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शुक्रवार, 11 अक्तूबर 2013

वैज्ञानिकों ने त्वचा कोशिकाओं से बनाया इंसानी भ्रूण

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Scientists

दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर ली है। शोधकर्ता त्वचा कोशिकाओं से शुरुआती दौर का मानव भ्रूण तैयार करने में कामयाब हो गए हैं। उनकी इस सफलता से अब पार्किंसन, मल्टीपल सिरोसिस, रीढ़ की हड्डी में चोट और हृदय संबंधी रोगों में प्रत्यारोपण के लिए विशेष उत्तक कोशिकाओं को तैयार करने में आसानी होगी।
अमेरिका के ओरेगन नेशनल प्राइमेट रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिकों ने यह अहम उपलब्धि हासिल की है। सेंटर के वरिष्ठ वैज्ञानिक सुखरात मितालीपोव की अगुवाई में शोधकर्ताओं की टीम ने सोमैटिक सेल न्यूक्लियर ट्रांसफर तकनीक का इस्तेमाल करते हुए मानव शरीर की त्वचा कोशिकाओं को शुरुआती दौर के भ्रूण में तब्दील किया। समाचार पत्र इंडिपेंडेंट के अनुसार वैज्ञानिकों ने क्लोनिंग से डॉली भेड़ के जन्म के 17 वर्ष बाद यह उपलब्धि हासिल की है। अखबार में प्रकाशित शोध पत्र में कहा गया है कि त्वचा कोशिकाओं से भ्रूण तैयार करने में कामयाबी के बाद वैज्ञानिक अब क्लोनिंग के जरिये इंसान पैदा करने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ गए हैं।
मितालीपोव के मुताबिक अब अंग प्रत्यारोपण आपरेशन के लिए विशेष उत्तक का निर्माण मरीज की त्वचा से करना सहज होगा। उनका कहना था, हमारे शोध का गंभीर रोगों के इलाज के लिए भ्रूणीय स्टेम सेल तैयार करना था। इसका मानव क्लोनिंग संबंधी शोध से कोई लेनादेना नहीं है। जबकि दूसरे वैज्ञानिकों का कहना है कि यह मानव क्लोनिंग की दिशा में एक अहम कदम है। sabhar :jagaran.com

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अब स्टेम कोशिकाओं से पैदा होंगे बच्चे

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Now stem cells
लंदन। स्टेम कोशिकाओं से मानव अंग विकसित करने के प्रयोगों के बाद अब वैज्ञानिकों ने इन कोशिकाओं से नए जीवन की पैदाइश में सफलता हासिल की है। जापान के शोधकर्ताओं ने चूहों पर किए गए परीक्षण में इन कोशिकाओं का इस्तेमाल अंडाणु बनाने में किया।
शोधकर्ताओं ने बताया कि परीक्षण सफल रहा और चूहों का जन्म हुआ। कुल मिलाकर प्रयोग में शामिल हुए चूहों के वंश का मूल एक कोशिका है। स्टेम कोशिकाओं की खासियत है कि वह शरीर में किसी भी कोशिका का रूप ले सकती हैं। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले क्योटो यूनिवर्सिटी में स्टेम कोशिकाओं से शुक्राणु बनाने के प्रयोग भी हो चुके हैं। अब इससे एक कदम आगे बढ़कर वैज्ञानिकों ने प्रजनन के लिए स्टेम कोशिकाओं से अंडा बनाने में सफलता पाई है। शोध के तहत वैज्ञानिकों ने पहले त्वचा और भ्रूण से स्टेम कोशिकाएं लीं। इसके बाद अंडाणु बनाने की प्रक्रिया प्रारंभ हुई। इन अंडाणुओं को विकसित करने के लिए इनके आसपास गर्भाशय में मौजूद रहने वाली कोशिकाएं विकसित की गईं और फिर इन्हें एक मादा चूहे के शरीर में प्रत्यर्पित किया गया।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस तकनीक से उन दंपतियों की मदद की जा सकती है, जिन्हें संतान का सुख नहीं मिल पा रहा है। अगर शोधकर्ता ऐसा करने में सफलता हासिल कर लेते हैं, तो यह पद्धति जीव-विज्ञान के इतिहास में बाइबल की तरह बन जाएगी। sabhar : jagaran.com

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डॉक्टरों ने मां के गर्भ में की भ्रूण के दिल की सफल सर्जरी

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heart surgery

लॉस एंजलिस। अमेरिकी डॉक्टरों ने अपनी तरह की एक दुर्लभ हार्ट सर्जरी कर एक महिला के गर्भ में पल रहे 25 सप्ताह के भू्रण को नई जिंदगी दी। डॉक्टरों ने अजन्मे शिशु के हृदय की सर्जरी में बाल जैसे महीन तार, बारीक सुई और छोटे गुब्बारे का इस्तेमाल किया। इस सफल सर्जरी के पहले उन्होंने अंगूर पर इसका अभ्यास किया था।लॉस एंजिलिस टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, जांच में पता चला कि भूण ऐऑर्टिक स्टिनोसिस से पीड़ित है। इसमें हृदय का महाधमनी वॉल्व काफी संकुचित हो जाता है। इसके चलते उसके बायें वेंट्रकल (निलय) में खून का प्रवाह सामान्य रूप से हो नहीं पा रहा था। डॉक्टरों ने बताया कि सर्जरी के बिना उसका बायां वेंट्रकल ठीक से विकसित हो नहीं सकता था। उसके हाईपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट सिंड्रोम (एचएवएचएस) के साथ जन्म लेने की संभावना थी जोकि उसके जीवन के लिए गंभीर खतरा हो सकता था। उन्होंने कहा कि अजन्मे शिशु के हृदय के संकीर्ण महाधमनी वाल्व की सर्जरी को फोएटस ऐऑर्टिक वल्वुलोप्लास्टी कहा जाता है। सर्जरी के लिए शिशु और उसकी मां दोनों को बेहोश किया गया था। डॉक्टरों ने बताया कि सर्जरी के बाद मां और शिशु दोनों ठीक हैं। इस सर्जरी को यहां सीएचए हॉलीवुड प्रेस्बिटेरियन मेडिकल सेंटर में अंजाम दिया गया। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. जे प्रुएत्स ने बताया कि सर्जरी के कुछ सप्ताह बाद ही भ्रूण के हृदय में पहले की तुलना खून का प्रवाह ठीक से हो रहा है। sabhar : jagaran.com

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आसाराम करते थे विवाहिताओं का भी शोषण

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asaram bapu

शाहजहांपुर [जागरण संवाददाता]। नाबालिग से रेप के आरोप में फंसे आसाराम के कृत्यों की फेहरिस्त में एक और सनसनीखेज खुलासा हुआ है। आसाराम का 'शिकार' सिर्फ नाबालिग लड़कियां और युवतियां ही नहीं, बल्कि सुंदर विवाहिताएं भी थीं। खासकर वे जिनका अपने पति से अक्सर विवाद रहता था। आसाराम ऐसी महिलाओं को फंसाने के लिए त्रिकाल संध्या और ध्यान योग शिविर का सहारा लेते थे।
आसाराम को लेकर यह नया खुलासा किया है शाहजहांपुर निवासी उनके ही तीन पूर्व साधकों ने। आसाराम से दीक्षा लेकर 14 पूनम दर्शन और ध्यान योग शिविर करने वाले ये साधक सात साल से अपनी पत्नी से अलग हैं। अपने अलगाव के लिए वह आसाराम को ही दोषी मानते हैं। उन्होंने बताया कि त्रिकाल संध्या और गुरु को ही सर्वस्व मानने के मंत्र ने उनकी जिंदगी बर्बाद कर दी।
विरोध को दी जाती गो हत्या की संज्ञापूर्व साधकों ने बताया कि आसाराम के क्रिया-कलापों का जब कोई साधक या उनके घर वाले विरोध करते तो इसे गोहत्या का पाप करार दिया जाता था। उन्होंने भी जब आसाराम की बुराई शुरू कर दी तो उनकी पत्‍‌नी ने भी गोहत्या का पाप बताते हुए उनसे पूरी तरह संबंध तोड़ लिए और अलग रहने लगी।
त्रिकाल पूजासाधकों ने बताया कि आसाराम त्रिकाल पूजा सुबह, दोपहर और शाम को कराते थे। इसके लिए खासकर उन महिलाओं को प्रेरित किया जाता था, जिनका पतियों से कुछ मनमुटाव रहता था। त्रिकाल पूजा दंपतियों के बीच फूट की पहली कड़ी होती थी। विवाद बढ़ने पर उसे वैराग्य की संज्ञा दी जाती थी। पूजा के दौरान पति का स्पर्श भी महापाप बताकर उन्हें लगातार अलग रहने को प्रेरित किया जाता था। एक माह, पांच साल और 17 साल की यह साधना होती थी।
ध्यान योग शिविर त्रिकाल पूजा के बाद पति से अलग होने वाली महिलाओं के लिए ध्यान योग शिविर में बुलाया जाता था। वे 15 दिन तक बापू की ध्यान कुटिया में रहती थीं। वहां आसाराम के अलावा किसी को जाने की अनुमति नहीं होती थी। यहां मोक्ष दिलाने के बहाने उनका शारीरिक शोषण होता था।
शायद, अब आबाद हो जाए परिवारपूर्व साधक आज भी अपनी पत्नी से लगाव रखते हैं। उन्हें भरोसा है कि जिस दिन उनकी पत्नी आसाराम की अंधभक्ति छोड़ देगी, उनका घर फिर से आबाद हो जाएगा। उन्होंने कहा कि आसाराम ने उन्हें विवेक शून्य बना दिया है। हालांकि, जब उन्होंने नजदीक से यह सब देखा तो पूजा-पाठ बंद कर दी और घर से आसाराम की तस्वीर हटा दी। sabhar : jagaran.com

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बढ़ती उम्र में भी बरकरार रहे आकर्षण

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Flawless beauty

बढ़ती उम्र की दहलीज पर कदम रखने के बाद भी जिंदगी का आकर्षण और जोश खत्म नहीं हो जाता। यदि आप अपनी सोच व जीवनशैली में सकारात्मक बदलावों को तरजीह देती हैं तो यह तय मानें कि बढ़ती उम्र में भी आप युवावस्था की तरह स्मार्ट और चुस्त-दुरुस्त बनी रहेंगी। साथ ही जिंदगी की नई पारी में सक्रियता से उपलब्धियों रूपी बेहतर बल्लेबाजी कर सकती हैं।
उम्र बाधक नहीं
उम्र बढ़ने के साथ शारीरिक परिवर्तन होना तय है, इन्हें रोका तो नहीं जा सकता, पर इस परिवर्तन से होने वाले नकारात्मक प्रभावों को काफी हद तक कम जरूर किया जा सकता है। इस संदर्भ में नई दिल्ली की 45 वर्षीया दीपा सेठी अपनी जिंदगी की गतिशीलता को अपनी मां नीलम भाटिया को प्रेरणास्रोत मानती हैं। बकौल दीपा, मेरी मां एक कुशल गृहिणी हैं। गृहस्थी संभालने में उनका कोई सानी नहीं। उन्होंने अपनी चार संतानों की परवरिश पर बेहद गंभीरता से ध्यान दिया है। मैं जब स्कूली शिक्षा पूरी करके कालेज में पढ़ रही थी, तब उन्होंने अपनी प्रौढ़ावस्था में घर-परिवार की जिम्मेदारियां निभाते हुए फूड प्रिजर्वेशन व प्रोसेसिंग पाठ्यक्रम में दाखिला लिया। उन्होंने जैम, जेली, अचार, मुरब्बा आदि के निर्माण और रखरखाव की नवीनतम जानकारी ली। मुझे ताज्जुब होता है कि कम उम्र में शादी होने और उच्च शिक्षा से वंचित होने के बावजूद मां में कुछ नया सीखने की जिज्ञासा और ललक थी। कोर्स पूरा करने के बाद उन्होंने घर पर ही डिब्बाबंद खाद्य पदार्र्थो का निर्माण शुरू किया। कुछ समय बाद उन्होंने डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ बनाने वाली एक बड़ी कंपनी से करार किया और उसके लिए प्रोडक्ट बनवाने लगीं। सच कहूं तो उनके इस कारोबार ने हमारे घर में खुशहाली की बारिश कर दी। कहने का आशय यह है कि बढ़ती उम्र जिंदगी में कुछ कर गुजरने में बाधक नहीं है।
आशावादी सोच रखें
बढ़ती उम्र में अपने स्वास्थ्य को चुस्त-दुरुस्त रखने में जिंदगी के प्रति आशावादी व यथार्थवादी सोच का अपना एक विशिष्ट महत्व है। चाहे कैसी भी परिस्थितियां आएं अपनी सोच को सकारात्मक रखकर आप तनाव और टेंशन से बच सकती हैं। शहरों में रहने वाली एक बड़ी आबादी में तनाव से संबंधित तमाम समस्याएं नकारात्मक सोच के कारण ही उपजी हैं। इसलिए इनसे बचें।
शौक पालना जरूरी है
बढ़ती उम्र में स्वस्थ व सक्रिय रहने के लिए किसी न किसी प्रकार के रचनात्मक शौक में मशगूल होना बेहद आवश्यक है। इससे आप व्यस्त रहने के साथ-साथ कुछ नए अनुभव भी सीखती हैं। अगर आपके पास समय है तो सामाजिक कार्र्यो में भी बढ़-चढ़कर भाग ले सकती हैं। इससे आप अपने समय का बेहतर उपयोग कर सकती हैं। इससे सामाजिक दायरा बढ़ेगा। साथ ही नए-नए लोगों से संपर्क भी। एकरसता या बोरियत दूर करने के लिए आप पर्यटन स्थलों की भी सैर कर सकती हैं। इससे पूरे शरीर को ताजगी मिलती है। इसी प्रकार अपने मन की शांति के लिए कविता लिखना, कहानी लिखना, पेंटिंग करना आदि समय का बेहतर उपयोग है।
जब जागो तब सबेरा
अच्छी शुरुआत के लिए जरूरी नहीं कि कोई समय तय किया जाए। यह किसी भी समय की जा सकती है। सब कुछ आपकी संकल्प शक्ति या इच्छा शक्ति पर निर्भर करता है। आप अपनी जिंदगी की दूसरी पारी के बारे में किस तरह का नजरिया रखती हैं। इसी सवाल के जवाब में आपकी प्रसन्नता का राज छिपा है sabhar : jagaran.com

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चंद्रमा के जन्म के दौरान नष्ट होते बची थी पृथ्वी

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न्यूयार्क। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि चंदा मामा यानी चंद्र देवता के जन्म के दौरान हमारी पृथ्वी नष्ट होते-होते बची थी। अपने नए शोध में अमेरिका स्थित हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने यह दावा किया है।चंद्रमा के निर्माण की प्रक्रिया के दौरान ऐसा विशालकाय सौर गुबार पैदा हुआ था, जिसके प्रभाव से धरती का वातावरण नेस्तानाबूद हो सकता था।' हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के जिस दल ने यह दावा किया है, उसमें भारतीय मूल के वैज्ञानिक सुजय मुखोपाध्याय भी शामिल हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि धरती के शुरुआती वातावरण में ग्रहों के आकार के कई खगोलीय पिंडों के एक-दूसरे से टकराने के चलते ही चंद्रमा अस्तित्व में आए। हार्वर्ड के वैज्ञानिकों के हालिया दावे के विपरीत शोधकर्ता अब तक मानते रहे हैं कि चंद्रमा के जन्म समय पैदा हुए विशालकाय प्रभाव से धरती के वातावरण को कोई खतरा नहीं पैदा हुआ होगा। लेकिन हार्वर्ड के वैज्ञानिकों ने इस धारणा को खारिज कर दिया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, 'लगभग साढ़े चार अरब वर्ष पहले धरती आज के मुकाबले इतनी तेज रफ्तार से घूमती थी कि उस समय एक दिन करीब दो या तीन घंटे का ही हुआ करता था। इतनी तेज रफ्तार से घूमती हुई पृथ्वी के वातावरण में चंद्र के निर्माण के दौरान पैदा हुए विशालकाय सौर गुबार से यकीनन सब कुछ नष्ट हो सकता था। क्योंकि दो बेहद गतिमान पिंडों के टक्कर से ही भयावह त्रासदी की स्थिति बनती है।' sabhar : jagaran.com

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क्या आप जानते हैं ? मौत के बाद भी शरीर के ये 8 अंग करते रहते हैं काम!

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क्या आप जानते हैं ? मौत के बाद भी शरीर के ये 8 अंग करते रहते हैं काम!

क्या आप यह कल्पना कर सकते हैं कि आपके शरीर के मरने के बाद भी यह ब्रेन जिंदा रहेगा ? सुनने में भरोसा नहीं होता है, लेकिन यह सच है। विख्यात भौतिक विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग के अनुसार टेक्नॉलॉजी से यह संभव है।
टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार कैंब्रिज फिल्म फेस्टिवल के दौरान प्रो. हॉकिंग ने कहा कि मेरा सोचना है कि माइंड में ब्रेन एक प्रोग्राम की तरह है। यह एक कंप्यूटर की तरह है इसलिए सैद्धांतिक तौर पर कंप्यूटर में ब्रेन की कॉपी करना भी संभव है। यही कारण है कि मौत के बाद भी ब्रेन एक रूप में जीवित रहता है।
एक स्वतंत्र रिसर्च ग्रुप ब्रेन प्रिजर्वेशन फाऊंडेशन एक प्लास्टिक एम्बेडिंग प्रोसेसर विकसित करने में लगा हुआ है। यह प्रक्रिया ब्रेन को प्लास्टिक में बदलने से जुड़ी हुई है और इसे एक बहुत बारीक पट्टियों में खींचा जा रहा है।
मस्तिष्क के अतिरिक्त भी शरीर में ऐसे कई फंक्शन हैं, जो मौत के बाद भी कुछ मिनट, घंटों और दिनों तक जारी रहते हैं। दुनिया के बहुत से वैज्ञानिक बॉडी के उन अंगों के रहस्य खोजने में लगे हैं, जो मौत के बाद भी जीवित रहते हैं।
- नाखून और बालों का बढऩा : यह एक तकनीकी फंक्शन है न कि वास्तविक फंक्शन। बॉडी अधिक बाल और नाखून पैदा नहीं करती है, लेकिन ये दोनों मौत के बाद भी बढ़ते हैं। वास्तव में स्किन से नरमी खत्म होती है और पीछे की ओर खिंच जाती है, जिससे बाल बाहर की ओर अधिक निकल आते हैं और नाखून बढ़े हुए दिखाई देते हैं।
क्या आप जानते हैं ? मौत के बाद भी शरीर के ये 8 अंग करते रहते हैं काम!


त्वचा की सेल बढ़ती है : शरीर के मृत होने की प्रक्रिया में यह एक अन्य फंक्शन है। जब ब्लड सर्कुलेशन में कमी आती है तो इससे कुछ ही मिनटों में मस्तिष्क की मौत हो जाती है, जबकि अन्य सेल्स का जीवित रहना जरूरी नहीं है लेकिन स्किन सेल्स कुछ दिन तक जीवित रह सकती हैं।
- मूत्र उत्सर्जन : हम यह सोचते हैं कि पेशाब करना एक ऐच्छिक फंक्शन है। ब्रेन मूत्र की पेशी को नियंत्रित करता है। हालांकि कठोर खांचा मशल्स को कड़ा कर देता है, इससे पेशाब नहीं होती है, लेकिन जब मौत के कुछ देर बाद मशल रिलैक्स होती है तो मौत के बाद भी पेशाब हो जाती है।
-पाचन : हम यह भूल जाते हैं कि हमारे शरीर में कई जीव भी होते हैं। मौत होने के बाद भी बैक्टीरिया शरीर में जिंदा बने रहते हैं, इनमें से बहुत से पैरासाइटिक भी होते हैं। ये डाइजेशन में हमारी मदद करते हैं। मौत के बाद भी ये अपना काम करते रहते हैं। बहुत से पैरासाइट आंतों के अंदर होते हैं और गैस बनाते हैं।
क्या आप जानते हैं ? मौत के बाद भी शरीर के ये 8 अंग करते रहते हैं काम!

 शिश्न का खड़ा होना और वीर्य का स्राव होना : जब हार्ट बॉडी के अंदर शरीर के खून को रोकता है तो यह एक छोटे से एरिया में इकट्ठा हो जाता है। मौत के बाद कभी-कभी कैलशियम के लिए झिल्ली पारगम्य हो जाती है और सेल्स इतनी अधिक नहीं फैलती हैं, जितना आयन (एक मॉलीक्युलर जो इलेक्ट्रिकली चार्ज होता है) बाहर आते हैं। इनके बाहर आने के कारण मसल सिकुड़ती हैं और इससे मौत के बाद शरीर कड़ा हो जाता है और इससे स्खलन हो सकता है।
क्या आप जानते हैं ? मौत के बाद भी शरीर के ये 8 अंग करते रहते हैं काम!

 मांसपेशियों (मसल)में हरकत : ब्रेन की डेथ होने के बाद भी शरीर के अन्य हिस्सों में स्नायु संस्थान सक्रिय हो सकता है। मौत के बाद भी शरीर की हलचल को अक्सर देखा गया है।  दरअसल नर्व स्पाइनल कॉर्ड को सिग्नल भेजती हैं न कि ब्रेन को। इससे मांसपेशियों में हरकत और ऐंठन दिखाई देती है

आवाज निकलना : मौत होने के बाद शरीर की सभी मांसपेशियां कड़ी हो जाती हैं, इसमें वोकल कॉर्ड्स (स्वर तंतु) भी शामिल है। मौत होने पर मांस पेशियां कठोर होती हैं इससे वोकल कॉर्ड्स के अकडऩे से भी डेडबॉडी से एक डरावनी आवाज निकलती है। लोगों को कई बार मृत शरीर से कराहने, आह, और चरमराने की आवाजें सुनाई देती हैं।
- जन्म देना : कभी बहुत ही रेयर घटनाक्रम में देखा गया है कि  गर्भवती महिलाएं मौत के बाद भ्रूण बाहर आ जाता है। यह शरीर के अंदर गैस बनने और मांस के साफ्ट होने के कारण होता है। इस तरह की घटनाएं बेहद दुर्लभ हैं और कई बार अफवाहें भी आती रहती हैं। sabhar : bhakar.com

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इन खतरनाक रिसर्च में प्रयोगकर्ताओं को गंवानी पड़ी थी अपनी जान

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इन खतरनाक रिसर्च में प्रयोगकर्ताओं को गंवानी पड़ी थी अपनी जान

आज हमे कई आधुनिक चीजें काफी आसानी से मिल जाती हैं और ये काफी एडवांस भी हैं। लेकिन  कुछ लोगों को ऐसी चीजों को इजाद करने या रिसर्च में हासिल करने में अपनी जान तक गंवानी पड़ी हैं।
ये प्रयोग बेहद कठिन और जानलेवा थे,लेकिन प्रयोगकर्ताओं ने अपनी जान दांव पर लगा कर इन्हें अंजाम तक पहुंचाने की भरपूर कोशिश की थी।
हम आपको यहां कुछ प्रयोगकर्ताओं और उनके ऐसे प्रयोगों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनसे उन्हें अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ा।
इन खतरनाक रिसर्च में प्रयोगकर्ताओं को गंवानी पड़ी थी अपनी जान

लिक्विड से संचालित रॉकेट कार (1930),  वैज्ञानिक मैक्स वेलियर  :  एक ऑस्टे्रलियन अनुसंधानकर्ता मैक्स वेलियर की 17 मई 1930 को तब मौत हो गई, जब वह बर्लिन में एक एल्कोहल से भरा रॉकेट टेस्ट बेंच में फट गया। 1928-29 में वेलियर ने फ्रित्ज वोन ओपेल के साथ रॉकेट पावर्ड कारों और एयरक्राफ्ट पर काम किया था। इसके बाद वेलियर लिक्विड से भरे रॉकेट्स पर काम कर रहे थे। उन्होंने ने 19 अप्रैल 1930 को राकेट कार की टेस्ट ड्राइव की थी। यह कार लिक्विड से संचालित थी। एक माह बार इस कार के टेस्ट में विस्फोट हो गया।
इन खतरनाक रिसर्च में प्रयोगकर्ताओं को गंवानी पड़ी थी अपनी जान

-पैराशूट शूट (1912), खोजकर्ता- फ्रांज रिचेल्ट : ऑस्ट्रेलियन में जन्में फ्रैंच टेलर, शोधकर्ता और पैराशूटिंग में अग्रणी फ्रांज रिचेल्ट ने 4 फरवरी 1912 को एफिल टॉवर से छलांग लगाई। वह स्वयं का डिजाइन किया हुआ पैराशूट को टेस्ट करना चाहता था। हालांकि उसके दोस्तों और दर्शकों ने उसे काफी रोकने की कोशिश की, लेकिन वह टॉवर की पहले प्लेटफार्म से कूदा। दुर्भाग्य से उसका पैराशूट काम नहीं कर सका और वह चीन बर्फीली जमीन पर गिरा और उसकी जान चली गई।
इन खतरनाक रिसर्च में प्रयोगकर्ताओं को गंवानी पड़ी थी अपनी जान
शॉक ऑब्जर्वर (1985), प्रयोगकर्ता करेल सॉसेक : करेल सॉसेक एक प्रोफेशल स्टंटमैन था । वह कैप्शूल की खोज और नियाग्रा फॉल्स में इसकी सवारी करके विख्यात हुआ था। ऐसा करने में वह घायल हो गया और उसे कुछ चोटें भी आईं।
करेल सॉसेक ने 19 जनवरी1985 को एक कंपनी को टेक्सास स्थित ह्यूस्टन एस्ट्रोडोम से बैरल ड्राप करने का खर्च उठाने के लिए तैयार कर लिया था। 180 फीट ऊंचे स्ट्रक्चर से एक विशेष वॉटरफाल तैयार किया गय और एक टैंक भी खोदा गया था। लेकिन बैरल का रिम टैंक के पानी में गिरने की बजाय इसकी रिम से टकरा गया। इससे कैप्सूल फट गया। इससे सॉसेक को गंभीर चोंटे आई और दूसरे दिन उसकी मौत हो गई।
इन खतरनाक रिसर्च में प्रयोगकर्ताओं को गंवानी पड़ी थी अपनी जान

 ऑक्सीजन रीब्रीदर (1876), प्रयोगकर्ता - हेनरी फ्लेस : ब्रिटिश वैज्ञानिक हेनरी फ्लेस ने 1876 में एक क्लोज सर्किट ऑक्सीजन रीब्रीदर की खोज की थी। इस शूट का प्रयोग कंप्रेस्ड हवा के बजाय कंप्रेस्ड ऑक्सीजन के लिए किया जाता था। उनकी इस खोज का मूल रूप ये यह इरादा था कि इसका प्रयोग भरे हुए जहाज के चेंबर में लगे लोहे के दरवाजों को रिपेयर करने में किया जा सके। फ्लेस ने अपने प्रयोग को पानी के 30 फीट अंदर आजमाना तय किया। दुर्भाग्य से उनकी ऑक्सीजन के प्रेशर से मौत हो गई। ऑक्सीजन अंडर प्रेशर होने पर इंसान के लिए नुकसानदायक होती है।
इन खतरनाक रिसर्च में प्रयोगकर्ताओं को गंवानी पड़ी थी अपनी जान
- रोटरी प्रिंटिंग प्रेस (1867), विलियम बुलोक : विलियम बुलोक एक अमेरिकी अनुसंधानकर्ता थे। उन्होंने 1863 में एक वेब रोटरी प्रिंटिंग प्रेस का अविष्कार किया था। बुलोक के इस अविष्कार ने प्रिटिंग इंडस्ट्री में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया। एक बार जब वह अपनी इस नई प्रिटिंग मशीन को चला रहे थे तो उसी दौरान उन्होंने इसकी ड्राइविंग बेल्ट को किक मार मार दी। पुल्ली में पैर लगा और वह मशीन में बुरी तरह फंस गए। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। ऑपरेशन के दौरान पेनसेल्वानिया में 12 अप्रैल 1867 को मौत हो गई।
इन खतरनाक रिसर्च में प्रयोगकर्ताओं को गंवानी पड़ी थी अपनी जान

- रीब्रीदिंग डिवाइस : (1772),  सिएर फ्रेमिनेट(वैज्ञानिक):
- 1772 में फ्रांसीसी सिएर फ्रेमिनेट ने स्कूबा डाइवर्स के लिए रीब्रीदिंग डिवाइस का अविष्कार करने की कोशिश में जान चली गई थी। यह डिवाइस बैरल से निकली हवा को रीसाइकिल करती है। दुर्भाग्य से इसके प्रयोग के दौरान ऑक्सीजन की कमी होने पर फ्रेमिनेट की मौत हो गई। यह डिवाइस डाइवर्स को पानी के अंदर 20 मिनट तक रखना खतरनाक साबित हुई। sabhar : bhaskar.com



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इस वीर के तरकस में थे तीन ऐसे बाण जिससे भगवान कृष्ण को भी लगता था डर

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इस वीर के तरकस में थे तीन ऐसे बाण जिससे भगवान कृष्ण को भी लगता था डर

सीकर. एक ऐसा महान योद्धा जिसकी वीरता एवं साहस के सामने पूरी दुनिया शीश झुकाती है। इस योद्धा ने अपनी वीरता के प्रमाण और वचन-वद्धता के लिए एक पल में अपना सर धर से अलग कर दिया था। इसी कारण इन्हें शीश के दानी के नाम से जाना गया। इस वीर के तरकश में थे तीन ऐसे बाण जिससे पल भर में पूरी दुनिया समाप्त हो सकती थी। इसके कारण देवता भी हो दहशत में थे। दहशत भी इतनी कि खुद श्रीकृष्ण को क्षल करने पर मजबूर होना पड़ा। आज कलयुग में इन्हे भगवान श्री कृष्ण  के अवतार के रूप में पूजा जाता है। 
dainikbhaskar.com के धर्मयात्रा की इस कड़ी में हम आपको लेकर चल रहे हैं शेखावाटी के सीकर जिले में स्थित इस परम वीर के धाम जिसे खाटू धाम के नाम से जाना जाता है। इस वीर की महिमा का बखान करने वाले भक्त राजस्थान या भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया के कोने-कोने में मौजूद हैं।
इनके पास थे तीन ऐसे बाण जिससे भगवान कृष्ण को था इतिहास पलटने का डर
यह धाम सीकर से 65कि.मी. दूर खाटूश्यामजी गांव में स्थित है। सफेद मार्बल से बना यह प्राचीन मंदिर हिंदू भगवान, श्रीकृष्ण का अवतार मने जाने वाले खाटूश्याम को समर्पित है तथा, अनेक मजेदार कहानियों से जुड़ा है। इस मंदिर का वर्णन महान ग्रंथ ’महाभारत’ में भी किया गया है। यह कहानी एक ऐसे वीर की है जो गदाधारी भीम के पोते थे और भीम के पुत्र घटोतकच्छ और नाग कन्या अहिलवती के पुत्र थे।
किसने दिया इन्हें श्याम का नाम
इस वीर का बाल्यकाल में नाम बर्बरीक थ। उनकी माता, गुरुजन एवं रिश्तेदार उन्हें इसी नाम से जानते थे। इनका यह नाम इनके बडे-बडे और घने बाल होने के कारण पडा| वे महान पान्डव भीम के पुत्र घटोतकच्छ और नाग कन्या अहिलवती के पुत्र है। बाल्यकाल से ही वे बहुत वीर और महान यौद्धा थे। उन्होने युद्ध कला अपनी माँ से सीखी थी। कृष्ण ने उन्हें खाटूश्यामजी का नाम दिया था। उसके बाद इसी नाम से वो जाने गए।
के पास थे ऐसे तीन बाण जिससे पूरी दुनिया हो सकती थी ध्वस्त
बालक वीर बर्बरीक के जन्म के पश्चात् घटोत्कच इन्हें भगवन श्री कृष्ण के पास लेकर गए थे। श्री कृष्ण के बताए बातों के राह पर चलते हुए बर्बरीक ने विजय नामक ब्राह्मण का शिष्य बनकर अस्त्र-शस्त्र विद्या ज्ञान हासिल किया और उनके यज्ञ को राक्षसों से बचाकर, उनका यज्ञ संपूर्ण कराया। विजय नाम के उस ब्राह्मण का यज्ञ संपूर्ण करवाया। बर्बरीक ने भगवान शिव की घोर तपस्या करके उन्हें प्रसन्न किया जिससे मां भगवती व भगवन शिव शंकर बर्बरीक से बहुत प्रसन्न हुए और उनके सामने प्रकट होकर तीन बाण प्रदान किए जिससे तीनो लोकों में विजय प्राप्त की जा सकती थी।
महाभारत का युद्ध प्रारम्भ होने पर वीर बर्बरीक ने अपनी माता के सामने युद्ध में भाग लेने की इच्छा प्रकट की और तब इनकी माता ने इन्हें युद्ध में भाग लेने की आज्ञा दे दी और यह वचन लिया की तुम युद्ध में हारने वाले पक्ष का साथ निभाओगे। इस पर बर्बरीक कुरुक्षेत्र की ओर चल पड़े।
एक बाण से पीपल के पेड के सभी पत्तों को छेद डाला
सर्वव्यापी कृष्ण ने ब्राह्मण वेश धारण कर बर्बरीक से परिचित होने के लिये उसे रोका और यह जानकर उनकी हंसी भी उडायी कि वह मात्र तीन बाण से युद्ध में सम्मिलित होने आया है। ऐसा सुनने पर बर्बरीक ने उत्तर दिया कि मात्र एक बाण शत्रु सेना को ध्वस्त करने के लिये पर्याप्त है और ऐसा करने के बाद बाण वापिस तरकस में ही आयेगा। यिद तीनो बाणों को प्रयोग में लिया गया तो तीनो लोकों में हाहाकार मच जायेगा। इस पर कृष्ण ने उन्हें चुनौती दी की इस पीपल के पेड के सभी पत्तों को छेद कर दिखलाओ, जिसके नीचे दोनो खडे थे। बर्बरीक ने चुनौती स्वीकार की और अपने तरकस से एक बाण निकाला और इश्वर को स्मरण कर बाण पेड के पत्तो की और चलाया।
तीर ने क्षण भर में पेड के सभी पत्तों को भेद दिया और कृष्ण के पैर के इर्द-गिर्द चक्कर लगाने लगा, क्योंकि एक पत्ता उन्होनें अपने पैर के नीचे छुपा लिया था, बर्बरीक ने कहा कि आप अपने पैर को हटा लीजिये वर्ना ये आपके पैर को भी छेद देगा। यह सब देख कर भगवान कृष्ण बर्बरीक से अत्यंत प्रभावित हुए। इस पर श्री कृष्ण बर्बरीक से पूछते हैं की तुम युद्ध में किसके साथ हो इस प्रश्न पर बर्बरीक ने कहा कि युद्ध भाग लेने के लिए आते समय मां ने कहा था की पुत्र उस ओर से लड़ना जो हार रहा हो तथा निर्बल हो। कृष्ण ने सोचा की इस समय तो कौरव ही हार रहे हैं और इस समय में वह कौरवों का ही साथ देगा और यदि ऐसा हुआ तो पांडवों के लिए अच्छा न होगा।
.और एक पल में कलम कर दिया अपना सर
इस पर उन्होंने ब्राह्मण रूप में ही बालक बर्बरीक से दान स्वरूप बर्बरीक का सर मांग लिया इस पर बर्बरीक ने उन्हें यह दान देने का वचन दिया किंतु ब्राह्मण के असली रूप को जानने की इच्छा व्यक्त की इस पर श्री कृष्ण ने बालक को अपने वास्तविक रूप के दर्शन दिए। श्री कृष्ण ने ऐसा इसलिए किया क्योकि अगर बर्बरीक युद्ध में भाग लेते तो कौरवों की समाप्ति केवल 18 दिनों में नहीं हो सकती थी और युद्ध निरंतर चलता रहता। श्री कृष्ण ने बर्बरीक से कहा की युद्ध भूमि की पूजा करने के लिए किसी एक वीर के शिश के दान की जरूरत है। तुम्हारे अंदर मैने वो वीर देखा है। इस पर बर्बरीक ने श्री कृष्ण से प्रार्थना की कि वह पूरा महाभारत को देखना चाहता है। श्री कृष्ण ने बर्बरीक की प्रार्थना को स्वीकार किया और फाल्गुन महीने की द्वादश तिथि को बर्बरीक ने अपना शीश दान के रुप में दे दिया।
पूरा महाभारत देखने वाला एकमात्र योद्धा
श्री कृष्ण ने बालक बर्बरीक के शीश को अमृत से सींचा और युद्धभुमि के समीप ही पहाड़ की सबसे ऊंची चोटी पर रख दिया। जहां से उन्होंने पूरे युद्ध को देखा। युद्ध की समाप्ति पर पांडवों में आपस में ही इस बात को लेकर तनाव उत्पन्न हो गया कि युद्ध में कौन विजयी हुआ। इस पर कृष्ण ने उनसे कहा कि बर्बरीक का शीश सम्पूर्ण युद्ध का साक्षी है वही सही और गलत का निर्णय ले सकता है। सभी इस बात से सहमत होकर बर्बरीक के पास गये। बर्बरीक के शीश ने उत्तर दिया कि कृष्ण ही युद्ध मे विजय प्राप्त कराने में सबसे महान पात्र हैं। उन्हें युद्धभुमि में सिर्फ उनका सुदर्शन चक्र घूमता हुआ दिखायी दे रहा था जो कि शत्रु सेना को काट रहा था, महाकाली दुर्गा कृष्ण के आदेश पर शत्रु सेना के रक्त से भरे प्यालों का सेवन कर रही थीं। उन्हें यह वरदान मिला कि उन्हें कलयुग में श्याम के नाम से पूजा जाएगा। 
औरंगजेब ने किया था मंदिर को नष्ट
श्याम मंदिर बहुत ही प्राचीन है। श्याम मंदिर की आधारशिला सन् 1720 में रखी गई थी। एक मान्यता के मुताबिक सन् 1679 में औरंगजेब की सेना ने इस मंदिर को नष्ट कर दिया था। इस मंदिर की रक्षा के लिए उस समय अनेक राजपूतों ने अपना प्राणोत्सर्ग किया था। श्री कृष्ण भगवान के कलयुग के अवतार के रूप में यहां पर खाटू में विराजमान हैं। खाटू श्याम जी को हारे का सहारा माना जाता है। बर्बरीक को अनेक नामों से पुकारा जाता है यह खाटू श्याम, श्याम सरकार, र्यावर्चा, सुहृदय, शीश के दानी, तीन बाणधारी, खाटू नरेश और कलयुग के अवतार जैसे नामों से जाना जाते हैं।
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गुरुवार, 10 अक्तूबर 2013

केस करने वाली लड़की का नया आरोप- साधिकाओं को निर्वस्त्र कर नृत्य कराना चाहता था नारायण साईं

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केस करने वाली लड़की का नया आरोप- साधिकाओं को निर्वस्त्र कर नृत्य कराना चाहता था नारायण साईं

इंदौर/सूरत/गांधीनगर. नाबालिग के यौन उत्‍पीड़न के आरोपी आसाराम बापू और उसके बेटे नारायण साईं की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। गुरुवार को आसाराम के सूरत आश्रम में एफडीए टीम ने छापा मारा। एफडीए टीम ने आश्रम से सैंपल एकत्रित करके जांच के लिए भेज दिए हैं। माना जा रहा है ये सैंपल आसाराम की मुश्किलें और बढ़ा सकते हैं। गुजरात पुलिस आसाराम को गुजरात लाकर पूछताछ करना चाहती है। वहीं, नारायण साईं को पेश होने के लिए सूरत पुलिस ने नोटिस भेजा है। साईं, उनकी मां लक्ष्मी और बहन भारती अंडरग्राउंड हैं। 
 
नारायण साईं पर दुष्कर्म के आरोप लगाने वाली सूरत की पीड़िता ने पुलिस को छह और लड़कियों के नाम बताए हैं। उसके मुताबिक इनसे भी नारायण ने दुष्कर्म किया। इनमें तीन लड़कियां इंदौर व तीन वडोदरा की हैं। दुष्कर्म मामले की पड़ताल में यह जानकारी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक पीड़िता साबरकांठा स्थित एक आश्रम की संचालक रही है।
 
पीड़िता का कहना है कि नारायण साईं का इतना आतंक था कि साधिकाएं उसके खिलाफ कुछ नहीं बोल सकती थीं। उसका आरोप है कि उसके सामने देश के कई हिस्सों से लड़कियां लाई गई थीं। बाद में इन्हें काठमांडू के नागार्जुन हिल स्थित ओशो आश्रम ले जाया गया। मेडिटेशन में ले जाकर निर्वस्त्र अवस्था में नृत्य करने वाले दंपती दिखाए। वह इसी तर्ज पर अपनी साधिकाओं से नृत्य करवाना चाहता था। इन्हें दिखाते हुए कहा गया कि देखो और सीखो। पुरुष व महिला के बीच कोई फर्क ही नहीं होता।
साईं को पुलिस ने नोटिस भेजा :
नारायण साईं को पेश होने के लिए सूरत पुलिस ने नोटिस भेजा है। यह नोटिस जहांगीर पुरा स्थित आश्रम में मौजूद सेवादारों को बुधवार को सौंपा गया। नारायण साईं को जल्दी से जल्दी पेश होने की ताकीद की गई है। पुलिस अब तक नारायण साईं को तलाश नहीं कर पाई है। साईं, उनकी मां लक्ष्मी व बहन भारती भूमिगत हैं।
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बुधवार, 9 अक्तूबर 2013

धरती के केंद्र में है यह चमत्कारी मंदिर, जानिए 10 रहस्यमयी बातें!

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PICS: धरती के केंद्र में है यह चमत्कारी मंदिर, जानिए 10 रहस्यमयी बातें!

वाराणसी/मिर्जापुर. विंध्य पर्वत पर विराजमान आदि शक्ति माता विंध्यवासिनी की महिमा अपरम्पार है। भक्तों के कल्याण के लिए सिद्धपीठ विंध्याचल में सशरीर निवास करने वाली माता विंध्यवासिनी का धाम मणिद्वीप के नाम से विख्यात है। यहां आदि शक्ति माता विंध्यवासिनी अपने पूरे शरीर के साथ विराजमान हैं जबकि देश के अन्य शक्तिपीठों में सती के शरीर का एक-एक अंग गिरा है। 
 
ऋषियों मुनियों के लिए सिद्धपीठ आदिकाल से सिद्धि पाने के लिए तपस्थली रहा है। संसार का एक मात्र ऐसा स्थल है जहां मां सत, रज, तम गुणों से युक्त महाकाली, महालक्ष्मी, और अष्टभुजा तीनों रूप में एक साथ विराजती हैं। मंदिर के तीर्थ पुरोहित कमला शंकर मिश्र ने बताया मां के इस दरबार से जुड़ी कई अनसुनी बाते हैं जो मां कि महिमा को बताती हैं। 
PICS: धरती के केंद्र में है यह चमत्कारी मंदिर, जानिए 10 रहस्यमयी बातें!

1- सिद्धपीठ विंध्याचल आदिकाल से ऋषि मुनियों का साधना स्थल रहा है। पृथ्वी के केंद्र बिंदु पर विराजमान आदि शक्ति के धाम में देव दानव व मानवों ने तपस्या कर सिद्धि प्राप्त की है। देवासुर संग्राम के दौरान त्रिदेवों ने तप कर देवी से वरदान प्राप्त किया था। आज भी देवी के गर्भ गृह से निकलने वाले जल से भरे कुण्ड में ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश तपस्या कर रहे हैं। 
PICS: धरती के केंद्र में है यह चमत्कारी मंदिर, जानिए 10 रहस्यमयी बातें!

2- भगवान सूर्य की परिक्रमा को रोकने वाले विंध्य पर्वत की हजारों किलोमीटर की विशाल श्रृंखला में विंध्य पर्वत एवं पतित पावनी गंगा का संगम इस क्षेत्र में होता है।
3- वास्तुशास्त्र के अनुसार ईशान कोण धर्म का स्थान है। धरा के मध्य एवं विंध्य पर्वत के ईशान कोण पर आदि शक्ति लक्ष्मी स्वरुपा माता विंध्यवासिनी स्वर्ण कमल पर विराजमान होकर भक्तों का कल्याण कर रही है। 
4- धरा के मध्य केंद्र बिन्दु पर विराजमान माता विंध्यवासिनी के धाम से ही भारतीय मानक समय का निर्धारण होता है। माता विंध्यवासिनी को बिन्दुवासिनी भी कहा जाता है।
5- धरती के अन्य स्थानों पर शिव प्रिय सती का एक-एक अंग जहां गिरा वह शक्तिपीठ कहा जाता है। जबकि विंध्य धाम में आदि शक्ति सम्पूर्ण अंगो के साथ विराजमान हैं, इसलिए विंध्य धाम को सिद्धपीठ कहा गया है। 
6- शक्ति संतुलन करने वाली विंध्यवासिनी देवी के स्वर्ण पताका पर प्रकाश बिखेरने वाले भगवान सूर्य एवं शीतलता प्रदान करने वाले भगवन चन्द्रदेव एक साथ विराजमान हैं। 
 7- विंध्य क्षेत्र में आदि शक्ति सत, रज, तम गुणों से युक्त महाकाली (कालीखोह), महालक्ष्मी (विंध्यवासिनी), महासरस्वती (अष्टभुजा) तीनों रूप में विराजमान हैं। आदि शक्ति को घंटे की ध्वनि अति प्रिय है। इसलिये यह तंत्र साधना का अद्भुत पीठ हैं। भक्तों के कल्याण के लिए मां चार रूपों में चारो दिशाओं में मुंह करके माता विंध्यवासिनी, माता काली, माता अष्टभुजा व मां तारा के रूप में विराजमान हैं। 
 8- आदि शक्ति माता विंध्यवासिनी के हजारवें अंश से माता अष्टभुजा का अवतरण हुआ। मार्कंडेय पुराण में देवताओं के प्रश्नों का उत्तर देते हुए देवी ने कहा है कि "नंदगोप गृहे जाता यशोदा गर्भ संभवा, ततस्तौ नाशयिश्यामी विन्ध्याचल निवासिनी" कंस के विनाश को माता का अवतरण हुआ है।  sabhar : bhaskar.com

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अब रोबोट ब्वॉय करेगा आपके काम

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लंदन। वह दिन दूर नहीं जब बुजुर्ग और बीमार लोगों को अपने कामों के लिए किसी पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी। वैज्ञानिक एक ऐसा रोबोट बनाने में जुटे हैं जो इंसान के रोजमर्रा के कामों में मदद कर सकेगा। इस रोबोट में कृत्रिम मांसपेशियां लगाई जाएंगी ताकि वह आसानी से चल फिर सके।
यूनिवर्सिटी ऑफ ज्यूरिख के आर्टिफिशल इंटेलीजेंस लैब के इंजीनियरों के मुताबिक 1.2 मीटर लंबा यह रोबोट बच्चे की तरह दिखेगा। इसे रोबाय नाम दिया है। रोबोट में लगाई जाने वाली कृत्रिम शिराओं को नौ महीने में तैयार कर लिया जाएगा। रोबोट के हाथों को बनाने का काम पहले ही शुरू हो चुका है। इसकीत्वचा को नरम रखा जाएगा ताकि छूने में सहज महसूस हो। इसका अनावरण मार्च में ज्यूरिख में रोबोट ऑन टूर नामक कार्यक्रम में किया जाएगा।
डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने उम्मीद जताई है कि रोबाय सर्विस रोबोट का ब्यू प्रिंट बनेगा। सर्विस रोबोट वह मशीन होती हैं जो कुछ हद तक मनुष्य के कामों को स्वतंत्रतापूर्वक करने में सक्षम होती हैं। शोधकर्ताओं ने कहा कि सर्विस रोबोट लोगों के साथ रहने की जगह को साझा करते हैं इसलिए इनका पर्यावरण के अनुकूल और सुरक्षित होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। sabhar : jagaran.com

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अजूबा है दो सिर वाला कछुआ

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Two Headed Turtle

दुनिया में हर जीव की लगभग एक सी बनावट होती है। पर वही बनावट जब अलग हो जाती है तो वह वाकई में अजूबा होता है। पूरी दुनिया में इंसान से लेकर जानवर तक हर किसी का एक ही सर होता है और चार पांव जिसे हम इंसानों ने अपनी बुद्धि से दो पांव और दो हाथ बना लिए। पर सिर तो फिर भी जनाब हर किसी का एक ही होता है। अब अगर एक सिर की जगह दो सिर वाला इंसान तो छोड़ दीजिए, कोई भी जानवर, पक्षी भी आप देखेंगे तो अजूबा ही कहेंगे। पर कई बार ऐसे अजूबे प्यारे भी होते हैं।
अमेरिक के टेक्सास में प्रकृति का एक ऐसा ही अजूबा आजकल लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। टेक्सास के सान एंटोनियो चिडि़याघर में 25 जून को एक दो सिर वाला कछुआ पैदा हुआ है। यह छोटा सा, प्यारा दो सिर वाला कछुआ अजूबा सा दिखने के साथ ही हर किसी को लुभा रहा है। लोग इसे देखने के लिए सान एंटोनियो चिडि़याघर आ रहे हैं। चिडि़याघर के कर्मचारियों ने इसका नाम थेल्मा और लुईस रखा है। अन्य कछुओं की तरह यह भी पानी और जमीन पर एक सा रह सकता है, चल सकता है और तैर भी सकता है। विशेषज्ञों ने इसे पूरी तरह स्वस्थ बताया है।sabhar : jagaran.com

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राजस्थान में दो सिर वाला बच्चा

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Two headed baby

विज्ञान की दुनिया में हम हर चीज के वैज्ञानिक कारण ढूंढ़ते हैं पर कभी-कभी कुछ ऐसा घटता है जिसका वैज्ञानिक कारण ढूंढ़ना मुश्किल हो जाता है। प्रकृति में लगभग हर जीव की एक निश्चित संरचना है। जानवरों के चार पैर ही होते हैं, इंसानों के दो ही हाथ और दो पैर। पर जानवर हो या इंसान हर किसी का एक ही सिर होगा। फिर भी कभी-कभी प्रकृति के कुछ अजूबे दिख ही जाते हैं। हालांकि वह अजूबा न होकर आम जीवन में एक त्रासदी बन जाता है। राजस्थान के जयपुर में इसी तरह का एक अजूबा बच्चा पैदा हुआ है। हाथ पैरों के साथ ही इसके दो सिर हैं। राजस्थान के टोंक जिले में 24 जुलाई को इस बच्चे का जन्म हुआ है।
डॉक्टरों के मुताबिक बच्चे के दो सिर होने के साथ ही रीढ़ की हड्डियां, तंत्रिका तंत्र भी दो हैं। डॉक्टरों के मुतबिक विज्ञान की दुनिया में भी ऐसे मामले अजूबे ही होते हैं जो बहुत कम, शायद ही कभी देखने को मिलते हैं। इस स्थिति को डॉक्टरी भाषा में डाइसेफैलिक पैरापैगस कहते हैं। पूरे विश्व में 500 सालों में अब तक मात्र 600 ऐसे बच्चे पैदा हुए हैं। भारत में यह दूसरा बच्चा है। इससे पहले ऐसा ही दो सिर वाला बच्चा जबलपुर में पैदा हुआ था पर जन्म के कुछ दिनों बाद ही उसकी मौत हो गई थी। ऐसे बच्चों को बचाना मुश्किल होता है पर डॉक्टर अभी बच्चे को अपनी देखरेख में रखे हुए हैं।n sabhar : jagaran.com

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मंगलवार, 8 अक्तूबर 2013

दाढ़ी या खाने की प्लेट

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Isaiah Web

शौक एक बड़ी चीज है। सजना भी शौक का एक हिस्सा है। औरतों के अपने शौक हैं आदमियों के अपने। पर आदमियों के शौक भी बड़े अजीब हैं। किसी को लंबी मूंछों का शौक है तो किसी को लंबी दाढ़ी का। कोई लड़कियों की तरह लंबे बाल रखता है तो कोई अपनी दाढ़ी से ट्रक-ट्रैक्टर ही खींच लेता है। सब शौक की बात है। पर कोई अपनी दाढ़ी के साथ कितने स्टाइल आजमा सकता है आप सोच भी नहीं सकते। जनाब सिर्फ शौक नहीं, दिमाग की भी बात है। इन जनाब को देखिए जिन्होंने दाढ़ी-मूंछों में ही अपना पूरा डाइनिंग टेबल और कप-प्लेट बना रखा है।
इनका नाम है यशायाह वेब। इन्हें दाढ़ी रखने का बड़ा शौक है। पर इनकी दाढ़ी देखकर आप हैरान रह जाएंगे और आम आदमियों की तरह इनकी दाढ़ी देख आप नजर भी नहीं फेर पाएंगे। लड़के-लड़कियों को दोनों को ही आज स्टाइलिश्ड बाल रखने का बड़ा शौक है पर ये जनाब इन सबसे अलग हैं। इन्हें अपने दाढ़ी को स्टाइलिश बनाने का शौक है। इनके इसी शौक का नतीजा है कि आज इनकी दाढ़ी हर किसी के आकर्षण का केंद्र है। पर ऐसा किया क्या इन्होंने कि इनकी दाढ़ी इतनी चर्चा में है? दरअसल यशायाह वेब ने अपनी दाढ़ी को कुछ इस प्रकार बनाया है कि वे इसमें खाने की कोई भी चीज रख सकते हैं। अब वो नूडल हो या कोल्ड ड्रिंक की केन या बॉटल या पिज्जा-बर्गर वेब की दाढ़ी में सब कुछ समा सकता है। अपने पसंदीदा खाने के सामान को हमेशा अपनी दाढ़ी में रखकर वे चल सकते हैं और लोगों के लिए ये आकर्षण का केंद्र है।
यशायाह वेब को स्टाइलिश्ड दाढ़ी रखने का क्रेज है और इसमें उनकी मदद करती हैं उनकी पत्‍‌नी एंजेला। चित्र में यशायाह की एक भंगिमा आप भी देख सकते हैं। शायद इसे देखकर आप कह उठें कि कंजूसी की हद है.अब लोग दाढ़ी को ही प्लेट बना लेते हैं। लेकिन यह कंजूसी नहीं जनाब शौक की बात है! आप भी कोई अजूबा शौक पालिए और चर्चा में छा जाइए। sabhar : jagaran.com

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मां व मौसी ने ही कराया गैंगरेप

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gang rape


पानीपत, उपमुख्य संवाददाता। मां और मौसी ने कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ पिला एक नवविवाहिता को पांच दरिंदों के हवाले कर दिया। जींद में सामूहिक दुष्कर्म के दो दिन बाद पीड़िता को होश आया तो फोन पर मामले की जानकारी उसने पति को दी। पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर मां, मौसी सहित सात आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
पढ़ें: पहले दोस्ती फिर शादी का झांसा देकर युवती से रेप
मामले के मुताबिक जींद की भटनागर कालोनी निवासी 25 वर्षीय सुष्मिता (परिवर्तित नाम) की शादी चार माह पूर्व पानीपत की बंसी कालोनी में हुई। उसकी यह दूसरी शादी है। 3 अक्टूबर की शाम वह सब्जी लेने आठ मरला चौक पर गई थी। इस दौरान मौसी ने फोन कर पूछा कि कहां हो? बताने पर कुछ देर बाद मौसी और मां कार लेकर चौक पर पहुंचीं और उसे अपने साथ जींद ले गई। सुष्मिता के मुताबिक मौसी ने उसे पीने को कोल्ड ड्रिंक दी। इससे उस पर बेहोशी छाने लगी। इसका फायदा उठाकर मौसी के घर में पांच लोगों ने उससे दुष्कर्म किया। 5 अक्टूबर को होश आने पर वह वहां से निकली और अपने पति को फोन किया। इसके बाद मामले की शिकायत पुलिस को की गई।
मंगलवार को आठ मरला चौकी प्रभारी कृष्ण कुमार महिला पुलिस के साथ पीड़िता को मेडिकल जांच के लिए सिविल अस्पताल लाए। मॉडल टाउन थाने में पीड़िता की मां और मौसी पर साजिश रचने व नशीला पदार्थ पिलाने तथा पांच आरोपियों जींद के रणबीर, सुरेंद्र, सुरेश, जय भगवान और गजे सिंह पर दुष्कर्म व अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
कई बार धकेला देह व्यापार में
सुष्मिता का आरोप है कि उसकी मां और मौसी पहले से ही देह व्यापार में लिप्त हैं। शादी से पहले भी मां ने उससे कई बार देह व्यापार कराया। पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए उसकी मां जींद में ही रहने वाली बहन के पास रहती है। उसने कहा कि आरोपियों ने राज जाहिर करने पर उसे जान से मारने की धमकी भी दी।
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अमेरिका में टीचर ने कराया था न्यूड फोटोशूट, क्लास में बच्चे देख रहे हैं वीडियो

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अमेरिका में टीचर ने कराया था न्यूड फोटोशूट, क्लास में बच्चे देख रहे हैं वीडियो
अमेरिका में एक हाई स्कूल स्पैनिश टीचर को उस समय शर्मिदगी उठानी पड़ी, जब उसका अतीत ही उसके सामने आ खड़ा हुआ। टेक्सास के डालास में टाउन व्यू मैग्नेट हाई स्कूल की स्पैनिश भाषा की 21 वर्षीय टीचर क्रिस्टी निकोल डिवासी ने तीन साल पहले प्ले ब्वॉय के मैगजीन के लिए न्यूड पोज दिए थे। उस समय वह मात्र 18 साल की थी, लेकिन अब तीन साल बाद उनका भेद खुल गया है। बच्चों के मां-बाप ने स्कूल से गुस्सा जाहिर करते हुए क्रिस्टी को निकाल देने का अल्टीमेटम दिया है।

क्रिस्टी ने सेक्सी पोज वाली तस्वीरें और वीडियो इन दिनों स्कूल के सभी छात्रों के बीच मशहूर हो रहे हैं। इसमें उनके सामने बिना कपड़े वाले पोज, विंटर बनी गीयर और लांजिरी पहने हुई तस्वीरें और लेस्बियन सेक्सी सीन ऑनलाइन मौजूद हैं। एक सेक्स वीडियो में क्रिस्टी से उसकी हॉबीज के बारे में पूछा जाता है तो वह बताती है हंटिंग और शूटिंग। आगे बताती है कि उसने पिछले साल की एक बतख को मारा है। फिर वह कहती है कि स्पेनिश पढ़ रही है। आगे वह स्पेनिश टीचर बनना चाहेगी।

एक मां-बाप का कहना है कि क्रिस्टी का प्लेब्वॉय में न्यूड फोटोशूट करना और फिर टीचर बन जाना उसके अतीत से छुटकारा नहीं दिला सकता है। यह हमारे बच्चों पर गलत प्रभाव डालेगा। वहीं, दूसरे मां-बाप ने कहा कि उनके 16-17 साल के बेटे अपनी टीचर के न्यूड फोटो देख रहे हैं। इस मामले पर डालास स्कूल डिस्ट्रिक्ट ने कुछ भी कहने से मना कर दिया है। उन्होंने इसे निजी मामला करार दिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि जब यह फोटोशूट किया गया था, तब वह स्कूल में टीचर नहीं थी। 

अमेरिका में टीचर ने कराया था न्यूड फोटोशूट, क्लास में बच्चे देख रहे हैं वीडियो

अमेरिका में टीचर ने कराया था न्यूड फोटोशूट, क्लास में बच्चे देख रहे हैं वीडियो

अमेरिका में टीचर ने कराया था न्यूड फोटोशूट, क्लास में बच्चे देख रहे हैं वीडियो

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दो अमेरिकी और एक जर्मन वैज्ञानिक को मिला चिकित्सा के क्षेत्र में नोबेल

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स्टॉकहोम. चिकित्सा के क्षेत्र में वर्ष 2013 का प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार अमेरिकी वैज्ञानिक जेम्स रोथमैन, रैंडी डब्ल्यू शेकमैन और जर्मनी के वैज्ञानिक थॉमस श्यूडोफ को संयुक्त रूप से दिए जाने की सोमवार को घोषणा की गई। नोबेल फाउंडेशन ने पुरस्कारों की घोषणा करते हुए कहा कि इन्हें शरीर के अंदर कोशिकाओं के व्यवहार और संचार को नियमित करने वाली मशीनरी संबंधी खोज के लिए इस पुरस्कार के लिए चुना गया है।
इन्होंने अपने शोध में बताया है कि हर कोशिका अपने आप में एक कारखाना है। यह कई तरह के अणुओं का उत्पादन करती है। इन्हें शरीर में एक जगह से दूसरी जगह भेजती है। जैसे इंसुलिन का रक्त में छोड़ा जाना या तंत्रिकाओं में सूचनाओं का प्रवाह। ये अणु शरीर में छोटे-छोटे पैकेटों के रूप में भेजे जाते हैं। इन्हें वेस्किल कहते हैं। तीनों वैज्ञानिकों ने उस सिद्धांत का पता लगाया है, जो इन वेसिकल्स के संचार को नियमित करता है और अणुओं को उनकी सही जगह पर पहुंचाता है।
दो अमेरिकी और एक जर्मन वैज्ञानिक को मिला चिकित्सा के क्षेत्र में नोबेल

अमेरिका के कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के रैंडी डब्ल्यू शेकमैन ने वेसिकल्स के संचार के लिए जरूरी जीन की खोज की है। अमेरिका के न्यू हेवन में येल विश्वविद्यालय के जेम्स रोथमैन ने उस प्रोटीन प्रकिया का पता लगाया है, जो वेसिकल्स का उनकी लक्षित कोशिकाओं द्वारा अवशोषण सुनिश्चित करता है। जर्मनी में पैदा हुए अमेरिका के स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के थॉमस श्यूडोफ ने इस बात का पता लगाया है कि किस प्रकार वेसिकल्स को अपने अणु लक्षित कोशिकाओं को सौंपने का संकेत मिलता है।


दो अमेरिकी और एक जर्मन वैज्ञानिक को मिला चिकित्सा के क्षेत्र में नोबेल


इस पूरी प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी होने के कारण तंत्रिका संबंधी बीमारियां, मधुमेह और शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली संबंधी बीमारी होती है। कोरोलिंस्का इंस्टीट्यूट में बच्चों के कैंसर विषय के प्रोफेसर जैन इग्ने हेंटर ने कहा कि इन खोजों का मानव शरीर को समझने में काफी महत्व है। तंत्रिका तंत्र, मधुमेह और प्रतिरक्षा संबंधी बीमारियों को समझने में भी ये मददगार होंगी। (तस्वीर में: थॉमस श्यूडोफ)
दो अमेरिकी और एक जर्मन वैज्ञानिक को मिला चिकित्सा के क्षेत्र में नोबेल


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सोमवार, 7 अक्तूबर 2013

प्लेब्वॉय के कवर पेज पर इम्प्लॉइ की न्यूड फोटो देख बॉस ने ऐसे निकाला गुस्सा

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प्लेब्वॉय के कवर पेज पर इम्प्लॉइ की न्यूड फोटो देख बॉस ने ऐसे निकाला गुस्सा
मर्दों को मशहूर मैगजीन 'प्लेब्वॉय' के लिए पोज दे चुकी एक महिला ने अपने बॉस पर मुकदमा दायर कर दिया है। महिला के मुताबिक उसके बॉस ने पहले उसे मैगजीन में न्यूड फोटोशूट की इजाजत दी और तस्वीर छपने के बाद नौकरी से निकाल दिया। घटना अमेरिका के मिनेसोटा की है। बॉस की बेरुखी का शिकार हुई महिला का नाम जेसिका जेलिनस्के है और वह एक बच्चे की अविवाहित मां है।

33 वर्षीय जेसिका के मुताबिक उन्होंने अपने बॉस से मैन्स मैगजीन के फोटोशूट की इजाजत मांगी थी। 33 वर्षीय जेसिका की तस्वीर पिछले साल प्लेब्वॉय के 'हॉट हाउसवाइफ' इश्यू में प्रकाशित हुई थी। कवर पेज के लिए 400 मॉडल्स में से जेसिका को चुना गया था। लेकिन इश्यू मार्केट में आने के बाद 9 साल की बच्ची की मां जेसिका को नौकरी से निकाल दिया गया। वह मिनेसोटा की एक केबल कम्युनिकेशन कंपनी चार्टर कम्युनिकेशन में एडवर्टाइजिंग सेल्स एग्जीक्यूटिव की पोस्ट पर थीं।

जेसिका के बॉस टिमोथी मैकबीन के मुताबिक मैगजीन के कवर पेज पर उत्तेजक तस्वीर छपवाकर उन्होंने कंपनी के नियमों का उल्लंघन किया है।

कंपनी की ओर से भेज गए नोटिस में लिखा था, 'एक जानी-मानी मैगजीन के कवर पेज पर न्यूड पोज देने के कारण आपने चार्टर कंपनी के पेशेवर आचरण नियमों का उल्लंघन किया है।'

कोर्ट में दायर मुकदमें में जेसिका ने दावा किया है कि मैगजीन में फोटोशूट के लिए उसके बॉस ने इजाजत दी थी।  
प्लेब्वॉय के कवर पेज पर इम्प्लॉइ की न्यूड फोटो देख बॉस ने ऐसे निकाला गुस्सा

जेसिका ने मुकदमे में जिक्र किया है कि उसके बॉस को शिकागो में आयोजित हाउसवाइफ मॉडलिंग प्रतियोगिता के बारे में मालूम था। जेसिका के मुताबिक उसे यह आश्वासन दिया गया था कि मैगजीन के लिए न्यूड पोज देने पर उसकी नौकरी को किसी तरह का खतरा नहीं है। जेसिका इश नौकरी से हर साल 18,000 डॉलर कमाती थी।

जेसिका की उत्तेजक तस्वीर 'प्लेब्वॉय' के जुलाई, 2011 इश्यू में प्रकाशित हुई थी। इस तस्वीर में जेसिका ने अपनी क्लीवेज दिखाते हुए पोज दिया है। साथ में मैगजीन के कवर पेज पर लिखा था, 'नॉटी मॉम्स एंड सेक्सी वाइव्स'।
 
जेसिका ने टिमोथी के खिलाफ 150,000 डॉलर का मुकदमा दायर किया है। गौरतलब है कि वह इससे पहले भी 2006 में मैक्सिम मैगजीन के लिए फोटोशूट करवा चुकी हैं। 2011 में एक इंटरव्यू में उसने कहा था कि न्यूड पोज देने के लिए उसमें काफी आत्मविश्वास है।
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वह मिनेसोटा के रोचेस्टर में फैशन मॉल शो में भी मॉडलिंग कर चुकी है। sabhar : bhaskar.com

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ऐसे ही नहीं कहलाते BIG B, करोड़ों नहीं अरबों की दौलत के हैं मालिक

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ऐसे ही नहीं कहलाते BIG B, करोड़ों नहीं अरबों की दौलत के हैं मालिक

11 अक्टूबर 2013 को बॉलीवुड के महानायक अमिताभ 71 साल के होने जा रहे हैं। बिग बी बॉलीवुड के शहंशाह हैं तो जाहिर है उनके पास भी धन-दौलत की कोई कमी नहीं होगी।
 
अपनी प्रोडक्शन कंपनी एबीसीएल के जबरदस्त घाटे में जाने के बावजूद बिग बी की माली हालत काफी अच्छी है। आलीशान घरों, महंगी गाड़ियों और शानोशौकत की अमिताभ बच्चन की लाइफ में कोई कमी नहीं है।
 
ऐसे में आज हम आपको बताते हैं कि आखिर कितनी संपत्ति के मालिक हैं बच्चन परिवार के मुखिया और उनकी पत्नी जया बच्चन।
ऐसे ही नहीं कहलाते BIG B, करोड़ों नहीं अरबों की दौलत के हैं मालिक
सूत्रों की मानें तो बच्चन दंपति यानी अमिताभ बच्चन और उनकी पत्नी जया बच्चन कुल चार अरब 94 करोड़ 86 लाख 37 हजार 334 रुपए की संपत्ति के मालिक हैं। बच्चन दंपति के पास करोड़ 70 लाख 37 हजार 334 रुपए की चल संपत्ति है जबकि 150 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति है।
ऐसे ही नहीं कहलाते BIG B, करोड़ों नहीं अरबों की दौलत के हैं मालिक


चल संपत्तियों में अमिताभ बच्चन के पास 3 अरब, 61 लाख 7 हजार 311 रुपए की संपत्ति है, जबकि जया बच्चन 43 करोड़ नौ लाख 30 हजार 23 रुपए की चल संपत्तियों की मालकिन हैं।
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अमिताभ के पास 6 करोड़ 32 लाख 26 हजार 554 रुपए की लग्जरी कारें हैं। जया के पास 30 लाख की टोयोटा लेक्सस सहित दो गाड़ियां है,जबकि अमिताभ के पास तीन करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की राल्स रायस सहित कुल नौ गाड़ियां और एक ट्रैक्टर भी है। 

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जया के पास मुंबई के 'जलसा' नाम के बंगले के अलावा, भोपाल में दो फ्लैट हैं,जबकि अमिताभ के पास मुंबई, गुड़गांव और फ्रांस में एक अचल संपत्ति है,जिसकी कीमत तीन करोड़ रुपए है

ऐसे ही नहीं कहलाते BIG B, करोड़ों नहीं अरबों की दौलत के हैं मालिक

अमिताभ के पास जूहू में 20 करोड़ रुपये की कीमत का एक व्यावसायिक भवन भी है, जबकि उनके पास बाराबंकी के दौलतपुर और लखनऊ के मुजफ्फरनगर गांव में खेती की जमीन है। जया के पास भोपाल और लखनऊ में खेती की जमीन है। sabhar : bhaskar.com


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Real Look में कुछ ऐसे दिखाई देते हैं चंपक दादा, जानिए रोचक बातें...

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Real Look में कुछ ऐसे दिखाई देते हैं चंपक दादा, जानिए रोचक बातें...

‘अरे जेठिया, तुझमें तो अक्ल की एक बूंद भी नहीं.. अरे नहाए बगैर क्यों खाना खाने बैठ गया.. अरे बहू ये जेठिया कहां गया.. अरे टप्पू ने अपना लेशन किया कि नहीं..’ ये संवाद सुनते ही आपकी नजरों के सामने एक चेहरा तैरने लगा होगा। जी हां, आपने बिल्कुल ठीक समझा। हम चंपकलाल जयंतीलाल गडा यानी की अमित भट्ट की ही बात कर रहे हैं।
 
लोकप्रिय टीवी धारावाहिक सीरियल ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में चंपकलाल ने एक अनोखी ही छाप छोड़ी है। सीरियल में बिल्कुल बूढ़े दिखाई देने वाले चंपक जोर-जोर से बोलते हुए और हाथ में लकड़ी लेकर ही चलते नजर आते हैं। यही अदा ही उनकी मुख्य पहचान बन गई है।
 
सीरियल में हमेशा जेठा को डांटते हुए, टप्पू को लाड़ करते हुए और दयाभाभी को समझाइश देते बापूजी का रोल गुजराती कलाकार अमित भट्ट कर रहे हैं। 

Real Look में कुछ ऐसे दिखाई देते हैं चंपक दादा, जानिए रोचक बातें...

मूल कच्छ के रहने वाले गुजराती कलाकार अमित भट्ट फिलहाल मुंबई में रहते हैं। परिवार में पत्नी के अलावा उनके दो जुड़वा बेटे भी हैं। ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ सीरियल में आने से पहले भी उन्होंने कई गुजराती नाटकों में काम किया है।आपको जानकर आश्चय्र होगा कि चंपक चाचा का रोल करने वाले अमित भट्ट की उम्र अभी सिर्फ 39 वर्ष है। इतना ही नहीं, सीरियल में जेठालाल के पिता बने अमित भट्ट, जेठालाल से भी 5 साल छोटे हैं।
Real Look में कुछ ऐसे दिखाई देते हैं चंपक दादा, जानिए रोचक बातें...

सीरियल में बापूजी का रोल करने के लिए उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ती है। इतना ही नहीं, उन्हें हर दो दिन में अपने बाल भी मुंडवाने पड़ते हैं।

Real Look में कुछ ऐसे दिखाई देते हैं चंपक दादा, जानिए रोचक बातें...
आपको यह जानकर भी आश्चर्य होगा कि शरुआत के दो सालों में उन्हें 250 से अधिक बार शेविंग भी करानी पड़ी थी। जब सीरियल में उनके लिए स्पेशल विंग मंगवाई गई, तब कहीं जाकर उन्हें सिर मुंडवाने की मुसीबत से छुटकारा मिल सका।
Real Look में कुछ ऐसे दिखाई देते हैं चंपक दादा, जानिए रोचक बातें...

अमित भट्ट एक्टिंग में दुनिया में काफी समय से जुड़े हुए हैं। वे अपने कॉलेज के दिनों से ही एक्टिंग में दुनिया में कदम रख चुके थे।
Real Look में कुछ ऐसे दिखाई देते हैं चंपक दादा, जानिए रोचक बातें...

एक बार सूरत में दिव्यभास्कर की टीम से हुई मुलाकात में उन्होंने बताया था कि शुरुआत में ये रोल मुझे बहुत मुश्किल लगा था, लेकिन मैंने इसे एक चैलेंज के रूप में लिया। इसके बाद तो मुझे यह रोल करने की जैसे आदत ही पड़ गई। बच्चों के साथ खेलना, अपनों से बड़ी उम्र के लोगों को डांटना..हाहाहाहाहा.. एक अलग ही मजा है।
 
Real Look में कुछ ऐसे दिखाई देते हैं चंपक दादा, जानिए रोचक बातें...

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