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मंगलवार, 24 दिसंबर 2013

पुनर्जन्म के सम्बंध सच्ची कहानिया

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पुनर्जन्म के सम्बंध  सच्ची कहानिया प्रकासित हुई है  जिससे  आत्मा और परमात्मा मे विश्वास और बडता जाता है जिसका विवरण नीचे दिया जा रहा है 

मनुष्य ने अपने पूर्व जन्म के माता-पिता और संबंधियों के नाम तक बता दिए हैं। पुनर्जन्म की यह घटना अनोखी है। यह घटना विदुषी महिला की है। उसे जीवन भर अपने दो पूर्व जन्मों की याद बनी रही। इससे पहले एक जन्म की याद के किस्से ही सुने गए हैं। यह घटना मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले की है।
वर्ष 1948 में जिला शिक्षा अधिकारी के घर एक लड़की ने जन्म लिया। उसका नाम स्वर्णलता मिश्र रखा गया। साढ़े तीन साल की होने पर इस बच्ची ने कहना शुरू कर दिया कि मेरा घर कटनी में है। वहां मेरे माता-पिता और चार भाई रहते हैं। तुम लोग मुझे वहां ले चलो। उसने अपने पूर्व जन्म के पिता (प्रतिष्ठित जमींदार) और भाइयों के नाम, पते बताए। यह भी जानकारी दी कि उसकी शादी मैहर में पांडेय परिवार में हुई थी। जहां उसके दो बेटे और एक बेटी रहती हैं। उसने उनके नाम भी बताए। यह भी बताया कि उसकी मृत्यु 31 वर्ष की आयु में हृदयाघात से हुई थी।

की गई छानबीन

बेटी के पुनर्जन्म की स्मृतियों को सुनकर पिता चकित रह गए। उन्होंने निश्चय किया कि वह इसकी सत्यता की पुष्टि करेंगे। समय निकाल कर वह कटनी गए। खोजबीन करने पर आश्चर्य चकित रह गए। बेटी की बताई गई सारी बातें सच निकलीं। ऐसा ही मैहर में भी हुआ। तब उन्होनें स्वीकार किया कि यह पुनर्जन्म का मामला है।

किया गया परीक्षण

इसके बाद बच्ची के पिता का तबादला छतरपुर हो गया। बच्ची स्कूल जाने लगी। वह बच्चों को अपने पूर्व जन्म की बातें बताने लगी। यह बात धीरे-धीरे शहर में फैल गई। लोग बालिका को देखने घर पहुंचने लगे। तत्कालीन मुख्यमंत्री पंडित द्वारिका प्रसाद मिश्र छतरपुर दौरे के समय बच्ची से मिलने उसके घर पहुंच गए। उन्होंने स्वर्णलता से कई सवाल किए। इसके बाद राजस्थान के मनोवैज्ञानिक डॉ. एच. बनर्जी को परीक्षण के लिए भेजा। डॉ. बनर्जी ने इसे पुनर्जन्म की सत्य घटना करार दिया। उन्होंने कहा, बच्ची दिमाग में अतिरिक्त याददाश्त है। वह धीरे-धीरे विस्मृत हो जाएगी। 

मिलने आया भाई

कटनी से बच्ची का एक भाई छतरपुर अपनी पहचान छिपा कर उसके घर जा पहुंचा। उसने कहा, वह इलाहाबाद से आया है और स्वर्णलता से मिलना चाहता है। उस समय बच्ची मंदिर गई हुई थी। घर लौटने पर चौंक उठी और प्रसन्न हो कर बोली- अरे बाबू , तुम कब आए। पिता ने कहा कि तुम इन्हें कैसे जानती हो।  यह तो इलाहाबाद से आए हैं। स्वर्णलता ने कहा कि नहीं ये कटनी से आए हैं और मेरे बड़े भाई बाबू हैं। यह सुनकर बाबू ने जिनका नाम हरिहर प्रसाद था। बहन के पांव छू लिए और सच को स्वीकार किया। बच्ची ने भाई से परिवार वालों का हालचाल पूछा। कई ऐसी बातें भी पूछी जिनको केवल वह और हरि हर प्रसाद ही जानते थे। सब बातों को सुनकर उसको पूर्ण विश्वास हो गया कि स्वर्णलता उनके पूर्व जन्म की बहन विद्या है।

बच्ची पहुंची कटनी 

कुछ समय बाद पिता बच्ची को लेकर कटनी गए। स्वर्णलता ने अपने आप अपना घर ढूंढ लिया। जबकि उससे पहले वह वहां कभी नहीं गई थी। वहां उसने अपने पिता तथा पूर्व जन्म के अन्य तीनों भाइयों को पहचान लिया। इसके बाद सब को विश्वास हो गया कि विद्या ने ही स्वर्णलता के रूप में दोबारा जन्म लिया है। उसने अपने भाइयों से मैहर (ससुराल) का हालचाल भी पूछा। उसे कुछ दिन बाद मैहर ले जाया गया। उसने वहां अपने पूर्व जन्म के पति और तीनों बेटे-बेटियों को पहचान लिया। 

आया एक और जन्म याद 

पांच साल की उम्र में एक दिन स्वर्णलता असमिया भाषा में गाना गाने लगी। असमिया बोली बोलने लगी। पिता के पूछने पर उसने बताया कि उसका एक जन्म कटनी तो दूसरा असम के सिलहठ में हुआ। सिलहठ में मेरा नाम कमलेश गोस्वामी था। मैं चार भाई-बहनों में सबसे बड़ी थी। उसने उस जन्म के मां-बाप के नाम भी बताए और कहा कि उसकी मृत्यु 8 साल की आयु में कार दुर्घटना में हो गई थी। वह तब स्कूल जा रही थी। स्वर्णलता पढ़ने में होशियार थी।

उसने एमएससी वनस्पति शास्त्र में कर पर्यावरण एवं प्रदूषण में पीएचडी की। इसके बाद वनस्पति शास्त्र की प्राध्यापिका हो गई। उसकी शादी एक उच्च अधिकारी से हुई। स्वर्णलता की जांच वर्जिनिया विश्वविद्यालय (यूएसए) के मनोचिकित्सा विभाग के संचालक प्रो. इवान स्टीवेंसन ने की। उन्होंने विश्व की ऐसी लगभग 60 घटनाएं एकत्र की हैं। उन्होंने स्वर्णलता के पुनर्जन्म की घटना को सच बताया।



राजू पूर्वजन्म का जसवंत

 गांव नानऊ के जसवंत सिंह उर्फ दशरथ की शादी शीला के साथ हुई थी। वह तीन भाइयों में बीच का था। उससे बड़े भाई भगवान दास व छोटा भाई ओम प्रकाश है। जसवंत पर बच्चे भी है। उसकी कई साल पूर्व सर्प के काटने से मौत हो गई थी। सालों बीत चुके हैं, उसकी मौत को हुए। इधर एटा क्षेत्र के थाना जलेसर के गांव नगला गुलाल के रहने वाले चंपाराम यादव के घर पर जन्मे राजू यादव की उम्र बाइस साल की है। छह माह पूर्व ही उसकी शादी छर्रा से हुई है।
इतवार को राजू यादव अपने पिता चम्पाराम के साथ गांव मई पहुंचा। साथ ही खुद का जसवंत उर्फ दशरथ बताते हुए अपना मकान,गांव के बुजुर्ग व परिजनों के अलावा अपने भाईयों को भी पहचान लिया। लोगों ने जब उससे पूछताछ की तो उसने बताया कि वह जसवंत उर्फ दशरथ है। जिसकी मौत सर्प के काटने से हुई थी। उसने अपनी पत्‍‌नी शीला के बारे में पूछा। तो लोग भी हैरान में रह गए। इसी बीच अन्य महिलाओं के बीच बैठी शीला को भी पहचान लिया।
चंपाराम की माने तो वह पांच साल की उम्र से ही नानऊ चलने की जिद करता था और खुद का गांव नानऊ बताता था। उसकी बातों को सुनकर सभी हैरान रह जाते। पुर्नजन्म की बातें को भुलाने के हर तरह से प्रयास किए। चंपाराम का दूसरा बेटा मथुरा में काम करता है। जहां उसकी मुलाकात नानऊ के रहने वाले एक युवक से हुई। बातों ही बातों में बात छिड़ गई नानऊ की। तो इस युवक ने अपने भाई राजू के बारे में बताया। बस उसने पूरी जानकारी गांव में दी तो राजू से मोबाइल फोन पर वार्ता हुई। तो उसने खुद को नानऊ का बताया। आज वह गांव में आ गया। साभार : जागरण.कॉम



उत्तर प्रदेश में मथुरा जिले के अगरयाला गांव में हर वर्ष की तरह इस बार भी नाग पंचमी के अवसर पर एक नागिन अपने पूर्व जन्म के पति से मिलने के लिए  9वीं बार आई और उसके गले से लिपट गई।

 
नागिन अपने पति के पास 36 से 48 घंटे तक रहने की संभावना है। अगरयाला गांव की लोहरी नामक महिला ने बताया कि उसने कुछ दिन पहले सपने में देखा कि उसके चारों ओर नाग ही नाग हैं। वह डर गई और उठकर सीधे गांव के उस मंदिर में जा पहुंची जहां हर वर्ष नाग पंचमी के एक दिन पूर्व नागिन आती है।
महिला ने बताया कि मन्दिर की परिक्रमा के बाद जब उसने मन्दिर का दरवाजा खोला तो उसे वहां नागिन दिखाई दी जो गांव के लक्ष्मण नामक युवक के घर गयी और उससे लिपट गई। समाचार मिलने तक नागिन लक्ष्मण के गले से लिपटी हुई थी।

इस अजूबे चमत्कार को देखने के लिए गांव में न केवल आसपास के लोगों का मेला लग गया है बल्कि दूर दराज से भी लोग अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए अगरयाला गांव पहुंच रहे हैं। लक्ष्मण के परिवार वालों के अनुसार लक्ष्मण का जन्म अगरयाला गांव में शंकर महाशय के यहां हुआ था।

लक्ष्मण के परिजनों का कहना है कि जब लक्ष्मण सात माह का था तो नागिन उसके सीने पर आकर बैठी थी किन्तु उसने उसे काटा नहीं था। लक्ष्मण का विवाह जब मथुरा के ही गांव मौरा में सूरजमल की पुत्री गंगा से हो गया तो नागिन ने उसे डसना शुरू किया।
उन्होंने बताया कि नागिन ने उसे सात बार डसा पर वायगीरों ने उसे ठीक कर दिया। जब लक्ष्मण को सपने में नागिन दिखाई देने लगी तो उसके परिवार वालों ने उसका इलाज तांत्रिकों एवं वायगीरों से कराना शुरू किया। ढाक भी बजवाई गई तो नागिन ने बताया कि वह पूर्व जन्म की लक्ष्मण की पत्नी है। उसने कहा कि वह लक्ष्मण के पास हमेशा रहना चाहती है इसलिए गांव में एक मंदिर बनावाया जाए। उसने यह भी कहा कि वह प्रत्येक नागपंचमी को लक्ष्मण से मिलने आया करेगी।
पिछले आठ साल से वह नागपंचमी के एक दिन पहले आती है और लक्ष्मण से लिपटकर रहती है तथा नागपंचमी के अगले दिन चली जाती हैं। इसी घटना की आज भी पुनरावृत्ति हुई है। गांव में मेले में भीड़ बढ़ती ही जा रही हैं। sabhar 
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1 टिप्पणियाँ :

Shreyanjali Keller Shivy ने कहा…

अनोखी घटना हे

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