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शनिवार, 5 अक्तूबर 2013

सोचे हुए को सुन पाना संभव

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मस्तिष्क
मस्तिष्क की कार्यप्रणाली का बड़ा भाग अभी भी वैज्ञानिकों के लिए पहेली बना हुआ है


अमरीका में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने मस्तिष्क से निकलने वाली तरंगों को पढ़ने की ओर पहला क़दम बढ़ा लिया है.
इससे ये संभव हो सकेगा कि किसी व्यक्ति के कुछ बोलने से पहले ही ये जाना जा सकेगा कि वह क्या बोलने जा रहा है.

शोध के नतीजों से ये उम्मीद जागी है कि आने वाले दिनों में मस्तिष्क से संबंधित बीमारियों से परेशान लोगों के लिए या बोल पाने में अक्षम लोगों की बातें समझना आसान हो जाएगा.कैलिफ़ोर्निया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने मस्तिष्क में कुछ उपकरण लगाकर और एक कंप्यूटर प्रोग्राम की सहायता से ऐसा संभव कर दिखाया है.

किसी विज्ञान कथा की तरह

बीबीसी के विज्ञान संवाददाता जैसन पामर का कहना है कि ये किसी विज्ञान कथा की तरह है जिसमें आप किसी के विचारों को पढ़कर उन्हें सुन भी पा रहे हैं.
यानी आप किसी व्यक्ति के मस्तिष्क से सीधे बात कर रहे हैं.
उन्होंने ये उपकरण मस्तिष्क के उस हिस्से में लगाया था जो भाषा को लेकर जटिल विद्युतीय तरंगों के रूप में संकेत देता है. फिर इन तरंगों को कंप्यूटर की सहायता से ध्वनि तंरंगों में बदलकर उसे डिकोड करके बोले गए शब्दों और वाक्यों के रूप में सुना.
यानी शोधकर्ता वह बात सुन पा रहे थे जो व्यक्ति सोच रहा था.
शोधकर्ता मान रहे हैं कि ये उन लोगों के लिए वरदान साबित हो सकता है जो किसी और तरह से अपनी बात नहीं रख पाते.sabhar : bbc.co.uk

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