजात की विशेषताओं के बारे में बता दें। राजधानी लखनऊ से 28 किमी दूर बाराबंकी के रामनगर क्षेत्र में बोरोलिया गांव में परिजात वृक्ष स्थित है। करीब पैंतालिस फीट ऊंचे और पचास फीट मोटे इस परिजात की अधिकांश शाखाएं धरती की और मुड़ जाती हैं। धरती छूते ही यह शाखाएं अपने आप सूख जाती है। यह भी कहा जाता है कि परिजात वृक्ष की प्रजाति भारत में नहीं मिलती। पूरे भारत में एक मात्र यही परिजात है। इसकी आयु करीब पांच हज़ार से एक हज़ार साल तक होती हैमान्यता है की परिजात पेड़ की उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई थी। जिसे भगवान इंद्रा ने अपनी वाटिका में रोप दिया था। माना जाता है जब पांडव पुत्र कुंती के साथ अज्ञातवास कर रहे थे, तब उन्होंने ही सत्यभामा की वाटिका से उसे लाकर बोरोलिया गांव में रोपित किया था। तब से ही यह वृक्ष आस्था का केंद्र बना हुआ है। यह भी मान्यता है कि अर्जुन परिजात को स्वर्ग से लेकर आए थे।यह भी कहा जाता है समुद्र मंथन के बाद स्वर्गलोक के राजा इंद्र ने नारद ऋषि को पारिजात के कुछ फूल भेंट में दिए थे। नारद जी ने उन फूलों में से एक भगवान कृष्ण को दिया। जिसे उन्होंने अपनी पत्नी रुकमणी को भेंट कर दिया। यह देख नारद जी श्रीकृष्ण की दूसरी पत्नी सत्यभामा के पास गए और सारा हाल उन्हे बतलाया। यह सुनकर सत्यभामा के मन में द्वेष की भावना आ गई। नारद जी ने उन्हें सुझाव दिया कि वह भी श्रीकृष्ण से वैसा ही फूल ला कर देने का अनुरोध करें। साथ ही नारद जी ने इंद्र को भी सावधान कर दिया। भगवान श्रीकृष्ण और सत्यभामा परिजात वृक्ष की एक डाल ले जा रहे थे तभी वहां इंद्र आ गए और कृष्ण से वृक्ष न ले जाने का अनुरोध किया। कृष्ण के ना मानने पर युद्ध छिड़ गया और इंद्र को हार का मुंह देखना पड़ा।परिजात वृक्ष को कल्प वृक्ष भी कहा जाता है। मान्यता है कि यह सभी की कामनाओं को पूर्ण करता है। यह वृक्ष उन 14 रत्नों में से एक है जो समुद्र मंथन द्वारा देवताओं और असुरों ने प्राप्त किए थे। यह वृक्ष महाभारत काल से मौजूद हैबाराबंकी के बोरोलिया में यह पेड़ पिछले कई वर्षों से कई लोगों की जहां थकान दूर कर रहा है। वहीं कईयों की मनौतियां भी पूरी कर रहा है। ऐसे में यदि आप लखनऊ घूमने आ रहे हैं, तो आप की भी कोई इच्छा हो तो बोरोलिया गांव आकर स्वर्ग से आए इस पेड़ से अपनी मनौतियों को मान सकते हैं। sabhar : bhaskar.com

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पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के सामने ऐसे चमत्कार दिखाए कि वह अचंभित रह गए

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सच्ची घटना-6: इस बाबा के चमत्कारों को जान, पूर्व प्रधानमंत्री भी हो गए थे हैरान!





 एक संत ने गांधीवादी नेता और देश के पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के सामने ऐसे चमत्कार दिखाए कि वह अचंभित रह गए। आगे चलकर मोरारजी देसाई ने इन घटनाओं के वर्णन अपने लेखों में भी किया।
 
मोरारजी देसाई रामचरित मानस में भगवान राम और गीता में श्रीकृष्ण की बातों का आत्मसात करने वाले धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे। उन्होंने अपने लेखों में रामचरित मानस का जिक्र करते हुए लिखा है कि विज्ञान उस समय जिन बुलंदियों पर था, वहां पहुंचने में इस पीढ़ी को अभी वक़्त लगेगा। उन्हें संत महात्माओं की सिद्धि पर यकीन था और अपनी आंखों से इन सिद्धियों का चमत्कार उन्होंने भी देखा था।मोरारजी देसाई ने 1956 की एक घटना का जिक्र करते हुए अपने एक लेख में कहा है कि एक कन्नड़ संत उनके पास आए और बातचीत के दौरान उनके प्रश्नों का उत्तर देने की बात कही। (घटना के वर्णन के अनुसार उन्होंने संत के नाम का जिक्र अपने लेख में नहीं किया) उस संत ने मोरारजी देसाई से कहा कि आप जिस भाषा में लिखित प्रश्न करेंगे, उसी भाषा में वह लिखित जवाब देंगे, वह भी बिना प्रश्नों को देखे। 


सच्ची घटना-6: इस बाबा के चमत्कारों को जान, पूर्व प्रधानमंत्री भी हो गए थे हैरान!

पहले तो मोरारजी भाई ने इस पर विश्वास नहीं किया। फिर उन्होंने के कागज पर गुजराती में तीन प्रश्न लिखकर उस कागज को उलटकर रख दिया। इसके बाद संत ने भी अपनी जगह बैठे-बैठे ही प्रश्नों के उत्तर एक कागज पर लिख मोरारजी देसाई को सौंप दिए। उन्होंने देखा कि उत्तर भी गुजराती में थे और उन्हीं प्रश्नों से सम्बंधित उत्तर थे जो उन्होंने अपने पास रखे कागज़ पर लिखे थे।मोरारजी देसाई ने आश्चर्यचकित हो उन संत से पूछा कि आखिर यह सिद्धि उनको कहां से मिली। इस पर संत ने जवाब दिया कि परीक्षा में फेल होने पर उन्होंने कुएं में कूदकर आत्महत्या का प्रयास किया था। अचानक एक हाथ ने उन्हें कुएं से खींचकर निकाला। देखा तो वह एक साधू थे। उन्होंने उनको अपना शिष्य बना लिया।एक दिन गुरु देव बोले चलो हिमालय चलते हैं। उन्होंने कहा वह बहुत दूर है, वहां जाने में तो समय लगेगा। इस पार उन्होंने उनकी आंखों पर काली पट्टी बांध दी। दो मिनट बाद जब पट्टी खोली तो देखा चारों तरफ बर्फ ही बर्फ थी, ध्यान से देखा तो वह हिमालय पहुचं चुके थे। वहां उन्होंने उनको कई विद्याएं सिखाई, जिनमें से यह भी एक थी। एक दिन उन्होंने घर वापस जाने की इच्छा जाहिर की तो उनके गुरू ने एक बार फिर आंखों पर पट्टी बांधी और जब उन्होंने पट्टी खोली तो वह घर पर थे। sabhar : bhaskar.com


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नर सूअर और मादा चिंपैंजी के मिलन से जन्मा मानव!

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नर सूअर और मादा चिंपैंजी के मिलन से जन्मा मानव!

ज़ी मीडिया ब्यूरो

नई दिल्ली : एक ताजे अध्ययन में दावा किया गया है कि मनुष्य का जन्म नर सूअर और मादा चिंपैंजी के मिलन से हुआ। इस बात का दावा जॉर्जिया विश्वविद्यालय के जेनेसिस्ट यूजिन मैकार्थी ने अपने शोध में किया है। मैकार्थी पशुओं के संकर नस्ल पर विशेषज्ञता रखते हैं।

मैकार्थी ने अपने शोध में कहा है कि चिंपैंजी और मनुष्य में असमानताओं के साथ-साथ ढेर सारी समानताएं भी पाई जाती हैं। मैकार्थी के मुताबिक मनुष्य में चिंपैंजी और सूअर दोनों के लक्षण पाए जाते हैं। बंदरों और मनुष्य के बीच जो मुख्य अंतर है, वह सूअर के साथ वर्ण संकर की वजह से है। 

चिंपैंजी और मनुष्य के जीन में बहुत सारी समानताएं होने के बावजूद दोनों की शारीरिक संरचना में मूलभूत अंतर पाया जाता है। इन अंतरों के कारण ही चिंपैंजी और मनुष्य अलग-अलग हैं और चिंपैंजी एवं मनुष्य के बीच अंतर की भरपाई सूअर के जीन द्वारा होती है। 

मैकार्थी के मुताबिक रोंआहीन त्वचा, उसके नीचे सबक्यूटेनियस वसा का आवरण, हल्के रंग की आंखें, उभरी हुईं नाक, घनी भौंहें आदि सारी शारीरिक विशेषताएं सूअर से मिलती-जुलती हैं। मनुष्य की जो शारीरिक संरचनाएं चिंपैंजी से मेल नहीं खातीं, वे संरचनाएं सूअर से मेल खाती हैं। 

मैकार्थी का दावा है कि सूअर के चमड़े का कोष और हृदय दोनों मनुष्य से मेल खाते हैं और चिकित्सा क्षेत्र मंृ भी इस बात के पर्याप्त प्रमाण मिलते हैं।

मैकार्थी के अनुसार यह ‘संकरायन प्रक्रिया’ कई प्रजन्मों से चलती आ रही है। मैकार्थी का दावा है कि सूअर और चिंपैंजी के बीच ‘बैक-क्रासिंग’ भी चली और इसी प्रक्रिया में संततियों में जीन्स का जोड़-घटाव चलता रहा। कालांतर में यह नई प्रजाति जनन में सक्षम में हो गई और मानव जाति का उदय हुआ। sabhar :Zeenews.india.com

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मंगलवार, 3 दिसंबर 2013

बोरे के अंदर थी 25 साल की युवती की लाश

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बोरे के खुलते ही फैली सनसनी, अंदर थी 25 साल की युवती!
इंदौर. सुबह आठ बजे रोज की तरह लोगों की हाईवे पर आवाजाही लगी हुई थी। इसी बीच हीरानगर से पुलिस का एक दल रोड से काफी तेजी से गुजरा। यहां से गुजरने वालों को ऐसा तो आभास हुआ कि कोई मामला हुआ है। पुलिस कुछ ही दूर जाकर सुखलिया चौराहे के पास से निरंजनपुर जाने वाले रास्ते पर ईश्वर नगर के समीप रुक गई। यहां एक बोरा पड़ा हुआ था। बोरे के पास पहुंचकर जब पुलिस ने इसे खोला तो एक 25-२6 साल की गोरे रंग के हुलिए वाली युवती बोरे के अंदर थी। युवती के गले पर धारदार हथियार से चोट का निशान था और उसके दोनों पैर मुड़े हुए थे। इससे ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो उसके पैर टूटे हों। पुलिस को किसी ने यहां पर लावारिस बोरा पड़ा होने की जानकारी दी थी, जिसमें कुछ होने का अंदेशा जताया गया था। युवती के हुलिए को देखकर लग रहा था कि वह संभ्रांत परिवार से ताल्लुक रखती है। लसुडिया पुलिस भी मौके पर पहुंच गई थी।बोरे में युवती की लाश होने की जानकारी मिलते ही पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। हर कोई वहां पहुंचने की जल्दी में दिखा। देखते ही देखते सैकड़ों की तादात में लोग घटना स्थल पर पहुंच गए। यहां पहुंचे लोगों ने युवती को पहचानने की कोशिश की, लेकिन कोई भी उसे पहचान नहीं पाया। प्रारंभिक जांच में ऐसा माना गया कि युवती की हत्या सुबह-सुबह ही हुई है और उसके साथ दुष्कर्म जैसी घटना नहीं हुई है।
बोरे के खुलते ही फैली सनसनी, अंदर थी 25 साल की युवती!

sabhar : bhaskar.com

 

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रविवार, 1 दिसंबर 2013

इसके पेट में धड़कता था दिल

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चीन का अनोखा शख्स, इसके पेट में धड़कता था दिल, देखें तस्वीरें

चीन के हो झिलियांग का दिल सीने में नहीं बल्कि पेट में है। 24 वर्षीय झिलियांग को कोनजेनिटल कार्डियक एक्सपोजर सिन्ड्रोम नाम की बीमारी है। एक ओर जहां सामान्य स्थिति में दिल, सीने में होता है और नजर नहीं आता वहीं इस शख्स का दिल त्वचा के नीचे धड़कता हुआ दिखाई देता है।
चीन का अनोखा शख्स, इसके सीने की जगह पेट में धड़कता था दिल

झिलियांग बताते हैं कि उनके मां-बाप को भरोसा भी नहीं था कि वो इतने साल जिंदा रहेंगे। वो जिंदा तो रहे लेकिन अब उन्हें सर्जरी की जरूरत है।अमूमन इस सिन्ड्रोम से पीडि़त 90 फीसदी लोग जिंदा नहीं रह पाते हैं, लेकिन झिलियांग उन 10 फीसद खुशकिस्मत लोगों में से एक हैं।

चीन का अनोखा शख्स, इसके सीने की जगह पेट में धड़कता था दिल

डॉक्टरों ने 10 घंटे चली सर्जरी के बाद उनके दिल को ठीक जगह फिट कर दिया और अब उनके दिल में किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं है। 
 sabhar : bhaskar.com

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