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बुधवार, 25 सितंबर 2013

पार्टनर की ज़रूरत कम कर रहे हैं ये 'सेक्स खिलौने', चीन का है इसमें बड़ा हाथ

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पार्टनर की ज़रूरत कम कर रहे हैं ये 'सेक्स खिलौने',  चीन का है इसमें बड़ा हाथ

तेजी से आधुनिक होते समाज में इंसान की प्राकृतिक ज़रूरतें भी टेक्नोलॉजी से अछूती नहीं रह गई हैं। शारीरिक सुख अब पार्टनर्स तक सीमित नहीं है। इंसान ने इसके भी विकल्प तलाश लिए हैं और ये विकल्प है 'सेक्स टॉयज'। उदारवादी देशों में लोगों के बीच 'सेक्स टॉयज' का चलन तेजी से बढ़ रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक स्तर पर 'सेक्स टॉयज' का व्यापार 15 बिलियन डॉलर्स तक पहुंच गया है। इंसानों को काल्पनिक सेक्स सुख पहुंचाने वाले इन खिलौनों के बिजनेस में हर साल 30 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हो रही है।

अमेरिका इन काल्पनिक सुख प्रदान करने वाले खिलौनों का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। यहां तकरीबन हर बड़े कमर्शियल आउटलेट पर 'सेक्स टॉयज' आसानी से मिल जाते हैं। वहीं, भारत और दक्षिण अफ्रीका का मामला कुछ अलग है। भारत में किसी भी तरह के 'सेक्स टॉय' को बेचना आईपीसी की धारा 292 के तहत दण्डनीय है। यहां इन खिलौनों को बेचने पर दो साल की कैद का प्रावधान है। दक्षिण अफ्रीका में भी 'सेक्सुअल ऑफेंसेस एक्ट, 1957' की धारा 18A के तहत अप्राकृतिक सेक्स को बढ़ावा देने वाली किसी भी तरह के उत्पाद को बेचने पर कड़ी पाबंदी है। इनके अलावा भी अधिकतर देशों में इन खिलौनों के इस्तेमाल पर पाबंदी है। हां, ये अलग बात है कि दुनिया भर में चोरी-छुपे इनका इस्तेमाल किया जा रहा है।

'सेक्स टॉयज' के प्रोडक्शन की बात की जाए तो आपको जानकर हैरानी होगी कि वैश्विक बाजार में सप्लाई किए जाने वाले 70 प्रतिशत 'सेक्स टॉयज' का निर्माण चीन में किया जाता है।
पार्टनर की ज़रूरत कम कर रहे हैं ये 'सेक्स खिलौने',  चीन का है इसमें बड़ा हाथ


sabhar : bhaskar.com

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