Loading...

शनिवार, 5 अक्तूबर 2013

मधुमेह रोगियों के लिए मददगार साबित होगा कृत्रिम पंप

0

मधुमेह रोगियों के लिए मददगार साबित होगा कृत्रिम पंप

सिडनी: ऑस्ट्रेलियाई चिकित्सकों ने मधुमेह-टाइप वन के रोगियों के लिए जोखिम और कोमा से बचने के लिए एक पंप तैयार किया है। ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में प्रिंसेज मार्गरेट हॉस्पिटल फॉर चिल्ड्रेन में इंडोक्रिनॉलॉजी विभाग के प्रमुख टिम जॉन्स और उनके दल ने आग्नाशय जैसा एक कृत्रिम पंप बनाया है, जो मधुमेह रोगियों में इंसुलिन पहुंचाता है और उसे रोकता है।

नया उपकरण रोगियों में घातक कोमा की पहचान कर सकता है और रक्त में सुगर का स्तर कम हो जाने पर इंसुलिन की आपूर्ति को रोकता है। जॉन्स ने बताया कि कुछ रोगी दिल की धड़कनें तेज होने और रक्त में ग्लूकोज की बूंदों के रूप में अस्थिरता जैसे लक्षण देखेंगे।

उन्होंने आगे कहा कि अन्य लोगों को कोई चेतावनी संकेत नहीं मिलता है। इस तकनीक पर फिर भी ज्यादा भरोसा है। 
जॉन्स ने बताया कि नया पंप रोगियों को हाइपोग्लाइसीमिया और रक्त में कम ग्लूकोज से बचाएगा। (एजेंसी)

Read more

आसाराम पर अपनी दवाओं से नपुंसक बनाने का आरोप

0


आसाराम पर अपनी दवाओं से नपुंसक बनाने का आरोप
नई दिल्ली : यौन उत्पीड़न मामले में जेल में बंद कथावाचक आसाराम की मुश्किलें दिनोंदिन बढ़ती जा रही हैं। आसाराम के सेवादारों ने उन पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। आसाराम के एक पूर्व सेवादार शिवनाथ ने आरोप लगाया है कि आसाराम अपनी दावाओं से सेवादारों को नपुंसक बनाते हैं। शिवनाथ का कहना है कि दवा नपुंसक बनाने वाली एक तरह की जड़ी बूटी है।

दूसरी ओर आसाराम के एक अन्य सेवादार अजय कुमार ने भी ज़ी मीडिया से खास बातचीत में आसाराम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अजय कुमार का आरोप है कि आसाराम के आश्रमों की एक अलग दुनिया होती है और वहां तरह-तरह के ‘खेल खेले’ जाते हैं और इस बारे में जो कोई भी आवाज उठाता है, उसकी आवाज दबा दी जाती है।

अजय कुमार ने कहा कि आसाराम के आश्रम में स्वीमिंग पूल होता है और स्वीमिंग पूल में आसाराम महिलाओं के साथ स्नान करते हैं। अजय ने कहा कि उन्होंने एक बार स्वीमिंग पूल से एक महिला को बाहर आते देखा था। 

सेवादार अजय कुमार का आरोप है कि आसाराम के पुत्र नारायण साई भी अपने पिता के काले-करतूतों में भागीदार हैं। जबकि आसाराम के पूर्व सेवादार शिवनाथ का दावा है कि आसाराम जो दवा देते हैं, वह एक तरह की जड़ी-बूटी है जो मनुष्य को नपुंसक बनाती है। शिवनाथ ने बताया कि सेवादारों को यह दवा खाने के लिए मजबूर किया जाता है। 

आसाराम के सेवादारों के लगाए गए आरोपों की ज़ी मीडिया पुष्टि नहीं करता लेकिन विवादों में रहने वाले आसाराम के ऊपर ये गंभीर आरोप हैं, जिनकी जांच होनी चाहिए। sabhar :http://zeenews.india.com/

Read more

सोचे हुए को सुन पाना संभव

0


मस्तिष्क
मस्तिष्क की कार्यप्रणाली का बड़ा भाग अभी भी वैज्ञानिकों के लिए पहेली बना हुआ है


अमरीका में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने मस्तिष्क से निकलने वाली तरंगों को पढ़ने की ओर पहला क़दम बढ़ा लिया है.
इससे ये संभव हो सकेगा कि किसी व्यक्ति के कुछ बोलने से पहले ही ये जाना जा सकेगा कि वह क्या बोलने जा रहा है.

शोध के नतीजों से ये उम्मीद जागी है कि आने वाले दिनों में मस्तिष्क से संबंधित बीमारियों से परेशान लोगों के लिए या बोल पाने में अक्षम लोगों की बातें समझना आसान हो जाएगा.कैलिफ़ोर्निया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने मस्तिष्क में कुछ उपकरण लगाकर और एक कंप्यूटर प्रोग्राम की सहायता से ऐसा संभव कर दिखाया है.

किसी विज्ञान कथा की तरह

बीबीसी के विज्ञान संवाददाता जैसन पामर का कहना है कि ये किसी विज्ञान कथा की तरह है जिसमें आप किसी के विचारों को पढ़कर उन्हें सुन भी पा रहे हैं.
यानी आप किसी व्यक्ति के मस्तिष्क से सीधे बात कर रहे हैं.
उन्होंने ये उपकरण मस्तिष्क के उस हिस्से में लगाया था जो भाषा को लेकर जटिल विद्युतीय तरंगों के रूप में संकेत देता है. फिर इन तरंगों को कंप्यूटर की सहायता से ध्वनि तंरंगों में बदलकर उसे डिकोड करके बोले गए शब्दों और वाक्यों के रूप में सुना.
यानी शोधकर्ता वह बात सुन पा रहे थे जो व्यक्ति सोच रहा था.
शोधकर्ता मान रहे हैं कि ये उन लोगों के लिए वरदान साबित हो सकता है जो किसी और तरह से अपनी बात नहीं रख पाते.sabhar : bbc.co.uk

Read more

क्या दिमाग़ पर क़ब्ज़ा संभव है?

0

इंसानी दिमाग पर नियंत्रण

इंसान के दिमाग़ पर नियंत्रण करना अब वैज्ञानिकों की कोरी कल्पना, या तंत्र-मंत्र की किताबों तक ही सीमित नहीं रहने वाला.
वॉशिंगटन विश्वविद्यालय में किए गए एक शोध में इंटरनेट के माध्यम से एक वैज्ञानिक ने दूसरे वैज्ञानिक के दिमाग़ को नियंत्रित करके दिखाया है.

लेकिन कुछ कहते हैं कि अभी इस सबके बारे में कहना बहुत जल्दबाज़ी होगी.कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पता चल सकता है कि भविष्य में इंसानों के बीच संवाद कैसे होगा.

प्रयोग

वॉशिंगटन विश्वविद्यालय कैंपस में एक कंप्यूटर स्क्रीन के पास बैठे वैज्ञानिक राजेश राव अपने साथी वैज्ञानिक एंड्री स्टोको को संदेश देते हैं कि वह गोला दाग़ें.
कैंपस के दूसरे छोर पर एक कीबोर्ड के सामने बैठे स्टोको न चाहते हुए भी कीबोर्ड का स्पेसबार दबा देते हैं.
रावकी स्क्रीन पर गोला उड़कर रॉकेट को लगता हुआ दिखाई देता है.
ख़ास बात यह है कि स्टोको को संदेश देने के लिए राव ने न ज़ुबान हिलाई न ही शरीर का कोई और अंग. उन्होंने स्टोको को संदेश अपने दिमाग़ से भेजा.
यह घटना एक इंसान के किसी दूसरे इंसान के दिमाग़ पर नियंत्रण करने का पहला प्रमाण है.
हालांकि शोधकर्ता इसे थोड़ा कम आकर्षक नाम 'इंसान से इंसान का दिमाग़ी अंतरसंबंध' दे रहे हैं.
लेकिन आम आदमी को यह हैरी पॉटर के खलनायक वोल्डेमोर्ट का दिमाग़ पर नियंत्रण करने वाला सम्मोहन शाप जैसा लग सकता है.
हालांकि स्टोको इस प्रयोग को मज़ाक़ में मशहूर टीवी सीरीज़ स्टार ट्रेक में स्पोक द्वारा दिमाग़ से बातें साझा करने जैसा बताते हैं.
इंसानी दिमाग पर नियंत्रण
बहरहाल वह कहते हैं, "इस मामले में इंटरनेट का इस्तेमाल किया गया था. जैसे वह कंप्यूटरों को जोड़ता है उसने दिमाग़ों को जोड़ा था."
राव कहते हैं कि एक क्लिक करेंसोची गई बात को किसी दूसरे के दिमाग़ का पढ़ना और लागू होते हुए देखना "सचमुच बहुत उत्साहजनक और अद्भुत" था
वह कहते हैं, "अगले चरण में दोनों दिमाग़ों के बीच और दोतरफ़ा संवाद करना होगा."

तकनीक

लेकिन दिमाग़ के तकनीक को नियंत्रित करने की और भी कई उदाहरण हैं.
जैसे कि, क्लिक करेंसैमसंग दिमाग़ से चलने वाले एक टैबलेट पर प्रयोग कर रहा है.
टेक्नोलॉजी फ़र्म इंट्राक्सॉन एक "मस्तिष्क संवेदी हेडबैंड" की मार्केटिंग कर रही है जिससे आप अपने क्लिक करेंदिमाग़ से चीज़ों को नियंत्रित कर सकते हो.
यह उपकरण पहले ही शारीरिक रूप से अक्षम लोगों द्वारा बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जा रहा है.
साफ़ है कि इस प्रयोग में इस्तेमाल की गई दिमाग़ के आदेश लेने और देने की तकनीक पहले से ही मौजूद है.
इलेक्ट्रोनसैफलोग्राफ़ी, वह तकनीक है जिसे राव के दिमाग़ से संदेश भेजने के लिए इस्तेमाल किया गया. इसे सामान्यतः मेडिकल पेशे में खोपड़ी से दिमाग़ की हरकतें रिकॉर्ड करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.
ट्रांसक्रेनियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन, वह तकनीक है जिससे स्टोको की उंगली ने हरकत की. इस तकनीक का इस्तेमाल किसी हरकत के लिए दिमाग़ को उत्तेजित करने के लिए किया जाता है.
वॉल्डेमॉर्ट
लेकिन इन दोनों का एक साथ इस्तेमाल कर एक आदमी से दूसरे के आदेश का पालन करवाना- यह नया है.
हालांकि शोधकर्ता यह बताना नहीं भूलते कि यह प्रयोग सिद्धांत के लिहाज़ से बहुत शुरुआती चरण में है.

संभावनाएं

लेकिन रोबोटिक्स में पीएचडी करने वाले और 'रोबोकैलिप्स' के लेखक डेविड विल्सन कहते हैं कि यह प्रयोग 'सिद्धांत के सबूत' के रूप में बहुत महत्वपूर्ण है.
वह कहते हैं, "इसने एक बहस शुरू कर दी है कि भविष्य में दिमाग़ से दिमाग़ का संवाद कैसे समाज को प्रभावित करेगा."
हालांकि वह यह भी कहते हैं, "हालांकि यह प्रयोग इतने छोटे दायरे में किया गया है कि इसका व्यावहारिक रूप से कोई विशेष अर्थ नहीं है, लेकिन यह हमें सोचने पर मजबूर तो करता ही है."
लेकिन सभी प्रभावित नहीं हैं.
फ़्यूचरोलॉजिस्ट (भविष्य की अध्ययनकर्ता) डॉ इयान पीयरसन विज्ञान और अभियांत्रिकी के क्षेत्र से हैं.
वह कहती हैं, "एक साधारण सा विचार की पहचान करने वाला तंत्र बहुत मामूली चीज़ है. अगर वह एक व्यक्ति के विचार को लेकर सीधे दूसरे व्यक्ति में पैदा करवा सकते- तो मैं प्रभावित हो जाती."

डॉक्टर डेविड विल्सन
हालांकि सामान्यतः इस क्षेत्र में होने वाला विकास इंसानों के बीच संवाद और सहयोग के असर को लेकर आमतौर पर सहमति है.
स्टोको कहते हैं कि संभव है कि एक दिन पायलट के अक्षम हो पाने की स्थिति में ज़मीन बैठा आदमी किसी यात्री के माध्यम से हवाई जहाज़ को ज़मीन पर उतरवाने में कामयाब हो जाए.

आशंकाएं

हालांकि दिमाग़ पर नियंत्रण का पूरा सिद्धांत ही अक्सर इसके दुरुपयोग की आशंकाओं से घिरा रहता है.
लेकिन रोबोट नियंत्रित भविष्य के बारे में किताब लिखने वाले विल्सन कहते हैं इस प्रयोग के असर को लेकर आशांवित हैं.
वह कहते हैं, "मुझे इसमें कोई भी ख़तरा नहीं दिखाई देता. यह तो दो अलग भाषा बोलने वाले लोगों को एक बेहतर दल बनाने में सहायता कर सकता है- जिससे समस्याएं जल्दी सुलझ सकेंगी."
वॉशिंगटन विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान की असिस्टेंट प्रोफ़ेसर चंतल प्रत ने भी इस प्रयोग के संचालन में मदद की थी.
वह विल्सन की बात से सहमत हैं.
चंतल कहती हैं, "ऐसी कतई संभावना नहीं है कि जिस तकनीक का हम इस्तेमाल कर रहे हैं उसे किसी ऐसे किसी व्यक्ति पर लागू नहीं किया जा सकता जो इसे चाहता न हो या जिसे इसकी जानकारी न हो."
डॉक्टर पीयरसन कहती हैं "जब दिमाग तक हमारी पूरी तरह सीधी पहुंच हो जाएगी और आप किसी को रोबोट की तरह इस्तेमाल कर सकेंगे तब दिक्क़त हो सकती है."

"चाहे यह ग़ुलामी हो या सरकारी नियंत्रण- कौन जानता है. आप इस बारे में जिनती चाहें कहानियां लिख सकते हैं." sabhar : bbc.co.uk

Read more

कुत्ते ने किया रक्तदान

0


dog
न्यूजीलैंड। अगर आपसे कोई अचानक रक्तदान के लिए कहे तो क्या आप सहर्ष तैयार हो जायेंगे, ऐसे में ज्यादातर लोग तैयार नहीं होंगे। लेकिन हम इंसान एक कुत्ते से तो सीख ही सकते हैं।
न्यूजीलैंड में एक लैब्रोडोर नस्ल के कुत्ते ने बिल्ली को बचाने के लिए रक्त दिया। आमतौर पर कुत्ते और बिल्ली के बीच कभी सामान्य रिश्ते नहीं देखे जाते हैं पर कुत्ते ने ऐसे समय में बिल्ली को खून दिया जब वो लगभग मरने ही वाली थी, पशु चिकित्सक का कहना है कि बिल्ली ने गलती से चूहे मारने की दवा खा ली थी, जिससे उसकी हालत एकदम खराब हो गयी थी। बिल्ली की मालकिन किम ने बताया कि रोरी (बिल्ली) की तबियत बिल्कुल बिगड़ती ही जा रही थी, हमारे पास बिल्कुल भी वक्त नहीं था कि हम एक बिल्ली का खून लें और उसे लैब में मैच करवाकर रोरी को दें तभी मैनें अपने दोस्त से बात की जिनके पास लैब्रोडोर प्रजाति का कुत्ता है।
उस कुत्ते के रक्त को टेस्ट करके बिल्ली को चढ़ाया गया और बिल्ली ठीक हो गयी। sabhar : jagaran.com

Read more

42 साल पहले अंतरिक्ष में फटा था परमाणु बम, US की पोल खोलने वाले फैक्ट्स

0

42 साल पहले अंतरिक्ष में फटा था परमाणु बम, US की पोल खोलने वाले फैक्ट्स

इन दिनों अमेरिका शटडाउन है। सभी गैरजरूरी सरकारी संस्थान बंद कर दिए गए हैं। लाखों लोगों को बिना सैलरी दिए छुट्टी पर भेज दिया गया। सरकार के पास अपने खर्चे पूरे करने के लिए पैसा नहीं है। ऐसे दौर में अमेरिका जाने की बात सोचना भी मुश्किल है।
एक दौर था, जब अमेरिकन ड्रीम का नारा युवाओं पर छाया रहता था। लोग वहां नौकरी और पढ़ाई करने के सपने देखते थे। लोगों को रेड इंडियंस की यह धरती स्वर्ग जैसी लगती थी। लेकिन मंदी की मार, आतंक के खिलाफ अघोषित युद्ध ने अमेरिका की कमर तोड़ दी। सरकार को अपने सरकारी संस्थान चलाने के बैलआउट पैकेज देने पड़े। विकास दर की गति काफी धीमी हो गई है।
हालांकि इसमें कोई दोराय नहीं कि अमेरिका जल्द ही इन परेशानियों से उबर जाएगा। फिर भी चीन और भारत से मिल रही चुनौती से अगले कुछ दशकों में पार पाना मुश्किल होगा। विशेषज्ञों की राय में तीन दशकों में चीनी अर्थव्यवस्था अमेरिकी अर्थव्यवस्था को पछाड़ सकती है।
अमेजिंग फैक्ट्स की इस सीरीज में हम आपको इस बार अमेरिका के कुछ दिलचस्प फैक्ट्स से रूबरू करवा रहे हैं.....

(FACT 1: 1962 में अमेरिका हाइड्रोजन बम अंतरिक्ष में फट गया था। यह हिरोशिमा पर गिराए गए बम से सौ गुना ज्यादा शक्तिशाली था।)

42 साल पहले अंतरिक्ष में फटा था परमाणु बम, US की पोल खोलने वाले फैक्ट्स
अमेरिकी नागरिक संसाधनों का अंधाधुंध इस्तेमाल करने के लिए पूरी दुनिया में बदनाम हैं। एक अमेरिकी नागरिक 32 केन्याई नागरिकों के बराबर संसाधनों को इस्तेमाल करता 
42 साल पहले अंतरिक्ष में फटा था परमाणु बम, US की पोल खोलने वाले फैक्ट्स
आप भले ही मानें या न मानें। अगर आपकी पॉकेट में 10 डॉलर (6 हजार रुपए) हैं और आप पर किसी भी तरह का कर्ज न हो, तब आप अमेरिका के 25 फीसदी लोगों से ज्यादा संपन्नशाली होंगे।
42 साल पहले अंतरिक्ष में फटा था परमाणु बम, US की पोल खोलने वाले फैक्ट्स
भले ही अमेरिका में काले-गोरे को लेकर लंबी लड़ाई चली हो, लेकिन आपको बता दें कि अमेरिका में पहला गुलामों का मालिक एक काला व्यक्ति ही था।

42 साल पहले अंतरिक्ष में फटा था परमाणु बम, US की पोल खोलने वाले फैक्ट्स
दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका एप्पल कंपनी  के आगे बेबस है। एप्पल कंपनी के पास अमेरिकी खजाने से भी ज्यादा पैसा है। वहीं, 40 फीसदी बच्चों का जन्म अमेरिका में बिन ब्याही लड़कियों द्वारा होता  है।
42 साल पहले अंतरिक्ष में फटा था परमाणु बम, US की पोल खोलने वाले फैक्ट्स
आठ में से एक अमेरिकी मैक्डोनाल्ड में नौकरी करता है। वहीं, सात फीसदी अमेरिकी दावा करते हैं कि वे कभी नहीं नहाते।
42 साल पहले अंतरिक्ष में फटा था परमाणु बम, US की पोल खोलने वाले फैक्ट्स
अमेरिका अपराध का घर माना जाता है। दुनिया में करीब 90 लाख अपराधी जेलों में मौजूद हैं। इसी का चौथाई हिस्सा यानी करीब 25 लाख अपराधी अमेरिका की जेलों में सड़ रहा है।
42 साल पहले अंतरिक्ष में फटा था परमाणु बम, US की पोल खोलने वाले फैक्ट्स
हर साल यहां 50 हजार मौतें दूसरों के सिगरेट के धुंए के संपर्क में आने से होती है। अमेरिका और यूरोप के कुछ हिस्सों में नाबालिगों को कानून में सिगरेट पीने की आजादी दी हुई है। बावजूद इसके सिगरेट खरीद नहीं सकते।
42 साल पहले अंतरिक्ष में फटा था परमाणु बम, US की पोल खोलने वाले फैक्ट्स

अमेरिका में हर दिन 4 हजार नाबालिग अपनी पहली सिगरेट का कश लेते हैं। इनमें से एक हजार लोग सिगरेट को अपनी जिंदगी का अहम हिस्सा बना लेते हैं। हर साल पांच में से एक आदमी सिगरेट से मरता है।
42 साल पहले अंतरिक्ष में फटा था परमाणु बम, US की पोल खोलने वाले फैक्ट्स
चिकन पूरी दुनिया में खाया जाता है। अमेरिका में हर साल आठ बिलियन चिकन की खपत होती है। वहीं, हर दिन 22 मिलियन चिकन की खपत पूरे अमेरिका में होती है।
42 साल पहले अंतरिक्ष में फटा था परमाणु बम, US की पोल खोलने वाले फैक्ट्स
हर तीन में से एक अमेरिकी नागरिक मोटापे से शिकार है। वहीं, मेडिकल की गलतियां अमेरिका में 6वें नंबर की सबसे बड़ी समस्या है। इन गलतियों से कई मौतें हो जाती हैं।
42 साल पहले अंतरिक्ष में फटा था परमाणु बम, US की पोल खोलने वाले फैक्ट्स
महंगाई के जमाने में यहां एक घर की कीमत करोड़ों रुपए है, वहीं अमेरिका ने दुनिया की सबसे अच्छी डील की थी। उसने 1867 में रूस से अलास्का राज्य खरीदा था। वो भी सिर्फ 72 लाख रुपए में।
42 साल पहले अंतरिक्ष में फटा था परमाणु बम, US की पोल खोलने वाले फैक्ट्स
अमेरिका में तेजी से नौकरी छोड़ना आम बात है। औसतन एक अमेरिकी मजदूर किसी भी जगह 4 साल 4 महीने से ज्यादा नहीं टिकता।
42 साल पहले अंतरिक्ष में फटा था परमाणु बम, US की पोल खोलने वाले फैक्ट्स

यह आंकड़ा आपको चौंकाने के लिए काफी है कि अमेरिका में हर घंटे एक व्यक्ति की मौत शराब पीने से ही हो जाती है। वहीं, 20 और 30 के दशक में अमेरिकी सरकार द्वारा प्रतिबंधित जहरीली शराब पीने से दस हजार लोगों की मौत हो गई थी।
42 साल पहले अंतरिक्ष में फटा था परमाणु बम, US की पोल खोलने वाले फैक्ट्स
चॉकलेट किसे पसंद नहीं है, लेकिन इस मामले में भी अमेरिकियों का भी जवाब नहीं है। अमेरिकी सामूहिक रूप से हर सेकंड में 100 पाउंड की चॉकलेट खा जाते हैं।
42 साल पहले अंतरिक्ष में फटा था परमाणु बम, US की पोल खोलने वाले फैक्ट्स
अमेरिका और पिज्जा का संबंध भारत में समोसा के साथ आलू जैसा है। अमेरिका में हर दिन 100 एकड़ के बराबर पिज्जा अलग-अलग रेस्ट्रोरेंट में सर्व किया जाता है। sabhar : bhaskar.com





Read more

आज भले ही दिखती हैं 'हीरोइन', रोल मिलने से पहले इतनी बुरी थी इनकी हालत

0

आज भले ही दिखती हैं 'हीरोइन', रोल मिलने से पहले इतनी बुरी थी इनकी हालत

बॉलीवुड में जितने भी एक्टर्स और एक्ट्रेसेस हैं, वो सभी अपनी फिल्मों के लिए बहुत मशक्कत करते हैं। वजन घटाने-बढ़ाने से लेकर लुक बदलने तक, सिक्स पैक बनाने से लेकर मोटापा दिखाने तक, बहुत सारी ऐसी चीजें हैं जिनके लिए इन स्टार्स को जूझना पड़ता है।
 
लेकिन जब बात एक्ट्रेसेस की होती है तो ये समस्या कहीं ज्यादा बढ़ जाती है। दरअसल इन्हें हमेशा ही अपनी बॉडी और फिगर मेन्टेन करके रखना पड़ता है। अगर जरा सा भी वजन ज्यादा हो जाता है तो उनके लुक की बैंड बज जाती है।
 
एक्ट्रेसेस के लिए तो यही कहा जा सकता है कि वजन घटाने के लिए इन्हें कोई प्रेरित करे ना करे, मूवी रोल्स जरूर प्रेरित करते हैं। फिल्मों में रोल पाने के लिए ये अपने साथ किसी भी हद तक एक्सपेरिमेंट कर सकती हैं। खबरें तो ये भी हैं कि मोहित सूरी की एक फिल्म के लिए विद्या बालन 12 किलो से ज्यादा वजन कम कर रही हैं।
 
इस पैकेज के जरिए हम आपको बताएंगे फिल्म इंडस्ट्री की ऐसी ही एक्ट्रेसेस के बारे में, जो पहले तो बहुत मोटी थीं लेकिन फिल्मों के ऑफर की वजह से इन्होंने मेकओवर कर डाला।
 आज भले ही दिखती हैं 'हीरोइन', रोल मिलने से पहले इतनी बुरी थी इनकी हालत
ऐश तो पहले से ही दुनिया की सबसे खूबसूरत महिलाओं की लिस्ट में शुमार थीं। लेकिन 'धूम 2' में लीड एक्ट्रेस के किरदार के लिए उन्हें और भी ज्यादा टोन्ड और सेक्सी दिखना था। इसलिए इस एक्स ब्यूटी क्वीन ने 'धूम 2' के लिए 10 किलो से ज्यादा वजन कम किया था। इसका असर ये दिखा कि फिल्म के हर सीन में और हर कॉस्ट्यूम में ऐश बोल्ड दिख रही थीं।

आज भले ही दिखती हैं 'हीरोइन', रोल मिलने से पहले इतनी बुरी थी इनकी हालत

तनीषा मुखर्जी (नील एंड निक्की)
 
तनीषा मुखर्जी ने अपने फिल्मी करियर में वैसे तो कुछ खास नहीं किया है लेकिन वजन बढ़ाने-घटाने वाली मशक्कत जरूर की है। इस तस्वीर में आप खुद ही देख सकते हैं कि इवेंट में तनीषा कितनी फैटी नजर आ रही हैं वहीं फिल्म 'नील एंड निक्की' में उनका वजन कितना कम दिख रहा है। वैसे हम आपको बता दें कि ये फिल्म यशराज बैनर की बोल्डेस्ट मूवीज में से एक है।
आज भले ही दिखती हैं 'हीरोइन', रोल मिलने से पहले इतनी बुरी थी इनकी हालत
बिपाशा बसु (धूम 2)
 
बंगाली बाला बिपाशा बसु तो वैसे भी फिटनेस को लेकर काफी सजग रहती हैं लेकिन अब वजन पर काबू रखना किसके बस में होता है। कुछ ऐसा ही बिपाशा बसु के साथ भी हुआ था। फिल्म 'धूम 2' में कास्ट किए जाने के एवज में बिपाशा को भी जिम में खूब पसीना बहाना पड़ा था। वैसे उसका असर 'धूम 2' में साफ दिखा था। हां, तस्वीर में भी दिख रहा है।
 आज भले ही दिखती हैं 'हीरोइन', रोल मिलने से पहले इतनी बुरी थी इनकी हालत
अमीषा पटेल (थोड़ा प्यार थोड़ा मैजिक)
 
अमीषा पटेल अपने फिल्मी करियर में कभी भी 'दुबली' एक्ट्रेस के तौर पर नहीं दिखी हैं लेकिन फिल्म 'थोड़ा प्यार थोड़ा मैजिक' में बिकिनी सीन्स की वजह से उन्हें भी अपना वजन काफी कम करना पड़ा था। तस्वीर में भी आप खुद ही देख सकते हैं कि एक पार्टी में अमीषा कितनी मोटी नजर आ रही हैं लेकिन 'थोड़ा प्यार...' में उन्होंने मैजिक ही कर दिया था।
आज भले ही दिखती हैं 'हीरोइन', रोल मिलने से पहले इतनी बुरी थी इनकी हालत

कुछ भी कहिए, लेकिन वजन घटाने वाली लिस्ट में सबसे बड़ा नाम तो करीना कपूर ही हैं। फिल्म 'टशन' में रोल की डिमांड पर करीना ने तो जीरो फिगर ही अपना लिया था। इस फिल्म की शूटिंग के समय करीना ने कुछ भी खाना बंद कर दिया था और सिर्फ लिक्विड डाइट पर थीं। इस वजह से वो कई बार सेट पर बेहोश भी हो जाती थीं। लेकिन फिल्म रिलीज होने के बाद करीना के इस लुक ने जो धमाल मचाया था, वो भी बहुत जबरदस्त था।
 आज भले ही दिखती हैं 'हीरोइन', रोल मिलने से पहले इतनी बुरी थी इनकी हालत

हाल ही में यशराज बैनर की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'धूम 3' का टीजर लॉन्च किया गया है जिसमें सारे कलाकारों की एक-एक झलक दिखाई गई है। इस टीजर में कैटरीना भी बहुत ही दुबली-पतली और सेक्सी लग रही हैं। लेकिन इसके पीछे कारण है कि कैटरीना ने 'धूम 3' के लिए मैक्रोबायोटिक डाइट लेने के साथ जिम में बहुत ज्यादा मेहनत की है। खुद को बेस्ट शेप में ढालने के लिए कैटरीना ने खूब मेहनत की है और इसका कारण सिर्फ एक है- 'धूम 3' में रोल। इसका कैट पर क्या असर पड़ा है, खुद ही देख लीजिए।
 
आज भले ही दिखती हैं 'हीरोइन', रोल मिलने से पहले इतनी बुरी थी इनकी हालत
सोनाक्षी सिन्हा (दबंग)
 
एक स्टार किड होने पर घर में खातिरदारी होना तो जाहिर सी बात है लेकिन यही खातिरदारी अगर आपका वजन 90 किलो कर दे तो हीरोइन बनना तो मुश्किल हो ही जाएगा। कुछ ऐसा ही सोनाक्षी सिन्हा के साथ भी था। लेकिन 'दबंग' में सलमान के साथ रोल करने के लिए सोनाक्षी ने ये मुश्किल भी पार कर ली थी। फिल्मों में आने से पहले वो बहुत ही ज्यादा मोटी थीं लेकिन आज उनमें कितना फर्क आ गया है, ये सबके सामने है। 'दबंग' के लिए तो सोनाक्षी ने 30 किलो वजन कम किया था।
आज भले ही दिखती हैं 'हीरोइन', रोल मिलने से पहले इतनी बुरी थी इनकी हालत
आलिया भट्ट (स्टूडेंट ऑफ दि इयर)
 
'स्टूडेंट ऑफ दि इयर' जैसी सफल फिल्म से बॉलीवुड में कदम रखने वाली आलिया भट्ट के लिए भी बॉलीवुड की राह कम मुश्किल नहीं थी। लेकिन अब जब करण जौहर खुद ही रोल ऑफर कर रहे हों तो कौन ना कह सकेगा। आलिया भट्ट ने भी फिल्मों में आने के लिए अपनी डाइट चार्ट से लेकर एक्सरसाइज चार्ट तक, सब कुछ बदल डाला था। काफी वजन कम करने के बाद ही उन्हें ये फिल्म नसीब हुई थी।
 आज भले ही दिखती हैं 'हीरोइन', रोल मिलने से पहले इतनी बुरी थी इनकी हालत
विद्या बालन (मोहित सूरी की अगली फिल्म)
 
विद्या बालन ने अपनी नेचुरल फिगर के साथ 'दि डर्टी पिक्चर' जैसी हिट फिल्म दी है लेकिन अब मोहित सूरी की अगली फिल्म में रोल पाने के लिए वो अपना वजन कम करने में जुट गई हैं। इस फिल्म के लिए विद्या ने 12 किलो तक वजन कम कर लिया है और उनकी कोशिश अभी भी जारी है। इस फिल्म में वो एक बड़ी चेन वाले होटल में एक फ्लोरिस्ट का रोल निभा रही हैं और उनके अपोजिट इमरान हाशमी को कास्ट किया गया है। विद्या के वर्कआउट को देख कर ऐसा लग रहा है कि वो इस रोल के लिए काफी सीरियस हो गई हैं। sabhar : bhaskar.com






Read more

शुक्रवार, 4 अक्तूबर 2013

पति को 19 साल बाद पत्नी के पुरुष होने का पता चला

0

Belgian man

लंदन। बेल्जियम के 64 वर्षीय जेन शादी के उन्नीस साल बाद अपनी पत्नी से छुटकारा पाना चाहते हैं। इसकी वजह कुछ अजीब है। जेन को हाल में पता चला कि उनकी 48 वर्षीय पत्नी एक पुरुष है, जो बाद में लिंग परिवर्तित कर महिला बन गई थी।
'द टेलीग्राफ' की रिपोर्ट के मुताबिक जेन ने 1993 में मोनिका नाम की इंडोनेशियाई महिला से शादी की थी और उसे बेल्जियम ले आए थे। जेन कहते हैं, हमारे बीच आम पति-पत्नी की तरह सब ठीक चल रहा था। मुझे कभी इसका एहसास ही नहीं हुआ कि मेरी पत्नी एक पुरुष है। मुझे उसके अंदर पुरुष जैसे लक्षण कभी नहीं दिखे, यहां तक कि सेक्स के दौरान भी नहीं। मेरी पहली पत्नी से दो बच्चे थे, इसलिए हमने बच्चे पैदा न करने का फैसला किया था।
अब जाकर मुझे पता चला कि असल में मोनिका मुझे इतने वर्षो से मूर्ख बना रही थी। जेन का कहना है कि वह अपनी पत्नी से अलग होना चाहते हैं और इसके लिए उन्होंने कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। sabhar :http://www.jagran.com

Read more

गंजेपन की दवा ने पुरुष को बना दिया औरत

0

medicine

लंदन। अमेरिका में एक शख्स ने दावा किया है कि गंजेपन के इलाज के लिए ली गई दवा से उसमें औरतों जैसे लक्षण विकसित हो गए हैं।
ब्रिटिश अखबार डेली मेल में प्रकाशित खबर के अनुसार, एक बच्चे के पिता सॉफ्टवेयर इंजीनियर 38 वर्षीय विलियम मैकी ने बालों को उगाने के लिए 'प्रोपेसिया' नामक जेनरिक दवा लेनी शुरू की थी। नौ महीने तक दवा खाने के बावजूद उनके सिर में बाल तो नहीं बढ़े, लेकिन महिलाओं की तरह उनके स्तनों का आकार बढ़ गया और कूल्हे चौड़े हो गए। उन्होंने बताया कि गंजापन उन्हें आनुवांशिक रूप से है। उन्हें उम्मीद थी कि दवा से बाल बढ़ेंगे, लेकिन दवा कुछ और ही असर कर गई।
उन्होंने बताया,'दवा लेने के कुछ महीनों बाद मुझे महसूस हुआ कि मेरे शरीर की बनावट बदल रही है। इसलिए मैंने महिलाओं के कपड़े पहनना शुरू किया और खुद का नाम मैंडी रख लिया।' सिलिकान वैली के पूर्व व्यवसायी ने दावा किया है कि नौ महीनों तक रोजाना दिन में एक गोली लेने के कारण उनके शरीर में हार्मोस का संतुलन बिगड़ गया और अब वह लिंग परिवर्तन कराने पर विचार कर रहे हैं।
वहीं दवा निर्माता कंपनी मर्क के प्रवक्ता ने कहा कि प्रोपेसिया और यौन समस्याओं के बीच कोई संबंध नहीं है sabhar : jagaran.com

Read more

यह दुर्लभ बीमारी इंसान को बना देती है जीवित बुत

0

Fibrodysplasia Ossificans Progressiva

लंदन। ऐसी दुर्लभ बीमारी के बारे में शायद ही आपने पढ़ा या सुना होगा जिसमें शरीर की मांसपेशियां धीरे-धीरे हड्डियों में तब्दील हो जाती हैं। यानी शरीर का वह हिस्सा पूरी तरह से गतिहीन हो जाता है या यूं कहें कि इंसान एक जीवित बुत में बदल जाता है।
इस लाइलाज और दुर्लभ बीमारी को फाइब्रोडिसप्लेसिया ओस्सिफिकांस प्रोग्रेसिव (एफओपी) या 'स्टोन मैन सिंड्रोम' के नाम से जाना जाता है। पूरी दुनिया में इससे सात सौ लोग पीड़ित हैं जिसमें से एक 31 वर्षीय एशले कुर्पिएल हैं। इस असाध्य बीमारी के कारण उनका एक पैर इसकी चपेट में आ चुका है। इसके बावजूद वह निराश नहीं हैं। वह तमाम तकलीफ और कठिनाइयों के बावजूद काफी जिंदादिल हैं। एशले का मानना है कि जब तक वह चलने फिरने में सक्षम हैं तब तक जिंदगी का पूरा लुत्फ उठाया जाए। अपनी इसी जिजीविषा के चलते वह अपना हर शौक पूरा करने के लिए हर समय उत्साहित रहती हैं। वह अपने मेकअप पर ही लाखों रुपये खर्च करती हैं। नवंबर में कैरेबियन क्रूज पर अपने दोस्तों के साथ सैर की भी योजना बना रखी हैं। एशले खुद को भाग्यशाली मानती हैं कि उनके जबड़े इससे बचे हुए हैं क्योंकि उस स्थिति में मुंह की गतिविधि भी स्थिर हो जाती है। ब्रिटेन के एसेक्स में जन्मी एशले जब तीन वर्ष की थी उस समय डॉक्टरों ने भूलवश समझा कि उनके दाहिनी हाथ में कैंसर है जिसके बाद उसे काट दिया गया। इस बीमारी के लक्षण उनमें किशोरावस्था में दिखने शुरू हुए थे। उन्होंने 2002 में शादी भी की, लेकिन तीन साल बाद टूट गई। अपनी इस बीमारी के प्रति जागरुकता फैलाने की ख्वाहिशमंद एशले 2007 में तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा से भी मिल चुकी हैं। sabhar : jagaran.com

Read more

कृत्रिम मांसपेशियों से सुपरमैन बनेंगे रोबोट

0

Artificial muscles

सिंगापुर। वैज्ञानिकों ने ऐसी कृत्रिम मांसपेशियां तैयार की हैं जिससे रोबोट सुपरमैन की तरह ताकतवर बन सकेंगे। इस ताकत के दम पर वे अपने से अस्सी गुना ज्यादा वजन और पांच गुना बड़े आकार की वस्तु को उठाने में सक्षम हो जाएंगे।
ये कृत्रिम मांसपेशियां नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर (एनयूएस) के इंजीनियरिंग फैकल्टी की एक शोध टीम ने विकसित की हैं। शोधकर्ताओं ने बताया कि इससे शक्तिशाली रोबोट के निर्माण का रास्ता प्रशस्त होगा। इन खास किस्म की मांसपेशियों में थोड़ी देर की चार्जिग से इतनी ज्यादा ऊर्जा इकट्ठी हो सकती है कि वह रोबोट की शक्ति कई गुना बढ़ाने में मददगार हो सकती है। मौजूदा समय में रोबोट अपने से आधा ही वजन उठा सकते हैं जो एक औसत मानव क्षमता के बराबर है। हालांकि कुछ लोग अपने से तीन गुना तक वजन उठाने की क्षमता भी रखते हैं।
मुख्य शोधकर्ता डॉ. एड्रियन कोह ने बताया कि ये खास मांसपेशियां न केवल शक्तिशाली हैं बल्कि बेहद प्रतिक्रियाशील भी हैं। उन्होंने तीन से पांच साल के अंदर एक रोबोटिक हाथ विकसित करने का भरोसा जताते हुए कहा कि इसका वजन और आकार मानव हाथ की तुलना में आधा होगा। sabhar : jagaran.com

Read more

गुरुवार, 3 अक्तूबर 2013

एक और छात्रा से एक सप्‍ताह तक दुष्‍कर्म करते रहे थे आसाराम! जोधपुर में दर्ज हुआ केस

0

एक और छात्रा से एक सप्‍ताह तक दुष्‍कर्म करते रहे थे आसाराम! जोधपुर में दर्ज हुआ केस

इंदौर/जोधपुर. कथावाचक आसाराम बापू पर छाया संकट का साया और गहरा हो सकता है। उन पर एक और लड़की ने यौन उत्पीड़न का केस दर्ज कराया है। यह केस मेरठ के किला रोड स्थित एक कॉलोनी की लड़की ने जोधपुर में दर्ज कराया है। गुरुवार को जोधपुर की पुलिस इस सिलसिले में मेरठ गई थी। 
जोधपुर के वेस्ट महिला थाने में दर्ज प्राथमिकी के मुताबिक जोधपुर आश्रम में शिक्षा-दीक्षा के नाम पर आसाराम ने लड़की के साथ एक सप्ताह तक दुष्कर्म किया। 
 
केस दर्ज कराने वाली लड़की मेरठ में निजी स्कूल में 11वीं में पढ़ती थी। लेकिन आसाराम के आश्रम में दी जाने वाली शिक्षा के प्रति आकर्षण के चलते वह जोधपुर गई थी। उसका परिवार आसाराम का भक्त है। लड़की के चाचा ने माना कि आसाराम के ज्यादातर कार्यक्रमों में उसका परिवार शरीक होता रहा है। लड़की के चाचा का यह भी कहना है कि आसाराम आश्रम के संचालकों ने उनके परिजनों को अगवा कर रखा है। 27 सितंबर से लड़की के पिता और पूरे परिवार का पता नहीं है। सभी सदस्यों के मोबाइल फोन भी बंद हैं। 
यौनशोषण के आरोपों में जेल में बंद आसाराम के बेटे नारायण साईं की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। नारायण पर धोखे से अपने शादीशुदा सेवादार की शादी करवाने का आरोप है। इस मामले में शुक्रवार को इंदौर की अदालत में सुनवाई होनी है। नारायण पर आरोप लगाने वाली पीड़ित महिला का कहना है कि 2000 में उसने नारायण साईं से दीक्षा ली थी।
2004 में नारायण साईं ने बहला-फुसलाकर अपने सेवादार ईश्वर वाधवानी से उसकी शादी करवा दी। महिला के मुताबिक, यह शादी नारायण साईं ने ही करवाई थी। साईं ने ही मंत्र पढ़े और फेरे करवाए थे। महिला का कहना है कि उसे दो महीने बाद मालूम हुआ कि उसका पति शादीशुदा था। इस दौरान वह गर्भवती हो चुकी थी। यही नहीं, नारायण साईं ने उसके साथ अश्लील हरकतें भी की। महिला के मुताबिक वह यह लड़ाई अपने बेटे को पिता का नाम दिलवाने के लिए लड़ रही है।
एक और छात्रा से एक सप्‍ताह तक दुष्‍कर्म करते रहे थे आसाराम! जोधपुर में दर्ज हुआ केस

जोधपुर की एक स्थानीय अदालत ने नाबालिग लड़की से यौन उत्‍पीड़न मामले में फंसे आसाराम की सहयोगी शिल्‍पी को गुरुवार को आठ दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। शिल्पी मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में आसाराम के आश्रम में वार्डन थी। उस पर लड़की को जोधपुर आश्रम भेजने का आरोप है। लड़की उसी आश्रम में रहकर पढ़ाई करती थी।
 
जोधपुर की जिला एवं सत्र अदालत द्वारा शिल्‍पी को न्‍यायिक हिरासत में भेजे जाने के आदेश के बाद शिल्‍पी के वकील ने जमानत के लिए आवेदन किया। जमानत आवेदन पर शुक्रवार को सुनवाई होगी। शिल्पी के वकील ने कहा कि पुलिस हिरासत की अवधि बढ़ाए जाने की मांग नहीं किए जाने पर अदालत ने शिल्पी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
 
राजस्थान हाई कोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दिए जाने के बाद शिल्पी ने बीते 25 सितंबर को यहां अदालत में सरेंडर कर दिया था। इसके साथ ही इस मामले में आसाराम सहित सभी पांच आरोपी न्यायिक हिरासत में भेज दिए गए हैं और उन्हें 11 अक्‍टूबर को अदालत में पेश किया जागएा।
 
इस मामले में आसाराम के अलावा अन्य आरोपियों में शिवा (आसाराम का सहायक), शरद चंद्र (गुरूकुल का निदेशक), प्रकाश (आसाराम का रसोइया) और शिल्पी शामिल हैं। sabhar : bhaskar.com

Read more

स्वीमिंग पूल में एक लड़की के साथ निर्वस्त्र थे आसाराम’

0

EXCLUSIVE: ‘स्वीमिंग पूल में एक लड़की के साथ निर्वस्त्र थे आसाराम’

अहमदाबाद। जोधपुर में अपनी की एक नाबालिग भक्त के साथ दुष्कर्म के आरोप में आसाराम इन दिनों जेल की हवा खा रहे हैं। इसके साथ ही अब रोजाना आसाराम से जुड़े कई विवादों का खुलासा हो रहा है। आसाराम के चेले शिवा, शिल्पी, आश्रम के वैद्यराज के बाद अब अहमदाबाद के मोटेरा आश्रम में रहने वाले अजय कुमार ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। 
 एक इंटरव्यू में अजय ने बताया कि उन्होंने खुद आसाराम को आश्रम में बने स्वीमिंग पूल में एक महिला के साथ आपत्तिजनक अवस्था में देखा था।
 EXCLUSIVE: ‘स्वीमिंग पूल में एक लड़की के साथ निर्वस्त्र थे आसाराम’

अजय ने बताया कि अहमदाबाद स्थित मोटेरा आश्रम में एक आलीशान स्वीमिंग पूल भी है। यह स्वीमिंग पूल आसाराम की शांति कुटिया में स्थित है, जहां किसी भी व्यक्ति का प्रवेश निषेध है। जब भी आसाराम शांति कुटिया में होते हैं तो पहले ही आश्रम के सारे व्यक्तियों को इसकी सूचना दे दी जाती है, ताकि कोई गलती से भी शांति कुटिया में प्रवेश न करे।अजय बताते हैं कि यह स्वीमिंग पूल लग्जीरियस है और इसमें ब्लू कलर के महंगे टाइल्स लगे हुए हैं। जब भी आसाराम आश्रम में होते हैं तो उस दिन स्वीमिंग पूल को साफ पानी से भरा जाता है। अजय के अनुसार, स्वीमिंग पूल भरने की जिम्मेदारी उन्हीं की थी। इतना ही नहीं, आसाराम अगर सत्संग के लिए भी आश्रम आते, तब भी वे इसी स्वीमिंग पूल में नहाया करते थे।अजय बताते हैं कि शांतिकुटिया के चार प्रवेशद्वार हैं। एक बार मैंने शांतिकुटिया का मुख्य दरवाजा खोला तो मेरी सीधी नजर स्वीमिंग पुल पर पड़ी। यह दोपहर का समय था और आसाराम अपनी धोती में स्वीमिंग पूल में नहा रहे थे, जबकि इसी समय एक लड़की स्वीमिंग पूल से बाहर निकल रही थी। 
 
अजय कहते हैं कि इस लड़की को मैं अच्छी तरह पहचानता हूं। यह दृश्य देखकर मैं एक पल के लिए चौंक उठा, क्योंकि लड़की किसी बिकिनी में नहीं, बल्कि सिर्फ एक कपड़ा अपने बदन पर लपेटे हुए थी। 
 अजय बताते हैं कि बीते दिन जब मैंने एक न्यूज चैनल पर यह खबर देखी कि मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में स्थित आश्रम में भी आसाराम के लिए एक स्वीमिंग पूल बनवाया गया था, तभी मुझे अहमदाबाद आश्रम की लगभग 10-15 साल पहले की यह घटना याद आई। इस समय स्वीमिंग पूल के चारों तरफ लगभग 19 फीट की दीवाल थी। इसके अलावा स्वीमिंग पूल के चारों तरफ वृक्ष थे। sabhar : bhaskar.com

Read more

बुधवार, 2 अक्तूबर 2013

दुनिया का सबसे छोटा कुत्ता 3.8 इंच का

0

Smallest Dog

वाशिंगटन। शिंहुआहुआ प्रजाति का पाकेट साइज कुत्ता जिसका कद मात्र 3.8 इंच है, यह कुत्ता दुनिया का सबसे छोटा कुत्ता बन गया है। सिर्फ 500 ग्राम का मिरेकिल मिली नाम का ये कुत्ता अब गिनीज बुक ऑफ व‌र्ल्ड रिकार्ड में अपना नाम दर्ज करा चुका है।
इस कुत्ते की मालकिन पोरटो रिको की विनेसा सेमलर हैं। दिसंबर 2011 में जन्मा ये कुत्ता तस्वीर खिंचवाते समय में अपनी नन्हीं से जुबान बाहर निकाल लेता है। विनेसा का कहना है कि वह तस्वीरें खिंचवाने में माहिर है। विनेसा कहती हैं कि मिरेकिल जन्म के समय इतना छोटा था कि एक चम्मच पर आ जाता था। उसके छोटे से मुंह से दूध पीना मुश्किल होता था। इसलिए उसे हर दो घंटे पर आइड्राप से दूध पिलाया जाता था। अब मिरेकिल मिली एक शिशु के पालने में सोता है और इंसान के हाथ का बना खाना ही खाता है। sabhar :jagaran.com

Read more

प्रधानमंत्री जो पांच हजार का ऋण नहीं चुका पाए

0

Prime Minister

नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। यह ऐसे प्रधानमंत्री हुए जिन्होंने 1965 में अपनी फीएट कार खरीदने के लिए पंजाब नेशनल बैंक से पांच हजार ऋण लिया था। मगर ऋण की एक किश्त भी नहीं चुका पाए। 1966 में देहांत हो जाने पर बैंक ने नोटिस भेजा तो उनकी पत्नी ने अपनी पेंशन के पैसे से कार के लिए लिया गया ऋण चुकाने का वायदा किया और फिर धीरे धीरे बैंक के पैसे अदा किए। हम बात कर रहे हैं प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की। उनकी पत्नी ललिता शास्त्री ने भी उनकी ईमानदार पूर्वक जिंदगी में उनका पूरा साथ दिया। शास्त्री की यह कार आज भी जनपथ स्थित उनकी कोठी [अब संग्रहालय] में आज भी मौजूद है। अब इस कोठी में लालबहादुर शास्त्री संग्रहालय बना दिया गया है।
इस संग्रहालय में अनेक ऐसी चीजें प्रदर्शित की गई हैं। जो उनकी ईमानदारी को दर्शाती हैं। लोग यहां आकर उनकी सादगी और ईमानदारी भरी जिंदगी के बारे में जानकर भावुक हो जाते हैं। ऐसी एक घटना के बारे में बताना जरूरी हो जाता है। यह बात 1962 के करीब की है। उस समय शास्त्री जी अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव थे। उस समय देश के प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू थे। उन्हें पार्टी के किसी महत्वपूर्ण काम से कश्मीर जाना था। पंडित नेहरू ने उनसे जाने के लिए कहा तो वह लगातार मना कर रहे थे। पंडित नेहरू भी चकरा गए कि वह ऐसा क्यों कर रहे हैं।
पंडित नेहरू उनका बहुत सम्मान करते थे। बाद में उन्होंने वहां नहीं जाने के बारे में कारण पूछ ही लिया। पहले तो वह बताने को राजी नहीं हुए, मगर बहुत कहने पर उन्होंने जो कुछ कहा उसे सुनकर पंडित नेहरू की भी आंखों में आंसू आ गए। शास्त्री जी ने बताया कि कश्मीर में ठंड बहुत पड़ रही है और मेरे पास गर्म कोट नहीं है। पंडित नेहरू ने उसी समय अपना कोट उन्हें दे दिया और यह बात किसी को नहीं बताई। लाल बहादुर शास्त्री जब प्रधानमंत्री बने तो इसी कोट को पहनते रहे। इस प्रकार दो प्रधानमंत्री ने पहना यह कोट। उनके लिए समर्पित इस संग्रहालय में यह कोट प्रदर्शित है। इसी संग्रहालय में रखा गए है प्रधानमंत्री का टूटा कंघा, टूटी टार्च, दाढ़ी बनाने वाली सामान्य मशीन, सामान्य ब्रस व अन्य सामान। जो वहां पहुंचने वाले हर व्यक्ति को चौंकाते हैं कि देश को ऐसा भी प्रधानमंत्री मिल चुका है। इसी संग्रहालय में उनका शयन कक्ष है जिसमें एक तख्त और कुछ कुर्सियां मौजूद हैं। जो कहीं से भी किसी विशिष्ठ व्यक्ति की नजर नहीं आतीं। ऐसे थे लाल बहादुर शास्त्री। sabhar :http://www.jagran.com

Read more

विकृत मानसिकता है हॉरर किलिंग`

0


`विकृत मानसिकता है हॉरर किलिंग`

वासिंद्र मिश्र
संपादक, ज़ी रीजनल चैनल्स

पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ इलाकों में अभी भी खाप पंचायतों का अहम रोल है। पिछले कुछ साल में खाप पंचायत की इमेज `तानाशाह` सरीखी हो गई है जो संस्कृति के नाम पर ऐसे फैसले देते हैं जिससे समाज का एक बड़ा वर्ग सहमत नहीं होता और ज्यादातर जगहों पर उसकी आलोचना की जाती है। बावजूद इसके, ना तो आम लोग, ना ही इन इलाकों के जनप्रतिनिधि खुलकर इसके विरोध में आते हैं। खाप की शुरुआत समाज में होने वाले आपसी छोटे-बड़े विवादों के निपटारे के लिए हुई थी। इससे गांव के लोगों को सालों-साल कोर्ट के चक्कर लगाने से छुटकारा मिल गया था। लिहाजा खाप पंचायतों का देश के कुछ हिस्सों में खासा रोल होता था, लेकिन अब इन पंचायतों से कई विवाद जुड़ गए हैं, खासकर प्रेमी जोड़ों को मार डालने के इनके फैसलों से। पहली बार 2007 में करनाल की एक खाप की तरफ से एक प्रेमी जोड़े को मार डालने के फरमान के बाद देश-विदेश में इस तरह की पंचायतों पर सवाल खड़े हो गए थे। तब से अब तक हॉरर किलिंग के कई मामले सामने आए हैं, ऐसा नहीं है कि सिर्फ किसी खाप पंचायत के फैसले के बाद इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं। ये दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन करनाल जैसे वाकये इन इलाकों में एक नज़ीर की तरह पेश हुए हैं और देश की राजधानी दिल्ली से महज 25-30 किलोमीटर के दायरे में ही समाज का दकियानूसी चेहरा उभर कर सामने आया है। जहां एक गोत्र, एक गांव में शादी करने के लिए समाज मौत की सज़ा देता है। ऐसा ही हाल में हरियाणा के रोहतक में हुआ जहां एक प्रेमी जोड़े को अपनी मर्जी से शादी कर लेने की सज़ा मौत के रूप में मिली। क्यों आज तक खाप के ऐसे फैसलों पर लगाम नहीं लग पाई है? इज्जत के नाम पर किसी अपने की बेरहमी से हत्या करने के पीछे कैसी मानसिकता होती है? क्या कहते हैं इन इलाकों में लंबे समय तक कानून व्यवस्था संभालने और हॉरर किलिंग के खिलाफ काम करने वाले पुलिस अधिकारी? ज़ी रीजनल चैनल्‍स के संपादक वासिंद्र मिश्र ने `सियासत की बात` में हरियाणा के पूर्व डीजीपी वीएन राय से खास बातचीत की, पेश है उसके मुख्य अंश:- 


वासिंद्र मिश्र : वीएन राय साहब आप हरियाणा में डीजी लॉ एंड ऑर्डर रह चुके हैं और अपने कार्यकाल में हॉरर किलिंग की घटनाओं को रोकने के लिए आपने काफी प्रयास किए थे। आपसे जानना चाहेंगे कि ऑनर किलिंग कि घटनाएं आखिर रुक क्यों नहीं रहीं, और तमाम प्रयासों के बावजूद खासतौर से हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस तरह की घटना आए दिन सुनने और देखने को मिल रही हैं, आखिर ये किस तरह की साइकोलॉजी है? ऐसी वारदातों को अंजाम देने के पीछे किस तरह की सोच काम करती है? 
वीएन राय : देखिए काफी विकृत मानसिकता है ये, हम ये कह सकते हैं कि लोग ये मानते हैं इस समाज में लड़की को अपने फैसले लेने का हक नही है, उनके फैसले हमें लेने हैं। जब भी कोई लड़की अपने जिंदगी के फैसले लेती है तो समाज पूरी तरीके से गोलबंद हो जाता है। ये काफी विकृत मानसिकता है। मैं समझता हूं कि जबसे मैंने हरियाणा ज्वाइन किया, तबसे लगातार ये चीजें रही हैं। अब आजकल हम कह सकते हैं मीडिया के प्रभाव से ये चीजें बाहर आने लगी हैं। पहले ऐसी घटनाएं बाहर नहीं आ पाती थीं, लोग ये मानते थे कि समाज ही लड़कियों से जुड़े फैसले लेगा।

वासिंद्र मिश्र : इसके पीछे किस तरह की साइकोलॉजी काम करती है। इकोनॉमिक डिसपैरिटी, शिक्षा की कमी है या फिर कास्ट सिस्टम इतना ज्यादा मजबूत है, जो हावी रहता है? 
वीएन राय : नहीं इसमें इकोनॉमिक डिसपैरिटी की बात नहीं है। इसके लिए कास्ट सिस्टम भी इतना ज़िम्मेदार नहीं है। इसमें मुख्य बात है खाप का सिस्टम, गोत्र का सिस्टम, वो ये मानते हैं कि एक गोत्र में आपस में शादियां नहीं होनी चाहिए। पुराने ज़माने में जब मोबिलिटी नहीं थी लोग बाहर नहीं जाते थे, इतनी एज्‍यूकेशन नहीं थी, लड़कियां बाहर नहीं निकलती थी तब ये चीजें संभव थीं। आज के जमाने में जब मूवमेंट इतना बढ़ गया है, काफी मेल मुलाकात लड़के-लड़कियों की होती है। उसी गांव के लड़के-लड़कियां उसी गांव में नहीं रहते हैं बल्कि वो बाहर जाते हैं पढ़ने के लिए, उनकी आपस में मुलाकात होती, है दोस्ती होती है और स्वाभाविक रूप से दोस्ती कई बार प्यार में बदल जाती है। इस तरह की चीजें चलती रहती हैं। बच्चे मां-बाप से शेयर नहीं करते, अगर वो शेयर करें तो भी मां-बाप उनको सुनेंगे नहीं। इसलिए एक दिन वो अचानक घर छोड़कर चले जाते हैं।

वासिंद्र मिश्र : जहां तक गोत्र का सवाल है, इस तरह की व्यवस्था तो पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में भी है। वहां भी एक गोत्र में शादी अच्छी नहीं मानी जाती, अब भी कोई शादी तय होती है, तो उसमें लड़के-लड़की दोनों का गोत्र देखा जाता है, और कोशिश होती है कि शादी एक गोत्र में ना हो, तो सिर्फ गोत्र के नाते इस तरह की हिंसक वारदात होती है या कोई और कारण है। एक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में जो आपने देखा आपको क्या लगता है? 
वीएन राय : देखिए, एक लड़की को हिदुस्तानी समाज में दो तरह की हिंसा का सामना करना पड़ता है। एक लैंगिक हिंसा, जिसे हम जेंडर वायलेंस कहते हैं, दूसरा सेक्सुअल वायलेंस और वास्तव में सबकी जड़ में तो लैंगिक हिंसा ही है। बचपन से ही चाहे वो चाहे पूर्वी उत्तर प्रदेश हो या पश्चिमी उत्तर प्रदेश या फिर हरियाणा, हर जगह लड़कियां कई चीजों से वंचित रहती हैं। हमेशा कहा जाता है कि तुम्हें घर से बाहर ही जाना है। इस घर में जो भी एसेट्स हैं उसमें तुम्हारी कोई हिस्सेदारी नहीं है, वगैरह-वगैरह। आप ये कह सकते हैं कि यहां पर जो कृषक समाज है जो कृषि आधारित जो इकोनॉमी है उसमे ये चीजें काफी मैटर करती हैं। किसानों के लिए ज़मीन बहुत मायने रखती है, इसीलिए वो कोशिश करते हैं कि लड़की की शादी करो और बाहर भेजो।

वासिंद्र मिश्र : तो जैसे हरियाणा है, पश्चिमी उत्तर प्रदेश है, अगर देखा जाय तो एनसीआर का जो हिस्सा है, वो दुनिया के कुछ बड़े विकसित शहरों में से आता है, चाहे वो शिक्षा का सवाल हो, फैशन का सवाल हो, इंडिविजुअल फ्रीडम का सवाल हो, लाइफस्टाइल हो। क्या कारण है कि इसके 25 किलोमीटर के दायरे में आने वाले दिल्ली में इस मानसिकता की चीजें देखने को कम मिलती हैं, और 25 किलोमीटर के रेडियस में ये चीजें बहुत ज्यादा हैं, क्या दिल्ली के विकास का असर इस 25 किलोमीटर के रेडियस में नहीं पड़ रहा है? 
वीएन राय: नहीं विकास का जीवन के तमाम क्षेत्रों में असर तो पड़ ही रहा है। देखो एक बहुत बड़ा गैप हमारे समाज में क्या है, हमारे यहां सेक्सुअल एक्सपोजर तो बहुत तगड़ा हुआ है, लेकिन सेक्स एज्यूकेशन नहीं है। दोनों के बीच में बहुत बड़ा गैप है। परिवार में आप पाएंगे कि इन विषयों पर बात ही नहीं होती है, स्कूलों में भी बात नहीं होती है, और कोई प्लेटफॉर्म नहीं है जहां इस तरह की बातें होती हों, लड़के-लड़कियां अपने इस फ्रीडम में या तो उनके पास ऑप्शंस अवेलेबल हैं। उसका वो इस्तेमाल भी करते हैं, गलतियां भी करते हैं। जो महानगर हैं वहां काफी हद तक चीजें बदल चुकी हैं मूवमेंट ज्यादा है, तो चलता रहता है, लेकिन आप ठीक कह रहे हैं जैसे ही इंटीरियर इलाके में जाते हैं चाहे वो दिल्ली से 40-50 किलोमीटर ही दूर क्यों ना हो, वहां समाज अभी इन चीजों से काफी अछूता है।

वासिंद्र मिश्र : राय साहब, जब आप नौकरी में थे तो आपने इस तरह की घटनाओं को देखते हुए हरियाणा में सेफ हाउसेज बनाने का प्रपोजल रखा था और उसको शायद वहां की सरकार ने और बाद पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने भी एनडोर्स किया था कि आपका निर्णय सही है। आज उन सेफ हाउसेज की क्या स्थिति है?
वीएन राय : देखिए, पुलिस विभाग की तरफ से इस तरह के काफी केसेज आते थे, हाईकोर्ट में भी ऐसे काफी मामले पहुंचने लगे थे कि कई जोड़े जान का डर जताते थे, उसमें समस्या ये होती थी कि उनको आप प्रोटेक्शन कैसे दें, इसलिए ये सोचा गया कि सेफ हाउसेज बनाए जाएं। हमने ये कहा था कि पुलिस लाइन में एक क्वार्टर जो है उसको अलग से रख लेते हैं, क्योंकि पुलिस लाइन एक सेफ जगह है, फिर कुछ दिनों में जब मामला ठंडा हो जाए तो वो अपनी जगह जा सकें। कई मामलों में मां-बाप उस कदर शामिल नहीं होते हैं जितना कि उनको समाज शामिल कर लेता है। मां-बाप चाहते हैं कि बच्चे किसी तरह शांति से रह सकें, लेकिन समाज उनके पीछे लगा ही रहता है। कई बार मामला महीने 10 दिन, 15 दिन में शांत हो जाता था, हमने ये भी पाया कि ये जोड़े अगर गांव में वापस ना जाएं तो कई मामलों में बात आई गई हो जाती है। इस लिहाज से सेफ हाउसेज चलाए गए थे। अब तो एक तरह से सरकार ने ही उनको ले लिया है। उनके आंकड़े भी हैं और सभी जगह कुछ न कुछ लोग आते-जाते रहते हैं। लेकिन सभी वहां नहीं पहुंचते ये समस्या है, जैसे हाल का रोहतक वाला मामला। वो सेफ हाउस में नहीं पहुंचे और बहला-फुसला कर उन्हें गांव में वापस ले जाया गया और मार दिया गया।

वासिंद्र मिश्र : राय साहब, जिस खाप की बात की जाती है, कई बार खाप का समाज में बहुत पॉजिटिव रोल भी सामने आता है। खासतौर से उन इलाकों में जहां इस तरह की परंपरा है। आपसी विवाद, तमाम जीवन से जुड़े हुए फैसले खाप के जरिए तय हो जाते हैं और उनको कोर्ट-कचहरी तक नहीं जाना पड़ता। आपको नहीं लगता है इस तरह की जो ऑनर किलिंग के फैसले हैं, उनके पीछे भी कोई राजनीति काम कर रही है?
वीएन राय : इसके पीछे पॉलिटिकल तो कुछ नहीं हो सकता है। दरअसल पॉलिटिशियन किसी भी स्टेट के हैं वो इससे बचना चाहते हैं, वो इसकी ओर देखना ही नहीं चाहते हैं। ठीक वैसे ही जैसे कमरे में हाथी है और आप हाथी को देखना ही नहीं चाहते हैं। वैसे आपने ठीक कहा कि एतिहासिक रूप से खाप पंचायतों ने काफी अच्छे काम भी किए हैं। वो एक तरीके की एक ऐसी पंचायत है जो काफी मामलों में आपको सुलभ जस्टिस या सुलभ निर्णय दे दिया करती हैं, लेकिन ये मेल डोमिनेटेड होती हैं। शायद अब कुछ छूट दे दी हो, नहीं तो पहले महिलाओं का पंचायत घर में जाना भी संभव नहीं होता था। अब तो खैर रिजर्वेशन आ गया है तो महिलाओं की सीट भी हो गई है। खाप की भूमिका कई मामलों में अच्छी रही है, लेकिन आज के दिन वो कोई ऐसी भूमिका अदा कर पा रहे हैं ऐसा नहीं है।`विकृत मानसिकता है हॉरर किलिंग`

वासिंद्र मिश्र: यानि आपके मुताबिक आपका जो अनुभव रहा है, उसमें खाप का रोल महज इस तरह के फैसलों तक सीमित रह गया है कि अगर लड़का और लड़की अपनी मर्जी से शादी करना चाहते हैं और एक ही गोत्र के हैं, तो उनको सजा सुनाना खाप अपनी शान समझता है, इसके अलावा और जो सामाजिक बुराई है, राजनैतिक बुराई है उसके मामले में खाप की दखलअंदाजी या रोल नहीं के बराबर है?
वीएन रॉय : हां, मतलब ऐसा कोई पॉजिटिव रोल नहीं है, जैसे गांव-गांव में शराब की दिक्कतें हैं, अक्सर लोग इसकी शिकायत करते हैं, लोग शराब पीते हैं, महिलाओं के साथ छेड़खानी और दुर्व्यवहार होता है, मैं तो नहीं पाता कि कहीं भी खाप इसमें दखल दे पाता हो और भी कुछ चीजें हैं जिनमें खाप दखल नहीं दे पाता, समाज की बुराइयों को रोकने में सकारात्मक रोल नहीं रख पाता।

वासिंद्र मिश्र : तो क्या ये माना जाए कि जिन इलाकों में खाप बहुत ज्यादा प्रभावी है उन एरिया में कोई रूल ऑफ लॉ नहीं है, या जो लोग सरकार में हैं, प्रशासन में है। वो लोग ऐसी ताकतों के सामने घुटने टेके हुए हैं, अपने राजनैतिक स्वार्थ के चलते, वोट की राजनीति की वजह से?
वीएन रॉय : नहीं, खाप हर क्षेत्र में प्रभावी भी नहीं है, हम ये नहीं मान सकते कि खाप हर क्षेत्र में प्रभावी है औऱ ऐसा भी नहीं है कि पॉलिटिक्स या एडमिनिस्ट्रेशन ने उनके सामने घुटने टेके हों। मुख्य चीज ये है कि ऐसे मुद्दों पर पॉलिटिशियन, या एडमिनिस्ट्रेटर स्किप करना चाहता है वो उधर-देखना भी नहीं चाहता।

वासिंद्र मिश्र : इसके पीछे मकसद तो राजनति है ना? 
वीएन रॉय : नहीं इसके पीछे मकसद सीधा है, मकसद ये है कि जो फीमेल जेंडर है वो बहुत कमजोर है। देखो इसका सॉल्यूशन भी यही है कि आपको फीमेल जेंडर को एम्पॉवर करना पड़ेगा आपको तरीके ढूंढने पड़ेंगे जिससे कि फीमेल जेंडर एम्पॉवर हो।

वासिंद्र मिश्र : जो भी कानून है वो तो पूरे देश के लिए है, देश के बाकी हिस्सों में इस तरह की प्रॉब्लम देखने को नही मिल रही है?
वीएन रॉय : नहीं देश के तमाम हिस्सों में ऐसी प्रॉब्लम है, आप साऊथ में जाइए, वेस्ट में जाइए, ईस्ट में जाइये, जिसे आप हॉरर किलिग कहते हैं, ऐसी इक्का दुक्का वारदातें हर जगह होती हैं, यहां पर ज्यादा होती हैं। 

वासिंद्र मिश्र : यहां चाहे तो इसे परंपरा कहें या फिर शान की परिभाषा, इसके लिए तो जो लोग सत्ता में हैं वो जिम्मेदार है, जो प्रशासन में हैं वो जिम्मेदार हैं?
वीएन रॉय : असल में इसमें जिस तरह के रिफॉर्म चाहिए, जैसे हमें जो ज्यूडिशियल रिफॉर्म चाहिए वो नहीं हुए हैं। लॉ एंड ऑर्डर मशीनरी है, न्याय व्यवस्था की मशीनरी है जिसमें अदालतें भी शामिल है, पुलिस भी शामिल है अगर उनको वो टूल्स ही नहीं देगें, जिनके मार्फत वो ऑनर किलिंग को प्रभावी कार्रवाई कर सकते हैं, तो वो क्या करेंगे। आपको वही पैरामीटर्स लाने पड़ेंगे जो दूसरे अपराधों के हैं। उन पैरामीटर्स को लाने में दिक्कत ये है कि जो ओरल एविडेंस है जो तमाम लोगों को आकर के अपने बयान देने हैं, बताना है कि कैसे इंसीडेंट हुआ, क्या हुआ वो चीजें इसमें संभव नहीं हैं, क्योंकि कोई भी आगे आकर कहता नहीं है। इसके लिए हमको थोड़ा बहुत बदलाव लाना पड़ेगा। जैसे हमने वर्मा कमेटी बनाई थी सेक्सुअल वायलेंस के खिलाफ, वैसी ही एक कमेटी बननी चाहिए जेंडर वायलेंस के खिलाफ, जो बकायदा ये तय करे कि सिद्ध करने की जिम्मेदारी किसकी है। रोहतक वाले मामले को देखिए, अगर कोई लड़का-लड़की संदिग्ध परस्थितियों में मारे गए और उनकी कोई रिपोर्ट नहीं दी गई, तो ऐसे में उनके मां-बाप से पूछा जाए कि आप बताइये कि किन परिस्थितयों में उनकी मौत हुई, फिर उनके ऊपर जिम्मेदारी होनी चाहिए बजाय कि प्रासिक्यूशन के ऊपर जिम्मेदारी हो, और ये माना जाए कि आप इसमें इन्वॉल्व हैं, आपने कुछ ना कुछ इसमें गड़बड़ की हुई है।

वासिंद्र मिश्र : तो क्या ये मानें कि विल पॉवर की कमी है, जो लोग सत्ता में हैं उनमें, जिनके हाथ में कानून व्यवस्था कि जिम्मेदारी है उनमें विल पॉवर की कमी है?
वीएन रॉय : हमारे प्रोटोकॉल बदलने चाहिए, अगर हमको बदमाशों को सज़ा देनी है और सजा का कोई असर होना है। आजकल क्या होता है, वो समझते हैं कि हमने ये कर दिया है और हमारा कुछ होना भी नहीं है। जो ज्यूडिशियल प्रोटोकाल्स हैं, जो प्रासिक्यूशन के प्रोटोकाल्‍स हैं वो बदलने पड़ेंगे।

वासिंद्र मिश्र : तो इसकी शुरुआत कहां से होगी, प्रशासन की तरफ से?
वीएन रॉय : इसकी शुरुआत तो प्रशासन की तरफ से होनी चाहिए। लॉ कमीशन है हिंदुस्तान में। जब आप देख रहे हैं केस के बाद केस छूटते जा रहे हैं, जब हम पा रहे हैं कि एक केस के बाद दूसरा भी केस हो रहा है, चौथा भी केस हो रहा है, दसवां भी हो रहा है, बीसवां भी हो रहा है, तो उसको रोकने के लिए जो संस्थाएं बनी हुई हैं, उन संस्थाओं को विचार करना चाहिए और वैसा प्रोटोकॉल देना चाहिए। क्योंकि, ये संभव नहीं है कि केस के बाद केस छूटते जाएं और आप उम्मीद करें कि इस पर काबू हो जाएगा, ऐसा मुमकिन नहीं है। अगर सजा मिलेगी तो उसका जो असर हो सकता है वो भी होगा, लेकिन सजा के साथ जागरुकता फैलाना भी बहुत जरूरी है, जब तक लोगों को जागरुक नहीं किया जाएगा, तब तक उन्हें समझ में नहीं आएगा कि वो क्या बेवकूफियां कर रहे हैं, और उनके समाज पर इसका क्या असर हो सकता है।

वासिंद्र मिश्र : रॉय साहब, हमसे महत्वपूर्ण जानकारियां शेयर करने के लिए शुक्रिया। 
वीएन राय : थैंक यू।
sabhar :http://zeenews.india.com

Read more

 
Design by ThemeShift | Bloggerized by Lasantha - Free Blogger Templates | Best Web Hosting