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December 1, 2013 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

पांच सुदूर ग्रहों के वायुमंडल में पानी की मौजूदगी के संकेत

ग्रहों के वायुमंडल में पानी की मौजूदगी के संकेत ,नासा के नासा के वैज्ञानिकों ने पांच सुदूर ग्रहों के वायुमंडल में पानी की मौजूदगी के संकेत मिलने का दावा किया है।मिलने का दावा किया है नासा ने कहा कि हालांकि वातावरण में पानी की मौजूदगी का सौरमंडल से परे कुछ सुदूर ग्रहों पर पहले ही पता लगाया जा चुका है, लेकिन यह ऐसा पहला अध्ययन है जिसमें विविध ग्रहों पर पाए गए संकेतों का पूरी तरह मापन और आपस में तुलना की गई है। जिन पांच ग्रहों पर पानी के संकेत मिले हैं उनमें डब्ल्यूएएसपी-17बी, एचडी209458बी, डब्ल्यूएएसपी-12बी, डब्ल्यूएएसपी-19बी और एक्सओ-1बी शामिल हैं। यह अध्ययन हब्बल दूरबीन की मदद से किया गया है।मंगलवार को प्रकाशित हुए एस्ट्रोफिजिकल जर्नल पेपर के प्रमुख लेखक मेंडेल ने बताया कि इस काम से विभिन्न ग्रहों के वातावरण में उपस्थित पानी की मात्र की तुलना के रास्ते खुल गए हैं। उदाहरण के तौर पर गर्म और ठंडे ग्रहों की तुलना की जा सकती है। नासा ने बताया कि पांचों ग्रह गर्म हैं। शुरू में इनके धुंध से भरा हुआ प्रतीत होने पर वैज्ञानिक हैरान हो गए थे। इनमें से डब्ल्यूएएसपी-17बी ग्रह अतिरेक से भरे धुंध वा…

बच्चों की जान बचाने के लिए खुद को अपहर्ताओं के हवाले कर दिया

गुवाहाटी, [कंचन]। असम के शिवसागर जिले के नाजिरा स्थित केंद्रीय विद्यालय की आठवीं कक्षा की छात्रा गुंजन शर्मा ने 10 बच्चों की जान बचाने के लिए खुद को अपहर्ताओं के हवाले कर दिया। बाद में मौका देखते ही वह अपहर्ता के चंगुल से भाग निकली। असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने 12 वर्षीय गुंजन की बहादुरी की प्रशंसा करते हुए पुरस्कार के लिए उसके नाम की सिफारिश राष्ट्रपति के पास भेजने की घोषणा की है। सिमलगुड़ी बाजार में बुधवार दोपहर एक युवक पिस्तौल लेकर फिल्मी अंदाज में 11 स्कूली बच्चों से भरी वैन में घुसा और उन्हें अगवा कर लिया। हथियार का डर दिखाकर युवक वैन को नगालैंड की ओर लेकर चल दिया। बहादुर गुंजन ने बताया कि वैन में केजी से दूसरी कक्षा तक के बच्चे थे, जो पिस्तौल देख काफी डर गए थे। इस बीच वैन एक नाले में फंस गई तो अपहर्ता कक्षा दो की छात्रा अनन्या बरगोहाई समेत दो अन्य छात्राओं को अपने साथ ले जाने लगा। उसने अपहर्ता से सभी बच्चों को छोड़ खुद को साथ ले जाने का आग्रह किया, जिसे युवक ने मान लिया। वह उसे पैदल ही नगालैंड के जंगल की ओर लेकर चल दिया। इस दौरान सीआरपीएफ, असम राइफल्स के जवान और नगालैंड पुलि…

ग्लास, सेल्फ़ ड्राइविंग कार के बाद रोबोट विकसित करेगा गूगल

गूगल ने पिछले छह महीने में सात रोबोट बनाने वाली कंपनियों का अधिग्रहण किया है और नए उत्पाद विकसित करने के लिए कर्मचारियों की भर्ती भी शुरू कर दी है.मेका के एम-वन रोबोट्स की तकनीक गूगल ने अधिगृहीत की है.गूगल के एक प्रवक्ता ने बताया है कि एंड्रॉएड ऑपरेटिंग सिस्टम निर्माण के प्रमुख रह चुके एंडी रुबिन गूगल के नए प्रयास का नेतृत्व कर रहे हैं.

'न्यूयार्क टाइम्स' अख़बार की एक रिपोर्ट के अनुसार गूगल फ़िलहाल जिन रोबोट्स पर काम कर रहा है, उन्हें वो अभी बेचना नहीं चाहता.हालांकि गूगल ने अभी तक ये नहीं बताया है कि वो किस तरह के रोबोट विकसित करेगा.अख़बार का कहना है कि गूगल सेल्फ़-ड्राइविंग कार में इस्तेमाल होने वाले रोबोट्स पर काम कर रहा है, ताकि सामानों की होम डिलीवरी में मदद मिल सके. न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक़ हाल ही में गूगल ने सैन फ्रांसिस्को और सैन जोस मेंक्लिक करें           'शॉपिंग एक्सप्रेस' के नाम से किराने का सामान घर पहुंचाने वाली सेवा शुरू की है.यह भविष्य में अमेज़न की 'प्राइम एअर' प्रोजेक्टस को चुनौती दे सकता है जो ड्रोन के माध्यम से उपभोक्ताओं को सामान पहुंचाने…

हनुमानजी का जन्म के सुबूत

गुजरात स्थित डांग जिला रामायण काल में दंडकारण्य प्रदेश के रूप में पहचाना जाता था। डांग जिले के आदिवासियों की हमेशा से यह मानता रही कि भगवान राम वनवास के दरमियान पंचवटी की ओर जाते समय डांग प्रदेश से गुजरे थे। डांग जिले के सुबिर के पास भगवान राम और लक्ष्मण को शबरी माता ने बेर खिलाए थे। आज यह स्थल शबरी धाम नाम से जाना जाता है। शबरी धाम से लगभग 7 किमी की दूरी पर पूर्णा नदी पर स्थित पंपा सरोवर है। यहीं मातंग ऋषि का आश्रम था। डांग जिले के आदिवासियों की सबसे प्रबल मानता यह भी है कि डांग जिले के अंजनी पर्वत में स्थित अंजनी गुफा में ही हनुमानजी का भी जन्म हुआ था।कहा जाता है कि अंजनी माता ने अंजनी पर्वत पर ही कठोर तपस्या की थी और इसी तपस्या के फलस्वरूप उन्हें पुत्र रत्न यानि की हनुमान जी की प्राप्ति हुई थी। माता अंजनी ने अंजनी गुफा में ही हनुमानजी को जन्म दिया था।अंजनी गुफा से लगे हुए अंजनी कुंड में बाल हनुमान स्नान किया करते थे और इसी पर्वत पर खड़े होकर उन्होंने सूर्य को फल समझ लिया था, जिसके बाद उन्हें मुंह में रख लिया था। इसी भूमि पर ही उन्होंने शनिदेव को अपने वश में किया था।यहां रहने वाले …

पेड़ :जिसको छूने मात्र से ही आपकी सारी थकान गायब हो जाए

अभी तक आपने कई पेड़ पौधों के बारे में सुना होगा। उनकी चमत्कारिक शक्तियों के बारे में भी जानते होंगे। पर क्या किसी ऐसे पेड़ के बारे में भी सुना है जिसको छूने मात्र से ही आपकी सारी थकान गायब हो जाए। आपकी मांगी हुई सारी मन्नतें भी पूरी हो जाए जी हां बाराबंकी जिले में एक ऐसा ही पेड़ है जो कई सालों से श्रद्धा और आस्था का केंद्र बिंदु बना हुआ है। उसका नाम है परिजात। आइए पहले हम आपको परिजात की विशेषताओं के बारे में बता दें। राजधानी लखनऊ से 28 किमी दूर बाराबंकी के रामनगर क्षेत्र में बोरोलिया गांव में परिजात वृक्ष स्थित है। करीब पैंतालिस फीट ऊंचे और पचास फीट मोटे इस परिजात की अधिकांश शाखाएं धरती की और मुड़ जाती हैं। धरती छूते ही यह शाखाएं अपने आप सूख जाती है। यह भी कहा जाता है कि परिजात वृक्ष की प्रजाति भारत में नहीं मिलती। पूरे भारत में एक मात्र यही परिजात है। इसकी आयु करीब पांच हज़ार से एक हज़ार साल तक होती हैमान्यता है की परिजात पेड़ की उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई थी। जिसे भगवान इंद्रा ने अपनी वाटिका में रोप दिया था। माना जाता है जब पांडव पुत्र कुंती के साथ अज्ञातवास कर रहे थे, तब उन्होंने ही सत…

पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के सामने ऐसे चमत्कार दिखाए कि वह अचंभित रह गए

एक संत ने गांधीवादी नेता और देश के पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के सामने ऐसे चमत्कार दिखाए कि वह अचंभित रह गए। आगे चलकर मोरारजी देसाई ने इन घटनाओं के वर्णन अपने लेखों में भी किया। मोरारजी देसाई रामचरित मानस में भगवान राम और गीता में श्रीकृष्ण की बातों का आत्मसात करने वाले धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे। उन्होंने अपने लेखों में रामचरित मानस का जिक्र करते हुए लिखा है कि विज्ञान उस समय जिन बुलंदियों पर था, वहां पहुंचने में इस पीढ़ी को अभी वक़्त लगेगा। उन्हें संत महात्माओं की सिद्धि पर यकीन था और अपनी आंखों से इन सिद्धियों का चमत्कार उन्होंने भी देखा था।मोरारजी देसाई ने 1956 की एक घटना का जिक्र करते हुए अपने एक लेख में कहा है कि एक कन्नड़ संत उनके पास आए और बातचीत के दौरान उनके प्रश्नों का उत्तर देने की बात कही। (घटना के वर्णन के अनुसार उन्होंने संत के नाम का जिक्र अपने लेख में नहीं किया) उस संत ने मोरारजी देसाई से कहा कि आप जिस भाषा में लिखित प्रश्न करेंगे, उसी भाषा में वह लिखित जवाब देंगे, वह भी बिना प्रश्नों को देखे। 


पहले तो मोरारजी भाई ने इस पर विश्वास नहीं किया। फिर उन्होंने के …

नर सूअर और मादा चिंपैंजी के मिलन से जन्मा मानव!

ज़ी मीडिया ब्यूरो

नई दिल्ली : एक ताजे अध्ययन में दावा किया गया है कि मनुष्य का जन्म नर सूअर और मादा चिंपैंजी के मिलन से हुआ। इस बात का दावा जॉर्जिया विश्वविद्यालय के जेनेसिस्ट यूजिन मैकार्थी ने अपने शोध में किया है। मैकार्थी पशुओं के संकर नस्ल पर विशेषज्ञता रखते हैं।

मैकार्थी ने अपने शोध में कहा है कि चिंपैंजी और मनुष्य में असमानताओं के साथ-साथ ढेर सारी समानताएं भी पाई जाती हैं। मैकार्थी के मुताबिक मनुष्य में चिंपैंजी और सूअर दोनों के लक्षण पाए जाते हैं। बंदरों और मनुष्य के बीच जो मुख्य अंतर है, वह सूअर के साथ वर्ण संकर की वजह से है। 

चिंपैंजी और मनुष्य के जीन में बहुत सारी समानताएं होने के बावजूद दोनों की शारीरिक संरचना में मूलभूत अंतर पाया जाता है। इन अंतरों के कारण ही चिंपैंजी और मनुष्य अलग-अलग हैं और चिंपैंजी एवं मनुष्य के बीच अंतर की भरपाई सूअर के जीन द्वारा होती है। 

मैकार्थी के मुताबिक रोंआहीन त्वचा, उसके नीचे सबक्यूटेनियस वसा का आवरण, हल्के रंग की आंखें, उभरी हुईं नाक, घनी भौंहें आदि सारी शारीरिक विशेषताएं सूअर से मिलती-जुलती हैं। मनुष्य की जो शारीरिक संरचनाएं चिंपैंजी से मेल नहीं…

बोरे के अंदर थी 25 साल की युवती की लाश

इंदौर. सुबह आठ बजे रोज की तरह लोगों की हाईवे पर आवाजाही लगी हुई थी। इसी बीच हीरानगर से पुलिस का एक दल रोड से काफी तेजी से गुजरा। यहां से गुजरने वालों को ऐसा तो आभास हुआ कि कोई मामला हुआ है। पुलिस कुछ ही दूर जाकर सुखलिया चौराहे के पास से निरंजनपुर जाने वाले रास्ते पर ईश्वर नगर के समीप रुक गई। यहां एक बोरा पड़ा हुआ था। बोरे के पास पहुंचकर जब पुलिस ने इसे खोला तो एक 25-२6 साल की गोरे रंग के हुलिए वाली युवती बोरे के अंदर थी। युवती के गले पर धारदार हथियार से चोट का निशान था और उसके दोनों पैर मुड़े हुए थे। इससे ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो उसके पैर टूटे हों। पुलिस को किसी ने यहां पर लावारिस बोरा पड़ा होने की जानकारी दी थी, जिसमें कुछ होने का अंदेशा जताया गया था। युवती के हुलिए को देखकर लग रहा था कि वह संभ्रांत परिवार से ताल्लुक रखती है। लसुडिया पुलिस भी मौके पर पहुंच गई थी।बोरे में युवती की लाश होने की जानकारी मिलते ही पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। हर कोई वहां पहुंचने की जल्दी में दिखा। देखते ही देखते सैकड़ों की तादात में लोग घटना स्थल पर पहुंच गए। यहां पहुंचे लोगों ने युवती को पहचानने की कोश…

इसके पेट में धड़कता था दिल

चीन के हो झिलियांग का दिल सीने में नहीं बल्कि पेट में है। 24 वर्षीय झिलियांग को कोनजेनिटल कार्डियक एक्सपोजर सिन्ड्रोम नाम की बीमारी है। एक ओर जहां सामान्य स्थिति में दिल, सीने में होता है और नजर नहीं आता वहीं इस शख्स का दिल त्वचा के नीचे धड़कता हुआ दिखाई देता है।


झिलियांग बताते हैं कि उनके मां-बाप को भरोसा भी नहीं था कि वो इतने साल जिंदा रहेंगे। वो जिंदा तो रहे लेकिन अब उन्हें सर्जरी की जरूरत है।अमूमन इस सिन्ड्रोम से पीडि़त 90 फीसदी लोग जिंदा नहीं रह पाते हैं, लेकिन झिलियांग उन 10 फीसद खुशकिस्मत लोगों में से एक हैं।



डॉक्टरों ने 10 घंटे चली सर्जरी के बाद उनके दिल को ठीक जगह फिट कर दिया और अब उनके दिल में किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं है। 
 sabhar : bhaskar.com