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बुधवार, 4 सितंबर 2013

'मर्दानगी' की जांच को राजी नहीं थे आसाराम, फिर बोले- कर लो इस नश्‍वर शरीर के साथ जो करना है

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'मर्दानगी' की जांच को राजी नहीं थे आसाराम, फिर बोले- कर लो इस नश्‍वर शरीर के साथ जो करना है

नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार विवादास्पद कथावाचक 74 साल के आसाराम बापू की जमानत पर अब बुधवार को  सुनवाई होगी। इस समय वे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जोधपुर सेंट्रल जेल में हैं। लेकिन आसाराम का 'पुरुषत्व' देखकर तीन डॉक्टरों की टीम ने दांतों तले उंगलियां दबा लीं। आसाराम ने पोटेंसी टेस्ट (पुरुषत्व परीक्षण) के पहले चरण यानी फिजिकल स्टीमुलेशन में ही अपना दमखम साबित कर दिया। आसाराम के पोटेंसी टेस्ट के लिए दवा की जरूरत ही नहीं पड़ी।   
 डॉक्टरों के मुताबिक, 'पहले चरण में शरीर के प्राइवेट पार्ट्स को हाथों से छूकर उनमें किसी हरकत के बारे में पता किया जाता है। आसाराम के प्राइवेट पार्ट्स को मैनुअली छूने पर ही हरकत हुई और इस तरह उन्होंने अपनी पोटेंसी साबित कर दी।' जब तीन डॉक्टरों ने टीम ने पोटेंसी टेस्ट के लिए आसाराम से संपर्क साधा तो उन्होंने टेस्ट करवाने से इनकार कर दिया। हालांकि, बाद में आसाराम ने अपना मन बदल लिया और डॉक्टरों से कहा कि शरीर नश्वर है इसलिए वे जो चाहें इसके साथ कर सकते हैं। जोधपुर के मथुरा दास माथुर अस्पताल के डॉक्टरों को आसाराम का पोटेंसी टेस्ट करने में दो घंटे लगे।   

 पोटेंसी टेस्ट 
 
पोटेंसी टेस्ट उन मामलों में किया जाता है जिनमें यौन उत्पीड़न या रेप के आरोप हों। इस टेस्ट में डॉक्टर यह पता लगाते हैं कि संबंधित शख्स सेक्स करने के काबिल है या नहीं। पोटेंसी टेस्ट के तहत कोर्ट में पेश होने वाली रिपोर्ट में सीमेन एनालिसिस, पेनिस डॉप्लर स्कैन और विजुअल एग्जामिनेशन शामिल होता है। sabhar : bhaskar.com
 

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