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बुधवार, 20 नवंबर 2013

ज़िंदगी में रोबोट आएंगे काम

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रोबोट करेंगे मालिश

टोयोटा कंपनी ऐसी डिवाइस बना रही है, जो वृद्धों के आने-जाने में मददगार है. इसी तरह टोली क्रॉप ने वायरलेस सेंसर वाली चटाई तैयार की है, जो वृद्ध लोगों के चलने-फिरने के दौरान उन पर निगाह रख सकता है और उन्हें फ़ीडबैक दे सकता है
24 अंगुलियों वाले एक विशेष रोबोट का विकास किया गया है, जो बाल धो सकता है और सिर की मालिश कर सकता है. पैनासोनिक ने जापान के हेयर सैलून में ऐसे रोबोट का इस्तेमाल किया है.
वृद्ध लोगों की देखभाल के लिए रोबोट के इस्तेमाल से जुड़े परीक्षण सिंगापुर से लेकर साल्फोर्ड तक सभी जगह किए जा रहे हैं.

बर्मिंघम विश्वविद्यालय की रोबोटिक्स परियोजना स्ट्रैडस को यूरोपीय संघ से 80 लाख यूरो की मदद मिली है.
सेक्स के लिए रोबोट
अच्छी माने जाने वाली महिला रोबोट एचआरपी-4सी का विकास नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ एडवांस्ड इंडस्ट्रियल साइंस एंड टेक्नोलॉजी (एआईएसटी) ने किया है. रॉक्सी का वज़न 27 किलोग्राम और लंबाई पांच फुट सात इंच है. इसके बाल अलग-अलग रंगों में उपलब्ध हैं, त्वचा का रंग इंसानों की तरह है और वो अपने हाथ-पांवों को इंसानों की तरह मोड़ सकती है.
रॉक्सी इलेक्ट्रिक इंजीनियर और कम्प्यूटर वैज्ञानिक हाइंस के दिमाग की उपज है. उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी ने सेक्स रोबोट को विकसित करने के पीछे उनका मकसद इस समय उपलब्ध साधनों से आगे जाकर एक साथी का अहसास देना है, हालांकि वह मानते हैं कि प्लास्टिक और धातु से बनी रॉक्सी इंसान की जगह लेने में सक्षम नहीं है.उन्होंने कहा, "हम लगातार उम्मीदों के क़रीब पहुंच रहे हैं. इससे रोबोटिक और मशीनी यंत्र और इंसान की उम्मीदों के बीच अंतर लगातार कम होता जाएगा."
रॉक्सी की कीमत $9,000 है. इसका पुरुष रूप भी उपलब्ध है जिसे रॉकी नाम दिया गया है. कंपनी की योजना इस साल के अंत में रॉक्सी का और आधुनिक अवतार उतारने की है.

रोबोट जो करें अरबों का कारोबार

ऐसा कहने वाले जॉन कोट्स 10 साल पहले वॉल स्ट्रीट पर शेयर की ख़रीद फ़रोख़्त करते थे. अब वो केम्ब्रिज विश्वविद्यालय में न्यूरो साइंटिस्ट हैं. कोट्स शेयर ट्रेडरों के हारमोंस का अध्ययन करते हैं.
वे कहते हैं, “मसलन अगर आप माउस से ‘बॉक्स’ पर क्लिक करके ट्रेड करते हैं तो आपका 'एक क्लिक या सौदा' सौ से 120 मिलीसैंकड्स में होगा. लेकिन मौजूदा मशीनें यही काम सैंकड के दस लाख-वें हिस्से में कर रही हैं. ”
ये ‘बॉक्स’ दरअसल रोबोट ट्रेडर हैं. ऐसे कंप्यूटर जो शेयर ख़रीदने या बेचने का फ़ैसला करते हैं और ये बॉक्स मनुष्य से हज़ारों गुणा तेज़ी से काम करते हैं.
दुनिया भर में ऐसी ट्रेडिंग का प्रचलन बढ़ रहा है. अब आपको कुछ शेयर बाज़ारों के बड़े से हॉल में चीखते-चिल्लाते, मोल-भाव करते ट्रेडर नहीं दिखते हैं.
अब न्यू यॉर्क स्टॉक एक्सचेंज यानि एनवाईएसई को ही लीजिए. इस एक्सचेंज का अधिकतर व्यापार वॉल स्ट्रीट पर नहीं बल्कि न्यू जर्सी में हो रहा है. वहां दस एकड़ में फ़ैला दफ़्तर कंप्यूटर सर्वरों की कतारों से अटा पड़ा है

हर पल देंगे साथ


स्ट्रैडस रोबोट का परीक्षण इस साल मई में आस्ट्रियन सेवा प्रदाता के साथ किया जाएगा. शुरुआत में सामान्य काम करने की इसकी कुशलता परखी जाएगी.
डॉ. निक हॉ बताते हैं, "हम अपने स्टाफ़ के समय को काफ़ी हद तक बचाना चाहते हैं."
वह कहते हैं, "घरेलू सेवा कार्यों में लगे कर्मचारियों के साथ सबसे बड़ी शिकायत यह है कि वो पर्याप्त समय नहीं देते."
उनका कहना है, "हम सामान उठाने और दूसरे सहायक कार्यों पर काम कर रहे हैं. अगर रोबोट दवाओं की ट्रे ला दे, जबकि घर के निवासी आपस में बातें करते रहें, तो इससे मेलजोल बढ़ेगा."

इस परियोजना को उम्मीद है कि रोबोट अधिक सक्रिय और बेहतर देखभाल करने की भूमिका निभा सकते हैं.

खानपान की सलाह

सेवा कंपनियों और आठ यूरोपीय विश्वविद्यालयों की संयुक्त परियोजना मोबीसर्व प्रोजेक्ट के तहत शोध कार्य हाल में खत्म हुए हैं. इसका मक़सद ऐसा रोबोट तैयार करना है जो "दोस्त और साथी" हो.
ये वृद्ध लोगों को स्वास्थ्य देखभाल से लेकर उन्हें खानपान तक की सलाह दे सकता है.
शोधकर्ता एंटोनियो एस्पिंग्रेडेरियो के मुताबिक़ साल्फोर्ड परियोजना के तहत ऐसे रोबोट तैयार किए जा रहे हैं, जो लोगों की दिन में 24 घंटे देखभाल कर सकते हैं.
केयरबोट पी37 एस65 को बाक़ी चीज़ों के अलावा स्पीच थेरेपी के लिए प्रोग्राम किया जा सकता है और पागलपन के शिकार लोगों का उपचार कर सकते हैं.

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